Friday, 5 May 2017

परिवहन में 2 लाख करोड़ के 34 समझौता

          भारतीय एकीकृत परिवहन एवं लॉजिस्टिक्‍स शिखर सम्‍मेलन में लगभग 2 लाख करोड़ रुपये के 34 समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्‍ताक्षर किये गये।

      नई दिल्‍ली में समाप्‍त इस तीन दिवसीय सम्‍मेलन में जिन एमओयू पर हस्‍ताक्षर किये गये वे अनेक क्षेत्रों से जुड़े हुए हैं। बिहार, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल एवं मणिपुर में बंदरगाह कनेक्टिविटी व एकीकृत चेक पोस्‍ट (आईसीपी), त्रिपुरा, असम एवं मिजोरम में भूमि बंदरगाह तक पहुंच, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, मध्‍य प्रदेश, असम, गुजरात एवं मिजोरम में लॉजि‍स्टिक्‍स पार्कों के विकास, मुम्‍बई, बेंगलुरू व हरियाणा में मल्‍टी मोडल लॉजि‍स्टिक्‍स पार्कों के विकास एवं विस्‍तारीकरण, लॉजि‍स्टिक्‍स क्षेत्र में निवेश अवसरों की तलाश करने, अंतर्देशीय जलमार्गों के तलकर्षण, सागरमाला के अंतर्गत 79 बंदरगाह कनेक्टिविटी परियोजनाओं के क्रियान्‍वयन, चेन्‍नई एवं विशाखापत्तनम पोर्ट तक जाने वाली बंदरगाह सड़कों के विकास और नवी मुम्‍बई में हवाई अड्डे तक कनेक्टिविटी इत्‍यादि के लिए इन एमओयू पर हस्‍ताक्षर किये गये।

          इनमें से कुछ एमओयू सरकारी एजेंसियों के बीच हस्‍ताक्षरित किये गये हैं, जबकि कई एमओयू सरकार एवं कंपनियों के बीच तथा अन्‍य एमओयू विभिन्‍न कंपनियों के बीच हुए हैं। इस शिखर सम्‍मेलन में देश-विदेश के लगभग 3000 प्रतिनिधियों ने भाग लिया जिनमें केन्‍द्र एवं राज्‍यों के सरकारी संगठनों और विश्‍व बैंक एवं एडीबी जैसे अंतर्राष्‍ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि, वैश्विक परिवहन तथा सप्‍लाई चेन विशेषज्ञ और निजी कंपनियों के प्रतिनिधि भी शामिल थे। 

            इस सम्‍मेलन के समापन सत्र में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग और शिपिंग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि यदि हम आर्थि‍क विकास दर को दहाई अंकों में ले जाने के साथ-साथ समाज के सबसे कमजोर तबकों का कल्‍याण भी सुनिश्चित करना चाहते हैं तो देश में लॉजिस्टिक्‍स लागत को घटाकर उसे वैश्विक दरों के बराबर करना अत्‍यंत जरूरी है। मंत्रालय ने इस अवसर पर सोलर टोल प्‍लाजा डिजाइन करने के लिए आयोजित प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्‍कार भी प्रदान किये।

‘जीआई’ टैग बुनकरों व उपभोक्‍ताओं के लिए लाभप्रद

             केन्‍द्रीय वस्‍त्र मंत्री श्रीमती स्‍मृति जुबिन इरानी ने कहा है कि भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग से न केवल बु‍नकरों एवं कारीगरों, बल्कि उपभोक्‍ताओं को भी मदद मिलती है। उन्‍होंने कहा कि जीआई टैग सीधे बु‍नकर-कारीगर से उचित मूल्‍य पर उचित उत्‍पाद की प्राप्ति का आश्‍वासन है। 

          श्रीमती इरानी ने इस बारे में उपभोक्‍ताओं के बीच जागरूकता पैदा करने के महत्‍व पर प्रकाश डाला। श्रीमती इरानी ने ‘जीआई एवं इसके उपरांत पहल के लिए अनूठे वस्‍त्रों एवं हस्‍तशिल्‍प को बढ़ावा देने’ पर आयोजित दो दिवसीय राष्‍ट्रीय कार्यशाला के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए ये बातें कहीं। इस कार्यशाला का आयोजन वस्‍त्र मंत्रालय के तत्‍वाधान में नई दिल्‍ली स्थित कंस्टीट्यूशन क्‍लब ऑफ इंडिया में किया जा रहा है। 

            श्रीमती इरानी ने जीआई पंजीकरण की प्राप्ति के बाद इससे जुड़ी अनेक चुनौतियों के उभर कर सामने आने का उल्‍लेख करते हुए इस बात पर विशेष जोर दिया कि समस्‍त हितधारकों के बीच जीआई की अहमियत की व्‍यापक सराहना किये जाने की जरूरत है, ताकि वैधानिक प्रावधानों पर बेहतर ढंग से अमल हो सके। श्रीमती इरानी ने घोषणा की कि बुनकरों और कारीगरों के लिए सरकार द्वारा संचालित प्रत्‍येक सेवा केन्‍द्र में जल्‍द ही एक जीआई हेल्‍प-डेस्‍क स्‍थापित की जायेगी। 

             उन्‍होंने कहा कि इससे केन्‍द्र एवं क्षेत्रीय कार्यालयों के बीच सूचनाओं का समुचित आदान-प्रदान हो पायेगा और इससे बुनकरों एवं कारीगरों को भौगोलिक संकेतकों का लाभ उठाने में मदद मिलेगी। मंत्री ने कहा कि अधिकतम शासन सुनिश्चित करने के तहत ऐसा किया जा रहा है, जो ‘सबका साथ, सबका विकास’ के सरकारी विकास दर्शन के अनुरूप है। श्रीमती इरानी ने हस्‍तशिल्‍प कारीगरों के लिए एक हेल्‍पलाइन भी लांच की जिसके तहत हेल्‍पलाइन नंबर 1800-2084-800 है। उन्‍होंने कहा कि हथकरघा बुनकरों के लिए शुरू की गई बुनकर मित्र हेल्‍पलाइन के जरिये अब तक 6707 बुनकरों की समस्‍याओं का समाधान हो चुका है।

             उन्‍होंने कहा कि हथकरघा गणना शुरू हो चुकी है और बुनकरों को अगले राष्‍ट्रीय हथकरघा दिवस पर पहचान पत्र दिये जायेंगे। उन्‍होंने यह भी कहा कि सरकार ने 75 फीसदी शुल्‍क सब्सिडी बीपीएल परिवारों के बुनकरों एवं कारीगरों के बच्‍चों को देने का निर्णय लिया है जिससे कि वे एनआईओएस के तहत स्‍कूली शिक्षा और इग्‍नू से विश्‍वविद्यालय की शिक्षा प्राप्‍त कर सकें। मंत्री ने वस्‍त्र मंत्रालय की ओर से भौगोलिक संकेतकों (जीआई) के तहत कवर किये गये भारतीय हस्‍तशिल्‍प एवं हथकरघों का एक संग्रह भी जारी किया, जो एनसीडीपीडी द्वारा संकलित किया गया है। इस संग्रह में अप्रैल 2017 तक जीआई के तहत कवर किये गये समस्‍त 149 भारतीय हस्‍तशिल्‍प एवं हथकरघों की सूची एवं विवरण शामिल हैं।

             इस संग्रह में जीआई टैग वाले हस्‍तशिल्‍प एवं हथकरघा उत्‍पादों के पुरस्‍कार विजेताओं की सूची भी शामिल है। यह अनूठा एवं अपनी तरह का पहला संग्रह है। मंत्री ने वस्‍त्र समिति की वे दो रिपोर्ट भी जारी कीं, जो  आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना और  कर्नाटक के हाथ से बुने हुए परंपरागत उत्‍पादों पर केन्द्रित हैं। उन्‍होंने उन तीन पंजीकृत मालिकों (प्रोपराइटर) को जीआई प्रमाण-पत्र भी सौंपे, जो जामनगरी बांधणी, जामनगर, गुजरात; कुथम्पुल्ली धोतियों एवं सेट मुंडू, केरल; करवथ कटी साडि़यों और फैब्रिक, महाराष्ट्र के उत्‍पादक हैं। वस्‍त्र राज्‍य मंत्री अजय टम्टा ने कहा कि भौगोलिक संकेतकों को और बड़े पैमाने पर अपनाना हस्‍तशिल्‍प एवं हथकरघा क्षेत्रों के लिए काफी लाभप्रद साबित होगा जिससे विशेषकर इनसे जुड़ी समृद्ध सांस्‍कृतिक विरासत के संरक्षण में मदद मिलेगी। 

          वस्‍त्र सचिव श्रीमती रश्मि वर्मा के अलावा क्राफ्ट रिवाइवल ट्रस्ट की अध्‍यक्ष सुश्री रितु सेठी एवं अन्‍य गणमान्‍य व्‍यक्ति और विभिन्‍न राज्‍यों एवं देश के विभिन्‍न क्षेत्रों के सैकड़ों हस्‍तशिल्‍प कारीगर भी इस कार्यशाला में उपस्थित थे।

बाल सुविधा संस्‍थानों के लिए ऑनलाइन पंजीकरण सुविधा

           महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती मेनका संजय गांधी ने यहां बाल सुविधा संस्‍थानों के लिए ऑनलाइन पंजीकरण सुविधा का शुभारंभ किया। 

           इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास राज्‍य मंत्री श्रीमती कृष्‍णा राज, महिला एवं बाल विकास सचिव सुश्री लीना नायर और मंत्रालय, सीएआरए तथा चाइल्‍ड लाइन के वरिष्‍ठ अधिकारी एवं प्रतिनिधि उपस्‍थित थे। श्रीमती मेनका संजय गांधी ने कहा कि बाल सुविधा संस्‍थान (सीसीआई) के लिए ऑनलाइन पंजीकरण सुशासन का एक बहुत महत्‍वपूर्ण अंग है।

             उन्‍होंने कहा कि अब सीसीआई के लिए अपने पंजीकरण में सुविधा हो जाएगी। श्रीमती गांधी ने कहा कि ऑनलाइन पंजीकरण से एक केंद्रीय प्रणाली उपलब्‍ध होगी जहां देश में सीसीआई के बारे में सूचना प्राप्‍त हो सकेगी। इससे पता चलेगा कि प्रत्‍येक सीसीआई में कितने बच्‍चे हैं और कितने गोद लेने के लिए उपलब्‍ध हैं। 

            महिला एवं बाल विकास राज्‍य मंत्री श्रीमती कृष्‍णा राज ने कहा कि नई ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया से प्रणाली में पारदर्शिता आएगी तथा बच्‍चों की सुरक्षा और देखभाल संभव होगी। महिला एवं बाल विकास सचिव सुश्री लीना नायर ने कहा कि नई सुविधा को इसलिए तैयार किया गया है ताकि सभी बाल सुविधा संस्‍थानों के लिए पंजीकरण संबंधी एकीकृत प्रणाली बनाई जा सके। वर्तमान में सीसीआई के लिए दस्‍ती पंजीकरण प्रणाली मौजूद है, जिसका सभी राज्‍य और केंद्रशासित प्रदेश पालन करते हैं।

           इसके कारण सीसीआई की संख्‍या के बारे में कोई राष्‍ट्रीय डाटा बेस मौजूद नहीं है, इसके अलावा पारदर्शिता का भी अभाव है तथा सीसीआई की गतिविधियों की निगरानी करना कठिन है। प्रस्‍तावित ऑनलाइन पंजीकरण प्रणाली से इस काम में आसानी हो जाएगी।

उज्‍ज्‍वला के 2.20 करोड़ एलपीजी कनेक्‍शन जारी

           पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) धर्मेन्‍द्र प्रधान ने यहां पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की एक प्रमुख स्कीम प्रधानमंत्री उज्‍ज्‍वला योजना (पीएमयूवाई) के बारे में मीडिया को विस्‍तृत जानकारी दी। 

          प्रधान ने कहा कि प्रधानमंत्री उज्‍ज्‍वला योजना ने नये एलपीजी कनेक्‍शन मुहैया कराने के मामले में वित्त वर्ष 2016-17 के लिए तय लक्ष्‍यों को पार कर लि‍या है। उन्‍होंने कहा कि गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) जीवन यापन कर रहे परिवारों के लिए इस योजना को लांच करने के प्रथम वर्ष में 2.20 करोड़ से ज्‍यादा एलपीजी कनेक्‍शन दिये गये हैं। एसईसीसी 2011 के डेटा से यह जानकारी उभर कर सामने आई है। 

          यह वित्त वर्ष के लिए तय 1.5 करोड़ कनेक्‍शनों के लक्ष्‍य से अधिक है। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने 1 मई, 2016 को उत्‍तर प्रदेश के बलिया में प्रधानमंत्री उज्‍ज्‍वला योजना का शुभारंभ किया था। वित्त वर्ष 2016-17 में तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) ने देश भर में 3.25 करोड़ नये कनेक्‍शन दिये हैं। यह किसी भी वर्ष में अब तक जारी किये गये सर्वाधिक कनेक्‍शन हैं। 

           उन्‍होंने कहा कि आज सक्रिय एलपीजी उपभोक्‍ताओं की कुल संख्‍या 20 करोड़ के पार चली गई है। यह वर्ष 2014 में आंके गये 14 करोड़ सक्रिय एलपीजी उपभोक्‍ताओं की तुलना में काफी अधिक है। प्रधान ने कहा कि देश में एलपीजी की मांग में 10 फीसदी से ज्‍यादा की वृद्धि दर्ज की गई है। पिछले तीन वर्षों में 4600 से ज्‍यादा नये वितरक बने हैं, जो मुख्‍य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों से वास्‍ता रखते हैं। प्रधानमंत्री उज्‍ज्‍वला योजना के क्रियान्‍वयन से जुड़ी मुख्‍य बातों का उल्‍लेख करते हुए प्रधान ने कहा कि 50 फीसदी नये उपभोक्‍ता रिफिल के लिए वापस आ चुके हैं। इस योजना के लगभग 38 फीसदी लाभार्थी एससी-एसटी श्रेणी के हैं। 

           उन्‍होंने कहा कि प्रधानमंत्री उज्‍ज्‍वला योजना को भागीदारी मोड में क्रियान्वित किया गया है जिनमें लाभार्थी, निर्वाचित प्रतिनिधि, प्रतिष्‍ठि‍त हस्तियां, स्‍थानीय प्रशासन इत्‍यादि शामिल हैं। इस योजना को लोकप्रिय बनाने और लाभार्थियों को सुरक्षा मानकों के बारे में जागरूक करने के लिए क्षेत्रीय भाषाओं में प्रचार-प्रसार की विशेष संचार रणनीति पर अमल किया गया। इसमें संचार के समस्‍त माध्‍यमों का इस्‍तेमाल किया गया और इस योजना के क्रियान्‍वयन की निगरानी की भी व्‍यवस्‍था की गई है। प्रधान ने कहा कि प्रधानमंत्री उज्‍ज्‍वला योजना ने एक सामाजिक आंदोलन का रूप ले लिया है और बड़ी संख्‍या में लाभार्थी अपने यहां एलपीजी सिलेंडर की सुविधा सुनिश्चित करने के लिए आवेदन कर रहे हैं। 

           प्रधान ने सुरक्षा एवं एलपीजी के सुरक्षित उपयोग पर विशेष जोर दिया। उन्‍होंने कहा कि प्रधानमंत्री उज्‍ज्‍वला योजना के समस्‍त लाभार्थियों के घरों में मैकेनिक के जरिए एलपीजी सिलेंडर लगवाने जैसे उपाय किये जा रहे हैं, ताकि लाभार्थियों को एलपीजी के सुरक्षित एवं समुचित उपयोग के बारे में सही ढंग से बताया जा सके। इसी तरह प्रधानमंत्री उज्‍ज्‍वला योजना के लाभार्थियों के लिए देश भर में नियमित रूप से सुरक्षा क्लिनिक-शिविर आयोजित किये जा रहे हैं, जिससे कि उन्‍हें एलपीजी के सुरक्षित उपयोग के बारे में अवगत कराया जा सके। मंत्री ने यह कहते हुए अपने संबोधन का समापन किया, ‘महिलाओं को मिला सम्‍मान, यही है उज्‍ज्वला की पहचान।’  

खतरनाक व्यक्तियों की नो-फ्लाय सूची बनाई जाएगी

      नागरिक उड्डयन मंत्री अशोक गजपति राजू और राज्य मंत्री जयंत सिंह ने बुरा व्यवहार करने वाले यात्रियों से निपटने के तरीको के मुद्दे को लेकर मीडिया को संबोधित किया।

         उन्होंने बताया कि यात्रियों, क्रू व विमान की सुरक्षा के लिए बुरा व्यवहार करने वाले यात्रियों से निपटने के तरीके पर सिविल एविएशन रिक्वायरमेंट (सीएआर) संशोधित किया जा रहा है। प्रेस सम्मेलन के दौरान नागरिक उड्डयन सचिव आर. एन. चौबे ने सीएआर मसौदे की जानकारी दी। प्रस्तावित सीएआर की मुख्य विशेषताएं, बुरे व्यवहार को तीन श्रेणियों में परिभाषित किया गया है, पहले स्तर के तहत बुरे बर्ताव से बाधा डालने वाले व्यवहार को रखा गया है, दूसरे स्तर में शारीरिक रूप से अपमानजनक व्यवहार रखा गया है और तीसरे स्तर में जान को खतरे में डालने वाला व्यवहार रखा गया है। 

          विमान कंपनियां इस तरह के यात्रियों का एक डाटाबेस तैयार करेंगी जिससे बुरा व्यवहार करने वाले यात्रियों की एक राष्ट्रीय नो-फ्लाय सूची बनाई जाएगी। एमएचए द्वारा चिन्हित राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरनाक व्यक्तियों को भी राष्ट्रीय नो-फ्लाय सूची में डाला जाएगा। विमान कंपनियां व्यक्तियों को उनके नाम व राष्ट्रीय नो-फ्याय सूची में उनका नाम डाले जाने की वजह भी भेजेगी। विमान कंपनियों के पास यह विकल्प होगा कि वह नो-फ्लाय सूची में शामिल बुरा बर्ताव करने वाले व्यक्तियों को भारत से-भारत के भीतर-भारत के लिए विमान यात्रा करने से प्रतिबंधित कर सकती है।

           प्रतिबंध की अवधि तीन माह से लेकर अधिकत दो साल तक हो सकती है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि बुरा व्यवहार किस स्तर के तहत आता है। प्रत्येक बाद के अपराध के लिए व्यक्ति को पिछली प्रतिबंध की अवधि से दोगुना अवधि के लिए प्रतिबंधित किया जाएगा। ऐसे मामलों में शिकायत निपटाने के लिए दो स्तरीय तंत्र का प्रावधान किया गया है, एक सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अगुवाई वाली आंतरिक समिति की तरफ से एयरलाइंस के स्तर पर प्रारंभिक जांच।

        अपील दाखिल करने पर नागरिक उड्डयन मंत्रालय के तत्वावधान में उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में समिति का गठन किया जायेगा। सचिव ने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय विमानन कंपनियों समेत अन्य विमानन कंपनियों को नो फ्लाय सूची पर विचार करने का अधिकार होगा। वह चाहे तो व्यक्ति या समूह के प्रतिबंध की अवधि को बढ़ा भी सकती है। हालांकि नो-फ्लाय सूची में शामिल सुरक्षा एजेंसियों द्वारा चिन्हित व्यक्तियों को अपील करने का अधिकार नहीं होगा।

कुछ वर्षों में एयर कार्गो में 9 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी

            भारतीय एकीकृत परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स शिखर सम्मेलन 2017 में अपने महत्वपूर्ण संबोधन में केंद्रीय नागर विमानन मंत्री अशोक गजपति राजू ने कहा कि देश में घरेलू हवाई यातायात और बुनियादी ढांचे में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। 

          उन्होंने कहा कि उनका मंत्रालय क्षेत्रीय जुड़ाव योजनाओं के माध्यम से आम आदमी को सस्ती हवाई यात्रा सुलभ कराने के लिए कदम उठा रहा है। अगले कुछ वर्षों में एयर कार्गो के 9 प्रतिशत बढ़ने की संभावना है और लॉजिस्टिक पार्क इस विकास में मदद करेंगे। शिखर सम्मेलन के पूर्ण सत्र में नागर विमानन सचिव आर एन चौबे ने बताया कि एयर कार्गो का मात्रा के मामले में वैश्विक और घरेलू स्तर पर सिर्फ एक प्रतिशत हिस्सा है, लेकिन मूल्य के मामले में लगभग 25 प्रतिशत कार्गो बहुमूल्य, खराब होने वाला और संवेदनशील मामला है। 

          उन्होंने कहा कि कुछ वर्षों में आम ढांचा तैयार किया जाएगा, ताकि माल ढुलाई, एयरलाइन सुरक्षा और साथ ही एक प्रणाली के तहत सुरक्षा प्राप्त हो सके। उन्होंने कहा कि नागर विमानन मंत्रालय देश में परिवहन और लॉजिस्टिक में सुधार लाने के लिए सभी कदम उठा रहा है और इसलिए इस शिखर सम्मेलन से काफी उम्मीदें हैं।

भारत में 2.25 करोड़ नेपाली

           ‘नेपाली संस्‍कृति परिषद’ के प्रतिनिधित्‍व एवं इसके अध्‍यक्ष अशोक चौरासिया की अगुवाई वाले नेपाली समुदाय के प्रतिनिधिमंडल ने यहां केन्‍द्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार), पीएमओ, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्‍य मंत्री डॉ. जितेन्‍द्र सिंह से भेंट की और इस समुदाय से जुड़े कुछ मसलों को सुलझाने के लिए उनसे हस्‍तक्षेप करने का अनुरोध किया। 

            प्रतिनिधिमंडल के सदस्‍यों ने डॉ. जितेन्‍द्र सिंह को जानकारी दी कि सिर्फ दिल्‍ली-एनसीआर में ही नेपाल समुदाय की आबादी लगभग 35 लाख है, जबकि पूरे भारत में इसकी आबादी 2.25 करोड़ से भी ज्‍यादा है। इनमें से लगभग 1 करोड़ लोग अनिवासी हैं, जो भारत में कार्यरत हैं। उन्‍होंने कहा कि यह संख्‍या निश्चित रूप से काफी अधिक है क्‍योंकि नेपाल की कुल आबादी लगभग 3.5 करोड़ है जिसमें अनेक गैर-नेपाली निवासी भी शामिल हैं।

              चौरासिया के अनुसार नेपाली समुदाय ने सदा ही मुख्‍यधारा से जुड़ी गतिविधियों में काफी उत्‍साह के साथ भाग लिया है। प्रतिनि‍धिमंडल के सदस्‍यों ने नेपाली भाषा में आकाशवाणी के समाचार बुलेटिन के प्रसारण से जुड़े दस्‍तावेज भी मंत्री को पेश किये। 

           डॉ. जितेन्‍द्र सिंह ने इस प्रति‍निधिमंडल के सदस्‍यों की बातों को बड़े ध्‍यानपूर्वक सुना। सिंह ने कहा कि भारत के सामाजिक एवं सांस्‍कृतिक परिदृश्‍य में इस समुदाय के उल्‍लेखनीय योगदान पर राष्‍ट्र को गर्व है। उन्‍होंने कहा कि नेपाली समुदाय के सदस्‍यों ने भारतीय सेना और अर्द्धसैनिक बलों में बहुमूल्‍य योगदान दिया है।

भारत में 79.4 मिलियन हेक्टेयर वन क्षेत्र

           राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने उत्तराखंड के देहरादून में इन्दिरा गांधी राष्‍ट्रीय वन अकादमी के वार्षिक दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। 

       इस अवसर राष्ट्रपति ने कहा, भारत में वन क्षेत्र के रूप में नामित 79.4 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र है। यह देश का लगभग 19.32ऽ है। वर्ष 1952 की वन नीति के मुताबिक देश में उपलब्ध कुल भूमि का एक-तिहाई हिस्सा वन क्षेत्र का होना चाहिए। ऐसे में साफ देखा जा सकता है कि अभी करीब 15 प्रतिशत का अंतर है जिसे भरा जाना है। वास्तव में 1966 में भारतीय वन सेवा की स्थापना के पीछे 33ऽ वनक्षेत्र को प्राप्त करने लक्ष्य भी था। और अब समय आ गया है कि इस दिशा में ठोस उपाय सुनिश्चित जाएं। 

              राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय वन सेवा के पास सिर्फ देश में क्षेत्र की सेवा करने की ही जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि जैव विविधता के संरक्षण व वन आवरण को बढ़ाने एवं वन आधारित आजीविका को प्रोत्साहित करने के अलावा जलवायु परिवर्तन के कारणों को भी खत्म करने का दायित्व है। यह निश्चित तौर पर संतुष्टि की बात है कि ई-सर्विलांस व जीआईएस एप्लीकेशन जैसे तकनीकों व अधिकारियों के परिश्रम की बदौलत देश का वन आवरण ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक 1987 के 64.2 मिलियन हेक्टेयर से बढ़कर 79.4 मिलियन हेक्टेयर हो गया है। 

           यह अपने आप में शानदार उपलब्धि है लेकिन अभी काफी कुछ हासिल किया जाना बाकी है। इस मौके पर कई गणमान्य मौजूद थे जिनमें उत्तराखंड के राज्यपाल डॉ. कृष्ण कांत पॉल, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत, पर्यावरण वन तथा जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अनिल माधव दवे शामिल हैं।

कमजोर तब‍कों का कल्‍याण सरकार का प्रमुख लक्ष्‍य

            सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने नई दिल्‍ली में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा आयोजित तीन दिवसीय भारतीय एकीकृत परिवहन एवं लॉजिस्टिक्‍स शिखर सम्‍मेलन (आईआईटीएलएस) का उद्घाटन किया। 

       इस अवसर पर उन्‍होंने कहा कि ‘अंत्‍योदय’ अथवा समाज के सबसे कमजोर तब‍कों का कल्‍याण इस सरकार का प्रमुख लक्ष्‍य है। इस लक्ष्‍य की प्राप्ति के लिए यह जरूरी है कि देश में आर्थिक विकास की रफ्तार बढ़ाई जाए। उन्‍होंने कहा कि मौजूदा समय में जीडीपी (सकल घरेलू उत्‍पाद) वृद्धि दर लगभग 7.5 प्रतिशत है जिसे बढ़ाकर दो अंकों में ले जाने की जरूरत है। गडकरी ने कहा कि भारत में तेज विकास की राह में ऊंची लॉजिस्टिक्‍स लागत एक बड़ी बाधा है। यदि देश की अर्थव्‍यवस्‍था को प्रगति करनी है और हम यह चाहते हैं कि देश में निरंतर एवं संतुलित विकास हो, तो हमें निश्‍चित तौर पर लॉजिस्टिक्‍स लागत को घटाकर इसे वैश्विक दरों के बराबर करना होगा।

            मंत्री ने यह भी कहा कि हमारे देश में लॉजिस्टिक लागत इसलिए ज्‍यादा है क्‍योंकि परिवहन के विभिन्‍न साधनों का विकास गैर-एकीकृत ढंग से हो रहा है। उन्‍होंने कहा कि एकीकृत, मल्‍टी मोडल परिवहन व्‍यवस्‍था से परिवहन का एक समुचित संयोजन सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी जो दक्ष, तेज, सुरक्षित, आयात का विकल्‍प, किफायती एवं प्रदूषण मुक्‍त होगा। भारतीय एकीकृत परिवहन एवं लॉजिस्टिक्‍स शिखर सम्‍मेलन (आईआईटीएलएस) के आयोजन का उद्देश्‍य विभिन्‍न हितधारकों के बीच रचनात्‍मक संवाद सुनिश्चित करना है ताकि देश में मल्‍टी मोडल बुनियादी ढांचे का विकास हो सके। 

           पहली बार सड़क‍ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, शिपिंग, नागरिक विमानन, रेलवे, उपभोक्‍ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण, कौशल विकास, वाणिज्‍य, शहरी विकास, वित्‍त मंत्रालय, विभिन्‍न राज्‍य सरकारें, औद्योगिक और बुनियादी ढांचागत विशेषज्ञ भारत में लॉजिस्टिक्‍स एवं परिवहन परिदृश्‍य में बदलाव लाने के उद्देश्‍य से संबंधित विभिन्‍न मुद्दों पर विचार-विमर्श करने के लिए एकजुट हुए हैं। 

            नागरिक विमानन मंत्री पी अशोक गजपति राजू ने कहा कि भारत में पिछले दो -तीन वर्षों के दौरान हवाई यातायात एवं बुनियादी ढांचे में उल्‍लेखनीय वृद्धि हुई है। उपभोक्‍ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री रामविलास पासवान ने कहा कि कृषि उपज की खरीद, भंडारण एवं वितरण के लिए समुचित लॉजिस्टिक प्रणाली की आवश्‍यकता है ताकि अनाज एवं खराब होने वाली अन्‍य वस्‍तुओं को बर्बाद होने से बचाया जा सके एवं उसे बाजार में समय पर पहुंचाया जा सके। 

           रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने एकीकृत परिवहन एवं लॉजिस्टिक प्रणाली के विकास के लिए किये जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि सभी परिवहन प्रणालियों को एकीकृत करने की आवश्‍यकता है। कौशल विकास मंत्री राजीव प्रताप रूडी ने कहा कि बुनियादी ढांचे एवं लॉजिस्टिक के विकास के लिए श्रम बल के कौशल को भी बढ़ाने की जरूरत है।