Thursday, 31 August 2017

प्रसंस्‍करण केंद्र सुनिश्‍चित करेगा कि प्‍याज बर्वाद न हो

       केंद्रीय खाद्य प्रसंस्‍करण उद्योग मंत्री श्रीमती हरसिमरत कौर बादल ने यहां वीडियो कांफ्रेंसिग के जरिए तमिलनाडु के पेरंबलुर जिले के चेट्टीकुलम गांव में छोटे प्‍याजों (शालोट्स) के लिए साझा खाद्य प्रसंस्करण इनक्यूबेशन केंद्र का शुभारंभ किया।

   इस अवसर पर श्रीमती हरसिमरन कौर बादल ने कहा कि यह तमिलनाडु और खासकर चेट्टीकुलम गांव के लिए ऐतिहासिक अवसर है। उन्‍होंने 2022 तक किसानों के आय को दुगुना करने के लक्ष्‍य के प्रति इंडियन इंस्‍टीट्यूट ऑफ फूड प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी (आईआईएफपीटी, तंजावुर) के पहलों की सराहना की।
   उन्‍होंने कहा कि पेरंबलूर जिले के किसान कृषि लागत में वृद्धि, अप्रत्याशित मौसम, बीमारी फैलने और बाजार में पर्याप्त कीमत नहीं मिलने के बावजूद 8,000 हेक्‍टेयर के कृषि क्षेत्र में प्रति वर्ष 70,000 टन छोटे प्‍याजों का उत्‍पादन करते हैं। पेरंबलूर का यह छोटे प्‍याजों के लिए केंद्रीय प्रसंस्‍करण केंद्र सुनिश्‍चित करेगा कि प्‍याज बर्वाद न हो, किसानों की आमदनी में वृद्धि हो और उपभोक्‍ताओं को छोटे प्‍याज उपलब्‍ध हों। छोटे प्‍याजों की यह तकनीक भारत के सभी भागों के लिए उपयोगी है।
    इंडियन इंस्‍टीट्यूट ऑफ फूड प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी के निदेशक सी. आनंदधर्माकृष्‍णन ने कहा कि उनके संस्‍थान ने प्रति वर्ष एक फसल के प्रसंस्‍करण की तकनीक तथा फसल के लिए संबंधित आधारभूत संरचना विकसित करने का निश्‍चय किया है। इस संबंध में पिछले वर्ष मिशन बनाना (केला) को लागू किया गया और इस वर्ष मिशन अनियन को लागू किया जा रहा है। 
      पेरंबलुर जिले के चेट्टीकुलम गांव में छोटे प्‍याजों (शालोट्स) के लिए साझा खाद्य प्रसंस्करण इनक्यूबेशन केंद्र भी मिशन अनियन अभियान का एक हिस्‍सा है, जो क्षेत्र के प्‍याज उत्‍पादकों का जीवन बेहतर करेगा। मूल्‍य संवर्द्धन के माध्‍यम से यह केंद्र किसानों के आय को दुगुना करने में सहायता प्रदान करेगा। यह केंद्र छोटे प्‍याजों का प्रसंस्‍करण करेगा और चार प्रकार के उत्‍पाद तैयार करेगा- ताजे छोटे प्‍याज, छिलका उतारे हुए छोटे प्‍याज, प्‍याज पाउडर, प्‍याज पेस्‍ट, प्‍याज के बारीक कतरन। 
    उन्‍होंने बताया कि आईआईएफपीटी मिशन कोकोनट पर कार्य कर रहा है, जिसका शुभारंभ अगले वर्ष विश्‍व नारियल दिवस (2 सितंबर, 2018) के अवसर पर किया जाएगा। पेरंबलुर जिला छोटे प्‍याजों के उत्‍पादन का केंद्र है यहां प्रतिवर्ष 8,000 हेक्‍टेयर में छोटे प्‍याज की खेती की जाती है और उत्‍पादन लगभग 70,000 टन प्रतिवर्ष है। किसानों ने भारी घाटे की शिकायत की। इसका कारण संभवत: पारंपरिक रूप से रख-रखाव किया जाना और भंडारण है।
    इस क्षेत्र के सभी साझेदारों ने कहा कि बर्वादी को रोकने के लिए तकनीकी समाधान आवश्‍यक है। इस संबंध में किसान उत्‍पादक यूनियन की भी शुरूआत हुई जो इस पहल में हिस्‍सा लेगा। आईआईएफपीटी ने तीन मशीनें विकसित की हैं। 
     रख-रखाव व भंडारण से छोटे प्‍याज 15 दिनों तक उपयोग के लायक रह सकते हैं,लेकिन मूल्‍यवर्द्धन से प्‍याज पाउडर 6 महीनों तक, प्‍याज पेस्‍ट 5 महीनों तक, छिलका उतारे हुए तथा वैक्‍यूम पैकिंग किए हुए प्‍याज 1 महीने तक तथा प्‍याज की बारीक कतरनें 6 महीने तक उपयोग की जा सकती हैं। इस प्रकार यह प्‍याज की सेल्‍फ लाइफ बढ़ाता है और किसानों को भी अपनी फसल के लिए बेहतर कीमत मिलती है।

वैश्विक अभिशाप : हवाला हो या हथियारों व ड्रग्स से संबंधित मनी हो

       स्विस कॉन्फ़ेडरेशन के राष्ट्राध्यक्ष की भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि भारत आपके लिए नया नहीं है, आप पहले भी कई बार भारत की यात्रा कर चुकी हैं। परन्तु राष्ट्रपति के रूप में आपकी ये यात्रा ऐसे समय पर हो रही है जब हम भारत की स्वतंत्रता के 70 वर्ष पूरे होने का उत्सव मना रहे हैं। सात दशक पूरे होने का भी समय है। 

   प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि आपकी इस यात्रा से आपको उसी गर्मजोशी, और आतिथ्य का अनुभव होगा जो हमें 2016 में अपनी स्विटजरलैंड यात्रा के दौरान मिला था। मुझे ये देखकर हार्दिक प्रसन्नता होती है कि दोनों ही पक्षों की इच्छा सभी स्तरों पर घनिष्ठ संबंध बनाए रखने की है।
     प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि आज हमने दिव्पक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक विषयों पर व्यापक और सार्थक चर्चा की है। इस यात्रा से, हमारे मजबूत द्विपक्षीय संबंध और आगे बढ़े हैं। भौगोलिक प्रसार और निरस्त्रीकरण जैसे विषय भारत और स्विटजरलैंड दोनों के लिए ही बहुत महत्वपूर्ण हैं। यह बहुत ही स्वागत योग्य कदम है।
       प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि आज दुनिया के सामने चिंता का एक गहन विषय है। चाहे वह हवाला हो या हथियारों और ड्रग्स से संबंधित मनी हो। इस वैश्विक अभिशाप से निपटने के लिए स्विट्जरलैंड के साथ हमारा सहयोग जारी है। आर्थिक संबंधों का एक महत्वपूर्ण आधार है और भारत निवेशकों का विशेष रूप से स्वागत करता है। 
   प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि इस संदर्भ में, हम एक नई द्विपक्षीय निवेश संधि पर बातचीत जारी रखने की आवश्यकता पर सहमत हुए हैं।भारत की वृद्धि और विकास में सहभागी बनने के लिए स्विट्जरलैंड की कंपनियों के पास अनेक अवसर हैं। आज दोनों देशों के साथ हमारी बातचीत के दौरान हमने ये महसूस किया कि उनमें, परस्पर लाभ के लिए लगातार बढ़ाते रहने की पुरजोर इच्छा है। 
     प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि भारतीय पारंपरिक औषधियां, विशेषकर आयुर्वेद को बढ़ावा देने में बड़ी भूमिका निभा सकती है। मुझे खुशी है कि स्विट्जरलैंड ने आयुर्वेद को मान्यता दी है तथा इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में और अधिक सहयोग के लिए उत्सुक है।
      प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि हम पेरिस समझौते को लागू करने की जरूरत पर और इसके कार्यान्यवन के तौर-तरीके विकसित करने के लिए साथ मिलकर काम करने पर सहमत हुए।भारत को अपनी बढ़ती हुई जरूरतों को पूरा करने के लिए सदस्यता से मदद मिलेगी।

राजीव गौबा ने केंद्रीय गृह सचिव का कार्यभार ग्रहण किया

      भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी राजीव गौबा (झारखंड कैडर-1982) ने केंद्रीय गृह सचिव का कार्यभार ग्रहण किया।

      गौबा 27 जून 2017 को गृह मंत्रालय में विशेष कार्याधिकारी के रूप में शामिल हुए थे। राजीव महर्षि की सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने केंद्रीय गृह सचिव का कार्यभार संभाला है।
     इससे पूर्व गौबा केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय में सचिव के पद पर कार्यरत थे। गौबा को केंद्र, राज्य सरकार और अंतर्राष्ट्रीय संगठनो में कई वरिष्ठ पद पर कार्य करने का विस्तृत अनुभव है। 
       राजीव गौबा का जन्म वर्ष 1959 में पंजाब में हुआ था और वे भौतिक विज्ञान में स्नातक हैं। गौबा झारखंड के मुख्य सचिव के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। इससे पहले गौबा गृह, रक्षा, पर्यावरण और वन एवं इलेक्ट्रानिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में भी कार्य कर चुक हैं। 
        गौबा अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के बोर्ड में भारत के प्रतिनिधि के रूप में 4 वर्ष तक कार्यरत रहे हैं।

प्रधानमंत्री का अतिरिक्त सचिवों एवं संयुक्त सचिवों के साथ चौथा संवाद

         प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने भारत सरकार में कार्यरत 80 अतिरिक्‍त सचिवों और संयुक्त सचिवों के समूह से मुलाकात एवं बातचीत की।

    इस तरह की पांच संवाद श्रृंखला में यह चौथा संवाद था। संवाद के दौरान अधिकारियों ने गवर्नेंस, स्वास्थ्य देखभाल, स्वास्थ्य शिक्षा, कृषि, जल संसाधन, ई–गवर्नेंस, कर प्रशासन और जीएसटी, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, शिकायत निवारण और बाल अधिकारों जैसे विषयों पर अपने अनुभव साझा किए। 
      प्रधानमंत्री ने गवर्नेंस की प्रक्रिया में सुधार करने की दिशा में अधिकारियों से काम करने का अनुरोध किया उन्होंने कहा कि टीम भावना को विकसित करने के लिए मानवीय स्पर्श अनिवार्य होता है जो कि सामूहिक परिणाम दे सकता है।
     भारत के पक्ष में वर्तमान सकारात्मक वैश्विक परिदृश्य पर बात करते हुए, प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को वर्ष 2022 तक न्यू इंडिया के निर्माण की दिशा में स्पष्ट उद्देश्यों के साथ कार्य करने को कहा।

Wednesday, 30 August 2017

सस्‍ता डीजल एसयूवी व कारों के लिए नहीं

       पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्‍य मंत्री धर्मेन्‍द्र प्रधान ने कहा है कि पेट्रोल और डीजल जैसे पेट्रोलियम उत्‍पादों पर कर शुल्‍क लागू करने का भारत का लंबा इतिहास रहा है। कीमतों में वृद्धि से घरेलू उपभोक्‍ताओं को बचाने अथवा विकास परियोजनाओं के लिए सरकार के राजस्‍व में वृद्धि के लिए इन करों शुल्‍कों को समय-समय पर युक्ति संगत बनाया गया है।

       प्रधान यहां डीजल और पेट्रोल के मूल्‍यों के बीच भिन्‍नता विषय पर एक कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। डीजल और पेट्रोल के मूल्‍यों के बीच भिन्‍नता के बारे में डॉक्‍टर कीरीट पारिख की अध्‍यक्षता में विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों को उजागर करते हुए प्रधान ने कहा कि करों शुल्‍कों के अलावा अन्‍य कारकों जैसे प्रौद्योगिकी, विध्‍वंसकारक प्रौद्योगिकी, नवीकरणीय ऊर्जा के प्रभाव आदि पर भी गौर किया जाना चाहिए। 
     उन्‍होंने कहा कि एक बार जब पेट्रोलियम उत्‍पाद जीएसटी के दायरे में आ जाएंगे, कर की दरों में अंतर का मुद्दा अपने आप ही हल हो जाएगा। पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि डीजल का इस्‍तेमाल कृषि संबंधी कार्यों और सार्वजनिक परिवहन के लिए होता है। यही कारण है कि डीजल पर करों शुल्‍कों को पेट्रोल की तुलना में कम रखा गया है।
       उन्‍होंने जोर देकर कहा कि सस्‍ता डीजल एसयूवी और कारों के लिए नहीं है। उत्‍सर्जन की चिंताओं के मद्देनजर धर्मेन्‍द्र प्रधान ने कहा कि भारत स्‍टेज ज्क्ष् (बीएस ज्क्ष्) अप्रैल 2020 में शुरू किया जाएगा। ये सीएनजी की तरह स्‍वच्‍छ होगा। 
      उन्‍होंने कहा कि 30 हजार करोड़ रूपये के निवेश से बीएस ज्क्ष् उत्‍पादन के लिए रिफाइनरियों का उन्‍नयन किया जा रहा है। पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि जून 2017 से मोटर स्पिरिट (एमएस) और उच्‍च गति के डीजल (एचएसडी) के दैनिक मूल्‍यों के शुरू होने के बाद अंतर्राष्‍ट्रीय मूल्‍यों के साथ बेहतर तालमेल बना है। 
      तेल उद्योग का संचालन प्रबंधन बेहतर हुआ है। इस अवसर पर उन्‍होंने एक पुस्‍तक ए केस फॉर रेशनलाइज ऑफ द सेन्‍ट्रल एक्‍साइस ड्यूटी का भी विमोचन किया। कार्यशाला का आयोजन एकीकृत अनुसंधान और विकास के लिए कार्य (आईआरएडीए) ने किया था।

8.79 लाख करोड़ के निवेश वाली 183 परियोजनाओं की समीक्षा

     प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में अति सक्रिय सुशासन और समय पर कार्यान्‍वयन के लिए प्रगति आईसीटी आधारित मल्‍टी मॉडल प्‍लेट फार्म के माध्‍यम से 21वीं इन्‍टर-एक्‍शन बैठक हुई। प्रगति की 21वीं बैठक में 8.79 लाख करोड़ रूपये के कुल निवेश वाली 183 परियोजनाओं की संचयी समीक्षा की गई। 17 क्षेत्रों में जन शिकायतों की भी समीक्षा की गई।

   प्रधानमंत्री ने पेटेंट और ट्रेडमार्कों से संबंधित शिकायतों पर कार्रवाई और समाधान की प्रगति की समीक्षा की। उन्‍होंने कार्य निष्‍पादन के सुधार पाया और संबंधित अधिकारियों से कहा कि वे पेटेंट और ट्रेडमार्क आवेदन पत्रों पर और तेजी से कार्यवाही करने की दिशा में काम करें। अधिकारियों ने स्‍पष्‍ट किया कि पेटेंट और ट्रेडमार्क प्रदान करने और जनशक्ति बढ़ाने की दिशा में तेजी से कदम उठाए गये हैं। 
       प्रधानमंत्री ने इस संबंध में नवीनतम उपलब्‍ध प्रौद्योगिकी के इस्‍तेमाल, प्रक्रिया को सुचारू बनाने और अन्‍तर्राष्‍ट्रीय मानक प्राप्‍त करने के महत्‍व पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने उत्‍तर प्रदेश, मध्‍य प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, राजस्‍थान, महाराष्‍ट्र, उत्‍तराखंड, पंजाब, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, बिहार, ओडिशा, तेलंगाना और केरल सहित अनेक राज्‍यों में फेली रेलवे, सड़क, विद्युत और तेल पाइपलाइन तथा स्‍वास्‍थ्‍य क्षेत्र में 56 हजार करोड़ रूपये से ज्‍यादा लागत की नौ महत्‍वपूर्ण आधारभूत परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की।
      आज जिन परियाजनाओं की समीक्षा की गई उनमें दिल्‍ली, मुंबई औद्योगिक कारिडोर आंध्र प्रदेश के मंगलागिरी, पश्चिम बंगाल के कल्‍याणी, महाराष्‍ट्र के नागपुर और उत्‍तर प्रदेश के चार नये एम्‍स के निर्माण शामिल हैं। प्रधानमंत्री ने स्‍मार्ट सिटी मिशन की प्रगति की भी समीक्षा की। उन्‍होंने चुनौती भरे कार्यों में शहरों की सहभागिता को सराहा। 
     उन्‍होंने कहा कि अब प्रत्‍येक के सामने यही चुनौती है कि 90 चुने हुए शहरों में इस मिशन के कार्यान्‍वयन को सुनिश्चित करने तथा उच्‍च गुणवत्‍ता के साथ इस कार्य को तेजी से अन्‍जाम तक ले जाना सुनिश्चित करें। वन अधिकार अधिनियम की प्रगत‍ि की समीक्षा करते हुए प्रधानमंत्री ने आदिवासी समुदायों के अधिकारों को सुनिश्‍चित करने और उनके दावों के तेजी से निपटान के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के इस्‍तेमाल के महत्‍व पर जोर दिया।
       प्रधानमंत्री ने कहा कि जीएसटी के संबंध में उठाई गई शंकाएं अब निराधार साबित हुईं हैं और इसमें सुचारू लेन-देन हो रहा है। उन्‍होंने सभी मुख्‍य सचिवों से कहा कि वे इस संबंध में एक माह के भीतर उल्‍लेखनील लक्ष्‍य प्राप्‍त करने के लिए जीएसटी के अन्‍तर्गत पंजीकरण में वृद्धि करने के लिए अपने प्रयासों में और तेजी लाएं। सरकारी ई-मार्केट प्‍लेस (जीईएम) के संबंध में उन्‍होंने कहा कि पोर्टल से पारदर्शिता में सुधार आया है और फिजूलखर्ची में कमी आई है।
       उन्‍होंने सभी राज्‍यों के मुख्‍य सचिवों को कहा कि वे सरकारी खरीद में जीईएम को प्राथमिकता दें।

वाराणसी व हरिद्वार में निजी साझेदारी का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट

       राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन ने गंगा नदी बेसिन के दो बड़े शहरों वाराणसी व हरिद्वार में हाईब्रिड वार्षिक मोड आधारित सार्वजनिक-निजी साझेदारी (पीपीपी) मॉडल के अंतर्गत सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण और मरम्मत का काम निजी क्षेत्र को प्रदान किया है। 

   अपनी तरह के इस पहले हाईब्रिड वार्षिक मोड आधारित सार्वजनिक-निजी साझेदारी (पीपीपी) मॉडल के अंतर्गत सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण का काम शुरू हो गया है। वाराणसी में 153.16 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले 50 एमएलडी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के निर्माण, परिचालन और मरम्मत का काम भारतीय अवसंरचना कंपनी, ईसेल इंफ्रा प्रोजेक्ट लिमिटेड को दिया गया है।
      हरिद्वार में 171.53 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले कुल 82 एमएलडी सीवरेज ट्रीटमेंट क्षमता (जगजीतपुर में 68 एमएलडी अ सराय में 14 एमएलडी) वाले इस सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का निर्माण, परिचालन और मरम्मत का काम एचएनबी इंजीनियर्स प्राइवेट लिमिटेड को सौंपा गया है। यह परियोजना सुनिश्चित करेंगी कि गंगा नदी में सीवरेज का अशोधित पानी ना जाये। 
     हाईब्रिड वार्षिक मोड आधारित सार्वजनिक-निजी साझेदारी (पीपीपी) मॉडल के आरंभ से कई राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय कंपनियों ने एनएमसीजी की परियोजनाओं में रूचि दिखाई है। बाजार में मौजूद कंपनियों के साथ वार्ता और बैठकों ने बड़ी संख्या में प्रतिभागियों को आकर्षित किया। 30 से ज्यादा कंपनियों ने वाराणसी और हरिद्वार परियोजनाओं के लिए बैठक में बोली से पहले रूचि दिखाई है। 
    कंपनी का चुनाव 15 वर्षों की अवधि के लिए अवसंरचना के विकास, परिचालन की न्यूनतम बोली के आधार पर किया गया। भारत सरकार को हाईब्रिड वार्षिक मोड आधारित सार्वजनिक-निजी साझेदारी (पीपीपी) मॉडल के लिए केन्द्र सरकार द्वारा 100 प्रतिशत वित्त पोषण के साथ जनवरी 2016 में कैबिनेट का अनुमोदन मिल गया। इस मॉडल के अंतर्गत सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के निर्माण, परिचालन और मरम्मत का काम एक विशेष उद्देश्य वाहन (एसपीवी) की सहायता से किया जाएगा।
      जिसका निर्माण क्षेत्रीय स्तर पर ऊंची बोली लगाने वाली कंपनी द्वारा किया जाएगा। इस मॉडल के अनुसार 40 प्रतिशत लागत उद्धृत राशि का भुगतान निर्माण कार्य पूरा होने पर किया जाएगा जबकि बकाया 60 प्रतिशत लागत राशि का भुगतान वार्षिक परिचालन और मरम्मत लागत (ओएंडएम) खर्च, परियोजना की अवधि के अनुसार किया जाएगा। 
       इस मॉडल की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि वार्षिक और परिचालन और मरम्मत (ओएंडएम) भुगतान दोनों सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के प्रदर्शन से जुड़े हुए हैं। बेहतर जवाबदेही, स्वामित्व और सर्वोत्तम प्रदर्शन से परिसंपत्तियों का बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित होगा। 
      देश में पहली बार हाईब्रिड वार्षिक मोड आधारित सार्वजनिक-निजी साझेदारी (पीपीपी) मॉडल को सीवरेज प्रबंधन क्षेत्र में अपनाया गया है। पहले भी इस तरह के मॉडल को हाइवे क्षेत्र में सफलता पूर्वक अपनाया गया है।

बांध सुरक्षा क्षेत्रों में क्षमता बढ़ाने के लिए समझौता

     केंद्रीय जल आयोग ने विभिन्‍न कार्यान्वयन एजेंसियों और सीडब्‍लयूसी के बांध पुनर्वास प्रयासों में सहायता के लिए एनआईटी कालीकट और एनआईटी राउरकेला के साथ समझौता पर हस्‍ताक्षर किए हैं।

    जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय ने विश्‍व बैंक की सहायता वाली बांध पुनर्वास और सुधार परियोजना (डीआरआईपी) के जरिए बांध सुरक्षा के क्षेत्रों में क्षमता बढ़ाने के लिए चयनित प्रमुख अकादमिक और अनुसंधान संस्‍थानों को बोर्ड में शामिल किया है। इसके तहत संस्‍थानों के संकायों की जांच प्रयोगशालाएं सुदृढ़ करना, विशलेषणात्‍मक क्षमताएं बढ़ाना, सर्वश्रेष्‍ठ वैश्विक संस्‍थानों का दौरा करना और बांध स्‍थलों की सुरक्षा शामिल है। 
     सीडब्‍लयूसी ने जनवरी 2017 में आईआईटी मद्रास और आईआईएससी बैंगलूरू के साथ भी समझौता ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर किए थे। मंत्रालय इन संस्‍थानों की जांच और मॉडलिंग क्षमता बढ़ाने के लिए विशेष उपकरण तथा सॉफ्टवेयर खरीद में सहायता करता है। 
           डीआरआईपी सात राज्‍यों में 225 बांधों के पुनर्वास में सहायता कर रहा है जिसमें उसे विभिन्‍न स्‍तरों पर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इन बांधों के मालिकों को बांध की स्थिति की जांच करने और पुनर्वास प्रयासों में सहायता के लिए तकनीकी मदद की आवश्‍यकता है। 
     भारत सरकार ने बांध सुरक्षा क्षेत्रों में चुने गए प्रमुख अकादमिक संस्‍थानों की क्षमता बढ़ाने का निर्णय लिया है ताकि वे बांध स्‍थल पर जाकर सामग्री की जांच कर सके और बांध पुनर्वास प्रयासों में बांध मालिकों को प्रशिक्षण और परामर्श दे सकें।

अटल पेंशन योजना के 62 लाख ग्राहक

      एक राष्‍ट्र एक पेंशन के अंतर्गत कुल 3.07 लाख अटल पेंशन योजना (एपीवाई) खाते हो गए हैं। इस अभियान के तहत बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले देश के सबसे बड़े बैंकों में से एक भारतीय स्‍टेट बैंक शामिल है जिसमें शानदार 51 हजार एपीवाई खाते हैं।

   अन्य प्रमुख बैंक जैसे केनरा बैंक में 32,306 और आंध्रा बैंक में 29,057 एपीवाई खाते हैं जबकि अन्‍य निजी श्रेणी के बैंकों में कर्नाटक बैंक में 2,641 एपीवाई खाते हैं। आरआरबी श्रेणी में इलाहाबाद, उत्‍तर प्रदेश ग्रामीण बैंक में 28,609 खाते हैं। इसके बाद मध्‍य बिहार ग्रामीण बैंक में 5,056, बड़ौदा उत्‍तर प्रदेश ग्रामीण बैंक में 3,013, काशी गोमती संयुक्‍त ग्रामीण बैंक में 2,847 और पंजाब ग्रामीण बैंक में 2,194 एपीवाई खाते हैं।
       बचत बैंक खातों सहित विभिन्‍न वित्‍तीय सुविधाओं पर ब्‍याज दर कम हो रहा है। ऐसे समय में पेंशन योजना के रूप में अटल पेंशन योजना ग्राहकों के लिए गांरटीड 8 प्रतिशत दर से रिटर्न सुनिश्चित करता है। इस योजना में 20 से 42 वर्ष के लिए निवेश करने पर परिपक्‍वता के समय रिटर्न दर आठ प्रतिशत से अधिक रहने पर उच्‍च आय का अवसर भी उपलब्‍ध होता है।
       नामांकन बढ़ने से संपत्तियों का वित्‍तीयकरण होता है। लोग पेंशन सुविधाओं की ओर आकर्षित होते है, जो भारत सरकार ग्राहक, उसके जीवन साथी और ग्राहक द्वारा नामित व्‍यक्ति को निश्चित रिटर्न गारंटी देती है। पेंशन कोष नियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) के सहयोग से वित्‍तीय सेवा विभाग ने कई एपीवाई अभियान आयोजित किए हैं, जिनके माध्‍यम से एपीवाई सेवा प्रदाता बैंक और डाक विभाग किसी भी पेंशन योजना के त‍हत कवर नहीं किए गए लोगों के पास जाकर एपीवाई योजना की विशेषताओं और लाभों की जानकारी देते हैं। 
      इस योजना में नामांकन करने के लिए उन्‍हें प्रोत्‍साहित करते हैं। पीएफआरडीए ने एपीवाई सेवा प्रदाता बैंकों के साथ मिलकर देशभर में 2 से 19 अगस्‍त, 2017 तक राष्‍ट्रीय स्‍तर पर पेंशन जागरूकता अभियान ‘एक राष्‍ट्र एक पेंशन’ आयोजित किया था। योजना शुरू होने के दो वर्ष बाद अब तक 62 लाख ग्राहक अटल पेंशन योजना के सदस्‍य बने हैं।
     पीएफआरडीए का उद्देश्‍य किसी भी पेंशन योजना के अंतर्गत कवर नहीं किए गए अधिकतम लोगों को एपीवाई योजना के तहत कवर करना है ताकि भारत एक राष्‍ट्र के रूप में पेंशन रहित से पेंशन भोगी समाज बने और नागरिक अपनी वृद्धावस्‍था में सम्‍मानपूर्वक जीवन जी सके। 

Tuesday, 29 August 2017

बाइकिंग क्वींस ने प्रधानमंत्री से मुलाकात की

      गुजरात की 50 महिला मोटरसाइकिल सवारों के एक समूह-बाइकींग क्वींस ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी से मुलाकात की। 

इस समूह का कहना है कि उन्होंने 13 राज्यों संघ शासित प्रदेशों में 10,000 किलोमीटर से अधिक की यात्रा की है। लोगों से सामाजिक विषयों पर बातचीत की है, जैसे की बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ और स्वच्छ भारत। 
    उन्होंने 15 अगस्त, 2017 को लद्दाख के खारदुंग-ला में तिरंगा फहराया। प्रधानमंत्री ने उनके प्रयासों की सराहना की और भविष्य में उनके सर्वश्रेष्ठ प्रयासों के लिए उन्हें शुभकामनाएं दी।

हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद को श्रद्धांजलि

      प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर सभी खिलाड़ियों और खेलों के प्रति उत्साह रखने वाले लोगों को बधाई दी है।

     प्रधानमंत्री ने महान भारतीय हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद को श्रद्धांजलि भी अर्पित की। प्रधानमंत्री ने कहा, राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर, मैं सभी खिलाड़ियों और खेल में उत्साह रखने वाले लोगों को बधाई देता हूं, जो बड़े ही जोश और जुनून के साथ खेल का अनुसरण करते हैं। मैं अनुकरणीय मेजर ध्यानचंद को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं, जिनका शानदार खेल कौशल भारतीय हॉकी के लिए अदभुत है।
   खेल का मतलब शारीरिक तंदुरुस्ती, मानसिक सतर्कता और व्यक्तित्व विकास होता है। भारत को एक विशाल खेल प्रतिभा का आशीर्वाद मिला हुआ है। 
     इनकी क्षमता को निखारने के लिए इण्‍डिया स्‍पोर्ट्स द्वारा एक पोर्टल की शुरुआत की गई थी। नेशनल स्‍पोर्ट्स टैलेंट सर्च पोर्टल, युवाओं को उनके खेल की आकांक्षाओं को बढ़ाने और उसमें चमक लाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश और समर्थन देता है।"

रेलवे सुरक्षा पर प्रमुखता से ध्‍यान

        रेलवे बोर्ड के अध्‍यक्ष अश्विनी लोहानी ने देश भर के रेल कर्मियों का आह्वान किया है कि ट्रेनों के संचालन में सुरक्षा का सर्वोच्‍च स्‍तर सुनिश्चित करने के लिए चौकसी बरतें और रेल यात्रियों में नए सिरे से विश्‍वास की भावना पैदा करें।

    उन्‍होंने जोर देकर कहा कि सुरक्षा पर हमेशा प्रमुखता से ध्‍यान दिया जाना चाहिए। सभी रेल कर्मियों को भेजे गए एक पत्र में लोहानी ने रेलवे के काम-काज में चौतरफा सुधार की आवश्‍यकता पर जोर दिया ताकि लोगों की उम्‍मीदों, अपेक्षाओं और आकांक्षाओं को संतोषजनक तरीके से पूरा किया जा सके।
     भारतीय रेलवे के समर्पित श्रम बल का जिक्र करते हुए रेलवे बोर्ड के अध्‍यक्ष ने कहा कि रेलवे के अधिकारियों और अन्‍य कर्मचारियों की ईमानदारी, समर्पण और व्‍यावसायिक क्षमता का कोई मुकाबला नहीं है। इस क्षेत्र में काम कर रहे लोग व्‍यक्तिगत असुविधाओं और कठिनाइयों के बावजूद यह सुनिश्चित करते हैं कि राष्‍ट्र के पहिए सुरक्षित तरीके से घूमते रहें। 
     यही कारण है कि भारतीय रेलवे हमारे देश में गतिशीलता का सर्वोच्‍च प्रतीक है। उन्‍होंने कहा कि भ्रष्‍टाचार, कार्य स्‍थलों में यौन शोषण और ड्यूटी में रहते हुए मदिरा का सेवन जैसी बुराइयों से निपटने की आवश्‍यकता है। उन्‍होंने कहा कि इन सभी सामाजिक बुराइयों से कड़ाई के साथ निपटने की जरूरत है। 
     उन्‍होंने रेलवे स्‍टेशनों, ट्रेनों में सफाई, परिचालन अनुपात, रेलवे कर्मचारियों के कल्‍याण, समारोहों में चमक-दमक के बारे में भी बातचीत की। देश भर में फैले भारतीय रेलवे के कर्मचारियों को पत्र लिखकर रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष अश्विनी लोहानी ने रेलवे के 13 लाख कर्मचारियों के साथ संवाद कायम किया है।
     पत्र में लोहानी ने सभी कर्मचारियों से कहा है कि वे भारतीय रेलवे की गौरवपूर्ण छवि को बहाल करने के लिए जोर-शोर से कार्य करें। पत्र में उन्‍होंने कर्मचारियों की ईमानदारी, समर्पण और व्‍यावसायिक क्षमताओं में भरोसा जताया है।

Friday, 25 August 2017

अफसर खुद को फाइल तक सीमित न करें

       प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने भारत सरकार में कार्यरत 80 से अधिक अतिरिक्त सचिवों एवं संयुक्त सचिवों के एक समूह से मुलाकात एवं बातचीत की। इस तरह की पांच बैठकों की श्रृंखला में यह दूसरी बैठक थी।

     बातचीत के दौरान अधिकारियों ने अपने अनुभवों को कार्य निष्‍पादन पर आधारित प्रशासन, शासन में नवाचार, अपशिष्ट प्रबंधन, नदी और पर्यावरण प्रदूषण, वन, स्वच्छता, जलवायु परिवर्तन, कृषि, शिक्षा और कौशल विकास में मूल्य वृद्धि जैसे विषयों पर अपने अनुभव साझा किए। 
      अधिकारियों द्वारा किए गए अवलोकनों का जवाब देते हुए, प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि अधिकारियों को खुद को सिर्फ फाइल तक सीमित नहीं करना चाहिए, बल्कि निर्णय लेने के वास्तविक प्रभाव को समझने के लिए क्षेत्र में जाना चाहिए। इस संदर्भ में, उन्होंने 2001 में हुए गुजरात भूकंप के बाद पुनर्निर्माण के अनुभवों को अधिकारियों के साथ साझा किया। 
      प्रधानमंत्री ने कहा कि अधिकारियों को अपने काम को सिर्फ एक कर्तव्य के रूप में नहीं देखना चाहिए बल्कि इसे देश में शासन के लिए एक सकारात्मक परिवर्तन के अवसर के रुप में देखना चाहिए। प्रधानमंत्री ने उनसे शासन प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करने का आग्रह किया।
      उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे भारत के 100 सबसे पिछड़े जिलों पर ध्यान केंद्रित करें जिससे की उन जिलों को विकास के विभिन्न मानकों पर राष्ट्रीय औसत स्तर पर लाया जा सके।

अश्विनी लोहानी को रेल मंत्रालय में रेलवे बोर्ड का नया अध्यक्ष नियुक्त किया

       अश्विनी लोहानी, आईआरएसएमई को ए. के. मित्तल के स्थान पर रेलवे बोर्ड (रेल मंत्रालय) का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

     पदानुसार ये भारत सरकार के प्रधान सचिव के समतुल्य है। उन्होंने अपनी नई नियुक्ति का पदभार ग्रहण किया। इससे पहले अश्विनी लोहानी एयर इंडिया के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक थे। पदभार ग्रहण करने के बाद लोहानी ने रेलवे बोर्ड के सदस्यों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की। बाद में, उन्होंने रेलवे बोर्ड के अधिकारियों और कर्मचारियों को संबोधित भी किया।
        लोहानी ने रेल मंत्रालय, केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय और मध्य प्रदेश सरकार में विभिन्न पदों पर कार्य किया है। रेलवे में उन्होंने दक्षिण मध्य, पूर्वी और उत्तरी रेलवे के साथ-साथ वाराणसी स्थित डीजल लोकोमोटिव वर्क्स और चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री में भी काम किया है। 
    उन्होंने वैकल्पिक ईंधन के भारतीय रेलवे संगठन (आईआरओएएफ) में मुख्य प्रशासनिक अधिकारी, उत्तर रेलवे में मुख्य मैकेनिकल इंजीनियर, दिल्ली प्रभाग में प्रभागीय रेलवे प्रबंधक, नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय रेल संग्रहालय में निदेशक, भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय में निदेशक, भारत पर्यटन विकास निगम के प्रबंध निदेशक (सीएमडी), मध्य प्रदेश पर्यटन में एमडी और रेलवे में कई अन्य महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है।

Thursday, 24 August 2017

भारत नेपाल में बुनियादी ढांचा बनाने, सामाजिक संस्थानों की स्थापना के लिए कटिबद्ध

        उप-राष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने कहा है कि भारत नेपाल में भौतिक बुनियादी ढांचा बनाने, सामाजिक संस्थानों की स्थापना के लिए कार्य कर रहा है। उप-राष्ट्रपति ने भारत दौरे पर आए नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा से आज मुलाकात के दौरान ये बातें कहीं।

     उप-राष्ट्रपति ने कहा कि दोनों देशों के बीच आपसी बात-चीत से आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही टेराई रोड, रेल लिंक, एकीकृत चेक पोस्टों के साथ ही रक्सौल-आमलेखगंज तेल पाइपलाइन जैसे परियोजनाओं पर भी नए सिरे से ध्यान दिया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि जलविद्युत क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग की भी अपार संभावनाएं थी। दोनों देशों को 1996 में हस्ताक्षरित पंचेश्वर परियोजना के शीघ्र परिचालन के लिए काम करना चाहिए। इसके साथ जोर देते हुए उन्होंने कहा कि हमें दोनों देशों के लोगों के लाभ के लिए जल संसाधन क्षेत्र में भी अपने सहयोग को बढ़ाने की आवश्यकता है। 
  उप-राष्ट्रपति ने कहा कि नेपाल अपने सबसे प्रमुख कार्य संविधान को लागू करने और प्रगतिशील और समावेशी राजनीतिक एजेंडे की स्थापना करने में लगी हुई है। नेपाल के समाज के हर वर्ग की आकांक्षाओं को पूरा करने वाली एक राजनीतिक व्यवस्था स्थापित करना जैसे महत्वपूर्ण कार्य में भी लगी है। 
     उन्होंने स्थानीय निकाय चुनावों के दो चरणों को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए प्रधानमंत्री और नेपाल सरकार को बधाई दी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भारत को नेपाल में आगामी चुनाव में किसी भी चुनाव संबंधी सहायता करने में खुशी होगी। 
   उप-राष्ट्रपति ने कहा कि दोनों देशों के बीच खुली सीमा होना हमारे संबंधों को विशिष्टता प्रदान करती है। इससे दोनों देशों के लोगों को काफी लाभ भी होता है। उन्होंने चेतावनी दी कि हमें दुश्मनों द्वारा खुली सीमा के दुरुपयोग के प्रति सतर्क भी रहना चाहिए। 
       उन्होंने कहा कि भारत नेपाल पुलिस और सशस्त्र बल पुलिस को उपकरणों, वाहनों और प्रशिक्षण के माध्यम से सुदृढ़ता प्रदान कर रहा है। उप-राष्ट्रपति ने कहा कि भारत सभी पड़ोसी देशों के साथ काम करना चाहता है। हमारी सरकार का प्रयास 'सबका सहयोग, सबका विकास' भारत और भारत के बाहर दोनों जगह लागू होता है। 
       उन्होंने आगे कहा कि भारत अन्य सभी पड़ोसी देशों के साथ समावेशी विकास प्राप्त करने की इच्छा रखता है। उन्होंने कहा कि भारत नौकरी बढ़ाने तथा सभी पड़ोसी देशों के घरेलू क्षेत्रों की विकास के लिए भी सहायता प्रदान करने को उत्सुक है।

भारत-नेपाल आर्थिक साझेदारी के उर्जा, जल संसाधन, निवेश पर सहमत

      प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि भारत को छीमेकी मित्र राष्ट्र नेपाल को प्रधान मंत्री शेर बहादुर देउबा जी, अन्य नेपाली अतिथिगण, तपायींहरू का भारत मा हार्दिक स्वागत गर्दा मलाई धेरे ख़ुशी लागद छ मेरा सौभाग्य है कि मुझे भारत में प्रधानमंत्री देउबा जी का स्वागत करने का अवसर मिला है।

     प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि आपकी ये यात्रा एक ऐसे ऐतिहासिक समय पर हो रही है जब हम अपने राजनयिक संबंधों की स्थापना की 70वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। हालांकि हमारे संबंध हिमालय जितने पुराने हैं। 
  प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि हमारे दोनों देशों की नियति एक दूसरे से जुड़ी हुई है। एक दूसरे की समृद्धि और सुख में दोनों देशों की ही महत्वपूर्ण भागीदारी रही है। हम एक दूसरे की उपलब्धियों पर गर्व करते हैं, ठीक वैसे ही, जैसे एक दूसरे की पीड़ा का अनुभव भी करते हैं। एक करीबी पड़ोसी और मित्र देश की तरह भारत, नेपाल में शांति, स्थायित्व और उसकी आर्थिक समृद्धि के प्रति हमेशा सजग रहता है। भारत को नेपाल के विकास और आर्थिक प्रगति के प्रयासों में साझीदार होने का सौभाग्य प्राप्त है। 
        प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि लोकतंत्र से आई उन्नति, शांति की स्थापना और सर्वांगीण विकास के लिए नेपाल के नागरिकों की उपलब्धियों की हम भूरी भूरी प्रशंसा करते है, सराहना करते हैं। मैं नेपाल सरकार को बधाई देता हूं कि स्थानीय निकाय के चुनावों को दो चरणों में सफलता पूर्वक कराया गया। नेपाल में लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए, आपने जिस तरह व्यक्तिगत तौर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, उसकी हम प्रशंसा करते हैं। 
         मुझे पूरा विश्वास है कि आपके कुशल और अनुभवी नेतृत्व में, समाज के सभी वर्गों से बात करने की प्रक्रिया को जारी रखते हुए, नेपाल अपने सभी नागरिकों की आकांक्षाओं को समाहित करते हुए, संविधान को सफलता के साथ लागू कर सकेगा। साथियों, आज प्रधानमंत्री देउबा और मैंने, दोनों देशों की साझेदारी की असीम संभावनाओं पर बहुत विस्तार से और बहुत सकारात्मक बातचीत की है। हमने विभिन्न स्तर पर, अलग-अलग क्षेत्रों में, दोनों देशों के संबंधों को आगे बढ़ाने वाले नए रास्तों और नए अवसरों पर विशेष तौर से ध्यान दिया है।
      हमें खुशी है कि नेपाल में भारत के सहयोग से चल रही विकास परियोजनाओं, जैसे काम हो रहा है। आज, हमने संयुक्त रूप से कटैया-कुसहा और रक्सौल-परवानिपुर ट्रांसमिशन लाइन्स का उद्घाटन किया है। इससे भारत द्वारा नेपाल को दी जा रही लगभग 350 मेगावॉट बिजली में 100 मेगावॉट अतिरिक्त बिजली और जुड़ जाएगी। हम अपनी आर्थिक साझेदारी के विभिन्न आयामों, जैसे उर्जा, जल संसाधन और भूकंप के बाद के कार्यों में साथ मिलकर काम कर रहे हैं।
       प्रधानमंत्री देउबा और मैं इस बात पर सहमत हुए हैं कि पहले से चल रहे कार्यों को तय समय सीमा में पूरा करने के लिए अपने प्रयास हम और बढ़ाएंगे। मुझे ख़ुशी हुई जब देउबा जी ने मुझे बताया की अरुण-3 (थ्री) के लिए नेपाल में भूमि का मामला सुलझा लिया गया है। मैं देउबाजी का धन्यवाद करता हूं कि उसके शिलान्यास के लिए उन्होंने मुझे नेपाल का निमंत्रण दिआ है, मैं उनका आभारी हूँ। हम इस बात भी सहमत हुए हैं कि पंचेश्वर प्रोजेक्ट के लिए अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में भी तेजी लाई जाएगी। 
    नेपाल में आई बाढ़ के संदर्भ में बात करें, तो मैंने भारत की तरफ से हर संभव सहायता का प्रस्ताव फिर दोहराया है। हम इस बात पर भी सहमत हुए हैं कि सीमावर्ती इलाकों में बाढ़ नियंत्रण को और मजबूत किया जाए और एक दूसरे के हितों को ध्यान में रखते हुए इसके पर सोचा जाए। हम दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश बढ़ाने पर भी सहमत हुए हैं। यह न सिर्फ दोनों देशों के नागरिकों के हित में होगा, बल्कि क्षेत्रीय समृद्धि के लिए भी यह बहुत ही आवश्यक है।
      नेपाल के लोगों और नेपाल की सरकार की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए, नेपाल के विकास में अपनी साझेदारी बढ़ाने के लिए, भारत पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए, हम कई ऐसे विकास पर सहमत हुए हैं जो नेपाल की विकास हैं। इसमें भारत की सहायता के अंतर्गत धनगढ़ी में स्थापना पर सैद्धांतिक सहमती हुई है।
      मुझे खुशी है कि आज जिन आठ पर हस्ताक्षर किये गए हैं, उनमें से चार भूकंप के बाद पुनर्निर्माण कार्यों के लिए भारत की तरफ से किए गए एक बिलियन डॉलर की सहायता के वायदे और आगे बढ़ाएंगे। रक्षा क्षेत्र और सुरक्षा में सहयोग हमारी पार्टनरशिप का बहुत महत्वपूर्ण पहलू है। 
     हमारे सुरक्षा हित भी एक दूसरे पर निर्भर हैं और एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि आपकी इस यात्रा ने परस्पर सहयोग के हमारे प्रयासों को और गतिशीलता दी है। मुझे विश्वास है कि हमारी आज की चर्चा और जिन समझौतों पर हमने सहमति जताई है,वो हमारे द्विपक्षीय संबंधों में एक नई ऊर्जा का संचालन करेंगे।
       इन्हीं शब्दों के साथ, मैं आपका और आपके साथ आए शिष्ठ मंडल का भारत में एक बार फिर स्वागत करता हूं। मुझे उम्मीद है कि आपका भारत में ये प्रवास बहुत ही सुखद रहेगा।

निर्णय के समय गरीबों एवं साधारण नागरिकों का ध्‍यान आवश्‍यक

        प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने भारत सरकार में कार्यरत 70 से अधिक अतिरिक्त सचिवों एवं संयुक्त सचिवों के एक समूह से मुलाकात एवं बातचीत की।

    इस तरह की पांच बैठकों की श्रृंखला में यह पहली बैठक थी। बातचीत के दौरान अधिकारियों ने डिजिटल एवं स्‍मार्ट गवर्नेंस, प्रशासनिक प्रक्रियाओं एवं जवाबदेही, पारदर्शिता, किसानों की आय दोगुनी करने, कौशल विकास, स्‍वच्‍छ भारत, उपभोक्‍ता अधिकार, पर्यावरण सुरक्षा और 2022 तक नए भारत के निर्माण जैसे विषयों पर अपने अनुभवों को साझा किया। 
     प्रधानमंत्री ने कहा कि नागरिकों के कल्‍याण एवं संतुष्टि के लिए विकास एवं सुशासन का संयोजन आवश्‍यक है। उन्‍होंने कहा कि सुशासन, अधिकारियों के लिए एक प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्‍होंने सरकार के सभी अंगों को समरसता एवं तालमेल के साथ काम करने पर जोर दिया ताकि हरसंभव बेहतरीन परिणाम हासिल किया जा सके। 
     उन्‍होंने कहा कि सभी अधिकारियों को निर्णय लेते समय गरीबों एवं साधारण नागरिकों का ध्‍यान अवश्‍य रखना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया सकारात्मक उम्मीदों के साथ भारत की ओर देख रही है। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया को लगता है कि वैश्विक संतुलन के लिए एक सफल भारत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि भारत के आम नागरिकों से भी उत्कृष्टता के लिए एक मजबूत अंत:प्रवाह है।
       विनम्र पृष्ठभूमि से आने वाले युवा सीमित संसाधनों के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं और खेलों में सर्वश्रेष्ठ स्थान प्राप्त कर रहे हैं। उन्‍होंने अधिकारियों को प्रतिभा के इस सहज उदय को बढ़ावा देने के लिए उस उत्‍साह एवं ऊर्जा को याद करते हुए काम करने के लिए कहा, जिसे उन्‍होंने अपनी सेवा के पहले तीन साल के दौरान दिखाई होगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि अधिकारियों के लिए राष्‍ट्र के फायदे के लिए अपना सर्वश्रेष्‍ठ प्रदर्शन करने का यह एक अनूठा अवसर है। 
        उन्‍होंने साइलो तोड़ने और सरकार के विभिन्‍न विभागों के बीच कुशल आंतरिक संचार के महत्‍व पर जोर दिया।उन्होंने निर्णय लेने में गति और दक्षता की आवश्यकता को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि अच्छे इरादे से लिए जाने वाले ईमानदार निर्णय को केंद्र सरकार द्वारा हमेशा प्रोत्साहित किया जाएगा। 
     उन्होंने अधिकारियों को भारत के 100 सबसे पिछड़े जिलों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कहा ताकि उन्‍हें विभिन्न विकास मानकों पर राष्ट्रीय औसत स्तर के करीब लाया जा सके।

Wednesday, 23 August 2017

नई दिल्‍ली में राष्‍ट्रीय खेल संग्रहालय की स्‍थापना की जाएगी

         युवा मामले और खेल मंत्रालय नई दिल्‍ली स्थित जवाहर लाल नेहरू स्‍टेडियम में अपने किस्‍म के पहले राष्‍ट्रीय खेल संग्रहालय की स्‍थापना करने जा रहा है। यह फैसला तीन महीने पहले कई सिलसिलेवार बैठकों और खेल मंत्री विजय गोयल द्वारा राजधानी में कई स्‍थलों का व्‍यक्तिगत तौर पर दौरा करने के बाद लिया गया। 

        उन्‍होंने ही संग्रहालय के लिए वर्तमान स्‍थल निर्धारित किया है। विजय गोयल ने कहा कि यह संग्रहालय खेलों में भारत की उप‍लब्धियों को दर्शाएगा। साथ ही देश में मौजूद परम्‍परागत खेलों पर भी ध्‍यान केंद्रित करेगा। उन्‍होंने कहा कि इस संग्रहालय का लक्ष्‍य देश में खेलों को जीवन शैली के रूप में लोकप्रिय बनाना है। इसके अनुसार, प्रस्‍तावित संग्रहालय स्‍मृति चिन्‍हों को संग्रह करने के पारम्‍परिक दृष्टिकोण से भी बढ़कर सभी आयु वर्गों की दिलचस्‍पी का केंद्र बनेगा।
     गोयल ने कहा कि इसके अलावा, यह संग्रहालय खेलों में महान भारतीय हस्तियों की उप‍लब्धियों का प्रदर्शन करेगा। साथ ही एक शैक्षणिक केंद्र के रूप में भी कार्य करेगा। युवाओं को किसी न किसी खेल-कूद की गतिविधि में तल्‍लीन होने का अवसर प्रदान करेगा। विजय गोयल ने सभी पुराने और वर्तमान खिलाडि़यों तथा आम जनता से अपील की है कि वे अपने पास रखे स्‍मृति चिन्‍हों को राष्ट्रीय खेल संग्रहालय में स्‍थायी प्रदर्शन के लिए देकर इस कार्य में अपना योगदान दें।
       गोयल ने कहा कि उभरते खिलाडि़यों को शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्‍य से संग्रहालय में विभिन्‍न खेलों के नियमों और महत्‍वपूर्ण खेल आयोजन से संबंधित श्रव्‍य-दृश्‍य प्रदर्शन, खेलों और फिजिकल फिटनेस की सभी सुविधाओं से युक्‍त पुस्‍तकालय, पेंटिंग गैलरी और पुराने महत्‍वपूर्ण मैचों/मुकाबलों/खेलों को दिखाने के लिए एम्‍फीथिएटर बनाए जाने की योजना है।
          उन्‍होंने कहा कि संग्रहालय में कैफेटेरिया, एक एक्टिविटी जोन, यादगार वस्‍तुएं, प्रो शॉप और प्‍ले एरिया भी होगा। विभिन्‍न खंडों में जिन गतिविधियों की योजना बनाई गई है। उनमें खेल-कूद की गतिविधियां, खेल से संबंधित कंप्‍यूटर गेम और खेल स्‍मृति चिन्‍ह और खेल उपकरण बेचने वाली दुकाने शामिल होंगी। विजय गोयल ने कहा कि संग्रहालय खोलने का विचार अब विशेषज्ञों द्वारा संग्रहालय के मॉडल की अवस्‍था में तब्‍दील हो चुका है। इसलिए संग्रहालय की स्‍थापना का प्रथम चरण जल्‍दी शुरू हो जाएगा।

इंफ्रास्ट्रक्चर के अभाव में कृषि क्षेत्र को बहुत बड़ा नुकसान

       प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने प्रवासी भारतीय केंद्र में नीति आयोग द्वारा आयोजित चैंपियन्स ऑफ चेन्ज - ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया थ्रू जी2बी पार्टनरशिप पहल में युवा सीईओ के समूह को संबोधित किया। पिछले सप्ताह युवा उद्यमियों के साथ संवाद के पश्चात, इस श्रृंखला में आज प्रधानमंत्री का यह दूसरा संबोधन था।

   युवा सीईओ के समूह ने मेक इन इंडिया, किसानों की आय दोगुना करना, विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर, भविष्य के शहर, वित्तीय क्षेत्र में सुधार और 2022 तक न्यू इंडिया जैसे विषयों पर प्रधानमंत्री के समक्ष प्रजेंटेशन दी। सीईओ के समूह द्वारा प्रजेंटेशन में परिकल्पित नए विचारों और नवाचारों की सराहना करते हुए, प्रधानमंत्री ने उनको देश के फायदे के लिए महत्वपूर्ण सूचनाएं देने तथा उन पर विचार करने हेतु अपना समय देने के लिए उनको धन्यवाद अर्पित किया। 
      उन्होंने कहा कि सरकार की मुख्य निर्णय निर्धारण टीम ने इन प्रजेंटेशन को ध्यानपूर्वक सुना है और यहां प्रस्तुत किए गए विषयों का नीति निर्माण में निश्चित रूप से 360 डिग्री से लाभकारी होगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि जनभागीदारी शासन का एक महत्वपूर्ण घटक होता है। इसी के साथ-साथ, उन्होंने कहा कि सरकार के साथ सीईओ के समूह की इस भागीदारी का लक्ष्य लोगों तथा देश के कल्याण की दिशा में उनकी भागीदारी को बढ़ाना है। 
       भारत के स्वतंत्रता संग्राम का स्मरण करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि महात्मा गांधी ने स्वतंत्रता के लिए सभी भारतीयों को सैनिक बना दिया था और वह स्वतंत्रता संग्राम में अपना योगदान देते हुए अपना काम भी कर रहे थे। इस प्रकार उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम को जन आंदोलन बनाने में सहायता की। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज विकास को भी एक जन आंदोलन बनाया जाना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि ऐसी भावना का निर्माण किया जाना चाहिए जिसके द्वारा हमें 2022 तक भारत में अपने योगदान के लक्ष्यों को निर्धारित करना चाहिए। 
          प्रधानमंत्री ने सीईओ के समूह को कहा कि आप सभी मेरी टीम हैं और हमें भारत को आगे ले जाने के लिए मिलकर काम करना होगा। कृषि में मूल्य संवर्धन का उदाहरण देते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि कृषि से होने वाली आय को दोगुना करने जैसे वांछित उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए बहु-आयामी दृष्टिकोण आवश्यक है। खाद्य प्रसंस्करण के महत्व पर जोर देते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर के अभाव में कृषि क्षेत्र को बहुत बड़ा नुकसान होता है। 
      प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने ऐसे अनेक निर्णय लिए हैं जिन्होंने आधारभूत रूप परिवर्तन किए हैं। उन्होंने यूरिया की उपलब्धता और उत्पादन, गैस कीमतों का समूहीकरण, अतिरिक्त उत्पादन के लिए पारिश्रमिक आदि के संबंध में लिए गए निर्णय का उदाहरण भी दिया। इससे यूरिया का 20 लाख टन अतिरिक्त उत्पादन हुआ। प्रधानमंत्री ने कहा कि यूरिया की नीम कोटिंग द्वारा इसका बड़े स्तर पर होने वाले दुरुपयोग को रोका गया है। उन्होंने कहा कि सरकार भारत को कम-नकद आधारित समाज बनाना चाहती है। 
        प्रधानमंत्री ने इस संबंध में तेज गति से कार्य करने के लिए सीईओ के समूह को सरकार के साथ भागीदारी करने के लिए कहा। इसके साथ-साथ, प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि त्योहारों के अवसरों पर खादी को उपहार आदि के रूप में देकर बढ़ावा दिया जा सकता है और यह गरीबों की बहुत बड़ी सहायता होगी। उन्होंने कहा कि जीवन के हर क्षेत्र में गरीबों को साथ लेकर चलने का माहौल बनाया जाना जरूरी है। 
      प्रधानमंत्री ने सरकार के ई-बाजार अर्थात जैम का उदाहरण देकर यह बताया कि किस प्रकार छोटे-छोटे व्यापारी भी सरकार को वस्तुओं एवं सेवाओं की आपूर्ति करने में सफलतापूर्वक प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अभी तक जीईएम के माध्यम से 1000 करोड़ रुपए का लेनदेन किया जा चुका है और इस मंच पर 28,000 आपूर्तिकर्ताओं में अपना योगदान दिया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीयों को अपने देश पर गर्व करना चाहिए। 
    उन्होंने कहा कि सभी लोगों को अपने संपर्क और जानने वाले लोगों के बीच निरंतर रूप से भारत के भीतर पर्यटन स्थलों को बढ़ावा देने का स्वभाव विकसित करना चाहिए। वेस्ट टू वेल्थ उद्यमियों का उदाहरण देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह स्वच्छ भारत और स्वच्छ पर्यावरण के उद्देश्यों को प्राप्त करने में सहायक होगा। 
     उन्होंने कहा कि उद्यमियों और व्यापार का लक्ष्य ऐसे उत्पाद प्रदान करना होना चाहिए, जो देश में लोगों द्वारा सामना की जा रही समस्याओं का साधारण समाधान प्रस्तुत करें। इस अवसर पर कई केंद्रीय मंत्री और सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

सीएससी नये भारत के निर्माण में प्रमुख भूमिका निभाएगा

      केन्‍द्रीय इलेक्‍ट्रोनिक्‍स और सूचना प्रौद्योगिकी तथा विधि और न्‍याय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सरकार 2022 तक भूख और अभाव से मुक्‍त नया भारत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। परिवर्तन के दूत ग्रामीण स्‍तर के उद्यमी (वीएलई) ग्रामीण भारत में क्रांतिकारी बदलाव लाने में प्रमुख भूमिका निभाएंगे।

  केन्‍द्रीय इलेक्‍ट्रोनिक्‍स और सूचना प्रौद्योगिकी तथा विधि और न्‍याय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि एनडीए सरकार को परिवर्तन के इन दूतों पर पूर्ण विश्‍वास है। उन्‍होंने कहा कि पतंजलि और इफको अपने उत्‍पादों को सामान्‍य सेवा केन्‍द्रों (सीएससी) पर उपलब्‍ध कराने पर सहमत हैं। इससे सीएससी की व्‍यवहार्यता को काफी बढ़ावा मिलेगा।
       2500 से अधिक वीएलई को संबोधित करते हुए मंत्री ने देश के ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सेवाएं प्रदान करने में सीएसई, वीएलई के उल्‍लेखनीय प्रयासों का स्‍वागत किया। उन्‍होंने दूर-दराज के क्षेत्रों में अपने सीएससी के जरिए सरकारी सेवाएं उपलब्‍ध कराने के लिए महिला वीएलई की सराहना की। 
      उन्‍होंने विशेष रूप से श्रीमती जानकी कश्‍यप का उल्‍लेख किया, जिन्‍होंने छत्‍तीसगढ़ में दंतेवाड़ा जिले के नक्‍सल प्रभावित क्षेत्र में डिजिटल सुविधायें प्रदान कीं। मंत्री ने घोषणा की कि उनका मंत्रालय सर्वश्रेष्‍ठ पांच महिला वीएलई को अमरीका भेजेगा। वीएलई सोसाएटीज के उत्‍कृष्‍ट जिले को एक लाख रुपये का पुरस्‍कार प्रदान करेगा।
       उन्‍होंने कार्यक्रम में उपस्थित सभी वीएलई और अधिकारियों को ‘संकल्‍प से सिद्धि’ की शपथ भी दिलाई। उन्‍होंने कहा कि 800 आयुर्वेदिक चिकित्‍सकों के माध्‍यम से मेडिकल टेली कंसल्‍टेशन के लिए पतंजलि के साथ 40,000 सीएससी पंजीकृत हैं।
      इस अवसर पर आचार्य बालकृष्‍णजी ने देश को बीमारी मुक्‍त करने के सपने को साकार करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में योग सिखाने के वास्‍ते पतंजलि योग पीठ में सीएससी, वीएलई को नि:शुल्‍क योग प्रशिक्षण देने की घोषणा की। इस अवसर पर यूआईडीएआई के मुख्‍य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) डॉ. अजय भूषण पांडे ने ग्रामीण क्षेत्रों में आधार सेवाएं देने में सीएससी, वीएलई की उपलब्धियों की सराहना की। भूषण ने कहा कि वीएलई ने ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे बच्‍चों, वृद्ध लोगों, मरीजों और ऐसे व्‍यक्ति जो आधार केन्‍द्रों तक नहीं जा सकते, उनके घरों में जाकर उनका नामांकन कर यूआईडीएआई की मदद की है।
          सीएससी के माध्‍यम से पतंजलि उत्‍पादों की बिक्री का शुभारंभ, सामान्‍य सेवा केंद्रों के विशाल नेटवर्क के जरिए अंतिम व्‍यक्ति तक पतंजलि उत्‍पादों की बिक्री के लिए सीएससी, एसपीवी ने पतंजलि आयुर्वेद के साथ समझौता किया है। 
        सीएससी के माध्‍यम से भारत बिल भुगतान सेवा का शुभारंभ, भारतीय राष्‍ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) के तत्‍वाधान में भारत बिल भुगतान सेवा (बीबीपीएस) एकीकृत बिल भुगतान प्रणाली है। सीएससी, एसपीवी के भारत बिल भुगतान परिचालन इकाई बनने से सीएससी, बीबीपीएस सेवाएं प्रदान कर ग्रामीणों को उनके बिजली, पानी, गैस, डीटीएच और मोबाइल बिलों का भुगतान करने में मदद कर सकती है। 
     आधार आधारित भुगतान प्रणाली में जमा सेवा, डीजी भुगतान का शुभारंभ, एनपीसीआई के सहयोग से सीएससी, एसपीवी ने ग्रामीण लोगों की वित्‍तीय सेवाओं की आवश्‍यकताओं को पूरा करने के लिए आधार आधारित भुगतान सेवा ‘डिजि भुगतान’ का शुभारंभ किया। 22 अगस्‍त, 2017 को डिजि भुगतान के अंतर्गत इसकी नकद जमा सेवा भी शुरू की जाएगी, जिसके तहत नागरिक अपने आधार से जुड़े किसी भी बैंक खाते में नकद राशि जमा कर सकते हैं।
       सीएससी के जरिए उर्वरक, बीज जैसे इफको उत्‍पादों की ब्रिकी के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) का आदान-प्रदान, सीएससी ने डिजिटल सेवा पोर्टल के जरिए इफको और समूह कंपनियों के सभी उत्‍पादों के विपणन और उनकी सेवाएं प्रदान करने के लिए इफको के साथ साझेदारी की है। इस सेवा के अंतर्गत वीएलई किसानों से कृषि उत्‍पादों और अन्‍य सेवाओं के लिए बड़ी संख्‍या में आर्डर प्राप्‍त कर इसे सीएससी पोर्टल पर आर्डर कर भुगतान प्राप्‍त कर सकते हैं। 
      सीएससी और इग्‍नू के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) का आदान-प्रदान, सीएससी, एसपीवी ने देशभर के सीएससी नेटवर्क के जरिए अपनी ऑनलाइन सेवाओं का विस्‍तार करने के लिए इग्‍नू के साथ साझेदारी की है। इन सेवाओं में इग्‍नू के संभावित और पंजीकृत छात्रों के लिए डिजिटल सेवा पोर्टल के जरिए ऑनलाइन प्रवेश फार्म और परीक्षा फार्म जमा करने, ऑनलाइन पुन, पंजीकरण करने और ऑनलाइन भुगतान सुविधाएं शामिल हैं। 
     एनईजीडी और इग्‍नू के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) का आदान-प्रदान, एनईजीडी ने अपने डिजिटल भारत क्षमता निर्माण के एजेंडा के लिए समन्‍वय स्‍थापित करने के वास्‍ते इग्‍नू के साथ साझेदारी की है। साझेदारी के तहत इग्‍नू एनईजीडी के क्षमता निर्माण और जागरूकता फैलाने की सामग्री तैयार करने तथा संवाद गतिविधियों के लिए अपनी आधुनिक सुविधाएं उपलब्‍ध कराएगा।
         सीएससी के जरिए टेली रेडियोलॉजी सेवा के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) का आदान-प्रदान, अस्‍पतालों और जांच केंद्रों के एक्‍सरे, सीटी और एमआरआई को रेडियोलॉजिस्‍ट से जोड़ने वाले देश के पहले जांच नेटवर्क, ‘5सी नेटवर्क’ ने जमीनी स्‍तर पर रेडियो जांच सुविधा उपलब्‍ध कराने के लिए सीएससी, एसपीवी के साथ साझेदारी की है।
          टेली जीएसटी सेवा के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) का आदान-प्रदान, सीएससी, एसपीवी ने देश के ग्रामीण और उप नगरीय इलाकों में कम्‍प्‍यूटरीकृत हिसाब-किताब बढ़ाने और जीएसटी के अनुपालन के लिए टेली समाधान की सहायक टेली शिक्षा के साथ साझेदारी की है। इस साझेदारी के तहत छोटे कारोबारों और व्‍यापारियों के लिए जीएसटी अनुपालन के लिए वीएलई को टेली से जीएसटी बिलिंग के नवीनतम संस्‍करण का मानार्थ लाइसेंस और सॉफ्टवेयर प्राप्‍त होगा।

बौद्धिक सम्‍पदा अधिकार प्रशिक्षण मौडयूल की घोषणा

      केन्‍द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने यहां बौद्धिक सम्‍पदा अधिकारों को लागू करने के बारे में तीन दिन की कार्यशाला का उद्घाटन वाणिज्‍य और उद्योग मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण और गृह राज्‍य मंत्री किरेन रिजिजू की उपस्थिति में किया। 

    राजनाथ सिंह ने कहा कि जाली मुद्रा और पायरेसी संबंधी गतिविधियां गंभीर संगठित अपराधों को बढ़ावा देती हैं। ऐसी गतिविधियां जाली मुद्रा का अवैध कारोबार करने वाले अपराधियों और आतंकवादियों द्वारा चलाई जाती हैं।
        उन्‍होंने कहा कि इसीलिए पुलिस को पुरी जानकारी और प्रशि‍क्षण के साथ लैस रहना चाहिए ताकि बौद्धिक सम्‍पदा अधिकारों के उल्‍लंघनों पर नियंत्रण लग सके। केन्‍द्रीय गृह मंत्री ने पुलिस प्रशिक्षण संस्‍थानों तथा देशभर की अकादमियों में अपने बलों को बौद्धिक सम्‍पदा अधिकारों के बारे में संवेदी बनाने के लिए बौद्धिक सम्‍पदा अधिकार प्रशिक्षण मौडयूल शुरू करने की घोषणा की। 
     श्रीमती निर्मला सीतारमण ने कहा कि विश्‍व बौद्धिक सम्‍पदा संगठन (डब्‍ल्‍यूआईपीओ) प्रौद्योगिकी और नवाचार समर्थन के लिए पंजाब और तमिलनाडू में दो प्रौद्योगिकी और नवाचार समर्थन केन्‍द्र (टीआईएससी) की स्‍थापना सीआईपीएएम के सहयोग से कर रहा है। उन्‍होंने कहा कि लोगों को सुरक्षित भविष्‍य के लिए अपने बौद्धिक सम्‍पदा के सृजन और संरक्षण के उपायों के बारे में समझदारी बढ़ाने की आवश्‍यकता है। 
      गृह राज्‍य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोगों से दूसरों की बौद्धि‍क सम्‍पदा का सम्‍मान करने का आगह किया और देश में बौद्धिक सम्‍पदा अधिकार लागू करने के लिए मजबूत व्‍यवस्‍था बनाने की बात कही। इस कार्यशाला से देश की प्रवर्तन एजेंसियों को बौद्धिक सम्‍पदा अधिकार लागू करने में अपने महत्‍व को समझने में मदद मिलेगी।
     यह कार्यशाला अधिकारियों को अपने अनुभव साझा करने, श्रेष्‍ठ व्‍यवहारों का आदान-प्रदान करने और बौद्धिक सम्‍पदा अधिकारों को लागू करने के मामले में बेहतर अंतर-एजेंसी समन्‍वय के मंच के रूप में कार्य करेगी।
       तीन दिन की इस कार्यशाला में प्रवर्तन एजेंसियों के प्रतिनिधियों के अतिरिक्‍त अनेक बौद्धिक सम्‍पदा क्षेत्र के पेशेवर लोगों, वकील, कानून के विद्यार्थी तथा उद्योग संघों के लोग भाग ले रहे हैं। 
    यह कार्यशाला 22 से 24 अगस्‍त, 2017 तक भारत सरकार के वाणिज्‍य और उद्योग मंत्रालय के औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग के अन्‍तर्गत पेशेवर संस्‍था बौद्धिक सम्‍पदा अधिकार संवर्धन और प्रबन्‍धन (सीआईपीएएम) द्वारा आयोजित की गई है।

Tuesday, 22 August 2017

शिक्षा क्षेत्र को मजबूत करना सरकार का लक्ष्य

        केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने केन्द्रीय विद्यालय संगठन के कार्यक्रम स्वस्थ बच्चे स्वस्थ भारत का शुभारंभ किया। इस कार्यक्रम के अंतर्गत केन्द्रीय विद्यालय के 12 लाख से अधिक छात्रों के स्वास्थ्य और तंदुरुस्ती कार्ड बनाये जाएगे।

  प्रकाश जावेडकर ने कोच्चि के अलुआ में स्थित केन्द्रीय विद्यालय नाड में आयोजित कार्यक्रम में इस कार्ड का अनावरण किया। इस अवसर पर प्रकाश जावेडकर ने कहा कि मोदी सरकार का लक्ष्य सामान्य शिक्षा को सशक्त कर देश में शिक्षा क्षेत्र को मजबूत करना है। सरकार का लक्ष्य सभी के लिए गुणवत्ता परख शिक्षा सुनिश्चित करना भी है। केरल में स्थित केन्द्रीय विद्यालय ने अन्य राज्यो के मुकाबले अधिक गुणवत्ता प्रदर्शित की है। 
      उन्होंने कहा कि बच्चों को अधिक सम्मिलित करने की प्रणाली बनाने की आवश्यकता है। समारोह के दौरान प्रकाश जावेडकर ने केन्द्रीय विद्यालय के छात्रों से बातचीत भी की। समारोह में जिलाधिकारी मोहम्मद वाई शफीरुल्ला और केन्द्रीय विद्यालय के अपर आयुक्त यू एन खावरे के साथ-साथ अन्य विशिष्ट अतिथियों ने भी भाग लिया। 
       इस दौरान स्वस्थ बच्चे स्वस्थ भारत प्रदर्शनी और बच्चों द्वारा योग का प्रदर्शन भी किया गया। स्वस्थ बच्चे स्वस्थ भारत कार्यक्रम में विभिन्न क्षमताओ और सभी आयु वर्ग वाले बच्चों को विस्तृत और सम्मिलित रिपोर्ट कार्ड प्रदान किया जायेगा। कार्यक्रम का लक्ष्य अध्यापकों और माता पिता को बेहतर स्वास्थ्य और तंदुरुस्ती के महत्व पर जागरूक करने के साथ-साथ हर दिन एक घंटा खेलने के प्रति प्रोत्साहित करना है। 
      स्वस्थ बच्चे स्वस्थ भारत कार्यक्रम में ओलम्पिक और पैरालंपिक के मूल्यों को आत्मसात करने का लक्ष्य भी रखा गया है।बच्चों के बीच बचपन को फिर से वापस लाने,शारीरिक गतिविधियों और मनोरंजनात्मक खेलों को शिक्षण पद्धति का अहम भाग बनाने,विभिन्न खेलों में उत्कृष्ठ प्रदर्शन करने वाले छात्रों को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ आंकड़ों को एकत्र और विश्लेषण करने के लिए प्रौद्योगिकी का प्रयोग कार्यक्रम के उदेश्यों में सम्मिलित है।

तीन तलाक पर सर्वोच्‍च न्‍यायालय के फैसले का स्‍वागत

        प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने तीन तलाक पर सर्वोच्‍च न्‍यायालय के फैसले का स्‍वागत किया है।

       इस फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे मुस्लिम महिलाओं को समानता का अधिकार मिलता है और यह महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक प्रभावशाली उपाय है।
   प्रधानमंत्री ने कहा, ‘तीन तलाक पर माननीय सर्वोच्‍च न्‍यायालय का फैसला ऐतिहासिक है। इससे मुस्लिम महिलाओं को समानता का अधिकार मिलता है और यह महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक प्रभावशाली उपाय है’।

संसद व राज्‍य विधानसभाओं में नियमित अवरोध चिंता का विषय

         भारत के उपराष्‍ट्रपति एम. वैंकेया नायडू ने संसद व राज्‍य विधानसभाओं में नियमित अवरोध पर चिंता जताई है। उन्‍होंने सांसदों और विधायकों को सदन की कार्यवाही ठप करने की बजाय विषय पर चर्चा करने और उसके बाद फैसला करने का सुझाव दिया। 

       नायडू हैदराबाद में तेलंगाना सरकार द्वारा अपने स्‍वागत में आयोजित एक समारोह को संबोधित कर रहे थे। उपराष्‍ट्रपति ने पूर्व राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी के डिस्‍कस, डिबेट और डिसाइड के सुझाव को याद किया। 
    उन्‍होंने कहा कि चौथे डी यानि डिसरप्‍ट के लिए कहीं कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। उन्‍होंने विधायकों से लोगों से लगातार मिलते रहने और देश के विकास को तेज करने के लिए प्रभावी कानून लाने का आह्वान किया। नायडू ने दो तेलुगु भाषी राज्‍यों के मुख्‍यमंत्रियों को सलाह दिया कि वे आपस में मिलकर अपनी समस्‍याएं निपटाएं और तेलुगु भाषा के संवर्द्धन के लिए काम करें। 
     उन्‍होंने दोनों मुख्‍यमंत्रियों से तेलुगु राज्‍यों के पुराने वैभव को फिर से हासिल करने का आग्रह किया। हैदराबाद से अपने जुड़ाव को याद करते हुए उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि वे पिछले 40 वर्षों से इस ऐतिहासिक शहर में रहे और यहीं उनका राजनीतिक जीवन फला-फूला। तेलंगाना की समृद्ध संस्‍कृति और इतिहास को श्रद्धांजलि देते हुए उन्‍होंने कहा कि यह भूमि संघर्षों और आंदोलनों के लिए जानी जाती है। 
      स्‍वतंत्रता संग्राम के दौरान तेलंगाना के लोगों के योगदान की प्रशंसा करते हुए उन्‍होंने निजाम और रजाकरों से किए गए संघर्ष को याद किया। तेलंगाना के व्‍यंजनों को याद करते हुए उन्‍होंने कहा कि हैदराबाद बिरयानी और हलीम पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। 
         उन्‍होंने कहा कि सभी लोगों को महात्‍मा गांधी के रामराज्‍य की स्‍थापना के सपने को पूरा करने की दिशा में काम करना चाहिए। उन्‍होंने स्‍वराज को सुराज में बदलने पर जोर दिया। इस मौके पर तेलंगाना के राज्‍यपाल ईएसएल नरसिम्‍हन, मुख्‍यमंत्री के चंद्रशेखर राव, केंद्रीय श्रम एवं रोजगार राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) बंडारू दत्‍तात्रेय, उपमुख्‍यमंत्री एम.डी. मोहम्‍मद अली, उपमुख्‍यमंत्री कादियाम श्रीहरि सहित कई अन्‍य बड़ी हस्‍तियां मौजूद थी।

लद्दाख स्‍काउट्स बटालियनों व लद्दाख स्‍काउट्स रेजिमेंटल सेन्‍टर को निशान

        राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पांचों लद्दाख स्‍काउट्स बटालियनों और लद्दाख स्काउट्स रेजिमेंटल सेन्टर को निशान प्रदान किए।

     इस अवसर पर राष्‍ट्रपति ने कहा कि जम्‍मू कश्‍मीर राज्‍य में लेह का दौरा, राष्‍ट्रपति का पदभार ग्रहण करने के बाद दिल्‍ली से बाहर यह उनकी प्रथम यात्रा है। सशस्‍त्र बलों के सर्वोच्‍च कमांडर होने के नाते उन्‍होंने अपनी इस यात्रा को देश के सशस्‍त्र बलों को समर्पित किया। राष्‍ट्रपति ने कहा कि लद्दाख स्‍काउट्स को भारतीय सेना का हिस्‍सा बने 54 वर्ष हो चुके हैं। इस रेजिमेंट का यह सफर शौर्य, सम्‍मान और कीर्ति की गाथाओं से भरपूर रहा है। 
       इस रेजिमेंट की स्‍थापना 1947-48 में पाकिस्‍तानी क‍बालियों के हमले के समय हुई और लद्दाख के लोगों ने अपनी मातृभूमि की रक्षा का संकल्‍प लिया। यह पराक्रम आज भी समूचे देश के लिए गर्व का विषय है। राष्‍ट्रपति ने कहा कि आधी सदी से कुछ ज्‍यादा अवधि के दौरान यह रेजिमेंट विशिष्‍ट वीरता और असाधारण सेवाओं के लिए 605 सम्‍मान और पदक प्राप्‍त कर चुकी है। 
        यह रेजिमेंट के जवानों के अदम्‍य साहस और भावना का प्रमाण है और यह हमारे सशस्‍त्र बलों के सभी जवानों और अधिकारियों के लिए आदर्श हैं। उन्‍होंने अनेक युद्धों और कार्रवाइयों के दौरान विशिष्‍ट पहचान बनाई और खेलों, रोमांचक गतिविधियों और पेशेवर चुनौतियों में बेहतरीन प्रदर्शन किया। राष्‍ट्रपति ने कहा कि निशान प्रदान करने के समारोह के दौरान वे लद्दाख स्‍काउट्स रेजिमेंट के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करना चाहते हैं। 
     उनके लहू और बलिदान ने हमारी संप्रभुता की रक्षा की है, हमारे राष्‍ट्र को गौरव दिलाया है तथा हमारी जनता को नुकसान पहुंचने से बचाया है। उन्‍होंने रेजिमेंट के सभी पूर्व सैनिकों और सेवारत जवानों को उनकी कर्तव्‍य निष्‍ठा और पेशेवर आचरण के लिए बधाई दी।
     इस अवसर पर उपस्थित गणमान्‍य लोगों में जम्‍मू कश्‍मीर के राज्‍यपाल एन.एन. वोहरा, मुख्‍यमंत्री सुश्री मेहबूबा मुफ्ती सईद, उपमुख्‍यमंत्री निर्मल कुमार सिंह, जम्‍मू कश्‍मीर सरकार के अन्‍य मंत्रियों के साथ ही साथ थलसेना अध्‍यक्ष बिपिन रावत शामिल थे। बाद में राष्‍ट्रपति ने लेह के महाबोधि इंटरनेशनल मेडिटेशन सेंटर में बुद्धा पार्क फॉर वर्ल्‍ड पीस की आधारशिला रखी।    

Monday, 21 August 2017

लैंडिंग क्राफ्ट यूटिलिटी एमके-4 के दूसरे जहाज की पोर्ट ब्लेयर में शुरूआत

        अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के लेफ्टिनेंट गवर्नर डॉ. जगदीश मुखी ने पोर्ट ब्लेयर में भारतीय नौसेना में आईएन एलसीयू एल52 को शामिल किया। भारतीय नौसेना में शामिल होने वाली आईएन एलएसयू एल52 दूसरी लैंडिंग क्राफ्ट यूटिलिटी (एलसीयू) एमके-4 के श्रेणी की है।

     इस जहाज को गार्डेन रीच शिप बिल्डोर्स एंड इंजीनियर्स, कोलकाता द्वारा स्वे्दशी डिजाइन से निर्मित किया गया है। एल52 को नौसेना में शामिल किया जाना देश की स्वदेशी डिजाइन और जहाज निर्माण क्षमता को दर्शाता है। एलसीयू एमके-4 जहाज एक ऐसा जहाज है, जो मुख्य लड़ाकू टैंकों, बख़्तरबंद वाहनों, सैनिकों और उपकरणों को जहाज से किनारे तक लाने में प्राथमिक भूमिका निभाता है। 
      इन जहाजों को अंडमान और निकोबार कमान में रखा जाएगा। इन्हें समुद्र तट पर संचालन, तलाशी व बचाव, आपदा राहत संचालन, आपूर्ति और पुनःपूर्ति एवं निकासी जैसे कामों को पूरा करने के लिए तैनात किया जा सकता है। 
       कमांडर कौशिक चटर्जी की कमान वाले इस जहाज में 05 अधिकारी और 46 नाविक होंगे। इसके अलावा 160 सैनिक भी होंगे। यह जहाज मुख्या युद्धक टैंकों अर्जुन, टी72 और अन्यर वाहनों जैसे विभिन्नज प्रकार के युद्ध उपकरणों के परिवहन में सक्षम हैं। यह जहाज अत्यायधुनिक उपकरणों और एकीकृत ब्रिज सिस्टीम (आईबीएस) एवं समेकित प्लेरटफॉर्म मैनेजमेंट सिस्टयम (आईपीएमएस) जैसे उन्नीत सिस्टम से सुसज्जित है। 
      इसी श्रेणी के बाकी 6 जहाजों का निर्माण जीआरएसई, कोलकाता में अंतिम चरणों में है। इन्हें अगले दो वर्षों में नौसेना में शामिल किया जाना है। इनके शामिल किए जाने से देश की समुद्री सुरक्षा की जरूरतें पूरी करने में मदद मिलेगी और यह प्रधानमंत्री के 'मेक इन इंडिया' अभियान के अनुरूप है।

जलवायु परिवर्तन विश्व के लिए एक गंभीर मसला

         केन्‍द्रीय विद्युत, कोयला, नवीकरणीय ऊर्जा और खान राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) पीयूष गोयल ने यहां तीन दिन तक चलने वाली 8वीं विश्व नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकी कांग्रेस में भाग ले रहे प्रतिनिधियों को संबोधित किया। 

     गोयल ने इस सम्‍मेलन के उदघाटन सत्र के दौरान एनर्जी एंड एनवायरमेंट फाउंडेशन ग्‍लोबल एक्‍सीलेंस अवार्डस 2017 भी प्रदान किये। इस वार्षिक सम्‍मेलन की परिकल्‍पना और योजना ‘2022 तक सब के लिए ऊर्जा स्‍वतंत्रता और बिजली’ प्राप्‍त करने के भारत के विजन की पृष्‍ठभूमि में तैयार की गई है। 
     यह सम्‍मेलन स्‍वच्‍छ, विश्‍वसनीय और किफायती ऊर्जा आपूर्तियां सुनिश्चित करने के लिए नवीन हरित प्रौद्योगिकियों पर ध्‍यान केन्द्रित करता है। यह विशेषज्ञों, निवेशकों और अन्‍य हितधारकों यथा सार्वजनिक और निजी क्षेत्र, सलाहकार समूहों, सरकारों, गैर सरकारी संगठनों, गैर लाभकारी संगठनों, पर्यावरणविदों और शिक्षाविदों को एक मंच पर लाते हुए सूचना का आदान-प्रदान करने, अनुभव और बेहतरीन पद्धतियों को साझा करने का अवसर प्रदान करता है।
      इस अवसर पर गोयल ने कहा कि पिछले 10 से 15 वर्षों में दुनियाभर में ग्रीन हाउस गैसों के उत्‍सर्जन में वृद्धि होने के कारण वातावरण की गुणवत्‍ता में तेजी से गिरावट देखी गई है। यह संभवत: आज मानवता के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती है। गोयल ने कहा कि सौभाग्‍य से, पेरिस समझौते के बाद समूचे विश्‍व ने स्‍वीकार किया है कि जलवायु परिवर्तन एक गंभीर मसला है। 
         इसको दुनियाभर में मिशन मोड में हल किये जाने की आवश्‍यकता है। गोयल ने सूचित किया कि भारत इस चुनौती से निपटने के लिए वैश्विक मंच पर अनेक अनुबंधों की अगुवाई कर रहा है, जिनमें अंतर्राष्‍ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए), मिशन इनोवेशन, ऊर्जा क्षेत्र के त्‍वरित डी-कार्बनिज़ेशन के संबंध में वैश्विक अनुबंध, अफ्रीकी नवीकरणीय ऊर्जा पहल शामिल हैं। जी-20 देशों के ऊर्जा मंत्री अन्‍य बातों के अलावा, इस बात का पता लगाने के लिए एकजुट हो रहे हैं कि विश्‍व के बेहतर भविष्‍य के लिए क्‍या किया जा सकता है। 
       गोयल ने 3-डी के बारे में भी चर्चा की, जिस पर विश्‍व को अपनी ऊर्जा केन्द्रित करने की जरूरत है। ये 3-डी हैं, ऊर्जा क्षेत्र के डी-कार्बनिज़ेशन का साझा लक्ष्‍य, ऊर्जा क्षेत्र का और अधिक विकेन्‍द्रीकरण करने की संभावनाओं पर विचार करना तथा ऊर्जा क्षेत्र का अधिक से अधिक डिजिटीकरण। उन्‍होंने कहा, ‘हर गुजरते दिन के साथ समय घटता जा रहा है और हमें स्‍वच्‍छ ऊर्जा को बढ़ावा देने तथा ग्रीन हाउस गैसों के उत्‍सर्जन में कमी लाने के लिए आपस में तालमेल बैठाते हुए प्रयासों में तेजी लाने की आवश्‍यकता है।
       अगर हमने इन 3-डी का मामला नहीं सुलझाया, तो मुझे चिंता है कि विश्‍व को वैश्विक अर्थव्‍यवस्‍था में मंदी का सामना करना पड़ सकता है।’ नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में प्रौद्योगिकीय प्रगति के बारे में चर्चा करते हुए गोयल ने कहा, ‘मुझे पक्‍का यकीन है कि प्रौद्योगिकी का यह प्रारंभ विशेषकर भारत जैसी उभरती और बढ़ती अर्थव्‍यवस्‍थाओं के लिए, नवीकरणीय ऊर्जा को ज्‍यादा आकर्षक बनाएगा, विशेषकर उस समय जब ऊर्जा के पारम्‍परिक स्रोतों के अन्‍य स्‍वरूपों की तुलना में नवीकरणीय ऊर्जा की लागत कम है।’
        इस अवसर पर उपस्थित अन्‍य गणमान्‍य व्‍यक्तियों में के एस पोपली, सीएमडी भारतीय नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण लिमिटेड (आईआरईडीए), उपेन्‍द्र त्रिपाठी, डीजी, आईएसए तथा नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की अनेक राष्‍ट्रीय और अंतर्राष्‍ट्रीय हस्तियां मौजूद थीं।

लैंगिक भेदभाव जड़ से समाप्त करना आवश्यक

         केंद्रीय सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्री डी वी सदानंद गौड़ा ने देश में लैंगिक भेदभाव के जड़ पर प्रहार करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि समाज में व्यवहार परिवर्तन लाना आवश्यक है।

      सदानंद गौड़ा नई दिल्ली में सतत विकास लक्ष्यों के लैंगिक संकेतकों के लिए डाटा एकत्रीकरण के बारे में दो दिन के राष्ट्रीय परामर्श सम्मेलन का उद्घाटन कर रहे थे। 
     उन्होंने कहा कि यद्पि देश को अनेक सामाजिक बुराइयों से लड़ने में सफलता मिली है। कई क्षेत्रों मे महत्वपूर्ण प्रगति हुई हैं लेकिन देश के सभी कोने तक विकास का लाभ सुनिश्चित करने के लिए बहुत कुछ किया जाना शेष है। 
     उन्होने कहा कि सरकार विकास के लाभ सभी वर्गों के लोगों, विशेष कर समाज से वंचित वर्गों की महिलाओं, तक सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि भारत का जनसांख्यिकी लाभ अनूठा है क्योंकि कुल आबादी की तुलना में कामकाजी आबादी की वृद्धि दर अधिक है। जनसांख्यिकी लाभ का यह सिलसिला 2040 तक बने रहने की संभावना है।
        गौड़ा ने कहा कि गरीबी कम करने में आर्थिक विकास के लाभों को पहुंचाने में उत्पादक रोजगार महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने रोजगार क्षेत्र में महिला श्रम शक्ति की भागीदारी में आ रही गिरावट पर चिंता व्यक्त की और कहा कि इस समस्या से निपटने के लिए नीति बनाने की आवश्यकता है। लैंगिक समानता को बढ़ावा देने और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए सरकार के प्रयासों की चर्चा करते हुए सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्री ने बेटी बचाव, बेटी पढ़ाओ, स्टैंड अप इंडिया, स्वच्छ भारत अभियान तथा स्वच्छ ईंधन प्रदान कर महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य की रक्षा करने वाली प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का जिक्र किया। 
      उन्होंने शिक्षा के अधिकार अधिनियम, न्यूनतम मजदूरी अधिनियम का भी जिक्र किया। समान पारिश्रमिक अधिनियम, 1976 में समान कार्य के लिए पुरुषों और महिलाओं को समान पारिश्रमिक देने का प्रावधान है। गौड़ा ने कहा कि हाल में बनाया गया मॉडल शॉप और प्रतिष्ठान अधिनियम महिलाओं को रात में काम करने की अनुमति देता है। इस अधिनियम में रात्रि पाली में काम करने वाली महिलाओं की पर्याप्त सुरक्षा और कार्य संबंधी अन्य प्रावधान हैं। 
    संसद द्वारा पारित मातृत्व लाभ संशोधन विधेयक, 2016 की चर्चा करते हुए गौड़ा ने कहा कि भुगतान वाला मातृत्व अवकाश 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह कर दिया गया है। दो दिन के परामर्श सम्मेलन से सतत विकास लक्ष्यों के लिए लैंगिक संकेतकों के लिए पाई जाने वाली खाई को पाटने के लिए विचार करने पर सभी हितधारकों को एक मंच प्राप्त होगा।
      विशेषज्ञों के साथ परामर्श करने से नई नीतियां बनेंगी और डाटा प्रणाली मजबूत होगी ताकि लैंगिक दृष्टिकोण से विकास के कदम उठाए जा सकें। भारत के मुख्य सांख्यिकी अधिकारी और सांख्यिकी तथा क्रियान्वयन मंत्री डॉ.टी सीए अनंत ने कहा कि एसडीजी बहुत बड़ा लक्ष्य है।
    इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सरकार के नीति निर्माताओं, सांख्यिकी विशेषज्ञों और सिविल सोसाइटी के बीच निरंतर मूल्यांकन आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नीति के संदर्भ में तथा प्रासांगिक डाटा के संबंध में निरंतर मूल्यांकन आवश्यक है।
        परामर्श सत्र को महिला और बाल विकास मंत्रालय के सचिव राकेश श्रीवास्तव तथा महानिदेशक (सामाजिक सांख्यिकी), केंद्रीय सांख्यिकी अधिकारी, सहायक सचिव संयुक्त राष्ट्र महासभा डॉ. देवेन्द्र वर्मा तथा संयुक्त राष्ट्र की उप कार्यकारी निदेशक सुश्री लक्ष्मीपुरी ने भी संबोधित किया।

डोकलाम गतिरोध का जल्‍द समाधान होने की आशा

      केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने आशा व्‍यक्‍त की कि भारत और चीन के बीच डोकलाम गतिरोध का समाधान जल्‍द ही हो जाएगा।

     उन्‍होंने दावा किया कि हमारे सुरक्षा बल देश की सरहदों की हिफाजत करने में पूरी तरह सक्षम हैं। राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत का ना तो कभी कोई विस्‍तारवादी मंसूबा रहा है और ना ही उसने किसी देश पर हमला किया है। उन्‍होंने कहा कि हम टकराव नहीं, शांति चाहते हैं। 
   यहां आईटीबीपी की भव्‍य पाइपिंग सेरेमनी के दौरान अपने संबोधन में केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि हम अपने सभी पड़ोसी देशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध चाहते हैं। उन्‍होंने कहा कि इसी मंशा के साथ प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने अपनी सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेने के लिए सभी पड़ोसी देशों के नेताओं को आमंत्रित किया था।
     पूर्व प्रधानमंत्री अटल बि‍हारी वाजपेयी का उल्‍लेख करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि हम मित्र बदल सकते हैं लेकिन पड़ोसी नहीं। उन्‍होंने कहा कि आईटीबीपी में पदोन्‍नतियां प्रदान करने में हुए लंबे विलंब की ओर इशारा करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि अनुशासित आईटीबीपी कर्मियों ने इस विलंब को बहुत ही संयम के साथ बर्दाश्‍त किया। ये पदोन्‍नतियां 2011 से लंबित रही।
       उन्‍होंने भरोसा दिलाया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय सीएपीएफ के आवास और कल्‍याण संबंधी मामलों के अलावा उनके करियर की संभावनाओं को बेहतर बनाएगा। केंद्रीय गृह राज्‍य मंत्री किरेन रिजिजु ने कहा कि आज का कार्यक्रम आईटीबीपी कर्मियों के नैतिक बल को बढ़ावा देने में योगदान देगा। उन्‍होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय में बुनियादी तौर पर नीति निर्माताओं और उनका कार्यान्‍वयन करने वालों के बीच तालमेल बैठाया गया है। 
        आईटीबीपी के महानिदेशक आर के पचनंदा ने कहा कि छह वर्ष से ज्‍यादा अरसे से लंबित 1654 आईटीबीपी कर्मियों की बड़े पैमाने पर पदोन्‍नति गृह मंत्रालय के निरंतर प्रयासों से संभव हो सकी है। इस कार्यक्रम के दौरान गुप्‍तचर ब्‍यूरो के निदेशक राजीव जैन और सीएपीएफ के महानिदेशक भी उपस्थित थे।

Sunday, 20 August 2017

आतंकवाद के नियन्त्रण में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी की भूमिका महत्त्वपूर्ण

        केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने उत्तर प्रदेश के लखनऊ में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) के कार्यालय और आवास परिसर का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी उपस्थित थे। 

       इस अवसर पर राजनाथ सिंह ने कहा कि एनआईए अर्थात् राष्ट्रीय जाँच एजेंसी आतंकवाद के नियन्त्रण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होने दृढतापूर्वक कहा कि पिछले तीन वर्षों में आतंकवाद और नक्सलवाद की घटनाओं में कमी आई है। उन्होने कहा कि स्वायत निकाय होने के बावजूद राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) बिना किसी हस्तक्षेप के अपना कार्य करती है।
         राजनाथ सिंह ने कहा कि आतंकवाद के लिए धन मुहैया कराने वालों की जाँच में भी एनआईए ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राज्य की एटीएस, आतंकवाद से सम्बद्ध घटनाओं से निपटने के लिए एनआईए के साथ समन्वय रखती है। 
     उन्होने यह भी कहा कि नवीन तकनोलॉजी, समन्वय और सूचनाओं के आदान-प्रदान से आतंकवाद से प्रभावी तरीके से निपटा जा सकता है। एनआईए के महानिदेशक शरद कुमार उत्तर प्रदेश के डीजीपी सुलखान सिंह एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति भी इस अवसर पर उपस्थित थे।