Sunday, 15 January 2017

बच्चों को गोद लेने के लिए अब नया कानून


          किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 68 (सी) के तहत अधिदेशित 'केन्द्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण' (सीएआरए) द्वारा तैयार किया गया दत्तक ग्रहण विनियमन, 2017 को अधिसूचित कर दिया गया है। 

         दत्तक ग्रहण विनियमन, 2017 दत्तक ग्रहण की जगह लेंगे। दत्तक ग्रहण विनियमन की रूप रेखा दत्तक ग्रहण एजेंसियों और भावी दत्तक माता पिता (पीएपी) सहित सीएआर, अन्य हितधारकों के सामने आ रहे। मुद्दों और चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए बनायी गयी है। यह भविष्य में गोद लेने की प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाने के द्वारा देश में गोद लेने के कार्यक्रम को और मजबूत बनाएगा। पारदर्शिता, बच्चों के प्रारंभिक विसंस्थागतकरण, माता-पिता के लिए सुविज्ञ विकल्प, नैतिक प्रथाओं और गोद लेने की प्रक्रिया में सख्ती से परिभाषित समयसीमा दत्तक ग्रहण विनियमन के प्रमुख पहलू हैं।

            दत्तक ग्रहण के विनियमन 2017 की मुख्य विशेषताएं, विनियमनों में देश के भीतर और विदेशों में रिश्तेदारों द्वारा गोद लेने की प्रक्रिया से संबंधित प्रक्रियाओं को परिभाषित किया गया है। गृह अध्ययन रिपोर्ट की वैधता दो साल से बढ़ाकर तीन साल कर दी गई है। निर्दिष्ट बच्चे को आरक्षित करने के बाद मिलान और स्वीकृति के लिए घरेलू पीएपी को उपलब्ध समयसीमा को वर्तमान पंद्रह दिनों से बढ़ाकर बीस दिन कर दिया गया है। जिला बाल संरक्षण इकाई (डीसीपीयू) के पास व्यावसायिक रूप से योग्य या प्रशिक्षित सामाजिक कार्यकर्ताओं का एक पैनल होगा। 

           न्यायालय में दायर किए जाने वाले मॉडल दत्तक ग्रहण आवेदनों समेत विनियमनों से संलग्न 32 अनुसूचियां हैं। यह न्यायालय के आदेश प्राप्त करने में वर्तमान में लगने वाली  देरी में काफी हद तक कमी लाएंगी। नया दत्तक ग्रहण विनियमन, 2017 महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।

‘एसईजेड इंडिया’ एप लॉन्च, ट्रेड-ट्रांजेक्शन ऑनलाइन


          वाणिज्य सचिव ने ‘एसईजेड इंडिया’ मोबाइल एप लॉन्च किया है। वाणिज्य विभाग के एसईजेड प्रभाग ने अपनी व्यापक ई-गवर्नेंस पहल अर्थात एसईजेड ऑनलाइन सिस्टम द्वारा विशेष आर्थिक क्षेत्रों (एसईजेड) के लिए मोबाइल एप का विकास किया है।

          वाणिज्य सचिव ने एप लॉन्च किया। कहा कि यह एप एसईजेड इकाईयों और डेवलपरों को सूचनाओँ को आसानी से प्राप्त करने तथा एसईजेड ऑनलाइन सिस्टम पर उनकी लेनदेन को ट्रैक करने में सहायता प्रदान करेगा। अब एसईजेड डेवलपर और इकाईयां एसईजेड ऑनलाइन सिस्टम के माध्यम से अपने लेनदेनों को डिजिटल तरीके से प्रस्तुत कर सकते हैं। एसईजेड इंडिया मोबाइल एप के जरिए उसकी स्थिति को ट्रैक कर सकते हैं। यह एप एसईजेड डेवलपरों, इकाईयों, अधिकारियों एवं अन्य लोगों के लिए इस्तेमाल में लाए जाने हेतु एंड्रायड प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। इस एप के एसईजेड इनफॉरमेशन, एसईजेड ऑनलाइन ट्रांजेक्शन, ट्रेड इनफॉरमेशन एवं कॉन्टेक्ट डिटेल्स चार खंड हैं। 

           इन चारों खंडों की मुख्य विशेषताएं एसईजेड इनफॉरमेशन-यह एसईजेड अधिनियम 2005, एसईजेड नियम 2006, एमओसीआई परिपत्र, एसईजेड एवं इकाईयों के विवरण आदि का एक सार-संग्रह है। सभी पहलुओं पर व्यापक ताजा विवरण प्रस्तुत करता है। ट्रेड इनफॉरमेशन-यह प्रावधान विदेश व्यापार नीति, प्रक्रियाओं की लघु पुस्तिका, ड्युटी कैलकुलेटर, सीमा शुल्क एवं उत्पाद शुल्क अधिसूचनाएं एवं एमईआईएस दरों जैसी महत्वपूर्ण सूचना - टूल्स तक पहुंच प्रदान करता है। कॉन्टेक्ट डिटेल्स - इस खंड में सभी विकास आयुक्त कार्यालयों, डीजीएफटी, डीजी प्रणाली, डीजीसीआई एवं एस तथा एसईजेड ऑनलाइन के संपर्क विवरण दिए गए हैं। एसईजेड ऑनलाइन ट्रांजेक्शन - यह एक गतिशील उपविकल्प सूची है जो एंट्री बिल-शिपिंग बिल प्रोसेसिंग स्टेटस को ट्रैक करता है। उनका सत्यापन भी करता है। यह एप आईसीईजीएटीई की ईडीआई प्रणाली में ‘एंट्री बिल-शिपिंग बिल’ के समेकन तथा प्रोसेसिंग के स्टेटस को ट्रैक करने में आयातकों-निर्यातकों की मदद भी करता है।

भारत में खेलो इंडिया राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा


         युवा मामले और खेल मंत्रालय के तत्वाधान में खेलो इंडिया राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा का आयोजन 15 से 21 जनवरी, 2017 के बीच किया जाएगा। 

       युवा मामले और खेल मंत्रालय के तत्वाधान में तैराकी, साईकिलिंग और कुश्ती के लिए खेलो इंडिया राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा का आयोजन 15 से 21 जनवरी, 2017 के बीच किया जाएगा। युवा मामले और खेल राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) विजय गोयल नई दिल्ली के डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्विमिंग पूल परिसर में इन प्रतिस्पर्धाओं का शुभारंभ करेंगे। इन राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं में 25 से ज्यादा राज्यों-केंद्रशासित प्रदेशों के भाग लेने की उम्मीद है। भारतीय खेल प्राधिकरण के द्वारा आयोजित होने जा रही खेलो इंडिया राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं में करीब 1,000 प्रतिभागियों के शामिल होने की उम्मीद है। विजय गोयल ने कहा कि खेलो इंडिया राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं के आयोजन का अभिप्राय मात्र जमीनी स्तर पर खेलों को प्रोत्साहन देना ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए नवोदित प्रतिभाओं को एक मंच प्रदान करना है।

             कहा कि इस प्रतिस्पर्धा के दौरान प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को पहचान कर उन्हें अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट बनाने की प्रक्रिया भी की जाएगी। उन्होंने कहा कि खेलो इंडिया योजना खेलों के लिए महत्वपूर्ण रूप से परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। इससे न सिर्फ खेल बुनियादी ढांचे के निर्माण में मदद मिलेगी बल्कि नवोदित प्रतिभाओं को अपनी क्षमताएं साबित करने का अवसर भी मिलेगा। खेलो इंडिया राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में साईकिलिंग, कुश्ती, तैराकी है।

गणतंत्र दिवस परेड में देश  की गौरवशाली ‘विविधता में एकता’


         गणतंत्र दिवस परेड समारोह में तीन सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय और नागपुर के दक्षिण, मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र से 600 से अधिक छात्र एवं छात्राएं भाग ले रहे हैं।

        ‘तिरंगा साक्षी है’ विषय के साथ राष्ट्रीय तिरंगे पर आधारित एक नृत्य का प्रदर्शन दिल्ली के प्रीतमपुरा स्थित केंद्रीय विद्यालय के 162 छात्र और छात्राएं करेंगे। नृत्य प्रस्तुति से अपार आनंद और उत्साह का अनुभव होगा। साथ ही स्वतंत्रता सेनानियों की गौरवशाली वीरगाथाओं, भारतीय लोकतंत्र के गठन, भारतीयों के अपार स्नेह, महिला सशक्तिकरण और ऐसी ही अनगिनत उपलब्धियों के साक्षी रहे राष्ट्रीय ध्वज का संदेश भी देंगे। चिराग दिल्ली के सर्वोदय कन्या विद्यालय के 150 छात्र हमारे देश के युवाओं को समर्पित एक गीत और नृत्य का प्रदर्शन करेंगे, जिन्होंने देश को सफलता और विकास के पथ पर ले जाने का अटूट प्रयास किया है।

             युवा सहभागी इस प्रस्तुति से नागरिकों को वैश्विक मंच पर राष्ट्र को अग्रणी बनाने और प्रगति के पथ पर नेतृत्व करने और राष्ट्र के उत्थान में युवा शक्ति की सेवाओं को समर्पित करने का संदेश देंगे। नृत्य प्रदर्शन के दौरान ‘विविधता में एकता’ जैसी भारत की अनूठी विशेषता को भी प्रदर्शित किया जाएगा। नागपुर के दक्षिण-मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के 165 छात्र मध्य प्रदेश में लोकप्रिय ‘सैला कर्मा’ नृत्य की प्रस्तुति देंगे, जिसका शुभारंभ भगवान सूर्य देव की उपासना से होता है। सैला नृत्य मध्यप्रदेश में डिंडोरी जिले की गोंड जनजाति का लोकप्रिय नृत्य है।

             दिल्ली के रोहिणी में सेक्टर-5 स्थित माउंट आबू पब्लिक स्कूल के 150 छात्र असमी नृत्य शैली पर आधारित एक नृत्य प्रस्तुति देंगे।  यह प्रस्तुति प्रसिद्ध असमी नृत्य शैली ‘सत्त्रिया’ पर आधारित है। इस नृत्य के माध्यम से माउंट आबू पब्लिक स्कूल के ऊर्जावान छात्र सर्वशक्तिमान ईश्वर और उनकी विशिष्ट संरचना के प्रति सकारात्मक जीवन शक्ति के भाव को प्रस्तुत करेंगे।

‘मृतक’ पार्थिव शरीर इंडिगो में निःशुल्क


           केन्द्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास, युवा मामले, पीएमओ, परमाणु उर्जा एवं अंतरिक्ष, कार्मिक, लोक शिकायत पेंशन राज्य मंत्री जितेन्द्र सिंह ने पूर्वोत्तर के विभिन्न स्थलों पर ‘मृतक’ पार्थिव शरीर को हवाई जहाज के माध्यम निःशुल्क ले जाने के इंडिगो के फैसले की सराहना की है।

         उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में सक्रिय सभी एयरलाइनों से एक अपील की गयी थी। इंडिगो ने इस पर शीघ्र ही अपनी सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। इंडिगो एयरलाइन्स के उपाध्यक्ष विक्रम चोना ने व्यक्तिगत रूप से डॉ. जिंतेन्द्र सिंह से मुलाकात की। इस पहल को ‘आखिरी आहूति’ के रूप में वर्णित करते हुए पूर्वोत्तर क्षेत्र के उन सभी हवाई अड्डों पर ‘मृतक’ पार्थिव शरीर को हवाई जहाज के माध्यम से निःशुल्क ले जाने का फैसला किया है। जहां इंडिगो संचालनरत है।

           कहा गया कि वर्तमान में इंडिगो दिल्ली से गोवाहटी, अगरतला, डिब्रूगढ़, दीमापुर और इंफाल के लिए उड़ाने संचालित कर रही है। विक्रम चोना ने डॉ. जिंतेन्द्र सिंह को यह जानकारी दी कि जब कभी इंडिगो पूर्वोत्तर के अन्य स्थलों पर अपनी उड़ान संचालित करेगा ऐसी ही निःशुल्क सुविधा उन हवाई मार्गों पर भी प्रदान की जाएगी। जानकारी दी कि ऐसी पहली निःशुल्क सुविधा दिल्ली में रह रहे मणिपुर के निवासी को दी गयी थी, जिनका दुर्भाग्य से निधन हो गया। उनके पार्थिव शरीर को हवाई जहाज से इंफाल भेजा गया था। चोना ने इस पहल में दिल्ली पुलिस के संयुक्त आयुक्त और दिल्ली में पूर्वोत्तर के लोगों के नोडल ऑफिसर की ओर से मिले सहयोग की भी जानकारी दी। 

           डॉ. जितेंन्द्र सिंह ने पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय की ओर से इंडिगो एयरलाइन्स का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि दिल्ली में रह रहे पूर्वोत्तर के लोगों को अक्सर दुर्भाग्य की स्थिति का सामना करना पड़ता है, जब कभी उनके परिवार में किसी की मृत्यु हो जाती है। उन्होंने कहा कि वित्तीय समस्याओं के कारण मृतक के रिश्तेदार अक्सर मृतक के पार्थिव शरीर को पूर्वोत्तर ले जाने में असमर्थ होते हैं, जिसके परिणामस्वरूप मजबूरीवश ऐसे मृतकों का अंतिम संस्कार दिल्ली में ही करना पड़ता है।  डॉ. जितेंन्द्र सिंह ने कहा कि इंडिगो के द्वारा प्रकट किया गया यह भाव न केवल मानव चिंता का प्रतिबिंब है बल्कि सरकार और निजी क्षेत्रों के बीच सार्वजनिक निजी साझेदारी की दिशा में विभिन्न स्तरों और विभिन्न स्थितियों में नागरिकों को प्रदान की जा रही सेवाओं का भी विस्तार है।