Sunday, 30 April 2017

देश में वन सुरक्षा की चुनौतियाँ

           भारत विभिन्न प्रकार के वनों के साथ दुनिया में अत्यधिक विविधता वाले देशों में से एक है। देश का 20 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र वन क्षेत्र में है। राष्ट्रीय वन नीति (1988) का लक्ष्य भारत में वन क्षेत्र को कुल क्षेत्र के एक तिहाई तक लेकर आना है। 2015 में जारी भारत राज्य वन रिपोर्ट के मुताबिक, 2013-2015 के बीच कुल वन क्षेत्र में 5081 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि हुई है, जिससे की 103 मिलियन टन कार्बन सिंक की बढ़त दर्ज़ की गई है।

           मिजोरम में सबसे अधिक 93 प्रतिशत वन क्षेत्र है, कई उत्तर पूर्वी राज्यों में हरित आवरण में गिरावट दर्ज़ है। वनों की सुरक्षा और विकास के लिए देश को अपनी नीतियों को लागू करने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।   भारत में जंगलों का संरक्षण वन संरक्षण अधिनियम (1980) के कार्यान्वयन और संरक्षित क्षेत्रों की स्थापना के माध्यम से किया जाता है। भारत सरकार ने 597 संरक्षित क्षेत्रों की स्थापना की है जिनमें से 95 राष्ट्रीय उद्यान और 500 वन्यजीव अभयारण्य हैं। उपरोक्त क्षेत्र देश के भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 5 प्रतिशत हैं।

             विभिन्न प्रकार के वन और जंगली झाड़ियाँ बाघ, हाथियों और शेरों सहित विभिन्न वन्य जीवों की मेजबानी करते हैं। बढ़ती जनसंख्‍या के कारण वन आधारित उद्योगों एवं कृषि के विस्तार के लिए किये जाने वाले अतिक्रमण की वजह से वन भूमि पर भारी दबाव है। पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं के निर्माण के लिए वन संरक्षण और विकास परियोजना के पथांतरण के बीच बढ़ते संघर्ष वन संसाधनों के प्रबंधन की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है।

             देश में  लकड़ी की मांग तेजी से बढ़ रही है। 2005 में 58 मिलियन क्यूबिक मीटर से बढ़कर 2020 में 153 मिलियन क्यूबिक मीटर हो गई है। वन भण्डार की वार्षिक वृद्धि केवल 70 मिलियन क्यूबिक मीटर की लकड़ी की आपूर्ति ही कर सकती है, जिससे हमें अन्य देशों से कठोर लकड़ी आयात करने के लिए बाध्य होना पड़ता है। भारत में 67 प्रतिशत ग्रामीण परिवार घर का खाना पकाने के लिए जलाने की लकड़ी पर निर्भर करते हैं। जलाने वाली लकड़ी से निकलने वाले धुएं से सालाना लगभग 10 लाख लोगों की मृत्यु की सूचना प्राप्त होती है।

           समस्या को हल करने के लिए, प्रधानमंत्री एलपीजी स्कीम 'उज्ज्वला योजना' को पेट्रोलियम और गैस मंत्रालय द्वारा लागू किया गया है जो कि दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित बीपीएल परिवारों को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन प्रदान करता है। इसने ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में परिवारों तक साफ और कुशल ऊर्जा पहुंचाई है। खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) ने 'वन और ऊर्जा' थीम पर 2017 में विश्व वन दिवस मनाने का आह्वान किया है। इसका मुख्य लक्ष्य लकड़ी को अक्षय ऊर्जा के प्रमुख स्रोत के रूप में विकसित करना, जलवायु परिवर्तन की रोकथाम करना और टिकाऊ विकास को बढ़ावा देना है। 

           सामुदायिक लकड़ी संग्रहों को विकसित करने के साथ स्वच्छ और ऊर्जा कुशल लकड़ी के स्टोव उपलब्ध करवा कर, विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में लाखों लोगों को अक्षय ऊर्जा की सस्ती और विश्वसनीय आपूर्ति उपलब्ध कराई जा सकती है। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन के स्वतंत्र प्रभार के राज्य मंत्री के अनुसार "देश में दो प्रमुख वनीकरण योजनाएं हैं, एक तो राष्ट्रीय वनरोपण कार्यक्रम (एनएपी) और दूसरी ग्रीन इंडिया राष्ट्रीय मिशन (जीआईएम)। इन दोनों ही योजनाओं को संयुक्त वन प्रबंधन कार्यक्रम के तहत सहभागिता स्वरुप में लागू किया गया है।" एनएपी का उद्देश्य अवक्रमित वनों का पर्यावरण से जुड़ा उत्थान करना और जीआईएम का लक्ष्य वनों की गुणवत्ता में सुधार करने के साथ-साथ खेत और कृषि वानिकी सम्बंधित वनों को बढ़ाना है। 

            जीआईएम के तहत प्रतिवर्ष छह मिलियन हेक्टेयर अवक्रमित वन भूमि पर वृक्षारोपण किया जाना है। विकास उद्देश्यों के लिए उपयोग में लाई गई वन भूमि को पुनः वनीकृत करना वनीकरण के मुख्य स्तंभों में से एक है। संसद के दोनों सदनों ने 2016 में वनीकरण क्षतिपूर्ति विधेयक को पारित कर दिया है। 42,000 करोड़ रुपयों के प्रावधान के साथ देश में वन संसाधनों के संरक्षण, सुधार और विस्तार हेतु राज्यों को 6000 करोड़ रुपये का वार्षिक परिव्यय उपलब्ध कराया जाएगा। यह अधिनियम वनीकरण क्षतिपूर्ति कार्यक्रम को लागू करने के लिए केंद्र और राज्य दोनों ही स्तरों पर संस्थागत ढांचा उपलब्ध कराता है। 

            इसके अतिरिक्त यह लगभग 15 करोड़ दिवसों का प्रत्यक्ष रोज़गार उत्पन्न करेगा, जो देश के दूरदराज के वन क्षेत्रों में जनजातीय आबादी की सहायता भी करेगा। इन हरित योजनाओं को लागू करने में भारत को भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। जलवायु परिवर्तन रोपे गए पौधों के अस्तित्व को सीधे तरीके से प्रभावित करता है। शुष्क क्षेत्रों एवं रेगिस्तान का विस्तार एक अन्य बड़ी चुनौती है जिसका उचित हस्तक्षेप द्वारा सामना करना एक प्रमुख आवश्यकता है। वनीकरण के लिए एक सहभागिता मॉडल की अत्यंत आवश्यकता है। आदिवासी ज्ञान प्रणालियों की ताकत को पहचानते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, "अगर कोई है जिन्होंने जंगलों की रक्षा की है, तो वह हमारा आदिवासी समुदाय है, उनके लिए जंगलों की रक्षा आदिवासी संस्कृति का एक प्रमुख हिस्सा है।"

              उन्होंने लोगों का आह्वान कर उनसे प्रतिज्ञा करने को कहा कि वे सामूहिक रूप से वनों के संरक्षण और वृक्ष आवरण को बढ़ाने की तरफ कार्य करें। अधिक वन का मतलब जल की अधिक उपलब्‍धता, जो किसानों और भविष्य की पीढ़ियों के लिए लाभप्रद होगा। प्राचीन भारतीय परंपरा के अनुसार ऋषि-मुनि एवं अन्य विद्यान व्यक्ति वन से ऊर्जा ग्रहण करते हैं। रबींद्रनाथ टैगोर के अनुसार, वन पर आधारित जीवनशैली सांस्कृतिक विकास का उच्चतम स्वरूप है। ऋषि-मुनि वन में वृक्षों एवं पानी की धाराओं के पास रहते हुए उनसे बौद्धिक और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त करते थे। यद्यपि संयुक्त राष्ट्र खाद्य और कृषि संगठन ने अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस का मुख्य विषय 'वन से प्राप्त होने वाली लकड़ी ऊर्जा’ को बनाया है।

             भारतीय परंपरा वनों की जीवित ऊर्जा को अत्यंत महत्वपूर्ण दर्ज़ा और मूल्य प्रदान करती है, जो जीवन के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पुनर्जनन को प्राप्त करने में सहयोगी होती है। यह वनों और ऊर्जा के बीच के संबंधों को समझने का एक अधिक समग्र दृष्टिकोण लगता है।

आतंकवाद महामारी का रूप, समाज को कर रहा प्रभावित

            उपराष्‍ट्रपति एम.हामिद अंसारी ने कहा कि आतंकवाद महामारी का रूप ले चुका है। प्रत्‍येक समाज को प्रभावित कर रहा है। वे पांच दिन की आर्मिनिया और पोलैंड यात्रा से लौटते समय एयर इंडिया-वन विशेष विमान में मीडिया को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर सूक्ष्‍म, लघु और मझोले उद्यम राज्‍य मंत्री गिरिराज सिंह व अन्‍य विशिष्‍ट व्‍यक्ति भी मौजूद थे। 

           उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि आर्मिनिया और पोलैंड दोनों ही मित्र देश हैं। हम आपसी सहयोग में नये सिरे से दिलचस्‍पी उत्‍पन्‍न करने में सक्षम रहे हैं। उन्‍होंने कहा कि आर्मिनिया हालांकि छोटा सा देश है, लेकिन वह परंपरागत रूप से हमारा अभिन्‍न मित्र रहा है। पोलैंड का हवाला देते हुए उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि वह मध्‍य यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था है। हम उसके साथ व्‍यापार बढ़ा रहे हैं। उन्‍होंने कहा कि पोलैंड में भारतीय निवेश और भारत में पोलैंड की ओर से निवेश किया जा रहा है। 

            उन्‍होंने कहा कि पोलैंड के राष्‍ट्रपति और प्रधानमंत्री दोनों के साथ बातचीत के दौरान हमने कुछ विशिष्ट क्षेत्रों की पहचान की है, जहां दोनों देशों के बीच सहयोग या तो शुरू हो रहा है या फिर बहुत जल्‍द शुरू हो सकता है। उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि उन्‍होंने पोलैंड के नेताओं को सुझाव दिया है कि वे ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम के साथ जुड़ें और केवल विक्रेता बनने के स्‍थान पर भारत आधारित विक्रेता बने, जिससे उन्‍हें अतिरिक्‍त लाभ मिलेंगे। उन्‍होंने कहा कि पोलैंड ने इस सुझाव पर सकारात्‍मक प्रतिक्रिया व्‍यक्‍त की है। 

            उन्‍होंने कहा कि विचार-विमर्श बहुत ही केंद्रित और सकारात्‍मक रहा और इसके निष्‍कर्ष भी संतोषजनक रहे। उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि पोलैंड ने एशिया के कुछ बाजारों की पहचान प्राथमिकता वाले बाजारों के रूप में की है।

              भारत उन्‍हीं में से एक है। उन्‍होंने कहा कि इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए कई तरह की पहल किए जाने की अपेक्षा है। आर्मिनियाई नवाचार के साथ संभावनाओं का पता लगाने और परस्‍पर लाभ के लिए भारतीय प्रयासों के बारे में पूछे गए एक प्रश्‍न के उत्‍तर में उन्‍होंने कहा कि आर्मिनियाई नवाचार अच्‍छा है और भारत के प्रयास सही दिशा में है।

साइप्रस के साथ करीबी संबंधों को अ‍हमियत

             राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने राष्‍ट्रपति भवन में साइप्रस गणराज्‍य के राष्‍ट्रपति निकोस अनसतासियादेस की अगवानी की। उन्‍होंने साइप्रस के राष्‍ट्रपति के सम्‍मान में भोज भी दिया।

        भारत की प्रथम राजकीय यात्रा पर आए साइप्रस के राष्‍ट्रपति का स्‍वागत करते हुए श्री मुखर्जी ने कहा कि उनसे पहले साइप्रस के लगभग सभी राष्‍ट्रपति भारत यात्रा पर आ चुके हैं। उन्‍होंने कहा कि इसलिए उन्‍हें इस परंपरा का निर्वहन करते देखकर हम बहुत सम्‍मानित महसूस कर रहे हैं। राष्‍ट्रपति ने कहा कि भारत, साइप्रस के साथ अपने दीर्घकालिक और मैत्रीपूर्ण संबंधों को महत्‍व देता है।

             उन्‍होंने कहा कि भारत और साइप्रस के रिश्‍ते हमारे संस्‍थापकों- महात्‍मा गांधी और आर्कबिशप माकारियोस के बीच वैचारिक समानताओं की बुनियाद पर आधारित हैं। श्री मुखर्जी ने कहा कि भारत और साइप्रस दोनों ही आतंकवाद का दंश झेल रहे हैं। इस वैश्विक बुराई का मुकाबला अकेले नहीं, बल्कि सभी सभ्‍य समाजों और देशों को द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक स्‍तर पर करना होगा। उन्‍होंने जोर देकर कहा कि अंतरराष्‍ट्रीय आतंकवाद के अभिशाप से निपटने के लिए वैश्विक आतंकवाद विरोधी कानूनी ढांचे को सशक्‍त बनाए जाने की तत्‍काल आवश्‍यकता है।

             इसके बाद, भोज के दौरान अपने भाषण में राष्‍ट्रपति मुखर्जी ने कहा कि भारत, निकोस अनसतासियादेस  के नेतृत्‍व में साइप्रस की आर्थिक स्थिति में सुधार, विशेषकर यूरोपीय संघ में सबसे तेज सकारात्‍मक वृद्धि दर वाले देशों में साइप्रस की वापसी की सराहना करता है। उन्‍होंने कहा कि वैश्विक मंदी के बावजूद हाल के वर्षों में भारत में भी तेजी से आर्थिक प्रगति हुई है और भारत ने लगभग 7 प्रतिशत वृद्धि दर प्राप्‍त की है।  हम साइप्रस को हमारे प्रमुख कार्यक्रमों जैसे ‘मेक इन इंडिया’  और ‘स्किल इंडिया’ जैसे कार्यक्रमों का लाभ उठाने तथा भारत की प्रगति की गाथा से जुड़ने के लिए आमंत्रित करते हैं।

            उन्‍होंने कहा कि हमारे सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र, साथ ही हमारे  नवीकरणीय ऊर्जा, प्राकृतिक गैस और हाइड्रोकार्बन, टिकाऊ पर्यटन, बुनियादी ढांचा और स्वास्थ्य तथा कल्याण के क्षेत्र भी साझेदारी और विदेशी निवेश के लिए खुले हैं। 

            उन्‍होंने कहा कि हाल ही में संशोधित दोहरा कराधान निवारण समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जो  इस दिशा में एक अच्छा कदम है। राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि इस राजकीय यात्रा की बदौलत अपार संभावनाआं वाले इन सभी क्षेत्रों में नई पहल की जाएगी।
 

Friday, 28 April 2017

डाकघरों को ब्रॉडबैंड सेवाओं के लिए त्रिपक्षीय समझौता

       ग्रामीण क्षेत्रों में डाकघरों को भारत-नेट की ब्रॉडबैंड संपर्कता प्रदान करने के लिए आज बीबीएनएल, डाक विभाग और बीएसएनएल के बीच एक त्रिपक्षीय समझौता-दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए गए। 

     संचार मंत्री मनोज सिन्हा की अध्यक्षता में किया जाने वाला यह समझौता-दस्तावेज अपनी तरह का पहला त्रिपक्षीय समझौता है, जिसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 1.3 लाख डाकघरों और 25 हजार छोटे डाक घरों को हाई-स्पीड इंटरनेट सेवा प्रदान की जाएगी, ताकि ग्रामीण आबादी को लाभ हो। इस अवसर पर मनोज सिन्हा ने कहा कि लगभग एक लाख ग्रामीण पंचायतों को संपर्कता प्रदान करने का पहला चरण पूरा होने वाला है। 

        शेष डेढ़ लाख ग्राम पंचायतों को 100 एमबीपीएस ब्राडबैंड संपर्कता का काम दिसंबर, 2018 तक पूरा कर लिया जाएगा। मंत्री ने कहा कि भारत–नेट प्रधानमंत्री के डिजिटल इंडिया के दृष्टिकोण को पूरा करने के लिए 9 स्तंभों में से एक है। मनोज सिन्हा ने कहा कि भारत-नेट और आज होने वाले समझौते में नागरिक सुविधाओं के प्रावधान पर बल दिया गया है।

            बीएसएनएल सेवा प्रदाता है जो ब्रॉडबैंड सेवाएं प्रदान करेगा। बुनियादी ढांचा तैयार करने और संचालन खर्च डाक विभाग वहन करेगा। चूंकि भारत-नेट राष्ट्रीय नेट वर्क है, इसलिए बीबीएनएल इस पूरे संचालन का समन्वय करेगा। अन्य सरकारी विभागों के साथ भविष्य में समझौता दस्तावेज किये जाने का प्रस्ताव है।

हरियाणा को ‘अमृत’ के तहत 2565 करोड़

             केन्‍द्रीय शहरी विकास एवं आवास तथा शहरी गरीबी उन्‍मूलन (एचयूपीए) और सूचना एवं प्रसारण मंत्री एम.वेंकैया नायडू ने कहा कि नये भारत के निर्माण के लिए त्‍वरित एवं सर्वांगीण तथा समावेशी विकास हमारा उद्देश्‍य है। 

           मंत्री शहरी विकास एवं आवास तथा शहरी गरीबी उन्‍मूलन मंत्रालय से संबंधित योजनाओं की प्रगति पर समीक्षा बैठक आयोजित करने के बाद चंडीगढ़ में एक संवाददाता सम्‍मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्‍होंने कहा कि देश में अपेक्षाओं एवं विकास का एक नया परिदृश्‍य उभर कर सामने आ रहा है। नायडू ने यह भी कहा कि यह सरकार प्रदर्शन, प्रतिस्‍पर्धा एवं सुधारों को प्रोत्‍साहित कर रही है, जो देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।

           नायडू ने कहा कि विचार-विमर्श के दौरान क्रियान्‍वयन, उपलब्धियों, प्रभावशीलता, समस्‍याओं से ग्रस्‍त क्षेत्रों और इन समस्‍याओं का हल ढूंढ़ने पर ध्‍यान केन्द्रित किया गया। उन्‍होंने कहा कि हरियाणा ने 8.97 लाख मकानों के लिए मांग रखी है और मंत्रालय ने राज्‍य से इस सूची को अंतिम रूप देने को कहा है। मंत्री ने कहा कि केन्‍द्र द्वारा आवास क्षेत्र में 6.5 प्रतिशत की ब्‍याज सब्सिडी दी जा रही है। नायडू ने ‘अमृत’ के साथ-साथ शहरी विकास मंत्रालय के अन्‍य प्रमुख कार्यक्रमों का उल्‍लेख करते हुए कहा कि सरकार ने एकल खिड़की मंजूरी की अवधारणा अपनाई है, ताकि योजनाओं पर अमल तेजी से हो सके और उनकी राह में कोई अवरोध न रहे।

                उन्‍होंने कहा कि हरियाणा की सरकार ने यह आश्‍वासन दिया है कि अचल सम्‍पत्ति नियमन अधिनियम (आरईआरए) के तहत नियमों को अधिसूचित करने तथा प्राधिकरण-ट्रिब्‍यूनल की स्‍थापना करने का काम प्रगति पर है। दीनदयाल अन्‍त्‍योदय योजना, राष्‍ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (डीएवाई-एनयूएलएम) के तहत राज्‍य में 22 शहरी स्‍थानीय निकायों को कवर किया गया है। 294 शहरी स्‍वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को पुनःपूर्ति करने वाली धनराशि मुहैया कराई गई है। 

            आवास एवं शहरी विकास निगम (हुडको) ने हरियाणा में 4448 करोड़ रुपये की कर्ज राशि के साथ आठ योजनाओं को मंजूरी दी है। नायडू ने बताया कि राज्‍य में ‘अमृत’ के तहत 2565 करोड़ रुपये की राशि वाली सभी तीन योजनाओं को मंजूरी दे दी गई है। नायडू ने राष्‍ट्रीय ढांचागत विकास परियोजनाओं पर विचार-विमर्श के दौरान बताया कि स्‍वच्‍छ भारत मिशन के तहत हरियाणा में 11 शहर अब खुले में शौच मुक्‍त (ओडीएफ) हैं।  मंत्री ने यह जानकारी दी कि भारत सरकार ने फरीदाबाद के लिए स्‍मार्ट सिटी मिशन के तहत 96 करोड़ रुपये की अपनी दूसरी किस्‍त जारी कर दी है। नायडू ने हरियाणा में मेट्रो परियोजनाओं विशेषकर नरेला-कुंडली सेक्टर, बदरपुर-एस्कॉर्ट मुजेसर और बदरपुर-महिलपुर से जुड़ी परियोजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की। 

           हरियाणा के मुख्‍यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, हरियाणा की स्‍थानीय निकाय मंत्री श्रीमती कविता जैन, शहरी विकास सचिव राजीव गाबा, एचयूपीए सचिव सुश्री नंदिता चटर्जी, हरियाणा के मुख्‍य सचिव डी एस धेसी एवं मंत्रालयों तथा राज्‍य सरकार के अन्‍य वरिष्‍ठ अधिकारियों ने समीक्षा बैठकों में भाग लिया।

देश के 91 प्रमुख जलाशयों के जलस्तर में दो प्रतिशत की कमी

               देश के 91 प्रमुख जलाशयों में 42.658 बीसीएम (अरब घन मीटर) जल का संग्रहण आंका गया। यह इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 27 प्रतिशत है। यह पिछले वर्ष की इसी अवधि के कुल संग्रहण का 125 प्रतिशत तथा पिछले दस वर्षों के औसत जल संग्रहण का 104 प्रतिशत है। 20 अप्रैल को समाप्त हुए सप्ताह के अंत में यह 29 प्रतिशत थी। इन 91 जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता 157.799 बीसीएम है, जो समग्र रूप से देश की अनुमानित कुल जल संग्रहण क्षमता 253.388 बीसीएम का लगभग 62 प्रतिशत है। 

            इन 91 जलाशयों में से 37 जलाशय ऐसे हैं जो 60 मेगावाट से अधिक की स्थापित क्षमता के साथ पनबिजली संबंधी लाभ देते हैं। उत्तरी क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश, पंजाब तथा राजस्थान आते हैं। इस क्षेत्र में 18.01 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले छह जलाशय हैं, जो केन्द्रीय जल आयोग (सीडब्यूसी) की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 4.72 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 26 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 21 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 29 प्रतिशत था। 

               इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण बेहतर है, लेकिन पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से यह कमतर है। पूर्वी क्षेत्र में झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल एवं त्रिपुरा आते हैं। इस क्षेत्र में 18.83 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 15 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 8.21 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 44 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 30 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 29 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण बेहतर है। यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी बेहतर है। 

                पश्चिमी क्षेत्र में गुजरात तथा महाराष्ट्र आते हैं। इस क्षेत्र में 27.07 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 27 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 8.91 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 33 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 21 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 34 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण बेहतर है, लेकिन यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी कमतर है। 

             मध्य क्षेत्र में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश तथा छत्तीसगढ़ आते हैं। इस क्षेत्र में 42.30 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 12 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 15.87 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 38 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 28 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 25 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण बेहतर है। यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी बेहतर है।

              दक्षिणी क्षेत्र में आंध्र प्रदेश (एपी), तेलंगाना (टीजी), एपी एवं टीजी (दोनों राज्यों में दो संयुक्त परियोजनाएं), कर्नाटक, केरल एवं तमिलनाडु आते हैं। इस क्षेत्र में 51.59 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 31 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 4.95 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 10 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 14 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 21 प्रतिशत था। इस तरह चालू वर्ष में संग्रहण पिछले वर्ष की इसी अवधि में हुए संग्रहण से कमतर है। यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी कमतर है।

             पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में जिन राज्यों में जल संग्रहण बेहतर है उनमें पंजाब, राजस्थान, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश,  उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना शामिल हैं।

भत्‍तों पर गठित समिति ने रिपोर्ट वित्‍त मंत्री को सौंपी

             वित्‍त सचिव एवं सचिव (व्‍यय) अशोक लवासा की अध्‍यक्षता में भत्‍तों पर गठित समिति ने रिपोर्ट केन्‍द्रीय वित्‍त मंत्री अरुण जेटली को सौंपी, रिपोर्ट को सचिवों की उच्‍चाधिकार प्राप्‍त समिति के समक्ष रखा जाएगा, ताकि कैबिनेट की मंजूरी के लिए उपयुक्‍त प्रस्‍ताव तैयार किया जा सके। 

          सातवें केन्‍द्रीय वेतन आयोग (सीपीसी) द्वारा भत्‍तों पर पेश की गई सिफारिशों पर गौर करने के लिए भारत सरकार के वित्‍त मंत्रालय द्वारा भत्‍तों पर गठित की गई समिति ने अपनी रिपोर्ट केन्‍द्रीय वित्‍त मंत्री अरुण जेटली को सौंप दी। भारत सरकार के वित्‍त मंत्रालय में वित्‍त सचिव एवं सचिव (व्‍यय) अशोक लवासा इस समिति के अध्‍यक्ष थे और गृह, रक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण, कार्मिक एवं प्रशिक्षण तथा डाक सचिव और रेलवे बोर्ड के चेयरमैन इसके सदस्‍य थे, जबकि संयुक्‍त सचिव (क्रियान्‍वयन प्रकोष्‍ठ) इसके सदस्‍य सचिव थे।

            सातवें वेतन आयोग द्वारा वेतन, पेंशन एवं संबंधित मुद्दों पर पेश की गई सिफारिशों को केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 29 जून, 2016 को दी गई मंजूरी को ध्‍यान में रखते हुए यह समिति गठित की गई थी। सातवें वेतन आयोग द्वारा भत्‍तों के ढांचे में व्‍यापक बदलाव लाने की सिफारिश और कर्मचारियों के विभिन्‍न संगठनों की ओर से पेश किये गये अनगिनत ज्ञापनों के साथ-साथ विभिन्‍न मंत्रालयों/विभागों द्वारा व्‍यक्‍त की गई आशंकाओं को ध्‍यान में रखते हुए यह समिति गठित करने का निर्णय लिया गया था। सातवें केन्‍द्रीय वेतन आयोग ने यह सिफारिश की थी कि कुल 196 भत्‍तों में से 52 भत्‍तों को पूरी तरह समाप्‍त कर दिया जाए और 36 भत्‍तों की पृथक पहचान समाप्‍त करते हुए उनका विलय अन्‍य भत्‍तों में कर दिया जाए। 

           सातवें वेतन आयोग द्वारा भत्‍तों पर पेश की गई सिफारिशों को लेकर विभिन्‍न हितधारकों की ओर से प्राप्‍त सभी ज्ञापनों पर समिति ने गौर किया। 70 भत्‍तों के संबंध में ज्ञापन एवं संशोधन के लिए मांग पत्र प्राप्‍त हुए, जिन पर समिति ने विस्‍तार से विचार-विमर्श किया है। ऐसा करते वक्‍त समिति ने राष्‍ट्रीय परिषद की स्‍थायी समिति (कर्मचारी पक्ष) के सभी सदस्‍यों, संयुक्‍त सलाहकार मशीनरी (जेसीएम) तथा रेलवे के विभिन्‍न कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों, डाक कर्मचारियों, डॉक्‍टरों, नर्सों और परमाणु ऊर्जा विभाग के प्रतिनिधियों से बातचीत की।

           समिति ने इसके साथ ही रक्षा बलों के प्रतिनिधियों, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) अर्थात सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी और असम राइफल्स के महानिदेशकों तथा आईबी एवं एसपीजी के वरिष्‍ठ अधिकारियों के साथ भी चर्चाएं कीं, ताकि उनके विचार जाने जा सकें। जैसा कि रिपोर्ट में बताया गया है, समिति ने कुल मिलाकर 15 बैठकें की थीं और विभिन्‍न ज्ञापनों पर गौर करने में अपर सचिव (व्‍यय विभाग) की अध्‍यक्षता वाले अधिकारियों के समूह ने इसकी सहायता की थी। 

          हितधारकों के साथ व्‍यापक विचार-विमर्श और विभिन्‍न ज्ञापनों पर गौर करने के बाद समिति ने सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों में कुछ विशेष संशोधन करने का सुझाव दिया है, ताकि सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के पीछे दी गई दलीलों के साथ-साथ अन्‍य प्रशासकीय मजबूरियों के संदर्भ में हितधारकों द्वारा व्‍यक्‍त की गई चिंताएं दूर की जा सकें। ऐसे कुछ भत्‍तों में संशोधन करने का सुझाव दिया गया है, जो सार्वभौमिक तौर पर सभी कर्मचारियों पर लागू होते हैं। 

            इसी तरह ऐसे कुछ अन्‍य भत्‍तों में भी संशोधन करने का सुझाव दिया गया है, जो विशिष्‍ट श्रेणियों के कर्मचारियों जैसे कि रेल कर्मियों, डाक कर्मियों, वैज्ञानिकों, रक्षा क्षेत्र के कर्मियों, डॉक्‍टरों एवं नर्सों इत्‍यादि पर लागू होते हैं।

परंपरागत जल स्रोतों को संवारने की जरूरत

          केन्‍द्रीय जल संसाधन, नदी विकास तथा गंगा संरक्षण मंत्री सुश्री उमा भारती ने कहा कि जल संरक्षण के लिए परंपरागत जल स्रोतों के सार संभाल एवं जीर्णोद्धार समय की जरूरत है। सुश्री भारती ने सागर (मध्‍य प्रदेश) के बांदरी में बुंदेलखंड, सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए व्‍यापक जल संरक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए यह विचार व्‍यक्‍त किए।

         समारोह को संबोधित करते हुए जल संसाधन मंत्री ने कहा कि प्राकृतिक एवं परंपरागत जल स्रोतों का संरक्षण एवं संवर्धन किया जाना जरूरी है। ये छोटे छोटे जल स्‍त्रोत पेयजल एवं सिंचाई की बडी जरूरतों को पूरा कर सकते हैं। उन्‍होंने कहा कि विभिन्‍न अध्‍ययनों से यह पता चला है कि जल की बडी परियोजनाओं की तुलना में अपेक्षाकृत छोटी परियोजनाओं से ज्‍यादा लाभ होता है।

             उन्‍होंने बताया कि उनके मंत्रालय ने बुंदेलखंड क्षेत्र में भू-जल के कृत्रिम रिचार्ज के लिए मास्‍टर प्‍लान बनाया है। उत्‍तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में लगभग 1100 परकोलेशन (रिसाव) टैंकों, 14000 छोटे चैक डैम-नाला पुश्‍तों तथा 17000 रिचार्ज शॉफ्ट्स की पहचान की गई है। मध्‍यप्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में लगभग 2000 परकोलेशन टैंको, 55000 छोटे चैक डैम-नाला पुश्‍तों तथा 17000 रिचार्ज शॉफ्ट्स की पहचान की गई है। उन्‍होंने कहा कि भू-जल खोज के हिस्‍से के रूप में उत्‍तरप्रदेश क्षेत्र के बुंदेलखंड के पांच जिलों-बांदा, हमीरपुर, जालौन, चित्रकूट और माहोबा में 234 कुएं बनाये जाने का प्रस्‍ताव है। मध्‍य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के छह जिलों में भूजल खोज के लिए 259 कुओं के निर्माण का प्रस्‍ताव है।

            सुश्री भारती ने कहा कि उनके मंत्रालय ने राष्‍ट्रीय भू-जल प्रबंधन सुधार योजना (एनजीएमआईएस) के अंतर्गत कई नई पहल की है। इसका उद्देश्‍य दबाव वाले ब्‍लॉकों में भू-जल की स्थिति में कारगर सुधार करना, गुण और मात्रा दोनों की दृष्टि से संसाधन को सुनिश्चित करना, भू-जल प्रबंधन और संस्‍थागत मजबूती में भागीदारीमूलक दृष्टिकोण अपनाना है। उत्‍तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में 11 हजार 851 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र कवर करने वाले छह जिलों को इस पहल के अंतर्गत रखा गया है और मध्‍य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के 8319 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र के पांच जिलों को रखा गया है। 

         सुश्री भारती ने कहा कि मंत्रालय द्वारा सिंचाई अंतर पाटने की योजना (आईएसबीआईजी) तैयार की जा रही है। इसका उद्देश्‍य सीएडीडब्‍ल्‍यूएम कार्य पूरा करना और साथ-साथ सृजित सिंचाई क्षमता (आईपीसी) तथा उपयोग की गई सिंचाई क्षमता (आईपीयू) के बीच खाई को पाटने के लिए नहर नेटवर्क में कमियों को सुधारना, सिंचाई में जल उपयोग क्षमता बढ़ाना और प्रत्‍येक खेत को जल सप्‍लाई सुनिश्चित करना तथा जल उपयोगकर्ता संघों (डब्‍ल्‍यूयूए) को सिंचाई प्रणाली का नियंत्रण और प्रबंधन हस्‍तां‍तरित करना है। 

          उत्‍तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में बेतवा तथा गुरसराय नहर, राजघाट नहर, केन नहर प्रणाली, गुंटा नाला डैम तथा उपरी राजघाट नहर के 17,1030 हेक्‍टेयर को पाटने की योजना का प्रस्‍ताव है। इस योजना से बुंदेलखंड क्षेत्र के झांसी, जालौन, हमीरपुर, ललितपुर, बांदा जिलों को लाभ मिलेगा। मध्‍य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र की राजघाट नहर परियोजना को 68007 हेक्‍टेयर को पाटने की योजना का प्रस्‍ताव है। इस योजना से टिकमगढ़ और दतिया जिलों को लाभ मिलेगा। जल संसाधन मंत्री ने कहा कि महाराष्‍ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में आईपीसी तथा आईपीयू के बीच 53365 हेक्‍टेयर को पाटने के लक्ष्‍य के साथ सात योजनाओं का प्रस्‍ताव है।

           इस योजना से औरंगाबाद, लातूर, नांदेड़, परभनी, शोलापुर तथा उस्मानाबाद जिलों को लाभ मिलेगा और इस पर 250 करोड़ रुपये खर्च होंगे। मराठवाड़ा के 3727 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को राष्‍ट्रीय भूजल प्रबंधन सुधार योजना के अंतर्गत लाने का प्रस्‍ताव है। इस पर 380 करोड़ रुपये का अनुमानित खर्चा आएगा। मराठवाड़ा क्षेत्र के 9101 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र की एक्विफर मैपिंग पूरी हो गई है। 7775 वर्ग किलोमीटर का प्रबंधन प्‍लान महाराष्‍ट्र सरकार को सौंपा गया है। सुश्री भारती ने कहा कि ओडिशा के कालाहांडी, बोलंगी, कोरापुट (केबीके) क्षेत्र में पीआईसी तथा आईपीयू के बीच अंतर पाटने के लिए 0.68 लाख हेक्‍टेयर क्षेत्र कवर करने की 9 परियोजनाओं का प्रस्‍ताव है। इससे केबीके क्षेत्र के मलकानगीरी, बोलंगी, नुआपाड़ा, रायगड़, कालाहांडी तथा बारगढ़ जिलों को लाभ मिलेगा। क्षेत्र में 305 कुएं बनाये जाएंगे। 

          पीएमकेएसवाई के अंतर्गत केन्‍द्रीय सहायता उपलब्‍ध कराने के लिए केबीके क्षेत्र के 89 जल निकायों को 32करोड़ रुपये की अनुमानित लागत और 5739 हेक्‍टेयर की संभावित क्षमता को पुनर्जीवित करने के लक्ष्‍य के साथ शामिल किया गया है। ये जल निकाय ओडिशा में 760 जल निकायों के क्‍लस्‍टर का हिस्‍सा हैं। इनके लिए 107करोड़ रुपये की केन्‍द्रीय सहायता जारी की गई है। 99 जारी बड़ी मझौली सिंचाई परियोजना को एआईबी के अंतर्गत चरणबद्ध तरीके से मार्च, 2019 तक पूरा किया जाएगा।

          चार परियोजनाओ-लोअर इन्‍द्र (केबीके), अपर इन्‍द्रावती (केबीके), आरईटी सिंचाई तथा तेलनगिरी से केबीके क्षेत्र को लाभ मिलेगा। इन योजनाओं की अधिकतम सिंचाई क्षमता 1.44 लाख हेक्‍टेयर है। 2016-17 के दौरान एआईबीपी तथा सीएडी योजनाओं के अंतर्गत इन योजनाओं के लिए 233 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई।

 

देश में 21 लाख से अधिक एलईडी स्ट्रीट लाइट, 295 मिलियन इकाई बिजली की बचत

            भारत सरकार के राष्ट्रीय स्ट्रीट लाइटिंग कार्यक्रम (एसएलएनपी) के अंतर्गत देश भर में 21 लाख से अधिक पारंपरिक स्ट्रीट लाइट के स्थान पर एलईडी स्ट्रीट लाइट लगाई गई हैं। 

          नई लाइट से सड़कों पर अधिक रोशनी हुई है। निवासियों और वाहन चालकों के बीच सुरक्षा की भावना बढ़ी है। भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली सार्वजनिक ऊर्जा सेवा कंपनी, एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेस लिमिटेड (ईईएसएल) एसएलएनपी की कार्यान्वयन एजेंसी है।   एलईडी स्ट्रीट लाइट लगाने से सालाना 295 मिलियन इकाई किलोवॉट-ऑवर (केडब्ल्यूएच) बिजली की बचत हुई है। 2.3 लाख टन कार्बन डाइआक्साइड का उत्सर्जन कम हुआ है। यह परियोजना 23 राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में कार्यान्वित की जा रही है। 

          इसके बाद से सड़कों पर रोशनी का स्तर काफी बढ़ा है। राजस्थान, आंध्र प्रदेश, दिल्ली, गुजरात, गोवा में एलईडी लाइट लगाई गई है। ईईएसएल विशेष विरासत लाइटिंग परियोजना भी कार्यान्वित कर रही है, जिसके तहत उत्तर प्रदेश के काशी क्षेत्र में 1000 एलईडी स्ट्रीट लाइट लगाई गई है और इनके अलावा 4000 अतिरिक्त लाइटें लगाई जा रही हैं। भारी मात्रा में लाइट की खरीदी के कारण एलईडी स्ट्रीट लाइट का खरीद मूल्य 135 रुपये प्रतिवॉट से घटकर 80 रुपये प्रति वॉट हो गया है। 

            स्ट्रीट लाइट लगाने का पूरा पूंजी निवेश ईईएसएल करती है इसलिए नगरपालिकाओं से अतिरिक्त बजट आवंटन की आवश्यकता नहीं है। नगरपालिकाएं सात वर्ष की अवधि में बिजली और प्रबंधन की लागत में बचत से जमा की गई राशि से ईईएसएल को भुगतान करती है जिसके कारण एलईडी लाइटें सस्ती और सुलभ हुई है। ईईएलसी परियोजना के संपन्न होने पर सभी राज्यों में सामाजिक लेखा परीक्षा (ऑडिट) भी करती है। 

            ईईएसएल की खरीद बीआईएस के विशेष निर्देशों के अऩुरूप है और तकनीकी दोषों से बचने के लिए इनकी सात साल की वारंटी भी है। ईईएसएल बोली लगाने से लेकर सड़कों पर लाइट लगाने के स्तर तक उत्पादों की गुणवत्ता की उचित जांच करती है। इसके परिणाम स्वरूप देशभर में ईईएसएल द्वारा लगाई गई 21 लाख लाइट में एक प्रतिशत से भी कम तकनीकी खराबी हुई है। 

           प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 5 जनवरी 2015 को 100 शहरों में पारंपरिक स्ट्रीट और घरेलू लाइट के स्थान पर ऊर्जा दक्ष एलईडी लाइट लगाने के लिए इस राष्ट्रीय कार्यक्रम की शुरूआत की थी। सरकार का उद्देश्य राष्ट्रीय स्ट्रीट लाइटिंग कार्यक्रम (एसएलएनपी) के अंतर्गत 1.34 करोड़ स्ट्रीट लाइट के स्थान पर ऊर्जा दक्ष एलईडी लाइट लगाना है। 

ईपीएफ सदस्यों को अब आश्रितों की बीमारी में अग्रिम राशि के लिए केवल स्व घोषणा पत्र

            कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) के सदस्यों को अब अपने सदस्यों-आश्रितों की बीमारी के मामले में अग्रिम राशि लेने के लिए केवल स्व घोषणा पत्र प्रस्तुत करना होगा।

         दिव्यांग सदस्य भी स्व घोषणा पत्र के आधार पर अग्रिम राशि ले सकते हैं। किसी भी सदस्य को अब ईपीएफ योजना-1952 के अनुच्छेद 68-जे या 68-एन के अंतर्गत अग्रिम राशि पाने के लिए चिकित्सा प्रमाण पत्र या अन्य प्रमाण पत्र अथवा दस्तावेज या प्रोफार्मा प्रस्तुत करने की आवश्यकता नहीं होगी। श्रम और रोजगार मंत्रालय ने कर्मचारी भविष्य निधि योजना 1952 के अनुच्छेद 68-जे और 68-एन में संशोधन कर दिया है। यह आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित होने की तिथि से लागू होगा। इसके अनुसार ईपीएफ के सदस्य को अपने सदस्यों-आश्रितों की बीमारी के मामले में ईपीएफ योजना के अंतर्गत अग्रिम राशि पाने के लिए केवल स्व घोषणा पत्र प्रस्तुत करना होगा।

                दिव्यांग सदस्यों के मामले में भी यह लागू होगा। इस प्रावधान को समग्र दावा फार्म में पहले ही शामिल कर दिया गया है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) द्वारा अपने ई गवर्नेंस सुधारों के अगले चरण के हिस्से के रूप में की गई पहलों के अनुरूप ही यह प्रयास ईपीएफओ के हितधारकों को कुशलता और पारदर्शी तरीके से सेवाएं उपलब्ध कराने का उद्देश्य से किया जा रहा है। 

             ईपीएफो ने सदस्यों के लिए व्यापक खाता संख्या (यूएएन) लागू कर दी हैं। अब जिन सदस्यों ने यूएएऩ को अपने आधार संख्या और बैंक खाते जोड दिया है वे नियोक्‍ता से सत्‍यापित कराये बिना दावा फार्म सीधे ईपीएफओ में जमा करवा सकते हैं।

विकास के लिए केन्‍द्र व राज्‍यों के बीच समन्‍वय आवश्‍यक

           भारत सरकार के केन्‍द्रीय सूक्ष्‍म, लघु और मझोले उद्यम (एमएसएमई) मंत्री कलराज मिश्र की अध्‍यक्षता में आयोजित की गई।

         भारत सरकार के एमएसएमई राज्‍य मंत्री हरिभाई पारथीभाई चौधरी एवं मंत्रालय के वरिष्‍ठ अधिकारीगण भी इस अवसर पर उपस्थित थे। राज्‍यों-संघ शासित क्षेत्रों की ओर से अंडमान एवं निकोबार दीप समूह के उपराज्‍यपाल प्रो. जगदीश मुखी, गुजरात के मंत्री रोहित भाई पटेल, हरियाणा के मंत्री विपुल गोयल, मणिपुर के मंत्री बिश्‍वजीत सिंह, मिजोरम के मंत्री एच. रोहलुना, ओडिशा के मंत्री जोगेन्‍द्र बेहरा, उत्‍तर प्रदेश के मंत्री सत्‍यदेव पचौरी और उत्‍तराखंड के मंत्री मदन कौशिक ने इस बैठक में भाग लिया। 

           उन्‍होंने अपने-अपने संघ शासित क्षेत्रों-राज्‍यों की ओर से विचार पेश किये। कॉयर बोर्ड के अध्‍यक्ष सी.पी. राधाकृष्‍णन और केवीआईसी के अध्‍यक्ष विनय कुमार सक्‍सेना भी इस अवसर पर मौजूद थे। इस अवसर पर कलराज मिश्र ने कहा कि यह सहकारी संघवाद की भावना पर सरकार द्वारा दिये जा रहे विशेष जोर एवं राज्‍यों-संघ शासित क्षेत्रों के साथ जारी विचार-विमर्श के अनुरूप एक अनूठा प्रयास है। उन्‍होंने कहा कि सूक्ष्‍म, लघु एवं मझोले उद्यम क्षेत्र के समग्र विकास के लिए केन्‍द्र एवं राज्‍यों के बीच समन्‍वय एक आवश्‍यक अवयव है। यह बैठक इस दिशा में एक अच्‍छा प्रयास है। ऐसे अनेक क्षेत्र हैं, जिनमें केन्‍द्र एवं राज्‍यों के प्रयासों के बीच बढि़या तालमेल बैठाने की जरूरत है।

            इस अवसर पर केन्‍द्रीय एमएसएमई राज्‍य मंत्री हरिभाई पारथीभाई चौधरी ने कहा कि यदि केन्‍द्र एवं राज्‍य आपस में तालमेल बैठाकर काम करें, तो भारत दुनिया का विनिर्माण केन्‍द्र (हब) बन सकता है। इससे सभी हितधारक लाभान्वित हो सकते हैं। उन्‍होंने रोजगार उपलब्‍ध कराने के लिए एमएसएसई क्षेत्र की व्‍यापक संभावनाओं पर विशेष जोर दिया। उन्‍होंने यह भी कहा कि वर्तमान सरकार चाहती है कि ज्‍यादा से ज्‍यादा लोग स्‍वरोजगार को अपनाएं, ताकि रोजगार तलाशने वालों की संख्‍या कम हो सके। राज्‍यों के उप राज्‍यपाल एवं मंत्रियों ने अपने यहां मौजूद समस्‍याओं का उल्‍लेख किया और मूल्‍यवान सुझाव दिए। 

            भारत सरकार ने एमएसएमई पर विशेष ध्‍यान दिया है। वित्‍त वर्ष 2017-18 के बजट में इस मंत्रालय के लिए आवंटन को वित्‍त वर्ष 2016-17 की तुलना में एक ही बार में 87 फीसदी बढ़ा दिया गया है। प्रधानमंत्री ने भी 31 दिसंबर, 2016 को राष्‍ट्र के नाम अपने संबोधन में एमएसएमई को दी जा रही सुविधाओं का उल्‍लेख किया। उल्‍लेखनीय है कि मुख्‍यत: एमएसएमई द्वारा ही रोजगार के अवसर उपलब्‍ध कराए जाते हैं। 

           कुछ राज्‍यों जैसे कि पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और राजस्‍थान ने अपने यहां एमएसएमई नीतियां तैयार की हैं। इस बैठक में एक बार फिर सभी राज्‍यों से यह आग्रह किया गया कि वे अपने यहां एमएसएमई नीति तैयार करें, ताकि एमएसएमई को बढ़ावा दिया जा सके।

Thursday, 27 April 2017

बुंदेलखंड के लिए जल संरक्षण कार्यक्रम

              केन्‍द्रीय जल संसाधन, नदी विकास तथा गंगा संरक्षण मंत्री सुश्री उमा भारती बुंदेलखंड, मराठवाड़ा, ओडिशा के कालाहांडी, बोलनगीर तथा कोरापुट के सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए व्‍यापक जल संरक्षण कार्यक्रम लॉच करेंगी। 

         सुश्री भारती औपचारिक रूप से कार्यक्रम 28 अप्रैल, 2017 को सागर (मध्‍य प्रदेश) के बंद्री में लॉच करेंगी। यह घोषणा करते हुए जल संसाधन मंत्री ने कहा कि उनके मंत्रालय ने बुंदेलखंड क्षेत्र में भूजल के कृत्रिम रिचार्ज के लिए मास्‍टर प्‍लान बनाया है। उत्‍तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में लगभग 1100 परकोलेशन (रिसाव) टैंकों, 14000 छोटे चैक डैम-नाला पुश्‍तों तथा 17000 रिचार्ज शॉफ्ट्स की पहचान की गई है। मध्‍यप्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में लगभग 2000 परकोलेशन टैंको, 55000 छोटे चैक डैम-नाला पुश्‍तों तथा 17000 रिचार्ज शॉफ्ट्स की पहचान की गई है। 

            उन्‍होंने कहा कि भूजल खोज के हिस्‍से के रूप में उत्‍तर प्रदेश क्षेत्र के बुंदेलखंड के पांच जिलों-बांदा, हमीरपुर, जालौन, चित्रकूट और माहोबा में 234 कुएं बनाये जाने का प्रस्‍ताव है। मध्‍य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के छह जिलों में भूजल खोज के लिए 259 कुओं के निर्माण का प्रस्‍ताव है। सुश्री भारती ने कहा कि उनके मंत्रालय ने राष्‍ट्रीय भूजल प्रबंधन सुधार योजना (एनजीएमआईएस) के अंतर्गत कई नई पहल की है। इसका उद्देश्‍य दबाव वाले ब्‍लॉकों में भूजल की स्थिति में कारगर सुधार करना, गुण और मात्रा दोनों की दृष्टि से संसाधन को सुनिश्चित करना, भूजल प्रबंधन और संस्‍थागत मजबूती में भागीदारीमूलक दृष्टिकोण अपनाना है। 

             उत्‍तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में 11851 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र कवर करने वाले छह जिलों को इस पहल के अंतर्गत विचार के लिए रखा गया है। मध्‍य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के 8319 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र के पांच जिलों को विचार के लिए रखा गया है। जल संसाधन मंत्री ने बताया कि मंत्रालय द्वारा सिंचाई अंतर पाटने की योजना (आईएसबीआईजी) तैयार की जा रही है। इसका उद्देश्‍य सीएडीडब्‍ल्‍यूएम कार्य पूरा करना और साथ-साथ तथा सृजित सिंचाई क्षमता (आईपीसी) तथा उपयोग की गई सिंचाई क्षमता (आईपीयू) के बीच खाई को पाटने के लिए नहर नेटवर्क में कमियों को सुधारना, सिंचाई में जल उपयोग क्षमता बढ़ाना और प्रत्‍येक खेत को जल सप्‍लाई सुनिश्चित करना तथा जल उपयोगकर्ता संघों (डब्‍ल्‍यूयूए) को सिंचाई प्रणाली का नियंत्रण और प्रबंधन हस्‍तां‍तरित करना है।

              उत्‍तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में बेतवा तथा गुरसराय नहर, राजघाट नहर, केन नहर प्रणाली, गुंटा नाला डैम तथा उपरी राजघाट नहर के 17,1030 हेक्‍टेयर को पाटने की योजना का प्रस्‍ताव है। इस योजना से बुंदेलखंड क्षेत्र के झांसी, जालौन, हमीरपुर, ललितपुर, बांदा जिलों को लाभ मिलेगा। मध्‍य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र की राजघाट नहर परियोजना को 68007 हेक्‍टेयर को पाटने की योजना का प्रस्‍ताव है। इस योजना से टिकमगढ़, दतिया जिलों को लाभ मिलेगा। जल संसाधन मंत्री ने कहा कि महाराष्‍ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में आईपीसी तथा आईपीयू के बीच 53365 हेक्‍टेयर को पाटने के लक्ष्‍य के साथ सात योजनाओं का प्रस्‍ताव है। इस योजना से औरंगाबाद, लातूर, नांदेड़, परभनी, सोलापुर तथा ओस्मानाबाद जिलों को लाभ मिलेगा और इस पर 250 करोड़ रुपये खर्च होंगे। 

           मराठवाड़ा के 3727 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को राष्‍ट्रीय भूजल प्रबंधन सुधार योजना के अंतर्गत लाने का प्रस्‍ताव है। इस पर 380 करोड़ रुपये का अनुमानित खर्चा आएगा। मराठवाड़ा क्षेत्र के 9101 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र की एक्विफर मैपिंग पूरी हो गई है। 7775 वर्ग किलोमीटर का प्रबंधन प्‍लान महाराष्‍ट्र सरकार को सौंपा गया है। सुश्री भारती ने कहा कि ओडिशा के कालाहांडी, बोलनवीर, कोरापुट (केबीके) क्षेत्र में पीआईसी तथा आईपीयू के बीच अंतर पाटने के लिए 0.68 लाख हेक्‍टेयर क्षेत्र कवर करने की 9 परियोजनाओं का प्रस्‍ताव है। इससे केबीके क्षेत्र के मलकानगीरी, बोलनगीर, नुआपाड़ा, रायगड़, कालाहांडी तथा बारगढ़ जिलों को लाभ मिलेगा। क्षेत्र में 305 कुएं बनाये गये।

              पीएमकेएसवाई के अंतर्गत केन्‍द्रीय सहायता उपलब्‍ध कराने के लिए केबीके क्षेत्र के 89 जल निकायों को 32 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत और 5739 हेक्‍टेयर की संभावित क्षमता को पुनर्जीवित करने के लक्ष्‍य के साथ शामिल किया गया है। ये जल निकाय ओडिशा में 760 जल निकायों के कलस्‍टर का हिस्‍सा हैं। इनके लिए 107 करोड़ रुपये की केन्‍द्रीय सहायता जारी की गई है। 99 जारी बड़ी मझौली सिंचाई परियोजना को एआईबी के अंतर्गत चरणबद्ध तरीके से मार्च, 2019 तक पूरा किया जाएगा, चार परियोजनाओ-लोअर इन्‍द्र (केबीके), अपर इन्‍द्रावती (केबीके), आरईटी सिंचाई तथा तेलनगिरी केबीके से क्षेत्र को लाभ मिलेगा। इन योजनाओं की अधिकतम सिंचाई क्षमता1.44 लाख हेक्‍टेयर है। 2016-17 के दौरान एआईबीपी तथा सीएडी योजनाओं के अंतर्गत इन योजनाओं के लिए 233 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई।

बंद पड़े उर्वरक संयंत्र फिर से चालू होंगे

           पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) धर्मेंद्र प्रधान ने रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अधीनस्‍थ बंद पड़े उर्वरक संयंत्रों की पुनरुद्धार योजनाओं पर रसायन एवं उर्वरक और संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार की अध्‍यक्षता में आयोजित एक संयुक्‍त बैठक में भाग लिया। 

          इस बैठक में विद्युत, कोयला, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा और खान राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) पीयूष गोयल और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग, शिपिंग, रसायन एवं उर्वरक राज्‍य मंत्री मनसुख मंडाविया ने भी इस बैठक में भाग लिया। धर्मेंद्र प्रधान ने एक संवाददाता सम्‍मेलन के दौरान मीडिया को संबोधित करते हुए पूर्वी भारत के त्‍वरित विकास से संबंधित माननीय प्रधानमंत्री के विजन पर विशेष जोर दिया, जो भारत के समग्र विकास के लिए अत्‍यंत आवश्‍यक है। 

               उन्‍होंने पूर्वी भारत में त्‍वरित विकास का उल्‍लेख करते हुए कहा कि कृषि पर केन्द्रित पूर्वी भारत में व्‍यापक ढांचागत निवेश पर विशेष जोर दिया जा रहा है, जिससे इस क्षेत्र में द्वितीय हरित क्रांति को बढ़ावा मिलेगा। प्रधान ने यह भी कहा कि बंद पड़े उर्वरक संयंत्रों को फिर से चालू करने और पूर्वी भारत को राष्‍ट्रीय गैस ग्रिड से जोड़ने हेतु गैस पाइपलाइन नेटवर्क की स्‍थापना के लिए 50,000 करोड़ रुपये का व्‍यापक निवेश किया जा रहा है।

            पेट्रोलियम मंत्री ने यह जानकारी दी कि गोरखपुर (उत्‍तर प्रदेश), बरौनी (बिहार) और सिंदरी (झारखंड) तथा तलछर (ओडिशा) स्थित उर्वरक संयंत्रों का पुनरुद्धार, 2650 किलोमीटर लम्‍बी प्रधानमंत्री ऊर्जा गंगा पाइपलाइन और धामरा (ओडिशा) स्थित एलएनजी टर्मिनल की स्‍थापना इस बुनियादी ढांचागत निवेश के महत्‍वपूर्ण अवयव होंगे। प्रधान ने बताया कि गोरखपुर (उत्‍तर प्रदेश), बरौनी (बिहार) और सिंदरी (झारखंड) स्थित उर्वरक संयंत्रों के पुनरुद्धार के लिए 20,000 करोड़ रुपये निवेश किये जाएंगे। पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि ओडिशा स्थित तलछर उर्वरक संयंत्र का पुनरुद्धार 8000 करोड़ रुपये के निवेश से  किया जा रहा है। 

           यह निवेश एफसीआई, गेल, राष्‍ट्रीय केमिकल्‍स एंड फर्टिलाइजर्स और कोल इंडिया लिमिटेड के एक कंसोर्टियम द्वारा किया जा रहा है। भारत में पहली बार किसी उर्वरक संयंत्र का परिचालन कोयला गैसीकरण प्रौद्योगिकी पर आधारित होगा। इन चारों प्रमुख उर्वरक संयंत्रों में उत्‍पादन होने पर उर्वरक के घरेलू उत्‍पादन के साथ-साथ इसकी उपलब्‍धता भी बढ़ जाएगी, जिससे अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण कृषि क्षेत्र को काफी बढ़ावा मिलेगा और इससे द्वितीय हरित क्रांति में मदद मिलेगी। इन संयंत्रों से जुड़ा बुनियादी कार्य वित्‍त वर्ष 2017-18 में शुरू होगा।

            प्रधान ने यह भी जानकारी दी कि लगभग 13000 करोड़ रुपये के निवेश से 2650 किलोमीटर लंबी जगदीशपुर-हल्दिया एवं बोकारो-धामरा प्राकृतिक गैस पाइपलाइन (जेएचबीडीपीएल) परियोजना गेल (इंडिया) लिमिटेड द्वारा क्रियान्वित की जा रही है, जो ‘प्रधानमंत्री ऊर्जा गंगा’ के नाम से जानी जाती है। यह पाइपलाइन उत्‍तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा से होकर गुजरेगी। उत्‍तर प्रदेश और बिहार में इस पाइपलाइन परियोजना का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। प्रधान ने यह भी बताया कि 6000 करोड़ रुपये के निवेश से ओडिशा के धामरा में एक एलएनजी टर्मिनल स्‍थापित किया जा रहा है।   

सीआईआई लाइफटाइम अचीवमेंट व सीआईआई फाउंडेशन आदर्श महिला प्रेसिडेंट अवॉर्ड

                 राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने नई दिल्ली में राहुल बजाज को सीआईआई प्रेसिडेंट लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया। महिला उद्यमियों को सीआईआई फाउंडेशन आदर्श महिला का अवॉर्ड दिया। 

            इस मौके पर राष्ट्रपति ने अवॉर्ड विजेता उद्यमियों- बजाज ऑटो लिमिटेड के चेयरमैन राहुल बजाज को इस साल के सीआईआई लाइफटाइम अचीवमेंट प्रेसिडेंट अवॉर्ड और सीआईआई फाउंडेशन आदर्श महिला अवॉर्ड की विजेताओं को उनकी उपलब्धियों के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि 2005 में हुई सीआईआई फाउंडेशन आदर्श महिला अवॉर्ड की स्थापना देश में सामुदायिक स्तर पर उन महिलाओं की खोज करने और उन्हें बढ़ावा देना है जो तमाम बाधाओं को पार करते हुए भारतीय समाज की बेहतरी में उल्लेखनीय योगदान देती हैं। 

            इससे उन अनगिनत महिलाओं को बढ़ावा मिलेगा जो हमारे देश और इसकी अर्थव्यवस्था में अलग-अलग तरह से योगदान दे रही हैं। राष्ट्रपति ने उद्योग जगत को ये भी याद दिलाया कि पूंजी के साथ ही देश को इनके आइडिया, ऊर्जा और शक्ति की भी जरूरत होगी। राष्ट्रपति ने ये भी आग्रह किया कि देश में विकास के राह की बाधाओं को दूर करने और नई खोज के लिए कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी से मिले अवसर का फायदा उठाएं। 

            राष्ट्रपति ने इस बात पर भी बल दिया कि सीएसआर विकास के लिए उद्योग जगत का ध्यान कुछ खास क्षेत्रों पर ना होकर पूरे देश पर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश के सामने जितनी बड़ी चुनौतियां उनसे निपटने के लिए हमारे पास उतना ज्यादा समय नहीं है, ऐसे में साझेदारी की भूमिका बेहद हो जाती है। आपस में साझेदारी कर मुश्किल से मुश्किल सामाजिक और तकनीकी दिक्कतों को दूर कर विकास के रास्ते पर बढ़ा जा सकता है। राष्ट्रपति ने कहा कि देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए हमें सभी सेक्टर की ताकत बढ़ानी होगी। 

            उन्होंने उम्मीद जताई कि एक औद्योगिक समूह की तरह सीआईआई कंपनियों को एकसाथ लाकर नई शुरुआत कर सकती है। उन्होंने इस बात की भी खुशी जताई की सीआईआई फाउंडेशन ने इस तरह का प्रयास शुरू किया है।

माइक्रो व स्मॉल एंटरप्राइज  पोर्टल व माइएमएसएमई मोबाइल ऐप

               केन्द्रीय शहरी विकास, आवास और शहरी गरीबी उन्मूलन, सूचना एवं प्रसारण मंत्री एम वेंकैया नायडू ने (एमएसएमई) की राष्ट्रीय बोर्ड की 15 वीं बैठक के अवसर पर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय दो महत्वपूर्ण पहलों यानि माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज फेसिलिटेशन काउंसिल (एमएसईएफसी) पोर्टल और माईएमएसएमई मोबाइल ऐप का शुभारंभ किया।

           केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री कलराज मिश्र और राज्य मंत्री हरिभाई पार्थिभाई चौधरी भी इस अवसर पर उपस्थित थे। कलराज मिश्र और केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम राज्य मंत्री हरिभाई पार्थिभाई चौधरी भी इस अवसर पर मौजूद हैं। इस अवसर पर कलराज मिश्र ने कहा कि माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज फैसिलिटेशन काउंसिल (एमएसईसीसी) पोर्टल एमएसएमईडी अधिनियम 2006 के विलंबित भुगतान के प्रावधानों को लागू करने में मदद करेगा तथा विलंबित भुगतान के मामलों की निगरानी में भी सहायता करेगा। इस मंच पर पहुंच से सूक्ष्‍म और लघु उद्यमों को विलंबित भुगतान संबंधी शिकायतें ऑनलाइन दर्ज करने में मदद मिलेगी। दर्ज की गई शिकायतें ई-मेल और एसएमएस के माध्‍यम से संबंध पार्टियों को भेज दी जाएंगी।

               इससे एमएसएमई मंत्रालय के साथ-साथ संबंधित राज्य सरकार के अधिकारियों को राज्य और राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर भी हुई प्रगति की निगरानी करने में मदद मिलेगी। उन्होंने यह भी बताया कि अधिकांश राज्यों ने पहले ही विलंबित भुगतान के मामलों से संबंधित जानकारी एमएसईएफसी पोर्टल पर अपलोड कर दी है। 31.03.2017 के अनुसार 1660 करोड़ रुपये की राशि के 3690 मामलों पर विभिन्न एमएसईएफसी द्वारा विचार किया जा रहा है। वास्तव में यह ऑनलाइन पोर्टल स्‍टार्ट-अप्‍स की बड़ी मदद करेगा क्‍योंकि विलंबित भुगतान स्‍टार्ट-अप्‍स के लिए सबसे बड़ी समस्‍या है।

                 इसके अलावा मोबाइल ऐप की भी एम वेंकैया नायडू द्वारा शुरूआत की गई है जो एक ही स्‍थान पर एमएसएमई मंत्रालय द्वारा लागू की गई सभी योजनाओं के बारे में जानकारी प्रदान करता है। एमएसएमई इकाइयां हमेशा यह शिकायत रहती थी कि सभी योजनाओं के बारे में जानकारियां एक ही स्थान पर उपलब्ध नहीं हो रही हैं। माईएमएसएमई मोबाइल एप की सहायता से इस मंत्रालय द्वारा लागू की गई सभी योजनाओं के बारे में एकल खिड़की पर जानकारी उपलब्‍ध होगी। एमएसएमई इस एप के माध्यम से मंत्रालय से संबंधित शिकायतों को भी दर्ज करा सकती हैं। प्रधानमंत्री ने सिविल सेवा दिवस समारोह के अवसर पर ई-गवर्नेंस से एम-गवर्नेंस (मोबाइल गवर्नेंस) की ओर आगे बढ़ने की जरूरत के बारे में बात की है। इस मोबाइल ऐप ने एमएसएमई सेक्टर को एम-गवर्नेंस के युग में प्रवेश करने के लिए सक्षम बनाया है।

                 केंद्रीय सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्ययम राज्य मंत्री हरिभाई चौधरी ने कहा कि मंत्रालय ने प्रत्‍येक योजना ऑनलाइन करने का कार्य शुरू कर दिया है। एमएसएमई इंटरनेट शिकायत निगरानी प्रणाली ने पहले ही 3,000 से अधिक लोगों की शिकायतों को हल कर दिया है। वेंकैया नायडू ने देश के एमएसएमई क्षेत्र में व्यापार को आसान बनाने की दिशा में शुरू की गई विभिन्न पहलों के लिए श्री कलराज मिश्र की प्रशंसा की और उन्‍हें प्रधान मंत्री के डिजिटल इंडिया मिशन के अनुरूप कदम उठाने के लिए बधाई दी।

भारत व साइप्रस में कृषि क्षेत्र में सहयोग

               भारत व साइप्रस के कृषि मंत्रियों ने नई दिल्ली मॆं कृषि क्षेत्र में सहयोग के लिए पहले से हुए समझौता ज्ञापन के कार्यान्‍वयन के लिए कार्य योजना वर्ष 2017-18’ पर हस्‍ताक्षर किया।

           भारत की तरफ से केंद्रीय कृषि एंव किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने और साइप्रस की तरफ से कृषि, ग्रामीण विकास तथा पर्यावरण मंत्री निकोस कौयलिस ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस कार्य योजना में सूचना के आदान-प्रदान, दोनों देशों के विभिन्‍न संस्‍थानों में विशिष्‍ट क्षेत्रों में कार्यरत वैज्ञानिकों-विशेषज्ञों के लिए प्रशिक्षण-विचार-विनमय कार्यक्रम, जर्म प्‍लाज़मा एवं प्रौद्योगिकी आदान-प्रदान तथा निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देने आदि के लिए संयुक्‍त अनुसंधान परियोजनाओं के संचालन, संयुक्‍त कार्यशालाओं एवं सम्‍मेलनों के आयोजन जैसे क्षेत्रों को शामिल किया गया है।

            केंद्रीय कृषि एंव किसान कल्याण मंत्री ने साइप्रस के कृषि, ग्रामीण विकास तथा पर्यावरण मंत्री, निकोस कौयलिस का स्‍वागत करते हुए यह उल्‍लेख किया कि भारत व साइप्रस के सदैव मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं। दोनों देशों ने अंतर्राष्‍ट्रीय मामलों में एक-दूसरे के दृष्‍टिकोणों का समर्थन किया है। सिंह ने जानकारी दी कि भारत ने कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में काफी प्रगति की है। यह क्षेत्र अभी भी लोगों की आय का प्रमुख स्रोत है। सरकार खादयान्‍नों की बढ़ती मांग पूरा करने के लिए न केवल कृषि उत्‍पादन में तेजी से वृद्धि कर रही है बल्‍कि कृषि पर निर्भर लोगों की आय में भी वृद्धि कर रही है।

             सरकार ने वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने का लक्ष्‍य निर्धारित किया है। केंद्रीय कृषि मंत्री ने इस संबंध में किए गए प्रयासों पर संक्षिप्‍त रूप से प्रकाश भी डाला। केंद्रीय कृषि एंव किसान कल्याण मंत्री ने यह भी उल्‍लेख किया कि उनकी सरकार ने न केवल व्‍यापार एवं निवेश की संभावनाओं को बढ़ाने के लिए बल्‍कि वर्षों से अर्जित जानकारी को बांटने और समान विचारधारा वाले देशों के साथ संबंधों को बढ़ाने पर जोर दिया है।

          सिंह ने साइप्रस के कृषि, ग्रामीण विकास एवं पर्यावरण मंत्री को भारत आने के लिए धन्‍यवाद दिया और कहा कि इस दौरे से दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंध और भी मजबूत हुए हैं।

अनुकंपा के आधार पर ग्रामीण डाक सेवक की नियुक्ति

                  डाक विभाग ने मौजूदा नियम के तहत ग्रामीण डाक सेवक के आश्रित परिजनों को अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने के लिए नई शुरुआत की है। 

        ग्रामीण डाक सेवक की नौकरी के दौरान मौत होने पर आश्रित को बिना किसी मुश्किल के तय समय के भीतर अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने की प्रक्रिया शुरू की गई है। किसी भी ग्रामीण डाक सेवक की नौकरी के दौरान बीमारी या किसी दूसरी वजह से मृत्यु होती है तो उसके परिवार के सदस्य को अनुकंपा के आधार पर नौकरी मिलेगी। जरूरी हुआ तो आवेदक की ऊपरी उम्र की सीमा में भी छूट दी जाएगी। नई योजना की शुरुआत से ग्रामीण डाक सेवक जो कि समाज के कमजोर और गरीब तबके से आते हैं और किसी अनहोनी की स्थिति में जिनपर अचानक मुश्किल आ जाती है उनके परिजनों को राहत मिलेगी।

             आश्रितों के निकटतम रिश्तेदारों में भी विस्तार दिया गया है जिसमें अब शादीशुदा बेटा जो मां-पिता के साथ रह रहा है और ग्रामीण डाक सेवक के निधन के समय अपनी आजीविका के लिए पिता पर पूरी तरह निर्भर हो, तलाकशुदा बेटी जो ग्रामीण डाक सेवक के निधन के समय अपने पिता पर ही पूरी तरह से निर्भर हो, ग्रामीण डाक सेवक की बहू जो निधन के समय उन्हीं पर पूरी तरह से निर्भर हो और ग्रामीण डाक सेवक के एकमात्र बेटे का पहले ही निधन हो चुका हो। परिवार के सदस्यों में इसके विस्तार का लक्ष्य हमारे समाज में महिलाओं के सामने उनके पति/परिजन के अचानक निधन से पैदा हुई मुश्किल परिस्थितियों में राहत देना है।

           अलग सेवा शर्त, सामाजिक और वित्तीय हालात और परिवार में वित्तीय अभाव, ज्यादा समय लेने वाली जटिल प्रक्रिया की वजह से गरीबी के आधार पर परिजनों के मूल्यांकन के पुराने तरीके को बदलकर वर्तमान तरीका लागू किया गया है। आगे से अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति के लिए आए आवेदन पर पर विचार कर आवेदन प्राप्ति की तारीख से तीन महीने के भीतर इसपर फैसला ले लिया जाएगा। आश्रित को दूर ना जाना पड़े इसके लिए फैसला किया गया है कि ग्रामीण डाक सेवक के आश्रित को अनुकंपा के आधार पर ग्रामीण डाक सेवक की नियुक्ति वही करने की कोशिश की जाएगी जहां उसका परिवार रहता है।

Wednesday, 26 April 2017

विश्वविद्यालयों का विकास शिक्षा के मंदिरों के रूप में हो

           राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने हैदराबाद में उस्मानिया विश्वविद्यालय के शताब्दी समारोहों के उद्घाटन समारोह को संबोधित किया। 

          राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा कि हमें विश्वविद्यालयों का उच्चतर शिक्षा के मंदिरों के रूप में विकास करना चाहिए। उन्हें अध्ययन वातावरण के सृजन का स्थान होना चाहिए जहां विचारों का स्वतंत्र आदान प्रदान हो सके और छात्रों एवं शिक्षकों के रूप में ताकतवर मस्तिष्‍क आपस में विचारों का आदान प्रदान कर सकें। उस्मानिया विश्वविद्यालय की स्थापना इसी ध्येय के साथ की गई थी कि यह उत्कृष्टता का एक ऐसा संस्थान बनेगा जहां स्वतंत्र मस्तिष्‍क स्‍वतंत्रता के साथ विचारों का आदान प्रदान कर सकें, आपस में बातचीत कर सकें और शांतिपूर्ण सह अस्तित्‍व के साथ रह सकें। 

            राष्ट्र्पति ने कहा कि प्राचीन समय में भारत ने उच्चतर शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाई थी। तक्षशिला, नालंदा, विक्रमशिला आदि जैसे विश्वविद्यालयों ने छात्रों एवं शिक्षकों के रूप में ताकतवर मस्तिष्कों को आकर्षित किया था।
 

            राष्ट्र्पति ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि आज उच्चतर शिक्षा के क्षेत्र में शैक्षणिक अवसंरचना में प्रचुर विकास हुआ है। बहरहाल, अभी भी चिंता के कुछ क्षेत्र हैं। उच्चतर शिक्षा के 100 से अधिक केंद्रीय संस्थानों की यात्रा कर चुकने के कारण, वह लगातार इस विषय पर जोर देते रहे हैं कि भारत के इन संस्थानों को अंतरराष्‍ट्रीय रैंकिंग प्रक्रिया में उनका उचित स्थान प्राप्त होना चाहिए। 

              उन्होंने कहा कि इस पहलू पर ध्यान दिए जाने के अतिरिक्त, मूलभूत अनुसंधान एवं शिक्षा पर भी बल दिए जाने की आवश्यकता है। राष्ट्रपति ने कहा कि उद्योग एवं शिक्षा क्षेत्र के बीच कारगर अंत:संयोजन एवं परस्पर संपर्क किए जाने की जरूरत है। हम अलग थलग नहीं रह सकते। हमें अनुसंधान एवं नवप्रवर्तन में निवेश करने की आवश्यकता है जिससे कि हम अंतरराष्ट्रीय समुदाय में अपना उचित स्था्न प्राप्त कर सकें। राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि इन विचारों को अनिवार्य रूप से व्यवहारिक कदम के रूप में रूपांतरित किया जाना चाहिए।

गरीबों के आवास के लिए एक लाख करोड़ का निवेश

            आवास एवं शहरी गरीबी उन्‍मूलन मंत्रालय ने 4200 करोड़ रुपये के निवेश के साथ प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत शहरी गरीबों के लिए 1,00,537 और मकानों को मंजूरी दी है। 

            इसके साथ ही अब तक कुल मिलाकर 1,00,466 करोड़ रुपये के निवेश की मंजूरी दी गई है। यह शहरी क्षेत्रों में किफायती मकानों के लिए वर्ष 2004 से लेकर वर्ष 2014 तक मंजूर किये गये 32,713 करोड़ रुपये के निवेश से 307 प्रतिशत ज्‍यादा है। नवीनतम मंजूरी के साथ ही मंत्रालय ने अब तक 34 राज्‍यों-केन्‍द्र शासित प्रदेशों में 2151 शहरों एवं कस्‍बों में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत आर्थिक दृष्टि से कमजोर तबकों के लिए 18,75,389 मकानों के निर्माण को मंजूरी दी है। वहीं, दूसरी ओर 2004-2015 अवधि के दौरान 32,009 करोड़ रुपये के स्‍वीकृत निवेश के साथ 13.80 लाख मकानों को मंजूरी दी गई थी। 

              अब तक स्‍वीकृत किये गये कुल निवेश में 29409 करोड़ रुपये की केन्‍द्रीय सहायता, राज्‍य सरकारों की ओर से प्राप्‍त सहायता और लाभार्थियों का अंशदान शामिल है। नवीनतम मंजूरी के तहत मध्‍य प्रदेश को 57131 मकान, तमिलनाडु को 24576, मणिपुर को 6231, छत्‍तीसगढ़ को 4898, गुजरात को 4261, असम को 2389, केरल को 643, झारखंड को 331 और दमन एवं दीव को 77 मकान हासिल हुए हैं। कुल 2,66,842 मकानों को दी गई स्‍वीकृति के साथ मध्‍य प्रदेश पहली बार 18,283 करोड़ रुपये के कुल निवेश के साथ प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत दी गई मंजूरियों के मामले में पहली बार नंबर-1 बना है। तमिलनाडु 9,112 करोड़ रुपये की परियोजना लागत वाले 2,52,532 मकानों के साथ दूसरे नंबर पर है।

             मध्‍य प्रदेश, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, महाराष्‍ट्र, बिहार, तेलंगाना, झारखंड, ओडिशा, त्रिपुरा, पंजाब, राजस्‍थान, छत्‍तीसगढ़, केरल, असम, उत्‍तर प्रदेश, मणिपुर, नगालैंड, मिजोरम, उत्‍तराखंड, जम्‍मू-कश्‍मीर, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा के लिए मकानों को मंजूरी दी गई है। अब तक जितने मकानों को मंजूरी दी गई हैं, उनमें से 6,89,829 मकानों का निर्माण कार्य शुरू हो गया है, जबकि 1,00,395 मकानों का निर्माण पूरा हो चुका है।

प्रधानमंत्री ‘उड़ान’ नामक प्रथम उड़ान को झंडी दिखाकर रवाना करेंगे

          प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी 27 अप्रैल, 2017 को ‘उड़े देश का आम नागरिक (उड़ान) नामक क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना (आरसीएस) के तहत शिमला-दिल्‍ली रूट पर प्रथम उड़ान को झंडी दिखाकर रवाना करेंगे।

         इसके साथ ही प्रधानमंत्री ‘उड़ान’ के तहत कडप्पा-हैदराबाद और नांदेड़-हैदराबाद क्षेत्रों पर भी प्रथम उड़ान को झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। नागरिक उड्डयन मंत्रालय उन हवाई अड्डों को हवाई कनेक्टिविटी सुलभ कराने के लिए प्रतिबद्ध है, जहां वर्तमान में या तो हवाई सेवा बिल्‍कुल भी उपलब्‍ध नहीं है या बेहद कम संख्‍या में उपलब्‍ध है। क्षेत्रीय दृष्टि से महत्‍वपूर्ण शहरों में रहने वाले लोगों को हवाई यात्रा सुलभ कराने के लिए मंत्रालय ने अक्‍टूबर, 2016 में ‘उड़े देश का आम नागरिक (उड़ान) नामक क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना (आरसीएस) शुरू की थी। विभिन्‍न मुद्दों पर विस्‍तारपूर्वक विचार-विमर्श करने और हितधारकों के साथ सलाह-मशविरा करने के बाद उड़ान योजना तैयार की गई थी। बाजार आधारित व्‍यवस्‍था के जरिये क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने वाली यह योजना विश्‍व भर में अपनी तरह की पहली स्‍कीम है।

             उड़ान योजना राष्‍ट्रीय नागरिक उड्डयन नीति (एनसीएपी) का एक अहम हिस्‍सा है, जिसे नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने 15 जून, 2016 को जारी की थी। भारतीय विमानपत्‍तन प्राधिकरण (एएआई) क्रियान्‍वयनकारी एजेंसी है, जिसने आरसीएस-उड़ान के तहत प्राप्‍त 27 प्रस्‍तावों के लिए अनुबंध पत्र जारी किये हैं। हवाई अड्डों को कनेक्‍ट किया जाएगा, इन 27 प्रस्‍तावों के जरिये 27 मौजूदा सेवारत हवाई अड्डों, 12 मौजूदा कम सेवारत हवाई अड्डों और मौजूदा समय में गैर-सेवारत 31 हवाई अड्डों (कुल मिलाकर 70 हवाई अड्डे) को कनेक्‍ट किया जाएगा। 

           भौगोलिक विस्‍तार, इन प्रस्‍तावों के तहत भौगोलिक विस्‍तार काफी ज्‍यादा है, पश्चिम भारत के 24 हवाई अड्डों, उत्‍तर भारत के 17 हवाई अड्डों, दक्षिण भारत के  11 हवाई अड्डों, पूर्वी भारत के 12 हवाई अड्डों और पूर्वोत्‍तर क्षेत्र के 6 हवाई अड्डों को कनेक्‍ट करने का प्रस्‍ताव हैं। इन 27 प्रस्‍तावों के जरिये 22 राज्‍यों और 2 केन्‍द्र शासित प्रदेशों को कनेक्‍ट किया जाएगा। रूट एवं नेटवर्क,  16 सुविचारित प्रस्‍ताव एकल रूटों (दो शहरों को जोड़ने वाले) और 11 प्रस्‍ताव नेटवर्कों (तीन या उससे अधिक शहरों को जोड़ने वाले) से संबंधित है।
 

        हवाई जहाज से लगभग 500 किलोमीटर की एक घंटे की यात्रा अथवा हेलिकॉप्‍टर से 30 मिनट के सफर का हवाई किराया अधिक‍तम 2500 रुपये होगा। अलग-अलग दूरी एवं अवधि वाले रूटों पर हवाई सफर का किराया समानुपातिक आधार पर तय किया जाएगा।

फर्जी प्रमाणपत्रों पर केंद्रीय जनजाति आयोग ने मांगी रिपोर्ट

            केंद्रीय जनजाति आयोग ने गोंड जनजाति के फर्जी प्रमाण पत्र बनाये जाने पर उत्‍तर प्रदेश सरकार से रिपोर्ट तलब की है।

           केंद्रीय जनजाति आयोग के सचिव ने उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍य सचिव को लिखे पत्र में कहा है कि आयोग के संज्ञान में आया है कि उत्‍तर प्रदेश के गोरखपुर, देवरिया, महाराजगंज, बस्‍ती, आजमगढ, मउ एवं बलिया जिलों में नायक ब्राह्मण एवं ब्राह्मण ओझा समुदाय के लोगों ने नौकरी प्राप्‍त करने के लिए गोंड जाति के फर्जी प्रमाणपत्र बनवा लिये हैं।
उत्‍तरप्रदेश के मुख्‍य सचिव से पूछा गया है कि उत्‍तर प्रदेश में जनजातियों की संख्‍या एवं प्रतिशत क्‍या है। साथ ही गोंड जाति की जनसंख्‍या एवं उसके प्रतिशत के बारे में जानकारी चाही गयी है। आयोग की ओर से यह भी पूछा गया है कि नायक ब्राह्मण एवं ब्राह्मण ओझा समुदाय के कितने लोगों को गोंड जाति का प्रमाणपत्र जारी किया गया है।

          आयोग ने उत्‍तर प्रदेश सरकार से यह भी पूछा है कि फर्जी प्रमाणपत्र प्राप्‍त करने वाले लोगों के खिलाफ सरकार ने क्‍या फौजदारी अथवा प्रशासनिक कार्यवाई की है। आयोग ने एक गैर-सरकारी संगठन की ओर से दिए गए प्रतिवेदन के बाद इस प्रकरण पर संज्ञान लिया है।

देश के  विकास में हुडको की भूमिका महत्‍वपूर्ण

            आवास एवं शहरी गरीबी उन्‍मूलन (एचयूपीए) मंत्री एम. वेंकैया नायडू ने आवास एवं शहरी विकास निगम लिमिटेड (हुडको) के 47वें स्‍थापना दिवस का उद्घाटन किया। 

         उन्‍होंने कहा कि देश में वित्तीय समावेश को आगे ले जाने में हुडको महत्‍वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा है। दरअसल, आर्थिक दृष्टि से कमजोर तबकों की आवास वित्त संबंधी जरूरतों को पूरा करने पर हुडको अपना ध्‍यान केन्द्रित करता रहा है। नायडू ने कहा कि पिछले 47 वर्षों में हुडको ने देश भर में 16 मिलियन आवासीय इकाइयों का निर्माण किया है। इनमें से 92 प्रतिशत से भी ज्‍यादा आवासीय इकाइयों ने आर्थिक दृष्टि से कमजोर तबकों और निम्‍न आय समूहों को लाभान्वित किया है। 

              उन्‍होंने यह भी कहा कि हुडको ने लगभग 67 लाख व्यवहार्य और कम लागत वाली स्वच्छता इकाइयों के निर्माण में सहायता की है। इस अवसर पर मंत्री ने पुरस्‍कार प्रदान किये। अनेक प्रकाशनों यथा 'शेल्टर', 'हुडको दर्पण', 'हुडको डिजाइन पुरस्कार 2016', 'संकल्प' और 'शहरी भारत' का विमोचन किया।

            इस अवसर पर मुख्य सतर्कता आयुक्त के. वी. चौधरी, सचिव (एचयूपीए) डॉ. नंदिता चटर्जी, हुडको के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक डॉ. एम. रवि कंठ और एचयूपीए के अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण भी मौजूद थे।

स्वच्छ भारत मिशन में 10 नए शहर व स्थान शामिल

            स्वच्छ भारत मिशन के तहत पेय जल एवं स्वच्छता मंत्रालय की पहल स्वच्छ महत्वपूर्ण स्थान के संबंध में दूसरी तिमाही समीक्षा बैठक कटरा, जम्मू-कश्मीर स्थित माता वैष्णो देवी श्राइन में आयोजित की गई। 10 स्वच्छ महत्वपूर्ण स्थान पहले चरण में कार्य योजना का कार्यान्वयन कर रहे हैं।

           इस अवसर पर ग्रामीण विकास, पंचायती राज और पेय जल एंव स्वच्छता मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने दूसरे चरण के अतंर्गत 10 नए महत्वपूर्ण स्थानों की घोषणा की। ये 10 स्थान गंगोत्री, यमुनोत्री, महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन, चार मीनार, हैदराबाद, चर्च एंड कॉन्वेंट ऑफ सेंट फ्रांसिस ऑफ असीसी, गोवा, आदि शंकराचार्य निवास, कालडी एर्नाकुलम में, श्रवणबेलगोला में गोमतेश्वर, बैजनाथ धाम, देवघर, बिहार में गया तीर्थ और गुजरात में सोमनाथ मंदिर हैं।

             उल्लेखनीय है कि पहले चरण में 10 महत्वपूर्ण स्थान हैं, अजमेर शरीफ दरगाह, सीएसटी मुंबई, स्वर्ण मंदिर, अमृतसर, कामख्या मंदिर, असम, मणिकर्णिका घाट, वाराणसी, मीनाक्षी मंदिर, मदुरै, श्री माता वैष्णो देवी, कटरा, जम्मू-कश्मीर, श्री जगन्नाथ मंदिर, पुरी, ताज महल, आगरा,  तिरुपति मंदिर, तिरुमला। 

           बैठक में जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल एन. एन. वोहरा, ग्रामीण विकास, पंचायती राज और पेय जल एंव स्वच्छता मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर, राज्य मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह, जम्मू-कश्मीर के मंत्री अजय नंदा, पेय जल एवं स्वच्छता सचिव परमेश्वरन अय्यर तथा पेय जल एवं स्वच्छता मंत्रालय, शहरी विकास मंत्रालय, पर्यटन मंत्रालय, संस्कृति मंत्रालय, राज्य, सहभागी सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों और अन्य स्थानीय निकायों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

Tuesday, 25 April 2017

गुणवत्तापरक शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए सुझाव

            केन्द्रीय मानव संसाधन और विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर ने नई दिल्ली में एक दिवसीय प्रत्ययन के लिए संशोधित रूपरेखा पर राष्ट्रीय विमर्श का उद्घाटन किया।

         गुणवत्ता परक शिक्षा के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी मान्यता प्राप्त प्रक्रिया या मूल्याकंन प्रक्रिया के दौरान अंतिम उत्पाद को ध्यान में रखा जाना चाहिए। विषय के बारे में ज्ञान होना एक बात है, एक छात्र को विषय के बारे में जानकारी, बुनियादी ढांचे और कौशल विकास के बारे जानकारी देना दूसरी बात है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य एक अच्छे नागरिक का निर्माण करना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल उसी प्रकार  की शिक्षा को रचनात्मक शिक्षा के रूप में वर्णित किया जा सकता है जिसमें लक्ष्य, नीति और योजना के मापदंड प्रतिबंबित होते हैं। जावडेकर ने इस संबंध में मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. महेन्द्र नाथ पांडे की सराहना की और शिक्षा के बारे में समग्रता से सोचने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि संस्थानो की रैंकिंग में शिक्षा प्रतिबिंबित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि  किसी भी संस्थान द्वारा दी जाने वाली शिक्षा गुणवत्ता परक होनी चाहिए। मंत्री ने एनएएसी की  रैंकिंग उसके प्रमाण पत्र और उसके मूल्याकंन पत्र का हवाला देते हुए कहा कि इसके आधार पर छात्र आगे की शिक्षा के लिए संस्थानों का चयन करते हैं। 

           उऩ्होंने कहा कि अब संस्थानों ने एनआईआरएफ रैंकिंग को भी अपने रैंकिंग कैप में शामिल किया है। मंत्री ने कहा कि अब छात्रों के साथ-साथ समाज को भी गुणवत्ता के मामले में गुमराह नहीं किया जा सकता। उऩ्होंने कहा कि गुणवत्ता का कोई विकल्प नहीं है और इसमें अधिक तेजी लानी चाहिए। जावडेकर ने कहा कि हमारी सरकार के पास न केवल बहुमत है बल्कि हम यहां सुधार और प्रदर्शन करने के लिए आए हुए हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा में बदलाव की सख्त जरूरत है। उन्होंने एनएएसी अधिकारियों को सलाह दी कि वह अपनी टीम का विस्तार करें और अधिक से अधिक संस्थानों तक अपनी पहुंच बनाएं।

              उन्होंने डाटा बेस की प्रमाणिता और सत्यता को सुनिश्चित करने के लिए इस बात पर जोर दिया कि एकत्रित आंकडों की जांच होनी चाहिए। मंत्री ने कहा कि इस उद्देश्य के लिए बनाई गयी व्यवस्था को स्पष्ट नियमों और कानूनों के साथ पारदर्शी होना चाहिए तथा घपलेबाजी की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। उऩ्होंने उम्मीद व्यक्त की कि आज की चर्चा से एक नई पारदर्शी मान्यता प्रणाली का मार्ग प्रशस्त होगा। जावडेकर ने आधार का प्रयोग करने पर जोर देते हुए कहा कि इससे एलपीजी वितरण, यूरिया वितरण में हो रही गड़बड़ी को रोकने में मदद मिली है।

             उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि झारखंड तथा आंध्र प्रदेश में मध्याह्न भोजन योजना के आधार योजना के जुड़ जाने के बाद 4.5 लाख फर्जी पंजीकरणों का पता चला। उन्होंने कहा कि अभी तक 112 करोड़ आधार कार्ड बनाये जा चुके हैं जो हमारे देश के बदलते और आगे बढ़ने का एक स्पष्ट प्रमाण है। मंत्री ने सुझाव दिया कि उच्च शिक्षण संस्थानों की रैंकिंग जारी करने के लिए 4-5 एजेंसियां होनी चाहिए इससे विश्वसनीयता में और बढ़ोतरी होगी। मंत्री ने कहा कि इस महीने 28 अप्रैल को होनी वाली आईआईटी काउंसिल की अगली बैठक में हम देखेंगे कि क्या आईआईटी भी अन्य संस्थानों को मान्यता दे सकता है। जावड़ेकर ने कहा, ‘यदि हम समयबद्ध तरीके से पहुंचना चाहते हैं तथा उनका सही मूल्यांकन करना चाहते हैं तो हमें इसके लिए और अधिक जिम्मेदार बनना होगा इसलिए हम कम से कम तीन चार और संस्थानों का निर्माण करना चाहते हैं। हमे इस संबंध में संस्थानों को एक संदेश देना चाहिए।’

                उन्होंने आगे कहा कि केंद्र की मोदी सरकार गुणवत्ता परक शिक्षा देने के लिए प्रतिबद्ध है क्योंकि इसी से देश आगे बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि आज रैंकिंग की नई मूल्यांकन प्रणाली बहुत महत्वपूर्ण है। मंत्री ने प्रतिभागियों से आग्रह किया कि इस प्रक्रिया को तीन महीनों के अंदर पूरी कर लें। इस बैठक को मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री महेन्द्र नाथ पांडे और उच्च शिक्षा सचिव के.के शर्मा द्वारा भी संबोधित किया गया। हाल ही में एनएएसी द्वारा विकसित किये गये संशोधित प्रत्यायन ढांचे पर चर्चा के लिए राष्ट्रीय विमर्श का आयोजन किया जा रहा है। संशोधित रूप रेखा में तकनीक के प्रयोग और प्रक्रिया की निष्पक्षता शामिल हैं। विशेषज्ञों के कार्य समूहों द्वारा विश्वविद्यालयो, स्वायत्त महाविद्यालयों तथा संबंधित महाविद्यालयों के लिए ढांचा तैयार एवं विकसित किया जा रहा है। 

        प्रख्यात शिक्षा विधेयक, वर्तमान और कुलपति/निदेशकों, वैधानिक निकायों, शिक्षाविदों विश्वविद्यालय के प्राचार्यों सहित लगभग सौ विशेषज्ञ राष्ट्रीय विमर्श में भाग लेंगे। राष्ट्रीय विमर्श से प्राप्त होने वाले विचारों का इस्तेमाल प्रत्ययन के लिए संशोधित रूपरेखा को तय करने में किया जाएगा, जिसे जुलाई 2017 में लांच किया जाना है।

24 मिलियन मीट्रिक टन दलहन उत्‍पादन के लिए रोडमेप

           केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने राष्‍ट्रीय कृषि सम्‍मेलन खरीफ अभियान-2017 में कहा, वर्ष 2022 तक किसानों की आय को दुगुना करने के लिए भारत सरकार की प्रतिबद्धता है। इस संबंध में केंद्र सरकार द्वारा की गई पहलों का उल्‍लेख किया।

             सिंह ने बताया कि वर्ष 2021 तक दालों के उत्‍पादन को 24 मिलियन मीट्रिक टन तक बढ़ाने के लिए एक रोडमेप तैयार किया  गया है। सिंह ने राज्‍यों की इस बात के लिए प्रशंसा की कि उन्‍होंने सभी किसानों को मृदा स्‍वास्‍थ्‍य कार्ड देने संबंधी लक्ष्‍य को प्राप्‍त कर लिया है तथा  अन्‍य संबंधितों को भी अगले 2-3 महीनों में पहले चरण को पूरा करने को प्रोत्‍साहित किया। उन्‍होंने यह भी उल्‍लेख किया कि मृदा स्‍वास्‍थ्‍य कार्ड स्‍कीम का दूसरा चरण 2017 में शुरू होगा। उन्‍होंने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की बढ़ती हुई लोकप्रियता का भी जिक्र किया और यह भी आशा की कि राज्‍य इस स्‍कीम के तहत और अधिक कवरेज बढ़ाएंगे। 

            केंद्रीय कृषि मंत्री ने राज्‍यों को विशेषरूप से वर्षा सिंचित और पर्वतीय क्षेत्रों में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए पंरपरागत कृषि योजना को मिशन मोड में कार्यान्‍वित करने के लिए प्रोत्‍साहित किया। सिंह ने कृषि क्षेत्र में विपणन सुधार शुरू किए जाने की जरूरत पर बल दिया ताकि किसानों को बेहतर मूल्‍य प्राप्‍त हो सकें।
      

            केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्‍याण राज्‍यमंत्री परषोत्‍तम रूपाला ने अपने संबोधन में विभाग की अग्रणी योजनाओं के तहत प्राप्‍त की गई उपलब्‍धियों का उल्‍लेख किया और विशेषकर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के बारे में जिक्र किया जिसे खरीफ 2016 से शुरू किया गया था। इस नई स्‍कीम के तहत बुआई पूर्व से लेकर फसल कटाई के पश्‍चात होने वाली हानियों तक का व्‍यापक जोखिम कवरेज मुहैया कराया गया है। रूपाला ने स्‍कीम के कार्यान्‍वयन में प्रौद्योगिकी अपनाने और साथ ही वर्ष 2017-18 एवं 2019-20 के दौरान कुल फसलगत क्षेत्र/किसानों के क्रमश: 40 प्रतिशत और 50 प्रतिशत की बीमा सुरक्षा के लक्ष्‍य प्राप्‍त करने को प्रोत्‍साहित किया। 

           इस अवसर पर केंद्रीय कृषि राज्‍य मंत्री सुदर्शन भगत ने बताया कि हमारे किसानों के जीवन में भौतिक सुधार लाने के लिए केंद्र सरकार की सभी अग्रणी योजनाओं को उच्‍च प्राथमिकता देना पूर्णत: अनिवार्य है। केंद्रीय कृषि सचिव, शोभना के. पट्नायक ने अपने संबोधन में वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने के लिए बहुआयामी रणनीति की आवश्‍यकता के बारे में उल्‍लेख किया। 

          उन्‍होंने उत्‍पादन लागत को कम करने, उत्‍पादकता में उपज अंतराल को कम करने और हमारे किसानों के लिए बेहतर मूल्‍य सुनिश्‍चित करने हेतु प्रयास करने पर विशेष बल दिया। उन्‍होंने इस संबंध में प्रौद्योगिकी को अपनाने की आवश्‍यकता पर विशेष बल दिया।