Sunday, 18 February 2018

स्कूली शिक्षा के प्रारंभिक दिनों में मजबूत नींव डालने की आवश्यकता

    केरल। उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडु ने कहा है कि शैक्षणिक संस्थानों को अनिवार्य रूप से छात्रों को विविध और समृद्ध अध्ययन अनुभव प्रदान करना चाहिए।

  वह आज केरल के कोझिकोड में फारूक महाविद्यालय में रौजाथुल उलूम एसोसिएशन के प्लेटिनम जुबली समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर केरल के स्थानीय प्रशासन मंत्री के टी जलील एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।
   उपराष्ट्रपति ने कहा कि जीवन पर्यंत शिक्षार्थी बनने के लिए हमें अपनी स्कूली शिक्षा के प्रारंभिक दिनों में मजबूत नींव डालने की आवश्यकता होती है।
     उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण यह है कि उत्सुक बनने, अवलोकन करने, विश्लेषण करने, समन्वय करने, निष्कर्ष निकालने, परिकल्पना का परीक्षण करने एवं ज्ञान के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ने की क्षमता विकसित हो। 
    उपराष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा प्रबंधकों, शिक्षकों एवं शोधकर्ताओं को एक ऐसी प्रणाली का विकास करना चाहिए जिसमें मार्गदर्शी सिद्धांतों के रूप में ‘समानता‘ और ‘गुणवत्ता‘ हो। उन्होंने कहा कि हमारे लिए प्रत्येक छात्र महत्वपूर्ण है और प्रत्येक छात्र तथा युवाओं के साथ व्यतीत किया गया समय बहुमूल्य होता है।
     उपराष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा मुक्ति का एक माध्यम है और यह हमें निर्भरता से मुक्त करता है और आत्म विश्वास की भावना का संचार करता है। उन्होंने कहा कि अगर हम अच्छी शिक्षा की सुविधा को विस्तारित नहीं करते हैं तो हमारे समाज के विभिन्न वर्गों के बीच बड़ी खाई उत्पन्न हो जाएगी जो आर्थिक प्रगति का लाभ समाप्त कर सकती है।

21वीं सदी ज्ञान अर्थव्यवस्था का युग

   नई दिल्ली। राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने नई दिल्ली में दिल्ली विश्वविद्यालय के पीजीडीएवी महाविद्यालय की हीरक जयंती समारोहों को संबोधित किया।

  इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों के डीएवी परिवार ने हमारे देश में कई पीढि़यों तक आधुनिक वैज्ञानिक परिपेक्ष्यों पर आधारित एवं भारतीय परंपराओं से भी प्रेरित रही शिक्षा प्रदान की है। 
  मानव समाज का स्थायी विकास भारतीय मूल्यों एवं आधुनिक विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी के संगम के जरिये संभव है। वास्तव में, डीएवी संस्थानों का दर्शन, जिसकी खोज पहली बार 19वीं शताब्दी में हुई थी, आज 21वीं सदी में भी हमारे लिए मजबूती से खड़ा है। 
    राष्ट्रपति ने कहा कि 21वीं सदी ज्ञान अर्थव्यवस्था का युग है। आज के समय में नए विचारों, नवीन दृष्टिकोण एवं नवोन्मेषण की ताकत धन से कहीं अधिक है। उन्होंने उदाहरण के रूप में ऑनलाइन वाणिज्य, परिवहन एवं पर्यटन में युवाओं एवं उनकी र्स्टाट अप कंपनियों की सफलता की ओर इंगित किया। 
   उन्होंने कहा कि पूंजीगत निवेश से अधिक ऐसी सफलताओं के लिए मानव प्रतिभा एवं बुद्धिमत्ता ज्यादा बड़े कारण हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि रोजगार की परिभाषा बदल रही है। रोजगार अब कोई पारंपरिक नौकरी नहीं रह गया है। अपने लिए एवं दूसरों के लिए स्व रोजगार अवसरों का सृजन करना अब अधिक संभव हो गया है। स्व रोजगार को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सहायता प्रदान कर रही है। 
     उन्होंने छात्रों से अपने कैरियर के विकास एवं दूसरों के लिए अवसरों का निर्माण करने के लिए ऐसे अवसरों का उपयोग करने का आग्रह किया।