Wednesday, 29 November 2017

भारत का रूस अति विश्वसनीय मित्र

       मॉस्को/नई दिल्‍ली। केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कल मॉस्को में भारतीय समुदाय के लोगों से मुलाकात की। गृह मंत्री ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए अपने रूस के दौरे और विभिन्न रूसी नेताओं के साथ बातचीत पर संतुष्टि जताई।

 उन्होंने कहा कि उनकी यात्रा से भारत और रूस के बीच सुरक्षा, आतंकवाद से मुकाबला, कट्टरता विरोधी, नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने, जाली मुद्रा और सूचनाओं के आदान-प्रदान के क्षेत्र में विशेषज्ञों को प्रशिक्षण दिए जाने में और सहयोग किया जा सकेगा। 
   राजनाथ सिंह ने भारत और रूस के बीच रिश्तों और मैत्रि के दीर्घ इतिहास के बारे में बात करते हुए रूस को भारत का ‘अति विश्वसनीय मित्र’ कहा। उन्होंने रूस में रह रहे प्रत्येक भारतीय के कार्यों की प्रशंसा की और उन्हें भारत के ‘सांस्कृतिक दूत’ की संज्ञा दी। 
     उन्होंने कहा कि उनकी और भारत के बीच भौतिक दूरी लंबी हो सकती, किंतु भावनात्मक दूरी कभी भी नहीं हो सकती। उन्होंने उपस्थित जन समुदाय को भारत सरकार द्वारा आंतकवाद और आतंकवादियों की घुसपैठ को रोकने के प्रयासों और सैन्य बलों के दृढ़ संकल्प तथा संयम के बारे में जानकारी दी। उन्होंने आतंकवाद को विश्व द्वारा झेला जा रहा सबसे बड़ा खतरा कहा।
    उन्होंने देश के विकास के लिए विभिन्न क्षेत्रों में जन-धन योजना, मेक-इन-इंडिया जैसे भारत सरकार के प्रयासों के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आधार का उपयोग करके देश को आर्थिक प्रगति पर लाने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत विश्व में आर्थिक शक्ति का अग्रणी बनने की दिशा में अग्रसर है। 
      उन्होंने भारतीय संस्कृति की दृढ़ता के बारे में उल्लेख करते हुए कहा कि हमारी संस्कृति संपूर्ण विश्व को एक परिवार – ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ मानती है, जो भविष्य में भारत को उदार शक्ति बनाने की आधारशिला है। भारत सरकार ने पिछले तीन वर्षों में अवसंरचना के विकास से निर्माण के लिए विशेष योगदान दिया है और भारतीय लोगों की साख को बढ़ाया है।

भारत–अफगान सांस्‍कृतिक महोत्‍सव

    नई दिल्‍ली। संस्‍कृति राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) डॉ. महेश शर्मा और अफगानिस्‍तान इस्‍लामिक गणतंत्र के संस्‍कृति और सूचना मंत्री प्रोफेसर मोहम्‍मद रसूल बावरी ने नई दिल्‍ली में भारत-अफगान सांस्‍कृतिक महोत्‍सव का उद्घाटन किया। 

   इस महोत्‍सव का आयोजन अफगानिस्‍तान सरकार और दूतावास तथा भारत सरकार और अंतर्राष्‍ट्रीय सांस्‍कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) ने संयुक्‍त रूप से किया है।
    डॉ. महेश शर्मा ने इस अवसर पर कहा कि भारत-अफगानिस्‍तान के बीच सदियों पुराने सांस्‍कृतिक और सभ्‍यतागत संबंध है तथा संगीत, कला, वास्‍तुकला, भाषा एवं व्‍यंजन के क्षेत्र में गहरे संबंध दोनों देशों के लोगों के बीच की मित्रता के लिए महत्‍वपूर्ण है।
   डॉ. महेश शर्मा ने बताया कि जहां अफगानिस्‍तान के उस्‍ताद सरहंग जैसे प्रसिद्ध शास्‍त्रीय संगीतज्ञ पटियाला घराना में प्रशिक्षित हैं, वहीं बॉलीवुड का लोकप्रिय भारतीय संगीत अफगानिस्‍तान के घरों में सुनाई देता है। 
     उन्‍होंने कहा कि अफगानिस्‍तान का केन्‍द्रीय बमयान प्रांत हमारी साझा बौद्ध विरासत का केन्‍द्र है। डॉ. महेश शर्मा ने कहा कि गुरुदेव रवीन्‍द्रनाथ टैगोर के ‘काबुलीवाला’ के जरिए भारतीय, ईमानदार और बड़े दिलवाले अफगानियों के साथ जुड़े हैं। दोनों देशों के साझा सामान्‍य मूल्‍यों को रेखांकित करते हुए भारतीय संस्‍कृति मंत्री ने कहा कि काबुल में ही चार गुरुद्वारे और दो मंदिरों का होना अफगानिस्‍तान के सहिष्‍णु और विवि‍धता भरे समाज का साक्ष्‍य है।
    भारत द्वारा अफगानिस्‍तान के लोगों के विकास के लिए की जा रही भागीदारी पर बल देते हुए डॉ. महेश ने कहा कि अफगानिस्‍तान की सांस्‍कृतिक विरासत का पुनरुद्धार और इसके सांस्‍कृतिक संस्‍थानों को सुदृढ़ करना वहां के पुनर्निर्माण में हमारी सहायता का महत्‍वपूर्ण हिस्‍सा है। 
    मंत्री ने कहा कि काबुल में स्‍टोरे पेलेस का पुनरुद्धार और अफगान राष्‍ट्रीय संगीत संस्‍थान की सहायता करना ऐसे कुछ उदाहरण हैं।
    डॉ. महेश शर्मा ने कहा कि भारत-अफगान महोत्‍सव का आयोजन असाधारण कार्यक्रम है और इससे कला, हस्‍तशिल्‍प, नृत्‍य, संगीत तथा अन्‍य शैलियों के जरिए दोनों देशों के बीच समानता को सामने लाया जाएगा। तीन दिवसीय महोत्‍सव में अफगानिस्‍तान और भारत के सांस्‍कृतिक कार्यक्रम, हस्‍तशिल्‍प, प्रदर्शनियां, व्‍यंजन तथा सांस्‍कृतिक शो का प्रदर्शन किया जाएगा।

एक वर्ष में रिकॉर्ड दस लाख घरों का निर्माण

     नई दिल्‍ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 20 नवंबर, 2016 को आगरा से प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) का शुभारंभ किया था। 

  इस योजना के तहत 31 मार्च 2019 तक एक करोड़ नये घरों का निर्माण सुनिश्चित किया जाना है। इनमें से 31 मार्च 2018 तक 51 लाख मकान बनाए जाने हैं। इस चुनौती को पूरा करने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत 51 लाख आवास मार्च 2018 तक बनाने के लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय राज्य सरकारों के साथ मिलकर कई कदम उठा रहा है। 
    इसके लिए मासिक लक्ष्य निर्धारित किया गया है, ताकि आवासों का निर्माण किया जा सके। नवंबर, 2017 तक 10 लाख घर बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। लक्ष्य की अंतिम तिथि से पहले ही आज 29 नवंबर, 2017 को यह लक्ष्य पूरा कर लिया गया है। आशा व्यक्त की जा रही है कि 31 दिसंबर, 2017 तक 15 लाख घरों का निर्माण हो जाएगा। 31 जनवरी, 2018 तक 25 लाख, 28 फरवरी, 2018 तक 35 लाख और 31 मार्च, 2018 तक 51 लाख घरों के निर्माण हो जाने की आशा व्यक्त की जा रही है। 
    मार्च, 2018 तक 51 लाख आवासों के निर्माण कार्य को पूरा करने के लिए 56.90 लाख लाभार्थियों को मकानों की स्वीकृति दी गई है। 51.39 लाख लाभार्थियों को पहली किस्त मिल चुकी है। 31.03 लाख लाभार्थियों ने अपने आवासों की छत बना ली है और 16.05 लाख लाभार्थियों का गृह निर्माण लगभग समाप्ति की ओर है।
     छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिसा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के लाभार्थियों की संख्या सर्वाधिक है। इन राज्यों के लोगों ने निर्धारित समयसीमा के भीतर अपने आवासों का निर्माण किया है।
    बेहतर गुणवत्ता के आवासों के तेजी से निर्माण के लिए लाभार्थियों के खातों में प्रत्यक्ष हस्तांतरण के जरिए आईटी-डीबीटी के जरिए सहायता राशि मुहैया कराई गई है। बेहतर गुणवत्ता के घरों के निर्माण के लिए ग्रामीण मजदूरों और मिस्त्रियों को प्रशिक्षण दिया गया है। अंतरिक्ष टेक्नोलॉजी और सूचना प्रौद्योगिकी के जरिए घरों के निर्माण की पूरी प्रक्रिया की निगरानी की जा रही है। 
    लाभार्थियों के मकानों के निर्माण कार्य के विभिन्न चरणों पर नजर रखी जा रही है। राज्यों ने निर्माण सामग्री को रियायती दामों पर उपलब्ध कराने के लिए कई कदम उठाए हैं, ताकि आवासों का निर्माण कार्य और उसकी गुणवत्ता प्रभावित न हों। 
    इन आवासों में शौचालय, एलपीजी कनेक्शन और पीने के पानी की सुविधाएं मुहैया कराई गई हैं। कुछ राज्यों में इस योजना के तहत कलस्टर और कॉलोनियां भी बनाई गई हैं, जिससे आमतौर पर भूमिहीन लाभार्थी लाभांवित होंगे। इन आवासों का निर्माण दिल्ली के यूएनडीपी-आईआईटी ने किया है और संबंधित राज्यों के लाभार्थियों को यह सुविधा दी गई है कि वे अपनी पसंद के अनुरूप आवासों का डिजाइन चुन सकें।