Sunday, 15 October 2017

डा. कलाम की भारत की रक्षा एवं अंतरिक्ष प्रणालियों को आत्म निर्भर बनाने में अग्रणी भूमिका

   नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने कहा है कि डा. कलाम ने भारत की रक्षा एवं अंतरिक्ष प्रणालियों को आत्म निर्भर बनाने में अग्रणी भूमिका निभाई।

  उपराष्ट्रपति यहां डा. एपीजे अब्दुल कलाम की 86वीं जयंती के अवसर पर आयोजित समारोहों के एक हिस्से के रूप में ‘स्वच्छ एवं हरित भारत‘ के लिए रैली को झंडी दिखाने के अवसर पर एकत्र जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। 
     उपराष्ट्रपति ने कहा कि डा. कलाम नाव बनाने वाले के पुत्र थे जो अपने परिवार की आजीविका में मदद करने के लिए बचपन में अखबार बांटा करते थे। उन्होंने कड़ी मेहनता, लगन एवं आत्म विश्वास की बदौलत वहां से भारत के प्रथम नागरिक बनने तक की अविस्मरणीय यात्रा की।
     उन्होंने कहा कि ‘लोगों के राष्ट्रपति‘ स्कूली छात्रों एवं युवाओं को हमेशा सलाह दिया करते थे कि ‘स्वप्न देखने की हिम्मत करो और आसमान तक पहुंचने की कोशिश करो।‘ उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत के राष्ट्रपति के उत्कृष्ट पद पर पहुंचने के बावजूद डा. कलाम हमेशा जीवन भर सरल और विनम्र बने रहे। उन सबके साथ हमेशा प्यार और गर्मजोशी से मिलते थे जो उनके साथ काम करते थे या उनके परिचित थे, चाहे वे कियी भी पद पर या किसी भी पृष्ठभूमि के क्यों न रहे हों। 
    उपराष्ट्रपति ने स्मरण किया कि उन्होंने डा. कलाम से कई अवसरों पर मुलाकात की थी। उनके साथ की गई कोई भी चर्चा उनके लिए सीखने का एक अनुभव होता था।
  उपराष्ट्रपति ने कहा कि डा. कलाम का विजन 2020 तक भारत को एक विकसित देश के रूप में पूरी तरह रूपांतरित होते देखना था। उन्हें भरोसा था कि लोगों की प्रतिभा, लगन और कड़ी मेहनत को देखते हुए भारत के लिए यह दर्जा हासिल करना मुश्किल नहीं था।
    उपराष्ट्रपति ने कहा कि डा. कलाम हमेशा कहा करते थे कि ‘मजबूती ही मजबूती का सम्मान करती है‘। वह भारत को एक अग्रणी आर्थिक शक्ति के रूप में उभरते देखना चाहते थे।

डा. कलाम भारत के सबसे महान दूरदर्शी व्यक्तियों में एक थे

   नई दिल्ली। डा. कलाम संदेश वाहिनी विजन 2020 बस द्वारा रामेश्वरम से राष्ट्रपति भवन आने वाले बच्चों ने (15 अक्टूबर, 2017) राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद से मुलाकात की।

  इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि डा. कलाम आज तक की सबसे महान शख्सियतों में से एक रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह डा. कलाम और एक वैज्ञानिक, एक विद्वान तथा भारत के राष्ट्रपति के रूप में उनकी महान उपलब्धियों को नमस्कार करते हैं। 
      उन्होंने कहा कि किसी भी देश के युवाओं के चरित्र का निर्माण करने के सर्वश्रेष्ठ तरीकों में एक तरीका उन्हें महान हस्तियों की जीवन गाथाओं को पढ़ने के लिए प्रेरित करना है।
      राष्ट्रपति ने कहा कि डा. कलाम भारत के सबसे महान दूरदर्शी व्यक्तियों में एक थे। उन्हें श्रद्धापूर्वक भारत के मिसाइल मैन तथा लोगों के राष्ट्रपति के रूप में याद किया जाता है। उन्होंने दिल के लिए किफायती स्टेंट या पोलियो पीडि़तों के लिए हल्के वजन की नली के व्यासों (कैलिपर्स) की डिजाइन तैयार करने से लेकर नाभिकीय प्रौद्योगिकी तक विभिन्न क्षेत्रों में अपनी भागीदारी के माध्यम से भारत की वैज्ञानिक विरासत में अपना ऐतिहासिक योगदान दिया है।
    भारत डा. कलाम के उल्लेखनीय योगदान को कभी भी नहीं भुला पाएगा। उनके मन में शिक्षण एवं शिक्षा के प्रति बहुत ज्यादा लगाव था। 
     उन्होंने वास्तव में युवा मस्तिष्कों को सोचने और नवप्रर्वतन करने के लिए प्रेरित किया। उन्हें लोगों एवं युवाओं का बहुत अधिक प्यार हासिल था। वह छात्रों से प्रेम करते थे तथा उन्हीं के बीच उन्होंने अपना अंतिम समय व्यतीत किया। राष्ट्रपति ने कहा कि डा. कलाम संदेश वाहिनी बस डा. कलाम की जीवन गाथा को बहुत ही मनोरंजक तरीके से प्रस्तुत करती है।
     उन्होंने इस अभिनव प्रयास की सराहना की। उन्होंने कहा कि उन्हें भरोसा है कि बड़ी संख्या में भारत के लोगों, खासकर, युवाओं को डा. कलाम के जीवन, उनकी कृतियों एवं उनके विजन पर आधारित चलंत प्रदर्शनी को देख कर लाभ पहुंचा होगा। 
      डा. कलाम संदेश वाहिनी हाउस ऑफ कलाम एवं चिन्मय विश्वविद्यालय द्वारा आरंभ की गई थी। वाहिनी में डा. कलाम के जीवन की विभिन्न घटनाओं तथा भारत की प्रमुख वैज्ञानिक उपलब्धियों का चित्रण किया गया है जिसका उद्वेश्य आम लोगों को शिक्षित और प्रेरित करना है। 
   प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 27 जुलाई, 2017 को डा. कलाम स्मारक के उद्घाटन समारोह के दौरान रामेश्वरम में इसे झंडी दिखाई थी। यह वाहिनी विभिन्न राज्यों से गुजरती हुई आखिर नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन आ पहुंची। 
    इससे पहले राष्ट्रपति ने भारत के पूर्व राष्ट्रपति डा. एपीजे कलाम की जयंती के अवसर पर राष्ट्रपति भवन में उनकी प्रतिमा के समक्ष पुष्पांजलि अर्पित की। डा. कलाम के परिवार के सदस्यों के साथ साथ राष्ट्रपति भवन के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भी इस अवसर पर पुष्पांजलि अर्पित की।

रक्षा मंत्री का सीवीआरडीई चैन्नई का प्रथम दौरा

   चैन्नई। रक्षा मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने अवादि, चैन्नई में लड़ाकू वाहन अनुसंधान और विकास स्थापना (सीवीआरडीई) का प्रथम दौरा किया।

   डीआरडीओ के चेयरमैन और अनुसंधान एवं विकास रक्षा विभाग के सचिव डॉ. एस क्रिस्टोफर और सीवीआरडीई के विशिष्ट वैज्ञानिक एवं निदेशक डॉ. पी सिवकुमार ने लड़ाकू वाहन और प्रौद्योगिकी में सीवीआरडीई द्वारा चलाये जा रहे राष्ट्रीय कार्यक्रमों और इनकी उपलब्धियों पर संक्षिप्त प्रस्तुति दी। सीवीआरडीई निदेशक द्वारा गणमान्य व्यक्तियों को सीवीआरडीई द्वारा विकसित उत्पाद एवं प्रणाली, प्रौद्योगिकी को दिखाने के लिये विभिन्न प्रौद्योगिकी केन्द्रों में ले जाया गया। 
     रक्षा मंत्री ने उन्नत प्रणालियों जैसे अर्जुन एमबीटी एमके -2, अर्जुन बख़्तरबंद रिकवरी और मरम्मत वाहन (एआरआरवी), अर्जुन कैटपल्ट, बिना नाम के जमीन वाहन, हल्के लड़ाकू वाहन की उप प्रणाली- तेजस लैडिंग गियर,रूस्तम-2 के लिये 180 एच पी इंजन, टी- 72 के लिये 1000 एच पी इंजन, बीएमपी-2 के लिये 400 एच पी के अलावा बख़्तरबंद रोगी वाहन का पता लगाने, कैरियर कमांड पोस्ट ट्रैक, ब्रिज लेइंग टैंक (बीएलटी -72) में विशेष रूची दिखाई है। 
    इस परियोजना के अधिनायकों ने इस प्रणाली की अनोखी पद्वति और विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए मान्यगणों को बताया। टैंक प्रौद्योगिकियों के प्रदर्शन के बाद सभी मान्यगण सीवीआरडीई-अर्जुन सभागार में इकट्ठे हुए। इस अवसर के दौरान रक्षा मंत्री ने एक पुस्तक 'अर्जुन एमबीटी- भारतीय सफलता की एक कहानी' जारी की, जिसमें अर्जुन एमबीटी एमके-आई की पूरी परियोजना का वर्णन किया गया है। रक्षा मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण और डीआरडीओ के चेयरमैन की उपस्थिति में बीईएमएल के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक दीपक कुमार होता द्वारा सीवीआरडीई के निदेशक को अर्जुन एआरआरवी का प्रथम प्रोटोटाइप भेंट किया गया। 
    सीवीआरडीई के निदेशक ने एडीई के निदेशक को लैंडिंग गियर के एक सेट के साथ सीएएमआईएलएसी प्रमाणीकरण और जीटीआरई के निदेशक को पावर टेक ऑफ शाफ्ट का एक सेट भेंट किया। वीआरडीई के निदेशक द्वारा एडीई के निदेशक को 180 एचपी इंजन भेंट किया गया। श्रीमती निर्मला सीतारमण ने देश के सभी हिस्सों से अभियांत्रिकी समुदाय के प्रतिभावान युवाओं को डिफेंस चैलेंजिंग एप्लिकेशन में भाग लेने के लिये एक वेबसाइट, 'डीआरडीओ रोबोटिक्स एंड इंमैनैन्ड सिस्टम एक्सपोज़शन' का शुभारंभ किया।
    उन्होने इस समारोह के दौरान 'सीवीआरडीई की उपलब्धियां' नामक एक किताब भी जारी की है। रक्षा मंत्री ने डीआरडीओ बिरादरी, विशेष रूप से सीवीआरडीई को उनके द्वारा राष्ट्र की रक्षा आत्मनिर्भरता के अनगिनत प्रयासों और योगदानों के लिए बधाई दी और उन्होने विश्वास जताया की डीआरडीओ 'मेक इन इंडिया' अवधारणा के साथ राष्ट्र को सशक्त बनाने का प्रयास करेगा।

रक्षा राज्य मंत्री ने जबलपुर में आयुध निर्माणियां का दौरा किया

   जबलपुर। रक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुभाष भामरे ने खमारिया में आयुध निर्माणियाँ का दौरा किया। सुरक्षा दल द्वारा सलामी गारद के पश्चात उन्होने निर्माणियाँ निर्मित उत्पादों की प्रदर्शनी देखी।

   उनके साथ जबलपुर के संसद सदस्य राकेश सिंह और जबलपुर कैंट क्षेत्र के (एम एल ए) विधानसभा के सदस्य अशोक रोहनी थे। उन्होने पूर्ण जिज्ञासा से 125 एम एम एफ एस एपीडी एस विरोधी टैंक गोला बारूद मैंगो परियोजना को देखा।
    तत्पश्चात मंत्री ने 84 एम एम गोला बारूद की नई विभिन्नताओं के निर्माण की अत्याधुनिक नई उत्पादन रेखा का उदघाटन किया। मंत्री ने 106 एम एम आर सी एल के निर्माण के लिये आयुध निर्माणियाँ, खमारिया के प्रयासों की प्रशंसा की। 
   उन्होने नये गोला-बारूद के निर्माण के लिये उपलब्ध सुविधाओं पर खुशी जाहिर की। उन्होने निर्माणियाँ के प्रयासों की प्रशंसा की और आगन्तुक पुस्तक में अपने विचार दर्ज भी किये। वरिष्ठ महाप्रबंधक ने मंत्री, संसद सदस्य और विधान सभा सदस्य को निर्माणियाँ का स्मृति चिन्ह भी भेंट किया। 
    अंत में डॉ. भामरे ने शहीद स्मारक में शहीदों को श्रद्धान्जलि अर्पित की और शहीद स्मारक में अशोक के वृक्षों का वृक्षारोपण किया। यहाँ वह निर्माणियाँ की यूनियन और समिति के प्रतिनिधियों से मिले। रक्षा राज्य मंत्री ने जबलपुर वाहन निर्माणिया का दौरा किया। वाहन निर्माणियाँ में उन्होने खदान संरक्षित वाहन की सभा रेखा का दौरा किया। 
   कर्मचारियों के कार्यो को सराहा और उत्पादन रेखा कर्मचारियों को अपना बेहतर प्रदान करने के लिये प्रेरित किया। अंत में डॉ. भामरे ने गोला –बारूद निर्माणियाँ का दौरा किया। जहाँ उन्होने गोला बारूद निर्माणियाँ का गौरव- धनुष 155 एम एम बन्दूक का प्रयोग करने की कोशिश की।

भारतीय कृषि में महिलाओं का योगदान करीब 32 प्रतिशत

    नई दिल्ली। केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा है कि सरकार की विभिन्न नीतियों जैसे जैविक खेती, स्वरोजगार योजना, भारतीय कौशल विकास योजना, इत्यादि में महिलाओं को प्राथमिकता दी जा रही है।

    यदि महिलाओं को अच्छा अवसर तथा सुविधा मिले तो वे देश की कृषि को द्वितीय हरित क्रांति की तरफ ले जाने के साथ देश के विकास का परिदृष्य भी बदल सकती हैं।
    कृषि मंत्री ने यह बात नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय महिला किसान दिवस के अवसर पर कही। इस मौके पर श्रीमती कृष्णा राज, कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री, भारत सरकार श्रीमती अर्चना चिट्नीस, महिला एवं बाल कल्याण मंत्री, मध्य प्रदेश सरकार, डा. त्रिलोचन महापात्रा, डी. जी., आई.सी.ए.आर. भी मौजूद थे।
       कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ने बताया कि पिछले वर्ष कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा प्रति वर्ष 15 अक्टूबर को राष्ट्रीय महिला किसान दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया था। निर्णय का आधार था-संयुक्त राष्ट्र संगठन द्वारा 15 अक्टूबर को अन्तराष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाना। यही वजह है कि देश के समस्त कृषि विश्वविद्यालयो, संस्थानों एवं के.वी.के. में आज राष्ट्रीय महिला किसान दिवस मनाया जा रहा है।
       आज की वर्तमान चुनौती जैसे कि जलवायु परिवर्तन एवं प्राकृतिक संसाधनों के क्षरण को रोकने तथा प्रबंधन करने में महिलाओं के योगदान को नकारा नहीं जा सकता है। देखा जाए तो महिलाएं कृषि में बहुआयामी भूमिकाएं निभाती हैं। जहाँ बुवाई से लेकर रोपण, निकाई, सिंचाई, उर्वरक डालना, पौध संरक्षण, कटाई, निराई, भंडारण आदि सभी प्रक्रियाओं से वो जुडी हुई हैं।
     इसके अलावा वे कृषि से सम्बंधित अन्य धंधो जैसे, मवेशी प्रबंधन, चारे का संग्रह, दुग्ध और कृषि से जुडी सहायक गतिविधियों जैसे मधुमक्खी पालन, मशरुम उत्पादन, सूकर पालन, बकरी पालन, मुर्गी पालन इत्यादि में भी पूरी तरह सक्रिय रहती हैं। कृषि क्षेत्र के भीतर, सामाजिक-आर्थिक स्थिति और क्षेत्रीय कारकों के आधार पर काम करने वाले वैतनिक मजदूरों अपनी स्वयं की जमीन पर श्रम कर रहीं जोतकार और कटाई पश्चात अभियानों में श्रम पर्यवेक्षण और सहभागिता के जरिए कृषि उत्पादन के विभिन्न पहलुओं के प्रबंधन में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका हैं।
      विश्व खाद्य एवं कृषि संगठन के अनुसार भारतीय कृषि में महिलाओं का योगदान करीब 32 प्रतिशत है, जबकि कुछ राज्यों (जैसे की पहाड़ी तथा उत्तर-पूर्वी क्षेत्र तथा केरल राज्य) में महिलाओं का योगदान कृषि  तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पुरुषों से भी ज्यादा है।
     भारत के 48 प्रतिशत कृषि से संबंधित रोजगार में औरतें हैं जबकि करीब 7.5 करोड महिलाएं दुग्ध उत्पादन तथा पशुधन व्यवसाय से संबंधित गतिविधियों में सार्थक भूमिका निभाती हैं। कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में महिलाओं को और अधिक सशक्त बनाने के लिए तथा उनकी जमीन, ऋण और अन्य सुविधाओं तक पहुँच को बढ़ाने के लिए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने किसानों के लिए बनी राष्ट्रीय कृषि नीति में उन्हें घरेलू और कृषि भूमि दोनों पर संयुक्त पट्टे देने जैसे नीतिगत प्रावधान किए हैं।
       इसके साथ कृषि नीति में उन्हें किसान क्रेडिट कार्ड जारी करनाए फसल, पशुधन पद्धतियों कृषि प्रसंस्करण आदि के माध्यम से जीविका के अवसरों का सृजन करवाये जाने जैसे प्रावधानों का भी ज़िक्र है। इसलिए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय का लक्ष्य आज कृषि उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने के साथ.साथ किसानों के कल्याण के लिए उपाय करना है।
      साथ ही अपने समग्र जनादेश लक्ष्यों और उद्देश्यों के भीतर यह भी सुनिश्चित करना है कि महिलाएं कृषि उत्पादन और उत्पादकता में प्रभावी ढंग से योगदान दें और उन्हें बेहतर जीवनयापन के अवसर मिले। इसलिए महिलाओं को सशक्त बनाने और उनकी क्षमताओं का निर्माण करने और इनपुट प्रौद्योगिकी और अन्य कृषि संसाधनों तक उनकी पहुंच को बढ़ाने के लिए उचित संरचनात्मकए कार्यात्मक और संस्थागत उपायों को बढ़ावा दिया जा रहा है और इसके लिए कई प्रकार की पहल की जा चुकी हैं। 
    कृषि में महिलाओं की अहम भागीदारी को ध्यान में रखते हुए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने वर्ष 1996 में भारतीय कृषि अनुसंधान परिशद के अंतर्गत केंद्रीय कृषिरत महिला संस्थान की स्थापना भुवनेष्वर में की । यह संस्थान कृषि में महिलाओं से जुड़े विभिन्न आयामों पर कार्य करता है। 
     इसके अलावा भारतीय कृशि अनुसंधान परिषद के 100 से अधिक संस्थानों ने कई तकनीकियों का सृजन किया ताकि महिलाओं की कठिनाईयों को कम कर उनका सशक्तिकरण हो। देश में 680 कृषि विज्ञान केन्द्र हैं। हर कृषि विज्ञान केन्द्र में एक महिला वस्तु विषेशज्ञ (गृह विज्ञान) है।
        वर्ष 2016-17 में महिलाओं से संबंधित 21 तकनीकियां का मूल्यांकन किया गया और 2.56 लाख महिलाओं को कृषि संबंधित क्षेत्रों जैसे सिलाई, उत्पाद बनाना, वेल्यू एडिशन, ग्रामीण हस्तकला, पशुपालन, मधुमक्खी पालन, पोल्ट्री, मछली पालन आदि का प्रशिक्षण दिया गया। इसके अतिरिक्त विभिन्न प्रमुख योजनाओं कार्यक्रमों और विकास संबंधी गतिविधियों के अंतर्गत महिलाओं के लिए कम से कम 30ऽ धनराशि का आबंटन सुनिश्चित किया है।
       साथ ही विभिन्न लाभार्थी-उन्मुखी कार्यक्रमों/योजनाओं और मिशनों के घटकों का लाभ महिलाओं तक पहुचाने के लिए महिला समर्थित गतिविधियां शुरु करना; तथा महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के गठन पर ध्यान केंद्रित करना ताकि क्षमता निर्माण जैसी गतिविधियों के माध्यम से उन्हें माइक्रो क्रेडिट से जोडा जा सके और सूचनाओं तक उनकी पहुंच बढ़ सके एवं साथ ही विभिन्न स्तरों पर निर्णय लेने निकायों में उनका प्रतिनिधित्व हो। 
   इसके अलावा कृषि मंत्रालय द्वारा कई प्रो वीमेन या महिला समर्थित कदम भी लिए गए है जो काफी महत्वपूर्ण हैं।

बिहार ज्ञान और गंगा दोनों से समृद्ध

   पटना। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने पटना विश्‍वविद्यालय के शताब्दी समारोह को संबोधित किया। उन्‍होंने कहा कि वह पटना विश्‍वविद्यालय में आने और छात्रों के बीच होने को अपना सम्‍मान मानते हैं। 

  प्रधानमंत्री ने कहा, मैं बिहार की इस धरती को नमन करता हूं। इस विश्‍वविद्यालय ने ऐसे छात्रों को तैयार किया जिन्‍होंने देश में काफी योगदान दिया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्‍होंने विभिन्‍न राज्‍यों में देखा है कि शीर्ष स्‍तर के सिविल सेवा में वही लोग हैं जिन्‍होंने पटना विश्‍वविद्यालय में अध्‍ययन किया है। 
   प्रधानमंत्री ने कहा, दिल्‍ली में मैं इतने सारे अधिकारियों से बातचीत करता हूं जिनमें से कई बिहार से ताल्‍लुख रखते हैं। नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि राज्‍य की प्रगति के लिए बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार की प्रतिबद्धता सराहनीय है।
     उन्‍होंने कहा कि केंद्र सरकार पूर्वी भारत के विकास को सबसे अधिक महत्व देती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि बिहार 'ज्ञान' और 'गंगा' दोनों से समृद्ध है। उन्‍होंने कहा कि यह भूमि एक विरासत है जो अनोखी है। उन्‍होंने कहा कि हमारे विश्‍वविद्यालयों को पारंपरिक शिक्षण से नवोन्‍मे‍षी शिक्षा की ओर अग्रसर होने की जरूरत है। 
   प्रधानमंत्री ने कहा कि भूमंडलीकरण के इस दौर में हमें दुनिया भर में बदलते रुझानों और प्रतिस्‍पर्धा की बढ़ती भावना को समझने की जरूरत है। उन्‍होंने कहा कि उसी संदर्भ में भारत को दुनिया में अपनी जगह बनानी होगी। उन्‍होंने छात्रों से कहा कि उन्‍हें लोगों के सामने आने वाली समस्‍याओं के लिए अभिनव समाधान के बारे में सोचना चाहिए। 
      उन्‍होंने कहा‍ कि उन्‍होंने जो सीखा उसे लागू करते हुए और स्‍टार्टअप क्षेत्र के जरिये वे समाज के लिए बहुत कुछ कर सकते हैं। पटना विश्‍वविद्यालय से हवाई अड्डे तक वापस जाते हुए रास्‍ते में प्रधानमंत्री, बिहार के मुख्‍यमंत्री एवं अन्‍य गणमान्‍य लोगों ने बिहार संग्रहालय का दौरा किया जो राज्‍य की समृद्ध संस्‍कृति और इतिहास को प्रदर्शित करता है।

प्रधानमंत्री ने 3,700 करोड़ की परियोजनाओं के लिए आधारशिला रखी

   मोकामा-बिहार। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने बिहार के मोकामा में नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत चार सीवरेज परियोजनाओं और चार राष्‍ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के लिए आधारशिला रखी।

    इन परियोजनाओं का कुल परिव्‍यय 3,700 करोड़ रुपये से अधिक है। जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि महान कवि रामधारी सिंह दिनकर जी के साथ करीबी से जुड़ी धरती पर आकर उन्‍हें खुशी हो रही है। 
    उन्होंने सभी को आश्‍वस्‍त किया कि केंद्र सरकार और राज्य सरकार बिहार के विकास के लिए हरसंभव प्रयास करेगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए अथक प्रयास कर रही है। 
    उन्होंने कहा कि जिन परियोजनाओं की आधारशिला आज रखी जा रही है उनसे बिहार के विकास को गति मिलेगी। उन्‍होंने कहा कि सरकार सड़क निर्माण की रफ्तार बढ़ाने पर ध्‍यान केंद्रित कर रही है। उन्‍होंने कहा कि नमामि गंगे से संबंधित परियोजनाएं गंगा नदी को बचाने में मदद करेंगी। 
    हाल में शुरू किए गए अंत्‍योदय एक्‍सप्रेस का उल्‍लेख करते हुए उन्‍होंने कहा कि इनसे बिहार, पूर्वी भारत और देश के अन्‍य भागों के बीच कनेक्टिविटी में सुधार होगा। अच्‍छी कनेक्टिविटी से बेहतर विकास होने पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सड़क, रेलवे और जलमार्ग पर जोर दिया जा रहा है। 
     जिन चार राष्‍ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के लिए आधारशिला रखी गई है उनमें शामिल हैं, राष्ट्रीय राजमार्ग 31 के अंटा-सिमरिया खंड को 4 लेन बनाना और 6 लेन वाला गंगा सेतु का निर्माण, राष्ट्रीय राजमार्ग 31 के बख्तियारपुर-मोकामा खंड को 4 लेन बनाना, राष्ट्रीय राजमार्ग 107 के महेशखूंट-सहरसा-पूर्णिया खंड पर 2-लेन का निर्माण, एनएच 82 के बिहारशरीफ-बरबिघा-मोकामा खंड पर 2-लेन का निर्माण, चार सीवरेज परियोजनाओं में बेऊर में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, बेऊर में सीवर नेटवर्क के साथ सिवरेज प्रणाली, करमालीचक में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और सैदपुर में एसटीपी एवं सीवर नेटवर्क शामिल हैं। 
    इन परियोजनाओं से कुल मिलाकर 120 एमएलडी नई एसटीपी क्षमता सृजित होगी और बेऊर के लिए मौजूदा 20 एमएलडी का उन्‍नयन होगा।