Tuesday, 26 September 2017

स्‍वच्‍छ भारत की दिशा में खुद ही पहल करने की जरूरत

     हुबली। उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने आज कर्नाटक में स्‍वच्‍छता ही सेवा और शौचालय के लिए समर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। वे हुबली में आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्‍य अतिथि थे।

     इसके बाद उपराष्‍ट्रपति वेंकैया नायडू गडग जिले के नरगुण्‍ड तालुका में कोन्‍नुर गांव गए जहां उन्‍होंने कचरा प्रसंस्‍करण की शुरुआत की। उन्‍होंने परिष्‍कृत पेयजल संयंत्र का भी उद्घाटन किया और गांव की जनता कॉलोनी स्थित उच्‍च विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम शौचालय के लिए समर के दौरान एक जन सभा को संबोधित किया। इस मौके पर उप-राष्‍ट्रपति ने स्‍वच्‍छता को जन आंदोलन बनाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्‍होंने तालुका, जिला और राज्‍य की इस संदर्भ में किए गए अच्‍छे काम की सराहना की।
     उन्‍होंने मौजूद सभी लोगों से स्‍वच्‍छता से जुड़ी गतिविधियों में हिस्‍सा लेने का आग्रह किया और कहा कि स्‍वच्‍छ भारत मिशन एक राष्‍ट्रीय कार्यक्रम है न कि किसी खास राजनीतिक दल का। उन्‍होंने असाधारण योगदान कर रहे साधारण लोगों के कई उदाहरण दिए जिसमें कर्नाटक की सुश्री लावण्‍या का भी जिक्र किया जिसने शौचालय बनाने के लिए अपने अनिच्‍छुक परिवार को राज़ी कराया और उसके बाद पूरे गांव को शौचालय बनाने के लिए प्रेरित किया।
       उपराष्‍ट्रपति ने इस बात की भी प्रशंसा की कि कई युवा महिलाएं अब शादी से पहले अपने ससुराल में शौचालय की मांग करने लगी हैं। इस मौके पर उपराष्‍ट्रपति ने 13 ग्रामीण पंचायत अध्‍यक्षों और शौचालय के लिए समर का लक्ष्‍य हासिल करने वाले नरगुण्‍ड तालुका पंचायत अध्‍यक्ष को भी सम्‍मानित किया। उन्‍होंने नरगुण्‍ड तालुका के ग्रामीण इलाके को खुले में शौच से मुक्‍त क्षेत्र घोषित किया।
     कर्नाटक के राज्‍पाल वज्‍जुभाई रुडाभाई वाला ने कर्नाटक से स्‍वच्‍छता ही सेवा अभियान शुरू करने के लिए उपराष्‍ट्रपति का धन्‍यवाद देते हुए अपना संबोधन शुरू किया। उन्होंने भारत सरकार का नारा ‘सबका साथ, सबका विकास’ की लय में एक-दूसरे की देखभाल करने पर जोर दिया।
     उन्‍होंने कहा कि दूसरे की देखभाल के लिए हमें स्‍वच्‍छ भारत की दिशा में खुद ही पहल करने की जरूरत है। पेयजल और सफाई राज्‍यमंत्री रमेश जिगाजिनागी ने इस मौके पर राज्‍य सरकार को बधाई दी और स्‍वच्‍छता ही सेवा अभियान के महत्‍व पर जोर दिया।
        उन्‍होंने जोर देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश के हाल ही के अपने दौरे में प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने शौचालय का नाम ‘इज्‍जत घर’ रखने की अनुशंसा की है। कर्नाटक के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज्‍य मंत्री एच के पाटिल ने स्‍वच्‍छ भारत मिशन के तहत राज्‍य सरकार द्वारा किए गए कामों के बारे में बताया और कहा कि राज्‍य और राष्‍ट्र दोनों स्‍वच्‍छ एवं खुले में शौच से मुक्‍त होने की दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं।
      पेयजल एवं सफाई मंत्रालय में सचिव परमेश्‍वरन अय्यर ने जन सभा का स्‍वागत करते हुए स्‍वच्‍छ भारत मिशन की राष्‍ट्रीय स्‍तर पर प्रगति के बारे में बताया और मिशन के लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में कर्नाटक सरकार द्वारा किए जा रहे बेहतरीन काम की प्रशंसा की। इस मौके पर सांसद पीसी गड्डीगौदर और नरगुण्‍ड के विधायक बी आर यवगल भी मौजूद थे।

बाल मजदूरी निषेध पोर्टल के कारगर कार्यान्वयन के लिए मंच पेंसिल

        नई दिल्ली। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने यहां भारत सरकार के श्रम और रोजगार मंत्रालय द्वारा आयोजित राष्ट्रीय बाल श्रमिक सम्मेलन में बाल मजदूरी निषेध पोर्टल के कारगर कार्यान्वयन के लिए मंच (पेंसिल) का शुभारंभ किया। 

   पेंसिल एक इलेक्ट्रॉनिक मंच है जिसका लक्ष्य केंद्र और राज्य सरकारों, जिला स्‍तरीय प्रशासन, सिविल सोसायटी और आम लोगों को शामिल करते हुए बाल श्रमिक मुक्त समाज का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में काम करना है।
          राजनाथ सिंह ने बाल मजदूरी के खिलाफ कानूनी फ्रेमवर्क लागू करने के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएं (एसओपी) भी जारी कीं। एसओपी का उद्देश्य प्रशिक्षकों, अधिवक्‍ताओं और निगरानी एजेंसियों के लिए एक मार्गदर्शक तैयार करना है ताकि बाल मजदूरी को पूरी तरह समाप्त किया जा सके और जोखिमपूर्ण श्रम से किशोरों की संरक्षा सुनिश्चित की जा सके। इसका अंतिम उद्देश्य भारत को बाल मजदूरी से मुक्त करना है।
        पोर्टल का उद्घाटन करने के बाद राजनाथ सिंह ने कहा कि कोई भी सभ्य समाज बाल मजदूरी की अनुमति नहीं दे सकता। उन्होंने कहा बाल मजदूरी एक अभिशाप है। उन्होंने कहा कि भारत को पूरे देश से बाल मजदूरी के उन्मूलन का संकल्प लेने की आवश्यकता है। 
     उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि संकल्प से ही इस बुराई को समाप्त किया जा सकता है। राजनाथ सिंह ने कहा कि अगर भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी के करो या मरो के संकल्प के पांच वर्ष बाद देश आजादी प्राप्त कर सका तो कोई कारण नहीं है कि यदि भारत एकजुट होकर बाल मजदूरी को समाप्त करने का संकल्प ले ले तो अगले पांच वर्षों में बाल मजदूरी मुक्त समाज का निर्माण न किया जा सके। 
        राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत द्वारा बाल मजदूरी संबंधी संधियों की पुष्टि करना इस बात का प्रमाण है कि हम समयबद्ध तरीके से बाल मजदूरी खत्म करने के प्रति संकल्पबद्ध है। उन्होंने कहा कि इस बारे में सामाजिक जागरूकता जरूरी है। उन्होंने ऑपरेशन स्माइल का उदाहरण दिया जिसके अंतर्गत 70,000 से 75,000 हजार बच्चों को बाल मजदूरी से मुक्त कराया गया था। 
       उन्होंने कहा कि पेंसिल पोर्टल की सफलता के लिए भी देश में एक महीने का विशेष अभियान चलाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यह अभियान ब्लॉक स्तर पर भी चलाया जाना चाहिए ताकि प्रत्येक व्यक्ति जागरूक बने और बाल मजदूरी समाप्त करने की दिशा में काम करे। उन्होंने कहा कि बाल मजदूरी के सामाजिक दुष्प्रभावों के साथ-साथ आर्थिक दुष्प्रभाव भी है।
      प्रवर्तन एजेंसियों के लिए एसओपी जारी करने के श्रम और रोजगार मंत्रालय के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि इससे कार्यक्रमों को बेहतर ढंग से लागू करने में मदद मिलेगी। श्रम और रोजगार मंत्री (प्रभारी) संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि बच्‍चे देश की अमूल्‍य संपत्ति हैं और देश का भविष्‍य हैं। उन्‍होंने कहा कि अल्‍पावधि आर्थिक और सामाजिक बाधाओं के कारण बाल श्रमिकों से होने वाली आमदनी अच्‍छी लग सकती है मगर दीर्घावधि में ऐसा नहीं होता। 
      उन्‍होंने कहा कि बच्‍चों के समग्र विकास को ध्‍यान में रखते हुए कानून में 14 साल से कम उम्र के बच्‍चों को किसी भी प्रकार के रोजगार पर लगाने की इजाजत नहीं है। 14 से 18 साल के बच्‍चों को भी ऐसे कामों में नहीं लगाया जा सकता जो उनके शारीरिक और मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य के लिए हानिकारक हों। उन्होंने कहा कि कानूनों को लागू करने में सबसे बड़ी बाधा जागरूकता की कमी की है और आज जो दिशानिर्देश तथा स्‍टैंडर्ड आपरेटिंग प्रोसीजर्स (एसओपीज) जारी किये गये हैं वे प्रवर्तन एजेंसियों के लिए उपयोगी सिद्ध होंगे। 
      उन्‍होंने कहा कि बाल श्रम एक सामाजिक समस्‍या है और सकारात्‍मक दृष्टिकोण की इसके उन्‍मूलन में महत्‍वपूर्ण भूमिका है। उन्‍होंने आशा व्‍यक्‍त की कि भारत के सभी लोग बाल श्रममुक्‍त समाज के निर्माण के स्‍वप्‍न को साकार करने के लिए एकजुट होंगे। नोबेल पुरस्‍कार से सम्‍मानित और बाल अधिकार कार्यकर्ता कैलाश सत्‍यार्थी इस अवसर पर सम्‍म‍ानित अतिथि के रूप में उपस्थित थे।
      ‘पेंसिल’ पोर्टल की शुरुआत करने पर प्रसन्‍न्‍ता व्‍यक्‍त करते हुए उन्‍होंने कहा कि आज का दिन भारत के लिए ऐतिहासिक अवसर है। भारत विश्‍व को यह बता रहा है कि वह बच्‍चों के हाथों में पेंसिल थमाएगा न कि काम करने के औजार। उन्‍होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इन अभियानों में देश के शीर्षस्‍थ नेताओं को शामिल किया जाना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि पेंसिल और एसओपीज न सिर्फ भारत के लिए बल्कि समूची दुनिया के लिए महत्‍वपूर्ण हैं क्‍योंकि ये एक नयी दिशा दिखाते हैं। 
      उन्होंने कहा कि इससे यह बात साबित हो जाती है कि टेक्‍नोलाजी सामाजिक उत्‍थान और शक्ति का माध्‍यम बन सकती है। सत्‍यार्थी ने कहा कि इस समय वह भारत यात्रा पर हैं और देश भर में बच्‍चों के साथ यौन दुर्व्‍यवहार और बच्‍चों को बेचे जाने के बारे में चेतना जगाने के कार्य में लगे हैं। उन्‍होंने बच्‍चों के साथ यौन दुष्‍कर्म के मामलों की सुनवाई के लिए संस्‍थागत प्रणाली और विशेष अदालतें बनाए जाने का भी सुझाव दिया। 
      इससे पहले अपने स्‍वागत भाषण में श्रम और रोजगार मंत्रालय की सचिव श्रीमती एम. सत्‍यवती ने कहा कि सरकार ने कई पहल की हैं और 2025 तक बाल श्रम के उन्‍मूलन के क्षेत्र में टिकाऊ विकास के लक्ष्‍य को प्राप्‍त करने के लिए कानूनी ढांचा खड़ा किया है। उन्‍होंने कहा कि भारत में 2001 की जनगणना के आंकड़ों की अगर 2011 की जनगणना के आंकड़ों से तुलना की जाए तो बाल श्रम में कमी आयी है। 2 जून 2017 को अधिसूचित केंद्रीय नियमों में संशोधन को अंतिम रूप देने से पहले सभी संबद्ध पक्षों के साथ व्‍यापक विचार-विमर्श किया गया है। 
        सम्‍मेलन के दौरान एक वीडियो संदेश में अंतर्राष्‍ट्रीय श्रमसंगठन के महानिदेशक गाइ रायडर ने भारत को उसकी दूरदृष्टि के लिए बधाई दी और आशा व्‍यक्‍त की कि भारत दुनिया भर में अंतर्राष्‍ट्रीय श्रम संगठन के प्रयासों को समर्थन देने में अपनी महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस अवसर पर बाल श्रम पर एक लघु फिल्‍म भी दिखाई गयी और ‘पेंसिल’ पोर्टल पर एनीमेशन के जरिए विस्‍तृत प्रजेंटेशन प्रस्‍तुत किया गया। 
         इस पोर्टल के कई घटक हैं जैसे खोए हुए बच्‍चों का पता लगाने के लिए चाइल्‍ड ट्रैकिंग प्रणाली; शिकायत के लिए कोना; राज्‍य सरकार और राष्‍ट्रीय बाल श्रम परियोजना, तथा कनवर्जेंस, जिलों में जिला नोडल अधिकारी (डीएनओज) मनोनीत किये जाएंगे जो शिकायतें प्राप्‍त कर 48 घंटे के भीतर उनकी प्रामाणिकता की जांच करेंगे और शिकायत के सही पाये जाने पर पुलिस के साथ मिलकर बचाव अभियान शुरू करेंगे। 
       अब तक 7 राज्‍यों/केन्‍द्र शासित प्रदेशों ने डीएनओज की नियुक्ति कर ली है। उत्‍तर प्रदेश, असम, दिल्‍ली, तेलंगाना, तमिलनाडु, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, छत्‍तीसगढ़, बिहार और राजस्‍थान के श्रम मंत्रियों ने सम्‍मेलन में हिस्‍सा लिया। सम्‍मेलन में राज्‍यों के श्रम सचिवों, केन्‍द्रीय मंत्रालयों के सचिवों, जिला नोडल अधिकारियों और राष्‍ट्रीय बाल श्रम परियोजना (एनसीएलपी) के परियोजना निदेशकों ने भी हिस्‍सा लिया।

मोबाइल एप्लीकेशन दिव्‍यांग सारथी का शुभारंभ

      नई दिल्ली। सामाजिक न्‍याय और आधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत ने आज दिव्‍यांग सारथी मोबाइल एप के बीटा संस्‍करण का उद्घाटन किया। इसके माध्‍यम से दिव्‍यांगजनों को आसानी से जानकारी मिल सकेगी। 

    इस अवसर पर सामाजिक न्‍याय और आधिकारिता राज्‍य मंत्री कृष्‍ण पाल गुजर, सामाजिक और न्‍याय आधि‍कारिता मंत्रालय की सचिव श्रीमती लता कृष्‍णाराव तथा मंत्रालय के अन्‍य वरिष्‍ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। इस अवसर पर गहलोत ने कहा कि यह मोबाइल एप्लीकेशन दिव्‍यांगजनों को सशक्‍त बनाने के लिए प्रेरित करेगा ताकि उन्‍हें आसान और सुविधाजनक सूचना मिल सके। इससे उन्‍हें एक बटन दबाकर योजनाओं, छात्रवृत्तियों, प्रणाली से संबंधित संस्‍थागत सहायता और अन्‍य महत्वपूर्ण प्रासंगिक जानकारियां प्राप्‍त हो सकेंगी। 
      इस मोबाइल एप्लीकेशन का उद्देश्‍य, सामाजिक न्‍याय और आधिकारिता मंत्रालय के दिव्‍यांगजन सशक्तिकरण विभाग से संबंधित विभिन्‍न उपयोगी जानकारियों जैसे विभि‍न्‍न नियमों, दिशा-निर्देशों, योजनाओं, रोजगार संबंधी अवसरों के बारे में दिव्‍यांगजनों को सरल प्रारूप में जानकारी उपलब्‍ध कराना है। 
     इस एप्लीकेशन को दिव्‍यांगजन सशक्तिकरण विभाग के दो सहायक सचिवों ( अनुनय झा और श्रीमती बी सुशीला) द्वारा तैयार गया है। 2011 की जनसंख्‍या के अनुसार भारत में 2.68 करोड़ से अधिक दिव्‍यांगजन हैं, जो कुल जनसंख्‍या के 2.2 प्रतिशत से अधिक हैं। मोबाइल एप्लीकेशन दिव्‍यांगसारथी को यूनिवर्सल एक्‍सेस के यूएनसीआरपीडी के सिद्धांतों और दिव्‍यांगजनों के अधिकार अधिनियम 2016 के प्रावधानों के अनुरूप तैयार किया गया है। 
      इस अधिनियम में यह प्रावधान है कि सभी जानकारियों को एक सरल प्रारूप में उपलब्‍ध कराई जानी चाहिए। यह एप्लीकेशन प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा 3 दिसम्बर 2015 का शुरू किए गए सुगम्‍य भारत अभियान के आईसीटी घटक का एक अभिन्‍न हिस्‍सा है। दिव्‍यांग सारथी मोबाइल एप की मुख्‍य विशेषताएं इसके ओडियो नोट्स हैं, जो लिखित जानकारी को ओडियो फाइल में परिवर्तित करते हैं और साथ ही उपयोगकर्ता की आवश्‍यता के अनुसार फॉंट का आकार भी बदल सकते हैं। 
        इस मोबाइल एप्लीकेशन को दोनों भाषाओं हिन्‍दी तथा अंग्रेजी के अनुरूप तैयार किया गया है। इस एप्लीकेशन को किसी भी एंड्रॉयड स्‍मार्ट फोन के जरिये डाउनलोड किया जा सकता है। इसे वह व्‍यक्ति भी इस्‍तेमाल कर सकता है, जिसके पास इंटरनेट की सुविधा नहीं है। यह मोबाइल एप डाउनलोड के लिए गूगल प्‍ले स्‍टोर में उपलब्‍ध रहेगा।

कांडला पोर्ट का नाम बदलकर दीन दयाल पोर्ट हुआ

     नई दिल्ली। जहाजरानी मंत्रालय ने कांडला पोर्ट ट्रस्ट का नाम बदलकर दीन दयाल पोर्ट ट्रस्ट करने से संबंधित आदेश जारी किया है।

   कच्छ के रण में स्थित कांडला पोर्ट ट्रस्ट देश के 12 सबसे बड़े बंदरगाहों में से एक है। मंत्रालय के आदेशानुसार, केंद्रीय सरकार ने भारतीय पोर्ट अधिनियम, 1908 के अंतर्गत प्राप्त शक्तियों के आधार पर कांडला का नाम संशोधित कर दीन दयाल किया है। 
     कांडला बंदरगाह पर विभिन्न परियोजनाओं का शुभारंभ करते हुए मई महीने में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यह सुझाव दिया था कि कांडला पोर्ट का नाम बदलकर पंडित दीन दयाल उपाध्याय पोर्ट कर देना चाहिए। 
     पंडित दीन दयाल उपाध्याय समाज के गरीब और कमजोर तबकों के विकास के लिए समर्पित रहे। सालभर तक चलने वाले पंडित दीन दयाल उपाध्याय के जन्मशती समारोह के समापन के अवसर पर जहाजरानी मंत्रालय ने यह आदेश जारी किया।

जम्मू कश्मीर को शहरी विकास का आश्वासन, हरसंभव सहायता

   नई दिल्ली। केंद्रीय आवास व शहरी कार्य मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने जम्मू कश्मीर की सरकार और वहां के लोगों को शहरी विकास के सभी मामलों में हरसंभव सहायता देने का आश्वासन दिया। 

  जम्मू कश्मीर के उप-मुख्यमंत्री डॉ. निर्मल सिंह ने हरदीप सिंह पुरी से भेंट की और राज्य से संबंधित विभिन्न परियोजनाओं पर चर्चा की। उन्होंने राज्य के शहरी क्षेत्र की परियोजनाओँ की प्रगति और कार्यान्वयन पर विचार-विमर्श किया। डॉ. निर्मल सिंह ने तावी नदी के 4.5 किलोमीटर लंबे तट को साबरमती नदी तट विकास के तर्ज पर विकसित करने, जेएनएनयूआरएम योजना के तहत ग्रेटर जम्मू के सीवर परियोजना को पूरा करने, कटरा और उधमपुर को अटल मिशन में शामिल करने तथा एएमआरयूटी (अमृत) योजना के तहत मूलभूत संरचना विकास करने का अनुरोध किया।
    उप-मुख्यमंत्री ने पुरी को जेएनएनयूआरएम योजना के तहत स्वीकृत श्रीनगर सीवेज परियोजना की प्रगति की जानकारी दी। पुरी ने स्मार्ट सिटी योजना के तहत जम्मू के नदी तट विकास के लिए अधिकारियों को प्रस्ताव बनाने का आदेश दिया।
     पुरी ने एनबीसीसी को जम्मू में सीवर परियोजना के कार्य को पुनः प्रारंभ करने का आदेश दिया। अमृत योजना में 500 शहरों का शामिल किया गया है। उन्होंने आश्वासन देते हुए कहा कि यदि संभव होगा तो राज्य के दो अन्य शहरों को भी इस योजना में भी शामिल किया जाएगा। पुरी ने जम्मू कश्मीर के लिए स्वीकृत परियोजनाओं को तेज गति से पूरा करने के लिए सुझाव दिया। 
       उन्होंने राज्य में अटल मिशन के तहत 1.08 लाख घरों को जल आपूर्ति की योजना की जानकारी दी। जम्मू कश्मीर के उप-मुख्यमंत्री डॉ. निर्मल सिंह ने केंद्रीय आवास व शहरी कार्य मंत्री हरदीप सिंह पुरी से नई दिल्ली में भेंट की।

आर्थिक सलाहकार परिषद का गठन

     नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने प्रधानमंत्री से संबद्ध आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) का गठन किया है।

    पांच सदस्‍यीय परिषद ने प्रतिष्ठित और विख्‍यात अर्थशास्त्रियों को शामिल किया गया है। ईएसी-पीएम की संरचना इस प्रकार है। डॉ. बिवेक देबरॉय, सदस्‍य नीति आयोग-अध्‍यक्ष, डॉ. सुरजीत भल्‍ला- अंशकालिक सदस्‍य, डॉ. रथिन रॉय-अंशकालिक सदस्‍य, डॉ. अशीम गोयल-अंशकालिक सदस्‍य, रतन वटल-प्रधान सलाहकार, नीति आयोग-सदस्‍य सचिव, आर्थिक सलाहकार। 
     परिषद के विचारणीय विषय इस प्रकार होंगे। प्रधानमंत्री द्वारा परिषद को सौंपे गये आर्थिक या अन्‍य मुद्दे का विश्लेषण करना और इस बारे में सलाह देना। बृहत आर्थिक महत्‍व के मुद्दों का समाधान करना और उनके बारे में प्रधानमंत्री को सलाह देना। यह सलाह स्‍वयं अपनी ओर से अथवा प्रधानमंत्री द्वारा सौंपे गये किसी विषय पर दी जा सकती है।
     प्रधानमंत्री द्वारा समय-समय पर वांछित किसी अन्‍य कार्य को अंजाम देना। ईएसी–पीएम एक स्‍वतंत्र निकाय है, जो आर्थिक मुद्दों और भारत सरकार, विशेष रूप से प्रधानमंत्री से संबंधित मुद्दों पर सलाह देती है।