Friday, 2 February 2018

जहाज विकास के लिए रूस की कंपनी के साथ सहमति

    नई दिल्ली। कोच्चि शिपयार्ड लिमिटेड (सीएसएल) तथा संयुक्‍त धारक कंपनी यूनाइटेड शिप बिल्डिंग कारपोरेशन (यूएससी) रूस, ने अंतर्देशीय तथा तटीय जलमार्गों के लिए समकालीन अत्‍याधुनिक जहाज के डिजाइन, विकास और कार्यान्‍वयन में सहयोग के लिए सहमति ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर किए हैं।

   सहमति ज्ञापन पर कोच्चि शिपयार्ड लिमिटेड के अध्‍यक्ष और प्रबंध निदेशक मधु एस. नायर तथा यूनाइटेड शिप बिल्डिंग कॉरपोरेशन के अध्‍यक्ष एलेक्‍सी रखमानोवा ने नई दिल्‍ली में सड़क परिवहन तथा राजमार्ग, शिपिंग तथा जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री नितिन गडकरी की उपस्थिति में हस्‍ताक्षर किए।
   सीएसएल तथा यूएससी उच्‍च गति के जहाज, नदी-समुद्र कार्गो जहाज, यात्री जहाज, ड्रेजर, अंतर्देशीय जलमार्ग तथा तटीय जहाजरानी के लिए विकसित करने में सहयोग करेंगी। इस सहमति ज्ञापन से सरकार के मेक इन इंडिया कार्यक्रम को तेजी मिलेगी, क्‍योंकि सरकार सागर माला योजना के तत भारतीय जलमार्गों तथा तटीय जहाजरानी मार्गों को पर्यावरण सहाज और आर्थिक दृष्टि से लाभकारी बनाना चाहती है।
    एक बार जल आधारित परिवहन के लिए आधारभूत संरचना बन जाने पर निकट भविष्‍य तथा दीर्घकालिक दृष्टि से विभिन्‍न तरह के विशेषज्ञ जहाजों की मांग होने लगेगी। यह सहमति ज्ञापन इसी संभावित मांग को पूरा करने के लिए एक प्रयास है।
     इस अवसर पर श्री गडकरी ने कहा कि अंतर्देशीय जलमार्गों, क्रूज पर्यटन तथा रो-रो परिवहन की विशाल संभावना है। इस सहयोग से आवश्‍यक उत्‍पाद के साथ-साथ नई प्रौद्योगिकी के लिए बाजार अभिनव भी प्राप्‍त होगा। यूएससी संयुक्‍त धारक कंपनी है और रूस में जहाज बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनी है। इस कंपनी के चालीस उद्यम हैं और इसका अनुभव तीन सौ वर्षों से अधिक का है तथा रूस में अंतर्देशीय जलमार्ग के विकास में प्रमुख रूप से योगदान करती है।
    सीएसएल ने हाल में एचसीएसएल (हुगली, कोच्चि शिपयार्ड लिमिटेड) नामक संयुक्‍त उद्यम कंपनी कोलकाता में बनाई। इसकी योजना अंतर्देशीय तथा तटीय जलमार्गों के लिए जहाज निर्माण और मरम्‍मत की विशेष सुविधा स्‍थापित करना है। सीएसएल की क्षमता बढ़ने से देश में अंतर्देशीय जलमार्ग और तटीय जहाजरानी में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

टी.बी. से पीड़ित रोगियों को पोषणाहार सहायता के लिए 600 करोड़

   नई दिल्ली। सर्वेभवन्तु: सुखिन:, सर्वे संतु: निरामया के मार्गदर्शक के सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए सरकार का मानना है कि स्वास्थ्य मानव विकास का हृदय है। सरकार एक मजबूत स्वास्थ्य प्रणाली और जन केंद्रित प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है जो कि लोगों के घरों के नजदीक हो।

  आयुष्मान भारत के तहत सरकार ने जिन दो दूरगामी पहलों की घोषणा की है वे 2022 तक नए भारत का निर्माण करेंगी। इससे संवर्धित उत्पादकता कल्याण में वृद्धि होगी और इनसे मजदूरी की हानि और दरिद्रता से बचा जा सकेगा। 
 राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 में भारत की स्वास्थ्य प्रणाली की नींव के रूप में स्वास्थ्य और आरोग्य केंद्रों की परिकल्पना की गई है। ये 1.5 लाख केंद्र, स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली को लोगों के घरों के नजदीक लाएंगे। ये स्वास्थ्य केंद्र असंचारी रोगों और मातृत्व तथा बाल स्वास्थ्य सेवाओं सहित व्यापक स्वास्थ्य देखरेख उपलब्ध कराएंगे। यह केंद्र आवश्यक दवाइयां और नैदानिक सेवाएं भी मुफ्त उपलब्ध रहेंगे।
    आयुष्मान भारत के तहत दूसरा कार्यक्रम स्वास्थ्य संरक्षण योजना है। सब जानते हैं कि देश में लाखों परिवारों को अस्पतालों में अंतरंग इलाज कराने के लिए उधार लेना पड़ता है या संपत्तियां बेचनी पड़ती हैं। सरकार ऐसे परिवारों के प्रति चिंतित है। मौजूदा राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना स्कीम गरीब परिवारों को 30,000 रूपये की वार्षिक कवरेज प्रदान करती है। अनेक राज्य सरकारों ने भी कवरेज में विविधता उपलब्ध कराके स्वास्थ्य संरक्षण योजनाएं कार्यान्वित अनुपूरित की हैं। अब सरकार ने स्वास्थ्य संरक्षण को और अधिक आकांक्षा वाला स्तर प्रदान करने का निर्णय लिया है।
      राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण योजना के तहत 11 करोड़ से अधिक गरीब और कमजोर परिवारों को प्रति वर्ष 5 लाख रूपए तक का इलाज हेतु कवरेज दिया जा रहा है। इस योजना के लिए इस वर्ष 2000 करोड़ रूपए का आवंटन किया गया है। राज्यों के पास इस योजना को लागू करने के लिए ट्रस्ट मॉडल या बीमा कम्पनी आधारित मॉडल अपनाने का विकल्प है हालांकि ट्रस्ट मॉडल को प्राथमिकता दी जाएगी।
    आयुष्मान भारत के तहत ये दो दूरगामी पहले वर्ष 2022 तक एक नए भारत का निर्माण करेंगी और इनमें संवर्धित उत्पदकता, कल्याण में वृद्धि होगी और इनसे मजदूरी की हानि और दरिद्रता से बचा जा सकेगा। इन योजनाओं से, खासकर महिलाओं के लिए रोजगार के लाखों अवसर सृजित होंगे। सरकार सर्वजन स्वास्थ्य कवरेज के लिए स्थायी रूप से किन्तु निश्चित रूप से उत्तरोत्तर अग्रसर है। किसी दूसरी संक्रामक बीमारी की तुलना में टी.बी. से हर वर्ष अधिक जानें जाती हैं। 
     यह मुख्य रूप से गरीब और कुपोषित लोगों को प्रभावित करती है। इसलिए सरकार टी.बी. से पीड़ित सभी रोगियों को उनके उपचार की अवधि के दौरान 500 रूपये प्रति माह के हिसाब से पोषणाहार सहायता प्रदान करने के लिए 600 करोड़ रूपये की अतिरिक्त राशि आबंटित की है। गुणवत्तायुक्त चिकित्सा, शिक्षा और स्वास्थ्य देख-रेख की पहुंच में और वृद्धि करने के उद्देश्य से, हम देश में मौजूद जिला अस्पतालों को अपग्रेड करके 24 नए सरकारी चिकित्सा कॉलेजों और अस्पतालों की स्थापना करेंगे।
    इस कदम से यह सुनिश्चित होगा कि प्रत्येक 3 संसदीय क्षेत्रों के लिए कम से कम एक चिकित्सा कॉलेज और देश के प्रत्येक राज्य में कम से कम एक सरकारी चिकित्सा कालेज है। इसके अतिरिक्त सिक्किम में सरकारी चिकित्सा कॉलेज की स्थापना की जाएगी क्योंकि वहां अभी एक भी सरकारी चिकित्सा कॉलेज नहीं है। उपरोक्त पहलों के लिए केंद्र और राज्य की हिस्सेदारी क्रमश: 60:40 होगी।