Tuesday, 21 February 2017

उच्‍च गुणवत्ता वाली स्‍वास्थ्‍य सेवा

            ‘भारत के राष्ट्रीय नियामक प्राधिकरण (एनआरए) का विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन (डब्‍ल्‍यूएचओ) द्वारा किये गये आकलन के सफल निष्‍कर्ष से सरकार द्वारा उच्‍च गुणवत्ता वाली स्‍वास्‍थ्‍य सेवा मुहैया कराने की दिशा में किये जा रहे प्रयासों को काफी बढ़ावा मिला है, जिसके लिए सरकार प्रतिबद्ध है।’

        यह बात केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्री जे पी नड्डा ने यहां तब कही जब डब्‍ल्‍यूएचओ ने देश के राष्ट्रीय नियामक प्राधिकरण के सफल आकलन के लिए उन्‍हें और मंत्रालय को बधाई दी। उन्‍होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी जी के गतिशील मार्गदर्शन एवं नेतृत्‍व में मंत्रालय स्‍वास्‍थ्‍य सेवा क्षेत्र में इस तरह की और भी ज्‍यादा ख्‍याति अर्जित करने की दिशा में अग्रसर है। डब्‍ल्‍यूएचओ ने मंत्री को भेजे अपने पत्र में देश के राष्ट्रीय नियामक प्राधिकरण की सराहना की है जिसे 4 के परिपक्‍वता स्‍तर के साथ ‘क्रियाशील’ घोषित किया गया है। 4 के  परिपक्‍वता स्‍तर को 5 कार्यों के संबंध में तय की गई मौजूदा विकसित परिभाषाओं के अनुसार सर्वोत्तम स्‍तर माना जाता है। 

               इसे 4 कार्यों के संबंध में 3 के परिपक्‍वता स्‍तर के साथ भी ‘क्रियाशील’ घोषित किया गया है। ‘परिपक्‍वता स्‍तर 4’ से अच्‍छे परिणामों के साथ-साथ निरंतर सुधार के लक्षण के बारे में संकेत मिलता है, जबकि ‘परिपक्‍वता स्‍तर 3’ सुव्यवस्थित प्रक्रिया पर आधारित अवधारणा, व्‍यवस्थित प्रक्रिया में सुधार के आरंभिक चरण, उद्देश्यों के लिए अनुरूपता के बारे में आंकड़ों की उपलब्‍धता और सुधार के लक्षण की मौजूदगी को दर्शाता है। मंत्री ने यह जानकारी दी कि डब्‍ल्‍यूएचओ ने भारतीय टीका नियामक प्रणाली के डब्‍ल्‍यूएचओ आकलन (बेंचमार्किंग) में शत-प्रतिशत अनुपालन करार दिया है, जो एक अन्‍य ‘उल्‍लेखनीय उपलब्‍धि‍’ है। भारतीय टीका नियामक प्रणाली का पिछला डब्‍ल्‍यूएचओ आकलन (बेंचमार्किंग) वर्ष 2012 में किया गया था, जिस दौरान एनआरए को मजबूती प्रदान करने के लिए संस्‍थागत विकास योजना (आईडीपी) के साथ-साथ खाका भी विकसित किया गया था।

             पंचयुक्त (पेंटावैलेंट) टीके को देश भर में पेश करने के साथ-साथ रोटावायरस टीके एवं खसरा रूबेला टीके को भी चरणबद्ध ढंग से पेश करते हुए देश के पूर्ण टीकाकरण कार्यक्रम के तहत नये टीकों को पेश करने का उल्‍लेख करते हुए नड्डा ने कहा कि मंत्रालय को यह भरोसा है कि भारत अपने इन ध्‍यान केन्द्रित प्रयासों के परिणामस्‍वरूप स्‍वास्‍थ्‍य सेवा क्षेत्र में अपनी समस्‍त प्रतिबद्धताओं को पूरा कर लेगा। स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ने कहा कि इसके अलावा ‘मिशन इंद्रधनुष’ ने सरकार के पूर्ण टीकाकरण अभियान को मजबूती प्रदान की है। डब्‍ल्‍यूएचओ गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित, प्रभावकारी एवं किफायती चिकित्‍सीय और स्‍वास्‍थ्‍य सेवा संबंधी उत्‍पादों तक समान पहुंच को उच्‍च प्राथमिकता देता है। 

         चूंकि भारत भी टीकों, चिकित्‍सीय उपकरणों एवं परंपरागत दवाओं सहित जैविक औषधीय उत्पादों का एक प्रमुख वैश्विक आपूर्तिकर्ता है। यह संयुक्‍त राष्‍ट्र की अनेक एजेंसियों को कई टीकों की आपूर्ति भी करता है, अत: इस तथ्‍य के मद्देनजर ‘उपर्युक्‍त सफल आकलन से भारत के औषधीय उत्‍पादों में वैश्विक भरोसा बढ़ाने में काफी मदद मि‍लेगी।’ डब्‍ल्‍यूएचओ ने यह बात भी रेखांकित की कि इससे भारत के प्रधानमंत्री के ‘मेक इन इंडिया’ मंत्र को काफी बढ़ावा मिलेगा। पूरी तरह से क्रियाशील एनआरए टीकों की डब्ल्यूएचओ संबंधी पूर्व अर्हता के लिए पहली आवश्‍यकता है।

          इस दिशा में पात्र बनने के साथ-साथ पूर्व अर्हता संबंधी दर्जे को बनाये रखने के लिए एक अहम बात यह है कि डब्‍ल्‍यूएचओ द्वारा प्रकाशित एनआरए संकेतकों के मद्देनजर राष्‍ट्रीय नियामक प्राधिकरण (एनआरए) का आकलन क्रियाशील के रूप में किया जाये। स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण सचिव सी के मिश्रा ने भी समस्‍त टीमों को बधाई दी जिन्‍होंने देश के लिए यह उपलब्धि हासिल करने हेतु सही अर्थों में कड़ी मेहनत की है।  
  

प्रदूषण का अध्ययन सरकार खुद कराएगी

           मानव स्वास्थ्य पर प्रदूषण के असर का आकलन करने के लिए सरकार खुद अपनी ओर से अध्ययन कराएगी।

         
        पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अनिल माधव दवे ने कहा कि सरकार वायु प्रदूषण को कम करने के लिए सभी जरूरी कदम उठा रही है। उन्होंने प्रदूषण के विभिन्न स्रोतों और उनके प्रबंधन के लिए सरकार द्वारा किए गए कार्यों का विस्तृत ब्यौरा दिया। हाल ही में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी देते हुए मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण के विभिन्न स्तरों की पहचान करने के लिए एक श्रेणीबद्ध कार्य योजना को अधिसूचित करने के लिए भेजा गया है।

               कई मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए मंत्री ने कहा कि वायु प्रदूषण से होने वाली मौतों को रोकने के लिए सावधानी बरतने और इसका अध्ययन करने की जरूरत है। सरकार देशभर में वायु प्रदूषण की विभिन्न प्रवृत्तियों पर निगरानी रखने के लिए राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता निगरानी कार्यक्रम के तहत निगरानी रख रही है। निगरानी नेटवर्क मैनुअल स्टेशनों के जरिए 29 राज्यों और 6 केन्द्रशासित प्रदेशों के 300 से अधिक शहरों में फैला है। मैनुअल स्टेशनों के अलावा 12 राज्यों के 33 शहरों में सतत् परिवेश, गुणवत्ता निगरानी स्टेशन मौजूद हैं। 

            सभी मेट्रों शहरों और कस्बों को कवर करने के लिए निगरानी नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है। निगरानी के परिणामों से पता चलता है कि पार्टिकुलेट मैटर्स के स्तर की एक अस्थिर प्रवृति है। एसओ2 की दर सामान्य तौर पर तय सीमा के अंदर है, जबकि एनओ2 की दर में उतार-चढ़ाव है और यह तय सीमा से अधिक है। सरकार के मुख्य चिंता का कारण पार्टिकुलेट मैटर्स है और सरकार व्यवस्थित तरीके से इस समस्या का समाधान करने के लिए जरूरी कदम उठा रही है। 
  



रक्षा मंत्री ने प्रदान कीं सर्वश्रेष्ठ परेड दल ट्रॉफियां

          रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने यहां मद्रास सेपर्स और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) को सर्वश्रेष्‍ठ परेड दल ट्रॉफियां प्रदान कीं।


      विजेताओं ने इस वर्ष नई दिल्‍ली के ऐतिहासिक राजपथ पर गणतंत्र दिवस परेड में हिस्‍सा लिया था। मद्रास सेपर्स की तरफ से ब्रिगेडियर आर.के. सचदेवा और सीआईएसएफ की तरफ से बल के महानिदेशक ओ.पी. सिंह ने ट्रॉफियां प्राप्‍त कीं। समारोह में सेना प्रमुख जनरल बी.पी. रावत, नौ सेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा और वायु सेना प्रमुख एयरचीफ मार्शल बी.एस. धनोआ, रक्षा सचिव जी. मोहन कुमार तथा रक्षा मंत्रालय, तीनों सेनाओं और गृह मंत्रालय के आला अधिकारी उपस्‍थित थे। 

          अपने आदर्श-वाक्‍य ‘सर्वत्र’ के अनुरूप मद्रास इंजीनियर ग्रुप ने हमेशा अपने कर्तव्‍य पालन और अन्‍य गतिविधियों में सर्वश्रेष्‍ठ प्रदर्शन किया है तथा उसका 236 वर्ष का गौरवशाली इतिहास है। 

       अपनी समृद्ध परंपरा को कायम रखते हुए मद्रास सेपर्स ने एक बार फिर सर्वश्रेष्‍ठ परेड दल ट्रॉफी प्राप्‍त की है। उसे सेना दिवस और गणतंत्र दिवस परेड 2017 दोनों अवसरों पर ट्रॉफियां प्राप्‍त हुई है।   

दुर्घटनाओं की सूचना के लिए सड़क यातायात अनुसंधान

          सड़क दुर्घटनाओं की सूचना के लिए प्रारूप की समीक्षा के संबंध में सड़क यातायात एवं राजमार्ग मंत्रालय ने एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया था।

             समिति की अध्‍यक्षता यातायात अनुसंधान शाखा की वरिष्‍ठ सलाहकार ने की। समिति में आईआईटी दिल्‍ली और आईआईटी खड़गपुर और डब्‍ल्‍यूएचओ के विशेषज्ञों सहित राज्‍यों के पुलिस और यातायात विभाग तथा स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय के वरिष्‍ठ अधिकारी शामिल थे। समिति ने अपने सुझाव सौंप दिए थे, जिन्‍हें सड़क यातायात एवं राजमार्ग मंत्रालय ने स्‍वीकर कर लिया है। यातायात अनुसंधान शाखा की वरिष्‍ठ सलाहकार और समिति की अध्‍यक्ष श्रीमती कीर्ति सक्‍सेना ने बताया कि दुर्घटना स्‍थल से पर्याप्‍त आंकड़े और सूचना न प्राप्‍त होने के कारण पुलिस थानों में प्राथमिकी सही तौर पर दर्ज नहीं हो पाती। 

           उन्‍होंने कहा कि दुर्घटनाओं की सूचना संबंधी मौजूदा प्रारूप की खामियों का जायजा लेने के लिए कई बार बैठक की गई। विभिन्‍न राज्‍यों और देश के अन्‍य स्‍थानों पर दुर्घटनाओं की सूचना के तरीकों का अध्‍ययन करने के बाद मंत्रालय को नया प्रारूप बनाने का सुझाव दिया गया। इसमें पुलिस की प्रमुख भूमिका होगी। समिति सदस्‍य आईआईटी दिल्‍ली की प्रो. गीतम तिवारी ने नए प्रारूप का विवरण दिया। उन्‍होंने बताया कि वर्तमान में सूचना पुलिस थानों में की जाती हैं। राज्‍य सरकारें केंद्र को रिपोर्ट भेजती हैं। उन्‍होंने आशा व्‍यक्‍त की कि नया प्रारूप खामियों को दूर करने में सफल होगा। 

            समिति सदस्‍य आईआईटी खड़गपुर की प्रो. सुदेष्‍णा मित्रा ने कहा कि दुर्घटना स्‍थल की रिकॉर्डिंग की अहम भूमिका है। उन्‍होंने कहा कि जीपीएस से दुर्घटना स्‍थल पर सड़क की बनावट को समझने में आसानी होगी। व्‍यापक चर्चा के बाद समिति ने एक एकीकृत  दुर्घटना रिकॉर्डें प्रारूप तैयार किया है। जिसे सभी राज्‍यों और केंद्र शासित प्रदेशों की पुलिस लागू करेगी। दुर्घटना रिकॉर्डें प्रारूप में पांच खंड हैं, जिसमें दुर्घटना स्‍थल, सड़क की हालत और दुघटना में लिप्‍त वाहन का विवरण और दुर्घटनाग्रस्‍त व्‍यक्‍तियों का ब्‍यौरा शामिल है।

           पहले खंड में दुर्घटना स्‍थल, वाहनों की किस्‍म आदि; दूसरे खंड में सड़क की हालत, टूट-फूट आदि; तीसरे खंड में वाहनों का विवरण; चौथे खंड में वाहन चालकों द्वारा यातायात नियमों की कथित अवहेलना और पांचवें खंड में वाहन चालकों के अलावा अन्‍य व्‍यक्‍तियों का विवरण दर्ज किया जाएगा।

महिलाओं के सशक्तिकरण से जुड़ी पहल की निरंतरता सबसे बड़ी चुनौती

            वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण से जुड़ी पहलों और कार्यक्रमों की निरंतरता सबसे बड़ी चुनौती है। 

            महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण पर संयुक्‍त राष्‍ट्र की रि‍पोर्ट को भारत में पेश करते हुए उन्‍होंने नई दिल्‍ली में कहा कि शुरुआत में तो तेज गति से काम होता है, लेकिन उसके बाद धीरे-धीरे रफ्तार धीमी हो जाती है। मंत्री ने कहा कि ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’, ‘स्‍टैंड अप स्‍टार्ट अप’ और ‘मुद्रा’ ने सकारात्‍मक बदलाव लाने के साथ-साथ आर्थिक सशक्तिकरण में भी महत्‍वपूर्ण योगदान दिया है। 

            श्रीमती सीतारमण ने कहा कि ‘उज्‍ज्‍वला’ योजना के तहत धुआं रहित चूल्‍हे मुहैया कराये गये हैं जिससे महिलाओं के स्‍वास्‍थ्‍य को बेहतर करने में मदद मिली है। उन्‍होंने कहा कि जन धन योजना और प्रत्‍यक्ष लाभ हस्‍तांतरण के जरिये सरकार आर्थिक विकास के लिए वित्तीय समावेश पर अपना ध्‍यान केन्द्रित कर रही है। श्रीमती सीतारमण ने गैर-आर्थिक गतिविधियों जैसे कि महिलाओं की सुरक्षा के साथ-साथ उन कानूनी मुद्दों की जरूरत को भी रेखांकित किया जिन पर भी स‍शक्तिकरण की खातिर विचार करना अभी बाकी है।



 

भारत व अफ्रीका में ‘एक मजबूत भावनात्मक कड़ी’

             उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने रवांडा विश्वविद्यालय में ‘रवांडा, भारत और अफ्रीका: सहयोग के लिए अनिवार्यताएं’ विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि हमारे साझा ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों, हमारी पूरक ताकतों और क्षमताओं की अनिवार्यताएं हमें स्वाभाविक रूप से और अधिक आर्थिक और वाणिज्यिक भागीदार बनाती हैं।

            उन्होंने कहा कि एक बेहतर भविष्य के निर्माण की दिशा में विकास की चुनौतियों को पूरा करने में अफ्रीका-भारत भागीदारी की अनिवार्यताएं हमारी साझा चुनौतियां, आम हित और आपसी लाभ की अवधारणा पर आधारित हैं। इस अवसर पर रवांडा के शिक्षा मंत्री डॉ. मुसाफिरी पपियास मालिम्बा और रवांडा विश्वविद्यालय के चांसलर डॉ. माइक ओ’ नील भी मौजूद थे। 

                उपराष्ट्रपति ने कहा कि आज के युवाओं के पास अपनी गलतियां सुधारने और अतीत की सीमाओं से बचने की क्षमता है। हम स्वार्थ की भावना और विवाद के बजाय भविष्य में वैश्विक मुद्दों को ऑपरेटिव सिद्धांतों से सुलझा सकते हैं। उन्होंने विकास और प्रगति के प्रभावशाली संकेतों को देखते हुए रवांडा के लोगों को बधाई दी और कहा कि यह सब एक दूरदर्शी नेतृत्व तथा लोगों की कड़ी मेहनत के कारण संभव हुआ है। उन्होंने आगे कहा कि भारत रवांडा को एक मजबूत विकास के भागेदार के रूप में देखता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का हवाला देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत और अफ्रीका में ‘एक मजबूत भावनात्मक कड़ी’ है, जो उपनिवेशवाद के खिलाफ हमारे साझा इतिहास और हमारे लोगों के लिए समृद्धि लाने की हमारी आकांक्षा को परिभाषित करती है। 

            उन्होंने कहा कि हमारा दृष्टिकोण न केवल विशेषाधिकार या अधिकारों की मांग करना है बल्कि हमारा उद्देश्य अफ्रीका के विकास के प्रति अपना योगदान देना है। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत अफ्रीका में हमारे सहयोगियों की आवश्यकताओं और अभिनव तंत्र को विकसित करना चाहता है।

             उन्होंने आगे कहा कि ऐसे समय में जब वैश्विक राजनीति और आर्थिक हालात अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे है ऐसे में हमें विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को चिन्हित कर आपसी सहयोग और एकजुटता की भावना को प्रदर्शित करने की जरूरत है। उन्होंने आगे कहा कि इस संबंध में भारत और हमारे अफ्रीकी भागीदार देशों के बीच रिश्तों में प्रगाढ़ता लाने के कई अवसर मौजूद हैं।

किफायती मकानों को बढ़ावा देने के लिए अब तक 90,000 करोड़ का निवेश

           आवास एवं शहरी गरीबी उन्‍मूलन मंत्री एम. वेंकैया नायडू ने रियल एस्‍टेट क्षेत्र के डेवलपरों से किफायती आवास वाली परियोजनाओं का काम बड़े पैमाने पर शुरू करने का आग्रह किया।

           इसके साथ ही उन्‍होंने विशेष जोर देते हुए कहा कि रियल एस्‍टेट सेक्‍टर का भविष्‍य किफायती आवास में ही निहित है। मंत्री ने इस बारे में विस्‍तार से बताते हुए कहा, ‘सरकार का फोकस मध्‍यम आय वाले समूहों सहित सभी लोगों के लिए आवास सुनिश्चित करने पर है, जिसके तहत समाज के निचले तबकों के साथ-साथ मध्‍यम आय वाले लोगों के लिए भी आवास उपलब्‍ध कराने के असीम अवसर हैं, जिससे डेवलपरों को निश्चित रूप से लाभ उठाना चाहिये क्‍योंकि उन्‍होंने हाल के वर्षों में काफी उतार-चढ़ाव देखे हैं।’ 

                नायडू पीएचडी चैम्‍बर द्वारा आज यहां ‘पुनर्मुद्रीकरण के उपरांत रियल एस्‍टेट सेक्‍टर और आरईआरए’ विषय पर आयोजित एक सम्‍मेलन को संबोधित कर रहे थे। नायडू ने यह भी कहा कि सरकार ने किसी भी अन्‍य क्षेत्र (सेक्‍टर) की तुलना में रियल एस्‍टेट सेक्‍टर पर ही ज्‍यादा ध्‍यान दिया है। इसके तहत रियल एस्‍टेट (अचल संपत्ति) सेक्‍टर में नई जान फूंकने के लिए पिछले दो वर्षों के दौरान 20 से भी ज्‍यादा मददगार उपायों की घोषणा की गई है, जिनमें किफायती आवास के लिए बहुप्रतीक्षित ढांचागत दर्जे के साथ-साथ अनेक तरह की कर रियायतें और छूट भी शामिल हैं।

              उन्‍होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत आर्थिक दृष्टि से कमजोर तबकों, कम आमदनी वाले समूहों और 18 लाख रुपये तक की वार्षिक कमाई वाले मध्‍यम आय समूहों के लोगों को भी प्रति लाभार्थी 2.35 लाख रुपये तक की केंद्रीय सहायता के योग्‍य माना गया है। नायडू ने यह भी कहा, ‘ढांचागत दर्जे के तहत कम लागत वाले दीर्घकालिक वित्त पोषण, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मिलने वाली कर रियायतों एवं केंद्रीय सहायता और इन तबकों की आवास संबंधी व्‍यापक जरूरतों ने किफायती आवास को सर्वोत्तम निवेश अवसर के रूप में तब्‍दील कर दिया है। ऐसे में इन अवसरों से लाभ न उठाने का कोई और बहाना अब डेवलपरों के पास नहीं रह गया है।’ 

             नायडू ने कहा कि सरकार के विभिन्‍न कदमों से एक नया रियल एस्‍टेट परितंत्र विकसित हुआ है जो स्‍वरूप, विश्‍वसनीयता, विश्‍वास और नकदी पर आधारित है। जिससे इस क्षेत्र में नई जान फूंकने में मदद मिलेगी। इन कदमों में अचल संपत्ति (नियमन एवं विकास) अधिनियम, 2016, बेनामी संपत्ति अधिनियम और विमुद्रीकरण शामिल हैं। उन्‍होंने कहा कि जहां एक ओर अचल संपत्ति अधिनियम से इस सेक्‍टर पर लगा भ्रष्‍टाचार का कलंक हट गया है। उसका सही स्‍वरूप एवं विश्‍वसनीयता बहाल हो गई है। खरीदारों का भरोसा बढ़ गया है, वहीं दूसरी ओर केंद्रीय सहायता, घटी हुई ब्‍याज दरों एवं कर रियायतों के परिणामस्‍वरूप खरीदारों के हाथ में अब कहीं और ज्‍यादा नकदी आ गई है। 

             नायडू ने बताया कि आवास एवं शहरी गरीबी उन्‍मूलन मंत्रालय ने अब तक लगभग 90,000 करोड़ रुपये के निवेश और तकरीबन 25,000 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता के साथ शहरी गरीबों के लिए 16 लाख से भी ज्‍यादा किफायती मकानों के निर्माण को मंजूरी दी है। हालांकि, इसके साथ ही नायडू ने निजी डेवलपरों द्वारा अब तक किसी भी परियोजना का काम शुरू न किये जाने पर चिंता जताई।

लू से बचने के लिए हैदराबाद में कार्यशाला

           राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) हैदराबाद में लू से बचाव के सर्वोत्तम तरीकों पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन कर रहा है।

         कार्यशाला का आयोजन डॉ. एमसीआर-एचआरडी इंस्टीट्यूट हैदराबाद में तेलंगाना सरकार के सहयोग से किया जाएगा। भारत में आमतौर पर मार्च से जून के दौरान लू चलती है। कुछ मामलों में तो यह जुलाई तक जारी रहती हैं। जिसके परिणामस्वरूप डिहाईड्रेशन, लू लगना, थकान और यहां तक की घातक हीट स्ट्रोक भी हो सकता है। हाल में ही 2015 के दौरान देश में लू लगने के कारण दो हजार से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। 

                   देश में लू की तीव्रता को देखते हुए एनडीएमए ने इसकी रोकथाम और प्रबंधन करने के लिए पिछले साल एक कार्य योजना तैयार करने के निर्देश दिए थे। 2016 में लू से होने वाली मौतों के आंकड़ों में गिरावट आई थी। इस पृष्ठभूमि में इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य लू से बचने के लिए राज्यों को जागरूक करना। इससे बचाव के तरीकों को लागू करना है। कुछ राज्यों ने लू से बचाव के तरीकों को लागू करने के लिए शानदार काम किया है। अपने अनुभवों और योजनाओं को दूसरों के साथ साझा कर एक सराहनीय कार्य किया है। 

            इसका उद्देश्य आबादी वाले स्थानों में जहां लू के कारण होने वाली बीमारियों का खतरा अधिक रहता है। वहां लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाना। समुदाय क्षमता निर्माण का अवसर प्रदान करना है। इस कार्यशाला में इस साल देश में लू के प्रतिकूल प्रभाव के प्रबंधन पर भी चर्चा की जाएगी। इस कार्यशाला में पहले दिन तीन तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएगे, जिनमें लू से संबंधित कार्य योजना और जोखिम न्यूनीकरण, लू से प्रभावित राज्यों के साथ अनुभव साझा करने और इससे निपटने के उपायों तथा लू के बारे में पूर्वानुमान आदि शामिल है। कार्यशाला में लू से संबंधित विशेषज्ञ और अन्य हितधारक भाग लेंगे, जिसमें मौसम विभाग की एजेंसियां, राज्य सरकार और अनुसंधान संस्थानों के विशेषज्ञों तथा एनडीएमए के वरिष्ठ अधिकारी भी भाग लेंगे।

बच्‍चों के संरक्षण एवं देखभाल के लिए मानक संचालन

            सड़कों पर जीवन यापन करने पर विवश बच्‍चों के संरक्षण एवं देखभाल के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का शुभारंभ नई दिल्‍ली में महिला एवं बाल वि‍कास मंत्री श्रीमती मेनका संजय गांधी द्वारा किया गया।

            जिसका उद्देश्‍य उनके पुनर्वास के साथ-साथ हिफाजत को भी सुनिश्चित करना है। इससे पहले एसओपी का शुभारंभ एक समारोह में किया गया। जि‍समें दिल्‍ली उच्‍च न्‍यायालय की न्‍यायाधीश माननीया मुक्‍ता गुप्‍ता, एनसीपीसीआर की अध्‍यक्ष सुश्री स्‍तुति कक्‍कड़, जानी-मानी फिल्‍म अभिनेत्री एवं सेव द चिल्‍ड्रेन की ब्रांड अम्‍बेसडर सुश्री दीया मिर्जा, सेव द चिल्‍ड्रेन इन इंडिया के अध्‍यक्ष हरपाल सिंह और सेव द चिल्‍ड्रेन इंटरनेशनल के सीईओ थॉमस चांडी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

                 एनसीपीसीआर ने सड़कों पर जिंदगी गुजारने पर मजबूर बच्‍चों के लिए इस अत्‍यावश्‍यक रणनीति को विकसित करने हेतु सिविल सोसायटी ऑर्गेनाइजेशन (सीएसओ), सेव द चिल्‍ड्रेन के साथ गठबंधन किया। एनसीपीसीआर ने सड़कों पर जीवन यापन कर रहे बच्‍चों की देखभाल एवं संरक्षण के लिए आवश्‍यक कदमों वाली एक विस्‍तृत रूपरेखा तय करने का निर्णय लिया क्‍योंकि इस तरह के बच्‍चों की समस्‍याएं बहुआयामी एवं जटिल होती हैं। एसओपी का लक्ष्‍य मौजूदा वैधानिक एवं नीतिगत रूपरेखा के अंतर्गत विभिन्‍न कदमों को दुरुस्‍त करना है।

              एसओपी का उद्देश्‍य उन प्रक्रियाओं को चिन्हित करना है। जिन पर अमल तब किया जायेगा, जब सड़कों पर जीवन यापन करने वाले किसी बच्‍चे की पहचान एक जरूरतमंद बच्‍चे के रूप में हो जायेगी। ये प्रक्रियाएं नियमों एवं नीतियों की मौजूदा रूपरेखा के अंतर्गत ही होंगी। इनकी बदौलत विभिन्‍न एजेंसियों द्वारा उठाये जाने वाले कदमों में समुचित तालमेल संभव हो पायेगा। इसके अलावा, ये प्रक्रियाएं इन बच्‍चों की देखभाल, संरक्षण एवं पुनर्वास के लिए समस्‍त हितधारकों हेतु कदम-दर-कदम दिशा-निर्देश के रूप में होंगी। एसओपी के शुभारंभ के अवसर पर श्रीमती मेनका संजय गांधी ने कहा, ‘हमारी सरकार भारत में हर बच्‍चे की खुशहाली के लिए प्रतिबद्ध है।

             इस पहल से सरकार को यह सुनिश्चित करने में मदद मि‍लेगी कि स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी शिक्षा एवं संरक्षण संबंधी सुविधाएं सड़कों पर जीवन यापन करने वाले बच्‍चों को भी सुलभ हों।’ विभिन्‍न क्षेत्रों में किये गये विस्‍तृत शोध अध्‍ययनों के निष्‍कर्षों के साथ-साथ 35 एनजीओ के साथ पटना, लखनऊ, हैदराबाद और मुम्‍बई में किये गये क्षेत्रीय विचार-विमर्श से उभर कर सामने आये सुझावों पर गौर करने के बाद ही एसओपी तैयार की गई। एसओपी को तैयार करने से पहले दिल्‍ली में उन बच्‍चों से भी एनसीपीसीआर में सलाह-मशविरा किया गया, जो सड़कों पर जीवन यापन करने की विवशता से अपने-आपको उबार चुके हैं।

भारत-रवांडा के विकास, विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार के रिश्‍ते मजबूत

              उपराष्‍ट्रपति एम. हामिद अंसारी ने कहा है कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार के क्षेत्र में आपसी रिश्‍तों को और मजबूती प्रदान करने के लिए भारत-रवांडा नवाचार विकास कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है। 

          इस कार्यक्रम का उद्देश्‍य एक ऐसे परितंत्र का सृजन करना है जिसमें भारतीय नवाचार एवं प्रौद्योगिकी से जुड़े कदम दोनों ही देशों के व्‍यावसायिक उद्यमों को बढ़ावा देंगे। उपराष्‍ट्रपति भारतीय वाणिज्‍य एवं उद्योग मंडल महासंघ (फिक्‍की) और रवांडा विकास बोर्ड द्वारा रवांडा के किगाली में संयुक्‍त रूप से आयोजित किये गये भारत-रवांडा बिजनेस फोरम की बैठक को संबोधित कर रहे थे। 

                  रवांडा के प्रधानमंत्री अनासतसे मुरेकेजी और अन्‍य गणमान्‍य व्‍यक्ति भी इस अवसर पर उपस्थित थे। उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि रवांडा वर्ष 1994 में हुए दुर्भाग्यपूर्ण नरसंहार से पूरी तरह उबर चुका है। किगाली शहर की स्‍वच्‍छता का जायजा लेने से यह साफ जाहिर हो जाता है कि यह देश विकास एवं समृद्धि के पथ पर अग्रसर है। उन्‍होंने यह भी कहा कि रवांडा में आज अक्षय ऊर्जा, बुनियादी ढांचा, कृषि, खनन, पर्यटन और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में निवेशकों के लिए असीम अवसर हैं। उन्‍होंने कहा कि विगत कुछ वर्षों से भारत और रवांडा के बीच व्‍यापार निरंतर धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है। 

            उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि रवांडा के अनेक निवासी अपनी बीमारियों के इलाज के लिए भारत की यात्रा कर चुके हैं। वे वहां से काफी संतुष्‍ट होकर लौटे हैं। उन्‍होंने कहा कि रवांडा के विद्यार्थियों के लिए भारत उच्‍च गुणवत्ता वाली एवं किफायती शिक्षा का एक प्राथमिकता वाला गंतव्‍य भी बनता जा रहा है। उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि विचारों एवं अभिनव कदमों को व्‍यावहारिक उपयोग में लाने के लिए खोज एवं वि‍कास के साथ-साथ इनकी समुचित डिलीवरी करने की भी जरूरत पड़ेगी। 

            उन्‍होंने कहा कि हम अब रवांडा में अपने साझीदारों के साथ-साथ अफ्रीका के अन्‍य भागीदारों के साथ भी काम करने को तैयार हैं, ताकि हमारे अनुभवों से लाभ उठाते हुए नवाचार आधारित अर्थव्‍यवस्‍था के निर्माण में मदद मिल सके।



 

सेंट लूसिया के स्‍वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्‍या पर राष्‍ट्रपति की बधाई

               राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने सेंट लूसिया के स्‍वतंत्रता दिवस की पूर्वसंध्‍या पर सेंट लूसिया की सरकार व वहां के नागरिकों को बधाई व शुभकामनाएं दी हैं। 

            सेंट लूसिया की गवर्नर जेनरल महामहिम सुश्री डेम पर्लेट लुईसी को भेजे अपने संदेश में राष्‍ट्रपति ने कहा है, ‘भारत सरकार व भारत के नागरिकों तथा अपनी ओर से मुझे सेंट लूसिया के स्‍वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्‍य में आपको व सेंट लूसिया के नागरिकों को हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं देते हुए अत्‍यंत हर्ष का अनुभव हो रहा है। भारत और सेंट लूसिया के बीच बहुत पुरानी मित्रता है। दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ रहा है। दोनों देश कई विश्‍व मुद्दों पर समान नजरिया रखते हैं। दोनों देशों के बीच अंतर्राष्‍ट्रीय मंच पर शानदार सहयोग होता रहा है।

                हाल में हमारे कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्‍य मंत्री ने सेंट लूसिया का दौरा किया था, जिससे दोनों देशों के बीच आपसी समझ में इजाफा हुआ है। राष्‍ट्रमंडल और सीएआरआईसीओएम में हमारे संयुक्‍त प्रयासों के मद्देनजर आपसी संबंध और मजबूत हुए हैं। मुझें विश्‍वास है कि आने वाले वर्षों में हमारे द्विपक्षीय संबंध और मजबूत होंगे। मैं इस अवसर पर महामहिम आपके अच्‍छे स्‍वास्‍थ्‍य की कामना करता हूं। इसके साथ ही मैं सेंट लूसिया के नागरिकों की समृद्धि और प्रगति की भी कामना करता हूं।’

कच्चे तेल की अंतर्राष्ट्रीय कीमत 54.97 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल



            पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधीनस्‍थ पेट्रोलियम नियोजन एवं विश्‍लेषण प्रकोष्ठ (पीपीएसी) की सूचना के अनुसार भारतीय बास्‍केट के कच्चे तेल की अंतर्राष्‍ट्रीय कीमत 54.97 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल दर्ज की गई। यह 17 फरवरी, 2017 को दर्ज कीमत 54.56 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से अधिक है। रुपये के संदर्भ में भारतीय बास्केट के कच्चे तेल की कीमत 20 फरवरी, 2017 को बढ़कर 3681.51 रुपये प्रति बैरल हो गई, जबकि 17 फरवरी, 2017 को यह 3657.88 रुपये प्रति बैरल थी। 

                  रुपया 20 फरवरी, 2017 को मजबूत होकर 66.98 रुपये प्रति अमेरिकी डॉलर के स्तर पर बंद हुआ, जबकि 17 फरवरी, 2017 को यह 67.05 रुपये प्रति अमेरिकी डॉलर था।

330 लाख टन गेहूं खरीद का लक्ष्‍य

               केन्‍द्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री, राम विलास पासवान ने कृषि मंत्रालय द्वारा जारी दूसरे अग्रिम अनुमानों के आंकड़ों पर प्रसन्‍नता व्‍यक्त करते हुए कहा कि रिकॉर्ड उत्‍पादन से किसानों ने यह प्रमाणित किया है कि वे सरकार की किसान हितैषी नीतियों में विश्वास रखते हैं।

            पासवान ने केंद्रीय कृषि एंव किसान कल्याण मंत्री, राधा मोहन सिंह को भी बधाई दी। कहा कि हाल ही में उनके द्वारा 16 फरवरी, 2017 को मीडिया के साथ वर्ष 2016-17 के दूसरे अग्रिम अनुमान साझा किए गए, जिसमें खाद्यान्‍नों की मुख्‍य फसलों का उत्‍पादन 271.98 मिलियन टन होने का विश्वास व्‍यक्त किया गया है। पासवान ने कहा कि सरकार आने के बाद लगातार 2 वर्ष तक सूखाग्रस्‍त स्‍थिति से निपटने के बाद पहली बार अच्‍छे मानसून और केन्‍द्र सरकार की किसान हितैषी नीतियों का लाभ अब आम जनता को मिलने लगा है।

               केन्‍द्र सरकार की किसान कल्‍याण की मंशा हमेशा स्‍पष्‍ट रही है। यही कारण है कि देश के किसानों ने आज गत वर्ष की तुलना में 7ऽ अधिक गेहूं, 11ऽ से अधिक दलहन और 6ऽ से अधिक तिलहनों की बुवाई की है। इस वर्ष दलहन का 221.4 लाख टन का रिकॉर्ड उत्‍पादन होने का अनुमान है। इसी प्रकार गेहूं का भी 965 लाख टन उत्‍पादन का अनुमान है। केन्‍द्र सरकार ने ऐसी नीति बनाई है कि किसानों को उनकी फसल की लागत का भुगतान पारदर्शी ढंग से सीधे उनके खातों में किया जाए। दालों के साथ-साथ गेहूं, धान और तिलहन में भी किसानों की लागत को देखते हुए अच्‍छी बढ़ोतरी की गई है।

              पासवान ने बताया कि इस वर्ष के चालू खरीद सीजन में भी किसानों से 444 लाख टन धान की रिकॉर्ड खरीद की गई है। पासवान ने कहा कि देश के किसानों ने दालों की रिकॉर्ड पैदावार की है, किन्‍तु मूंग और अरहर में यह शिकायत आने लगी कि किसानों को न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य भी नहीं मिल रहा है। सरकार ने पहले मात्र 1ह लाख टन का जो बफर स्‍टॉक बनाया था, उसे किसानों के हित में बढ़ा कर 20 लाख टन कर दिया। आज केन्‍द्र की तीन एजेंसियां किसानों से सीधे खरीद कर रही है, जो अभी जारी है।

                केंद्रीय कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष गेहूं का उत्‍पादन 965 लाख टन से अधिक होने का अनुमान है। बुवाई के क्षेत्रफल और मौसम को देखते हुए इस बार गेहूं की पैदावार अच्‍छी होने की उम्‍मीद है। खाद्य विभाग ने 15 फरवरी, 2017 को देश में गेहूं उत्‍पादन करने वाले राज्‍यों की बैठक की, जिसमें आगामी रबी खरीद सीजन 2017-18 में 330 लाख टन गेहूं खरीद का लक्ष्‍य रखा है। 330 लाख टन गेहूं की खरीद के लिए व्‍यापक तैयारियां की जा रही हैं। देश के पूर्वी राज्‍यों के किसानों के लिए भी खरीद के विशेष इन्‍तजाम किए जा रहे हैं। 

            उल्‍लेखनीय है कि केन्‍द्र सरकार ने 8 दिसम्‍बर, 2016 को उपभोक्ता हित में गेहूं का आयात शुल्‍क घटाया था। आयात शुल्‍क घटाने के लगभग 2 माह के अंदर 30-40 लाख टन गेहूं का आयात हो चुका है। इस वर्ष कुल मिला कर 55 लाख टन से अधिक गेहूं का आयात हो गया है। अब गेहूं की फसल मार्च से बाजार में आनी शुरू हो जाएगी। सरकार का यह अनुभव रहा है कि बढ़ी हुई कीमतों का लाभ व्‍यापारी उठा लेते हैं। जब किसानों की बारी आती है तो उन्‍हें औने-पौने दामों में अपनी फसल को बेचना पड़ता है।

             जिस प्रकार सरकार ने दालों के मामले में कदम उठाए हैं। आज दलहन पैदा करने वाले किसानों को न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य मिल रहा है, उसी प्रकार गेहूं का उत्‍पादन करने वाले किसानों के लिए भी हरसंभव कदम उठाए जाएंगे। आवश्‍यकता पड़ने पर आयात शुल्‍क बढ़ाने पर भी विचार किया जाएगा।

मिजोरम व अरुणाचल राज्‍य के स्‍थापना दिवस पर प्रधानमंत्री ने‍ दी शुभकामनाएं

                प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने‍ मिजोरम व अरुणाचल प्रदेश के लोगों को राज्‍य के स्‍थापना दिवस पर शुभकामनाएं दी।

             “प्रधानमंत्री ने कहा, मिजोरम के लोगों को उनके राज्य के स्थापना दिवस पर बधाई और मिजोरम आने वाले वर्षों में काफी प्रगति करे। अरुणाचल प्रदेश के लोगों को उनके राज्य के स्थापना दिवस पर बधाई। अरुणाचल प्रदेश आने वाले समय में विकास को नई ऊँचाइयों तक ले जाए।”

 

डिजिटल भुगतान : करीब 10 लाख लोगों को 153.5 करोड़ के पुरस्‍कार

              नीति आयोग की दो प्रोत्‍साहन योजनाओं- लकी ग्राहक योजना और डिजि-धन व्‍यापार योजना के जरिये भारत में डिजिटल भुगतान को एक जन आंदोलन बनाने की पहल ने अपनी शुरुआत के बाद महज 58 दिनों में जबरदस्‍त नतीजे दिए हैं।

              यह पहल एक मुहिम का रूप ले चुकी है। समाज के विभिन्‍न वर्गों के लोगों ने डिजिटल लेनदेन प्रणाली में हिस्‍सा लेना शुरू कर दिया है। इन योजनाओं को कार्यान्वित करने वाली संस्‍था भारतीय राष्‍ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) के ताजा आंकड़ों से पता चलता है कि करीब 10 लाख ग्राहकों और व्‍यापारियों के बीच 153.5 करोड़ रुपये की पुरस्‍कार राशि वितरित की गई।

              उल्‍लेखनीय तथ्‍य,  9.8 लाख विजेताओं में 9.2 लाख उपभोक्‍ता तथा 56 हजार व्‍यापारी हैं।  120 उपभोक्‍ताओं ने एक लाख रूपये प्रत्‍येक का पुरस्‍कार जीता है।  4 हजार दुकानदारों ने 50 हजार रुपये प्रत्‍येक का नकद पुरस्‍कार जीता है।  महाराष्‍ट्र, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश और दिल्‍ली सर्वाधिक विजेताओं के साथ चोटी के पांच राज्‍यों के रूप में उभरे। ज्‍यादातर विजेता 21 से 30 वर्ष के उम्र के हैं।  इन योजनाओं में पुरुषों और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी दिखी।

                     इन विजेताओं की आयु वर्ग में विविधता और बुजुर्गों तथा सेवानिवृत्‍त लोगों से लेकर छात्रों तक उनकी भागीदारी उस धारणा को चुनौती देती है कि डिजिटल भुगतान प्रणाली को अपनाने में प्रौद्योगिकी उन्‍हें सबसे बड़ी समस्‍या दिखती है। इन दोनों योजनाओं के विजेताओं की सामाजिक-आर्थिक पृष्‍ठभूमि में भी विविधता दिखी। उसमें किसानों, व्‍यापारियों, छोटे उद्यमियों, पेशेवरों, गृहणियों से लेकर सेवानिवृत्त व्‍यक्तियों तक शामिल हैं। विजेताओं ने अपने अनुभव बताए कि उन्‍होंने किस प्रकार से डिजि भुगतान को अपनाया। इससे इनका जीवन कितना आसान हो गया। 

                 दिल्‍ली के एक 22 वर्षीय ड्राइवर सबीर ने ग्राहकों के लिए लक्‍की ग्राहक योजना के अंतर्गत 1 लाख रुपये जीते हैं। डिजि भुगतान उनके लिए परोक्ष रूप से एक वरदान बनकर आया है कयोंकि उनके पिता के निधन के पश्‍चात  उनके लिए बैंक की लाइनों में खड़े होने का वक्‍त ही नहीं था। उन्‍हें अपनी माता और शारीरिक रूप से विकलांग बहन की देखभाल भी करनी होती थी। हरियाणा के हिसाब से एक गेंहू उत्‍पादक 29 वर्षीय किसान भीमसिंह ने बताया कि वह अब थोक विक्रेताओं से माल की खरीद के लिए डिजि भुगतान का इस्‍तेमाल करते हैं। 

             तमिलनाडू में कोयम्‍बतूर की 29 वर्षीय इंजीनियरिंग की छात्रा एवं छ: वर्ष के बच्‍चे की माता सुश्री जयन्‍ती भी इस योजना के अंतर्गत 1 लाख रुपये के पुरस्‍कार की विजेता हैं। दुकानदारों में राजस्‍‍थान के अलवर से परचून के दुकान के मालिक 42 वर्षीय दामोदर प्रसाद खंडेलवाल ने डिजि धन व्‍यापार योजना के अंतर्गत 50 हजार रुपये जीते हैं। पुरस्‍कार आंकड़ों के एक विश्‍लेषण से यह भी पता चलता है कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के साथ विजेताओं का भौगोलिक दायरा भी काफी विस्‍तृत रहा। दिलचस्‍प है कि डिजिटल भुगतान के इस्‍तेमाल का लाभ भारत के हर कोने तक पहुंच गया। विजेताओं में लगभग हर राज्‍य के लोग दिखे।

                 नीति आयोग 25 दिसंबर 2016 से भारत भर में 110 शहरों में डिजि धन मेलों का आयोजन कर रहा है। यह क्रम 14 अप्रैल 2017 तक प्रतिदिन चलेगा। देश भर में डिजि भुगतान आंदोलन को बहुसंख्‍यक लोगों तक पहुंचाने के लिए अब तक 59 डिजि धन मेलों का आयोजन किया जा चुका है। योजना के बारे में, नीति आयोग की दो योजनाएं हैं। लकी ग्राहक योजना (एलजीवाई) और डिजि-धन व्‍यापार योजना (डीवीवाई)। इन योजनाओं को 25 दिसंबर 2016 को शुरू किया गया था। ये 14 अप्रैल 2017 तक खुली रहेंगी। इन योजनाओं का उद्देशय डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए ग्राहकों और व्‍यापारियों दोनों को प्रोत्‍साहित करना है।

             इनके तहत कुल 1.5 करोड़ रुपये की पुरस्‍कार राशि के लिए रोजाना 15,000 विजेताओं की घोषणा की जाती है। इसके अलावा हर सप्‍ताह कुल करीब 8.3 करोड़ रुपये की पुरस्‍कार राशि के लिए 14,000 से अधिक साप्‍ताहिक विजेता घोषित किए जाते हैं।

             रूपे कार्ड, भीम / यूपीआई (भारत इंटरफेस फॉर मनी/यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस), यूएसएसडी आधारित ।99# सेवा और आधार सक्षम भुगतान सेवा (एईपीएस) का इस्‍तेमाल करने वाले उपभोक्‍ता और व्‍यापारी दैनिक एवं साप्‍ताहिक लकी ड्रॉ पुरस्‍कार जीतने लेने के लिए पात्र हैं।