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अब गंगा में गंदगी नहीं , एसटीपी बनेंगे

          सीवेज प्रदूषण के निस्तारण के लिए नमामि गंगे के तहत कई परियोजनाएँ तैयार हैं। हरिद्वार के जगजीतपुर में 110.30 करोड़ रुपये की लागत से 68 एमएलडी के एसटीपी और सराय में 25 करोड़ की लागत से 14 एमएलडी के एसटीपी बनेंगे।

          जगजीतपुर में 81.15 करोड़ रुपये की लागत से आई और डी कार्य की शुरुआत की जा रही है। जगजीतपुर में 27 एमएलडी प्लांट के टरटियरी ट्रीटमेंट  और सराय में 18 एमएलडी प्लांट के टरटियरी ट्रीटमेंट का डीबीओटी मोड में बनेंगे । 29.75 करोड़ रुपये की लागत से सराय में आई और डी कार्य की शुरुआत की जा रही है। इसी के अंतर्गत वाराणसी के रमन्ना में 120 करोड़ रुपये की लागत वाले 50 एमएलडी के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के क्रियान्वयन के लिए हाइब्रिड.एन्यूटी आधारित पीपीपी मॉडल पर कार्य को मंजूरी दी गई है।

          नमामि गंगे कार्यक्रमए गंगा नदी को बचाने का एक एकीकृत प्रयास है। इसके अंतर्गत व्यापक तरीके से गंगा की सफाई करने को प्रमुखता दी गई है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत नदी की सतही गंदगी की सफाई, सीवरेज उपचार के लिए बुनियादी ढांचे, एवं नदी तट विकास, जैव विविधता, वनीकरण और जन जागरूकता जैसी प्रमुख गतिविधियां शामिल हैं। 02.01.2017
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 ‘खुले में शौच मुक्‍त भारत’ का लक्ष्‍य 


 केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्री जे पी नड्डा और केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने सुशासन दिवस में ‘स्‍वच्‍छ स्‍वस्‍थ सर्वत्र’ का शुभारंभ किया। बेहतर स्‍वच्‍छता एवं ज्‍यादा जागरूकता और स्‍वस्‍थ जीवन शैली के जरिये बेहतर स्‍वास्‍थ्‍य का लक्ष्‍य हासिल करने के‍ उद्देश्‍य से ‘स्‍वच्‍छ स्‍वस्‍थ सर्वत्र’ दरअसल स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय और पेयजल एवं स्‍वच्‍छता मंत्रालय की एक संयुक्‍त पहल है।

       समारोह में जावड़ेकर ने कहा कि खुले में शौच मुक्‍त (ओडीएफ) को केवल बुनियादी ढांचे के सृजन तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि इसके जरिए लोगों की आदतों एवं नजरिये में सकारात्‍मक बदलाव भी लाना चाहिए। कहा कि वर्ष 2019 तक खुले में शौच मुक्‍त भारत के लक्ष्‍य को हासिल करने की दिशा में ‘स्‍वच्‍छ स्‍वस्‍थ सर्वत्र’ एक अत्‍यंत जरूरी कार्यक्रम है। इसे जन आंदोलन का स्‍वरूप दिया जाना चाहिए।कायाकल्‍प में केंद्र सरकार के अस्‍पतालों की श्रेणी में प्रथम पुरस्‍कार 5 करोड़ रुपये, द्वितीय पुरस्‍कार 3 करोड़ रुपये और तृतीय पुरस्‍कार 1 करोड़ रुपये का है। इस वर्ष अनेक प्रतिष्ठित प्रतिष्‍ठान जैसे कि चंडीगढ़ स्थित चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान स्नातकोत्तर संस्थान (पीजीआईएमईआर) और दिल्‍ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्‍थान (एम्‍स) और शिलांग स्थित पूर्वोत्तर इंदिरा गांधी क्षेत्रीय स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विज्ञान संस्थान रहे हैं।

           नड्डा ने कहा, ’अब पुरस्कारों की विभिन्न श्रेणियों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा है। इसके परिणामस्‍वरूप हर स्‍तर पर आदतों एवं नजरिये में बदलाव देखा जा रहा है।’ नड्डा ने कहा कि स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय ‘कम उम्र में ही आदत डालो’ थीम पर काम कर रहा है। मंत्रालय कम उम्र में ही बच्‍चों की आदतों में सकारात्‍मक बदलाव लाने की दिशा में काम कर रहा है, ताकि उन्‍हें ऐसी आदतों से बचाया जा सके जिनके कारण गैर संचारी रोग (एनसीडी) फैलते हैं। उन्‍होंने कहा कि केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य शिक्षा ब्‍यूरो द्वारा तैयार की गई चित्रमय पुस्‍तकों-‘स्‍वस्‍थ बच्‍चे स्‍वस्‍थ भारत’ के जरिए ऐसे स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी संदेश दिये जायेंगे जिनसे बच्‍चों एवं युवाओं को जीवन यापन की स्‍वास्‍थ्‍यवर्धक आदतों एवं गतिविधियों के बारे में शिक्षित किया जा सकेगा। मंत्री ने कहा कि मंत्रालय ने स्‍वास्‍थ्‍यवर्धक जीवन यापन पर आधारित इन पुस्‍तकों का वितरण देश भर के स्‍कूलों में किया है।

          अब तक किये गये प्रयासों और उपलब्धियों के पूरक के तौर पर पेयजल एवं स्‍वच्‍छता मंत्रालय और स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय ने आज ‘स्‍वच्‍छ स्‍वस्‍थ सर्वत्र’ के रूप में एक संयुक्‍त पहल का शुभारंभ किया है। ‘स्‍वच्‍छ स्‍वस्‍थ सर्वत्र’ के तीन प्रमुख घटक निम्‍नलिखित हैं। ओडीएफ ब्‍लॉकों में अवस्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) को कायाकल्‍प प्रमाणन हासिल करने के लिए सहायता दी गई। कायाकल्‍प प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों (पीएचसी) की ग्राम पंचायत को ओडीएफ बनने के लिए प्राथमिकता दी गई। सीएचसी/पीएचसी के नामित व्‍यक्तियों को वॉश (जल, स्‍वच्‍छता एवं सफाई) से जुड़ा प्रशिक्षण दिया गया। 30.12.2016
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गंगा की निर्मलता पर खर्च होंगे 9419 करोड़


        नमामी गंगे के एक हिस्से के रूप में भारत सरकार ने प्रवासी भारतीयों, अनिवासी भारतीयों, भारतीय मूल के व्यक्तियों, संस्थाओं और कॉरपोरेट्स को गंगा संरक्षण में योगदान देने हेतु प्रोत्साहित करने के लिए 'स्वच्छ गंगा कोष’ की स्थापना की  थी।

         स्वच्छ गंगा कोष में कुल 87.69 करोड़ रुपए का योगदान सरकार को मिला।  नमामी गंगे कार्यक्रम के तहत गंगा संरक्षण के लिए एक कार्यान्वयन समझौते पर जल संसाधन मंत्रालय, नदी विकास और गंगा संरक्षण तथा जर्मनी की जर्मन इंटरनेशनल कोरपोरेशन के बीच नई दिल्ली में हस्ताक्षर किए गए थे। जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय के तहत स्वच्छ गंगा राष्ट्रीय मिशन ने इंडियन इंस्टीट्यूट कानपुर के सहयोग से गंगा नदी बेसिन प्रबंधन और अध्ययन केंद्र औपचारिक शुरूआत की घोषणा की थी।  


              कुल 808.23 एमएलडी क्षमता वाली 34 परियोजनाओं के तहत एनजीआरबीए कार्यक्रम की शुरूआत से अब तक गंगा बेसिन राज्यों में 41 सीवेज उपचार संयंत्र विकास-पुनर्वास स्वीकृत किए गए। राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण (एनजीआरबीए)  की अधिकारप्राप्त संचालन समिति ने घाटों और शमशान घाटों के विकास के लिए परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है इन परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत 2446 करोड़ रुपये है।  जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय ने गंगा अधिनियम मसौदा तैयार करने के लिए एक समिति का गठन किया है। न्यायमूर्ति गिरधर मालवीय (सेवानिवृत्त) को इस समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया।  

              राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण (एनजीआरबीए) की अधिकारप्राप्त संचालन समिति ने  लगभग 400 करोड़ रुपये लागत की विभिन्न परियोजनाओं अपनी मंजूरी दी है।  जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय ने नमामी गंगे कार्यक्रम के शीघ्र कार्यान्वयन के लिए कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के साथ दिल्ली में एक समझौता पर हस्ताक्षर किए। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने गंगा नदी (संरक्षण, सुरक्षा और प्रबंधन) प्राधिकरण आदेश 2016 को मंजूरी दे दी है। इस आदेश में त्वरित तरीके से नीति और कार्यान्वयन के लिए एक नए संस्थागत ढांचे का प्रावधान किया गया है। 

            राष्ट्रीय स्वच्छ मिशन को स्वतंत्र और जवाबदेह तरीके से अपने कार्य का निर्वहन करने के लिए सशक्त बनाया गया है। मंत्रालय ने पेय जल और स्वच्छता मंत्रालय को चालू वित्त वर्ष के दौरान स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत गंगा कार्य योजना को लागू करने के लिए 315 करोड़ रुपये की राशि जारी की है। सरकार ने जापान इंटरनेशनल कॉरपोरेशन एजेंसी (जेआईसीए) द्वारा दिए गए विकासात्मक ऋणों के रूप में यमुना की परियोजनाओं के लिए 496.90 करोड़ रुपये राशि की वित्तीय सहायता का लाभ उठाया। नमामी गंगे कार्यक्रम के तहत 128 परियोजनाएं (एनजीआरबीए कार्यक्रम के तहत स्वीकृत मौजूदा परियोजनाओं सहित) स्वीकृत की गई इन परियोजनाओं की अनुमानित लागत 9419 करोड़ रुपये ह। 23.12.2016
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भारत की आध्यात्मिक राजधानी काशी को 2100 करोड की सौगात


       देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वास्थ्य सेवाओं-सुविधाओं सहित विभिन्न परियोजनाओं के लिए यह सौगात दी है।  प्रधानमंत्री ने कहा कि करीब 2100 करोड़ रुपयों के भिन्न प्रोजेक्ट काशी को मिले हैं। प्रधानमंत्री ने काशी विश्वविद्यालय में कैंसर रीसर्च इंस्टिट्यूट का शिलान्यास किया।

         प्रधानमंत्री ने कहा इस पूरे क्षेत्र में कैंसर की बीमारी है तो मुंबई जाना पड़ता है। मुंबई के अंदर अस्पताल में इतनी देर के बाद नंबर लगता है। क्यों न मुंबई में जो कैंसर अस्पताल है। वैसा ही वैसी ही सुविधाओं वाला उत्तम से उत्तम सारवार करने वाला अस्पताल उत्तर प्रदेश में हो। खासकर के पूर्वी उत्तर प्रदेश में हो। जिसका लाभ पड़ोस में झारखंड और बिहार के लोगों को भी मिले। एक बहुत बड़ा प्रकल्प जिसका शिलान्यास काशी विश्वविद्यालय में किया है। 500 बेड का इतना बड़ा अस्पताल काशी में बनना ये काशी को बहुत बड़ा नजराना है। गरीब बीमार लोगों के लिए 500 में से 200 बेड वो पूरी तरह गरीबों के लिए समर्पित होंगे। 

             काशी की एक वैश्विक पहचान बनाने का एक बहुत बड़ा आधार बन सकता है। अब काशी में जो भी लोग आए उनको वहां ले जाना चाहिए। यहां के रिक्शा वाले होंगे, यहां के टैक्सी वाले होंगे उनको भी पता होना चाहिए। वहां वो देख भी सकता है कि इस क्षेत्र के लोगों के हाथों में कैसा हुनर है। कैसी कैसी चीजें निर्माण करते हैं। और उसका एक ग्लोबल पहचान बने प्रोडक्ट की भी पहचान बने, प्रोसेस की भी पहचान बने। और भारत की इस महान विरासत काशी के लोगों ने कैसे संभाल कर के रखी है। इसका दुनिया को परिचय हो वैसा एक उत्तम काम ये ट्रेड सेन्टर, म्यूजियम जिसके कारण बना है। लग रहा था कि काशी की धरती पर ऐसा भी निर्माण कार्य हो सकता है और इतने कम समय में हो सकता है। इस प्राचीन शहर के साथ इस आधुनिक इमारत प्राचीन कलाकारी के साथ आधुनिक पहचान। ऐसा एक शुभ योग के साथ आज टैक्टाइल की दुनिया जो काशी की विशेष पहचान है। 

                हस्तकला जो काशी की विशेष पहचान है। उंगलियों के बल पर नजाकत के साथ एक पूरी नई चीज निर्माण करने का जो सामर्थ इस धरती में है इसे दुनिया भली भांति देखेगी, पहचानेगी। पुराने परम्परा के साधन रहे हैं उसमें बदलाव जरूरी होता है। आज कुछ साथियों को मुझे हथकर्घा उसकी सहायता देने का अवसर मिला। अलग-अलग निर्माण कार्य में हथकर्घे का जो उपयोग होता है। उसमें से आधुनिक टैक्नॉलॉजी के कारण आधुनिक व्यवस्था के कारण उनकी सरलता भी बढ़ेगी, आमदनी भी बढ़ेगी। उन चीजों में उसमें बल देने का प्रयास किया है। पूरे देश में इस क्षेत्र में काम करने वालों को एक पहचान कार्ड देने का अभियान चला है। हमारे देश के पास इतना बड़ा सामर्थ है। लेकिन बिखरा पड़ा हुआ है। न कभी उसके रिकॉर्ड उपलब्ध होती है न कभी उसकी पहचान होती है। उसकी एक ब्रांड बन जाती है। क्यूं न भारत का गरीब से गरीब व्यक्ति जिसके पास कौशल्य है, हुनर है, काम कनरे का जज़्बा है उसकी एक अपनी पहचान हो। वो स्वयं एक ब्रांड है।

             हमारे देश में ऐसा काम करने वाले कोटी कोटी जन स्वयं में अपने आप में एक ब्रांड है। ये ब्रांड दुनिया को अभी तक हम परिचित नहीं करवा पाए हैं। इस पहचान के माध्यम से उनके सामर्थ को जानना उनके सामर्थ को बल देना इसी क्षेत्र में विकास करना है तो तुरंत कर सकते हैं कि चलो भई ये पहचान में इतने लोग हैं। इनके लिए योजना बनाइए। उनके लिए अवसर दीजिये। एकदम से उस काम को बढ़ावा मिल सकता है। तो आधुनिक टैक्नॉलॉजी के द्वारा व्यक्तियों की पहचान करते हुए उनके सामर्थ को टटोलते हुए उसका ब्रांडिंग करते हुए। ये जो पहचान कार्ड देने की योजना है उस का भी मुझे आज अवसर मिला है। जो लोग कार्पेट बनाने वाले हैं, उनको आधुनिक नई लूम जिसके साथ कारण क्वालीटी प्रोडक्शन एक इंटनेशनेल लेवल का प्रोडक्शन जिसके कारण हमारी कालीन को एक्सपोर्ट करने की सुविधा बढ़ेगी।
23.12.2016


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देश में 27,81,883 शौचालयों का निर्माण
           शहरी क्षेत्रों में व्यक्तिगत और सार्वजनिक और सामुदायिक शौचालयों के निर्माण की रफ्तार बढ़ने से स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) एक नए स्तर पर पहुंच गया है। 


         शहरी विकास मंत्री एम. वेंकैया नायडू ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के पांच शहरों और मध्य प्रदेश के भोपाल और इंदौर में उपयोग के लिए सार्वजनिक शौचालय का पता लगाने के लिए 'गूगल मैप्स शौचालय लोकेटर ऐप' का शुभारंभ किया। नायडू ने कहा कि अब यह सुविधा दिल्ली, गुरूग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और नोएडा तथा मध्य प्रदेश के दो शहरों में उपलब्ध है जिससे खुले में पेशाब और खुले में शौच की समस्या का समाधान करने में मदद मिलेगी। 'स्वच्छ सार्वजनिक शौचालय' कीवर्ड का उपयोग करके उपयोगकर्ता एनसीआर के पांच शहरों में बस और रेलवे स्टेशनों, मॉल, अस्पतालों, ईंधन स्टेशन, मेट्रो स्टेशन के आसपास स्थित 5162 शौचालयों तथा इंदौर 411 और भोपाल में 703 शौचालयों तथा सार्वजनिक तथा सामुदायिक शौचालय परिसरों का पता लगा सकते हैं।

         एप यह भी जानकारी उपलब्ध कराएगा कि शौचालय मुफ्त है या इसके लिए भुगतान करना होगा। इस सुविधा का आने वाले समय में अन्य शहरों में भी विस्तार किया जाएगा, शहरी विकास मंत्रालय ने इस सेवा के लिए गूगल के साथ भागीदारी की है। वेंकैया नायडू ने टॉलस्टाय मार्ग मेट्रो स्टेशन के पास, कॉपरनिकस मार्ग पर, हरियाणा भवन के सामने, शेरशाह रोड पर, राष्ट्रीय कला गैलरी में पीपीपी मॉडल के तहत निःशुल्क स्मार्ट शौचालयों का भी शुभारंभ किया है। नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) ने गेट नम्बर 2, पालिका बाजार, नई दिल्ली में 'रिवर्स वेंडर मशीन' की शुरुआत की है। जब इस मशीनों में एक प्लास्टिक की बोतल डाली जाती है तो यह एक रुपये तक के क्रेडिट की रसीद देती है।

                    एनडीएमसी ऐसी 20 मशीनें लगा रही है। जिससे प्लास्टिक की बोतलों का कचरा रोकने में मदद मिलेगी। 502 शहरों और कस्बों ने खुले में शौच से मुक्त घोषित किया। अगले साल मार्च तक 237 अन्य शहर खुले में शौच से मुक्त हो जायेंगे। 66 लाख व्यक्तिगत घरेलू शौचालयों के निर्माण के लक्ष्य की तुलना 27,81,883 शौचालयों का निर्माण हो चुका है और 21,43,222 का निर्माण कार्य प्रगति पर है। पांच लाख से अधिक सामुदायिक और सार्वजनिक शौचालय सीटों का निर्माण होना है, जबकि 1.07 लाख सीटों का पहले ही निर्माण हो चुका है तथा 1.30 लाख अन्य शौचालय सीटें निर्माणाधीन हैं। आंध्र प्रदेश, सिक्किम को खुले में शौच से मुक्त घोषित किया है।  इसके अलावा केरल, महाराष्ट्र, तेलंगाना, झारखंड, कर्नाटक तथा केंद्र शासित क्षेत्रों में चंडीगढ़ और पुडुचेरी शौचालयों के निर्माण में शीर्ष पर हैं।

          देश में वर्तमान में अपशिष्टों से कंपोस्ट खाद बनाने के 95 संयंत्र काम कर रहे हैं जिनसे प्रतिवर्ष 2.88 लाख टन कंपोस्ट खाद का निर्माण हो रहा है। ऐसे कर्नाटक में 17, गुजरात में 16, महाराष्ट्र में 15, तमिलनाडु में 9 और उत्तर प्रदेश में 7 संयंत्र काम कर रहे हैं। दिल्ली में प्रतिमाह 3,000 मीट्रिक टन कंपोस्ट खाद का निर्माण हो रहा है। अपशिष्ट से कंपोस्ट खाद बनाने के 313 अन्य संयंत्रों का पुनरुद्धार और उन्नयन किया जा रहा है इनकी कुल उत्पादन क्षमता प्रति वर्ष 22 लाख टन होगी। अपशिष्ट ऊर्जा बनाने वाले 7 संयंत्र देश में परिचालित हैं। इनमें से दिल्ली में 3, महाराष्ट्र में 2 और मध्य प्रदेश और तेलंगाना में एक-एक संयंत्र कार्यरत हैं जो नगरपालिका के ठोस अपशिष्ट से 88.40 मेगावाट की बिजली का उत्पादन कर रहे हैं। 22.12.2016

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तेल एवं प्राकृतिक गैस का उत्‍पादन घटा


कच्‍चे तेल का उत्‍पादन 2875.75 टीएमटी का हुआ, जो तय लक्ष्‍य से 5.65 फीसदी कम है। पिछले वर्ष की समान अवधि में हुए उत्‍पादन के मुकाबले भी 5.40 फीसदी कम है। 

अप्रैल-नवम्‍बर, 2016 के दौरान कच्‍चे तेल का कुल उत्‍पादन 23990.26 टीएमटी का हुआ, जो तय लक्ष्‍य से 1.76 फीसदी कम है। पिछले वर्ष की समान अवधि में हुए उत्‍पादन के मुकाबले भी 3.53 फीसदी कम है। प्राकृतिक गैस का उत्‍पादन 2669.89 एमएमएससीएम का हुआ, जो इस महीने के लिए तय लक्ष्‍य से 7.46 फीसदी कम है। पिछले वर्ष की समान अवधि में हुए उत्‍पादन के मुकाबले भी 1.71 फीसदी कम है। अप्रैल-नवम्‍बर,  2016 के दौरान प्राकृतिक गैस का कुल उत्‍पादन 21148.54 एमएमएससीएम का हुआ, जो इस अवधि के लिए तय लक्ष्‍य से 4.40 फीसदी कम है। पिछले वर्ष की समान अवधि में हुए उत्‍पादन के मुकाबले भी 3.70 फीसदी कम है। 22.12.2016

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 दिल्ली अब पेरिस की राह चलेगी  परिवहन को निशुल्क करेगी 


दुनिया के कई देशों के बाद अब दिल्ली भी पेरिस की राह पर चलने की कोशिश में दिख रही। परिवहन व्यवस्था को रियायत एवं निशुल्क करने की कोशिश की जा रही है।

 प्रदूषण के हिलाफ जंग में दिल्‍ली भी पेरिस की राह चलेगी । खबर है कि दिल्‍ली सरकार भी पेरिस की तरह कोई बड़ा ऐलान कर सकता है।  पेरिस में जनता परिवहन को पूरी तरह निशुल्क कर दिया गया है। उसी प्रकार दिल्‍ली सरकार भी  जनता परिवहन के किराये में बड़ी कटौती कर सकती है। किरायों में 50 फीसद तक की कटौती का प्रस्‍ताव है। मंथली पास में 75 फीसद तक कटौती का प्रस्‍ताव है। 

स्‍टूडेंट्स को निशुल्क पास दिया जायेगा। दिल्ली सरकार बसों का किराया 50 फीसद तक कम करने  की कोशिश कर रही है । दिल्ली सरकार का लक्ष्य प्रदूषण को कम करने के लिए निजी वाहनों को हतोत्साहित करके सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है। अभी दिल्‍ली में एक रूट पर नॉन एएसी बसों को किराया 5 रुपये से 15 रुपये है, जबकि एसी बसों में यह किराया 10 रुपये से 25 रुपये तक है। सरकार की स्‍कीम लागू होने के बाद दोनों बसों का किराया 5 रुपये से 10 रुपये हो जायेगा । 21.12.2016
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ई-भुगतान को प्रोत्साहन, लाखों के ईनाम  


        भारत सरकार डिजिटल एवं क्रेडिट कार्ड सहित अन्य ई-लेन-देन को हर संभव प्रोत्साहन देगी। देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस आशय की घोषणा की है। 


भारत सरकार की इस प्रोत्साहन योजना में पचास रुपये से लेकर तीन हजार की छोटी खरीद-फरोख्त को पुरस्कार-ईनाम योजना में शामिल किया गया है। इस योजना के तहत प्रतिदिन पन्द्रह हजार उपभोक्ताओं को एक-एक हजार रुपये की धनराशि सीधे बैंक खातों में भेजेगी। इसके अलावा अन्य ढ़ेरों प्रोत्साहन एवं पुरस्कार इस योजना में शामिल होंगे। इसके पीछे ई-भुगतान को बढ़ावा देना है। डिजिटल और कार्ड से भुगतान को बढ़ावा देने के लिए वित्त् मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग ने सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) से जनता के हित को ध्यान में रखते हुए लेन-देन के लिए फीस चार्ज नहीं करने को कहा है। नकदी के बजाय कार्ड और डिजिटल साधनों से भुगतान को बढ़ावा देने हेतु भारतीय रिजर्व बैंक ने 1000 रूपये तक के तत्काल भुगतान सेवा (आईएमपीएस), एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई) और असंरचित पूरक सेवा डाटा (यूएसएसडी) से लेन-देन को तर्कसंगत बनाते हुए 1 जनवरी 2017 से 31 मार्च 2017 तक चार्जेज में छूट दी है। 

भारतीय रिजर्व बैंक ने 1 जनवरी 2017 से 31 मार्च 2017 तक डेबिट कार्ड से 2000 रूपये तक के लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) को भी तर्कसंगत बनाया है। इससे आगे बढ़ते हुए डिजिटल और कार्ड से भुगतान को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस), वित्त मंत्रालय ने सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) को जनता के हित में तत्काल भुगतान सेवा (आईएमपीएस) और एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई) से भुगतान करने पर चार्ज नहीं लेने को कहा है। नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर (एनईएफटी) के जरिए 1000 रूपये से ज्यादा के भुगतान पर भी सिर्फ सेवा कर ही लेने को कहा है। इसके साथ असंरचित पूरक सेवा डाटा (यूएसएसडी) के जरिए 1000 रूपये से ज्यादा के भुगतान पर भी पचास पैसे की छूट देने को कहा है। यह 31.03.2017 तक के सभी लेनदेन के लिए लागू होगा। 21.12.2016
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स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय को डिजिटल इंडिया पुरस्‍कार 2016- का वेब रत्‍न स्‍वर्ण पदक


स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय ने डिजिटल इंडिया पुरस्‍कार 2016 के वेब रत्‍न वर्ग में स्‍वर्ण पदक प्राप्‍त किया है। इन पुरस्‍कारों का आयोजन इलेक्‍ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने किया था। ये पुरस्‍कार सरकारी निकायों द्वारा ई-शासन पहलों को प्रोत्‍साहन देने के लिए प्रदान किये जाते हैं। 

इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स एवं सूचना प्रौद्योगिकी और विधि एवं न्‍याय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने पुरस्‍कार प्रदान किये। डिजिटल इंडिया पुरस्‍कारों को पहले वेब रत्‍न पुरस्‍कार के नाम से जाना जाता था। इनका गठन राष्‍ट्रीय भारतीय पोर्टल के तहत किया गया था। वेब रत्‍न पुरस्‍कार भारत सरकार के विभागों और मंत्रालयों को प्रोत्‍साहित करता है जिनकी गतिविधियां वेबसाइट पर उपलब्‍ध हैं।



जिन्‍होंने परिमाण, गुणवत्ता आदि क्षेत्रों में उच्‍च स्‍तरीय प्रदर्शन किया हो। जो नागरिक इनका इस्‍तेमाल करना चाहते हैं या उपलब्‍ध सेवाओं की सुविधा प्राप्‍त करना चाहते हैं, उन्‍हें वेबसाइट पर पूरा सहयोग प्राप्‍त होता है। स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय की वेबसाइट सभी शर्तों को पूरा करती है। यह वेबसाइट आधिकारिक भाषाओं की संसदीय समिति के आदेशानुसार दो भाषाओं में उपलब्‍ध है। वेबसाइट में दृष्टि बाधित लोगों की सुविधा के लिए भी विशेष प्रबंध ‍कि‍ये गये हैं।  20.12.2016


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5000 रूपये से अधिक पुराने नोट अब एक बार ही जमा किए जा सकेंगे 


                सरकार द्वारा समय-समय पर 500 रूपये और 1000 रूपये के पुराने नोटों को जमा करने की कार्रवाई की समीक्षा की गई है। 500 और 1000 के पुराने नोट निरस्‍त किए जाने की घोषणा के 5 सप्‍ताह से अधिक हो गए हैं। 

बैंकों में लगी कतारों को कम करने के लिए अब यह निर्णय लिया गया है कि 5000 रूपये से अधिक के पुराने नोट अब से और 30 दिसंबर, 2016 के बीच केवल एक बार ही जमा किए जा सकेंगे। बैंकों को सलाह दी गई है कि वे इन नोटों को पहले जमा नहीं करने के कारण के बारे में उचित मानक अपनाएं। 5000 रूपये और उससे कम की राशि उपभोक्‍ता के खातों बैंकों में अभी की तरह जमा की जा सकेगी। 


          लेकिन 19 और 30 दिसंबर, 2016 के बीच 5000 रूपये से अधिक की संचयी जमा राशि 5000 रूपये से अधिक जमा की जाने वाली राशि के संबंध में भारतीय रिजर्व की परामर्श प्रक्रियाओं के अनुसार होगी। प्रधानमंत्री गरीब कल्‍याण योजना (पीएमजीकेवाई) 2016 के अंतर्गत 30 दिसंबर, 2016 तक 500 रूपये और 1000 रूपये के पुराने नोट से टैक्‍स, पैनल्‍टी, शेष/सरचार्ज का भुगतान करने और राशि जमा करने का अवसर दिया गया है।  प्रकाशन तिथि : 19.12.2016

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खातों में अचानक पैसा की भरमार,आरबीआई की भौंहे तीरकमान

कालेधन को बैंक में जमा कराने वालों पर भारतीय रिजर्व बैंक ने शिकंजा कसा  है.। आरबीआई ने इस प्रकार के बैंक खातों से पैसे निकालने पर रोक लगा दी है । जिनमें पांच लाख रुपये से अधिक की राशि जमा है। नोटबंदी के ऐलान के बाद दो लाख रुपये से ज्यादा पैसे जमा किए गए हैं.। 

रिजर्व बैंक ने कहा है कि ऐसे खातों से कैश निकासी या दूसरे खाते में पैसे ट्रांसफर करने के लिए पैन नंबर देना होगा। जिनके बैंक ग्राहकों के पास पैन नंबर नहीं तो उन्हें फॉर्म 60 देना अनिवार्य होगा।.रिजर्व बैंक ने कहा है कि अगर किसी छोटे बचत खाते में अनुमति योग्य सालाना एक लाख रुपये की जमा की सीमा भी दिखेगी, तो हर महीने 10,000 रुपये की निकासी की सीमा को कायम रखा जाएगा।

.आरबीआई को जानकारी मिली थी कि बैंकों ने केवाईसी का कड़ाई से पालन नहीं किया है। उसी पर उसने यह सख्त उठाया है.। केंद्रीय बैंक ने हालांकि यह भी कहा कि जिन ग्राहकों ने केवाईसी फॉर्म भरा हैवह जांच में भी सही पाए गए हैं, उनसे भी सारे बैंक ट्रांजैक्शन के लिए पैन कार्ड या फॉर्म 60 लिया जाएइनके बिना ऐसे खातों से किसी तरह की नकद निकासी, स्थानांतरण नहीं किया जा सकेगा। 







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युवा आबादी देश की बड़ी शक्ति : राष्ट्रपति
छिंदवाड़ा। राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने युवा आबादी को देश की बड़ी शक्ति बताते हुए कहा कि  उसे कौशल और अत्याधुनिक तकनीकों से लैस किए जाने की जरूरत है। जिससे कि ये बदलते समय में नए पेशे और काम-धंधे अपनाने में पीछे नहीं रहें। श्री मुखर्जी ने वाणिज्य परिसंघ के छिंदवाड़ा केन्द्र के वार्षिक समारोह में अपने संबोधन में कहा कि भारत में आधी आबादी युवाओं की है।  

यह देश की बहुत बड़ी संपदा है लेकिन बेरोजगारी की दर को देखते हुए बहुत बड़ा संकट व हमारे लिए चुनौती बन गया है। देश में 36 हजार कॉलेजों से बड़ी संख्या में हर साल स्नातक पास हो कर निकल रहे हैं लेकिन कौशल विकास व हुनर की कमी के कारण उन्हें नौकरियां नहीं मिल रहीं हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि युवा आबादी यदि बेरोजगार रहती है तो इससे अस्थिरता, बेचैनी और उथल-पुथल की स्थिति बनती है। उन्होंने कहा, इस तरह की स्थिति देश के लिए अच्छी नहीं होती इसलिए हमें अपनी युवा आबादी को अपनी ताकत बनाना होगा। उनके लिए पर्याप्त रोजगार उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। राष्ट्रपति ने कौशल विकास और प्रशिक्षण को देश में वृद्धि तथा विकास का इंजन बताते हुए कहा कि युवा आबादी को कौशल और प्रौद्योगिकी से लैस करके भारत घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

 श्री मुखर्जी ने कहा कि यह दुर्भाज्ञ की बात है कि तमाम प्रयासों के बावजूद अभी तक 2.3 फीसदी लोगों को ही कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया जा सका है। श्री मुखर्जी ने कहा कि बढ़ते वैश्वीकरण और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के प्रचलन से भविष्य के रोजगार के स्वरूप का अभी अंदाजा नहीं लगाया जा सकता । अभी यह कल्पना भी नहीं की जा सकती कि आज स्कूल जाने वाले बच्चों को भविष्य में किस प्रकार का रोजगार मिलेगा, इसलिए युवा पीढ़ी विशेषकर ग्रामीण युवाओं को हर तरह के कौशल और प्रौद्योगिकी में दक्ष किए जाने की जरुरत है,जिससे कि वे दुनिया के किसी भी हिस्से में हर तरह का रोजगार हासिल करने में आगे रहें। उन्होंने कहा कि दुनिया के ज्यादातर देशों में अभी औसत आयु की आबादी अधिक है जबकि भारत में स्थिति इससे ठीक उलट है,लेकिन यह स्थिति ज्यादा लंबे समय तक नहीं रहेगी इसलिए हमें समय रहते बड़ी संख्या में युवाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें देश की ताकत बनाना होगा। श्री मुखर्जी ने इसके बाद छिंदवाड़ा के विभिन्न कौशल प्रशिक्षण केन्द्रों का दौरा किया ।

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डिजिटल पेमेन्ट की ओर बढ़ता भारत


ढाई वर्ष में भ्रष्टाचार एवं कालेधन के खिलाफ भारत सरकार ने अनेक कदम उठाए हैं। एक हजार और पाँच सौ रूपये के नोट को बंद करने का निर्णय इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 1000 और 500 के नोट के ढेर ने देश के अंर्थतंत्र में अनेक बुराइयों को आश्रय दिया। भविष्य में भी देश फिर से एक बार भ्रष्टाचार एवं काले धन का शिकार न हो, इसलिए भविष्यलक्षी स्थाई योजनाओं को लागू करना बहुत ही आवश्यक है।
तकनीक के माध्यम से ऑनलाइन पेमेंट, मोबाइल बैंकिंग , ई-वॉलेट, डेबिट कार्ड के ज़रिए डिजिटल बिज़नेस ट्रांसज़ेक्शन संभव है। ऐसे कई वैकल्पिक साधनों के ज़रिए डिजिटल से डिजी-धन की दिशा में बढ़ने में मदद मिलेगी। अफ्रीका में केन्या जैसे विकासशील देश ने ऐसा करके दिखाया है। भारत जैसा देश जिसकी 65ऽ जनसंख्या 35 वर्ष की आयु से कम है, भारत जो पूरी दुनिया में आईटी कौशल के लिए जाना जाता है, भारत जिसके करोड़ों-करोड़ अनपढ़ और गरीब व्यक्ति ईवीएम से वोट देते हैं, ऐसी क्षमता वाले देश के नागरिक निश्चित ही मौजूदा अर्थव्यवस्था को डिजिटल अर्थव्यवस्था में बदलने में सक्षम हैं। 

जो अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर को आगे बढ़ाने में मदद करेगा।
इसको पूरा करने के लिए, ई-पेमेंट को बढ़ावा देना, ई-वॉलेट और मोबाइल बैंकिग के प्रचलन को बढ़ाना, डिजिटल से समाज को डिजी-धन की ओर ले जाना अपरिहार्य हो गया है। 1000 और 500 रू. के नोटों के विमुद्रीकरण के पश्चात डिजिटल पेमेन्ट्स में काफी वृद्धि हुई है। यह आवश्यक है कि इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट का प्रचलन समाज के हर वर्ग में फैले। अतः नीति आयोग स्तर पर यह निर्णय लिया गया है कि भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम डिजीटल पेमेंट को प्रोत्साहित करने के लिए एक नई योजना शीघ्र लागू करें।

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 तेल और गैस क्षेत्र देश में सामाजिक-आर्थिक बदलाव :   धर्मेन्द्र प्रधान

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार धर्मेन्द्र प्रधान ने नई दिल्ली के प्रगति मैदान में पेट्रोटेक-2016 प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। पेट्रोटेक-2016 प्रदर्शनी तेल और गैस की सबसे बड़ी प्रदर्शनियों में से एक है। इसमें 50 देशों से करीब 600 प्रदर्शक भाग ले रहे हैं । इस प्रदर्शनी को 15 हजार वर्गमीटर के क्षेत्र में लगाया गया है। इस वर्ष की प्रदर्शनी विदेशी कंपनियों की अधिक भागीदारी और 15 देशों के शामिल होने से और अधिक व्यापक स्तर की है। इस प्रदर्शनी में दुनिया भर की प्रमुख तेल और गैस कंपनिया भाग ले रही है। यह प्रदर्शनी नई दिल्ली के प्रगति मैदान में 4 से 7 दिसंबर, 2016 तक चलेगी। पेट्रोटेक-2016 के मुख्य सम्मेलन का उद्घाटन माननीय प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के द्वारा 5 दिसंबर, 2016 को किया जाएगा। इस सम्मेलन का विषय ‘ईंधन के लिए हाइड्रोकार्बन भविष्य के विकल्प और चुनौतियां’ है और पेट्रोटेक-2016 प्रदर्शनी संगठनों, उत्पादों और सेवाओं के संवर्धन हेतु अवसर प्रदान कर रही है। सरकार के प्रमुख क्षेत्रों सहित मेक इन इंडिया और नवीकरणीय ऊर्जा जैसी पहलों को दिखाने के लिए विशेष मंडप लगाए गए हैं।

प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए प्रधान ने कहा कि यह प्रदर्शनी प्रत्येक आयाम, उत्पाद, प्रौद्योगिकी को एक मंच प्रदान करता है और विभिन्न हितधारकों से इसके लिए उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली है। उन्होंने कहा कि एक स्थल पर भारतीय हितधारकों के साथ वार्तालाप करने के लिए यह अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों, सेवाप्रदाताओं और प्रौद्योगिकी कंपनियों के लिए एक विशिष्ट मंच प्रदान करता है। श्री प्रधान ने कहा कि भारत में तेल और गैस क्षेत्र सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन के एक साधन के रूप में उभर रहा है`। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में इस क्षेत्र में अपने आप को आम लोगों से जोड़ लिया है। उन्होंने कहा कि वर्षों से यह क्षेत्र देशभर में सस्ती ऊर्जा और इसकी उपलब्धता के अलावा रोजगार सृजन, कौशल विकास, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में वृद्धि सामरिक साझेदारियों में वृद्धि और व्यापार संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

मंत्री ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हाइड्रोकार्बन केंद्र अभूतपूर्व तकनीकी विकास का साक्षी रहा है। उन्होंने कहा कि बेहतर प्रौद्योगिकियों की खोज से इस क्षेत्र में अवसरों के साथ निरंतर सकारात्मक परिवर्तन हो रहा है।









अब 5,000 से अधिक राशि का  सिर्फ  ई-भुगतान

सरकार भुगतान के पूर्ण डिजिटलीकरण के लिए, वित्त मंत्रालय, भारत सरकार ने एक बार फिर आपूर्तिकर्ताओं आदि को ई-भुगतान के संबंध में निर्धारित से 10,000/- रुपये की मौजूदा सीमा की समीक्षा की है। अब 10,000 रूपये की ऊपरी सीमा को कम करके 5,000 रुपए करने का फैसला किया गया है। इस संबंध में आखिरी समीक्षा अगस्त, 2016 में की गई थी।
भारत सरकार के सभी मंत्रालयों और विभागों को अब वित्‍त मंत्रालय ने यह निर्देश दिया है कि आपूर्तिकर्ताओं, ठेकेदारों, गारंटी/ऋण देने वाली संस्थानों आदि को 5,000 रूपये से अधिक राशि के सभी भुगतान ई-भुगतान के माध्‍यम से किये जाए, ताकि सरकारी भुगतान के पूर्ण डिजिटलीकरण करने के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके।



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