Wednesday, 31 January 2018

खेलो इंडिया को सफल बनाने की अब तक 10 लाख शपथ

    नई दिल्ली। केंद्र सरकार के खेलो इंडिया अभियान को सफल बनाने के लिए अब तक 10 लाख से अधिक लोग शपथ ले चुके हैं।

  केंद्रीय खेल एवं युवा मामलों के मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर ने बीते दिनों खेलो इंडिया शपथ को लांच किया था। इसके अलावा खेलो इंडिया एंथम अपने लांच के दो दिनों के भीतर 20 करोड़ लोगों द्वारा पसंद किया जा चुका है।
    अब तक 11 लाख लोग खेलो इंडिया शपथ ले चुके हैं। खेलो इंडिया शपथ को इन खेलों को सफल बनाने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। खेलो इंडिया के माध्यम से भारत सरकार कम उम्र में ही प्रतिभाओं को तलाश कर उन्हें अंतर्राष्ट्रीय प्लेटफार्म पर भारत के चैम्पियन के तौर पर तैयार करना चाहती है।
    खेलो इंडिया शपथ जैसे और जितना हो सके, लोगों को देश की खेल भावना को बनाए रखने और उसे बढ़ाने का संदेश देता है। यह उस क्रांतिकारी अभियान के प्रति भारत का शपथ है, जिसके तहत जमीनी स्तर से खिलाड़ियों को चुनकर उन्हें वैश्विक स्तर पर चमकने के लिए तैयार किया जाएगा।
        खेलो इंडिया अभियान के तहत पहले खेलो इंडिया स्कूल गेम्स का आयोजन 31 जनवरी से 8 फरवरी तक राष्ट्रीय राजधानी के पांच आयोजन स्थलों पर होगा। इसके तहत 16 खेलों में 3200 से अधिक खिलाड़ी हिस्सा लेंगे और 199 पदकों के लिए प्रतिस्पर्धा करेंगे।
     खेलो इंडिया को सफल बनाने के लिए अगर आप भी शपथ लेना चाहते हैं तो आपको खेलोइंडिया डॉट जीओवी डॉट इन पर लॉग इन करना होगा या फिर 902-900-1431पर मिस्ड कॉल देकर भी आप यह शपथ ले सकते हैं।

राष्‍ट्रपति भवन, नार्थ व साउथ ब्‍लॉक में गतिशील प्रकाश व्‍यवस्‍था

   नई दिल्ली। केन्‍द्रीय लोक निर्माण विभाग और आवास व शहरी मामलों के मंत्रालय ने इस वर्ष अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर प्रसिद्ध विरासत भवनों-राष्‍ट्रपति भवन तथा नॉर्थ और साउथ ब्‍लॉक- में शक्तिशाली व गतिशील प्रकाश व्‍यवस्‍था की स्‍थापना की है।

  पहले जीएलएस/मैटल हेलाइड/सोडियम वेपर के माध्‍यम से प्रकाश व्‍यवस्‍था की जाती थी। इसकी रोशनी वर्तमान के एलईडी लाइट की तुलना में बहुत मंद थी।
  राष्‍ट्रपति ने राष्‍ट्रपति भवन पर की गई नई प्रकाश व्‍यवस्‍था का उद्घाटन किया। नई एलईडी लाइटों की जीवन अवधि एक लाख घंटे है जबकि पहले उपयोग में लाई जा रही लाइटों की जीवन अवधि 10,000 घंटे थी। आसानी से निर्माण और रख-रखाव के लिए नई प्रकाश व्‍यवस्‍था में एकीकृत ऊर्जा और डेटा केबल पर कम्‍प्‍यूटरीकृत नियंत्रण की प्रणाली है।
    इस नई प्रणाली में बल्‍बों का रंग संयोजन, समय का निर्धारण, रोशनी को कम करना, एक या अनेक बल्‍बों/संयोजनों पर नियंत्रण आदि की व्‍यवस्‍था इथरनेट आधारित नियंत्रक के माध्‍यम से की गई है। इस प्रकाश प्रणाली में बहुरंग-संयोजन की सुविधा है।
   राष्‍ट्रपति भवन और नॉर्थ व साउथ ब्‍लॉक की गुम्बदों, छतरियों, स्‍तंभों व अन्‍य भागों पर प्रकाश के रंग संयोजन से इन भवनों की वास्‍तुकला की विशेषता उभरकर सामने आती है। यह प्रणाली ऊर्जा कुशल के साथ-साथ सस्‍ती भी है। नई प्रकाश व्‍यवस्‍था से इन भवनों का मूल्‍य संवर्धन हुआ है।

अब मछलियों में रासायनिक छिड़काव का पता लगाने वाली जांच किट

   नई दिल्ली। केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने आज सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फिशरीज टेक्नालॉजी (क्क्ष्क़च्र्) कोच्चि द्वारा विकसित मछलियों में रासायनिक मिलावट या छिड़काव का पता लगाने वाली किट - त्‍वरित परीक्षण किट (सिफ्टेस्‍ट) को लांच किया।

   मछलियों को जल्दी खराब होने से रोकने और बर्फ में फिसलन खत्म करने के लिए अमोनिया तथा फॉर्मेल्‍डहाइड का इस्तेमाल किया जाता है। जांच किट मछिलयों में दोनों रसायनों की उपस्थिति का पता लगाता है।
  राधा मोहन सिंह ने बताया कि अमोनिया तथा फॉर्मेल्‍डहाइड के सेवन से मनुष्यों में अनेक स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी समस्‍याऐं जैसे, पेट दर्द, वमन, बेहोशी जैसी समस्याएं उत्‍पन्‍न हो जाती हैं, और यहां तक कि व्यक्ति की मृत्‍यु भी हो सकती है। 
    केन्द्रीय कृषि मंत्री ने यह बात आज नई दिल्ली में त्‍वरित परीक्षण किट (सिफ्टेस्‍ट) के लांच के अवसर पर कही। श्री सिंह ने कहा कि मछली का सेवन स्‍वास्‍थ्‍य के लिए अत्‍यंत लाभकारी होता है । मछलियां जल्दी खराब हो जाती हैं इसलिए उनका लंबे समय तक भंडारण नहीं किया जा सकता है। भारतीय घरेलु मत्‍स्‍य बाज़ार में फॉर्मेल्‍डहाइड तथा अमोनिया युक्‍त मत्‍स्‍य के व्रिकय होने की सूचनाऐं आए दिन प्राप्‍त प्राप्त हो रही हैं, विशेषत उन बाज़ारों में जो उत्‍पादन केंद्रों से दूरदराज स्थानों में स्थित हैं।
     राष्‍ट्रीय एवं अंर्तराष्‍ट्रीय विनियमों के अनुसार मत्‍स्‍य उत्पादों को सिर्फ बर्फ के माध्‍यम से संरक्षित किया जाना चाहिए तथा मत्‍स्‍य परिरक्षण के लिए किसी भी रसायन का उपयोग पूर्णत: वर्जित है। केन्द्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि भोजन में दूषित पदार्थों की नियमित जांच एक दीर्घकालिन प्रक्रिया है परन्तु कुछ व्यक्ति दूषित पदार्थों के रूप में अनेक विषैले रसायनों का प्रयोग करने लगे हैं। आज का उपभोक्‍ता भोजन की गुणवता की सुरक्षा को लेकर बहुत सजग है।
      उपभोक्‍ता को दूषित पदार्थों की जांच के लिए ऐसी तकनीक की जरूरत है, जो संवेदनशील सुवाद्य होने के साथ-साथ शीघ्रता से दूषित पदार्थों का पता लगा सके । इन पहलुओं को ध्‍यान में रखकर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद - के मा प्रौ सं, कोच्चि ने अमोनिया तथा फॉर्मेल्‍डहाइड की त्‍वरित जांच हेतु परीक्षण किटों को विकसित किया है।
       इन किटों का प्रयोग उपभोक्‍ता सरल तरीकों से कर सकता है। किट के भीतर कागज़ की पट्टियॉं, रसायनिक द्रव्‍य तथा परिणाम जानने के लिए एक मानक चार्ट दिया गया है। फॉर्मेल्‍डहाइड एक कैंसर उत्‍प्रेरित करने वाला रसायन है, इसलिए मत्‍स्‍य परिरक्षण में इसका उपयोग चिंतनीय है। 
  अतः मछलियों में अमोनिया तथा फॉर्मेल्‍डहाइड का सेवन स्वास्थ्य के लिए खतरा है तथा जिसे रोकना आवश्यक है। मत्‍स्‍य परिरक्षण के लिए मात्र मानकीकृत मत्‍स्‍य प्रसंस्‍करण, संग्रहण, परिवहन एवं विपणन के कोल्‍ड चेन का यथोचित प्रयोग करना चाहिए।