Thursday, 27 April 2017

बुंदेलखंड के लिए जल संरक्षण कार्यक्रम

              केन्‍द्रीय जल संसाधन, नदी विकास तथा गंगा संरक्षण मंत्री सुश्री उमा भारती बुंदेलखंड, मराठवाड़ा, ओडिशा के कालाहांडी, बोलनगीर तथा कोरापुट के सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए व्‍यापक जल संरक्षण कार्यक्रम लॉच करेंगी। 

         सुश्री भारती औपचारिक रूप से कार्यक्रम 28 अप्रैल, 2017 को सागर (मध्‍य प्रदेश) के बंद्री में लॉच करेंगी। यह घोषणा करते हुए जल संसाधन मंत्री ने कहा कि उनके मंत्रालय ने बुंदेलखंड क्षेत्र में भूजल के कृत्रिम रिचार्ज के लिए मास्‍टर प्‍लान बनाया है। उत्‍तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में लगभग 1100 परकोलेशन (रिसाव) टैंकों, 14000 छोटे चैक डैम-नाला पुश्‍तों तथा 17000 रिचार्ज शॉफ्ट्स की पहचान की गई है। मध्‍यप्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में लगभग 2000 परकोलेशन टैंको, 55000 छोटे चैक डैम-नाला पुश्‍तों तथा 17000 रिचार्ज शॉफ्ट्स की पहचान की गई है। 

            उन्‍होंने कहा कि भूजल खोज के हिस्‍से के रूप में उत्‍तर प्रदेश क्षेत्र के बुंदेलखंड के पांच जिलों-बांदा, हमीरपुर, जालौन, चित्रकूट और माहोबा में 234 कुएं बनाये जाने का प्रस्‍ताव है। मध्‍य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के छह जिलों में भूजल खोज के लिए 259 कुओं के निर्माण का प्रस्‍ताव है। सुश्री भारती ने कहा कि उनके मंत्रालय ने राष्‍ट्रीय भूजल प्रबंधन सुधार योजना (एनजीएमआईएस) के अंतर्गत कई नई पहल की है। इसका उद्देश्‍य दबाव वाले ब्‍लॉकों में भूजल की स्थिति में कारगर सुधार करना, गुण और मात्रा दोनों की दृष्टि से संसाधन को सुनिश्चित करना, भूजल प्रबंधन और संस्‍थागत मजबूती में भागीदारीमूलक दृष्टिकोण अपनाना है। 

             उत्‍तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में 11851 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र कवर करने वाले छह जिलों को इस पहल के अंतर्गत विचार के लिए रखा गया है। मध्‍य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के 8319 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र के पांच जिलों को विचार के लिए रखा गया है। जल संसाधन मंत्री ने बताया कि मंत्रालय द्वारा सिंचाई अंतर पाटने की योजना (आईएसबीआईजी) तैयार की जा रही है। इसका उद्देश्‍य सीएडीडब्‍ल्‍यूएम कार्य पूरा करना और साथ-साथ तथा सृजित सिंचाई क्षमता (आईपीसी) तथा उपयोग की गई सिंचाई क्षमता (आईपीयू) के बीच खाई को पाटने के लिए नहर नेटवर्क में कमियों को सुधारना, सिंचाई में जल उपयोग क्षमता बढ़ाना और प्रत्‍येक खेत को जल सप्‍लाई सुनिश्चित करना तथा जल उपयोगकर्ता संघों (डब्‍ल्‍यूयूए) को सिंचाई प्रणाली का नियंत्रण और प्रबंधन हस्‍तां‍तरित करना है।

              उत्‍तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में बेतवा तथा गुरसराय नहर, राजघाट नहर, केन नहर प्रणाली, गुंटा नाला डैम तथा उपरी राजघाट नहर के 17,1030 हेक्‍टेयर को पाटने की योजना का प्रस्‍ताव है। इस योजना से बुंदेलखंड क्षेत्र के झांसी, जालौन, हमीरपुर, ललितपुर, बांदा जिलों को लाभ मिलेगा। मध्‍य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र की राजघाट नहर परियोजना को 68007 हेक्‍टेयर को पाटने की योजना का प्रस्‍ताव है। इस योजना से टिकमगढ़, दतिया जिलों को लाभ मिलेगा। जल संसाधन मंत्री ने कहा कि महाराष्‍ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में आईपीसी तथा आईपीयू के बीच 53365 हेक्‍टेयर को पाटने के लक्ष्‍य के साथ सात योजनाओं का प्रस्‍ताव है। इस योजना से औरंगाबाद, लातूर, नांदेड़, परभनी, सोलापुर तथा ओस्मानाबाद जिलों को लाभ मिलेगा और इस पर 250 करोड़ रुपये खर्च होंगे। 

           मराठवाड़ा के 3727 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को राष्‍ट्रीय भूजल प्रबंधन सुधार योजना के अंतर्गत लाने का प्रस्‍ताव है। इस पर 380 करोड़ रुपये का अनुमानित खर्चा आएगा। मराठवाड़ा क्षेत्र के 9101 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र की एक्विफर मैपिंग पूरी हो गई है। 7775 वर्ग किलोमीटर का प्रबंधन प्‍लान महाराष्‍ट्र सरकार को सौंपा गया है। सुश्री भारती ने कहा कि ओडिशा के कालाहांडी, बोलनवीर, कोरापुट (केबीके) क्षेत्र में पीआईसी तथा आईपीयू के बीच अंतर पाटने के लिए 0.68 लाख हेक्‍टेयर क्षेत्र कवर करने की 9 परियोजनाओं का प्रस्‍ताव है। इससे केबीके क्षेत्र के मलकानगीरी, बोलनगीर, नुआपाड़ा, रायगड़, कालाहांडी तथा बारगढ़ जिलों को लाभ मिलेगा। क्षेत्र में 305 कुएं बनाये गये।

              पीएमकेएसवाई के अंतर्गत केन्‍द्रीय सहायता उपलब्‍ध कराने के लिए केबीके क्षेत्र के 89 जल निकायों को 32 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत और 5739 हेक्‍टेयर की संभावित क्षमता को पुनर्जीवित करने के लक्ष्‍य के साथ शामिल किया गया है। ये जल निकाय ओडिशा में 760 जल निकायों के कलस्‍टर का हिस्‍सा हैं। इनके लिए 107 करोड़ रुपये की केन्‍द्रीय सहायता जारी की गई है। 99 जारी बड़ी मझौली सिंचाई परियोजना को एआईबी के अंतर्गत चरणबद्ध तरीके से मार्च, 2019 तक पूरा किया जाएगा, चार परियोजनाओ-लोअर इन्‍द्र (केबीके), अपर इन्‍द्रावती (केबीके), आरईटी सिंचाई तथा तेलनगिरी केबीके से क्षेत्र को लाभ मिलेगा। इन योजनाओं की अधिकतम सिंचाई क्षमता1.44 लाख हेक्‍टेयर है। 2016-17 के दौरान एआईबीपी तथा सीएडी योजनाओं के अंतर्गत इन योजनाओं के लिए 233 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई।

बंद पड़े उर्वरक संयंत्र फिर से चालू होंगे

           पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) धर्मेंद्र प्रधान ने रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अधीनस्‍थ बंद पड़े उर्वरक संयंत्रों की पुनरुद्धार योजनाओं पर रसायन एवं उर्वरक और संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार की अध्‍यक्षता में आयोजित एक संयुक्‍त बैठक में भाग लिया। 

          इस बैठक में विद्युत, कोयला, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा और खान राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) पीयूष गोयल और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग, शिपिंग, रसायन एवं उर्वरक राज्‍य मंत्री मनसुख मंडाविया ने भी इस बैठक में भाग लिया। धर्मेंद्र प्रधान ने एक संवाददाता सम्‍मेलन के दौरान मीडिया को संबोधित करते हुए पूर्वी भारत के त्‍वरित विकास से संबंधित माननीय प्रधानमंत्री के विजन पर विशेष जोर दिया, जो भारत के समग्र विकास के लिए अत्‍यंत आवश्‍यक है। 

               उन्‍होंने पूर्वी भारत में त्‍वरित विकास का उल्‍लेख करते हुए कहा कि कृषि पर केन्द्रित पूर्वी भारत में व्‍यापक ढांचागत निवेश पर विशेष जोर दिया जा रहा है, जिससे इस क्षेत्र में द्वितीय हरित क्रांति को बढ़ावा मिलेगा। प्रधान ने यह भी कहा कि बंद पड़े उर्वरक संयंत्रों को फिर से चालू करने और पूर्वी भारत को राष्‍ट्रीय गैस ग्रिड से जोड़ने हेतु गैस पाइपलाइन नेटवर्क की स्‍थापना के लिए 50,000 करोड़ रुपये का व्‍यापक निवेश किया जा रहा है।

            पेट्रोलियम मंत्री ने यह जानकारी दी कि गोरखपुर (उत्‍तर प्रदेश), बरौनी (बिहार) और सिंदरी (झारखंड) तथा तलछर (ओडिशा) स्थित उर्वरक संयंत्रों का पुनरुद्धार, 2650 किलोमीटर लम्‍बी प्रधानमंत्री ऊर्जा गंगा पाइपलाइन और धामरा (ओडिशा) स्थित एलएनजी टर्मिनल की स्‍थापना इस बुनियादी ढांचागत निवेश के महत्‍वपूर्ण अवयव होंगे। प्रधान ने बताया कि गोरखपुर (उत्‍तर प्रदेश), बरौनी (बिहार) और सिंदरी (झारखंड) स्थित उर्वरक संयंत्रों के पुनरुद्धार के लिए 20,000 करोड़ रुपये निवेश किये जाएंगे। पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि ओडिशा स्थित तलछर उर्वरक संयंत्र का पुनरुद्धार 8000 करोड़ रुपये के निवेश से  किया जा रहा है। 

           यह निवेश एफसीआई, गेल, राष्‍ट्रीय केमिकल्‍स एंड फर्टिलाइजर्स और कोल इंडिया लिमिटेड के एक कंसोर्टियम द्वारा किया जा रहा है। भारत में पहली बार किसी उर्वरक संयंत्र का परिचालन कोयला गैसीकरण प्रौद्योगिकी पर आधारित होगा। इन चारों प्रमुख उर्वरक संयंत्रों में उत्‍पादन होने पर उर्वरक के घरेलू उत्‍पादन के साथ-साथ इसकी उपलब्‍धता भी बढ़ जाएगी, जिससे अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण कृषि क्षेत्र को काफी बढ़ावा मिलेगा और इससे द्वितीय हरित क्रांति में मदद मिलेगी। इन संयंत्रों से जुड़ा बुनियादी कार्य वित्‍त वर्ष 2017-18 में शुरू होगा।

            प्रधान ने यह भी जानकारी दी कि लगभग 13000 करोड़ रुपये के निवेश से 2650 किलोमीटर लंबी जगदीशपुर-हल्दिया एवं बोकारो-धामरा प्राकृतिक गैस पाइपलाइन (जेएचबीडीपीएल) परियोजना गेल (इंडिया) लिमिटेड द्वारा क्रियान्वित की जा रही है, जो ‘प्रधानमंत्री ऊर्जा गंगा’ के नाम से जानी जाती है। यह पाइपलाइन उत्‍तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा से होकर गुजरेगी। उत्‍तर प्रदेश और बिहार में इस पाइपलाइन परियोजना का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। प्रधान ने यह भी बताया कि 6000 करोड़ रुपये के निवेश से ओडिशा के धामरा में एक एलएनजी टर्मिनल स्‍थापित किया जा रहा है।   

सीआईआई लाइफटाइम अचीवमेंट व सीआईआई फाउंडेशन आदर्श महिला प्रेसिडेंट अवॉर्ड

                 राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने नई दिल्ली में राहुल बजाज को सीआईआई प्रेसिडेंट लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया। महिला उद्यमियों को सीआईआई फाउंडेशन आदर्श महिला का अवॉर्ड दिया। 

            इस मौके पर राष्ट्रपति ने अवॉर्ड विजेता उद्यमियों- बजाज ऑटो लिमिटेड के चेयरमैन राहुल बजाज को इस साल के सीआईआई लाइफटाइम अचीवमेंट प्रेसिडेंट अवॉर्ड और सीआईआई फाउंडेशन आदर्श महिला अवॉर्ड की विजेताओं को उनकी उपलब्धियों के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि 2005 में हुई सीआईआई फाउंडेशन आदर्श महिला अवॉर्ड की स्थापना देश में सामुदायिक स्तर पर उन महिलाओं की खोज करने और उन्हें बढ़ावा देना है जो तमाम बाधाओं को पार करते हुए भारतीय समाज की बेहतरी में उल्लेखनीय योगदान देती हैं। 

            इससे उन अनगिनत महिलाओं को बढ़ावा मिलेगा जो हमारे देश और इसकी अर्थव्यवस्था में अलग-अलग तरह से योगदान दे रही हैं। राष्ट्रपति ने उद्योग जगत को ये भी याद दिलाया कि पूंजी के साथ ही देश को इनके आइडिया, ऊर्जा और शक्ति की भी जरूरत होगी। राष्ट्रपति ने ये भी आग्रह किया कि देश में विकास के राह की बाधाओं को दूर करने और नई खोज के लिए कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी से मिले अवसर का फायदा उठाएं। 

            राष्ट्रपति ने इस बात पर भी बल दिया कि सीएसआर विकास के लिए उद्योग जगत का ध्यान कुछ खास क्षेत्रों पर ना होकर पूरे देश पर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश के सामने जितनी बड़ी चुनौतियां उनसे निपटने के लिए हमारे पास उतना ज्यादा समय नहीं है, ऐसे में साझेदारी की भूमिका बेहद हो जाती है। आपस में साझेदारी कर मुश्किल से मुश्किल सामाजिक और तकनीकी दिक्कतों को दूर कर विकास के रास्ते पर बढ़ा जा सकता है। राष्ट्रपति ने कहा कि देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए हमें सभी सेक्टर की ताकत बढ़ानी होगी। 

            उन्होंने उम्मीद जताई कि एक औद्योगिक समूह की तरह सीआईआई कंपनियों को एकसाथ लाकर नई शुरुआत कर सकती है। उन्होंने इस बात की भी खुशी जताई की सीआईआई फाउंडेशन ने इस तरह का प्रयास शुरू किया है।

माइक्रो व स्मॉल एंटरप्राइज  पोर्टल व माइएमएसएमई मोबाइल ऐप

               केन्द्रीय शहरी विकास, आवास और शहरी गरीबी उन्मूलन, सूचना एवं प्रसारण मंत्री एम वेंकैया नायडू ने (एमएसएमई) की राष्ट्रीय बोर्ड की 15 वीं बैठक के अवसर पर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय दो महत्वपूर्ण पहलों यानि माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज फेसिलिटेशन काउंसिल (एमएसईएफसी) पोर्टल और माईएमएसएमई मोबाइल ऐप का शुभारंभ किया।

           केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री कलराज मिश्र और राज्य मंत्री हरिभाई पार्थिभाई चौधरी भी इस अवसर पर उपस्थित थे। कलराज मिश्र और केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम राज्य मंत्री हरिभाई पार्थिभाई चौधरी भी इस अवसर पर मौजूद हैं। इस अवसर पर कलराज मिश्र ने कहा कि माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज फैसिलिटेशन काउंसिल (एमएसईसीसी) पोर्टल एमएसएमईडी अधिनियम 2006 के विलंबित भुगतान के प्रावधानों को लागू करने में मदद करेगा तथा विलंबित भुगतान के मामलों की निगरानी में भी सहायता करेगा। इस मंच पर पहुंच से सूक्ष्‍म और लघु उद्यमों को विलंबित भुगतान संबंधी शिकायतें ऑनलाइन दर्ज करने में मदद मिलेगी। दर्ज की गई शिकायतें ई-मेल और एसएमएस के माध्‍यम से संबंध पार्टियों को भेज दी जाएंगी।

               इससे एमएसएमई मंत्रालय के साथ-साथ संबंधित राज्य सरकार के अधिकारियों को राज्य और राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर भी हुई प्रगति की निगरानी करने में मदद मिलेगी। उन्होंने यह भी बताया कि अधिकांश राज्यों ने पहले ही विलंबित भुगतान के मामलों से संबंधित जानकारी एमएसईएफसी पोर्टल पर अपलोड कर दी है। 31.03.2017 के अनुसार 1660 करोड़ रुपये की राशि के 3690 मामलों पर विभिन्न एमएसईएफसी द्वारा विचार किया जा रहा है। वास्तव में यह ऑनलाइन पोर्टल स्‍टार्ट-अप्‍स की बड़ी मदद करेगा क्‍योंकि विलंबित भुगतान स्‍टार्ट-अप्‍स के लिए सबसे बड़ी समस्‍या है।

                 इसके अलावा मोबाइल ऐप की भी एम वेंकैया नायडू द्वारा शुरूआत की गई है जो एक ही स्‍थान पर एमएसएमई मंत्रालय द्वारा लागू की गई सभी योजनाओं के बारे में जानकारी प्रदान करता है। एमएसएमई इकाइयां हमेशा यह शिकायत रहती थी कि सभी योजनाओं के बारे में जानकारियां एक ही स्थान पर उपलब्ध नहीं हो रही हैं। माईएमएसएमई मोबाइल एप की सहायता से इस मंत्रालय द्वारा लागू की गई सभी योजनाओं के बारे में एकल खिड़की पर जानकारी उपलब्‍ध होगी। एमएसएमई इस एप के माध्यम से मंत्रालय से संबंधित शिकायतों को भी दर्ज करा सकती हैं। प्रधानमंत्री ने सिविल सेवा दिवस समारोह के अवसर पर ई-गवर्नेंस से एम-गवर्नेंस (मोबाइल गवर्नेंस) की ओर आगे बढ़ने की जरूरत के बारे में बात की है। इस मोबाइल ऐप ने एमएसएमई सेक्टर को एम-गवर्नेंस के युग में प्रवेश करने के लिए सक्षम बनाया है।

                 केंद्रीय सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्ययम राज्य मंत्री हरिभाई चौधरी ने कहा कि मंत्रालय ने प्रत्‍येक योजना ऑनलाइन करने का कार्य शुरू कर दिया है। एमएसएमई इंटरनेट शिकायत निगरानी प्रणाली ने पहले ही 3,000 से अधिक लोगों की शिकायतों को हल कर दिया है। वेंकैया नायडू ने देश के एमएसएमई क्षेत्र में व्यापार को आसान बनाने की दिशा में शुरू की गई विभिन्न पहलों के लिए श्री कलराज मिश्र की प्रशंसा की और उन्‍हें प्रधान मंत्री के डिजिटल इंडिया मिशन के अनुरूप कदम उठाने के लिए बधाई दी।

भारत व साइप्रस में कृषि क्षेत्र में सहयोग

               भारत व साइप्रस के कृषि मंत्रियों ने नई दिल्ली मॆं कृषि क्षेत्र में सहयोग के लिए पहले से हुए समझौता ज्ञापन के कार्यान्‍वयन के लिए कार्य योजना वर्ष 2017-18’ पर हस्‍ताक्षर किया।

           भारत की तरफ से केंद्रीय कृषि एंव किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने और साइप्रस की तरफ से कृषि, ग्रामीण विकास तथा पर्यावरण मंत्री निकोस कौयलिस ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस कार्य योजना में सूचना के आदान-प्रदान, दोनों देशों के विभिन्‍न संस्‍थानों में विशिष्‍ट क्षेत्रों में कार्यरत वैज्ञानिकों-विशेषज्ञों के लिए प्रशिक्षण-विचार-विनमय कार्यक्रम, जर्म प्‍लाज़मा एवं प्रौद्योगिकी आदान-प्रदान तथा निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देने आदि के लिए संयुक्‍त अनुसंधान परियोजनाओं के संचालन, संयुक्‍त कार्यशालाओं एवं सम्‍मेलनों के आयोजन जैसे क्षेत्रों को शामिल किया गया है।

            केंद्रीय कृषि एंव किसान कल्याण मंत्री ने साइप्रस के कृषि, ग्रामीण विकास तथा पर्यावरण मंत्री, निकोस कौयलिस का स्‍वागत करते हुए यह उल्‍लेख किया कि भारत व साइप्रस के सदैव मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं। दोनों देशों ने अंतर्राष्‍ट्रीय मामलों में एक-दूसरे के दृष्‍टिकोणों का समर्थन किया है। सिंह ने जानकारी दी कि भारत ने कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में काफी प्रगति की है। यह क्षेत्र अभी भी लोगों की आय का प्रमुख स्रोत है। सरकार खादयान्‍नों की बढ़ती मांग पूरा करने के लिए न केवल कृषि उत्‍पादन में तेजी से वृद्धि कर रही है बल्‍कि कृषि पर निर्भर लोगों की आय में भी वृद्धि कर रही है।

             सरकार ने वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने का लक्ष्‍य निर्धारित किया है। केंद्रीय कृषि मंत्री ने इस संबंध में किए गए प्रयासों पर संक्षिप्‍त रूप से प्रकाश भी डाला। केंद्रीय कृषि एंव किसान कल्याण मंत्री ने यह भी उल्‍लेख किया कि उनकी सरकार ने न केवल व्‍यापार एवं निवेश की संभावनाओं को बढ़ाने के लिए बल्‍कि वर्षों से अर्जित जानकारी को बांटने और समान विचारधारा वाले देशों के साथ संबंधों को बढ़ाने पर जोर दिया है।

          सिंह ने साइप्रस के कृषि, ग्रामीण विकास एवं पर्यावरण मंत्री को भारत आने के लिए धन्‍यवाद दिया और कहा कि इस दौरे से दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंध और भी मजबूत हुए हैं।

अनुकंपा के आधार पर ग्रामीण डाक सेवक की नियुक्ति

                  डाक विभाग ने मौजूदा नियम के तहत ग्रामीण डाक सेवक के आश्रित परिजनों को अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने के लिए नई शुरुआत की है। 

        ग्रामीण डाक सेवक की नौकरी के दौरान मौत होने पर आश्रित को बिना किसी मुश्किल के तय समय के भीतर अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने की प्रक्रिया शुरू की गई है। किसी भी ग्रामीण डाक सेवक की नौकरी के दौरान बीमारी या किसी दूसरी वजह से मृत्यु होती है तो उसके परिवार के सदस्य को अनुकंपा के आधार पर नौकरी मिलेगी। जरूरी हुआ तो आवेदक की ऊपरी उम्र की सीमा में भी छूट दी जाएगी। नई योजना की शुरुआत से ग्रामीण डाक सेवक जो कि समाज के कमजोर और गरीब तबके से आते हैं और किसी अनहोनी की स्थिति में जिनपर अचानक मुश्किल आ जाती है उनके परिजनों को राहत मिलेगी।

             आश्रितों के निकटतम रिश्तेदारों में भी विस्तार दिया गया है जिसमें अब शादीशुदा बेटा जो मां-पिता के साथ रह रहा है और ग्रामीण डाक सेवक के निधन के समय अपनी आजीविका के लिए पिता पर पूरी तरह निर्भर हो, तलाकशुदा बेटी जो ग्रामीण डाक सेवक के निधन के समय अपने पिता पर ही पूरी तरह से निर्भर हो, ग्रामीण डाक सेवक की बहू जो निधन के समय उन्हीं पर पूरी तरह से निर्भर हो और ग्रामीण डाक सेवक के एकमात्र बेटे का पहले ही निधन हो चुका हो। परिवार के सदस्यों में इसके विस्तार का लक्ष्य हमारे समाज में महिलाओं के सामने उनके पति/परिजन के अचानक निधन से पैदा हुई मुश्किल परिस्थितियों में राहत देना है।

           अलग सेवा शर्त, सामाजिक और वित्तीय हालात और परिवार में वित्तीय अभाव, ज्यादा समय लेने वाली जटिल प्रक्रिया की वजह से गरीबी के आधार पर परिजनों के मूल्यांकन के पुराने तरीके को बदलकर वर्तमान तरीका लागू किया गया है। आगे से अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति के लिए आए आवेदन पर पर विचार कर आवेदन प्राप्ति की तारीख से तीन महीने के भीतर इसपर फैसला ले लिया जाएगा। आश्रित को दूर ना जाना पड़े इसके लिए फैसला किया गया है कि ग्रामीण डाक सेवक के आश्रित को अनुकंपा के आधार पर ग्रामीण डाक सेवक की नियुक्ति वही करने की कोशिश की जाएगी जहां उसका परिवार रहता है।