Wednesday, 11 September 2019

प्लास्टिक कचरा अलग करने में महिलाओं की भागीदारी

   प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज मथुरा में स्वच्छता पर एक व्यापक देशव्यापी जागरूकता अभियान - स्वच्छता ही सेवा 2019 का शुभारंभ किया। 
   एसएचएस 2019 के तहत ‘प्लास्टिक कचरा जागरूकता और प्रबंधन’ विशेष जोर दिया जा रहा है। इसे 11 सितंबर से 2 अक्टूबर, 2019 तक आयोजित किया जा रहा है। स्वच्छ भारत अभियान का लक्ष्य महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर एक खुले में शौचमुक्त (ओडीएफ) भारत समर्पित करना है। 
  केन्द्र सरकार के पशुपालन एवं दुग्ध उत्पादन और पेयजल एवं स्वच्छता विभागों और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संयुक्त रूप से एसएचएस के शुभारंभ का आयोजन किया गया था।
   प्रधानमंत्री ने पशुधन आरोग्य विज्ञान मेले में भी गए, जहां उन्होंने गायों के पेट से प्लास्टिक कचरे को हटाने के लिए उनकी शल्य चिकित्सा देखी। इसके बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश की महिलाओं के एक समूह के साथ बातचीत की, जो प्लास्टिक कचरे को अलग-अलग करके उन्हें रिसाईकिल-योग्य और गैर-रिसाईकिल-योग्य श्रेणियों में रखते हैं।
   प्रधानमंत्री ने खुद वहां प्लास्टिक कचरे को अलग-अलग करने के कार्य में भाग लिया। लगभग 20,000 किसानों, सरपंचों, महिला समूहों और स्वच्छाग्रहियों को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री ने सभी नागरिकों से मांग करते हुए कहा कि वे अपने घरों, कार्यालयों और कार्यस्थलों को प्लास्टिक के एकल इस्तेमाल से मुक्त करें। पर्यावरण, पशुओं और जल जीवों के स्वास्थ्य पर ऐसे प्लास्टिक के खतरनाक प्रभावों की ओर लोगों का ध्यान खींचते हुए, उन्होंने कहा कि खरीददारी के लिए बाहर जाते समय कपड़े अथवा जूट के बैगों का इस्तेमाल करें और कार्यालयों में पानी पीने के लिए धातु अथवा मिट्ठी के गिलासों का इस्तेमाल करें।
   उन्होंने लोगों से कहा कि वे अपने आस-पास से प्लास्टिक के सभी कचरे को एक निर्धारित इकट्ठा करें और स्वच्छता ही सेवा के दौरान स्थानीय प्रशासन की सहायता से इसका सुरक्षित निपटारा सुनिश्चित करें। 
  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वच्छ भारत मिशन के सकारात्मक प्रभावों के बारे में चर्चा करते हुए पूर्वी उत्तर प्रदेश में इन्सेफ्लाइटिस की घातक बीमारी को दूर करने में स्वच्छ भारत मिशन के योगदान के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत स्वच्छता के दायरे में महत्वपूर्ण वृद्धि होने से ओडीएफ भारत की तर्ज पर भारत को प्लास्टिक कचरा से मुक्त करने का लक्ष्य पूरा हो सकेगा।    
   इस अवसर पर केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि पूरा विश्व उस दिन का बेसब्री से इंतजार कर रहा है जब भारत ओडीएफ बन जाएगा। उन्होंने कहा कि स्वच्छता ही सेवा 2019 अभियान से प्लास्टिक कचरे और इसके संग्रहण, रिसाईकिलिंग और निपटारे के बारे में व्यापक जागरूकता कायम करने में अत्यधिक मदद मिलेगी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रेरणादायक नेतृत्व में पर्यावरण के संरक्षण के लिए एक नया जन आंदोलन बन जाएगा। केन्द्रीय मछलीपालन, पशुपालन एवं दुग्ध उत्पादन मंत्री गिरिराज सिंह, जल शक्ति राज्य मंत्री रतन लाल कटारिया, राज्य के अन्य मंत्री और स्थानीय सांसद और विधायकों ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

Monday, 9 September 2019

भारत 2030 तक 26 मिलियन हेक्टेयर डीग्रेडेड भूमि को ठीक करेगा

   प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि ‘भारत अब से 2030 तक 21 मिलियन हेक्टेयर से 26 मिलियन हेक्टेयर तक की डीग्रेडेड भूमि को ठीक करने की महत्वाकांक्षा रखता है।’ इसके मद्देनजर अत्यंत डीग्रेडेड भूमि के 26 मिलियन हेक्टेयर रकबे की भूमि उत्पादकता तथा जैव प्रणाली को बहाल करने पर ध्यान दिया जाएगा। इसके तहत डीग्रेडेड कृषि योग्य, वन और अन्य परती जमीनों को केन्द्र में रखा जाएगा। 

   प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक्सपो मार्ट, ग्रेटर नोएडा में 14वें मरुस्थलीकरण रोकथाम पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन की उच्चस्तरीय बैठक का उद्घाटन किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने रियो सम्मेलन के सभी तीन प्रमुख विषयों को समाधान करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता दोहराई।
   उन्होंने कहा कि सभी तीन सम्मेलनों के लिए कॉप के जरिए भारत ने वैश्विक बैठकों की मेज़बानी की है। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘आगे कदम बढ़ाते हुए भारत को जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता और भूमि क्षरण के मुद्दों को हल करने में दक्षिण-दक्षिण सहयोग के लिए पहलों का प्रस्ताव करने में खुशी होगी।’ 
   प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भूमि क्षरण नियंत्रण लक्ष्य निर्धारण कार्यक्रम के संबंध में यूएनसीसीडी के सदस्य देशों के क्षमता निर्माण तथा समर्थन के लिए एक वैश्विक तकनीकी समर्थन संस्थान बनाने के भारतीय प्रस्ताव की घोषणा की। उन्होंने कहा, ‘मुझे यह बताने में हर्ष हो रहा है कि भारत को सस्ती उपग्रह और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के जरिए भूमि उद्धार रणनीतियों के विकास के लिए अन्य मित्र देशों की सहायता करने में खुशी होगी।’ 
   जल की भूमिका के महत्व को रेखांकित करते हुए नरेन्द्र मोदी ने यूएनसीसीडी के नेतृत्व का आह्वान किया कि वह एक वैश्विक जल एजेंडा के बारे में विचार करे, जो भूमि क्षरण नियंत्रण रणनीति के लिए जरूरी है। उन्होंने कहा, ‘जब हम डीग्रेडेड भूमि की समस्या हल करते हैं, तो हम जल की कमी की समस्या भी हल करते हैं। जलापूर्ति बढ़ाना, जल की पुनःपूर्ति करना, जल अपव्यय को कम करना और मिट्टी की नमी को कायम रखना, भूमि तथा जल रणनीति का अह्म हिस्सा है।’
  मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने अपने वक्तव्य के शुरूआत में हरित गतिविधियों के प्रति प्रधानमंत्री के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा, ‘प्रधानमंत्री ने पेरिस शिखर वार्ता में अग्रणी भूमिका निभाई थी। वे 175 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन प्राप्त करने के भारत के महत्वाकांक्षी कार्यक्रम की प्रेरक शक्ति हैं।’
   पर्यावरण मंत्री ने कहा कि कॉप-14 पर्यावरण संबंधी अति महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा करने के लिए एक विश्व मंच के रूप में उभरा है। उन्होंने कहा, ‘विश्व भर के 190 से अधिक देश, 100 मंत्री और 8000 भागीदार यूएनसीसीडी कॉप-14 में भूमि बहाली और जलवायु के संवर्धन पर चर्चा करने तथा इस दिशा में काम करने के लिए एकजुट हुए हैं।’
  इस अवसर पर सेंट विंसेंट और ग्रेनाडिनेस के प्रधानमंत्री राल्फ गोंज़ाल्विस, संयुक्त राष्ट्र संघ की उप-महासचिव सुश्री अमीना जेन मोहम्मद, यूएनसीसीडी के कार्यकारी सचिव इब्राहीम थैव, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री बाबू सुप्रियो और अन्य विशिष्टजन उपस्थित थे।

Sunday, 8 September 2019

लद्दाख के लिए नई पर्यटन नीति में सहयोग

   केंद्रीय संस्‍कृति एवं पर्यटन राज्‍य मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि पर्यटन मंत्रालय लद्दाख के लिए नई पर्यटन नीति बनाने में स्‍थानीय प्रशासन को पूर्ण सहयोग देगा। 

   उन्‍होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो मंत्रालय के अधिकारी इस मामले में समर्थन व सहायता प्रदान करने के लिए प्रति महीने लद्दाख की यात्रा करेंगे।
   लेह यात्रा में केंद्रीय संस्‍कृति एवं पर्यटन राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) प्रहलाद सिंह पटेल ने लद्दाख में सभी स्‍थानीय हितधारकों के साथ बैठक की। बैठक में पर्यटन विभाग की डीजी श्रीमती मीनाक्षी शर्मा; पर्यटन विभाग की एडीजी सुश्री रुपिन्‍दर बरार जम्‍मू-कश्‍मीर पर्यटन के प्रधान सचिव नवीन कुमार चौधरी तथा पर्यटन मंत्रालय के वरिष्‍ठ अधिकारी एवं स्‍थानीय निकायों के अधिकारी उपस्थित थे।
   श्री पटेल ने कहा कि वर्तमान में लद्दाख क्षेत्र के केवल 14 स्‍मारक एएसआई के संरक्षण में हैं। मंत्रालय यह संख्‍या दोगुनी या तीन गुनी करना चाहता है। लद्दाख और कारगिल क्षेत्र में कई ऐसे स्‍मारक हैं जिसका संरक्षण एएसआई द्वारा किया जाना चाहिए।
   बैठक में स्‍थानीय हितधारकों ने श्री पटेल की लद्दाख यात्रा की सराहना की। स्‍थानीय लोगों ने पर्यटन उद्योग को प्रोत्‍साहन देने के लिए बेहतर कनेक्टिवीटि, बेहतर अवसंरचना, टैक्‍स में छूट आदि की मांग की। श्री पटेल ने उन्‍हें मंत्रालय तथा भारत सरकार के पूर्ण सहयोग का भरोसा दिया।
   बैठक में पर्यटक मंत्रालय के संयुक्‍त महानिदेशक विकास रुस्‍तगी ने लद्दाख क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने की कार्य योजना विषय पर एक प्रस्‍तुति दी। इसमें यह दिखाया गया कि लद्दाख में पूरी दुनिया से पर्यटकों को आकर्षित करने की क्षमता है। अतुल्‍य भारत अभियान में लद्दाख को विशेष स्‍थान दिया गया है।

विश्वविद्यालय नए भारत की प्रगति के पावर हाउस

   उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने कहा कि राष्ट्रपति के भाषणों में बार-बार शिक्षा की बात होती है। उनके लिए शिक्षा सशक्तिकरण का माध्यम है। वह चाहते हैं कि हमारे विश्वविद्यालय नए भारत की दिशा में प्रगति का पावर हाउस बनें। वह वैज्ञानिक संस्थानों से आशावान रहते हैं। 
 
   उपराष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रपति के चुने हुए भाषणों की पुस्तकें उनकी ज्ञानधारा का संकलन हैं। देश की संप्रभुता की रक्षा के प्रति भारत के संकल्प पर पुस्तक से उद्धरण पेश करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत ने हमेशा शांति और सहयोग के मूल्यों का पालन किया है।
   उन्होंने चेतावनी दी कि भारत पर आक्रमण करने वालों को माकूल जवाब दिया जाएगा।उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने सामाजिक बुराईयों पर चिंता व्यक्त करते हुए लोगों से अश्पृश्यता तथा लैंगिग भेदभाव जैसी सामाजिक बुराईयों को दूर करने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि देश में उपलब्ध आसाधारण प्रतिभा, विचारों और नवाचारी क्षमताओं को एक साथ लाने की आवश्यकता है ताकि समावेशी और सतत विकास सुनिश्चित हो सके।
   उपराष्ट्रपति नई दिल्ली के प्रवासी भारतीय केन्द्र में राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द के चुनिंदा भाषणों पर दो पुस्तकों ‘द रिपब्लिकन एथिक’ (खंड-2) तथा ‘लोकतंत्र के स्वर’(खंड-2) का विमोचन कर रहे थे। उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत इतिहास के उस मोड़ पर खड़ा है जहां से वह प्रमुख चुनौतियों और बाधाओं का सामना करते हुए समावेशी विकास की दिशा में छलांग लगा सकता है।
    उपराष्ट्रपति ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में मूल्यों और नीतियों को बनाए रखना लोगों के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इस बारे में राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द की और मेरी सोच एक समान है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने अनेक अवसर पर राष्ट्रपति के संबोधनों में राष्ट्र का सार, विज़न, महत्वकांक्षा, आशाओं और स्वभाव को देखा है। उनमें विचारों की स्पष्टता है, विश्लेषण करने की क्षमता है। राष्ट्रपति के सभी भाषणों में, चाहे वह राष्ट्र के नाम संबोधन हो या विदेश यात्राएं हो या शिक्षा की बात हो, सभी में तालमेल देखने को मिलता है।
    श्री नायडू ने कहा कि राष्ट्रपति हमेशा हमें अन्नदाताओं यानी किसानों, वैज्ञानिकों, पेशेवर लोगों और बहादुर जवानों के योगदान की याद दिलाते हैं। उपराष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रपति के भाषणों में बार-बार शिक्षा की बात होती है। उनके लिए शिक्षा सशक्तिकरण का माध्यम है। वह चाहते हैं कि हमारे विश्वविद्यालय नए भारत की दिशा में प्रगति का पावर हाउस बनें। वह वैज्ञानिक संस्थानों से आशावान रहते हैं। 
   उपराष्ट्रपति ने कहा कि एक वकील के नाते राष्ट्रपति वकालत पेशे की शक्तियों और चुनौतियों के प्रति सचेत हैं। राष्ट्रपति संवैधानिक तौर-तरीकों से सामाजिक परिवर्तन में विश्वास रखते हैं। राष्ट्रपति कोविन्द गरीब से गरीब लोगो को न्याय प्रदान करने में कानूनी पेशे की क्षमता पर बल देते हैं। 
   उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति अधिकारियों से उच्च स्तर के संकल्प की आशा रखते हैं, क्योंकि अधिकारी लोगों को लोकतांत्रिक संविधान के फल प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि श्री कोविन्द ने विभिन्न सेवाओं के सैकड़ों युवा अधिकारियों को सामाजिक न्याय प्रदान करने के लिए प्रेरित किया है। 
   उपराष्ट्रपति ने राष्ट्रपति के भाषणों के संकलन को प्रकाशित करने के लिए सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और उनकी टीम को बधाई दी।
   इस अवसर पर पर्यावरण, वन तथा जलवायु परिवर्तन और सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत, सूचना और प्रसारण सचिव अमित खरे तथा प्रकाशन विभाग की प्रधान महानिदेशक श्रीमती साधना राउत तथा अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित थे।

Tuesday, 3 September 2019

प्रौद्योगिकी का शिक्षण सहायता के रूप में उपयोग

   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज लोककल्याण मार्ग पर राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2018 प्राप्त करने वालों के साथ बातचीत की। प्रधान मंत्री ने पुरस्कार विजेताओं को उनके असाधारण काम के लिए बधाई दी। 

   उन्होंने उनसे हर छात्र के जीवन को बदलने के लिए कड़ी मेहनत जारी रखने का आग्रह किया। बातचीत के दौरान, प्रधान मंत्री ने प्रौद्योगिकी को शिक्षण सहायता के रूप में उपयोग करने के महत्व के बारे में बात की। 
   उन्होंने शिक्षकों से छात्रों के बीच दिमागी समस्याओं के समाधान के लिए प्रोत्साहित करने के लिए कहा। उन्होंने पुरस्कार विजेताओं से आग्रह किया कि वे हर बच्चे को एक मौका दें, न कि छात्रों को बांधें। 
   प्रधान मंत्री ने छात्रों के बीच रचनात्मकता को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि रचनात्मकता को प्रोत्साहित करना बच्चों के लिए आत्म-प्रेरणा का काम करेगा और उन्हें स्वयं से प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बनाएगा। उन्होंने कहा कि विभिन्न मुद्दों के बारे में छात्र के दृष्टिकोण को समझना महत्वपूर्ण है।
    उन्होंने शिक्षकों से कहा कि उनमें से प्रत्येक के अंदर छात्र को जीवित रखने और सीखने को बनाए रखने के लिए। प्रधान मंत्री के साथ बातचीत में, पुरस्कार विजेताओं ने स्कूलों में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए अपने परिवर्तनकारी कार्य को सुनाया। 
   उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि कैसे अटल टिंकरिंग लैब्स ने छात्रों को प्रौद्योगिकी का नवाचार और उपयोग करने में सक्षम बनाया है। इस अवसर पर केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री श्री रमेश पोखरियाल और मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री श्री संजय शामराव धोत्रे भी उपस्थित थे।

Monday, 2 September 2019

72 साल बाद भी 18 से 20 प्रतिशत लोग गरीबी रेखा से नीचे

    उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने राजनीतिक दलों को अस्थायी फायदे के लिए लोक-लुभावन और वोट को ध्यान में रखते हुए योजनाएं लाने की बजाए देश के आर्थिक विकास को गति देने के लिए लंबी अवधि की संरचनात्मक कार्यक्रमों के साथ आगे आने की सलाह दी। 

   उपराष्ट्रपति पद पर 2 साल पूरे होने की खुशी में दोस्तों और शुभचिंतकों द्वारा आंध्र प्रदेश के नेल्लोर में आयोजित मीट एंड ग्रीट कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति श्री नायडू ने कहा कि आजादी के 72 साल बाद भी 18 से 20 प्रतिशत लोग गरीबी रेखा से नीचे जीवन बसर कर रहे हैं और लगभग 20 फीसदी लोग अशिक्षित रह गये हैं।
   उपराष्ट्रपति ने इच्छा जताई कि राजनीतिक दल लोगों की मूलभूत सुविधाओं में सुधार पर ध्यान दें, गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवा और शैक्षणिक सुविधाएँ सुनिश्चित करें, लिंग भेद एवं समाज में भेदभाव और शहरी एवं ग्रामीण विभाजन को कम  करने की कोशिश करें। श्री नायडू ने राजनीतिक दलों को जनमत के प्रति धैर्यवान और सहनशील होने का सुझाव दिया। 
   उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को विरोधियों का सम्मान और खुले मन से संरचनात्मक कार्यक्रमों को स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिंसा का सहारा या अनुचित ढंग से किसी पर हमला करना लोकतंत्र के लिए हानिकारक है। 
   उपराष्ट्रपति ने संसदीय लोकतंत्र में भारत को अनुकरणीय देश बनाने के लिए विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका में सुधार की पहल करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सेवा डिलिवरी में सुधारलाने, न्यायपालिका के कामकाज में जारी देरी को कम करने और विधायिका एवं संसदीय कार्यप्रणाली के बिना किसी बाधा के पूर्ण होना सुनिश्चित करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अंततः समय पर लोगों को सेवाओं की डिलिवरी मायने रखती है।
    उपराष्ट्रपति ने विभिन्न स्तरों पर लोगों की सोच, रूख और व्यवहार में बदलाव पर बल देते हुए लोगों से स्वार्थ की भावना त्यागने और सकारात्मक एवं संरचनात्मक रूख अपनाने का आग्रह किया। विश्वभर में भारत के प्रति बढ़ते उत्साह और रूचि पर जोर देते हुए उपराष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि यदि लोग संरचनात्मक तरीके से काम करने लगें तो 2 अंकों की वृद्धि दर हासिल की जा सकती है।
    जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का जिक्र करते हुए उपराष्ट्रपति ने इसे राज्य का सामान्य पुनर्गठन बताया। अनुच्छेद 370 को संविधान का अस्थायी प्रावधान बताते हुए उन्होंने कहा कि यह राजनीतिक नहीं, एक राष्ट्रीय मुद्दा था। इस मौके पर केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी, आंध्र प्रदेश के सिंचाई मंत्री श्री पी अनिल कुमार यादव, सांसद प्रभाकर रेड्डी एवं दुर्गा प्रसाद, कई विधायक और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

Sunday, 1 September 2019

फिट इंडिया राष्ट्रीय आंदोलन बनना चाहिए

   उप राष्ट्रपति एम. वैंकेया नायडू ने कहा है कि पी.वी सिंधु राष्ट्र का गौरव हैं। उनके जैसे खिलाडी युवाओं के लिए अनुकरणीय उदाहरण हैं। 

   उप राष्ट्रपति बीडब्ल्यूएफ विश्व चैम्पियन पी.वी. सिंधु द्वारा अपने माता-पिता के साथ हैदराबाद में उप राष्ट्रपति निवास पर मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत कर रहे थे। सुश्री सिंधु इस प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय हैं। 
  उप राष्ट्रपति ने 24 वर्षीय बैडमिंटन स्टार की कड़ी मेहनत, समर्पण और प्रतिबद्धता की सराहना करते हुए कहा कि सिंधु सभी देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
   अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए सिंधु द्वारा विशुद्ध भोजन लेने, कड़ी अनुशासित प्रैक्टिस करने की प्रशंसा करते हुए उप राष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा किया गया फिट इंडिया का आहवान एक राष्ट्रीय आंदोलन बनना चाहिए। यह उपयुक्त, समय के अनुकूल और वांछित हैं।
   उप राष्ट्रपति ने कहा कि भारत को जनसंख्या संबंधी लाभ मिला हुआ हैं। उसकी 65 प्रतिशत जनसंख्या 35 वर्ष की उम्र से कम है। उन्होंने कहा कि देश को नई ऊंचाईयों तक ले जाने के लिए स्वस्थ, सक्रिय और उपयोगी युवा शक्ति का होना जरूरी है।
   उप राष्ट्रपति ने कहा फिट इंडिया जैसे प्रयास ऐसे समय में बेहद प्रासंगिक हैं जब आधुनिक जीवन शैली और खानपान की आदतों में बदलाव के कारण गैर संचारी रोग बढ़ रहे है। उन्होंने कहा कि शरीर और दिमाग की फिटनेस से व्यक्ति न केवल सतर्क और स्मार्ट रहता है बल्कि लक्ष्यों को हासिल करने के लिए उन्हें ताकत मिलती है और सामाजिक दृष्टि से वह उपयोगी बन जाता है। उन्होंने जोऱ देकर कहा कि एक संपन्न राष्ट्र बनने के लिए स्वस्थ राष्ट्र बनना एक आवश्यक पूर्व शर्त है।

आरिफ मोहम्‍मद खान केरल के राज्‍यपाल

   राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद ने निम्‍न नियुक्तियां/बदलाव किए हैं। आरिफ मोहम्‍मद खान को केरल का राज्‍यपाल बनाया गया है। 
 
   हिमाचल प्रदेश के राज्‍यपाल कलराज मिश्र का स्‍थानांतरण किया गया है। उन्‍हें राजस्‍थान का राज्‍यपाल नियुक्‍त किया गया है। इसी तरह भगत सिंह कोश्‍यारी को महाराष्‍ट्र का राज्‍यपाल नियुक्‍त किया गया है। बंडारू दत्तात्रेय को हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल बनाया गया है।
   इसी तरह डॉ तमिलिसाई सुंदरराजन को तेलंगाना का राज्‍यपाल नियुक्‍त किया गया है। उपरोक्‍त नियुक्तियां कार्यप्रभार ग्रहण करने की तारीख से प्रभावी मानी जाएंगी।