Wednesday, 28 August 2019

देश में सजा का अनुपात दयनीय, फॉरेंसिक जांच की वकालत

   केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो के 49वें स्थापना दिवस पर कहा कि सीआरपीसी तथा आईपीसी में बदलाव वक्त की जरूरत है जिसपर काम किया जा रहा है।

   उन्होने कहा कि राष्ट्रीय स्तर की नेशनल पुलिस यूनिवर्सिटी तथा फॉरेंसिंक यूनिवर्सिटी बनेगी जिसका उद्देश्य पुलिस तथा सशस्त्र बलों में जाने वाले विद्यार्थियों को तैयार करना होगा। अमित शाह ने कहा कि देश में केसों में सजा कराने का अनुपात दयनीय है जिसे फॉरेंसिक साइंस की वैज्ञानिक रिपोर्ट की मदद से सुधारा जा सकता है।
   उन्होने कहा कि इसके लिए मानव संसाधन की व्यवस्था भी करनी होगी। श्री शाह ने कहा कि जेल विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षण की आवश्यकता है जिससे मुजरिमों को सजा के बाद बाहर आने पर अच्छा नागरिक बनाया जा सके। अमित शाह ने कहा कि पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो राज्यों की पुलिस व्यवस्था सुदृढ़ करने में प्रभावशाली भूमिका निभा सकता है।
   उन्होने कहा कि बीपीआरडी को राज्य की पुलिस आधुनिकीकरण का सशक्त प्लान बनाना चाहिए। अमित शाह का कहना था कि जब देश में अंग्रेजों के समय में पुलिस व्यवस्था की स्थापना की गयी थी तब राज्य का रक्षण, खजाने का रक्षण क्रांतिकारियों का दमन आदि की सोच थी। यह उनकी सोच को दर्शाता था क्योंकि उन्हें अपना राज्य बरकरार रखना था।
   श्री शाह ने कहा कि आजादी के बाद सरदार पटेल ने पहली बार पुलिस को लोगों की सेवा तथा मानव अधिकारों की रक्षा का दायित्व सौंपा और मुझे संतुष्टि है कि अभी तक यह कार्य बखूबी किया गया है। उन्होने पुलिस व्यवस्था के साथ पुलिसिंग व्यवस्था में सुधार को समय की आवश्यकता बताया। श्री शाह ने कहा कि आने वाले समय में चुनौतियाँ बदल रही हैं जिनका सामना करने के लिए लिए पुलिस के आधुनिकीकरण पर जोर देना आवश्यक है।
   उन्होने आगे बताया कि आंतरिक सुरक्षा में 34800 से ज्यादा सुरक्षाकर्मियों ने बलिदान दिया है तब जाकर यह साख बनी है जिसे बरकरार रखना होगाप्र् कार्यक्रम में गृह राज्य मंत्री किशन रेड्डी ने कहा कि आज आतंकवाद, नक्सलवाद अपराध, कानून व्यवस्था आदि अनेक चुनौतियां हैं इसलिए ऐसी तकनीक विकसित होनी चाहिए कि अपराध होने से पहले ही रोका जा सके।

शताब्दी जैसी रेलगाड़ियों में किराया छूट योजना

   शताब्दी, गतिमान, तेजस, डबल डेकर, इंटरसिटी जैसी रेलगाड़ियों के एसी चेयर कार और एग्जीक्यूटिव वर्ग में छूट किराया योजना अगले महीने के अंत से लागू होगी।

  रेल किराये में छूट देने का अधिकार क्षेत्रीय रेलवे के प्रधान मुख्य वाणिज्यिक प्रबंधकों को दी गई है। यह छूट सिर्फ उन्हीं रेलगाड़ियों में दी जाएंगी जिनमें पिछले साल मासिक 50 फीसदी से कम सीटें ही आरक्षित हो पाई थी।
  रेल टिकटों में यह छूट मूल किराए पर 25 फीसदी तक मिल सकती है। आरक्षण शुल्क, सुपरफास्ट शुल्क, जीएसटी इत्यादि अलग से लागू होंगे। यह छूट यात्रा के पहले चरण या अंतिम चरण के लिए मान्य होगी। यह छूट यात्रा के बीच के खंड या पूरी यात्रा के लिए भी प्राप्त की जा सकती है।
   छूट का लाभ सप्ताह के दिन, सप्ताहांत, महीनावार, सीजनल, वर्ष के एक हिस्से के लिए या पूरे वर्ष के लिए प्राप्त किया जा सकता है। रेलवे बोर्ड के वाणिज्य निदेशालय ने सभी मंडल कार्यालयों को सभी रेलगाड़ियों में चेयर कार और एग्जीक्यूटिव वर्ग के कुल आरक्षित सीटों की 30 सितंबर, 2019 तक समीक्षा करने और फिर उचित कार्रवाई का निर्देश दिया है।
   वर्तमान में जारी छूट योजना निम्न रेलगाड़ियों में पहले की तरह लागू रहेंगी। बेंगलुरु-मैसुरु-बेंगलुरु रेल खंड पर 12007/12008 चेन्नई मध्य मैसुरु शताब्दी एक्सप्रेस, अहमदाबाद-वडोदरा रेल खंड पर 12010 अहमदाबाद-मुंबई मध्य शताब्दी ट्रेन, जलपाईगुड़ी-मालदा शहर रेल खंड पर 12042 नई जलपाइगुड़ी-होरा शताब्दी एक्सप्रेस।