Sunday, 24 September 2017

कौशल विकास नए भारत के निर्माण का मजबूत स्तम्भ

      पुड्डुचेरी। केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने यहाँ कहा कि अल्पसंख्यक मंत्रालय देश के सभी हिस्सों में हुनर हब बनाने की दिशा में काम कर रहा है, जहाँ दस्तकारों, शिल्पकारों को एक ही परिसर में अपनी सामग्री के प्रदर्शन-बिक्री का मौका मिलेगा साथ ही वर्तमान मार्किट के अनुसार उन्हें अपने सामान बनाने का प्रशिक्षण भी दिया जायेगा।

  नकवी और पुड्डुचेरी के मुख्यमंत्री वी. नारायणसामी ने यहाँ हुनर के उस्तादों को मौका-मार्किट मुहैय्या कराने के लिए केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्रालय द्वारा लगाए जा रहे हुनर हाट का उद्घाटन किया। नकवी ने कहा कि हुनर को हौसला और कौशल विकास नए भारत के निर्माण का मजबूत स्तम्भ होगा। 
     30 सितम्बर 2017 तक चलने वाला हुनर हाट, कला-संस्कृति के प्रमुख केंद्र पुड्डुचेरी के क्राफ्ट बाजार, गांधी थीडल बीच, गोर्बट एवन्यू में आयोजित किया जा रहा है। इस अवसर पर पुड्डुचेरी सांसद आर. राधाकृष्णन, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास एवं वित्त निगम के अध्यक्ष शहबाज अली एवं अल्पसंख्यक मंत्रालय और पुड्डुचेरी सरकार के विभिन्न अधिकारी भी उपस्थित रहे।
        नकवी ने कहा कि देश भर के अल्पसंख्यक तबकों के दस्तकारों, शिल्पकारों के हस्त निर्मित सामानों की बिक्री के लिए अल्पसंख्यक मंत्रालय ने ई-पोर्टल बनाया है, जहाँ कारीगरों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय मार्किट मिलेगा। इस वर्ष के अंत तक दस्तकारों, शिल्पकारों का डाटा बैंक तैयार हो जायेगा, अब तक हजारों हुनर के उस्तादों का पंजीकरण किया जा चुका है।
       नकवी ने कहा कि अल्पसंख्यक मंत्रालय द्वारा अभी तक आयोजित हुनर हाट बहुत सफल एवं दस्तकारों, शिल्पकारों और परंपरागत कारीगरों के लिए उत्साहवर्धक रहे हैं। हुनर हाट के माध्यम से बड़ी संख्या में परंपरागत कारीगरों को रोजगार और रोजगार के अवसर उपलब्ध हुए हैं। इस हुनर हाट में 16 राज्यों से दस्तकार, शिल्पकार, कारीगर भाग ले रहे हैं।
        इन दस्तकारों-शिल्पकारों दवारा तैयार अनेक तरह के पारंपरिक हैंडी क्राफ्टस, हैंडलूम एवं दुर्लभ हस्त निर्मित वस्तुएं प्रदर्शन एवं बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। हैदराबादी मोती, रोट आयरन, लकड़ी पर नक्काशी, हस्त निर्मित गहने, कांथा एंमब्रोइड्ररी बैग, हैंडलूम चादर, हाथ की कशीदाकारी, हस्त निर्मित पेंटिंगस, संगमरमर निर्मित वस्तुएं, लकड़ी एवं चन्दन की कलाकृतियां, पारम्परिक प्रिंटेड कपड़े, शीशे का सामान, माहेश्वरी साड़ी इत्यादि प्रदर्शन एवं बिक्री के लिए उपलब्ध हैं।
       इसके अलावा इस हुनर हाट में पारम्परिक स्टाल तैयार किये गए हैं और यहाँ आने वाले लोग देश के अलग-अलग हिस्सों के विभिन्न प्रकार के लजीज़ व्यंजनों का भी आनंद ले सकेंगे जिनमे शामिल हैं- राजस्थानी व्यंजन, मराठी व्यजनं, गुजराती थाली, पंजाबी थाली, मालाबार फूड, मुगलई व्यंजन, काकोरी कबाब, आंध्र प्रदेश के व्यंजन, हलवा, घेवर, बंगाली मिठाईयां, चोखा-बाटी, केरल एवं विभिन्न राज्यों के परंपरागत आचार, मुरब्बे, चटनी इत्यादि।
     इस हुनर हाट में उत्तर प्रदेश, दिल्ली, गुजरात, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, जम्मू और कश्मीर, झारखण्ड, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, मणिपुर, नागालैंड, ओडिशा, पुड्डुचेरी एवं उत्तराखंड आदि राज्यों से हुनर के उस्ताद भाग ले रहे हैं। अल्पसंख्यक मंत्रालय द्वारा इससे पूर्व भी विभिन्न स्थानों पर हुनर हाट का आयोजन किया गया है। हाल ही में हुनर हाट का आयोजन नई दिल्ली के क्नॉट प्लेस के बाबा खड़क सिंह मार्ग पर किया गया था। 
     इस हुनर हाट में 26 लाख से भी ज्यादा लोग आए जिनमे देश ही नहीं बल्कि विदेश के लोग भी शामिल थे। लोगों ने दस्तकारों-शिल्पकारों के सामान की बड़े पैमाने पर खरीद ही नहीं की बल्कि इन्हें बड़ी संख्या में देश-विदेश से आर्डर मिले। जिससे दस्तकारों, शिल्पकारों और परंपरागत कारीगरों को उनके हुनर की विरासत को आगे बढ़ने में प्रोत्साहन मिला।
        नकवी ने कहा कि आने वाले समय में हुनर हाट का आयोजन मुंबई, नई दिल्ली, कोलकाता, हैदराबाद, बंगलुरु, लखनऊ, इलाहाबाद, रांची, गुवाहाटी, जयपुर, भोपाल आदि स्थानों पर भी किया जायेगा जिससे कि देश के हर कोने के दस्तकारों, शिल्पकारों को प्रोत्साहित किया जा सके।

प्रधानमंत्री ने दीनदयाल हस्‍तकला संकुल राष्‍ट्र को समर्पित किया

     वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने वाराणसी में दीनदयाल हस्‍तकला संकुल राष्‍ट्र को समर्पित किया, जो हस्‍तशिल्‍प का एक व्‍यापार सुविधा केन्‍द्र है। 

     प्रधानमंत्री ने इस केंद्र की आधारशिला नवम्‍बर, 2014 में रखी थी। प्रधानमंत्री ने इस केंद्र का दौरा किया और इसे राष्‍ट्र को समर्पित करने के लिए मंच पर पहुंचने से पहले उन्‍हें वहां विकसित सुविधाओं के बारे में विस्‍तृत जानकारी दी गई। उन्‍होंने व्‍यापार सुविधा केंद्र को लंबे समय तक वाराणसी की सबसे बड़ी परियोजनाओं में से एक बताया। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि इस केंद्र से कारीगरों और बुनकरों को पूरी दुनिया के समक्ष अपने कौशल को पेश करने में मदद मिलेगी और इससे उनका भविष्‍य उज्‍ज्‍वल होगा। 
      उन्‍होंने लोगों से कहा कि वे सभी पर्यटकों को इस केंद्र में आने के लिए प्रोत्‍साहित करें। उन्‍होंने कहा कि इससे हस्‍तशिल्‍प की मांग और बढ़ेगी तथा इसके साथ ही वाराणसी में पर्यटन की संभावनाएं भी बढ़ जाएंगी, जिससे इस शहर की अर्थव्‍यवस्‍था को निश्चित रूप से नई गति मिलेगी। 
    प्रधानमंत्री ने कहा कि सभी समस्‍याओं का हल विकास ही है। उन्‍होंने कहा कि सरकार ने गरीबों और आने वाली पीढि़यों के जीवन में सकारात्‍मक बदलाव लाने पर अपना ध्‍यान केन्द्रित कर रखा है। इस संदर्भ में उन्‍होंने उत्‍कर्ष बैंक के प्रयासों की सराहना की।
   इस अवसर पर केन्‍द्रीय कपड़ा मंत्री श्रीमती स्‍मृति जुबिन इरानी ने कहा कि कपड़ा मंत्रालय सौभाग्‍यशाली है कि नवरात्र के शुभ अवसर पर प्रधानमंत्री द्वारा 300 करोड़ रुपये की लागत वाला दीनदयाल हस्‍तकला संकुल राष्‍ट्र को समर्पित किया गया है। मंत्री ने स्‍मरण करते हुए कहा कि इस संकुल की आधारशिला प्रधानमंत्री द्वारा 7 नवम्‍बर, 2014 को रखी गई थी और प्रथम चरण का उद्घाटन प्रधानमंत्री द्वारा 22 दिसंबर, 2016 को किया गया था। 
       उन्‍होंने कहा कि राष्‍ट्र को यह संकुल आज समर्पित किया जाना प्रधानमंत्री के नेतृत्‍व को दर्शाता है। उन्‍होंने कहा कि इससे बुनकरों एवं कारीगरों की आमदनी बढ़ेगी और उनके उत्‍पादों को विश्‍वभर में बेहतर ढंग से प्रदर्शित करने में मदद मिलेगी। कपड़ा मंत्री ने कहा कि सरकार चाहती है कि बुनकरों एवं कारीगरों के परिवारों का प्रत्‍येक सदस्‍य अच्‍छी शिक्षा हासिल करने के अपने सपने को साकार कर सके। 
   उन्‍होंने बताया कि इसके लिए कपड़ा मंत्रालय ने इंदिरा गांधी राष्‍ट्रीय मुक्‍त विश्‍वविद्यालय (इग्‍नू) और राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआईओएस) के साथ सहमति पत्रों (एमओयू) पर हस्‍ताक्षर किेये हैं, जिनके तहत बुनकरों और कारीगरों के बच्‍चे स्‍कूली शिक्षा के साथ-साथ विश्‍वविद्यालय की शिक्षा भी प्राप्‍त कर सकेंगे और 75 प्रतिशत फीस भारत सरकार वहन करेगी।
     मुद्रा योजना की सफलता का उल्‍लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि योजना के तहत लाभार्थियों को 50,000 रुपये से लेकर 10 लाख रुपये तक के जमानत मुक्‍त ऋण दिये जाते हैं। उन्‍होंने कहा कि मुद्रा योजना से 33,000 से भी अधिक बुनकर लाभान्वित हुए हैं, जिन्‍हें 170 करोड़ रुपये से भी ज्‍यादा के ऋण प्राप्‍त हुए हैं। उन्‍होंने कहा कि मुद्रा ऋण प्राप्‍त करने वाले बुनकर सिर्फ दो माह के भीतर अपनी आमदनी में 50 प्रतिशत से भी ज्‍यादा की वृद्धि करने में सफल रहे हैं।
       मंत्री ने कहा कि सरकार देश भर में कारीगरों से संपर्क साधेगी, ताकि मुद्रा योजना के लाभ के साथ-साथ अन्‍य सुविधाएं भी उन तक पहुंच सकें। उत्‍तर प्रदेश के राज्‍यपाल राम नाईक, उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ और कपड़ा राज्‍य मंत्री अजय टम्‍टा भी इस अवसर पर उपस्थित थे। 
     हस्‍तकला संकुल का संक्षिप्‍त विवरण, वित्‍त मंत्री ने 2014-15 के बजट में वाराणसी के हथकरघों, हस्‍तशिल्‍प और रेशम उत्‍पादों को विकसित करने तथा बढ़ावा देने और वाराणसी के बुनकरों, कारीगरों और उद्यमियों को आवश्‍यक सहायता मुहैया कराने के लिए एक व्‍यापार सुविधा केंद्र तथ शिल्‍प संग्रहालय की स्‍थापना करने की घोषणा की थी, ताकि घरेलू एवं विदेशी बाजारों में उनकी विपणन गतिविधियों को सुदृढ़ किया जा सके एवं वाराणसी में हथकरघों की समृद्ध परम्‍परा को आगे बढ़ाया जा सके। 
      व्‍यापार सुविधा केंद्र वाराणसी के बुनकरों/कारीगरों को वैश्विक अर्थव्‍यवस्‍था से एकीकृत करने की दिशा में एक अहम कदम है। व्‍यापार प्रक्रियाओं, औपचारिकताओं और कानूनी एवं नियामकीय आवश्‍यकताओं के अनुपालन के लिए आवश्‍यक सहायता मुहैया कराने हेतु व्‍यापार सुविधा एवं परामर्श सुविधाएं मुहैया कराना आवश्‍यक है। उपरोक्‍त संकुल से बुनकरों/कारीगरों/निर्यातकों को घरेलू एवं अंतर्राष्‍ट्रीय दोनों ही बाजारों में हथकरघा/हस्‍तशिल्‍प को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। 
     संकुल स्थित शिल्‍प संग्रहालय से वाराणसी के पारम्‍परिक हथकरघा/हस्‍तशिल्‍प उत्‍पादों का संरक्षण संभव होगा और इसके साथ ही वाराणसी के हथकरघा एवं हस्‍तशिल्‍प उत्‍पादों को प्रदर्शित करना भी संभव होगा, जो नई पीढ़ी, विद्वानों, डिजाइनरों और पर्यटकों के लिए प्रेरणा होगी। यह परियोजना 7.93 एकड़ क्षेत्र में फैली हुई है और इसका निर्मित क्षेत्र 43,450 वर्गमीटर है। इस परिसर पर लगभग 300 करोड़ रुपये की लागत आई है।

वनों व जंगली जानवरों की सुरक्षा के लिए दीर्घकालिक रणनीति

     नई दिल्ली। वन्‍य जीवन के खिलाफ होने वाले अपराधों के बारे में जागरूकता और संवेदनशीलता फैलाने की जरूरत पर जोर देते हुए केन्‍द्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि देश के कानून का अनुपालन किया जाना चाहिए, क्‍योंकि अनेक प्रजातियां विलुप्‍त होने की कगार पर हैं।

   सशस्‍त्र सीमा बल (एसएसबी) द्वारा आज विज्ञान भवन में वन्‍य जीवन अपराधों से निपटने में सुरक्षा बलों की भूमिका विषय पर आयोजित इस सेमिनार के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए डॉ. हर्षवर्धन ने मनुष्‍यों को प्रकृति के साथ सद्भाव से रहने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि आज वन्‍य जीवों की अधिकांश प्रजातियां लुप्‍त प्राय: होने वाली सूची में शामिल हो गई हैं। डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि सशस्त्र सीमा बाल (एसएसबी) का काम बड़ा कठिन है क्योंकि यह पड़ोसी देशों के साथ खुली सीमाओं की सुरक्षा करता है, जहां बल को अकेले ही देश के कानून को लागू करने के लिए इस्‍तेमाल नहीं किया जा सकता है। 
      उन्‍होंने यह भी बताया कि भारत की स्‍वतंत्रता के बाद विकास गतिविधियों में काफी बढ़ोतरी हुई है और इस प्रक्रिया में लोगों ने कृषि तथा औद्योगिकी उपयोग के लिए वनों की कटाई करके जंगली जानवरों के प्राकृतिक आवास नष्‍ट कर दिये हैं। मानव गलतियों के चलते पर्यावरण और जंगली जानवरों को भारी नुकसान पहुंचा है। कुछ पेड़-पौधे और जंगली जानवर या तो विलुप्‍त हो गए हैं या विलुप्‍त होने की कगार पर हैं। जो कुछ बचा है अगर उसकी सुरक्षा नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में हमें जंगल और जंगली जानवर केवल किताबों में ही देखने को मिलेंगे। 
       डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि वह अपनी सहायक एजेंसियों, एनजीओ और विशेष गणमान्‍य व्‍यक्तियों के साथ मिलकर इस सेमिनार का आयोजन करने में एसएसबी की पहल की सराहना करते हैं। उन्‍होंने यह भी कहा कि ऐसे सेमिनार अंतर-विभागीय सेमिनार को बढ़ावा देते हैं और इस प्रक्रिया में वनों तथा जंगली जानवरों के खिलाफ होने वाले अपराधों की पड़ताल की जा सकती है।
      उन्‍होंने उपस्थित जनों को आश्‍वासन दिया कि सेमिनार के दौरान की गई सिफारिशों की पर्यावरण और वन मंत्रालय द्वारा जांच की जाएगी और इन्‍हें लागू करने के लिए कार्य बिन्‍दु बनाए जाएंगे। अपने स्‍वागत भाषण में एसएसबी की महानिदेशक श्रीमती अर्चना रामासुंदरम ने सभी गणमान्‍य व्‍यक्तियों, सहायक एजेंसियों और एनजीओ के प्रतिनिधियों से अपील की कि वनों और जंगली जानवरों की सुरक्षा के लिए दीर्घकालिक रणनीति तैयार करने के लिए अपने विचार व्‍यक्‍त करें।
        उन्‍होंने कहा कि सशस्‍त्र सीमा बल की कुल 629 सीमा चौकियां और 229 बीओपी वर्गीकृत वन्‍य क्षेत्रों में स्थित हैं। इस दिशा में सशस्‍त्र सीमा बल के प्रयासों के बारे में जानकारी देते हुए उन्‍होंने कहा कि इस बल ने 60 मामलों में न केवल 62 अपराधियों को गिरफ्तार किया है, बल्कि टोके-छिपकली और सेंड-बो सांपों का जीवन बचाया है।
      उन्‍होंने बताया कि इस वर्ष केवल आठ महीनों में 85 मामले दर्ज किये गये हैं और 95 तस्‍करों को गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा एसएसबी ने गुप्‍त प्राय: प्रजातियों, हिरणों, कछुओं, खरगोश, कबूतरों के शरीर के अंगों और हाथी दांतों को जब्‍त किया गया है। 
       इस सेमिनार का उद्देश्‍य सीएपीएफ और अन्‍य हितधारकों को वन्‍य जीवन के बढ़ते व्‍यापार के प्रति संवेदनशील बनाना और इस बारे में अंतर एजेंसी सहयोग की आवश्‍यकता पर जोर देना है। वन्‍य जीवन अपराध नियंत्रण ब्‍यूरो की एडीजी श्रीमती तिलोत्‍मा वर्मा तथा अन्‍य गणमान्‍य व्‍यक्तियों ने भी इस सेमिनार में भाग लिया।

पंडित दीनदयाल उपाध्‍याय विज्ञान ग्राम संकुल परियोजना का शुभारंभ

     उत्‍तराखंड। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग देश में ग्रामीण क्षेत्रों के उन्‍नयन और आर्थिक विकास के लिए अनेक पहलों पर अमल कर रहा है। कई उपयुक्‍त प्रौद्योगिकियां विकसित एवं प्रदर्शित की गई हैं और देश में अनेक संस्‍थानों पर प्रभावकारी ढंग से उपयोग में लाई गई हैं। 

      विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्‍वी विज्ञान और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने आज पंडित दीनदयाल उपाध्याय विज्ञान ग्राम संकुल परियोजना’ का शुभारंभ किया, जिसके तहत उत्‍तराखंड में क्‍लस्‍टर अवधारणा के जरिये सतत विकास के लिए उपयुक्‍त विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संबंधी कदमों पर अमल करने का प्रयास किया जाएगा। मंत्री ने एक संवाददाता सम्‍मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि यह परियोजना पंडित दीनदयाल उपाध्‍याय की सीख एवं आदर्शों से प्रेरित है, जिनकी जन्‍म शताब्‍दी इस साल मनाई जा रही है।
       विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) ने उत्‍तराखंड में गांवों के कुछ क्‍लस्‍टरों को अपनाने और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के साधनों के जरिये समयबद्ध ढंग से उन्‍हें स्‍वयं-टिकाऊ क्‍लस्‍टरों में तब्‍दील करने की परिकल्‍पना की है। इस अवधारणा के तहत मुख्‍य बात यह है कि स्‍थानीय संसाधनों के साथ-साथ स्‍थानीय तौर पर उपलब्‍ध कौशल का उपयोग किया जाएगा और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का इस्‍तेमाल करते हुए इन क्‍लस्‍टरों को कुछ इस तरह से परिवर्तित किया जाएगा, जिससे कि वहां की स्‍थानीय उपज और सेवाओं में व्‍यापक मूल्‍यवर्धन संभव हो सके। 
     इससे ग्रामीण आबादी को स्‍थानीय तौर पर ही पर्याप्‍त कमाई करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, स्‍थानीय समुदायों को रोजगारों एवं आजीविका की तलाश में अपने मूल निवास स्‍थानों को छोड़कर कहीं और जाकर बस जाने के लिए विवश नहीं होना पड़ेगा। उन्‍होंने कहा कि जब यह अवधारणा कुछ चुनिंदा क्‍लस्‍टरों में सही साबित हो जाएगी, तो इसकी पुनरावृत्ति देशभर में अनगिनत ग्रामीण क्‍लस्‍टरों में की जा सकती है। 
     डीएसटी और उत्‍तराखंड राज्‍य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूसीओएसटी), ग्रामोदय नेटवर्क, सुरभि फाउंडेशन और उत्‍तराखंड उत्‍थान परिषद के अधिकारियों तथा अन्‍य विशेषज्ञों के बीच अनेक दौर की वार्ताओं के बाद गैंदिखाता, बजीरा, भिगुन (गढ़वाल) और कौसानी (कुमाऊं) में चार क्‍लस्‍टरों का चयन किया गया है, ताकि वहां आवश्‍यक उपायों पर अमल किया जा सकें। 
   इसके अलावा स्‍थानीय लोगों के साथ भी गहन चर्चाएं की गईं तथा विभिन्‍न संबंधित क्षेत्रों का दौरा किया गया, ताकि इन क्‍लस्‍टरों में मौजूद चुनौतियों और अवसरों की पहचान की जा सके। इस परियोजना से पॉयलट चरण के दौरान उत्‍तराखंड के 60 गांवों के चार चिन्हित क्‍लस्‍टरों में करीब एक लाख लोग प्रत्‍यक्ष अथवा अप्रत्‍यक्ष रूप से लाभान्वित होंगे। ये क्‍लस्‍टर विभिन्‍न ऊंचाइयों (3000 मीटर तक) पर अवस्थित हैं। विभाग ने इस परियोजना के लिए अगले तीन वर्षों की अवधि के दौरान 6.3 करोड़ रुपये की सहायता देने की प्रतिबद्धता व्‍यक्‍त की है।