Thursday, 22 December 2016

67.54 लाख लोगों ने आयकर विभाग की आंखों में झोंकी धूल


आयकर रिटर्न न भरने वाले लोगों की पहचान के लिए नॉन-फाइलर मॉनीटरिंग सिस्‍टम शुरू किया गया था। केन्‍द्रीय प्रत्‍यक्ष कर बोर्ड के प्रणाली निदेशालय द्वारा कराये गये डेटा विश्‍लेषण से आयकर रिटर्न न भरने वाले लोगों की पहचान की गई है।  
 
आयकर विभाग ने डेटा मिलान के तहत आयकर रिटर्न न भरने वाले ऐसे 67.54 लाख और लोगों की पहचान की गई है, जिन्‍होंने वित्त वर्ष 2014-15 के दौरान बड़ी राशि वाले लेन-देन तो किये हैं, लेकिन कर निर्धारण आयकर रिटर्न नहीं भरे हैं। यह सूचना केवल विशिष्‍ट पैन (स्‍थायी खाता संख्‍या) धारकों को ही नजर आयेगी, जब वे ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉग-इन करेंगे। पैन धारक इलेक्‍ट्रॉनिक ढंग से अपना जवाब पेश कर सकेंगे और इसके साथ ही वे अपने द्वारा पेश किये गये जवाब की एक प्रति अपने पास रख सकेंगे, जिससे कि इसका रिकॉर्ड उनके पास मौजूद रहे। चूंकि सरकार ने समस्‍त करदाताओं से अपनी वास्‍तविक आय का खुलासा करने और तदनुसार टैक्‍स अदा करने का आग्रह किया है, अत: इसके मद्देनजर आयकर विभाग आयकर रिटर्न न भरने वालों का पता लगाने का क्रम काफी तेजी से तब तक जारी रखेगा, जब‍ तक कि आयकर रिटर्न न भरने वाले समस्‍त संभावित लोगों को इसके दायरे में न ला दिया जायेगा।

देश में 27,81,883 शौचालयों का निर्माण


            शहरी क्षेत्रों में व्यक्तिगत और सार्वजनिक और सामुदायिक शौचालयों के निर्माण की रफ्तार बढ़ने से स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) एक नए स्तर पर पहुंच गया है। 

शहरी विकास मंत्री एम. वेंकैया नायडू ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के पांच शहरों और मध्य प्रदेश के भोपाल और इंदौर में उपयोग के लिए सार्वजनिक शौचालय का पता लगाने के लिए 'गूगल मैप्स शौचालय लोकेटर ऐप' का शुभारंभ किया। नायडू ने कहा कि अब यह सुविधा दिल्ली, गुरूग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और नोएडा तथा मध्य प्रदेश के दो शहरों में उपलब्ध है जिससे खुले में पेशाब और खुले में शौच की समस्या का समाधान करने में मदद मिलेगी।

          'स्वच्छ सार्वजनिक शौचालय' कीवर्ड का उपयोग करके उपयोगकर्ता एनसीआर के पांच शहरों में बस और रेलवे स्टेशनों, मॉल, अस्पतालों, ईंधन स्टेशन, मेट्रो स्टेशन के आसपास स्थित 5162 शौचालयों तथा इंदौर 411 और भोपाल में 703 शौचालयों तथा सार्वजनिक तथा सामुदायिक शौचालय परिसरों का पता लगा सकते हैं। एप यह भी जानकारी उपलब्ध कराएगा कि शौचालय मुफ्त है या इसके लिए भुगतान करना होगा। इस सुविधा का आने वाले समय में अन्य शहरों में भी विस्तार किया जाएगा, शहरी विकास मंत्रालय ने इस सेवा के लिए गूगल के साथ भागीदारी की है।        

             वेंकैया नायडू ने टॉलस्टाय मार्ग मेट्रो स्टेशन के पास, कॉपरनिकस मार्ग पर, हरियाणा भवन के सामने, शेरशाह रोड पर, राष्ट्रीय कला गैलरी में पीपीपी मॉडल के तहत निःशुल्क स्मार्ट शौचालयों का भी शुभारंभ किया है। नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) ने गेट नम्बर 2, पालिका बाजार, नई दिल्ली में 'रिवर्स वेंडर मशीन' की शुरुआत की है। जब इस मशीनों में एक प्लास्टिक की बोतल डाली जाती है तो यह एक रुपये तक के क्रेडिट की रसीद देती है। एनडीएमसी ऐसी 20 मशीनें लगा रही है। जिससे प्लास्टिक की बोतलों का कचरा रोकने में मदद मिलेगी। 502 शहरों और कस्बों ने खुले में शौच से मुक्त घोषित किया। 

            अगले साल मार्च तक 237 अन्य शहर खुले में शौच से मुक्त हो जायेंगे। 66 लाख व्यक्तिगत घरेलू शौचालयों के निर्माण के लक्ष्य की तुलना 27,81,883 शौचालयों का निर्माण हो चुका है और 21,43,222 का निर्माण कार्य प्रगति पर है। पांच लाख से अधिक सामुदायिक और सार्वजनिक शौचालय सीटों का निर्माण होना है, जबकि 1.07 लाख सीटों का पहले ही निर्माण हो चुका है तथा 1.30 लाख अन्य शौचालय सीटें निर्माणाधीन हैं। आंध्र प्रदेश, सिक्किम को खुले में शौच से मुक्त घोषित किया है। इसके अलावा केरल, महाराष्ट्र, तेलंगाना, झारखंड, कर्नाटक तथा केंद्र शासित क्षेत्रों में चंडीगढ़ और पुडुचेरी शौचालयों के निर्माण में शीर्ष पर हैं। देश में वर्तमान में अपशिष्टों से कंपोस्ट खाद बनाने के 95 संयंत्र काम कर रहे हैं जिनसे प्रतिवर्ष 2.88 लाख टन कंपोस्ट खाद का निर्माण हो रहा है। ऐसे कर्नाटक में 17, गुजरात में 16, महाराष्ट्र में 15, तमिलनाडु में 9 और उत्तर प्रदेश में 7 संयंत्र काम कर रहे हैं। दिल्ली में प्रतिमाह 3,000 मीट्रिक टन कंपोस्ट खाद का निर्माण हो रहा है।

             अपशिष्ट से कंपोस्ट खाद बनाने के 313 अन्य संयंत्रों का पुनरुद्धार और उन्नयन किया जा रहा है इनकी कुल उत्पादन क्षमता प्रति वर्ष 22 लाख टन होगी। अपशिष्ट ऊर्जा बनाने वाले 7 संयंत्र देश में परिचालित हैं। इनमें से दिल्ली में 3, महाराष्ट्र में 2 और मध्य प्रदेश और तेलंगाना में एक-एक संयंत्र कार्यरत हैं जो नगरपालिका के ठोस अपशिष्ट से 88.40 मेगावाट की बिजली का उत्पादन कर रहे हैं।

दलहन उत्पाद बढ़ाने के लिए 'बोनस" की रणनीति

         केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा है कि देश में पहली बार किसानों के लिए समर्थन मूल्यों पर दलहन फसलों की बिक्री सुनिश्चित करवाने की व्यवस्था की गई है। 

इस व्यवस्था के तहत जहां भी दलहन फसलों का बाजार भाव समर्थन मूल्य से कम होगा, वहाँ भारत सरकार की संस्थाएं किसानों से समर्थन मूल्य पर खरीद सुनिश्चित करेंगीं। इसके अतिरिक्त दालों का 20 लाख टन बफर स्टाक बनाए रखने का निर्णय भी लिया गया है, ताकि लोगों को दाल के मंहगे बाजार भाव से छुटकारा दिलाया जा सके। राधा मोहन सिंह ने आगरा में आयोजित अंतरराष्ट्रीय दलहन वर्ष 2016 के समापन समारोह में कही। विश्व में खाद्य एवं पोषण सुरक्षा की प्राप्ति एवं दालों के पोषण संबंधी लाभों के बारे में जन मानस में जागरूकता बढाने के उददेश्य से संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2016 को अंतर्राष्ट्रीय दलहन वर्ष के रूप में मनाने की घोषणा की थी।

          केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि देश के किसानों को दलहन उत्पादन के लिए बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2016-17 में दालों के न्यूनतम समर्थक मूल्य में सरकार ने उल्लेखनीय वृद्धि की है। सरकार ने वर्ष 2016-17 में अरहर के लिए 4625 रूपए तथा उरद के लिए 4575 रूपए व मूंग के लिए 4500 रूपए प्रति कुन्तल का न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा की है, जो अब तक का अधिकतम समर्थन मूल्य है। न्यूनतम समर्थन मूल्य के साथ-साथ दलहन उत्पादन के लिए 425 रूपए प्रति कुन्टल की दर से सरकार द्वारा अतिरिक्त बोनस भी तय किया गया है। सिंह ने कहा कि देश में दलहनी फसलों के उत्पादन और उत्पादकता में बढ़ोत्तरी के लिए कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने अंतर्राष्ट्रीय दलहन वर्ष 2016 में कई कदम उठाए। इसके तहत  कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के दो विभाग- भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और कृषि सहकारिता और किसान कल्याण विभाग ने वर्ष 2016-17 से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन परियोजना के तहत एक व्यापक कार्य-योजना का संयुक्त रूप से क्रियान्वयन किया। 

           इस कार्य-योजना के अंतर्गत वर्ष 2016-17 में 200 लाख टन, वर्ष 2017-18 में 210 लाख टन और वर्ष 2020-21 में 240 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है। सिंह ने बताया कि भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान, कानपुर के साथ 10 कृषि विश्वविद्यालयों के क्षेत्रीय केन्द्रों पर 20.39 करोड़ रू. की लागत के साथ अतिरिक्त “प्रजनक बीज” उत्पादन कार्यक्रम प्रारंभ किया गया है। इन केंद्रों द्वारा वर्ष 2016-17 के अंत तक 3717 कुन्तल अतिरिक्त प्रजनक बीज तथा वर्ष 2018-19 के अंत तक इन केन्द्रों द्वारा वर्तमान में किए जा रहे 7561 कुन्तल प्रजनक बीज के अतिरिक्त 5801 कुन्तल अतिरिक्त प्रजनक बीज उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। 

           केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि दलहनी फसलों के औपचारिक बीज तंत्र को मजबूत करने और देश में उन्नत प्रजातियों के बीजों की उपलब्धता बढाने के लिए यह कदम उठाया गया है। सिंह ने कहा कि देश के प्रमुख दलहन उत्पादक राज्यों के राज्य कृषि विश्वविद्यालयों, परिषद के संस्थानों व कृषि वैज्ञानिक केन्द्रों में ‘’दलहन सीड-हब’’ की स्थापना की जा रही है। दलहन के गुणवत्तायुक्त बीजों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए वर्ष 2016-17 से तक कुल 150 ‘’दलहन सीड-हब’’ स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जिसके लिए 225.31 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। 

     इस परियोजना के अन्तगर्त प्रति वर्ष 1.50 लाख कुन्तल अतिरिक्त बीज उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। प्रत्येक ‘’दलहन सीड-हब’’ वर्ष 2018-19 के अंत तक दलहनी फसलों का न्यूनतम 1000 कुन्तल गुणवत्तायुक्त बीजों का प्रति वर्ष उत्पादन तथा आपूर्ति करेगा।