Thursday, 23 February 2017

श्रम रजिस्टरों की संख्या अब 56 से घट कर केवल 5 रजिस्टर

           सरकार ने कृषि एवं गैर-कृषि क्षेत्रों में लगभग 5.85 करोड़ प्रतिष्ठानों के श्रम रजिस्टरों के रखरखाव कार्य को सरल कर दिया है। 

         ये रजिस्टर कर्मचारियों, उनके वेतन, ऋणों/ वसूली, हाजिरी इत्यादि से संबंधित हैं। इस कदम से इन प्रतिष्ठानों द्वारा रखरखाव किए जाने वाले रजिस्टरों की संख्या मौजूदा 56 से काफी घटकर केवल 5 रजिस्टर रह जाएगी। ओवरलैपिंग/ अनावश्यक क्षेत्रों वाले रजिस्टरों की संख्या कम कर देने से ही यह संभव हो पा रहा है। इससे इन प्रतिष्ठानों को अपनी लागत एवं प्रयासों में कमी करने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही श्रम कानूनों का बेहतर अनुपालन भी सुनिश्चित होगा। विभिन्न केंद्रीय श्रम अधिनियमों के तहत कृषि एवं गैर-कृषि क्षेत्रों के प्रतिष्ठानों द्वारा अनेक रजिस्टरों का रखरखाव करना आवश्यक होता है, जो कर्मचारियों की संख्या की सीमा पर निर्भर करता है। 

           वर्ष 2013-2014 के दौरान की गई केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय की छठी आर्थिक गणना के मुताबिक, भारत में कृषि एवं गैर-कृषि क्षेत्रों में संयुक्त रूप से लगभग 5.85 करोड़ प्रतिष्ठान हैं। इनमें से 4.54 करोड़ प्रतिष्ठान गैर-कृषि क्षेत्र में हैं।  केंद्रीय अधिनियमों के तहत उपलब्ध कराए गए विभिन्न रिटर्न/रजिस्टर/फॉर्म भरने की जरूरत की समीक्षा करते वक्त ऐसे अनेक क्षेत्रों वाले रजिस्टर पाए गए, जो ओवरलैपिंग/अनावश्यक थे। जिनकी संख्या को तर्कसंगत करना संभव था। रजिस्टरों/आंकड़ों वाले क्षेत्रों की संख्या कम करने के लिए 4 नवम्बर, 2016 को एक प्रयोजन अधिसूचना जारी की गई थी।

              इसे संबंधित मंत्रालयों/ विभागों, राज्य सरकारों, अन्य हितधारकों के बीच प्रसारित किया गया था। इसके साथ ही इसे सार्वजनिक तौर पर भी पेश किया गया था। वास्तव में, विभिन्न अधिनियमों/नियमों के तहत परिकल्पित सभी पिछले रजिस्टरों को हटा दिया गया है। इनके स्थान पर केवल 5 सामान्य रजिस्टरों को ही रखा गया है। इस कदम से 5 रजिस्टरों में निहित आंकड़े वाले क्षेत्रों (डेटा फील्ड) की संख्या घटकर केवल 144 रह गई है, जबकि इससे पहले 56 रजिस्टरों में इस तरह के आंकड़े वाले क्षेत्रों की संख्या 933 थी। इसके साथ-साथ श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने इन 5 सामान्य रजिस्टरों के लिए एक सॉफ्टवेयर विकसित करने का कार्य भी शुरू किया है।

            सॉफ्टवेयर के विकसित हो जाने के बाद इसे निःशुल्क डाउनलोड की सुविधा प्रदान करने के लिए श्रम और रोजगार मंत्रालय के श्रम सुविधा पोर्टल पर डाल दिया जाएगा। इसका उद्देश्य डिजिटल रूप में इन रजिस्टरों का रखरखाव सुनिश्चित करना है।

केंद्रीय वित्त मंत्री की ब्रिटेन यात्रा

           केंद्रीय वित्त और कॉरपोरेट मामलो के मंत्री अरूण जेटली ब्रिटेन की अपनी पांच दिवसीय आधिकारिक यात्रा के लिए लंदन रवाना होंगे। 24 फरवरी से शुरू होने वाला वित्त मंत्री का यह दौरा 28 फरवरी, 2017 को खत्म होगा। 

          25 फरवरी, 2017 (शनिवार) को वित्त मंत्री लंदन स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स में ‘बदलते भारत : अगले दशक के लिए विजन’ विषय पर आयोजित एक चर्चा को संबोधित करेंगे। 26 फरवरी, 2017 (रविवार) वित्त मंत्री भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ (फिक्की), ब्रिटिश काउंसिल और ब्रिटेन में स्थित भारतीय उच्चायोग द्वारा आयोजित स्वागत समारोह में भाग लेंगे। 27 फरवरी, 2017 (सोमवार) को वित्त मंत्री लंदन स्टॉक एक्सचेंज के मार्केट ओपनिंग सेरेमनी में भाग लेंगे। यहां वे प्रमुख निवेशकों के साथ बैठक करेंगे। तदुपरांत, वित्त मंत्री जेटली ब्रिटेन-भारत व्यापार परिषद (यूकेआईवीसी) के 100 से अधिक व्यापार जगत के वरिष्ठ प्रमुखों से मुलाकात करेंगे।

            इसके बाद वित्त मंत्री ब्रिटेन की विदेश सचिव बोरिस जॉनसन से मुलाकात करेंगे। वित्त मंत्री इसी दिन शाम को ब्रिटेन की महारानी द्वारा बंकिघम पैलेस में आयोजित स्वागत समारोह में भी भाग लेंगे। 28 फरवरी, 2017 (मंगलवार) को वित्त मंत्री जेटली ब्रिटेन के अपने समकक्ष से मुलाकात करेंगे। उसके बाद शाम को भारत लौटने से पहले वित्त मंत्री ब्रिटिश उद्योग परिसंघ द्वारा आयोजित बैठक में मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) से मुलाकात करेंगे। ब्रिटेन की अपनी पांच दिवसीय आधिकारिक यात्रा को पूरा करने के बाद 1 मार्च, 2017 को दिल्ली पहुंचेंगे।

 भारत में 235 होम्‍योपैथिक अस्‍पताल, 8,000 क्‍लीनिक

                आयुष राज्‍य मंत्री श्रीपद येसो नाइक ने नई दिल्‍ली में ‘होम्‍योपैथिक औषध उत्‍पादों का नियमन : राष्‍ट्रीय एवं वैश्विक रणनीतियों’ पर विश्‍व एकीकृत चिकित्‍सा फोरम का उद्घाटन किया।

            इस अवसर पर आयुष मंत्री ने कहा कि भारत में होम्‍योपैथी ने काफी अच्‍छी तरह से संस्‍थागत स्‍वरूप हासिल कर लिया है। हमारे यहां सार्वजनिक क्षेत्र में 235 होम्‍योपैथिक अस्‍पताल और 8,000 से भी ज्‍यादा क्‍लीनिक हैं। उन्‍होंने कहा कि भारत में ज्‍यादातर उत्‍पादन संयंत्र जीएमपी के अनुरूप हैं। ये गुणवत्‍ता, पैकेजिंग एवं वितरण से संबंधित नीतियों का पालन करते हैं। उन्‍होंने यह भी कहा कि ये सभी उत्‍पादन इकाइयां औषधि और प्रसाधन सामग्री कानून के दायरे में आती हैं। उनके लाइसेंस का नवीकरण नियमित गुणवत्‍ता परीक्षण एवं व्‍यापक निरीक्षण पर निर्भर करता है। 

              श्रीपद नाइक ने कहा कि एक ऐसे उच्‍चस्‍तरीय रणनीतिक आदान-प्रदान प्‍लेटफॉर्म की निश्चित तौर पर जरूरत है, जहां हितधारक अपने मूल कार्य संबंधी संदर्भों से इतर आपस में एकजुट हो सकें। उन्‍होंने कहा कि इस फोरम से इस जरूरत की पूर्ति की जा सकती है। मंत्री ने कहा कि अन्‍य देशों में होम्‍योपैथिक दवाओं की अनुपलब्‍धता और इन दवाओं के लिए कठोर या नियामक प्रावधानों के अभाव के कारण होम्‍योपैथी का अब तक व्‍यापक रूप से उपयोग करना संभव नहीं हो पाया है। 

                 आयुष मंत्रालय में सचिव अजित एम.शरण ने भी इस बात पर खुशी जताई कि सीसीआरएच के जरिये मंत्रालय इस तरह के अनूठे कार्यक्रम का आयोजन करके वैश्विक स्‍तर पर अपनी अगुवाई का प्रदर्शन कर सकता है। सीसीआरएच के महानिदेशक डॉ. राज के.मनचंदा ने उम्‍मीद जताई कि इस फोरम से विश्‍वभर में नियामकीय ढांचे को मजबूत करने के लिए और ज्‍यादा परिचर्चाएं करने को बढ़ावा मिल सकता है। इसके साथ ही इस बात का आश्‍वासन दिया जा सकता है कि होम्‍योपै‍थी के उपयोगकर्ताओं की व्‍यापक पहुंच उच्‍च गुणवत्‍ता वाली होम्‍योपैथिक दवाओं तक संभव हो सकती है। 

             विश्‍व एकीकृत चिकित्‍सा फोरम (डब्‍ल्‍यूआईएमएफ) के निदेशक डॉ. रॉबर्ट वैन हेजलेन के साथ-साथ फोरम के अंतर्राष्‍ट्रीय सलाहकारों ने भी इतने सारे देशों के नियामकों और होम्‍योपैथिक उद्योगपतियों को अपनी चिंताओं एवं विभिन्‍न मसलों को साझा करने के लिए एक प्‍लेटफॉर्म उपलब्‍ध कराने के चुनौतीपूर्ण कार्य को बढि़या ढंग से निभाने के लिए भारत सरकार का धन्‍यवाद किया। इस अवसर पर होम्‍यो‍पैथिक दवाओं के क्षेत्र में सहयोग के लिए होम्‍योपैथिक फार्माकोपिया कन्‍वेंशन ऑफ द यूनाइटेड स्‍टेट्स और भारत के संगठनों अर्थात भारतीय औषधि एवं होम्‍योपैथी के औषधकोश आयोग (पीसीआईएमएंडएच) और केन्‍द्रीय होम्‍योपैथी अनुसंधान परिषद (सीसीआरएच) के बीच एक सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्‍ताक्षर किये गये। 

             इस दो दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन आयुष मंत्रालय और केन्‍द्रीय होम्‍योपैथी अनुसंधान परिषद (सीसीआरएच) द्वारा किया जा रहा है। जिसमें भारतीय औषधि एवं होम्योपैथी के औषधकोश आयोग और केन्‍द्रीय दवा मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की ओर से सहायता दी जा रही है। होम्‍योपैथिक दवा उद्योग की प्रगति में भारत के एक महत्‍वपूर्ण देश के रूप में होने को लेकर बढ़ती अन्‍तर्राष्‍ट्रीय अवधारणा को ध्‍यान में रखते हुए यह अपनी तरह का पहला फोरम है।

             दवा कानून निर्माता, नियामक, निर्माता एवं विभिन्‍न नियामक प्राधिकरणों के फार्माकोपियल विशेषज्ञ, जाने-माने वैज्ञानिक संगठन और 25 देशों के दवा उद्योगों के प्रतिनिधि इस फोरम की दो दिवसीय बैठक में भाग ले रहे हैं, जिसमें होम्‍योपैथिक दवा उद्योग के कार्रवाई योग्‍य पहलुओं की रणनीति तैयार की जाएगी, जिससे इस क्षेत्र में वैश्विक स्‍तर पर अनुकूलन को बढ़ावा मिलेगा। फोरम की उपर्युक्‍त बैठक के दौरान अनेक मसलों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। विभिन्‍न देशों में मौजूदा नियाम‍कीय स्थिति, दुनिया के अनेक महत्‍वपूर्ण देशों में संभावित व्‍यापार अवसर, नियामकीय चुनौतियों के संभावित समाधान, राष्‍ट्रीय एवं वैश्विक स्‍तर पर चुनौतियों से कारगर ढंग से निपटने के लिए ज्ञान एवं नेटवर्क का निर्माण करना इत्‍यादि इन मसलों में शामिल हैं।

पूर्वोत्तर में उद्यमशीलता को प्रोत्साहन

            तेजपुर विश्वविद्यालय के व्यवसायिक प्रशासन विभाग और पूर्वोत्तर वित्त निगम लिमिटेड (एनईडीएफआई) के साथ मिलकर पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (डोनर) संयुक्त रूप से पूर्वोत्तर क्षेत्र में उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए एक बिजनेस आइडिया चैलेंज का आयोजन करेगा। 

           वार्षिक उद्योग जगत, शिक्षाविद इंटरफेस कार्यक्रम “सम्पर्क” पहली बार पूर्वोत्तर मंत्रालय के इस कार्यक्रम में सहभागिता करेगा। इस क्षेत्र में उद्यमशीलता की भावना को मजबूत करेगा। इस कार्यक्रम का आयोजन 3 मार्च, 2017 को किया जाएगा। यह श्रृंखला का 17वां संस्करण होगा। कार्यक्रम के एक भाग के रूप में छात्रों को उद्यमशीलता के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए एक पायनियरिंग बिजनेस आइडिया चैलेंज 2017 का भी आयोजन किया जाएगा। 

             एक बिजनेस आइडिया के साथ प्रतियोगिता में पूर्वोत्तर क्षेत्र का कोई भी छात्र भाग ले सकता है। इस प्रतियोगिता के विजेता के पास न केवल पुरस्कार जीतने का मौका रहेगा बल्कि संभावित वित्त पोषण के लिए आर्थिक सहायता करने वाली एजेंसियों के सामने अपने विचारों को भी पेश करने का मौका मिलेगा। पहले पुरस्कार के रूप में 20 हजार रुपये, द्वितीय पुरस्कार के रूप में 15 हजार रूपये तथा तृतीय पुरस्कार के रूप में 10 हजार रूपये दिए जायेंगे। प्रतियोगिता 26 फरवरी, 2017 तक खुली है।

              संकाय समन्वयक प्रो. सुभरंगशू शेखर सरकार ने केंद्रीय पूर्वोत्तर विकास क्षेत्र मंत्रालय के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि मंत्रालय पूर्वोत्तर क्षेत्र में उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के लिए गंभीर है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित उद्यमिता विकास के लिए यह कार्यक्रम जागरूकता पैदा करने के साथ युवाओं को एक मंच प्रदान प्रदान करेगा। “संपर्क 2017” में छात्रों को प्रेरित करने के लिए विभिन्न सत्रों का आयोजन किया जाएगा। जिसे उद्यमियों और प्रमुख स्टार्टअप्स द्वारा संबोधित किया जाएगा। ‘एक्ट इस्ट पोलिसी’ भी इस कार्यक्रम का एक हिस्सा होगा। यहां एक विशेष बातचीत सत्र का भी आयोजन किया जाएगा। 

यहां पर पूर्वोत्तर क्षेत्र में आर्थिक सहायता प्रदान करने वाली एजेंसियों के प्रमुख भावी उद्यमियों और स्टार्टअप्स के विभिन्न सवालों के भी जवाब दिये जायेंगे। केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय के सचिव नवीन वर्मा मुख्य अतिथि होंगे। पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय के संयुक्त सचिव एस. एन. प्रधान, पूर्वोत्तर विकास वित्त निगम लिमिटेड के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक बी. पॉल इस कार्यक्रम के प्रमुख गणमान्य व्यक्ति होंगे।

वस्‍तु एवं सेवा कर के लिए मोबाइल एप लांच

           सरकार के डिजिटल इंडिया अभियान को ध्‍यान में रखते हुए केन्‍द्रीय उत्‍पाद एवं सीमा शुल्‍क बोर्ड (सीबीईसी) ने वस्‍तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के लिए एक मोबाइल एप लांच किया है।

          करदाता इसके जरिये जीएसटी से जुड़ी निम्‍नलिखित जानकारियां हासिल कर सकते हैं, कानून-मॉडल जीएसटी कानून, आईजीएसटी कानून और जीएसटी मुआवजा कानून, मसौदा नियम-पंजीकरण, रिटर्न, भुगतान, रिफंड और इनवायस से संबंधित नियम, जीएसटी पर अक्‍सर पूछे जाने वाले प्रश्‍न (एफएक्‍यू), जीएसटी से संबंधित विभिन्‍न संसाधन जैसे कि कोई वीडियो, लेख इत्‍यादि, मोबाइल एप्‍लीकेशन से करदाताओं को जीएसटी पर नवीनतम जानकारियां अच्‍छी तरह से सुलभ हो जाएंगी।

            करदाता इसके अलावा अपनी ओर से सुझाव (फीडबैक) भी दे सकते हैं। इसके साथ ही वे एक टोल फ्री नम्‍बर अथवा ईमेल के जरिये एक बटन दबाकर सीबीईसी की चौबीसों घंटे कार्यरत रहने वाली हेल्‍पडेस्‍क ‘सीबीईसी मित्र’ से संपर्क कर सकते हैं। मोबाइल एप को एंड्रायड प्‍लेटफॉर्मों पर नि:शुल्‍क डाउनलोड किया जा सकता है। इसके  आईओएस वर्जन को जल्‍द ही उपलब्‍ध कराया जाएगा। 

           अपने सहज एवं उपयोग में आसान इंटरफेस की बदौलत जीएसटी मोबाइल एप्‍लीकेशन कारोबार में और ज्‍यादा आसानी सुनिश्चित करने एवं करदाताओं को उत्‍कृष्‍ट सेवाएं मुहैया कराने की दिशा में सीबीईसी की एक और बढि़या पहल है।

मीडिया व मानवाधिकारों पर चर्चा

            भारतीय विधि संस्थान, दिल्ली और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने ‘मीडिया और मानवाधिकार : मुद्दे और चुनौतियां’ विषय पर मीडिया कर्मियों और सरकारी जनसंपर्क अधिकारियों के लिए एक दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया। 

           इस कार्यक्रम में 50 सरकारी जनसंपर्क अधिकारियों, मीडिया कर्मियों, अधिवक्ताओं, शिक्षाविदों तथा छात्रों ने भागीदारी की। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के संयुक्त सचिव (पी एंड सी) ने मानवाधिकारों के संरक्षण देने और उनका प्रचार करने में मीडिया की एतिहासिक भूमिका की चर्चा की।

                उन्होंने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि मीडिया लोगों की आवाज है। मीडिया अधिकार और पात्रता है और इसमें कोई संदेह नहीं है कि यह दूरदराज तक पहुंचने में युवाओं को एकत्र करने का एक महत्वपूर्ण साधन है। 

          अंतर्राष्ट्रीय व राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य पर चर्चा करते हुए भारतीय विधि संस्थान, नई दिल्ली के निदेशक प्रो. (डॉ.) मनोज कुमार सिन्हा और अंतर्राष्ट्रीय विधि और मानवाधिकार के जाने - माने विशेषज्ञों ने मानवाधिकारों को बढ़ावा देने के लिए मीडिया के प्रभाव को रेखांकित किया।

केन्‍द्रीय विद्यालय के नये भवन की आधारशिला

            सरकार विद्यार्थियों को उच्‍च गुणवत्‍ता वाली शिक्षा मुहैया कराने की दिशा में काफी सक्रियता के साथ काम कर रही है, क्‍योंकि उसका स्‍पष्‍ट मानना है कि केवल उचित एवं गुणवत्‍तापूर्ण शिक्षा में ही सुदृढ़ चरित्र वाले अच्‍छे नागरिकों के विकास की क्षमता होती है।

            शाहदरा में केन्‍द्रीय विद्यालय के नये भवन के शिलान्‍यास समारोह में इस बात का उल्‍लेख करते हुए केन्‍द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने प्राथमिकता के आधार पर देशभर में विद्यार्थियों को दी जाने वाली शिक्षा को बेहतर करने के साथ-साथ गुणवत्‍तापूर्ण शिक्षा मुहैया कराने की जरूरत पर विशेष बल दिया। उन्‍होंने कहा कि केन्‍द्रीय विद्यालय उच्‍च गुणवत्‍ता वाली शिक्षा के पर्याय माने जाते हैं, क्‍योंकि अभिभावकों का यही सपना होता है कि उनके बच्‍चों को अच्‍छी शिक्षा मिले। 

             उन्‍होंने कहा कि शिक्षा के अलावा खेलकूद से जुड़ी गतिविधियां भी शिक्षा का एक महत्‍वपूर्ण पहलू है, क्‍योंकि खेलकूद के दौरान कड़ी मेहनत करने और पसीना बहाने के बाद विद्यार्थियों में खेलों के जरिये सामूहिक भावना पनपती है। जावड़ेकर ने कहा कि मैदान पर पसीना बहाने से ही बेहतर विद्यार्थी उभर कर सामने आते हैं। मं‍त्री ने कहा कि महानगरों के साथ-साथ अन्‍य जगहों पर भी जमीन की भारी कमी को देखते हुए सरकार ने देश में नये केन्‍द्रीय विद्यालयों के निर्माण के लिए भूमि की आवश्‍यकता संबंधी मानकों में ढील देने का निर्णय लिया है। 

              मंत्री ने कहा कि 6 महानगरों में इसके लिए भूमि संबंधी आवश्‍यकता को मौजूदा 4 एकड़ से घटाकर अब 2.5 एकड़ और देशभर में अन्‍य स्‍थानों पर इसके लिए भूमि की आवश्‍यकता को मौजूदा 8 एकड़ से घटाकर 5 एकड़ कर दिया गया है। जावड़ेकर ने कहा कि दाखिले के लिए बेहतर अवसर मुहैया कराने के उद्देश्‍य से फॉर्म भरने की प्रक्रिया को इसी सत्र से ऑनलाइन कर दिया गया है, ताकि लोगों को केन्‍द्रीय विद्यालयों में अपने बच्‍चों के दाखिले के लिए यहां-वहां भटकना न पड़े। उन्‍होंने कहा कि इस संबंध में केन्‍द्रीय विद्यालय संगठन की वेबसाइट पर एक लिंक उपलब्‍ध कराया गया है। 

            जावड़ेकर ने कहा कि शिक्षकों की भारी कमी को ध्‍यान में रखते हुए केन्‍द्रीय विद्यालय संगठन ने 6,000 से भी ज्‍यादा शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। उन्‍होंने कहा कि इसे जल्‍द ही अधिसूचित किया जाएगा। इस समारोह को मनोज तिवारी ने भी संबोधित किया, जो उत्तर-पूर्वी दिल्ली से वर्तमान लोकसभा सांसद हैं। तिवारी ने दिल्‍ली के शाहदरा जिले में प्रथम केन्‍द्रीय विद्यालय के निर्माण कार्य को मंजूरी देने के लिए प्रकाश जावड़ेकर का आभार व्‍यक्‍त किया। उन्‍होंने कहा कि प्रकाश जावड़ेकर प्रथम केन्‍द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री हैं, जिन्‍होंने इस क्षेत्र का दौरा किया है।

भारत एवं पोलैंड के बीच कृषि समझौता

            प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में सहयोग पर भारत एवं पोलैंड के बीच एक समझौते पर हस्‍ताक्षर के लिए अपनी मंजूरी दी है। 

       इस समझौते के दायरे में कृषि क्षेत्र की वर्तमान स्थिति पर सूचनाओं के आदान-प्रदान, फसलों के पादप की स्थिति, हानिकारक जीवों से उत्‍पन्‍न खतरा और पशु संक्रामक रोगों से उत्‍पन्‍न खतरा सहित कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र की विभिन्‍न गतिविधियां शामिल हैं। 

            इसमें कृषि एवं कृषि-खाद्य प्रसंस्‍करण से संबंधित मेलों, प्रदर्शनियों, सेमिनारों और सम्‍मेलनों में भागीदारी भी शामिल हैं। साथ ही यह दोनों देशों की कॉन्‍ट्रैक्टिंग पार्टीज के बीच कृषि-खाद्य व्‍यापार अथवा उसके समर्थन सहित संयुक्‍त आर्थिक गतिविधियों के विकास को भी बढ़ावा देगा।

             इस समझौते से एक संयुक्‍त कार्यसमूह (जेडब्‍ल्‍यूजी) के गठन का मार्ग भी प्रशस्‍त होगा जिसमें दोनों देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। जेडब्‍ल्‍यूजी सहयोग के लिए योजना तैयार करेगा और समझौते के कार्यान्‍वयन के दौरान उत्‍पन्‍न होने वाली समस्‍याओं के लिए समाधान भी मुहैया कराएगा।

 

भारत के दिव्यांग युवाओं को सम्मान

             सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत ने 21 से 25 नवंबर, 2016 को यांग्झू, चीन में आयोजित ग्लोबल आईटी चैलेंज (जीआईटीसी) 2016 में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले दिव्यांग युवाओं को यहां सम्मानित किया।

            उन्होंने इन युवाओं को इस दिव्यांग कार्यक्रम के लिए तैयार करने के मंत्रालय के प्रयास में मदद करने के लिए एनआईटी, कुरूक्षेत्र औऱ अमर ज्योति चैरिटेबल ट्रस्ट, नई दिल्ली के शिक्षकों का भी सम्मानित किया। उन्होंने सभी युवाओं को उनके भविष्य की सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं। टीम ने कुल पांच पुरस्कार- व्यक्तिगत श्रेणी में चार और समूह श्रेणी में एक पुरस्कार प्राप्त किया।

                इस वैश्विक कार्यक्रम में भारत चीन और कोरिया के बाद तीसरे स्थान पर रहा। इसमें एशिया प्रशान्त क्षेत्र के 16 देशों के 270 प्रतिभागी शामिल हुए थे। भारत ने जकार्ता, इंडोनेशिया में आयोजित जीआईटीसी-2015 में भी 2 पुरस्कार जीते थे। इन दिव्यांग युवाओं का चयन जुलाई 2016 में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी), कुरूक्षेत्र के सहयोग से विभाग द्वारा आयोजित राष्ट्रीय स्तर की आईटी प्रतिस्पर्धा के आधार पर किया गया था।

सार्वभौम स्वर्ण बांड- 2016-17 की चौथी श्रृंखला

            भारतीय रिजर्व बैंक के साथ सलाह करने के बाद भारत सरकार ने सार्वभौम स्‍वर्ण बांड- 2016-17 की चौथी श्रृंखला जारी करने का निर्णय किया है। बांड के लिए आवेदन 27 फरवरी, 2017 से 03 मार्च, 2017 तक स्‍वीकार किये जाएंगे। बांड 17 मार्च, 2017 को जारी होंगे। सभी बांड की बिक्री बैंकों, स्‍टॉक होल्डिंग कारपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एसएचसीआईएल), निर्धारित डाकघरों और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया लिमिटेड और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज जैसे मान्यता प्राप्त शेयर बाजार के जरिए होगी। सार्वभौम स्‍वर्ण बांड 2016-17 श्रृंखला,  भारत सरकार की तरफ से भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी।, बांड केवल भारत के निवासियों को दिए जाएंगे, जिनमें व्‍यक्ति, हिन्‍दू संयुक्‍त परिवार, न्‍यास, विश्‍वविद्यालय और धर्मार्थ संस्‍थान शामिल हैं।

 बांडों का मूल्‍यवर्ग स्‍वर्ण के संबंध में ग्राम के आधार पर होगा, जिसकी बुनियादी इकाई एक ग्राम होगी।, बांड की अवधि 8 वर्ष की होगी। ब्‍याज भुगतान की तिथि के आधार पर 5 साल में बांड भुनाने का विकल्‍प होगा। स्‍वीकृत न्‍यूनतम निवेश एक ग्राम स्वर्ण होगा। किसी कंपनी द्वारा प्रति वित्‍त वर्ष (अप्रैल-मार्च) प्रतिव्यक्ति 500 ग्राम से अधिक सोने में निवेश नहीं किया जा सकता है। इसके संबंध में स्‍वयं घोषणा करनी होगी। 

               संयुक्‍तधारक के मामले में 500 ग्राम निवेश की सीमा पहले आवेदक पर लागू होगी। बांडों का मूल्‍य भारतीय मुद्रा में तय किया जाएगा, जिसका आधार पिछले सप्‍ताह (सोमवार-शुक्रवार) का साधारण औसत होगा। इसके मद्देनजर इंडियन बुलियन एंड ज्‍वैलर्स एसोसिएशन लिमिटेड द्वारा प्रकाशित 999 शुद्धता वाले सोने की अंतिम कीमत देखी जाएगा। बांड का भुगतान नगदी (अधिकतम 20,000 रुपये) या डिमांड ड्राफ्ट या चैक या इलैक्‍ट्रोनिक बैंकिंग के जरिए होगा। जीएस अधिनियम, 2006 के तहत भारत सरकार स्‍टॉक। निवेशकों को होल्डिंग सर्टिफिकेट जारी किया जाएगा।

             बांड डी-मेट फार्म में बदलने योग्‍य होंगे। बांड का वापसी मूल्‍य भारतीय मुद्रा में तय किया जाएगा, जिसका आधार पिछले सप्‍ताह (सोमवार-शुक्रवार) का साधारण औसत होगा। इसके मद्देनजर इंडियन बुलियन एंड ज्‍वैलर्स एसोसिएशन लिमिटेड द्वारा प्रकाशित 999 शुद्धता वाले सोने की अंतिम कीमत देखी जाएगी। बांडों की बिक्री बैंकों, एससीएचआईएल और निर्धारित डाक घरों और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया लिमिटेड और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज जैसे मान्यता प्राप्त शेयर बाजार के जरिए होगी, जिन्‍हें सीधे या एजेंटों के जरिए अधिसूचित किया जाएगा। बांडों को ऋण लेने के लिए भी इस्‍तेमाल किया जा सकेगा। इसका एलटीवी अनुपात समय-समय पर भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा निर्धारित साधारण स्‍वर्ण ऋण के बराबर होगा। 

         ग्राहक को पहचानो (केवाईसी) नियम वास्‍तविक सोने की खरीद जैसे ही होंगे। मतदाता पहचान पत्र, आधार कार्ड/पैन या टैन/पासपोर्ट जैसे केवाईसी दस्‍तावेज आवश्‍यक होंगे। स्‍वर्ण बांड के ब्‍याज पर आयकर अधिनियम, 1961 (1961 का 43) के तहत कर लगेगा और पूंजी की आय पर वही कर लगेगा, जो वास्‍तविक स्‍वर्ण के मामले में होता है।

सिक्किम ‘उदय’ योजना में शामिल

             भारत सरकार और सिक्किम ने उज्‍जवल डिस्‍कॉम एश्‍योरेंस योजना (उदय) के तहत राज्य के बिजली वितरण विभाग के परिचालन में सुधार के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्‍ताक्षर किए हैं। एमओयू पर हस्ताक्षर करने के साथ ही उदय के अंतर्गत आने वाले राज्यों की संख्या 22 हो गयी है।

             सिक्किम किफायती कोषों, एटी एंड सी में कमी और ट्रांसमिशन की खामी, ऊर्जा दक्षता बढ़ाने जैसे तरीकों से ‘उदय’ के माध्यम से 481 करोड़ रूपए का कुल लाभ अर्जित करेगा। एमओयू से राज्य के बिजली वितरण विभाग की परिचालन क्षमता में सुधार का मार्ग प्रशस्त होगा। बदलाव की प्रक्रिया के दौरान उत्‍तर प्रदेश और डिस्‍कॉम्‍स अनिवार्य फीडर और ट्रांसफामर्स मीटरों का वितरण, उपभोक्‍ता इंडेक्‍स एवं नुकसान की जीआईएस मैपिंग, ट्रांसफार्मरों को अपग्रेड/बदलना, मीटर इत्‍यादि, बड़े ग्राहकों के लिए समार्ट मीटरिंग जैसे कदमों के जरिए परिचालन दक्षता लाने का प्रयास करेंगे। इससे पारेषण (ट्रांसमिशन) और एटीएंडसी के नुकसान को कम किया जा सकेगा। 

             इसके अलावा बिजली की आपूर्ति और वसूली के बीच के अंतर को समाप्‍त किया जा सकेगा। इस दौरान एटीएंडसी और ट्रांसमिशन नुकसान में क्रमश: 15 प्रतिशत और 3.50 प्रतिशत की कमी लाकर 453 करोड़ रूपए का अतिरिक्‍त राजस्‍व जुटाया जा सकेगा। ‘उदय’ के तहत ध्‍यान दिए जाने वाले बिंदुओं में से ऊर्जा दक्षता एक है। पीक लोड घटाने और ऊर्जा खपत को कम करने के लिए सिक्किम सरकार ऊर्जा दक्षता वाले एलईडी बल्‍बों, कृषि पंपों, पंखों एवं एयर कंडीशनरों, कुशल औद्योगिक उपकरणों को पीएटी (परफार्म, एचीव, ट्रेड) के जरिए बढ़ावा देगी।

                   इससे लगभग 25 करोड़ रूपए की बचत होने का अनुमान हैं। एक तरफ जहां राज्‍य सरकार द्वारा डिस्‍कॉम्स की परिचालन दक्षता में सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं। आगे बिजली आपूर्ति की लागत घटाई जाएगी वहीं केंद्र सरकार भी राज्‍य में बिजली के बुनियादी ढांचे में सुधार और आगे बिजली की लागत को कम करने के लिए डिस्‍कॉम्‍स और राज्‍य सरकार को प्रोत्‍साहन प्रदान करेगी। डीडीयूजीजेवाई, आईपीडीएस जैसी केंद्रीय योजनाएं, ऊर्जा क्षेत्र विकास निधि अथवा ऊर्जा मंत्रालय की अन्‍य योजनाएं और एमएनआरई, राज्‍य में ऊर्जा क्षेत्र के बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए पहले से ही धन उपलब्‍ध करा रही हैं।

               अगर राज्‍य/डिस्‍कॉम्‍स योजनाओं के तहत निर्धारित परिचालन लक्ष्‍य को प्राप्‍त करते हैं तो उन्‍हें अतिरिक्‍त/प्राथमिकता के आधार पर भी अनुदान उपलब्‍ध कराने पर विचार किया जाएगा। इस एमओयू पर हस्‍ताक्षर होने का सबसे बड़ा लाभ सिक्किम के लोगों को होगा। डिस्‍कॉम्‍स द्वारा बिजली की उच्‍च मांग का अर्थ उत्‍पादन इकाइयों में अधिक पीएलएफ से होगा और ऐसा इसलिए बिजली की प्रति यूनिट की कम लागत का लाभ उपभोक्‍ताओं को मिलेगा। 

             डिस्‍कॉम्‍स एटीएंडसी नुकसान वाले क्षेत्रों में बिजली की आपूर्ति में वृद्धि करेगा। इस योजना से सिक्किम के अब भी बिजली से महरूम घरों में किफायती और त्वरित बिजली उपलब्‍ध कराने में मदद मिलेगी। बिजली से दूर गांवों/परिवारों को चौबीसों घंटे बिजली की आपूर्ति से अर्थव्‍यवस्‍था को बल और उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। इससे रोजगार के अवसरों में सुधार आयेगा और राज्य के लोगों के जीवन में सुधार आएगा।

गुजरात के बेट द्वारिका दर्शन सर्किट को 16.27 करोड़

           शहरी विकास मंत्रालय ने केन्‍द्रीय स्‍कीम ‘धरोहर शहर विकास और संवर्धन योजना  (हृदय)’ के तहत 16.27 करोड़ रुपये की लागत से गुजरात में 6 किलोमीटर लंबे बेट द्वारि‍का दर्शन सर्किट के विकास को मंजूरी दे दी। 

             सचिव (शहरी विकास) राजीव गाबा की अध्‍यक्षता वाली हृदय राष्‍ट्रीय उच्‍चाधिकार प्राप्‍त समिति ने गुजरात के द्वारिका जिले में प्रसिद्ध द्वारिकाधीश हवेली और हनुमान दांडी को आपस में जोड़ने वाले सर्किट को मंजूरी दे दी है, जो हनुमान जी एवं उनके पुत्र मकरध्‍वज की मूर्तियों वाला एकमात्र मंदिर है। इस सर्किट के आसपास दो महत्‍वपूर्ण झीलें भी है, जिन्‍हें रणछोड़ तालाब और शंखुधर झील के नाम से जाना जाता है।

               दर्शन सर्किट के तहत जो कार्य शुरू किये जाने है, उनमें गलियों एवं पगडंडियों का विकास, समुद्र बीच के आसपास साइकिल चालन मार्ग बनाना, पौधरोपण, बेंच, विश्राम स्‍थलों, कपड़े बदलने के कमरों, पेयजल एवं शौचालय की सुविधाएं, शिल्‍प एवं खाद्य बाजार, संकेतकों को लगाना, एलईडी लाइटिंग की सुविधा, वेंडिंग स्‍थलों के लिए प्‍लाजा का इंतजाम करना इत्‍यादि शामिल हैं। 

           21 जनवरी, 2015 को शुरू की गई हृदय योजना के तहत अब तक 500 करोड़ रुपये की कुल लागत से 12 चिन्हित शहरों में धरोहरों से संबंधित बुनियादी ढांचे के विकास का कार्य शुरू किया जा रहा है, जिनमें द्वारिका-बेट द्वारिका भी शामिल है। सभी 12 मिशन शहरों के लिए 420 करोड़ रुपये के निवेश वाली परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।