Wednesday, 1 November 2017

भूटान के राजा ने राष्ट्रपति से भेंट की

   नई दिल्ली। भूटान के राजा महाराज जिग्मे खेसर नामग्येल वांगचुक ने भूटान की रानी एवं भूटान के शाही राजकुमार के साथ भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से राष्ट्रपति भवन में भेंट की।

   भारत में राजा एवं रानी का स्वागत करते हुये राष्ट्रपति ने कहा कि भूटान के राजा के राज्याभिषेक की वर्षगांठ के अवसर पर भारत में उनका स्वागत करना उनके लिये सौभाग्य का विषय है। 
 राष्ट्रपति ने भूटान के शाही राजकुमार को उनकी पहली यात्रा पर भारत लाने के लिये राजा और रानी का धन्यवाद भी अदा किया। शासन का एक दशक सफलतापूर्वक पूरा करने और एक स्थिर, सुखी और समृद्ध भूटान की उनकी संकल्पना के लिये राष्ट्रपति ने भूटान के राजा की सराहना की।
      उन्होंने कहा कि अपनी विशेष संस्कृति एवं पर्यावरण की रक्षा करने के साथ-साथ भूटान द्वारा तीव्र गति से की गयी प्रगति पर भारत को प्रसन्नता है। भूटान के साथ अपने ज्ञान, अनुभव और संसाधनों को साझा करने में भारत को खुशी है। और भारत का विकासोन्मुख सहयोग भूटान की जनता एवं वहां की सरकार द्वारा तय की गयी प्राथमिकताओं से निर्देशित होता है।
    राष्ट्रपति ने कहा कि भारत और भूटान के बीच अनुकरणीय द्विपक्षीय संबंध हैं। हमारे संबंध अनुपम एवं विशिष्ट हैं। हमारे द्विपक्षीय संबंध संपूर्ण विश्वास एवं आपसी समझ पर आधारित हैं। इन्हें एक अनुकरणीय संबंध बनाने के लिये हमें सभी प्रयास करने चाहिये ताकि अन्य पड़ोसी भी इसका संज्ञान ले सकें।
     राष्ट्रपति ने कहा कि भारत और भूटान की सुरक्षा चिंतायें अविभाजनीय एवं एक दूसरे से जुड़ी हुयी हैं। डोकलाम इलाके में हाल ही में उत्पन्न हुयी स्थिति को सुलझाने के लिये भूटान के सहयोग में व्यक्तिगत रुचि एवं मार्ग निर्देशन के लिये उन्होंने भूटान के राजा के प्रति अत्यधिक आभार को व्यक्त किया। 
    उन्होंने आगे कहा कि डोकलाम में उत्पन्न हुयी स्थिति को सुलझाने के लिये जिस तरह से भारत एवं भूटान साथ खड़े हुये वह हमारी मित्रता का स्पष्ट प्रमाण है।

प्रतिवर्ष क्‍लबफुट से ग्रसित 50 हजार बच्‍चों का जन्‍म

   नई दिल्ली। राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद ने दिल्‍ली में स्‍वास्‍थ्‍य और परिवार कल्‍याण मंत्रालय के सहयोग से क्‍योर इंडिया द्वारा आयोजित पहले वैश्विक क्‍लबफुट सम्‍मेलन का उद्घाटन किया।

   इस अवसर पर राष्‍ट्रपति ने कहा कि क्‍लबफुट हड्डी से संबंधित खराबी है जो जन्‍म के समय से होती है। यदि प्रारंभ में इसका इलाज नहीं होता है तो इससे स्‍थायी विक्‍लांगता हो सकती है। यह बच्‍चे के सामान्‍य रूप से चलने और उसके आत्‍मविश्‍वास को प्रभावित करता है।
     इससे बच्‍चे की स्‍कूली शिक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और वह अपने सामर्थ के अनुसार अपने सपने को पूरा नहीं कर पाता।
      राष्‍ट्रपति ने कहा कि भारत में विक्‍लांगता 10 मिलियन लोगों को प्रभावित करती है। दिव्‍यांगजनों को भी जीवन के प्रत्‍येक क्षेत्र में समान अवसर मिलने चाहिएं। उन्‍हें सामाजिक और पेशे के अनुसार मुख्‍य धारा में लाने की जिम्‍मेदारी हमारी होनी चाहिए। कई प्रकार की विक्‍लांगता का इलाज हो सकता है या उनसे बचाव किया जा सकता है। बचाव, इलाज और उन्‍हें मुख्‍य धारा में शामिल करने का कार्य समान्‍तर रूप से होना चाहिए।
     राष्‍ट्रपति ने इस बात पर खुशी जताई कि पोलियोमाईलिटिस के नये मामले प्रकाश में नहीं आये हैं और यह पूरी तरह समाप्‍त किया जा चुका है। पोलियो लोको-मोटर विक्‍लांगता का एक प्रमुख कारण था, परंतु पिछले 6 वर्षों के दौरान पारालेसिस पोलियोमाईलिटिस का एक भी मामला सामने नहीं आया है। न सिर्फ भारत बल्कि विश्‍व स्‍तर पर जन स्‍वास्‍थ्‍य के इतिहास में यह एक बड़ी सफलता है।
    इससे हमे विक्‍लांगता के दूसरे प्रकारों को समाप्‍त करने और क्‍लबफुट की चुनौती का सामना करने की प्रेरणा मिलती है। राष्‍ट्रपति ने कहा कि उन्‍हें इस बात की खुशी है कि सरकारी अस्‍पताल क्‍योर इंटरनेशनल इंडिया के साथ मिलकर ज्‍यादा से ज्‍यादा बच्‍चों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।
     यह कार्यक्रम भारत के 29 राज्‍यों में चल रहा है। इन सफलताओं के पीछे हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि प्रत्‍येक वर्ष केवल 8 हजार मामले ही इलाज के लिए आते हैं। यह एक छोटी संख्‍या है क्‍योंकि प्रतिवर्ष क्‍लबफुट से ग्रसित 50 हजार बच्‍चों का जन्‍म होता है।
     2022 में भारत स्‍वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे करेगा। यह हमारा राष्‍ट्रीय संकल्‍प होना चाहिए कि ज्‍योंहि किसी बच्‍चे के क्‍लबफुट से ग्रसित होने का मामला प्रकाश में आता है उसकी पहुंच इलाज की सुविधाएं तक हो।

नमामि गंगे : धीमी प्रगति पर गडकरी की नाराजगी

   नई दिल्ली। केन्‍द्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री नितिन गडकरी ने नई दिल्‍ली में नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत 6 राज्‍यों – उत्‍तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और दिल्‍ली में चल रही सीवेज अवसंरचना से संबंधित परियोजनाओं की समीक्षा बैठक की।

   बैठक को संबोधित करते हुए गडकरी ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि सभी लंबित परियोजनाएं दिसंबर 2018 से पहले पूरी हो जानी चाहिए। कुछ परियोजनाओं की धीमी प्रगति पर नाराजगी व्‍यक्‍त करते हुए मंत्री ने कहा कि फाइल संबंधित कार्यों और निविदा प्रक्रिया में देरी को सहन नहीं किया जाएगा। 
  उन्‍होंने कहा कि एक सामान्‍य धारणा है कि नमामि गंगे के तहत कोई कार्य नहीं हो रहा है। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वह इस धारणा को पारदर्शिता, भ्रष्‍टाचारमुक्‍त, समयबद्ध और गुणवत्तापूर्वक कार्यों के जरिए बदलें। 
   गडकरी ने कहा कि वह परियोजनाओं के निष्‍पादन के लिए अधिकारियों को पूर्ण स्‍वतंत्रता प्रदान करने में विश्‍वास रखते है लेकिन साथ ही उनसे नियत समय पर परिणाम की अपेक्षा करते हैं। इस बैठक में डीपीआर तैयार करने की पूरी प्रक्रिया में हो रहे विलंब से ठेकेदारों को भुगतान में हो रही देरी और निविदाओं को अंतिम रूप देने संबंधित कई महत्‍वपूर्ण कारणों पर भी चर्चा हुई और सुझाव भी दिए गए।
   मंत्री का मानना था कि नवीनतम विधियों और आधुनिक तकनीक का प्रयोग न केवल गंगा की सफाई के लिए होना चाहिए बल्कि इसका प्रयोग गंगा की सहायक नदियों जैसे अलकनंदा, भागीरथी, रामगंगा, काली, हिंडन की सफाई के लिए भी किया जाना चाहिए। मंत्री ने कहा कि जब तक इन नदियों को साफ नहीं किया जाता है तब तक हम ‘निर्मल और अविरल गंगा’ के सपने को पूरा नहीं कर सकते हैं। 
     इस बैठक में केन्‍द्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण राज्‍य मंत्री डॉ. सत्‍यपाल सिंह, मंत्रालय के सचिव डॉ. अमरजीत सिंह, राष्‍ट्रीय गंगा स्‍वच्‍छता मिशन के अधिकारी तथा सभी छह राज्‍यों/केन्‍द्र शासित प्रदेशों के अधिकारीगण भी मौजूद थे। गंगा नदी की के किनारे कुल 97 कस्‍बे (श्रेणी क्ष् से लेकर ज्क्ष् श्रेणी तक) स्थित हैं।
    55 कस्‍बों में आवश्‍यक सीवेज प्रबंधन का कार्य पूरा हो चुका है। इनमें से 10 कस्‍बे 1622 एमएलडी गंगा में प्रवाहित करते हैं जो 97 कस्‍बों के कुल सीवेज (2593 एमएलडी) का लगभग 63 फीसदी है। अभी तक की सभी परियोनाओं के साथ उत्तराखंड और झारखंड ने अपने सभी शहरों से सीवेज के संदर्भ में कवर किया है। मुगल सराय (यू.पी.), छपरा (बिहार), दानापुर (बिहार) के तीन कस्‍बों में अभी सीवेज का कार्य बाकी है, जहां वर्तमान सीवेज उत्‍पादन क्रमश: 15, 21 और 27 एमएलडी है। 
   पश्चिम बंगाल के बहरामपुर और नवद्वीप नामक दो शहरों की परियोजनाएं पाइप लाइन में है और जल्‍द ही इनकी मंजूरी मिलने की उम्‍मीद की जा रही है। इन कस्‍बों के लिए प्रस्‍तावित एसटीपी क्षमता क्रमश: 15 और 13 एमएलडी है। 11 कस्‍बों (उत्तराखंड-1, यू.पी.-3, बिहार-3, पश्चिम बंगाल-4) कम प्रा‍थमिकता वाले कस्‍बे हैं। इसके अतिरिक्‍त पश्चिम बंगाल में 19 शहर कम प्राथमिकता वाले शहर हैं।

भारत व इथोपिया के बीच व्‍यापार करार को मंजूरी

      नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने व्‍यापार और आर्थिक सहयोग को सुदृढ़ करने व संवर्द्धन के लिए भारत और इथोपिया के बीच व्‍यापार करार को अपनी कार्येतर मंजूरी प्रदान कर दी है। 

 भारत के राष्‍ट्रपति की 4 से 6 अक्‍टूबर, 2017 तक इथोपिया की राजकीय यात्रा के दौरान 5 अक्‍टूबर, 2017 को इस व्‍यापार करार पर हस्‍ताक्षर हुए थे। यह व्‍यापार करार 1982 में हस्‍ताक्षरित हुआ था, व वर्तमान व्‍यापार करार इसका स्‍थान लेगा।
    इस व्‍यापार करार में व्‍यापार, आर्थिक सहयोग, निवेश और तकनीकी क्षेत्र में प्रोत्‍साहन के लिए सभी आवश्‍यक उपायों का प्रावधान किया गया है।