Monday, 9 October 2017

गंगा मिशन ने 700 करोड़ लागत की आठ परियोजनाओं को मंजूरी दी

     नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन ने 700 करोड़ रुपये लागत की आठ परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इनमें से चार परियोजनाएं, उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल में सीवेज प्रबंधन से संबंधित हैं, जबकि तीन परियोजनाएं जैव-उपचार के माध्यम से नालों के उपचार तथा एक परियोजना गंगा नदी के अन्वेषण और निगरानी से संबंधित है। 

   सीवेज प्रबंधन के क्षेत्र में एक अनुमोदित परियोजना बेली, पश्चिम बंगाल में गंगा नदी में 200.07 करोड़ रूपये की अनुमानित लागत से प्रदूषण रोकने से संबंधित है। इसमें हाइब्रिड वार्षिकी के तहत पीपीपी मॉडल से 40 एमएलडी एसटीपी तथा अन्य कार्यों का निर्माण भी शामिल है।
   इसी तरह, भागलपुर, बिहार में हाइब्रिड वार्षिकी के तहत पीपीपी मॉडल से 65 एमएलडी एसटीपी के निर्माण की 268.49 करोड़ रुपये की लागत के अनुमानित लागत से मंजूरी दी गई है। उत्तर प्रदेश में 213.62 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से सीवेज उपचार संबंधी कार्यों को मंजूरी दी गई है जिसमें फर्रुखाबाद में दो एसटीपी (28 एमएलडी अ 05 एमएलडी) तथा फतेहपुर में बारगड़ीया नाले में 2 एमएलडी एसटीपी का निर्माण कार्य शामिल है। 
   गंगा नदी में प्रदूषण कम करने के लिए बिठूर में 13.40 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से सीवेज के अवरोधन, मार्ग बदलाव और उपचार जैसे कार्यों को मंजूरी दी गई है। जबकि तीन परियोजनाएं जैव-उपचार प्रौद्योगिकी का उपयोग करते हुए नालों के उपचार की 4.29 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली तीन परियोजनाओं को भी मंजूरी दी गई है।
     ये परियोजनाएं पटना में राजापुर नाला और दीघा नाला तथा हरिद्वार में लक्सर नाले के लिए हैं। गंगा नदी के प्रदूषण अंवेषण और मूल्यांकन तथा निगरानी की 42.9 करोड़ रूपए की अनुमानित लागत वाली परियोजना को मंजूरी दी है। मौजूदा प्रक्रिया को जारी रखते हुए इस परियोजना का उद्देश्य गंगा नदी में पर्यावरण विनियमन और जल गुणवत्ता की निगरानी रखना है।

साइबर आतंकवाद से निपटने की क्षमता विकसित करे केंद्रीय औद्योगिकी सुरक्षा बल

    अराकोन्नम। केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि साइबर आंतकवाद की किसी भी घटना से निपटने के लिए केंद्रीय औद्योगिकी सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) को उन्नत बनाना होगा। तकनीकी रूप से अग्रणी रहना होगा।

  तमिलनाडु के वैल्लोर जिले के अराकोन्नम में सीआईएसएफ के क्षेत्रीय प्रशिक्षण केन्द्र (आरटीसी) में सहायक कमांडेंट, सब-इंस्पेक्टर (एसीक्यूटिव) तथा असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (एग्सीक्यूटिव) के पासिंगआउट परेड को संबोधित कर रहे थे। राजनाथ सिंह ने कहा कि सीआईएसएफ में एक विशेषज्ञता संपन्न विंग होना चाहिए। सीआईएसएफ को वैसा बल बनना चाहिए जो नियमित रूप से साइबर सुरक्षा का आकलन करे। साइबर आतंकवाद से निपटने की क्षमता विकसित करे। 
      गृहमंत्री ने कहा कि विश्व के अनेक देश साइबर आतंकवाद का सामना कर रहे हैं। साइबर आतंकी महत्वपूर्ण संस्थानों, भवनों तथा प्रतिष्ठानों पर हमला करने के लिए डिजिटल मार्गों का उपयोग करते हैं। राजनाथ सिंह ने सीआईएसएफ से सभी महत्वपूर्ण भवनों तथा प्रतिष्ठानों की साइबर सुरक्षा आकलन करने को कहा। 
    उन्होंने कहा कि सीआईएसएफ को इन आकलन रिपोर्ट के आधार पर सुरक्षा व्यवस्था करनी चाहिए। नए प्रौद्योगिकी समाधानों को अपनाना चाहिए। केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि सीआईएसएफ को आतंकवाद के विरुद्ध सक्षम बने रहना चाहिए ताकि कोई भी आतंकवादी समूह हमारे रणनीतिक प्रतिष्ठानों पर हमला न करे।
   राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओँ में एक है इसलिए कुछ निश्चित भारत विरोधी बल आर्थिक क्षेत्र में भारत की प्रगति का सहन नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने इस बात संतोष प्रकट किया कि केन्द्रीय सशस्त्र बलों में सबसे अधिक महिलाएं सीआईएसएफ में है।
     राजनाथ सिंह ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि सीआईएसएफ पहला केंद्रीय बल होगा जो महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण के लक्ष्य को प्राप्त करेगा। सीआईएसएफ ने अपनी 48 वर्षों की यात्रा में अनेक मिल के पत्थर रखे हैं। वैश्विकरण और उदारीकरण में तेज वृद्धि के साथ सीआईएसएफ का विस्तार हुआ है। 
  परेड की सराहना करते हुए केंद्रीय गृहमंत्री ने सीआईएसएफ प्रोबेशनरों को प्रशिक्षित करने वाले प्रशिक्षकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि किसी भी बल का महत्वपूर्ण स्तंभ प्रशिक्षण है। राजनाथ सिंह ने आशा व्यक्त की कि प्रशिक्षण से प्रोबेशनरों को अपने कर्तव्य निर्वहन में मदद मिलेगी।
  केंद्रीय गृहमंत्री ने दीक्षांत परेड के दौरान पदक और पुरस्कार भी प्रदान किया। राजनाथ सिंह ने बाद में आरटीसी में सब-ऑफिसर्स लेडीज होस्टल की आधारशिला रखी। इस अवसर पर सीआईएसएफ के महानिदेशक ओ.पी.सिंह तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

देश के वयोश्रेष्ठ सब के लिए प्रेरणा के स्रोत

    नई दिल्ली। वयोश्रेष्ठ सम्मान प्रदान करने के अवसर पर भारत के राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द ने कहा वयोश्रेष्ठ सम्मान 2017 से पुरस्कृत हमारे नागरिक, हम सब के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं। 

 राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द ने कहा आप सब की प्रेरणादायी विशेषताओं पर आधारित जो फिल्में हमने देखीं हैं, उनका व्यापक प्रचार और प्रसार भी होना चाहिए। माँ की ममता से लेकर संघर्ष में बहादुरी तक, कला से लेकर खेल और जोखिम तक, चिकित्सा से ले कर जन-सेवा तक अनेक क्षेत्रों में आपने जो योगदान दिया है उस सबसे हमें बहुत कुछ सीखने की जरुरत है। 
     100 वर्ष से अधिक आयु की माता-तुल्य श्रीमती अरविंद दवे जी तथा 101 वर्ष से अधिक आयु के पिता-तुल्य श्री चेमनचेरी नायर जी को मैं विशेष रूप से नमन करता हूँ। आप सब से प्रेरणा ले कर सभी भारतवासी अपने जीवन को आशावाद, उत्साह और साहस के बल पर और अधिक सार्थक बनायेंगे, ऐसा मुझे विश्वास है।
      राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द ने कहा पिछली जनगणना के अनुसार हमारे देश में वरिष्ठ नागरिकों की आबादी लगभग साढ़े दस करोड़ थी, जो कि हमारी कुल आबादी का लगभग साढ़े आठ प्रतिशत था। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार तथा अन्य कारणों से हाल के दशकों में औसत जीवनकाल में वृद्धि हुई है इसमें और भी वृद्धि होने की संभावना है। 
    अनुमान है कि सन 2050 तक वरिष्ठ लोगों की संख्या हमारी कुल जनसंख्या का लगभग 19ऽ हो जाएगी। राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द ने कहा वैसे प्राचीन काल से ही हमारे देश में सामान्य जीवनकाल सौ वर्ष का माना जाता था। सौ वर्ष तक स्वस्थ और आत्मनिर्भर रहते हुए जीवन यापन करने की प्रार्थना की जाती थी। 
    यजुर्वेद में एक प्रार्थना है, पश्येम शरद: शतम्, जीवेम शरद: शतम् शृणुयाम शरद: शतम्,प्रब्रवाम शरद: शतम् हम सौ सालों तक ठीक से देख सकें, जीवित रह सकें, सुन सकें, बोल सकें और आत्मनिर्भर रह सकें। शायद प्रकृति के साथ समन्वय बैठा कर जीने की कला तथा समाज में एक दूसरे से जुड़े रहने की परंपरा के कारण लोगों की आयु लंबी रहा करती होगी। 
     राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द ने कहा भारत में बड़ों का सम्मान करने, आशीर्वाद लेने, और उनकी देखभाल करने की स्वस्थ परंपरा रही है। पाठशालाओं में सिखाया जाता था कि जो लोग सम्मानपूर्वक अभिवादन करते हैं और हमेशा वृद्धों की सेवा करते हैं उनकी आयु, विद्या, यश, और बल में लगातार बढ़ोतरी होती रहती है।
      राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द ने कहा मुझे यह जान कर प्रसन्नता हुई है कि भारत सरकार ने समय-समय पर वयोवृद्ध लोगों के कल्याण हेतु कदम उठाए हैं। अधिक आयु के लोगों की चिकित्सा के लिए विशेषज्ञता पर आधारित सेवाएँ दी जाएंगी। राज्य सरकारों की सहायता से कार्यान्वित राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत अतिरिक्त स्वास्थ्य बीमा की सहायता दी जा रही है। 
    जनवरी 2017 में प्रधानमंत्री ने जीवन बीमा निगम द्वारा कार्यान्वित की जाने वाली 'वरिष्ठ पेंशन बीमा योजना' की घोषणा की है। इस योजना के तहत वरिष्ठ नागरिकों के लिए दस वर्षों की अवधि के लिए 8ऽ सालाना की दर से आमदनी सुनिश्चित की गयी है।
     अधिकांश राज्य सरकारें वरिष्ठ नागरिकों की पेंशन के लिए अतिरिक्त अंश-दान उपलब्ध कराती हैं। वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा एवं संरक्षा के लिए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा लागू किया गया है जिसके तहत राज्य सरकारों और अधिकारियों को आवश्यक प्रावधान बनाने के स्पष्ट निर्देश दिये गए हैं। 
   वरिष्ठ नागरिकों को सक्रिय जीवन जीने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए ताकि वे आर्थिक रूप से स्वतंत्र रह सकें। राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द ने कहा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा अप्रैल 2017 से शुरू की गयी 'राष्ट्रीय वयोश्री योजना' के तहत गरीबी की सीमा रेखा में आने वाले वरिष्ठ नागरिकों को उपलब्ध कराये जा रहे हैं। 
       राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द ने कहा मुझे बताया गया है कि मंत्रालय द्वारा वयोवृद्ध लोगों के हित में एक नयी नीति पर काम चल रहा है। मैं मंत्री और उनकी टीम को उनके प्रयासों में सफलता के लिए शुभकामना व्यक्त करता हूँ। मैं एक बार फिर सम्मानित किए गए संस्थानों एवं वरिष्ठ नागरिकों को बधाई देते हुए आप सभी के स्वस्थ और मंगलकारी जीवन के लिए शुभकामनायें देता हूँ।

अभी 57 डाकघरों के माध्यम से पासपोर्ट सेवा

      नई दिल्ली। संचार मंत्री मनोज सिन्हा ने कहा कि सरकार 650 भारतीय डाक भुगतान बैंक स्थापित करने और वित्तीय समावेशन के प्रधान मंत्री के दर्शन को पूरा करने के लिए सभी 1.55 लाख डाकघरों के माध्यम से वित्तीय सेवाओं को उपलब्ध कराने हेतु तेजी से काम कर रहा है।

    विश्व डाक दिवस के अवसर पर उन्होंने कहा कि भारतीय डाक विभाग बदलते समय के साथ बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है, चाहे वह एटीएम की अंतर-संचालनशीलता हो, कोर बैंकिंग या फिर पासपोर्ट सेवा और आधार नामांकन प्रदान करना हो। उन्होंने कहा कि अभी 57 डाकघरों के माध्यम से पासपोर्ट सेवा प्रदान किया जा रहा है। आने वाले दिनों में इसमें 93 और डाकघरों को जोड़ा जाएगा। 
 सिन्हा ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र में ई-कॉमर्स सेक्टर में सीमा-पार आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन अंतर्राष्ट्रीय ट्रैक पैकेट सेवा की शुरूआत की। उन्होंने कहा कि शुरूआत में यह सेवा 12 देशों के लिए उपलब्ध होगी।
    धीरे-धीरे इसे पूरे विश्व में लागू किया जाएगा। इस नई सेवा में कई विशेष सुविधाएं जैसे सस्ती कीमत, ट्रैक और ट्रेस, वॉल्यूम छूट, सामान घर से उठाने की सुविधा, नुकसान या क्षति के लिए मुआवजा आदि का प्रावधान किया गया है। जिससे लोगों को उनके पैसे का उच्च मूल्य मिलेगा। 
       उन्होंने कहा कि इस सेवा के शुरू होने से डाक विभाग डाकघर और भारत में व्यापार के बीच घनिष्ठ सहयोग का एक नया अध्याय शुरू करने के लिए तैयार है, जो विदेशों में भी अपने ग्राहकों तक पहुंचना बनाना चाहते हैं। मंत्री ने 10 रूपये, 20 रूपये, 50 रूपये और 100 रुपये मूल्य के ई-आईपीओ (इंडियन पोस्टल ऑर्डर) का बिहार, दिल्ली और कर्नाटक में पायलट परियोजना के रूप में शुभारंभ किया।
     कहा कि अगले दो महीने में यह सेवा पूरे देश में लागू की जाएगी। ई-आईपीओ (इंडियन पोस्टल ऑर्डर) का उपयोग जैसे आरटीआई के लिए शुल्क भुगतान शैक्षणिक संस्थानों न्यायालय केबल ऑपरेटरों के लिए ऑनलाइन पंजीकरण इत्यादि में होगा। ग्राहक इस ई-आईपीओ को अपनी सुविधानुसार घर बैठे या फिर ऑफिस में रहते हुए भी खरीद सकता है। 
    इस सेवा का प्रारंभ डिजिटल इंडिया पहल के तहत किया जा रहा है जिसमें भुगतान डेबिट कार्ड क्रेडिट कार्ड नेट बैंकिंग के जरिए होगा। इस ई-आईपीओ को ऑनलाइन इस वेबसाइट पर जाकर खरीदा जा सकता है। इसे भारतीय डाक के आधिकारिक वेबसाइट से भी लिया जा सकता है।
   सिन्हा ने भारतीय डाक की पुनर्निर्मित वेबसाइट का भी अनावरण किया जिसे जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा करने के लिए उपयोगकर्ता के अनुकूल और सूचनात्मक बनाया गया है। नागरिकों को प्रासंगिक जानकारी तेजी से और एक उपयोगकर्ता के अनुकूल प्राप्त करने से लाभ होगा। 
   समारोह के दौरान, पोस्ट कार्ड, अंतर्देशीय पत्र और लिफाफा श्रेणी में स्मारक लेखन सामग्री जिसके अंतर्गत प्रत्येक में पांच डाक विरासत भवनों जैसे पटना जीपीओ, दिल्ली जीपीओ, मुंबई जीपीओ, शिमला जीपीओ और कोलकाता जीओपीओ को दिखाया गया है, भी जारी किए गए। पहली बार सामग्रियों को विविध रंगों के प्रारूप में जारी किया गया है। 
      अतिथि के रूप में संसद सदस्य सुश्री मीनाक्षी लेखी, डॉ. उदित राज और रमेश बिधुड़ी भी उपस्थित थे। साथ ही इस अवसर पर सचिव (डाक) ए. एन. नंदा और सदस्य (परियोजना) सुश्री मीरा हांडा भी उपस्थित थी। भारतीय डाक 9 अक्टूबर से 15 अक्टूबर तक हर वर्ष अक्टूबर माह में राष्ट्रीय डाक सप्ताह मनाता है, जिसकी शुरूआत प्रत्येक वर्ष 9 अक्टूबर (बर्न में 1874 में यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन (यूपीयू) की स्थापना की सालगिरह) को विश्व डाक दिवस के दिन से होता है।
     विश्व डाक दिवस मनाने का उद्देश्य आम लोगों और व्यवसायों के रोजमर्रा के जीवन में डाक क्षेत्र की भूमिका और देशों के सामाजिक और आर्थिक विकास में योगदान के बारे में जागरूकता पैदा करना है। इससे एक कदम और बढ़ते हुए, डाक विभाग प्रत्येक वर्ष राष्ट्रीय डाक सप्ताह मनाता है जिसका उद्देश्य अनेक कार्यक्रम/गतिविधियों का आयोजन कर जनता और मीडिया के बीच अपनी भूमिका और गतिविधियों के बारे में व्यापक जागरूकता पैदा करना है।

वैल्यू इंजीनियरिंग को लागू करने का निर्णय

    नई दिल्ली। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने राजमार्ग संबंधित परियोजनाओं, चाहे वह पीपीपी तरीके से या फिर सार्वजनिक वित्तपोषण तरीके से निष्पादित की जा रही हों, में नई प्रौद्योगिकियों, सामग्रियों और उपकरणों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए वैल्यू इंजीनियरिंग कार्यक्रम को लागू करने का निर्णय लिया है।

   इस कार्यक्रम का उद्देश्य परियोजनाओं की लागत कम करने और उन्हें अधिक पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए नई प्रौद्योगिकी, सामग्री और उपकरण का उपयोग करना है, जबकि साथ ही यह भी सुनिश्चित करना है कि सड़कों या पुलों और अन्य परिसंपत्तियां भी जो बहुत तेजी से निर्मित की जा रही हैं वह संरचनात्मक रूप से मजबूत और अधिक टिकाऊ हों। 
     वैल्यू इंजीनियरिंग कार्यक्रम से अपेक्षित है, निर्माण की गति में वृद्धि, निर्माण लागत को कम करना, परिसंपत्तियों के स्थायित्व में वृद्धि और सौंदर्यीकरण और सुरक्षा में सुधार। प्रस्तावों को स्वीकृति देने के लिए विशेषज्ञों के राष्ट्रीय पैनल का गठन किया था।

इस वर्ष योग की थीम : स्वस्थ जीवन के लिए योग

     नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू कल नई दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित प्रवासी भारतीय केंद्र में दो दिवसीय स्वस्थ जीवन के लिए अंतर्राष्ट्रीय योग सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे।

 आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीपद यसो नाइक कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे। संयुक्त राष्ट्र द्वारा 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस घोषित करने के उपलक्ष्य में आयुष मंत्रालय इस सम्मेलन का आयोजन कर रहा है।
    आयुष मंत्रालय के सचिव सी.के. मिश्रा, विशेष सचिव विद्या राजेश कोटेचा और अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त योग गुरू भी कार्यक्रम में उपस्थित रहेंगे। 44 देशों के 69 प्रतिनिधियों समेत लगभग 500 प्रतिनिधि इस सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।
    सम्मेलन के छह तकनीकी सत्रों में योग विषय पर विचार विमर्श किया जाएगा। इसके बाद प्रमुख वैज्ञानिक संस्थाओं के 16 विशेषज्ञ पैनल परिचर्चा में हिस्सा लेंगे। विचार विमर्श के प्रमुख विषय हैं, गैर-संक्रामक बीमारियां, एकीकृत दवा पद्धति में योग की संभावना, स्त्री रोग संबंधी विकार और दर्द प्रबंधन।
    तकनीकी सत्रों की अध्यक्षता 25 राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञ और 11 योग विशेषज्ञ द्वारा की जाएगी। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग, शिपिंग तथा जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री नितिन गडकरी सम्मेलन के समापन समारोह के मुख्य अतिथि होंगे।
    सम्मेलन आयुष, अंग्रेजी दवाओं, शोधार्थियों, शिक्षा जगत के विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं और छात्रों के लिए एक साझा मंच प्रदान करेगा और उन्हें स्वस्थ जीवन के लिए योग के विभिन्न आयामों को समझने में सहायता प्रदान करेगा। संयुक्त राष्ट्र द्वारा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस घोषित करने के 3 वर्षों के दौरान योग के प्रति रूचि और उत्साह में अत्यधिक वृद्धि हुई है।
     अंतर्राष्ट्रीय योग सम्मेलन का आयोजन सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन योगा एंड नैचुरोपैथी तथा मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ योग की सहायता से किया जा रहा है। यह सम्मेलन स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रबंधन में योग की भूमिका पर विमर्श करने, स्वस्थ जीवन को प्रोत्साहन देने और वैज्ञानिक अनुभवों को साझा करने का एक प्रयास है। 
    आयुष मंत्रालय द्वारा आयोजित होने वाला यह तीसरा अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन है। 2015 और 2016 में आयोजित होने वाले योग सम्मेलनों की क्रमशः थीम थी- संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए योग और शरीर और मन के लिए योग।

सिम्फनी बैंड ने 68वें स्थापना दिवस पर दी प्रस्तुति

    नई दिल्ली। प्रादेशिक सेना 9 अक्टूबर, 2017 को अपना 68वां स्थापना दिवस मना रही है।

 इस अवसर पर प्रादेशिक सेना सिम्फनी बैंड ने 8 अक्टूबर, 2017 को ऐतिहासिक इंडिया गेट पर अपनी प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का आयोजन प्रादेशिक सेना के प्रदर्शन को दिखाने, देश के नागरिकों को प्रेरित करने तथा उनमें राष्ट्रीय अखंडता का अभाव भरने के उद्देश्य से किया गया था। 
 सिम्फनी बैंड का गठन 2009 में किया गया था। विभिन्न प्रादेशिक सेना इकाईयों के सैन्य कर्मी इसके सदस्य होते हैं। सिम्फनी बैंड में 40 संगीतकार हैं। यह विभिन्नता में एकता के प्रतीक को दिखलाता है, जो प्रादेशिक सेना का मूल भाव भी है।
   इसका लोकप्रिय नाम नागरिकों की सेना भी है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। सिम्फनी बैंड के संगीत से उपस्थित लोग भाव-विभोर हो गए और उनमें देशभक्ति की भावना का भी संचार हुआ।