Thursday, 4 May 2017

भारत व ब्रिटेन के बीच गृह मंत्रालय वार्ता

            भारत व ब्रिटेन के बीच पहली गृह मंत्रालय वार्ता का आयोजन हुआ। भारतीय पक्ष का नेतृत्व केंद्रीय गृह सचिव राजीव महर्षि ने और ब्रिटेन के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सुश्री पात्सी विलकिंसन, दूसरी स्थायी सचिव, होम ऑफिस ब्रिटिश सरकार ने किया। 

           इस बैठक का आयोजन नंवबर 2016 में इंग्लैंड के प्रधानमंत्री की भारत यात्रा और दोनों प्रधानमंत्रियों द्वारा वार्ता को आगे बढ़ाने और मजबूत बनाने के लिए दर्शाई गयी प्रतिबद्धता की अनुवर्ती कार्यवाही के रूप में किया गया। दोनों पक्षों ने वांछित व्यक्तियों के प्रत्यर्पण से संबंधित मामलों के बारे में संतोष व्यक्त किया। प्रत्यर्पण के मामलों से संबंधित प्रक्रिया और इसमें आगे सुधार लाने की जरूरत के बारे में भी विचार- विमर्श किया। दोनों पक्षों ने अवैध प्रवासियों की चुनौतियों का समाधान करने के बारे में सहमति जताई। दोनों पक्ष राष्ट्रीयता सत्यापन के अधीन इंग्लैंड में अधिक अवधि से रह रहे भारतीयों की सहज वापसी सुनिश्चत करने के लिए भी मिलकर कार्य करेंगे। 

           गंभीर और संगठित अपराधों से निपटने के लिए अपराधियों के डाटा साझा करने और सहयोग को मजबूत बनाने के संबंध में दोनों पक्षों ने सहयोग के मौजूदा स्तर पर संतोष व्यक्त किया। दोनों पक्ष द्विपक्षीय सहयोग को और आगे बढ़ाने तथा मजबूत करने एवं प्रबंधों को औपचारिक रूप देने के लिए कार्य करने पर भी सहमत हुए। भारत ने भारतीय छात्रों, कुशल पेशेवरों और भारतीय राजनयिकों के आश्रितों के सामने आ रही वीजा संबंधित कठिनाइयों के मुद्दे को उठाया। 

              ब्रिटेन ने आश्वासन दिया कि इस बारे में ध्यान दिया जाएगा। ब्रिटेन के पक्ष ने यह उल्लेख किया कि वह दोनों देशों के मध्य लोगों की मौजूदा आवाजाही को बढ़ावा देने के लिए वीजा प्रक्रिया में सुधार लाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। ब्रिटेन के पक्ष ने पंजीकृत यात्री योजना और ग्रेट क्लब घोषणाओं के संबंध में हुई प्रगति के बारे में जानकारी दी। ये घोषणाएं इंग्लैंड के प्रधानमंत्री की 2016 में भारत यात्रा के दौरान की गईं थी। भारत और ब्रिटेन दोनों ने आतंकवाद निरोधी तंत्र में सहयोग बढ़ाने और साइबर अपराधों को रोकने और आपसी मदद को मजबूत बनाने पर जोर दिया।

किफायती एवं गुणवत्तापूर्ण बिजली का लक्ष्य

           केंद्रीय बिजली, कोयला, नवीन तथा नवीकरणीय ऊर्जा एवं खनन राज्य मंत्री पीयूष गोयल ने यहां दो दिवसीय राज्य बिजली मंत्रियों के सम्मेलन के समापन दिवस पर मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि “यह सम्मेलन अब तक के सर्वाधिक सफल, उत्पादक एवं परिणामोन्मुखी राज्य बिजली मंत्रियों के सम्मेलनों में से एक रहा है।” 

           सम्मेलन के परिणामों के बारे में जानकारी देते हुए गोयल ने कहा कि सम्मेलन में उपस्थित सभी राज्यों-केन्द्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों के बीच इस बात को लेकर एक व्यापक सर्वसहमति थी कि दिसंबर 2018 तक देश के सभी नागरिकों के लिए 24 घंटे किफायती एवं गुणवत्तापूर्ण बिजली के लक्ष्य को अर्जित कर लिया जाये तथा इसके द्वारा वडोदरा संकल्प में पुनर्मजबूती लायी जाये। संबंधित क्षेत्रों के मुद्दों पर खुले दिमाग से बहस के लिए एक फोरम के रूप में सम्मेलन के बारे में बात करते हुए गोयल ने जानकारी दी कि सम्मेलन के दौरान कुछ नये मुद्दों पर भी चर्चा की गयी। उन्होंने जानकारी दी की इन मुद्दों में पीने के उपयोग के लिए बिजली संयंत्रों से अपशिष्ट जल की अनिवार्य रिसाइक्लिंग, बिजली संयंत्रों के समीप सीमेंट संयंत्रों की स्थापना को प्रोत्साहित करने के द्वारा सूखी राख का बेहतर प्रबंधन आदि शामिल थे।

               मंत्री ने कहा कि सभी राज्यों ने सामूहिक रूप से बिजली एवं खनन क्षेत्रों की समस्याओं का नवप्रवर्तक समाधान ढूंढने पर कार्य करने का फैसला किया है। बिजली क्षेत्र सुधारों पर चर्चाओं के बारे में बात करते हुए गोयल ने जानकारी दी कि मंत्रियों ने “मेरिट ऑर्डर डिस्पैच” में पारदर्शिता लाने पर सहमति जताई और कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा इस संबंध में जल्द ही एक मोबाइल ऐप लांच किया जाएगा। साइबर सुरक्षा पर आयोजित सत्र में केन्द्र सरकार द्वारा राज्य सरकारों को डिजिटल तरीके से बिजली बिलों के भुगतान को प्रोत्साहित करने की अपील करना शामिल था जिससे कि पारदर्शिता बढे और बेहतर अनुपालन सुनिश्चित हो। 

             पर्यावरण मुद्दों एवं नवीकरणीय ऊर्जा द्वारा उनके समाधानों पर विचार विमर्शों के बारे में मीडिया को जानकारी देते हुए गोयल ने कहा कि राज्यों ने ग्रिड समेकन, हरित ऊर्जा गलियारों के संवर्धन, सिंचाई के लिए ऊर्जा सक्षम सौर पंपों के द्वारा नवीकरणीय बिजली को प्रोत्साहित करने का फैसला किया है। मंत्री ने बिजली क्षेत्र में विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए उद्योगों को निर्बाध रूप से बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। गोयल ने यह भी घोषणा की कि राज्य बिजली मंत्रियों का अगला सम्मेलन बिहार के राजगीर में आयोजित किया जाएगा।

          इस अवसर पर उपस्थित अन्य गणमान्य व्यक्तियों में राज्य सरकारों एवं सीपीएसयू के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के अतिरिक्त बिजली सचिव पी.के. पुजारी, खनन सचिव अरूण कुमार, एमएनआरइ के सचिव राजीव कपूर भी शामिल थे।

भारतीय मीडिया व मनोरंजन क्षेत्र में विकास के मजबूत चरण

                 सूचना व प्रसारण मंत्री एम वेकैंया नायडू ने कहा कि सरकार के ‘मेक इन इंडिया’, स्किल इंडिया और डिजिटल इंडिया अभियानों जैसे कार्यक्रम जीएसटी सहित नए परिवर्तनों के लिए स्पष्ट रूप से सकारात्मक संकेत दे रहे हैं। ये भारतीय मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र, विशेष रूप से प्रसारण क्षेत्र के लिए बहुत महत्वपूर्ण साबित होंगे। 

         उन्होंने यह बात भारतीय दूरसंचार प्राधिकरण के दो दशक पूरे होने के अवसर पर आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन का उद्धाटन करते हुए कही। नायडू ने यह भी उल्लेख किया कि देश में प्रसारण क्षेत्र, डिजिटल प्रसारण के नए युग में प्रवेश करने की दहलीज पर है, जो न केवल पहुंच बढ़ाने बल्कि नवीनतम नवाचारों के उपयोग के लिए अवसरों का पिटारा भी खोलेगा और पहुंच की गुणवत्ता भी बढाएगा। रेडियो के पुनरूद्धार, केबल के डिजिटाइजेशन और फ्री टू एयर डीटीएच दर्शक बढ़ोत्तरी ने ऐसे समय में भारतीय बाजार में प्रसारण की गुप्त मांग की ओर इशारा किया है, जब पश्चिम के उन्नत बाजारों में प्रसारण डिजिटल मांग वाले मीडिया मंच अब महत्वपूर्ण स्थान गंवाते जा रहे हैं।

             डिजिटल टैरिस्ट्रियल टेलिवीजन (डीटीटी) को ऐसे महत्वपूर्ण समय में बढ़ावा मिला है, जब भारत का सार्वजनिक प्रसारणकर्ता दूरदर्शन अपने मौजूदा 16 शहरों से अन्य 44 शहरों में डीटीटी फूड प्रिंट का विस्तार करने की ओर बढ़ रहा है। नायडू ने भारत में डीटीटी के समयबद्ध कार्यान्वयन के बारे में ट्राई द्वारा हाल में की गयी सिफारिशों की सराहना की। नायडू ने कहा कि सरकार मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र के विकास को विभिन्न नीतियों के माध्यम से आगे बढ़ाने के लिए एक सक्षम वातावरण उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। 

               मेक इन इंडिया अभियान भारत में इंटरनेट की बढ़ती हुई पैठ का लाभ उठाते हुए डिजिटल इंडिया अभियान वीडियो स्ट्रीमिंग, ऑनलाइन संगीत सेवाएं और गेमिंग जैसे उद्योगों को मजबूती प्रदान करेगा। उन्होंने यह उल्लेख भी किया कि विभिन्न उपकरणों का देश में मेक इन इंडिया पहल के तहत निर्माण हो रहा है। उन्होंने सभी हितधारकों से देश में देशी उपकरणों के विकास को बढ़ावा देने और प्रोत्साहित करने का अनुरोध किया। 

              भारतीय दूससंचार नियामक प्राधिकरण की भूमिका के बारे में उन्होंने कहा कि डिजिटल प्रसारण के लिए संक्रमण ने अनेक चुनौतियां पैदा की हैं और किसी भी बाधा से निपटने के संबंध में ट्राई की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने देश की दो दशकों से की जा रही नियामक सेवाओं को पूरा करने के लिए ट्राई को बधाई देते हुए कहा कि इसने उपभोक्ता संरक्षण को ध्यान में रखते हुए दूरसंचार और प्रसारण क्षेत्र के विकास में बहुत योगदान दिया है।

श्रमिक कल्याण सुनिश्चित करने के लिए सरलीकरण

             केन्द्रीय श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतन्त्र प्रभार) बंडारू दत्तात्रेय ने कहा है कि केन्द्र सरकार श्रम कानूनों में सुधार लाने का कार्य कर रही है। इसके प्रभावी क्रियान्वयन में सभी राज्य सरकारों का सहयोग आवश्यक है। 

          जयपुर में पश्चिम क्षेत्र के राज्यों के क्षेत्रीय सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर बंडारू दत्तात्रेय ने कहा कि जटिल कानूनों को सरल बनाने से निवेश और रोजगार बढेगा, साथ ही श्रमिक कल्याण में सुधार होगा। उन्होंने कहा कि भारत में मेक इन इण्डिया, स्किल इण्डिया और डिजीटल इण्डिया से देश में निवेश, रोजगार के अवसर और कार्यकुशल श्रम शक्ति में बढोतरी हुई है। भारत विश्व की सबसे तेज बढ़ती अर्थव्यवस्था बन गया है। दत्तात्रेय ने कहा कि श्रमिक कल्याण सुनिश्चित करने के लिए रजिस्टरों व आवेदन पत्रों का सरलीकरण किया जा रहा है। ई-शासन सुधारों पर भी केन्द्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा बल दिया जा रहा है। 

                 इसमें श्रम सुविधा पोर्टल रोजगार सृजन के महत्वपूर्ण साधन के रूप में सामने आया है। अपने अध्यक्षीय सम्बोधन में दत्तात्रेय ने बताया कि श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा गत तीन वर्षों में सर्वाधिक बिल संसद में पारित कराए गए।

               राजस्थान सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ0 जसवन्त सिंह ने अपने उद्घाटन संबोधन में राजस्थान में किए जा रहे श्रम सुधारों एवं नवाचारों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राजस्थान ने औद्योगिक विवाद अधिनियमों में वर्ष 2014 में ही बदलाव किया था जिससे रोजगार सृजन में वृद्धि हो। उन्होंने कहा कि राजस्थान में औद्योगिक वातावरण श्रमिकों के अनुकूल बन रहा है और प्रदेश में औद्योगिक शान्ति विद्यमान है। 

           डॉ0 जसवन्त सिंह ने बताया कि प्रदेश में स्टार्ट अप को बढ़ावा देने के लिए अधिसूचना तैयार की गई है जो जल्दी ही जारी की जाएगी। उन्होंने जानकारी दी कि प्रदेश में 46000 से अधिक लाइसेंस ऑन लाइन जारी किए गए हैं। कार्यक्रम में महाराष्ट्र के श्रम एवं रोजगार मंत्री सम्भा जी पटिल निलंगेकर ने बताया कि उनकी प्रदेश सरकार श्रमिकों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। श्रमिकों के परिवारों व अगली पीढ़ी के कल्याण के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। 

            उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में औद्योगिक हड़ताल न हों इसके लिए श्रमिकों को साथ लेकर नीति का निर्माण किया जा रहा है। जल्द ही नासिक सम्भाग को नो स्ट्राइक सम्भाग घोषित किया जाएगा। एक दिन चले इस क्षेत्रीय सम्मेलन में पशिचमी क्षेत्र के राज्यों गोवा, गुजरात, महाराष्ट्र, दादरा व नगर हवेली, राजस्थान और दमन व दीव के श्रम मंत्रियों व प्रमुख सचिवों, श्रम मंत्रालय के विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया। 

          केन्द्रीय श्रम सचिव श्रीमती एम सत्यवती ने स्वागत संबोधन में सम्मेलन के उद्देश्यों की जानकारी दी। सम्मेलन में श्रम सुधारों के सरलीकरण, श्रम कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन, न्यूनतम श्रम दरों, कर्मचारी प्रॉविडेन्ट फण्ड, आदि सम्बन्धित विषयों पर पश्चिमी राज्यों द्वारा चर्चा की गई।

चीनी उद्योग के लिए 4,305 करोड़ की ऋण सहायता

          प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने चीनी के संबंध में 27.10.2016 को जारी वर्तमान केंद्रीय आदेश की वैधता में 29.04.2017 से 28.10.2017 तक छह महीने और विस्‍तार देने की मंजूरी दी है। 

            इस निर्णय का मुख्‍य उद्देश्‍य केंद्र सरकार की पूर्व सहमति के साथ राज्‍य सरकारों को नियंत्रण आदेश जारी करने में समर्थ बनाना है ताकि उन्‍हें जब कभी जरूरत महूसस हो तो वे चीनी के स्‍टॉक-लाइसेंस आदि के बारे में निर्णय ले सकें। इससे आम लोगों के बीच उचित दर पर इन जिंसों की उपलब्‍धता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। साथ ही इससे जमाखोरी और मुनाफाखोरी पर लगाम लगाने में भी मदद मिलेगी। सरकार इस निर्णय को अधिसूचित करेगी और सभी राज्‍यों/केंद्र शासित प्रदेशों को इसके बारे में सूचित करेगी ताक‍ि आगे की कार्रवाई की जा सके।

             मंत्रिमंडल ने 27.10.2016 को आयोजित अपनी बैठक में निर्णय लिया था कि छह महीने के लिए राज्‍य सरकारों को चीनी की आपूर्ति, वितरण,‍ बिक्री, उत्‍पादन, स्‍टॉक, भंडारण, खरीद और आवाजाजाही को विनियमित करने में समर्थ बनाया जाए। तदनुसार एस. ओ. 3341 (ई) दिनांक 27.10.2016 जारी किया था ताकि प्रशासनिक विभाग, राज्‍यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 28.04.2017 तक चीनी के स्‍टॉक आदि के बारे में निर्णय लेने में समर्थ बनाया जा सके। 

            इसके लिए दिनांक 29.09.2016 को जारी और जी. एस. आर. 929 (ई) के तहत अधिसूचित निर्दिष्‍ट खाद्य पदार्थों के लिए लाइसेंस आवश्‍यकताओं, स्‍टॉक की सीमा और आवाजाही पर प्रतिबंध संबंधी आदेश में संशोधन किया गया। फैक्‍टरी गेट और घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों पर खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग द्वारा नियमित रूप से नजर रखी जा रही है। सितंबर 2016 में खुदरा कीमतों में अचानक तेजी दर्ज की गई थी। यह तेजी चीनी की वास्तविक कमी के बजाय कहीं अधिक भावनाओं पर आधारित दिखी। 

            चीनी की आपूर्ति को विनियमित करने और कीमत में संबंध में कयासबाजी संबंधी समस्‍याओं से निपटने के लिए जरूरत के आधार पर उचित स्‍टॉक सीमा को निर्धारित करना आवश्‍यक था। साथ ही चालू सीजन में खपत के लिए स्‍टॉक की पर्याप्‍त उपलब्‍धता के बावजूद पिछले साल उत्‍पादन में कमी के कारण जमाखोरी और मुनाफाखोरी की आशंका के मद्देनजर स्‍टॉक सीमा में विस्‍तार की आवश्‍यकता है।

             चीनी क्षेत्र की मदद के लिए सरकार ने हाल में उद्योग के लिए 4,305 करोड़ रुपये की ऋण सहायता को मंजूरी दी है। यह रकम चीनी मिलों की ओर से सीधे करीब 32 लाख किसानों के खाते में जमा होगी। इसके अलावा प्रदर्शन आधारित उत्‍पादन सब्सिडी को भी बढ़ाकर 4.50 रुपये प्रति क्विंटल गन्‍ने की पेराई कर दिया गया है जो चीनी मिलों की ओर से सीधे किसानों के खाते में जमा होगी।

            घरेलू मूल्‍यों को उचित स्‍तर पर बरकरार रखने के क्रम में सरकार ने शून्‍य शुल्‍क पर 5 लाख एमटी तक कच्‍ची चीनी के आयात को मंजूरी दी है। मिलर-रिफाइनर अपनी क्षमता के अनुरूप इसका लाभ उठा सकते हैं। इस प्रतिबंधित सीमा से चीनी उद्योग को आपूर्ति बढ़ाने और गन्‍ना किसानों के बकाये का भुगतान करने में मदद मिलेगी।

कच्चे तेल की अंतर्राष्ट्रीय कीमत 49.56 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल

            पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधीनस्‍थ पेट्रोलियम नियोजन एवं विश्‍लेषण प्रकोष्ठ के अनुसार भारतीय बास्केट के कच्चे तेल की अंतर्राष्‍ट्रीय कीमत 49.56 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल दर्ज की गई। 

            यह 02 मई, 2017 को दर्ज कीमत 50.36 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से कम है। रुपये के संदर्भ में भारतीय बास्केट के कच्चे तेल की कीमत 03 मई, 2017 को घटकर 3179.27 रुपये प्रति बैरल हो गई,  जबकि 02 मई, 2017 को यह 3233.78 रुपये प्रति बैरल थी। रुपया 03 मई, 2017 को मजबूत होकर 64.14 रुपये प्रति अमेरिकी डॉलर के स्तर पर बंद हुआ, जबकि 02 मई, 2017 को यह 64.21 रुपये प्रति अमेरिकी डॉलर था।

विश्व में योग एक आंदोलन बना

          हरिद्वार में पतंजलि अनुसंधान संस्थान के उद्घाटन समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सवा सौ करोड़ देशवासियों के आशीर्वाद की ताकत पर मेरा पूरा भरोसा है।

            प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मेरा अपने पर उतना भरोसा नहीं है, मुझ पर इतना भरोसा नहीं है, जितना की मुझे आपके और देशवासियों के आशीर्वाद की ताकत पर भरोसा है। और इसलिए वो आशीर्वाद ऊर्जा का स्रोत है, संस्का्र उसकी मर्यादाओं में बांध करके रखते हैं, और राष्ट्रक के लिए समर्पित जीवन जीने के लिए नित्य नई प्रेरणा मिलती रहती है। मैं आज जब आपके बीच में आया हूं, तो आप भी भली-भांति अनुभव करते होंगे कि आप ही के परिवार का कोई सदस्या आपके बीच में आया है। और मैं यहां पर पहली बार नहीं आया हूं, आप लोगों बीच बार-बार आने का मुझे सौभाग्य मिला है, एक परिवार के सदस्य के नाते आने का सौभाग्य मिला है। और ये भी मेरा सौभाग्य रहा है कि मैंने स्वामी रामदेव जी को, किस प्रकार से वो दुनिया के सामने उभर करके आते गए; बहुत निकट से मुझे देखने का सौभाग्य मिला है। उनका संकल्प और संकल्प के प्रति समर्पण, यही उनकी सफलता की सबसे बड़ी जड़ी-बूटी है। और ये जड़ी-बूटी बालकृष्ण आचार्य जी की खोजी हुई जड़ी-बूटी नहीं है; ये स्वामी जी ने खुद ने खोजी हुई जड़ी-बूटी है। बालकृष्ण जी की जड़ी-बूटी शरीर को स्व़स्थ रखने के लिए काम आती हैं, लेकिन स्वामी रामदेव जी वाली जड़ी-बूटी हर संकटों को पार कर-करके नैया को आगे बढ़ाने की ताकत देने वाली होती है।

                  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत के ऋषि-मुनियों की महान परम्परा, योग, उस पर विश्व का आकर्षण पैदा हुआ है, वे शांति की तलाश में हैं। वो बाहर की दुनिया से तंग आ करके भीतर की दुनिया को जानना, परखने के लिए प्रयास कर रहे हैं। ऐसे समय हम लोगों का कर्तव्य बन जाता है कि आधुनिक स्वरूप में योग एक ऐसा विज्ञान है; तन और मन की तंदुरूस्ती के लिए, आत्मा की चेतना के लिए, ये शास्त कितना सहज उपलब्ध हो सकता है। फुटपाथ पर भी कर सकते हो, मैदान में भी कर सकते हो, बगीचे में भी कर सकते हो, मंदिर के परिसर में भी कर सकते हो। ये बहुत बड़ा बदलाव आया है। और आज उसका परिणाम है कि 21 जून को जब विश्वर अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाता है, दुनिया के हर देश में योग का उत्स‍व मनाया जाता है, अधिकतम लोग उसमें जुड़ें, उसके लिए प्रयास होता है। मुझे विश्वा के जितने लोगों से मिलना होता है, मेरा अनुभव है कि देश की बात करेंगे, विकास की बात करेंगे, राजनीतिक परिदृश्य की चर्चा करेंगे, लेकिन एक बात अवश्य करते हैं, मेरे साथ योग के संबंध में तो एक-दो सवाल जरूर पूछते हैं। ये जिज्ञासा पैदा हुई है। हमारे आयुर्वेद की ता‍कत, थोड़ा-बहुत तो हमने ही उसे नुकसान पहुंचा दिया। आयुर्वेद वालों को लगा कि आपकी दवाइयों में दम नहीं है, अब आप लोगों को ठीक कर देते हो लेकिन ठीक होते नहीं हैं। तुम बड़े कि हम बड़े, इसी लड़ाई में सारा समय बीतता गया। अच्छा होता कि हमारी सभी ज्ञान, आधुनिक से आधुनिक ज्ञान भी, उसको भी हमारी इन परम्पराओं के साथ जोड़ करके आगे बढ़ाया होता तो शायद मानवता की बहुत बड़ी सेवा हुई होती। 

              प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हम तय करें, सवा सौ करोड़ देशवासी तय करें‍ कि मैं गंदगी नहीं करूंगा। कोई बड़ा संकल्पे लेने की जरूरत नहीं, इसमें जेल जाने की जरूरत नहीं है, फांसी पर लटकने की जरूरत नहीं है, देश के लिए सीमा पर जा करके जवानों की तरह मरने-मिटने की जरूरत नहीं है; छोटा सा काम- मैं गंदगी नहीं करूंगा।

              प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आपको कल्पना है एक डॉक्टर जितनी जिंदगी बचा लेता है, उससे ज्यादा बच्चों की जिंदगी आप गंदगी न करके बचा सकते हैं। आप एक गरीब को दान-पुण्य दे करके जितना पुण्य कमाते हो, गंदगी न करके एक गरीब जब स्वस्थ‍ रहता है, तो आपका दान रुपयों में देते हैं, उससे भी ज्यादा मूल्येवान हो जाता है। और मुझे खुशी है कि देश की जो नई पीढ़ी है, आने वाली पीढ़ी; छोटे-छोटे बालक, हर घर में वो झगड़ा करते हैं। अगर परिवार के वृद्ध व्यमक्ति ने, बुजुर्ग ने कोई एक अगर छोटी सी चीज फेंक दी, कार में जा रहे हैं छोटा पोता- पांच साल का, कार रुकवाता है, ठहरो, मोदी दादा ने मना किया है ये वापिस ले आओ; ये माहौल बन रहा है। छोटे-छोटे बालक भी मेरे इस स्वच्छता आंदोलन के सिपाही बन गए हैं। 

           प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमारे आयुर्वेद इसलिए लोगों तक नहीं पहुंचता है क्यों कि उसकी जो पद्धति है, वो आज के युग के अनुकूल नहीं है। वो इतनी सारी थैला-भर जड़ी-बूटी देंगे और फिर कहेंगे इसको उबालना, इतने पानी में उबालना, फिर इतना रस रहेगा, एक चम्मेच में लेना, फिर इसमें फलाना जोड़ना, ढिकना जोड़ना; और फिर लेना। तो जो सामान्यर व्यक्ति होता है उसको लगता है कि भई ये कौन कूड़ा-कचरा करेगा।