Wednesday, 16 August 2017

नई मेट्रो रेल नीति को मंजूरी, शहरी विकास लागत में कटौती

     प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने नई मेट्रो रेल नीति को मंजूरी दे दी। इस नीति का उद्देश्‍य अनेक शहरों के लोगों की रेल की आकांक्षाओं को पूरा करना है, लेकिन उत्‍तरदायी तरीके से। यह नीति अनेक मेट्रो संचालनों में बड़े पैमाने पर निजी निवेश का द्वार खोलने में सहायक होगी और इस नीति के अंतर्गत केन्‍द्रीय सहायता प्राप्‍त करने के लिए पीपीपी घटक अनिवार्य बनाया गया है।

     निजी निवेश तथा मेट्रो परियोजनाओं के वित्‍तीय पोषण के नये तरीकों को अनिवार्य बनाया गया है, ताकि पूंजी लागत वाली परियोजनाओं के लिए संसाधन की बड़ी मांग पूरी की जा सके। इस नीति में कहा गया है कि केन्‍द्रीय वित्‍तीय सहायता की इच्‍छुक सभी मेट्रो रेल परियोजनाओं में सम्‍पूर्ण प्रावधान के लिए या कुछ अलग-अलग घटकों के लिए (जैसे ऑटोमेटिक भाड़ा संग्रह, सेवा संचालन और रखरखाव आदि) निजी भागीदारी आवश्‍यक है। 
      ऐसा निजी संसाधनों, विशेषज्ञता और उद्यमिता को हासिल करने के लिए किया गया है। फिलहाल अपर्याप्‍त उपलब्‍धता तथा अंतिम छोर तक सम्‍पर्क के अभाव को देखते हुए नई नीति में राज्‍यों से मेट्रो स्‍टेशनों के दोनों ओर 5 किलोमीटर का सुविधा क्षेत्र छोड़ने का काम सुनिश्चित करें, ताकि फीडर सेवाओं, पैदल, साइकिल का रास्‍ता तथा पारा परिवहन सुविधाओं से अंतिम छोर तक सम्‍पर्क किया जा सके।
   नई मेट्रो परियोजनाओं का प्रस्‍ताव करने वाले राज्‍यों के लिए परियोजना रिपोर्ट में यह इंगित करना आवश्‍यक होगा कि ऐसी सेवाओं के लिए प्रस्‍ताव तथा निवेश किये जाएगे। नई नीति में वैकल्पिक विश्‍लेषण किया गया है। बीआरटीएस (बस रैपिड ट्रांजिट सिस्‍टम), लाइट रेल ट्रांजिट, ट्रैमवे, मेट्रो रेल तथा क्षेत्रीय रेल की मांग क्षमता, लागत और क्रियान्‍वयन सहजता की दृष्टि से मूल्‍यांकन करना आवश्‍यक है। शहरी महानगरीय परिवहन प्राधिकरण (यूएमटीए) की स्‍थापना को अनिवार्य बनाया गया है।
       यह प्राधिकरण शहरों के लिए आवाजाही संबंधी व्‍यापक योजना तैयार करेगा, ताकि क्षमता के अधिकतम उपयोग के लिए पूरी तरह बहु मॉडल एकीकरण सुनिश्चित हो सके। नई मेट्रो रेल नीति में नये मेट्रो प्रस्‍ताव के कठोर मूल्‍यांकन का प्रावधान है। इसमें सरकार द्वारा चिन्ह्ति एजेंसियों द्वारा स्‍वतंत्र तीसरे पक्ष का मूल्‍यांकन का प्रस्‍ताव है।
       मेट्रो परियोजनाओं के सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरण लाभों को ध्‍यान में रखते हुए वैश्विक व्‍यवहारों के अनुरूप मेट्रो परियोजनाओं को मंजूर करने के लिए वर्तमान वित्‍तीय आंतरिक रिटर्न दर 8 प्रतिशत की व्‍यवस्‍था को बदलकर 14 प्रतिशत आर्थिक आंतरिक रिटर्न दर की व्‍यवस्‍था का प्रावधान है। इस नीति में इस बात का ध्‍यान रखा गया है कि शहरी सार्वजनिक ट्रांजिट परियोजनाएं केवल शहरी परिवहन योजनाओं के रूप में न दिखें, बल्कि शहरी परिवर्तन परियोजनाओं के रूप में दिखें, इसलिए इस नीति में ट्रांजिट प्रेरित विकास (टीओडी) का प्रावधान है, ताकि मेट्रो गलियारों के साथ-साथ सटीक और घना शहरी विकास को प्रोत्‍साहित किया जा सके, क्‍योंकि ट्रांजिट प्रेरित विकास आने जाने की दूरी कम करता है।
     इस नीति के अंतर्गत राज्‍यों के लिए मेट्रो परियोजनाओं के वित्‍त पोषण के लिए वैल्‍यू कैप्‍चर वित्‍त पोषण उपायों जैसे नवाचारी तरीके अपनाना आवश्‍यक है। राज्‍यों को मेट्रो परियोजनाओं के लिए कारपोरेट बांण्‍ड जारी कर किफायती ऋण पूंजी प्रदान करने में सहायता देनी होगी। मेट्रो परियोजनाएं वित्‍तीय दृष्टि से व्‍यावहारिक हों यह सुनिश्चित करने के लिए नयी मेट्रो नीति में राज्‍यों से परियोजना रिपोर्ट में यह स्‍पष्‍ट रूप से प्रदर्शित करने को कहा गया है कि मेट्रो स्‍टेशनों और उसकी अन्‍य शहरी भूमि पर वाणिज्यिक संपत्ति के विकास के लिए क्‍या कदम उठाए जाएंगे।
        उनसे यह भी बताने को कहा गया है कि वैधानिक सहायता के अतिरिक्त यात्री किराये से इतर अन्‍य साधनों, जैसे विज्ञापनों, जगह को लीज पर देने आदि से कितनी अधिकतम आमदनी हो सकेगी। राज्‍यों से यह भी अपेक्षा की गयी है कि वे सभी वांछनीय स्‍वीकृतियां और अनुमोदन प्रदान करने का आश्‍वासन दें। नयी नीति राज्‍यों को इस बात का अधिकार देती है कि वे कायदे-कानून बना सकेंगे और किरायों में समय से संशोधन के लिए स्‍थायी किराया निर्धारण प्राधिकरण गठित कर सकेंगे।
       राज्‍य केन्‍द्रीय सहायता प्राप्‍त करने के लिए तीन विकल्‍पों में से किसी भी विकल्‍प का उपयोग करके मेट्रो परियोजनाएं शुरू कर सकते है। ये विकल्‍प हैं, वित्‍त मंत्रालय की वायाबिलिटी गैप फंडिंग (यानी कम पड़ती धनराशि का इंतजाम) योजना के तहत केन्द्रीय सहायता युक्त सार्वजनिक निजी भागीदारी के जरिए; भारत सरकार के अनुदान के माध्यम से, जिसके तहत परियोजना लागत का 10 प्रतिशत एकमुश्‍त केन्‍द्रीय सहायता के रूप में दिया जाएगा।
          केन्‍द्र एवं राज्‍य सरकारों के बीच 50:50 प्रतिशत आधार पर इक्विटी साझेदारी मॉडल के जरिए। हालांकि, इन तीनों ही विकल्‍पों में निजी भागीदारी अनिवार्य है। नीति में मेट्रो सेवाओं के संचालन और रखरखाव (ओएंडएम) में विभिन्‍न प्रकार से निजी क्षेत्र की भागीदारी की व्‍यवस्‍था की गयी है जो इस प्रकार हैं, लागत और शुल्‍क अनुबंध: निजी ऑपरेटर को रेल प्रणाली के संचालन और रखरखाव के लिए मासिक, वार्षिक आधार पर भुगतान किया जाता है। 
     इसके सेवाओं की गुणवत्‍ता को ध्‍यान में रखते हुए निश्चित और परिवर्तनशील घटक हो सकते हैं। संचालनात्‍मक और राजस्‍व संबंधी जोखिम सरकार द्वारा उठाया जाएगा। सकल लागत अनुबंध: निजी ऑपरेटर को अनुबंध की अवधि के लिए एक निश्चित राशि का भुगतान किया जाता है। ऑपरेटर को संचालन और रखरखाव का जोखिम उठाना होगा जबकि सरकार को राजस्‍व संबंधी जोखिम उठाना होगा।
       शुद्ध लागत अनुबंध: ऑपरेटर उपलब्‍ध करायी जाने वाली सेवाओं से अर्जित समूचा राजस्‍व एकत्र करता है। अगर राजस्‍व आय संचालन और रखरखाव लागत से कम हुई तो स्‍वामी मुआवजा देने के बारे में सहमत हो सकता है। इस वक्‍त मेट्रो आठ राज्‍यों में कुल 370 किलोमीटर की मेट्रो परियोजनाएं चालू हैं।
         इन शहरों के नाम हैं, दिल्‍ली (217 किलोमीटर), बेंगलुरु (42.30 किलोमीटर), कोलकाता (27.39 किलोमीटर), चेन्‍नई (27.36 किलोमीटर), कोच्चि (13.30 किलोमीटर), मुंबई (मेट्रो लाइन 1-11.40 किलोमीटर, मोनो रेल फेज 1-9.0), जयपुर (9.00 किलोमीटर) और गुड़गांव (रैपिड मैट़ो 1.60 किलोमीटर).। 13 राज्‍यों में कुल 537 किलोमीटर लम्‍बाई की मेट्रो परियोजनाओं का काम चल रहा है जिनमें ऊपर बताए गये आठ राज्‍य भी शामिल हैं। 
       मेट्रो सेवाओं की अपेक्षा करने वाले नये शहर हैं। हैदराबाद (71 किलोमीटर), नागपुर (38 किलोमीटर), अहमदाबाद (36 किलोमीटर), पुणे (31.25 किलोमीटर) और लखनऊ (23 किलोमीटर).। 13 शहरों में जिनमें 10 नये शहर भी शामिल हैं, 595 किलोमीटर कुल लंबाई की मेट्रो परियोजनाएं नियोजन और स्‍वीकृति के विभिन्‍न चरणों में चल रही हैं।
          ये हैं, दिल्‍ली मेट्रो फेज चार 103.93 किमी, दिल्‍ली और राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र-21.10 किमी, विजयवाड़ा 26.03 किमी, विशाखापट्टनम 42.55 किमी, भोपाल 27.87 किमी, इंदौर 31.55 किमी, कोच्चि मेट्रो फेज दो 11.20 किमी, वृहत्‍तर चंडीगढ़ क्षेत्र मेट्रो परियोजना 37.56, पटना 27.88 किमी, गुवाहाटी 61 किमी, वाराणसी 29.24 किमी, तिरुअनंतपुरम और कोषिकोड (लाइट रेल ट्रांसपोर्ट) 35.12 किमी और चेन्‍नई फेज दो 107.50 किमी।

उप राष्‍ट्रपति ने नवरोज पर बधाई दी

     उप राष्‍ट्रपति एम. वैंकेया नायडू ने पारसी नववर्ष नवरोज के शुभ अवसर पर लोगों को बधाई दी। अपने संदेश में, उन्होंने कहा कि नवरोज़ सभी के लिए भाईचारा, करुणा और सम्मान की भावना का प्रतीक है।

     उन्होंने कहा कि पारसी समुदाय ने राष्ट्र निर्माण के विभिन्न क्षेत्रों में बहुमूल्य योगदान दिया है। उप राष्‍ट्रपति के संदेश का पाठ इस प्रकार है, पारसी नव वर्ष की शुरुआत के प्रतीक नवरोज के शुभ अवसर पर मैं देश के लोगों को शुभकामनाएं देता हूं। पारंपरिक उत्साह और हर्षोल्‍लास के साथ मनाया जाने वाला नवरोज़ सभी के लिए भाईचारा, करुणा और सम्मान की भावना का प्रतीक है।
       पारसी समुदाय ने राष्ट्र निर्माण के विभिन्न क्षेत्रों में बहुमूल्य योगदान दिया है। दादाभाई नारौजी (स्वतंत्रता सेनानी), जेआरडी टाटा (उद्योग), एच.जे. भाभा (परमाणु वैज्ञानिक) और जुबिन मेहता (संगीत वादक) इस समुदाय के अनेक दिग्‍गजों में से ऐसे कुछ नाम हैं जिन्‍होंने भारत के विकास और प्रतिष्‍ठा में महत्‍वपूर्ण योगदान दिया है। नवरोज़ का यह शुभ अवसर हमारे जीवन में शांति, समृद्धि और खुशियां लाएगा।

उत्तरी कोयल जलाशय को पूरा करने को मंजूरी, लागत 1,622.27 करोड़

      प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने झारखंड और बिहार में उत्‍तरी कोयल जलाशय परियोजना के बकाया काम को परियोजना के फिर से प्रारंभ होने के तीन वर्षों में 1,622.27 करोड़ रुपये के अनुमानित खर्च से पूरा करने की मंजूरी दे दी है।

     मंत्रिमंडल ने बांध के जल स्‍तर को पहले के परिकल्पित स्‍तर के मुकाबले सीमित करने का भी फैसला किया ताकि कम इलाका बांध के डूब क्षेत्र में आए और बेतला राष्‍ट्रीय उद्यान और पलामू टाइगर रिजर्व को बचाया जा सके। यह परियोजना सोन नदी की सहायक उत्‍तरी कोयल नदी पर स्थित है जो बाद में गंगा नदी में जाकर मिलती है। उत्‍तरी कोयल जलाशय झारखंड राज्‍य में पलामू और गढ़वा जिलों के अत्‍यंत पिछड़े जनजातीय इलाके में स्थित है।
      इसका निर्माण कार्य मूलत: 1972 में प्रारंभ हुआ और 1993 में बिहार सरकार के वन विभाग ने इसे रुकवा दिया। तब से बांध का निर्माण कार्य ठप्‍प पड़ा हुआ था। परियोजना के प्रमुख घटकों में शामिल हैं। 67.86 मीटर ऊंचे और 343.33 मीटर लम्‍बे कंक्रीट बांध का निर्माण जिसे पहले मंडल बांध नाम दिया गया था। इसकी क्षमता 1160 मिलियन क्‍यूबिक मीटर (एमसीएम) जल संग्रह करने की निर्धारित की गयी थी।
       इसके अलावा परियोजना के तहत नदी के बहाव की निचली दिशा में मोहनगंज में 819.6 मीटर लंबा बैराज और बैराज के दांये और बांये तट से दो नहरें सिंचाई के लिए वितरण प्रणालियों समेत बनायी जानी थीं। बांध की ऊंचाई घटाकर 341 मीटर किये जाने से मंडल बांध की जल संग्रहण क्षमता अब 190 एमसीएम होगी। परियोजना के पूरा हो जाने पर झारखंड के पलामू और गढ़वा जिलों के साथ-साथ बिहार के औरंगाबाद और गया जिलों के सबसे पिछड़े और सूखे की आशंका वाले इलाकों में 111,521 हैक्‍टेयर जमीन की सिंचाई की व्‍यवस्‍था की जा सकेगी।
         फिलहाल अधूरी परियोजना से 71,720 हैक्‍टेयर जमीन की पहले ही सिंचाई हो रही है। पूर्ण हो जाने पर इससे 39,801 हैक्‍टेयर अतिरिक्‍त भूमि की सिंचाई होने लगेगी। इस परियोजना के जरिए दोनों राज्‍यों में सिंचाई क्षमता इस प्रकार होगी। कुल सिंचाई क्षमता 1,11,521 हेक्टेयर, बिहार में सिंचाई क्षमता 91,917 हेक्टेयर, झारखंड में सिंचाई क्षमता 19,604 हेक्टेयर। परियोजना की कुल लागत अभी तक 2391.36 करोड़ रुपये आंकी गई है।
      अभी तक 769.09 करोड़ रुपये की राशि इस परियोजना पर खर्च की गई है। केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने तीन वित्त वर्षों के दौरान 1622.27 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से झारखंड और बिहार में उत्तरी कोयल जलाशय परियोजना के शेष बचे कार्यों को पूरा करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। शेष बचे कार्यों के 1013.11 करोड़ रुपये के सामान्य घटकों का वित्त पोषण केन्द्र सरकार द्वारा पीएमकेएसवाई कोष से अनुदान के रूप में किया जाएगा। इनमें शुद्ध वर्तमान मूल्य (एनपीवी) तथा प्रतिपूरक वनीकरण (सीए) की लागत शामिल हैं, जो क्रमशः 607 करोड़ और 43 करोड़ रुपये है।
       केन्द्र सरकार बिहार और झारखंड राज्यों से अनुदान के रूप में प्राप्त पीएमकेएसवाई के तहत दीर्घकालिक सिंचाई कोष (एलटीआईएफ) से 365.5 करोड़ रुपये तक (बिहार-318.64 करोड़ रुपये और झारखंड-46.86 करोड़ रुपये) के शेष बचे कार्यों की कुल लागत के 60 प्रतिशत का भी वित्त पोषण करेगी। 
        बिहार और झारखंड राज्य उस दर पर नाबार्ड के जरिए एलटीआईएफ से ऋण के रूप में 243.66 करोड़ रुपये (बिहार-212.43 करोड़ रुपये और झारखंड-31.23 करोड़ रुपये) के शेष बचे कार्यों की शेष लागत के 40 प्रतिशत की व्यवस्था करेंगे, जिस पर कोई सब्सिडी नहीं होगी और वह बगैर किसी ब्याज सब्सिडी के बाजार उधारी लागत से संबंधित है।
        कैबिनेट ने परियोजना प्रबंधन सलाहकार (पीएमसी) के रूप में जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय के अधीनस्थ एक केन्द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम (सीपीएसयू) मेसर्स वापकॉस लिमिटेड द्वारा टर्नकी आधार पर परियोजना के शेष बचे कार्यों के क्रियान्वयन को भी मंजूरी दी। परियोजना के क्रियान्वयन पर नजर नीति आयोग के सीईओ की अध्यक्षता वाली भारत सरकार की उच्चाधिकार प्राप्त समिति रखेगी।

आस्था के नाम पर हिंसा करने वालों की आलोचना, भारत इसे बर्दाश्त नहीं करेगा

   प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 71वें स्वतंत्रता दिवस पर लालकिले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित किया। प्रधानमंत्री ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण योगदान देने वाली समस्त महान विभूतियों का स्मरण किया।

     उन्होंने कहा कि देशवासियों को प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहे परिवारों के साथ-साथ गोरखपुर में हुई त्रासदी से भी प्रभावित लोगों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहना चाहिए। प्रधानमंत्री ने यह बात रेखांकित की कि वर्तमान वर्ष निश्चित तौर पर विशेष है, क्योंकि यह भारत छोड़ो आंदोलन की 75वीं वर्षगांठ, चम्पारण सत्याग्रह की 100वीं वर्षगांठ और बाल गंगाधर तिलक से प्रेरित सार्वजनिक गणेश उत्सव के समारोह की 125वीं वर्षगांठ है।
    प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्र ने वर्ष 1942 और 1947 के बीच सामूहिक शक्ति का प्रदर्शन किया था, जिसकी परिणति भारत की स्वाधीनता के रूप में हुई। उन्होंने कहा कि हमें वर्ष 2022 तक एक नये भारत के सृजन के लिए समान सामूहिक दृढ़ निश्चय और संकल्प का प्रदर्शन करना चाहिए। उन्होंने विशेष बल देते हुए कहा कि हमारे देश में सभी एक समान हैं और हम आपस में मिलकर गुणात्मक बदलाव ला सकते हैं।
    प्रधानमंत्री ने सकारात्मक बदलाव सुनिश्चित करने के लिए चलता है दृष्टिकोण को छोड़ बदल सकता है नजरिया अपनाने का आह्वान किया। नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भारत की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है तथा सर्जिकल स्ट्राइक ने इसे रेखांकित किया है। उन्होंने कहा कि विश्व स्तर पर भारत की हैसियत बढ़ रही है और कई देश आतंकवाद की समस्या से निपटने के लिए भारत के साथ सहयोग कर रहे हैं।
      विमुद्रीकरण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने देश और गरीबों को लूटा है, वे चैन से सो नहीं पा रहे हैं और आज ईमानदारी का जश्न मनाया जा रहा है। उन्होंने विशेष बल देते हुए कहा कि कालेधन के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी और प्रौद्योगिकी पारदर्शिता सुनिश्चित करने में मददगार साबित होगी। उन्होंने लोगों का आह्वान किया कि वे डिजिटल लेन-देन को और ज्यादा बढ़ावा दें।
        प्रधानमंत्री ने जीएसटी पर अमल को सहकारी संघवाद का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि आज गरीब वित्तीय समावेश की पहल के जरिए मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं। उन्होंने विशेष जोर देते हुए कहा कि सुशासन का वास्ता निश्चित तौर पर प्रक्रियाओं की तेज गति और सरलीकरण से है। जम्मू-कश्मीर का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने विशेष जोर देते हुए कहा, न गाली से, न गोली से, परिवर्तन होगा गले लगाने से।
       प्रधानमंत्री ने नये भारत के अपने विजन का उल्लेख करते हुए कहा, तंत्र से लोक नहीं, लोक से तंत्र चलेगा। प्रधानमंत्री ने इस वर्ष रिकॉर्ड फसल पैदावार के लिए किसानों और कृषि वैज्ञानिकों की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस वर्ष 16 लाख टन दालों की खरीदारी की है, जो विगत वर्षों में की गई खरीदारी की तुलना में बहुत अधिक है। 
      प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रौद्योगिकी के बदलते स्वरूप के परिणामस्वरूप आज रोजगार के लिए कुछ भिन्न कौशल की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं को कुछ इस तरह से कौशल युक्त किया जा रहा है, जिससे कि वे रोजगार मांगने की बजाय रोजगार सृजित करें। तीन तलाक से पीड़ित महिलाओं का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वह इस परम्परा के खिलाफ आवाज उठाने वाली महिलाओं के साहस की सराहना करते हैं।
      उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्र इस संघर्ष में उनके साथ खड़ा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत शांति, एकता और सौहार्द का हिमायती है। उन्होंने कहा कि जातिवाद और सम्प्रदायवाद से हमारा भला नहीं होगा। उन्होंने आस्था के नाम पर हिंसा करने वालों की कटु आलोचना की और कहा कि भारत इसे बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान भारत छोड़ो का आह्वान किया गया था, जबकि आज भारत जोड़ो का आह्वान करने की आवश्यकता है।
         प्रधानमंत्री ने कहा कि पूर्वी भारत और पूर्वोत्तर भारत के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार विकास की गति को मंद किए बगैर ही देश को प्रगति के नये मार्ग पर ले जा रही है। शास्त्रों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, अनियत कालहा प्रभुतयो विप्लवन्ते, जिसका अर्थ यह है कि यदि हम सही समय पर सही कदम नहीं उठाएंगे तो हम अपेक्षित परिणाम प्राप्त नहीं कर पाएंगे।
       उन्होंने कहा कि यह टीम इंडिया के लिए नये भारत का संकल्प लेने का बिल्कुल सही समय है। उन्होंने एक ऐसे नये भारत के सृजन का आह्वान किया, जिसमें गरीबों के पास अपना मकान होगा, पानी एवं बिजली की सुविधाएं उन्हें सुलभ होंगी, किसान चिंता मुक्त होंगे एवं आज के मुकाबले उनकी आमदनी दोगुनी होगी।
         उन्होंने कहा कि यह ऐसा नया भारत होगा जिसमें युवाओं एवं महिलाओं के पास अपने सपनों को साकार करने के लिए पर्याप्त अवसर होंगे। उन्होंने कहा कि यह ऐसा नया भारत होगा, जो आतंकवाद, सम्प्रदायवाद, जातिवाद, भ्रष्टाचार एवं भाई-भतीजावाद से मुक्त होगा और इसके साथ ही स्वच्छ एवं स्वस्थ भी होगा। प्रधानमंत्री ने शौर्य पुरस्कार विजेताओं के सम्मान में एक वेबसाइट लांच करने की घोषणा की।

भारतीय वायुसेना व सीमा सुरक्षा बल का संयुक्त महिला ऊंट दल अभियान

     भारतीय वायुसेना ने सीमा सुरक्षा बल के साथ संयुक्त महिला ऊंट दल अभियान का शुभारंभ किया। राजस्‍थान के बाड़मेर स्थि‍त उत्‍तरलाई से प्रारंभ हुआ यह अभियान दल पंजाब में अमृतसर स्थि‍त अटारी तक जाएगा और 30 सितंबर, 2017 को समाप्‍त होगा।

   इस अभियान दल को आज उत्‍तरलाई स्थित वायुसेना स्‍टेशन से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। दल में वायुसेना और सीमा सुरक्षा बल के दस-दस महिला कर्मी सम्मिलित है। वायुसेना के दस कर्मियों के दल का नेतृत्‍व स्‍क्‍वाड्रन लीडर अनियोस्‍का लोमस कर रही है और यह दल गुजरात, राजस्‍थान और पंजाब में लक्ष्य प्राप्त करने का प्रयास करेगा।
      वर्ष 2011 में भारतीय वायुसेना ने महिला अभियान दल ने माउंट एवरेस्‍ट पर तिरंगा और वायुसेना का ध्‍वज फहराकर इतिहास रचा था। वायुसेना दल अपने आदर्श वाक्‍य ‘आसमान की बुलंदियों को गर्व के साथ स्‍पर्श’ की भावना को कायम रखते हुए इस लगभग 1400 किलोमीटर के साहसिक अभियान के लिए तैयार है। 
    अभियान के दौरान दल नागरिकों को ‘स्‍वच्‍छ भारत’ और ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ अभियान के प्रति जागरूक करेगा। इसके साथ ही वायुसेना, इसकी भूमिका तथा वायुसेना में विशेष रूप से लड़कियों के लिए रोजगार के विभिन्‍न अवसरों पर भी जागरूक करेगा। अभियान का उद्देश्‍य भारतीय वायुसेना में साहसिक गतिविधियों को प्रोत्‍साहन देना और भारतीय युवाओं को वायुसेना में सम्मिलित होने के प्रति प्रोत्‍साहित करना है। 
      अभियान दल ने सीमा सुरक्षा बल कर्मियों के साथ जोधपुर स्थि‍त सीमा सुरक्षा बल के सहायक प्रशिक्षण केंद्र में अभ्‍यास किया। इस अवसर पर भारतीय वायुसेना के स्‍काईडाइंविंग दल ‘एयर डेविल’ ने अपनी गतिविधियों का प्रदर्शन भी किया।