Monday, 26 February 2018

भारत में स्‍मार्टफोन इस्‍तेमाल करने वालों की संख्‍या 53 करोड़

     नई दिल्ली। केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण तथा वस्‍त्र मंत्री श्रीमती स्मृति जुबिन ईरानी ने कहा है कि दूरदर्शन को गुणवत्‍ता युक्‍त सामग्री तैयार करने तथा विज्ञापन के जरिए राजस्‍व बढाने के लिए फ्री डिश द्वारा बनाई गयी पहुंच का लाभ उठाना चाहिए ताकि करदाताओं पर बोझ कम हो सके।

  श्रीमती ईरानी आज यहां (ब्रॉडकास्ट इंजीनियर्स सोसाइटी) द्वारा नान लीनियर ब्रॉडकास्टिंग टेक्नोलॉजीस एंड बिज़नेस मॉडल' विषय पर टेरेस्‍टीरियल और सेटेलाइट ब्रॉडकास्टिंग प्रसारण के 24 वें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन और प्रदर्शनी बीईएस एक्‍सपो 2018 के उद्घाटन अवसर पर बेाल रही थीं। 
   श्रीमती ईरानी ने इस मौके पर कहा कि‍ भारत में स्‍मार्टफोन इस्‍तेमाल करने वालों की संख्‍या इस साल के अंत तक 53 करोड़ हो जाएगी जो कि चीन के बाद स्‍मार्टफोन के दूसरे सबसे ज्‍यादा उपभोक्‍ता होंगे। उन्‍होंने कहा कि‍ 40 प्रतिशत से अधिक सामग्री का ऑनलाइन इस्‍तेमाल किया जाता है।
    उन्होंने यह भी कहा कि इस साल विज्ञापन पर होने वाला खर्च पिछले साल के 9.6 प्रतिशत से बढ़कर 12.5 प्रतिशत ​​हो जाने की संभावना है। सूचना प्रसारण मंत्री ने बीईएस से ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग संस्थानों के छात्रों और शिक्षकों के साथ संपर्क विस्‍तार का कार्यक्रम संचालित करने का भी अनुरोध किया।
   उन्‍होंने कहा कि भारत में प्रसारण क्षेत्र की क्षमता को केवल उपलब्ध चैनलों की संख्या के आधार पर नहीं बल्कि इसके द्वारा उपलब्‍ध करायी गयी सामग्री की गुणवत्ता के आधार पर देखा जाना चाहिए। उन्होंने प्रसार भारती के सभी ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने का बीईएस से अनुरोध किया। बीईएस एक्सपो 2018 ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग सोसाइटी (इंडिया) द्वारा आयोजित किया गया है।
     इस एक्सपो को भारत में प्रसारण प्रौद्योगिकी का सबसे बड़ा आयोजन माना जा रहा है।  25 देशों की लगभग 300 कंपनियां बीईएस एक्सपो 2018 में सीधे तौर पर या फिर भारत में डीलरों और वितरकों के माध्यम से अपने उत्पाद प्रदर्शित करेंगी। 
    प्रदर्शनी में ऑस्ट्रेलिया, ऑस्ट्रिया, कनाडा, चीन, डेनमार्क, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, हांगकांग, भारत, इज़राइल, इटली, जापान, कोरिया, नीदरलैंड, नॉर्वे, सिंगापुर, स्पेन, स्वीडन, स्विट्जरलैंड, ताइवान, यूके और अमेरीका की कंपनियां शामिल हो रही हैं।
    एक्‍सपो के उद्घाटन अवसर पर सूचना एंव प्रसारण सचिव एन के सिन्‍हा,प्रसार भारती के मुख्‍य कार्यकारी अधिकारी शशि शेखर वेमपति तथा प्रसारण प्रौद्योगिकी क्षेत्र के वरिष्‍ठ अनुसंधानकर्ता डेविड गोम्‍ज बरक्‍यूऐरो भी उपस्थित थे।

15 शहरों में अंतरमॉडल स्टेशन बनेंगे, नागपुर व वाराणसी की तैयारी

    नई दिल्ली। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने नागपुर और वाराणसी में अंतरमॉडल स्टेशन (आईएमएस) स्थापित करने के लिए विस्तृत संभावना अध्ययन किया है और इसके लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयारी के अंतिम चरण में है। 

  अंतरमॉडल स्टेशन विकसित करने के लिए देश के 15 शहरों को प्राथमिकता दी गई है जिसमें से नागपुर और वाराणसी को पायलट परियोजना के लिए चुना गया है। 
    अंतरमॉडल स्टेशन एक टर्मिनल संरचना है, जहां एक ही स्थान पर रेल, सड़क, मास रैपिड ट्रांजिट प्रणाली, बस रैपिड ट्रांजिट प्रणाली, अंतर्देशीय जल मार्ग, ऑटोरिक्शा, टैक्सी और निजी वाहन एकत्रित होते हैं ताकि लोग बिना किसी बाधा के ऑटोमोबाइल के न्यूनतम उपयोग के साथ एक से दूसरे साधन से आवाजाही कर सकेंगे।
    अभी अधिकतर शहरों में बस अड्डे, रेलवे स्टेशन तथा अन्य पड़ाव एक दूसरे से अन्य स्थानों पर हैं। इसलिए पहले से भीड़भाड़ वाली सड़कों पर अंतरमॉडल आवाजाही से दबाव बनता है। परिवहन के विभिन्न साधनों को एक स्थान पर लाकर अंतरमॉडल स्टेशन सड़कों पर भीड़भाड़ कम करेंगे और वाहन प्रदूषण में भी कमी आएगी। अंतरमॉडल स्टेशन लोगों को सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल को प्रोत्साहित कर तथा अंतर शहर बस यातायात के प्रवेश और निकास के लिए रिंगरोड़ और राष्ट्रीय राजमार्गों के कारगर इस्तेमाल करके भीड़भाड़ कम करने में मददगार साबित होंगे।
    अंतरमॉडल स्टेशन नई जोड़ने वाली सड़कों, पुलों तथा फ्लाइओवरों के जरिये सड़क नेटवर्क विकास के साथ-साथ एकीकृत रूप में बनाए जायेंगे। ये स्टेशन अगले 30 वर्षों के लिए यात्रियों की संख्या भार सहन करेंगे और इसमें ट्रैवेलेटरों के साथ फुटओवर ब्रिज, सब वे, साझा प्रतीक्षालय, स्वच्छ शौचालय और विश्राम गृह, एकीकृत सार्वजनिक सूचना प्रणाली, आधुनिक अग्निशमन सुविधा तथा आपातक्रिया सेवा, उपयोगी सामान भंडार, कॉनकोर्स तथा स्केलेटर, पर्याप्त सर्कुलेशन स्थान तथा वाणिज्यीक प्रतिष्ठान होंगे।
   अकेले टर्मिनलों की तुलना में अंतरमॉडल स्टेशन विकसित करने के अनेक लाभ हैं। एकत्रित आवागमन: अगल-अलग परिवहन टर्मिनलों की तुलना में अंतरमॉडल स्टेशनों पर अधिक लोगों का आवागमन होगा। सुधरा यात्री अनुभव :  अनेक भागों के सहयोग के कारण सुविधाओं का बेहतर प्रबंधन होता है और वाणिज्यिक विकास एकत्रिक आवागमन से प्रेरित होता है।
     इसके अतिरिक्त यात्रियों को विभिन्न टर्मिनलों के बीच यात्रियों के आने-जाने के लिए समय और धन की आवश्यकता नहीं होती। संसाधनों को साझा करना: फुटआवर ब्रिज, प्रतीक्षालय, कॉनकोर्स, सार्वजनिक सुविधा जैसी साझा आधारभूत संरचना से निवेश में कमी आती है और जमीन की आवश्यकता भी कम होती है। परिणामस्वरूप निवेश की कम जरूरत होती है और प्रणाली में आपसी तालमेल बढ़ता है।
    अंतरमॉडल स्टेशनों के विकास से शहरों में वाणिज्यिक विकास होगा, आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी और इससे विकास के क्षेत्र का सामाजिक-आर्थिक स्वरूप बदलेगा। अंतरमॉडल स्टेशनों का क्रियान्वयन और संचालन राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के माध्यम से सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, रेल मंत्रालय तथा संबंधित राज्य सरकारों के बीच स्पेशल पर्पस व्हेकिल (एसपीवी) से किया जाएगा। 
   एसपीवी के सदस्य प्रद्त पूंजी या जमीन एसपीवी के इक्विटी योगदान के रूप में उपलब्ध कराएंगे। सड़क परिवहन मंत्रालय/ एनएचएआई रेल अवसंचरना सहित टर्मिनल अवसंरचना, आईएसबीटी, साझा क्षेत्र (कॉनकोर्स, प्रतीक्षालय, परिवहन), पार्किंग तथा अन्य स्टेशन सुविधाओं के निर्माण के लिए धन देगा।
  निर्माण तथा संचालन और प्रबंधन की जिम्मेदारी निजी छूटग्राहियों को हाईब्रिड एन्यूटी मॉडल (एचएएम) आधार पर बोली के जरिये दी जाएगी। अंतरमॉडल स्टेशनों का संचालन प्रारंभ होने के बाद वाणिज्यिक विकास आधिकार पीपीपी मोड पर बोली के जरिये दिए जाएंगे। वाणिज्यिक विकास से प्राप्त होने वाली राशि का इस्तेमाल निर्माण लागत को पुनः प्राप्त करने में किया जाएगा।

12 लाख से भी ज्‍यादा पीएलएचआईवी लाभान्वित होंगे

    नई दिल्ली। केन्‍द्रीय स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्री जे.पी. नड्डा ने आज यहां आयोजित एक समारोह में ‘एचआईवी/एड्स (पीएलएचआईवी) से पीडि़त लोगों के लिए वायरल लोड टेस्‍ट’ का शुभारंभ किया।

   इसके साथ ही उन्‍होंने इसे ऐतिहासिक दिन बताया। इस पहल से देश में इलाज करा रहे 12 लाख पीएलएचआईवी का नि:शुल्‍क वायरल लोड टेस्‍ट साल में कम से कम एक बार अवश्‍य कराया जा सकेगा। 
   श्री नड्डा ने यह भी घोषणा की कि ‘सभी का इलाज (ट्रीट ऑल)’ के बाद वायरल लोड टेस्‍ट एचआईवी से पीडि़त लोगों के इलाज एवं निगरानी की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्‍होंने कहा कि यह वायरल लोड टेस्‍ट आजीवन एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी करा रहे मरीजों के इलाज की प्रभावशीलता की निगरानी करने की दृष्टि से विशेष महत्‍व रखता है। स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण राज्‍य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल भी इस अवसर पर उपस्थित थीं। 
    श्री नड्डा ने यह भी कहा कि नियमित वायरल लोड टेस्‍ट ‘फर्स्‍ट-लाइन रेजिमेंस (नियमानुसार परहेज)’ के उपयोग को अनुकूलित करेगा, जिससे एचआईवी से पीड़ित लोगों में दवा प्रतिरोध का निवारण हो सकेगा और उनकी दीर्घायु सुनिश्चित होगी। 
   उन्‍होंने कहा कि वायरल लोड टेस्‍ट एआरटी से जुड़े चिकित्‍सा अधिकारियों को फर्स्‍ट-लाइन इलाज की विफलता के बारे में पहले ही पता लगाने में सक्षम बनाएगा और इस तरह यह पीएलएचआईवी को दवा का प्रतिरोध करने से बचाएगा। यह एलएफयू (लॉस टू फॉलो अप) पीएलएचआईवी पर नजर रखने के मामले में ‘मिशन संपर्क’ को मजबूत करने में भी मददगार साबित होगा। 
    केन्‍द्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ने बताया कि वर्ष 2017 में भारत ने एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) उपचार प्रोटोकॉल को संशोधित किया था, ताकि एआरटी वाले समस्‍त पीएलएचआईवी के लिए ‘ट्रीट ऑल’ का शुभारंभ हो सके। 
    श्री नड्डा ने कहा कि यह ‘ट्रीट ऑल’ पहल इसलिए की गई थी, ताकि उपचार जल्‍द शुरू हो सके और व्‍यक्तिगत एवं समुदाय दोनों ही स्‍तरों पर वायरस के संचरण को कम किया जा सके। वर्तमान में लगभग 12 लाख पीएलएचआईवी 530 से भी अधिक एआरटी केन्‍द्रों में मुफ्त उपचार का लाभ उठा रहे हैं।