Monday, 6 March 2017

सिक्किम की विकास दर 20 फीसदी

          पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष विभाग मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने तीन दिवसीय ‘डेस्टिनेशन नॉर्थ ईस्ट - 2017’ कार्यक्रम का उद्घाटन किया। 

            इस अवसर पर सम्बोधित करते हुए डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि पूर्वोत्तर के लोग एवं वहां की संस्कृति को देश के प्रत्येक कोने तक पहुंचाने के प्रयासों के क्रम में इस वर्ष ‘डेस्टिनेशन नॉर्थ ईस्ट 2017’ कार्यक्रम को आयोजित करने के लिए चंडीगढ़ शहर को चुना गया है। उन्होंने कहा कि यह पहला मौका है, जब इस कार्यक्रम को राजधानी दिल्ली से बाहर किसी दूसरे शहर में आयोजित किया जा रहा है। 

               मंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार के सत्ता में आने के बाद, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के उन हिस्सों को अधिक प्राथमिकता दी है, जिनकी वर्षों से अनदेखी की जा रही थी। भारत की अनेकता में एकता वाली सोच का उदाहरण देते हुए डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि पूर्वोत्तर में विविधता में विविधता वास करती है, क्योंकि वहां विभिन्न विभिन्न जातीय समूह शांति से रहते हैं। एक-दूसरे की उपलब्धियों के पूरक हैं। मंत्री ने कहा कि पूर्वोत्तर के प्रत्येक राज्य की पहचान पूर्वोत्तर के एक राज्य के तौर पर होने के बजाय, ख़ुद उस राज्य के नाम से होनी चाहिए। 

             उन्होंने आगे कहा कि पूर्वोत्तर के प्रत्येक राज्य की अपनी कुछ ख़ासियत है। प्रत्येक राज्य को उसकी इसी ख़ासियत से पहचाना जाना चाहिए। उदाहरण के तौर पर, उन्होंने कहा कि मिज़ोरम को भारत के खेल राज्य के तौर पर पहचाना जाना चाहिए, क्योंकि यहां से बहुतायत संख्या में एथलीट आते हैं, मिज़ोरम को बांबू राज्य के तौर पर पहचाना जाना चाहिए, सिक्किम को भारत के जैविक राज्य के तौर पर पहचाना जाना चाहिए और असम को भारत के जलमार्ग राज्य के तौर पर पहचाना जाना चाहिए। 

            उन्होंने कहा कि उनके मंत्रालय की प्राथमिकता देश के अन्य क्षेत्रों के लोगों को पूर्वोत्तर के लोगों के करीब लाना है। डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि पूर्वोत्तर में कुछ राज्य हैं, जोकि अनुशासन एवं कठोर परिश्रम के बल पर बेहतर कार्य कर रहे हैं। जैसे कि मिज़ोरम, जहां साक्षरता दर केरल के बाद दूसरे स्थान पर है, और सिक्किम, जिसकी विकास दर 20 फीसदी है। मंत्री ने कहा कि पूर्वोत्तर में अधिक संभावनाएं होने की वजह से, यह क्षेत्र दुनियाभर में निवेश के लिए चुनिंदा गंतव्यों में से एक के रूप में उभरकर सामने आएगा। 

         संसद सदस्य श्रीमती किरण खेर ने कहा कि अपनी सुंदरता और यहां के लोगों में अतिथि सत्कार की भावना की वजह से पूर्वोत्तर बहुत अच्छा पर्यटन गंतव्य है। पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास मंत्रालय के सचिव नवीन वर्मा ने कहा कि डेस्टिनेशन नॉर्थ ईस्ट 2017 समारोह को चंडीगढ़ में आयोजित करने के पीछे यह विचार है कि चंडीगढ़ और संपूर्ण उत्तर भारत के लोग पूर्वोत्तर को समझ पाएं। यहां के लोग, विरासत, संस्कृति आदि से रूबरू हो पाएं। इसके साथ ही ये लोग पूर्वोत्तर में निवेश की संभावनाएं भी तलाश पाएं। 

                उन्होंने कहा कि तीन दिवसीय यह समारोह देशभर के अन्य स्थानों के लोगों को पूर्वोत्तर के करीब लाना और इन लोगों के बीच बेहतर संबंध स्थापित करने की दिशा में एक सराहनीय कदम है। पीएचडी चैम्बर ऑफ वाणिज्य एवं उद्योग के अध्यक्ष गोपाल जीवार्जका ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में निवेश आदि को बढ़ावा देने और इसे पर्यटक गंतव्य के तौर पर दुनियाभर में प्रस्तुत करने के लिए पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास मंत्रालय द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। 

            सीएसआईआर के महानिदेशक डॉ. गिरीश साहनी और पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास मंत्रालय एवं सीएसआईआर के वरिष्ठ अधिकारी इस समारोह के मौके पर उपस्थित रहे। पूर्वोत्तर को बेहतरीन निवेश गंतव्य के तौर पर दुनिया के सामने प्रदर्शित करने के लिए ‘डेस्टिनेशन नॉर्थ ईस्ट - 2017’ समारोह पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास मंत्रालय द्वारा आयोजित किया जा रहा है। इस समारोह का मुख्य विषय पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास के लिए विभिन्न तरह की तकनीकों का सकारात्मक एवं प्रभावशाली तरीके से उपयोग करना है।

देश के विकास के लिए महिला सशक्तिकरण, मुक्ति व समानता महत्वपूर्ण

            सूचना व प्रसारण मंत्री वैंकेया नायडू ने कहा कि देश के विकास में महिलाओँ की भूमिका को परिभाषित करने के तीन महत्वपूर्ण तत्व हैं। 

सूचना व प्रसारण मंत्री वैंकेया नायडू ने कहा कि  महिला सशक्तिकरण, मुक्ति तथा समानता। सरकार विभिन्न उपायों के जरिए महिलाओं और लड़कियों के लिए समान अधिकार और अवसर उपलब्ध कराने के प्रति संकल्पबद्ध है। साथ-साथ सूचना और प्रसारण मंत्री ने फिल्मों में महिलाओं को घिसेपीटे और पारंपरिक रूप से दिखाने पर चिंता व्यक्त की। वैंकेया नायडू तेजस्विनी धारावाही की 100वीं कड़ी पूरी होने पर दूरदर्शन समाचार द्वारा आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे। 

                  इस अवसर पर सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौर भी उपस्थित थे। नायडू ने महिलाओं और लड़कियों से संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए सरकार द्वारा किए गए विभिन्न उपायों की चर्चा की। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम का उद्देश्य व्यवहार में परिवर्तन लाना और महिलाओँ की भूमिका के बारे में लोगों की सोच को बदलना है। सुकन्या समृद्धि योजना हमारी बेटियों को वित्तीय सुरक्षा उपलब्ध कराती है। प्रधानमंत्री द्वारा मन की बात के माध्यम से लाँन्च किया गया। सेल्फी विद डॉटर्स अभियान पूरे विश्व भर में फैला। यह पूरी दुनिया के टॉप 5 ट्रेंड में रहा। 

                         नायडू ने इस अवसर पर जीवन के विभिन्न क्षेत्रों से आई 14 तेजस्विनियों को सम्मानित किया। सूचना और प्रसारण मंत्री ने इस अवसर पर तेजस्विनी यू-ट्यूब लिंक का उद्घाटन भी किया। इस अवसर पर सूचना और प्रसारण मंत्री ने कहा कि महिलाओं को उनके अधिकारों के बारे में जानकारी देने में मीडिया को भी महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्मों के माध्यम से नारी शक्ति कार्यक्रमों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अपने देश के इतिहास में योगदान करने वाले और उदाहरण पेश करने वाली महिला नेताओं और बुद्धिजीवियों से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को सामाजिक स्थान पर लाने में हमारे देश ने काफी काम किया है। 

            उन्होंने कहा कि यद्यपि हम पुरानी मनोवृत्ति से और व्यवहारों से उभर आए हैं लेकिन लैंगिक समानता के बारे में लोगों को संवेदी बनाने का कार्य पूरा करना है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक क्षेत्र में भारतीय महिलाओं की भूमिका और उनके योगदान दिखते हैं। भारतीय महिलाएं बैंकर, अंतरिक्ष वैज्ञानिक, पुलिस तथा कॉरपोरेट पेशे में महत्वपूर्ण नेतृत्व निभा रही हैं। सॉफ्टवेयर उद्योग का 30 प्रतिशत कार्यबल महिलाओं का है। भारतीय महिलाओं ने खेल के क्षेत्र में भी अपनी शक्ति का प्रदर्शऩ किया है। बैडमिंटन में पी.वी.सिंधु, कुश्ती में साक्षी मलिक और मुक्केबाजी में मैरी कॉम इसके उदाहरण हैं। यहां तक की वर्तमान सरकार में महिला सहयोगी, विदेश मंत्रालय, वाणिज्य तथा महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को नेतृत्व प्रदान कर रही है। 

                   महिलाओं के असाधारण प्रयासों की चर्चा करते हुए नायडू ने कहा कि छत्तीसगढ़ की 105 वर्षीय कुँवर बाई के जोश की कहानी हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है। स्वच्छ भारत अभियान के शुभंकर के रूप में प्रधानमंत्री द्वारा हाल में उनका सम्मान किया गया। नायडू ने कहा कि प्रसिद्ध महिलाओं की प्रेरणादायी कहानियां और उपलब्धि प्राप्त करने वाली महिलाओं के साक्षात्कार से वैसी महिलाएं प्रेरित होंगी जिनकी और ध्यान नहीं गया। उन्होंने प्रसार भारती से लड़कियाँ, किशोरियों तथा महिलाओं के लिए सरकार द्वारा चलायी जा रही विभिन्न योजनाओं का संदेश फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का आग्रह किया।

                  उन्होंने कहा कि महिलाओं की योग्यता, मेधा और शक्ति को दिखाने वाले कार्यक्रम बनाने और विकसित किये जाने चाहिए। इससे देश में महिला आंदोलन सशक्त होगा। इससे पहले महिला और बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने महिला सशक्तिकरण की दिशा में मंत्रालय द्वारा शुरू किए गए कार्यक्रमों की चर्चा की। श्रीमती गांधी ने विशेष रूप से समानता के विचार को प्रोत्साहित करने के लिए सोशल मीडिया पर मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया “हम समान हैं अभियान” की चर्चा की।

                सम्मानित तेजस्विनियों में सुश्री दीपा मलिक, पैरालम्पिक 2017 रजत पदक विजेता, सुश्री सुनीता चौधरी, दिल्ली की पहली ऑटो रिक्शा चालक, सुश्री गीतांजलि बब्बर, सेक्स वर्कर्स के लिए सामाजिक कार्यकर्ता, सुश्री अर्चना रामसुंदरम, अर्द्धसैनिक विंग की पहली महिला प्रमुख, पंडिता अनुराधा पाल, विश्व की पहली महिला पेशेवर तबला वादक, डॉ सोनल मानसिंह, भरतनाट्यम कलाकार, सुश्री उषा चोमर, स्वच्छता एम्बेसेडर, सुश्री प्रतिष्ठा सारस्वत, योगाचार्य, विंग कमांडर पूजा ठाकुर, सुश्री प्रज्ञा घिलडियाल, दिव्यांगता के साथ सर्वश्रेष्ठ खेल व्यक्ति, सुश्री रूपा, एसिड हमले से सुरक्षित बचीं, सुश्री मधु, एसिड हमले से सुरक्षित बचीं, सुश्री नीतू, एसिड हमले से सुरक्षित बचीं, सुश्री संतोष यादव, पर्वतारोही है।

अंतर्राष्ट्रीय स्मार्ट ग्रिड : प्रौद्योगिकी की समझदारी

          भारत सरकार का विद्युत मंत्रालय पावर ग्रिड कॉरपोरेट सेंटर गुरुग्राम में अंतर्राष्ट्रीय स्मार्ट ग्रिड एक्शन नेटवर्क (आईएसजीएएन) की कार्य समिति की 13वीं बैठक का आयोजन कर रहा है। 

        भारत में आईएसजीएएन की कार्यसमिति की पहली बैठक हो रही है। 6, 7 तथा 9 मार्च, 2017 को विभिन्न सत्र आयोजित किए जाएंगे। आईएसजीएएन कार्यसमिति की बैठक का उद्घाटन दीप जलाकर आईएसजीएएन प्रेसिडियम के अध्यक्ष माइकल डी.निगरिस, पावर ग्रिड के सीएमडी आई एस झा, विद्युत मंत्रालय में संयुक्त सचिव (वितरण) डॉ. अरूण कुमार वर्मा द्वारा किया गया। 

               उद्घाटन सत्र में वर्मा ने आईएसजीएएन समुदाय के निर्देशन के लिए स्मार्ट ग्रिड तथा मॉडल स्मार्ट ग्रिड नियमन पर भारत के प्रशिक्षण मॉड्यूल को साझा किया। आईएसजीएएन की 13वीं कार्य समिति की बैठक में हुए निर्णयों और कार्यों से भारत में स्मार्ट ग्रिड लागू करने के काम को प्रोत्साहन मिलेगा। आईएसजीएएन का उद्देश्य स्मार्ट ग्रिड प्रौद्योगिकी, व्यवहार की समझदारी में सुधार करना और संबंधित सहायक सरकारी नीतियों को अपनाने में प्रोत्साहन देना है।

              विश्व में स्मार्ट ग्रिड के क्षेत्र में ज्ञान साझा करने, तकनीकी सहायता तथा परियोजना समन्वय से भारत में स्मार्ट ग्रिड प्रौद्योगिकी लगाने में मदद मिलेगी। आईएसजीएएन अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) के अंतर्गत एक संधि है। इसमें विश्व के 25 देशों के प्रतिनिधि हैं। भारत आईएसजीएएन का संस्थापक सदस्य है। विद्युत मंत्रालय में संयुक्त सचिव (वितरण) भारत के सदस्य प्रतिनिधि हैं। आईएसजीएएन सरकारों के बीच सहयोग के लिए बहुपक्षीय व्यवस्था करता है ताकि स्मार्ट इलेक्ट्रीक ग्रिड प्रौद्योगिकी, व्यवहारों तथा प्रणालियों को विकसित किया जा सके। स्थापित किया जा सके। 

            इस बैठक में 18 देशों, ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इटली, जापान, कोरिया, नार्वे, रूस, दक्षिण अफ्रीका, सिंगापुर, स्पेन, स्वीडन, स्विट्जरलैंड, अमेरिका तथा संयुक्त अरब अमीरात के 36 प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।

2500 किलोमीटर लंबे आर्थिक गलियारे के लिए 375 मिलियन डॉलर का ऋण

             एशियाई विकास बैंक (एडीबी) और भारत सरकार ने 800 किलोमीटर लंबे विशाखापत्तनम-चेन्नई औद्योगिक गलियारे (कॉरिडोर) को विकसित करने के लिए यहां 375 मिलियन डॉलर के ऋण एवं अनुदान करार पर हस्ताक्षर किए, जो एक नियोजित 2500 किलोमीटर लंबे पूर्वी तट आर्थिक गलियारे (ईसीईसी) का प्रथम चरण है। 

           इस गलियारे से भारत सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ नीति के अनुरूप भारत के पूर्वी तट पर विकास की रफ्तार बढ़ने की आशा है, ताकि एशिया के गतिशील वैश्विक उत्पादन नेटवर्कों के साथ भारतीय अर्थव्यवस्था को एकीकृत करने के लिए विनिर्माण एवं ‘एक्ट ईस्ट’ नीति को नई गति प्रदान की जा सके। करार पर 23 फरवरी, 2017 को हस्ताक्षर किए गए। 

             इससे पहले एडीबी ने विशाखापत्तनम-चेन्नई औद्योगिक गलियारे को विकसित करने के लिए सितंबर, 2016 में 631 मिलियन डॉलर के ऋणों एवं अनुदानों को मंजूरी दी थी। एडीबी द्वारा स्वीकृत किए गए ऋणों में गलियारे के आस-पास स्थित चार प्रमुख केन्द्रों में बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए 500 मिलियन डॉलर की बहु-किस्त सुविधा भी शामिल है। इन चार प्रमुख केन्द्रों में आंध्र प्रदेश राज्य के विशाखापत्तनम, काकीनाडा, अमरावती और येरपेडु-श्रीकलहस्ती शामिल हैं। 245 मिलियन डॉलर की पहली किस्त पर हस्ताक्षर किए गए, जिससे इस गलियारे के चार केन्द्रों में से दो केन्द्रों में उच्च गुणवत्ता वाले आंतरिक बुनियादी ढांचे के विकास से जुड़ी उप-परियोजनाओं का वित्त पोषण किया जाएगा। 

            इन दो केन्द्रों में से विशाखापत्तनम और येरपेडु-श्रीकलहस्ती शामिल हैं। 23 फरवरी, 2017 को हस्ताक्षरित किए गए एडीबी कोष का एक अन्य हिस्सा 125 मिलियन डॉलर के नीति आधारित ऋण के रूप में है, जिसका इस्तेमाल गलियारे के प्रबंधन में संलग्न संस्थानों के क्षमता विकास, कारोबार में आसानी सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक सहायता देने और औद्योगिक विकास की गति बढ़ाने के लिए औद्योगिक एवं क्षेत्र संबंधी नीतियों को आवश्यक सहायता प्रदान करने में किया जाएगा। 

            भारत सरकार की तरफ से इस ऋण करार पर हस्ताक्षर करने वाले वित्त मंत्रालय में संयुक्त सचिव (बहुपक्षीय संस्थान) राज कुमार ने कहा, ‘यह परियोजना गलियारे की विकास प्रक्रिया के साथ-साथ मेक इन इंडिया के उद्देश्यों की प्राप्ति की दिशा में मील का पत्थर है। हम यह उम्मीद करते हैं कि यह परियोजना औद्योगिक विकास की गति बढ़ाने और उच्च गुणवत्ता वाली नौकरियों के सृजन के लिए आंध्र प्रदेश की सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों का पूरक साबित होगी।’ 

           आंध्र प्रदेश की सरकार की तरफ से सरकार (वित्त) में विशेष सचिव हेमा मुनिवेंकटप्पा ने इस परियोजना के करार पर हस्ताक्षर किए। एडीबी के ऋणों के साथ-साथ बहु-दानदाता शहरी जलवायु परिवर्तन लचीला ट्रस्ट फंड की ओर से 5 मिलियन डॉलर के अनुदान के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। 

           इस फंड का प्रबंधन एडीबी द्वारा किया जाता है। जिसका उद्देश्य जलवायु परिवर्तन से जुड़े लचीले बुनियादी ढांचे का निर्माण करना है। भारत सरकार 846 मिलियन डॉलर की परियोजना के लिए 215 मिलियन डॉलर की अतिरिक्त धनराशि मुहैया कराएगी।

प्रथम एकीकृत हेलिपोर्ट राष्ट्र को समर्पित

               नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा पवन हंस के सहयोग से दिल्ली के रोहिणी हेलिपोर्ट पर प्रथम एकीकृत हेलिपोर्ट राष्ट्र को समर्पित किया गया। 

            इस सुविधा का उद्घाटन करने के बाद नागरिक उड्डयन मंत्री अशोक गजपति राजू ने कहा कि हेलिपोर्ट एक उत्कृष्ट बुनियादी ढांचा है। इसके साथ ही उन्होंने इस ओर ध्यान दिलाया कि भारत में हेलिकॉप्टर सेवाएं अब भी प्रारंभिक अवस्था में ही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस सुविधा से लागत नियंत्रण में ही रहेगी, क्योंकि एमआरओ सुविधा को भी इसमें शामिल किया गया है। इससे रोजगार सृजन में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि इस आनंददायक सेवा का उज्ज्वल भविष्य है।

                   उन्होंने यह उम्मीद भी जताई कि पायलट प्रशिक्षण केन्द्र की स्थापना जल्द ही कर दी जाएगी। नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री जयंत सिन्हा ने कहा कि उड्डयन क्षेत्र लगभग हर दिन नया इतिहास रच रहा है। हेलिपोर्ट भी इसी तरह की एक अनूठी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि यह सुविधा आपातकालीन चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने और जन सुरक्षा के साथ-साथ पर्यटन को बढ़ावा देने में भी उपयोगी साबित होगी। सिन्हा ने यह भी कहा कि यदि एटीएफ पर वर्तमान 25 फीसदी टैक्स को कम कर दिया जाए तो हेलिकॉप्टर सेवाएं आर्थिक दृष्टि से लाभप्रद साबित हो सकती हैं। 

               नागरिक उड्डयन सचिव आर.एन. चौबे ने कहा कि यह चार हेलिपोर्ट बनाने यानी हर क्षेत्र में एक हेलिपोर्ट बनाने संबंधी राष्ट्रीय विमानन नीति का एक हिस्सा है। रोहिणी में बनाया गया हेलिपोर्ट इस दिशा में पहला कदम है। उन्होंने यह भी कहा कि हेलिकॉप्टर से जुड़े परिचालनों को इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से हटा कर रोहिणी में स्थानांतरित किया जा सकता है। रोहिणी हेलिपोर्ट के निर्माण कार्य को तकरीबन 100 करोड़ रुपये की लागत से लगभग दो वर्षों में पूरा किया गया है। यह हेलिपोर्ट समस्त हेलिकॉप्टर परिचालन सुविधाएं मुहैया कराएगा। 

              व्यस्त इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे को भीड़-भाड़ से मुक्त कराएगा। इसके साथ ही यह नियमित यात्री सेवाओं के लिए देश के उत्तरी हिस्से में हेलिकॉप्टरों के जरिए क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी को बढ़ावा भी देगा। इसके साथ ही यह हेलिपोर्ट हेलि सेवाओं, हेलिकॉप्टरों की लैंडिंग एवं पार्किंग, हेलिकॉप्टर रख-रखाव सेवाओं (एमआरओ), आपदा प्रबंधन, हेलिकॉप्टर आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं (एचईएमएस), कानून-व्यवस्था की निगरानी में भी उपयोगी साबित होगा। 

              इस हेलिपोर्ट में 150 यात्रियों की क्षमता वाली एक टर्मिनल इमारत,16 हेलिकॉप्टरों के लिए पार्किंग सुविधाओं से युक्त 4 हैंगर और 9 पार्किंग बे शामिल हैं। पवन हंस ने भी इस हेलिपोर्ट से सभी प्रमुख गंतव्यों जैसे कि दिल्ली से शिमला, हरिद्वार, देहरादून, मथुरा, आगरा, मेरठ और औद्योगिक केन्द्रों (हब) जैसे कि मानेसर, बहादुरगढ़ इत्यादि को आपस में जोड़ने के लिए एक खाका तैयार किया है। इसके तहत रोहिणी हेलिपोर्ट से दिल्ली और आसपास के शहरों के बीच हवाई कनेक्टिविटी सुलभ कराई जाएगी।

तेल की अंतर्राष्ट्रीय कीमत 54.02 डॉलर प्रति बैरल
 


पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधीनस्‍थ पेट्रोलियम नियोजन एवं विश्‍लेषण प्रकोष्ठ (पीपीएसी) द्वारा संगणित-प्रकाशित सूचना के अनुसार भारतीय बास्‍केट के कच्चे तेल की अंतर्राष्‍ट्रीय कीमत 54.02 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल दर्ज की गई। यह 02 मार्च, 2017 को दर्ज कीमत 54.82 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से कम है। 

                रुपये के संदर्भ में भारतीय बास्केट के कच्चे तेल की कीमत 03 मार्च, 2017 को घटकर 3610.23 रुपये प्रति बैरल रह गई, जबकि 02 मार्च, 2017 को यह 3658.54 रुपये प्रति बैरल थी। रूपया 03 मार्च, 2017 को कमजोर होकर 66.84 रुपये प्रति अमेरिकी डॉलर के स्तर पर बंद हुआ। जबकि 02 मार्च, 2017 को यह 66.74 रुपये प्रति अमेरिकी डॉलर था।