Saturday, 11 March 2017

राष्ट्रपति का मॉरीशस के स्वतंत्रता दिवस पर संदेश

            राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने मॉरीशस के स्वतंत्रता दिवस की वर्षगांठ की पूर्व संध्या पर मॉरीशस की सरकार एवं वहां के लोगों को अपनी शुभकामनाएं दी हैं। 

          मॉरीशस की राष्ट्रपति महामहिम डॉ. श्रीमती अमीना गुरीब- फाकिम को भेजे अपने संदेश में राष्ट्रपति ने कहा, “ भारत की सरकार, भारत के लोगों एवं अपनी तरफ से मैं आपको और मॉरीशस के मैत्रीपूर्ण लोगों को मॉरीशस के स्वतंत्रता दिवस की वर्षगांठ के अवसर पर हार्दिक बधाइयां एवं शुभकामनाएं देता हूं। 12 मार्च की तारीख हमारे दोनों देशों के राजनीतिक संघर्ष के इतिहास में उल्लेखनीय है। यह स्वतंत्रता, समानता एवं भाईचारे के लोकतांत्रिक सिद्धांतों के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता की प्रतीक है। 

             भारत और मॉरीशस के बीच आपसी रिश्तों के ऐतिहासिक बंधन एवं साझा सांस्कृतिक विरासत पर आधारित एक दीर्घकालिक और विशिष्ट संबंध हैं। 12 मार्च स्‍वतंत्रता एवं लोकतंत्र पोषित मूल्‍यों के लिए हमारे साझा संघर्ष का प्रतीक है। आज हमारे दोनों देश इन महासागर क्षेत्र में शांति‍, स्थिरता एवं प्रगति सुनिश्चित करने के लिए घनिष्‍ठतापूर्वक सहयोग कर रहे हैं। हमारे बहुआयामी द्विपक्षीय सहयोग में पिछले कुछ वर्षो के दौरान तेजी आई है। हम मॉरिशस सरकार की कई नई विकास परियोजनाओं के साथ जुड़कर प्रसन्‍न हैं जिनका वर्तमान में कार्यान्‍वयन हो रहा है।

                भारत हमारी ओआईसी कार्ड योजना में मॉरिशस के लिए एक विशेष अनुदान की घोषणा करके प्रसन्‍न है। हमें भरोसा है कि हमारे द्विपक्षीय संबंध आगे आने वाले वर्षों में और अधिक मजबूत होंगे। महामहिम, कृपया आपके व्यक्तिगत कल्याण एवं सफलता के लिए तथा इसके साथ-साथ मॉरीशस के मैत्रीपूर्ण लोगों की प्रगति एवं समृद्धि के लिए मेरी शुभकामनाएं स्वीकार करें।

बांग्लादेश सेना के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक की मुलाकात

              भारत सशस्त्र सेना चिकित्सा सेवाओं के माध्यम से श्रीलंका, भूटान, नेपाल, अफगानिस्तान के डॉक्टरों और पैरा मैडिकल स्टॉफ के प्रशिक्षण कार्य में अग्रणी रहा है। 

          बांग्लादेश सेना के चिकित्सा सेवा महानिदेशक मेजर जनरल एसएम मुताहर होसैन ने एएफएमएस के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार उन्नी और सेना की चिकित्सा सेवा के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल वेलु नायर से मुलाकात की। भारत भेजे गए रोगियों की चिकित्सा सहित भारतीय सशस्त्र सेना के समर्थन और निरंतर सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। भारत यात्रा पर आए बांग्लादेश सेना के चिकित्सा सेवाओं के महानिदेशक ने टेलीमेडिसिन के माध्यम से चिकित्सा मामलों पर विशेषज्ञ तकनीकी सलाह और सर्जरी तथा अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में सलाह मांगी। मेजबान भारत ने इस बारे में अपनी दिलचस्पी व्यक्त की।

जमीनी नवाचार आंदोलन के लिए वित्तीय समझौतों के डिजाइन

                राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि जमीनी नवाचार आंदोलन को प्रोत्साहित करने के लिए वित्तीय प्रबंधन की डिजाइन और ढांचे पर फिर से विचार किया जाना चाहिए।

            मुखर्जी राष्ट्रपति भवन में नवाचार उत्सव के अंतिम दिन स्टार्टअप, इंक्यूबेशन तथा वित्त नवाचारों के बारे में गोलमेज बैठक को संबोधित कर रहे थे। राष्ट्रपति ने कहा कि देश में प्रत्येक वर्ष टेक्नोलॉजी के एक मिलियन विद्यार्थी पास होते हैं। जब तक हम वार्षिक रूप से 10-2000 विचारों में निवेश नहीं करते तब तक हमें बड़ी सफलता नहीं मिलेगी। अभी नवाचार आधारित स्टार्टअप के वित्त पोषण का स्तर प्रति वर्ष प्रौद्योगिकीय आधारित कुछ हजार स्टार्टअप हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि हमारा परंपरागत तरीकों से आगे निकलना महत्वपूर्ण है उद्यमिता और नवाचार की ऐसी प्रणाली बनानी है जहां युवा रोजगार ढूंढने वालों से बदल कर रोजगार सृजक हो जाएं।

          नीति बनाने वालों की वास्तविक चिंता यह है कि उद्यम के जीवन चक्र में काफी देर से जरूरी वित्त मिल पाता है। इसका परिणाम यह होता है कि उत्पाद और सेवा बनने से पहले बड़ी संख्या में विचार मर जाते हैं। इसलिए हमें अपने आप से यह पूछना होगा कि क्या नवाचार आधारित स्टार्टअप के वित्त पोषण के लिए हमारी नीति और संस्थागत प्रबंधों को बदला जाना चाहिए? इसका उत्तर सर्वसम्मति से हां करना होगा।

            राष्ट्रपति ने कहा कि नवाचारों तथा प्रारंभिक चरण के उद्यमों के वित्त पोषण को कम जटिल किया जाना चाहिए। इससे सोच में बदलाव आयेगा। हम जिस तरह सफलता को मनाते हैं उसी तरह हमें विफलताओं से सीखना भी चाहिए। राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें खुशी है कि अटल नवाचार मिशन ने 500 से अधिक स्कूलों में परिवर्तनकारी लैब स्थापित किया है। 

           राष्ट्रपति ने कहा कि उभरती पारस्थिकीय प्रणाली को समुदाय, जिला और क्षेत्रीय स्तरों पर समर्थन दिया जाना चाहिए। प्रत्येक नवोदय विद्यालयों में इंक्यूबेशन केंद्र होने चाहिए ताकि कम आयु में बच्चे जोखिम उठाने में सक्षम और प्रोत्साहित हों। राष्ट्रपति ने कहा कि प्रत्येक जिले में सामुदायिक इंक्यूवेशन लैब होनी चाहिए।

स्वाजीलैंड के नरेश ने राष्ट्रपति से मुलाकात की

          भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने राष्ट्रपति भवन में स्वाजीलैंड के महामहिम नरेश मस्वाती-तृतीय का स्वागत किया और उनके सम्मान में दोपहर का भोज दिया। 

      स्वाजीलैंड के नरेश का स्वागत करते हुए राष्ट्रपति ने अपनी उस बैठक को भी याद किया जब अक्टूबर 2015 में भारत-अफ्रीका मंच शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के स्वाजीलैंड के नरेश ने भारत का दौरा किया था। राष्ट्रपति ने कहा कि भारत और स्वाजीलैंड के पारंपरिक रूप से दोस्ताना और मधुर संबंध हैं। भारत स्वाजीलैंड के साथ दोस्ती को महत्व देता है। बहुपक्षीय मंचों पर लगातार भारत का समर्थन करने के लिए भारत, स्वाजीलैंड की सराहना करता है। भारत छात्रवृत्ति और क्षमता-निर्माण के माध्यम से अपने विकास में स्वाजीलैंड के सहयोग से खुश है। 

             राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें यह जानकर खुशी हुई कि रॉयल साइंस और टेक्नोलॉजी पार्क का कार्य अब लगभग पूरा हो चुका है। यह स्वाजीलैंड के विकास के प्रति नरेश की प्रतिबद्धता और प्रगतिशील सोच को दर्शाता है। मक्के की उत्पादकता बढ़ाने की एक अन्य सहयोगी परियोजना के भी बहुत अच्छे परिणाम रहे हैं। संभावित रूप से, यह परियोजना स्वाजीलैंड को आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेगी। राष्ट्रपति ने कहा कि भारत ने स्वाजीलैंड को एक बड़ा बाजार, सस्ती टेक्नोलॉजी और वित्तीय सहायता मुहैया कराई है। उन्होंने नरेश से स्वाजीलैंड के हित के क्षेत्रों में भारतीय निवेश को आकर्षित करने के एक माहौल तैयार करने का आह्वान किया। 

            राष्ट्रपति ने उन्हें यह आश्वासन भी दिया भारत को स्वाजीलैंड की मदद करने में खुशी होगी। राष्ट्रपति की भावनाओं को स्वीकार करते हुए, नरेश मस्वाती ने कहा कि भारत की विशेषज्ञता अफ्रीका के देशों के लिए बहुत ही मूल्यवान है। वे भारत द्वारा इसके हस्तांतरण करने की इच्छा के लिए उसके आभारी हैं।

 

वैशाली में केला अनुसंधान केन्द्र की स्थापना

           केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा है कि बिहार केले की खेती के लिए काफी उपयुक्त है। बड़े पैमाने पर केले की पैदावार यहां के किसानों की तकदीर बदल सकती है। 

           कृषि मंत्री ने यह बात गोरौल जिला वैशाली, बिहार में केला अनुसंधान केन्द्र के शिलान्यास के अवसर पर कही। कृषि मंत्री ने कहा कि अक्टूबर, 2016 को राजेन्द्र कृषि विष्वविद्यालय, पूसा को केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय का दर्जा मिला। इसके बाद वैशाली में केले की खेती करने के इच्छुक किसानों की उम्मीदें पूरी करने के लिए सरकार ने यहां केला अनुसंधान केन्द्र स्थापित किया है। केला अनुसंधान केन्द्र वैशाली के गोरौल प्रक्षेत्र के तहत आता है। पारिस्थितिकीय कारणों के कारण केला अनुसंधान केन्द्र की स्थापना के लिए गोरौल को चुना गया है। 

             उन्होंने कहा कि यह केन्द्र देश एवं राज्य में केले की खेती के कम उपज के कारणों, खेती के रकवा विस्तार, पौधे के अन्य भागों के समुचित उपयोग, विभिन्न उत्पाद, विपणन एवं मूल्यवर्धन (वैल्यू एडिशन) के क्षेत्र में अनुसंधान करेगा। सिंह ने बताया कि डा. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय ने प्रधानमंत्री के सपनों को पूरा करने के लिए केले की खेती से आमदनी दुगुनी करने के लिए शोध शुरू कर दिया है। इस शोध संस्थान के शुरू होने से यह अनुसंधान और जोर पकड़ेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि केन्द्र अनुसंधानकर्ताओं के सहयोग एवं कृषकों की सहभागिता से बिहार एवं आसपास के राज्यों में महाराष्ट्र वाली केला क्राति का सूत्रधार बनेगा।

             इलाके के किसानों की समृद्धि एवं सुख का कारण बनेगा। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र  के किसान 26 सरकारी समितियों के माध्यम से घरेलू बाजार विकसित कर विदेशों तक केले का निर्यात कर केला उत्पादन में देश को एक नयी दिशा दे रहे हैं। महाराष्ट्र केले की सघन खेती, टीशू कल्चर, टपक सिंचाई आदि का उपयोग कर 12-15 हजार रेलवे वैगन प्रति वर्ष उच्च गुणवत्तायुक्त केला देशभर में भेजने का काम करता है। सिंह ने कहा कि भारत में केले का उत्पादन 14.2 मि0 टन है। भारत केला उत्पादन में दुनिया का प्रथम एवं रकबा में दुनिया में तीसरा स्थान रखता है जो फल के रकवे का 13 प्रतिशत एवं फल उत्पादन का 33 प्रतिशत है।

            राज्यों में महाराष्ट्र सबसे बड़ा उत्पादक है। इसके बाद तमिलनाडु आता है। महाराष्ट्र की उत्पादकता 65.7 टन/हे. है जो कि औसत राष्ट्रीय उत्पादकता 34.1 टन/हे. से अधिक है। बिहार में केले की खेती 27.2 हजार हेक्टेयर में की जाती है, उत्पादन लगभग 550 हजार टन एवं औसत उत्पादकता 20.0 टन/हे. है जो राष्ट्रीय औसत से काफी कम है।

48 वीं सीआईएसएफ दिवस परेड

         केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरेन रिजिजू ने देश के महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों और राष्ट्रीय संपत्तियों को सुरक्षित रखने में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) की विविध भूमिका की सराहना की है।

 किरेन रिजिजू ने गाजियाबाद में 48वीं सीआईएसएफ दिवस परेड को संबोधित करते हुए कहा कि नवम्बर, 2016 में संयुक्त राष्ट्र ध्वज के अंतर्गत सीआईएसएफ दस्ते की तैनाती से अफर हैती में राष्ट्रपति चुनाव शांतिपूर्ण रूप से सम्पन्न कराने में सहायता मिली। काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास में भी सीआईएसएफ की तैनाती की गई। रिजिजू ने कहा कि 1969 में सामान्य शुरूआत से आगे बढ़कर सीआईएसएफ आज सरकारी भवनो की सुरक्षा कर रहा है। 

               हवाईअड्डों, बंदरगाहों, परमाणु बिजली संयंत्रों तथा अंतरिक्ष अनुधान सुविधाओं जैसे अत्यधिक जोखिम वाले प्रतिष्ठानों को सुरक्षा प्रदान कर रहा है। उऩ्होंने कहा कि दिल्ली मेट्रो में रोजाना 30 लाख से अधिक लोग सफर करते हैं। सीआईएसएफ दिल्ली मेट्रो की पूर्ण सुरक्षा बहुत बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने बताया कि सीआईएसएफ अभी 78 वीवीआईपी को सुरक्षा प्रदान कर रहा है। 

              रिजिजू ने केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ)  को इस वर्ष की गणतंत्र दिवस की परेड के दौरान सर्वश्रेष्ठ मार्चिंग दस्ते की ट्राफी जीतने पर बधाई दी। सीआईएसएफ के महानिदेशक ओ पी सिंह ने कहा कि ब्रुसेल्स स्थित एयरपोर्ट काउंसिल इंटरनेशनल द्वारा भारतीय हवाई अड्डों की सीआईएसएफ द्वारा प्रदान की जा रही सुरक्षा को विश्व में सर्वश्रेष्ठ बताया है। इस अवसर पर रिजिजू ने सीआईएसएफ कर्मियों को पदक प्रदान किया और परेड की समीक्षा की और मार्च पास्ट की सलामी ली।

हज कोटा में वृद्धि से सभी राज्यों को लाभ

             सऊदी अरब सरकार द्वारा भारत के वार्षिक हज कोटा में वृद्धि किये जाने से सभी राज्यों को लाभ हुआ है क्योंकि 2017 की हज यात्रा के लिए राज्यों के कोटे में भी वृद्धि हुई है। राज्यों का हज कोटा 9 मार्च, 2017 को जारी किया गया। 

          तीर्थ यात्रियों के चयन की प्रक्रिया लॉटरी के जरिये 14 मार्च से शुरू होगी। 2017 में 1,70,025 लोग हज यात्रा पर जायेंगे। सऊदी अरब ने भारत का हज कोटा बढ़ाकर 34,005 कर दिया है। इस संबंध में निर्णय 11 जनवरी, 2017 को जेद्दा में केंद्रीय अल्प संख्यक मामलों के मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मुख्तार अब्बास नकवी और सऊदी अरब सम्राज्य के हज तथा उमरा मंत्री महामहिम डॉ. मोहम्मद सालेह बिन ताहेर बेनतेन द्वारा भारत और सऊदी अरब के बीच द्विपक्षीय वार्षिक हज समझौते पर हस्ताक्षर के दौरान लिया गया था। 2016 की हज यात्रा के दौरान भारत के 21 ठिकानों से  लगभग 99,903 हज यात्री जेद्दा गए थे। 

              इसके अतिरिक्त 36 हजार हज यात्री निजी टूर आपरेटरों के मार्फत जेद्दा गए थे। 2017 हज के लिए भारत से 1,70,025 हज यात्री जेद्दा जायेंगे। इसमें से 1,25,025 हज यात्री भारत की हज समिति के माध्यम से और 45 हजार हज यात्री निजी टूर आपरेटरों के माध्यम से जायेंगे। हज कोटा में वृद्धि से सभी राज्यों को लाभ हुआ है। गुजरात के लिए हज कोटा वर्ष 2016 में 7044 था जो 2017 हज के लिए बढ़कर 10877 हो गया। उत्तर प्रदेश का हज कोटा 21,828 से बढ़कर 29,017 हो गया है। हरियाणा का कोटा पिछले वर्ष के 1011 से बढ़कर 1343, जम्मू कश्मीर का कोटा 6359 से बढ़कर 7960 और कर्नाटक का कोटा पिछले साल के 4477 से बढ़कर 5951 हो गया है। महाराष्ट्र में पिछले वर्ष के 7357 की तुलना में 9780 हज यात्री जायेंगे। 

              तमिलनाडु का कोटा 3189 से बढ़ाकर 2399, पश्चिम बंगाल का कोटा 8905 से बढ़ाकर 9940, तेलंगाना का कोटा 2532 से बढ़ाकर 3367, राजस्थान का 3525 से बढ़ाकर 4686, मध्य प्रदेश का 2708 से बढ़ाकर 3599,दिल्ली का 1224 से बढ़ाकर 1628, आन्ध्रप्रदेश का कोटा 2052 से बढ़ाकर 2728 और झारखंड का कोटा 2719 से बढ़ाकर 3306 कर दिया गया है। 2017 की हज यात्रा के लिए कुल 4,48,268 आवेदन प्राप्त किये गए। सबसे अधिक आवेदन केरल (95,236) से प्राप्त हुआ है। उसके बाद प्राप्त आवेदनों की संख्या महाराष्ट्र (57,246); गुजरात (57,225); उत्तर प्रदेश (51,375); जम्मू और कश्मीर (35,217); मध्य प्रदेश (24,875); कर्नाटक (23,514) और तेलंगाना (20,635) है। हज प्रक्रिया को डिजिटल बनाने का नकवी का प्रयास काफी सफल हुआ है। 

            कुल 1,29,196 आवेदन ऑनलाइन किये गए। सबसे अधिक ऑनलाइन आवेदन केरल (34,783) से प्राप्त हुए। इसके बाद क्रमशः महाराष्ट्र (24,627); उत्तर प्रदेश (10,215); गुजरात (10,071); जम्मू और कश्मीर (8227), राजस्थान (8091)। यह पहला मौका है जब हज आवेदन प्रक्रिया डिजिटल बनाई गई। 2 जनवरी, 2017 को हज कमेटी ऑफ इंडिया मोबाइल एप्प लांच किया गया। केंद्र सरकार ने हज 2017 के लिए ऑनलाइन आवेदनों को प्रोत्साहित किया ताकि लोगों को पारदर्शिता और आराम के साथ हज यात्रा करने का अवसर मिले। दिसंबर में हज की नई वेबसाइट भी लांच की गई थी। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय और भारत की हज कमेटी ने काफी पहले से हज 2017 की तैयारियां शुरू कर दी ताकि अगली हज यात्रा सुचारू और सहज हो। राज्यों का हज कोटा पूरी पारदर्शिता के साथ 2011 की जनगणना के अनुसार राज्यों की आबादी के आधार पर निर्धारित किया गया है।

देश के जलाशयों में दो प्रतिशत की कमी

            देश के 91 प्रमुख जलाशयों में 60.906 बीसीएम (अरब घन मीटर) जल का संग्रहण आंका गया। यह इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 39 प्रतिशत है। 02 मार्च, 2017 को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान यह 41 प्रतिशत था। 9 मार्च, 2017 को यह स्तर पिछले वर्ष की इसी अवधि के कुल संग्रहण का 132 प्रतिशत तथा पिछले दस वर्षों के औसत जल संग्रहण का 101 प्रतिशत है। 

            इन 91 जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता 157.799 बीसीएम है, जो समग्र रूप से देश की अनुमानित कुल जल संग्रहण क्षमता 253.388 बीसीएम का लगभग 62 प्रतिशत है। इन 91 जलाशयों में से 37 जलाशय ऐसे हैं जो 60 मेगावाट से अधिक की स्थापित क्षमता के साथ पनबिजली संबंधी लाभ देते हैं। उत्तरी क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश, पंजाब तथा राजस्थान आते हैं। इस क्षेत्र में 18.01 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले छह जलाशय हैं, जो केन्द्रीय जल आयोग (सीडब्यूसी) की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 4.70 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 26 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 28 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 34 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण कम है।

            पूर्वी क्षेत्र में झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल एवं त्रिपुरा आते हैं। इस क्षेत्र में 18.83 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 15 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्धक संग्रहण 11.51 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 61 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 44 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 49 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण बेहतर है। यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी बेहतर है।

             पश्चिमी क्षेत्र में गुजरात तथा महाराष्ट्र आते हैं। इस क्षेत्र में 27.07 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 27 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 13.61 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 50 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 26 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 47 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण बेहतर है। यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी बेहतर है।

              मध्य क्षेत्र में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश तथा छत्तीसगढ़ आते हैं। इस क्षेत्र में 42.30 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 12 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 21.72 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 51 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 36 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 36 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण बेहतर है। यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी बेहतर है।

             दक्षिणी क्षेत्र में आंध्र प्रदेश (एपी), तेलंगाना (टीजी), एपी एवं टीजी (दोनों राज्यों में दो संयुक्त परियोजनाएं), कर्नाटक, केरल एवं तमिलनाडु आते हैं। इस क्षेत्र में 51.59 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 31 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 9.37 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 20 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 20 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 33 प्रतिशत था। इस तरह चालू वर्ष में संग्रहण पिछले वर्ष की इसी अवधि में हुए संग्रहण से कम है। 

              यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से कम है। पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में जिन राज्यों में जल संग्रहण बेहतर है। उनमें पंजाब, राजस्थान, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश,  मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, एपी एवं टीजी (दोनों राज्यों में दो संयुक्त परियोजनाएं) और तेलंगाना शामिल हैं। इसी अवधि के लिए पिछले साल की तुलना में कम भंडारण होने वाले राज्य हैं, हिमाचल प्रदेश, त्रिपुरा, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु।

नरेन्‍द्र कुमार केंद्रीय जल आयोग के नए अध्यक्ष

            केंद्रीय जल अभियांत्रिकी सेवा के 1979 बैच के अधिकारी नरेन्‍द्र कुमार ने केंद्रीय जल आयोग के नए अध्‍यक्ष के रूप में कार्यभार संभाल लिया है। 

          अक्‍टूबर, 1957 को जन्‍मे कुमार ने आई आई टी रूड़की से सिविल इंजीनियरिंग में स्‍नातक की डिग्री हासिल करने के बाद आई आई टी दिल्‍ली से  स्‍ट्रक्‍चरल इंजीनियरिंग में एम टेक किया। वे केंद्रीय जल आयोग में विभिन्‍न  पदों पर काम कर चुके हैं, जिनमें सहायक निदेशक, डिजाइन संगठन, उप निदेशक परियोजना मूल्‍यांकन निदेशालय और बांध सुरक्षा संगठन एवं परियोजना निगरानी निदेशालय में निदेशक के पद शामिल हैं। उन्‍होंने वर्ष 2002 से 2005 तक केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय के कमान क्षेत्र विकास एकक में वरिष्‍ठ संयुक्‍त आयुक्‍त के रूप में भी कार्य किया। 

            वर्ष 2009 से 2011 तक कुमार ब्रह्पुत्र और बराक घाटी शिलांग के मुख्‍य अभियंता के पद पर रहें। वे वर्ष 2011 से 2014 तक जल संसाधन मंत्रालय में आयुक्‍त के पद पर रहे। कुमार ने कई अंतर्राष्‍ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लिया हैं। वे कई समितियों के सदस्‍य भी रह चुके हैं, जिनमें भारत के बाढ़ संभावित क्षेत्रों के वैज्ञानिक आकंलन से संबंधित विशेषज्ञ समिति और भारतीय नदियों के आकृति विज्ञान  अध्‍ययन से सं‍बंधित स्‍थायी समिति शामिल है। कुमार अक्‍टूबर 2014 में केंद्रीय जल आयोग के सदस्‍य (नदी प्रबंध) बनाए गए थे।