Friday, 15 September 2017

जनसंख्‍या नियंत्रण व गरीबी उन्‍मूलन किसी भी देश के विकास की दृष्टि से महत्‍वपूर्ण

      नई दिल्ली। उपराष्‍ट्रपति और राज्‍यसभा के सभापति एम. वेंकैया नायडू ने कहा कि जनसंख्‍या नियंत्रण, गरीबी उन्‍मूलन और पर्यावरण संरक्षण किसी भी देश के विकास की दृष्टि से महत्‍वपूर्ण है।

     उपराष्‍ट्रपति आज यहां उनसे मुलाकात करने आये एशियन पॉपुलेशन एंड डेवलपमेंट एसोसिएशन के शिष्‍टमंडल को संबोधित कर रहे थे, जिसमें 15 देशों के सांसद, जिनमें भारत के चार मौजूदा सांसद, एक पूर्व सांसद और दो विधायक शामिल थे। इस अवसर पर राज्‍यसभा के उपसभापति डॉ. पी.जे. कुरियन और अन्‍य गणमान्‍य व्‍यक्ति भी मौजूद थे। उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि विकास के लाभ निर्धन से निर्धनतम व्‍यक्ति तक पहुंचने चाहिए। 
      उन्‍होंने आगे कहा कि इस संदर्भ में व्‍यवस्‍थापिकों की सक्रिय भागीदारी बहुत महत्‍वपूर्ण है। उपराष्‍ट्रपति ने 2030 एजेंडा के बारे में भारत के रूख को दोहराते हुए कहा कि सतत विकास लक्ष्‍य (एसडीजी) विकास से संबंधित भारत के अपने विजन का ही प्रतिबिंब हैं। साथ ही नये एजेंडे में शामिल किये गये गरीबी उन्‍मूलन के अति महत्‍वपूर्ण उद्देश्‍य को भारत भी बेहद आवश्‍यक मानता है। 
     उन्‍होंने कहा कि सतत विकास लक्ष्‍यों के कार्यान्वयन के लिए तालमेल बैठाने और निगरानी के प्रयासों की अगुवाई भारत का प्रमुख थिंक टैंक नीति आयोग कर रहा है। उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि भारत सतत विकास लक्ष्‍यों की घरेलू उपलब्धियों की निगरानी के लिए राष्‍ट्रीय संकेतक प्रारूप को अंतिम रूप दे रहा है। साथ ही इन एसडीजी की उपलब्धियों की निगरानी के लिए वैश्विक संकेतकों के प्रारूप को तैयार करने की संयुक्‍त राष्‍ट्र की प्रक्रिया में भी संलग्‍न है। 
       उन्‍होंने कहा कि भारत ने न्‍यूयार्क में जुलाई 2017 में उच्‍च स्‍तरीय राजनीतिक मंच पर अपनी स्‍वैच्‍छापूर्ण राष्‍ट्रीय समीक्षा (वीएनआर) प्रस्‍तुत की। उन्‍होंने बताया कि भारत ने कई ऐसी पहलों और कार्यक्रमों को भी रेखांकित किया, जिन्‍हें सरकार द्वारा वर्तमान में कार्यान्वित किया जा रहा है।
       उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि भारत उन सभी देशों का स्‍वागत करता है, जिनके द्वारा 2030 एजेंडा को कार्यान्वित करने के लिए उल्‍लेखनीय कदम उठाये जाने की संभावना है। उन्‍होंने कहा कि वैश्विक साझेदारी इस एजेंडे में शामिल लक्ष्‍यों और उद्देश्‍यों को प्राप्‍त करने की कुंजी है।
      इस शिष्‍टमंडल में शामिल 15 देशों के राजनीतिज्ञों ने 2030 एजेंडा की प्रकिया में भारत द्वारा निभाई जा रही अग्रणी भूमिका की सराहना की और कहा कि निरंतर प्रयास इस एजेंडे के सफल कार्यान्‍वयन का मार्ग प्रशस्‍त करेंगे।

प्रौद्योगिकी परिवर्तन का एक माध्यम

        नई दिल्ली। केन्द्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने यहां कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार, गरीबों और कमजोर वर्गों के कल्याण के लिए नवीनतम प्रौद्योगिकी के माध्यम से देश के संसाधनों का उपयोग कर रही है। न्यू इंडिया की अवधारणा को पूरा करने का प्रयास कर रही है।

      इंजीनियर्स दिवस के अवसर पर नई दिल्ली में सिविल इंजीनियर्स संस्थान (भारत) द्वारा सामाजिक इंजीनियरिंग के माध्यम से अवसर बढ़ाना विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित करते हुए नकवी ने कहा कि प्रौद्योगिकी परिवर्तन का एक माध्यम है। 
       नकवी ने कहा कि भारतीय प्रौद्योगिकी और टेक्नोक्रेट दुनिया के सर्वश्रेष्ठ विशेषज्ञों में से एक हैं। रक्षा क्षेत्र, बुनियादी ढांचा, रेलवे, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, भारतीय इंजीनियरों और अन्य टेक्नोक्रेटों ने अपनी प्रतिभाओं के माध्यम से देश को गौरवान्वित किया है। 
   मंत्री ने कहा कि सरकार ने टेक्नोक्रेट्स और अन्य पेशेवरों के लिए जीवंत और सकारात्मक वातावरण तैयार किया है। उन्होंने कहा कि केंद्र विभिन्न प्रौद्योगिकी का उपयोग तेजी से कर रहा है ताकि लोगों के जीवन को और अधिक आरामदायक बनाया जा सके। प्रौद्योगिकी के माध्यम से, हमने शासन और आम लोगों के बीच अंतर को भर दिया है। 
    नकवी ने कहा कि सरकार आम आदमी के कल्याण के लिए मजबूत और पारदर्शी प्रणाली सुनिश्चित करने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग कर रही है। भारत डिजिटल अर्थव्यवस्था बनने की ओर बढ़ रहा है। आम लोगों के कल्याण का पैसा डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से सीधे बैंक खातों में जा रहा है। करोड़ छात्रों को अपने छात्रवृत्ति की राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में मिल रहा है। 
     मंत्री ने कहा कि राष्ट्र निर्माण में इंजीनियर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। वे अपनी रचनात्मक सोच और समर्पण तथा कड़ी मेहनत के जरिए, देश को एक नई दिशा भी दे रहे हैं। नकवी ने कहा कि केंद्र ने टेक्नोक्रेट्स और अन्य पेशेवरों के लिए बेहतर वातावरण सुनिश्चित किया है। वे भारत वापस आ रहे हैं। न्यू इंडिया के दर्शन में योगदान दे रहे हैं।

बुनियादी संरचना की कमी को दूर करने के लिए बड़े निवेश की जरूरत

      नई दिल्ली। आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने पिछले दो वर्षों के दौरान शुरू किए गए नए शहरी मिशनों के तहत शहरी बुनियादी संरचना परियोजनाओं को तीव्र गति से लागू करने के लिए बाजार से उधार लेने पर विचार कर रही है। 

   यह जानकारी आवास और शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने आज त्वरित शहरीकरण की चुनौतियों और अवसरों पर आयोजित ‘पब्लिक अफेयर्स फोरम ऑफ इंडिया’ कार्यक्रम में सम्बोधन के दौरान कही। 
      पुरी ने कहा कि बुनियादी संरचना की कमी को दूर करने के लिए बड़े निवेश की जरूरत है। उन्होंने कहा कि नए शहरी मिशनों के तहत लक्ष्यों को पूरा करने के लिए जरूरी राशि की उपलब्धता सुनिश्चित करने और विभिन्न आकस्मिक व्‍यय की पूर्ति के लिए हम बाजार से संसाधन जुटाने की योजना बना रहे हैं। हमने वर्ष 2022 तक आवश्यक राशि का आकलन कर लिया है। आवश्यक राशि की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए बाजार से धनराशि उठाने के लिए एक विशेष उद्देश्‍य व्यवस्था (एसपीवी) का गठन विचाराधीन है। 
       उन्होंने कहा कि यह योजना पुख्ता‍ होते ही हम लोग इसे उचित तरीके से लागू करेंगे। पुरी ने यह आश्‍वासन दिया कि न्‍यू अर्बन इंडिया का लक्ष्‍य हासिल करने के लिए प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी की सरकार कोई कोताही नहीं बरतेगी और टीम इंडिया की भावना से राज्‍य सरकारों और जिला प्रशासन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करेगी।
      उन्‍होंने कहा कि देश में अभी बदलाव का दौर चल रहा है और यह शहरीकरण इस उत्‍साही और चुनौतीपूर्ण यात्रा का एक हिस्‍सा है। मुझे पूरा विश्वास है कि भारत के लोगों को इस काम में सफलता मिलेगी। शहर प्रबंधन, योजना और क्रियान्वयन में और सुधार के लिए जारी प्रयासों के बारे में विस्तार से बताते हुए पुरी ने बताया कि जवाहर लाल नेहरु राष्ट्रीय शहरी नवीकरण मिशन के क्रियान्वयन और नतीजों का समग्र मूल्यांकन कराया जाएगा जिससे कई उद्देश्य पूरे होंगे और यह शहरी क्षेत्र में बदलाव लाने के लिए पहला ठोस कदम होगा।
      उन्‍होंने कहा कि मूल्‍यांकन की शर्तों से जेएनएनयूआरएम के निश्चित लक्ष्‍यों, सुधारों के क्रियान्‍यन पर शहरी प्रबंधन में सुधार का आकलन, खामियों की पहचान और भौतिक एवं वित्‍तीय प्रगति में कमी की वजहों का पता चल सकेगा। उन्‍होंने बताया कि शहरी पुनरुद्धार के मौजूदा संदर्भ में यह मूल्‍यांकन शहरी प्रशासन और राज्‍य सरकारों के लिए एक उपयोगी मार्गदर्शन उपलबंध कराएगा। जेएनएनयूआरएम योजना वर्ष 2005-14 के दौरान लागू हुई। 
      इस सरकार ने कुछ अधूरी रह गई परियोजनाओं को एक निश्चित मानक के आधार पर धनराशि मुहैया कराना जारी रखा। नए शहरी मिशनों पर असर का जिक्र करते हुए पुरी ने कहा कि स्‍मार्ट मिशन, अमृत और प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) जैसे नए मिशन दो साल पहले शुरू किए गए, लेकिन क्रियान्‍वयन के तहत सैकड़ों परियोजनाओं पर काम होता रहा है। उन्‍होंने जोर देते हुए कहा कि अगले कुछ महीनों में इसका असर साफ दिखेगा और यह उम्‍मीद भी जताई कि निर्धारित समय के अन्‍दर लक्षित नतीजे हासिल होंगे। 
      अपने दावे के समर्थन में हरदीप सिंह पुरी ने वर्ष 2014-17 और इससे पहले के दस वर्षों के प्रदर्शन का हवाला दिया। शहरी विकास प्रस्‍ताव में आदर्श बदलाव पर विस्‍तार से बताते हुए पुरी ने कहा कि विभिन्‍न नए मिशनों के तहत शहरी बुनियादी संरचना में सुधार के लिए शहर स्‍तर पर कार्ययोजनाओं की रुप-रेखा दिल्‍ली में नहीं बनाई गई। यह सभी योजनाएं जमीनी स्‍तर से उभरी और नागरिकों एवं शहर प्रशासन की उम्‍मीदों की सामूहिक अभिव्‍यक्ति हैं।
      इन योजनाओं पर उन्‍हीं नागरिकों का हक है न कि दिल्‍ली का। इसलिए इन योजनाओं का समय से क्रियान्‍वयन भी उन्‍हीं का दायित्‍व है। हरदीप सिंह पुरी ने घोषणा की कि उच्‍चस्‍तरीय मध्‍यावधि समीक्षा के लिए राज्‍यों और केन्‍द्र शासित प्रदेशों का एक राष्ट्रीय सम्‍मेलन आयोजित किया जाएगा। इसमें विभिन्‍न शहरी मिशनों की प्रगति, आपसी हित में अनुभवों का आदान-प्रदान और निर्धारित समय पर लक्ष्‍य हासिल करने के लिए इनके क्रियान्‍वयन को तेज करने पर बातचीत होगी।

दिल्ली में अपशिष्ट प्रबंधन के लिए 300 करोड़

      नई दिल्ली। आवासन और शहरी कार्य राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हरदीप सिंह पुरी ने दिल्ली में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन में उल्लेखनीय सुधार लाने के लिए आज 300 करोड़ रूपये की कार्ययोजना की घोषणा की। 

 यहां पब्लिक अफेयर्स फोरम ऑफ इंडिया को संबोधित करते हुए पुरी ने कहा कि इस पहल में मंत्रालय को शहरी विकास कोष से सहायता मिलेगी और इसे दिल्ली विकास प्राधिकरण द्वारा संचालित किया जाएगा। 
    पुरी ने बताया कि इस योजना के अंतगर्त अपशिष्ट के बेहतर संग्रहण, परिवहन और भंडारण, सीवरों और नालों का विकेन्द्रीकृत प्रशोधन तथा बेहतर रख-रखाव करने के लिए स्वचालित मशीनों, उपकरणों और अन्य प्रणालियों की खरीद की जाएगी। 
      कार्यभार ग्रहण करने के तत्काल बाद पुरी ने इस महीने की 5 तारीख को मंत्रालय में स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के सम्बन्ध में आयोजित चर्चा के दौरान राष्ट्रीय राजधानी में कचरे की समस्या का मुद्दा उठाया था और स्थिति में सुधार लाने के लिए कार्य योजना बनाए जाने की इच्छा व्यक्त की थी। दिल्ली के उत्तरी, दक्षिणी और पूर्वी नगर निगम आधुनिक उपकरणों की कुल 549 इकाइयों की खरीद पर 100-100 करोड़ रूपये की धनराशि व्यय करेंगे। 
       प्रत्येक एमसीडी को शहरी विकास कोष की ओर से 80 करोड़ रूपये की सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इस साल के आखिरी तक प्रशोधन संयंत्रों सहित सभी उपकरणों को खरीदा और चालू किया जाएगा। इस कदम से 670 मिट्रिक टन जैविक रूप से नष्ट होने योग्य कचरे की अपशिष्ट प्रशोधन क्षमता जुड़ जाएगी। इसके अलावा अशुद्ध गैसों के निकलने, दुर्गन्ध और रोगाणुओं, विनाशकारी कीटों आदि के फैलाव को रोका जा सकेगा।

देश में चार करोड़ 80 लाख शौचालयों का निर्माण

      नई दिल्ली। उच्च शिक्षण संस्थानों की स्वच्छता रैंकिंग-2017 के आधार पर यहां पुरस्कार समारोह आयोजित किया गया। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने यह पुरस्कार प्रदान किए।

  प्रकाश जावड़ेकर ने उच्च शिक्षण संस्थानों की स्वच्छता रैंकिंग-2017 पुरस्कार पाने वालों को बधाई दी। इस अवसर पर मंत्री ने कहा कि स्वच्छ भारत अभियान सरकार का सबसे महत्वपूर्ण स्वच्छता अभियान है। इस अभियान के अंतर्गत 2 अक्टूबर, 2014 से देश में चार करोड़ 80 लाख शौचालयों का निर्माण किया गया और दो लाख से अधिक गांव अब खुले में शौच से मुक्त हैं।
      मंत्री ने कहा कि छात्र स्वच्छता के दूत हैं और लोगों तथा संस्थानों के सहयोग से वे हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छ भारत के विचार का नेतृत्व करेंगे। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों को स्मार्ट कैंपस बनाने के लिए हमें स्वच्छता के साथ ही कचरे के प्रबंधन पर ध्यान देना चाहिए। स्मार्ट कैंपस बनाने के लिए पानी-बिजली की बचत करनी, स्वच्छता को बढ़ावा देना और कचरे का प्रबंधन किया जाना चाहिए।
     जावड़ेकर ने इस प्रकार के रैंकिंग पद्धति के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय के स्वच्छ भारत अभियान के अनुरूप और इसमें योगदान देने के विभिन्न प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि हमें अन्य लोगों भी जानकारी देने के लिए ऐसे कार्यक्रमों में शामिल होना चाहिए। स्वच्छता और साफ-सफाई के आधार पर उच्च शिक्षण संस्थानों की रैंकिंग की प्रक्रिया संपन्न की गई थी। 
     स्वच्छ कैंपस के लिए छात्र शौचालय अनुपात, रसोईघर में साफ-सफाई, पानी की उपलब्धता, आधुनिक शौचालय और रसोईघर के उपकरण, परिसर में हरित क्षेत्र, छात्रावासों और शैक्षिक भवनों से कचरा उठाने की व्यवस्था, कूड़ा निकासी की तकनीक, जलापूर्ति प्रणाली जैसे मानदंड तय किए गए थे। इसके अलावा अगर संस्थानों ने स्वच्छता के प्रति जागरूकता फैलाने के लिये अपने नजदीकी इलाके या गांव को गोद लेकर वहां स्‍वच्‍छता कार्यक्रम किए हैं तो उसे भी कुछ वेटेज दिया गया था।
    ऑनलाइन आमंत्रण पर लगभग 3500 उच्‍च शिक्षण संस्‍थानों ने प्रारूप के अनुरूप अपने अपने विवरण भेजे थे। मानदंड़ों के आधार पर 174 शीर्ष संस्‍थानों का चयन किया गया और विश्‍वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के अधिकारियों ने सभी 174 संस्थानों के परिसरों का निरीक्षण किया था।
      अंत में विश्वविद्यालयों, तकनीकी संस्थानों, कॉलेजों और सरकारी संस्थानों जैसी विभिन्न श्रेणियों के शीर्ष 25 संस्थानों का चयन किया गया और इस अवसर पर उन्हें पुरस्कृत किया गया। इससे सभी संस्थानों के बीच स्वच्छता के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा का दबाव बनेगा। जिलाधीशों के साथ विचार-विमर्श कर उन्नत भारत अभियान कार्यक्रम के अंतर्गत कुछ उच्च शिक्षण संस्थानों ने गांवों को गोद लिया है। 
     इस कार्यक्रम के अंतर्गत 31 अगस्त, 2017 से पहले एक गांव को खुले में शौच से मुक्त करवाने और ठोस तथा तरल कचरे के प्रबंधन करने के लिए सर्वश्रेष्ठ जिलाधीश और उच्च शिक्षण संस्थान बनने की प्रतिस्पर्धा में शामिल होने के लिए सभी जिलाधीशों और उच्च शिक्षण संस्थानों को आमंत्रित किया गया था। कई जिलों ने इसमें भाग लिया और अंत में पांच जिले मेडक, झाबुआ, वारंगल, अजमेर और इंदौर इसमें सफल रहे।
        जिलाधीशों ने अपनी उपलब्धियों पर 5 सितंबर, 2017 को मानव संसाधन विकास मंत्रालय में प्रस्तुति दी। इस अवसर पर उन्हीं पांच जिलाधीशों और उनकी सहायता करने वाले उच्च शिक्षण संस्थानों को सम्मानित किया गया था। 
    इस अवसर पर उच्च शिक्षा विभाग में सचिव के. के. शर्मा, मानव संसाधन विकास मंत्रालय में आर्थिक सलाहकार वी.एल.वी.एस.एस. सुब्बा राव, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के अध्यक्ष अनिल डी. सहस्रबुद्धे, विश्‍वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के अध्यक्ष डॉ. वी. एस. चौहान, एआईसीटीई के निदेशक डॉ. मनप्रीत सिंह मन्ना उपस्थित थे।