Friday, 3 March 2017

कानूनी साक्षरता वीडियो प्रतियोगिता

                   विधि और न्याय मंत्रालय का न्याय विभाग कानूनी के साक्षरता के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए विभिन्न सरकारी तथा गैर-सरकारी एजेंसियों के साथ सहयोग करना चाहता है। 

              न्याय तक पहुंच के उद्देश्य की प्राप्ति की दिशा में कार्यरत है। न्याय विभाग को भारत सरकार के कामकाज नियम 1961 के अनुसार गरीबों को कानूनी सहायता देने का कार्य तथा न्याय तक पहुंच के लिए प्रशासनिक और न्यायिक सुधार का कार्य सौंपा गया है। इसके लिए न्याय विभाग भारत के 17 राज्यों, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान तथा उत्तर प्रदेश और पूर्वोत्तर तथा जम्मू कश्मीर के 8 राज्यों में वंचित आबादी के लिए न्याय तक पहुंच की दो परियोजनाएं लागू कर रहा है। दोनों परियोजनाओं का उद्देश्य वंचित लोगों खासकर महिलाओं, अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, अल्पसंख्यकों, वरिष्ठ नागरिकों और विचाराधीन कैदियों के लिए न्याय तक पहुंच की व्यवस्था को सुदृढ़ बनाना है। 

                इसके लिए न्याय विभाग उन रणनीतियों और कार्यक्रमों को समर्थन देता है, जो वंचित लोगों की बाधाओं को दूर करते हैं। न्याय सेवा प्रदाताओं की संस्थागत क्षमता में सुधार करते हैं ताकि गरीबों और वंचित लोगों की कारगर तरीके से सेवा की जा सके।  न्याय तक पहुंच और वंचित समुदाय का कानूनी सशक्तिकरण का एक प्रमुख मानक लोगों में अधिकारों और पात्रता के बारे में जागरूकता फैलाना है। इसके लिए विभाग ने टेलीविजन के माध्यम से अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में व्यापक जागरूकता अभियान चलाने का प्रस्ताव किया है।

               टेलीविजन शिक्षा और जागरूकता के लिए कारगर माध्यम रहा है। इसके माध्यम से अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचा जा सकता है। यह हमारा अनुभव रहा है कि जागरूकता बढ़ाने के काम में लघु फिल्में व्यापक प्रभाव डालती हैं। लघु फिल्में अर्धशिक्षित और अशिक्षित लोगों के लिए उपयोगी होती हैं। न्याय विभाग मानव संसाधन विकास मंत्रालय तथा सूचना और प्रसारण मंत्रालय के साथ साझेदारी कर सामाजिक कानूनी विषयों पर लघु फिल्मों/ वृत्त चित्रों का एक पूल बनाना चाहता है। जिसे साझेदारी में प्रसारित किया जाएगा। 

             वीडियो कंटेट विकसित करने वाले मंत्रालय/विभाग या एजेंसी को उचित क्रेडित दी जाएगी। न्याय विभाग कानूनी साक्षरता वीडियो प्रतियोगिता 2017 का आयोजन कर रहा है। 8 विषयों पर सिविल सोसायटी, व्यक्तियों, शैक्षिक संस्थानों से प्रविष्टियां आमंत्रित की गयी हैं। 8 विषयों में बाल अधिकार, महिला अधिकार, विशेष आवश्यकताओं वाले लोगों के अधिकार, विचाराधीन कैदियों के अधिकार तथा मौलिक कर्तव्यों में समाज के सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से पिछड़े वर्गों का कल्याण तथा जाति अत्याचार, नस्ली हिंसा से प्रभावित लोगों, किशोर न्याय तथा वन और स्वदेशी समुदायों का कल्याण है।

               विभाग ने विभिन्न श्रेणियों में लघु फिल्मों/वृत्त चित्रों के लिए पुरस्कारों की घोषणा करके कानूनी सहायता और वंचितों के सशक्तिकरण के क्षेत्र में काम करने वाले सिविल सोसायटी, व्यक्तियों, शैक्षिक संस्थानों के प्रयासों को सम्मानित करने का निर्णय लिया है।

आपदा जोखिम में कमी के लिए राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म

            राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने आपदा से निपटने की तैयारियों, आपदा में कमी और प्रतिक्रिया उपायों को स्थानीय स्तर पर क्षमता सृजन कर बढ़ाने के प्रयास में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों तथा अन्य हितधारकों के विभिन्न संगठनों का क्षमता सृजन पर सम्मेलन आयोजित किया। 

          इसकी अध्यक्षता करते हुए एनडीएमए के सदस्य लेफ्टिनेंट जनरल एन.सी.मारवाह (सेवानिवृत्त) ने कहा कि आपदा से निपटने की तैयारियों तथा आपदा में कमी के लिए एनडीएमए और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों का एक साथ काम करना बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि हमारे बलों की क्षमताओं का पूरा उपयोग नहीं किया जा रहा है। उन्होंने बलों को स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर काम करने में लगाने का अनुरोध किया।

              उन्होंने कहा कि जो किया गया है उससे अधिक किए जाने की जरूरत है। बेहतर नियोजन, समन्वय,भागीदारी तथा संकल्प के साथ हम देश को आपदा झेलने में सक्षम बना सकते हैं। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की आपदा प्रबंधन इकाईयों को मजबूत बनाने के बारे में चर्चा हुई और राष्ट्रीय आपदा अनुक्रिया बल, (एनडीआरएफ) में काम कर चुके कर्मियों को उनके डीएम प्रशिक्षण संस्थानों में प्रशिक्षिक के रूप में बनाए रखने की बात कही गयी। 

           सम्मेलन में एनडीएमए, गृहमंत्रालय, एनडीआरएफ, एनआईडीएम, अग्नि सेवाओं, होम गार्ड, सिविल डिफेन्स, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, सीमा सुरक्षा बल, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल, राष्ट्रीय कैडेट कोर, नेहरू युवा केंद्र संगठन, सशस्त्र सीमा बल तथा भारतीय तटरक्षक के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। 

विश्व में सबसे अधिक बाघ भारत में

                 पर्यावरण, वन तथा जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अनिल माधव दवे ने कहा कि भारत वन्य जीव संरक्षण के अग्रिम मोर्च पर रहा है।

           स्वतंत्रता प्राप्ति के पहले से भारत में सामान्य लोग वनों तथा वन्य जीव की रक्षा करते आ रहे हैं। दवे यहां राष्ट्रीय प्राणी विज्ञान पार्क में आयोजित विश्व वन्य जीव दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। दवे ने कहा कि गिर में शेरों की संख्या 522 है। विश्व में सबसे अधिक बाघ भारत में है। एक सींग वाला गेंडा जैसे अन्य प्रजातियों की संख्या भी भारत में अधिक है। उन्होंने कहा कि वन्यजीव संरक्षण हमारी सामूहिक जिम्मेदारी और कर्तव्य है। उन्होंने लोगों से वन्यजीव संरक्षण में आने वाली बाधाओं से लड़ने का आग्रह किया।

                इससे पहले जब्त की गई वन्यजीव सामग्रियों को जलाने का सांकेतिक समारोह राष्ट्रीय प्राणी विज्ञान पार्क में हुआ। जलायी गई सामग्रियों में चीता की 100 खालें, 5 बाघ खाल, 2 शेर खाल, 1451 सांप की खाल, 10 हाथी दांत और 30 किलोग्राम बाघ की हड्डियां शामिल हैं। जब्त की गयी सामग्रियां तीन दिनों तक जलाई जाएगी। जलाने की प्रक्रिया की देखरेख के लिए एक समिति बनायी गयी है। 

            पर्यावरण वन तथा जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, वन्य जीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो, राष्ट्रीय प्राणी विज्ञान पार्क, राष्ट्रीय प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय, पर्यावरण सूचना प्रणाली (ईएनवीआईएस) संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम, ट्रैफिक, पेटा, डब्ल्यूटीआई, डब्ल्यूपीएसआई तथा सुलभ इंटरनेशनल के सहयोग से दिव्यांग विद्यार्थियों सहित स्कूल/कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए प्राणी विज्ञान पार्क में विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया। 

           स्कूली बच्चों में वन्यजीव संरक्षण के महत्व के बारे में जागरूकता लाने के लिए नई दिल्ली के जोरबाग स्थित इंदिरा पर्यावरण भवन में 27 फरवरी, 2017 से वन्य जीव संरक्षण के विभिन्न पहलुओं तथा अवैध व्यापार पर फिल्में दिखायी जा रही हैं। इस अवसर पर अमेरिकी दूतावास की चार्ज डी अफेयर्स सुश्री मेरी के कार्लसन, पर्यावरण वन तथा जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अपर महानिदेशक डॉ. अनिल कुमार मंत्रालय तथा वन्य जीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो के अधिकारी तथा दिल्ली के स्कूली बच्चे उपस्थित थे।

सैन्य कर्मियों के लिए मकान खरीदना आसान

             दूरदराज क्षेत्रों में तैनात सैन्य कर्मियों के लिए घर खरीदने के लिए समय देना काफी कठिन होता है।

            इस आवश्यक आवश्यकता और आकांक्षा को पूरा करने के लिए एडब्ल्यूएचओ ने “प्राइवेट इंडस्ट्री कोलैबोरेटिव बिजनेस मॉडल” प्रस्तुत किया है। इससे सैन्यकर्मी तथा वीर नारिया रियायती दाम पर प्रतिष्ठित निजी बिल्डरों से मकान खरीद सकती हैं। दिल्ली/एनसीआर में पायलट परियोजना चलाई जा रही है। इसके सफलता के आधार पर इस तरह के प्रयोग अन्य स्थानों पर किए जाएंगे। इसके प्रमुख लाभ हैं, उचित बिल्डर/परियोजना की पहचान के लिए विस्तृत बाजार अनुसंधान, मूल्य में कमी के लिए वार्ता, गंभीरता से विचार करना तथा खरीददार अनुकूल शर्तों का होना। 

         सहायता प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए लंबी प्रक्रिया के बाद अग्रणी रियल स्टेट डाटा और एनालिटिक्स कंस्लटेंट फॉर्म प्रोप इक्विटी का चयन किया गया है।

       इस ऐतिहासिक सहमति ज्ञापन पर एडब्ल्यूएचओ के अध्यक्ष (पदेन) लेफ्टिनेंट जनरल राकेश शर्मा, यूवाईएसएम, एवीएसएम, वीएसएम तथा प्रोप इक्विटी एनालिटिक्स के एमडी श्री समीर जसूजा ने 03 मार्च, 2017 को हस्ताक्षर किए।

पूर्वोत्तर की कृषि-वन उपज को बढ़ावा

                     राज्य मंत्री (इस्पात) विष्णु देव साई ने गुवाहाटी में ‘कृषि-वन उपज को बढ़ावा देने हेतु पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए एमएसटीसी के विजन’ पर आयोजित कार्यशाला का उद्घाटन किया। 

               मंत्री ने कहा कि कृषि एवं वन उपज के लिए पूर्वोत्तर क्षेत्र में अंत्यत अनुकूल माहौल है, लेकिन उत्पादकों को अपनी उपज के लिए कोई बाजार पहुंच सुलभ नहीं है। ऐसी स्थिति में ये उत्पादक बिचौलियों द्वारा खुद का शोषण कराने पर विवश हो जाते हैं। इस वजह से उनके लिए स्थिति बड़ी ही दयनीय हो जाती है। इस क्षेत्र में रसद (लॉजिस्टिक) के लिए समुचित सहायता उपलब्ध न होने के कारण स्थिति और भी गंभीर हो गई है।

                 मंत्री ने एक ऐसा परितंत्र विकसित करने संबंधी एमएसटीसी के विजन की सराहना की जिसमें सभी संबंधित भागीदार जैसे कि पूर्वोत्तर क्षेत्रीय कृषि एवं विपणन निगम लिमिटेड (एनईआरएएमएसी), सेन्ट्रल रेलसाइड वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन (सीआरडब्ल्यूसी), पैकेजिंग कंपनी एवं अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूए) एकजुट हो सकेंगे। उपर्युक्त परितंत्र से न केवल कृषि-वन उपज के उत्पादकों की माली हालत सुधरेगी, बल्कि फसलों की व्यापक बर्बादी की रोकथाम करने में भी मिलेगी। 

              इसके साथ ही शेष भारत में भी इन आला उत्पादों को उपलब्ध कराना संभव हो पाएगा। इस तरह के सहयोगात्मक प्रयास काफी अहम साबित हो सकते हैं, जिसका उल्लेख पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास से जुड़ी सरकारी नीति में किया गया है।

             पूर्वोत्तर क्षेत्र के उत्पादकों को सीधी बाजार पहुंच सुलभ कराने और उपर्युक्त एजेंसियों के बीच कारगर तालमेल सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एमएसटीसी ने हाल ही में गुवाहाटी में एक कार्यालय खोला है, जो सभी पूर्वोत्तर राज्यों की जरूरतों की पूर्ति करने वाले एक प्रमुख केंद्र के रूप में कार्यरत रहेगा।  इस्पात मंत्रालय के अधीनस्थ सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम (पीएसयू) एमएसटीसी लंबे समय से इस क्षेत्र में रक्षा समेत अर्धसैनिक बलों और तेल विपणन कंपनियों को भी सेवाएं मुहैया कराता रहा है। 

 

राष्ट्रपति भवन में नवाचार विद्वानों, लेखकों व कलाकारों का नया बैच

             राष्ट्रपति भवन के आवासीय कार्यक्रम के अंतर्गत चयनित 10 नवाचार विद्वान, 2 लेखक और 2 कलाकार (03 मार्च, 2017) से राष्ट्रपति भवन में रहने लगे। यह विद्वान लेखक और कलाकार 18 मार्च, 2017 तक राष्ट्रपति भवन में ही रहेंगे। 

           राष्ट्रपति भवन में ठहरने वाले नवाचारियों में हरियाणा के सुरजित सिंह (नवाचार : सुरजित बासमती : उच्च पैदावार और नमक सहन करने वाली धान की प्रजाति), नगालैंड के मोआ सुबोंग (नवाचार : बमहुम- 1 नवाचारी पवन संगीतयंत्र), उत्तर प्रदेश के अजय कुमार शर्मा (नवाचार : जैव गैस बोटलिंग के लिए किसान उपयोग अनुकूल कम्प्रेशर), तमिलनाडु के आकाश मनोज (नवाचार :  बिना चीरा लगाए धीरे से हुए हार्ट अटैक की स्वयं पहचान), कर्नाटक के गिरीश बद्रागोंद (नवाचार : कम लागत के गढ्ढा खुदाई स्कैनर), गुजरात के मनसुखभाई प्रजापति (नवाचार : चिकनी मिट्टी का रेफ्रीजेटर, नॉनस्टीक चिकनी मिट्टी का तवा और चिकनी मिट्टी का कुकर), राजस्थान के सुभाष ओला (नवाचार : संशोधित दूध बॉयलर), बिहार की सुश्री शालिनी कुमारी (नवाचार : पैर सुनियोजन सुविधा वाला संशोधित वॉकर), गुजरात के परेश पंचाल (नवाचार : बांस की पट्टी, सुंगधित धूपबत्ती और सुगंधी बनाने वाली मशीन) तथा राजस्थान की श्रीमती संतोष पछार (नवाचार : लक्ष्मणगढ़ चयन : संशोधित गाजर प्रजाति )। राष्ट्रपति भवन में ठहरने वाले लेखक हैं, गुजरात के साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार विजेता अशोक कुमार पी. चावड़ा तथा बांग्ला कवि प्रबल कुमार बसु।

            बसु को कविताओं की पहली पुस्तक “तुमी प्रथम” के लिए गौरी भट्टाचार्यजी स्मृति पुरस्कार मिला। राष्ट्रपति भवन में ठहरने वाले कलाकारों में, 50वां महाराष्ट्र राज्य पुरस्कार 2010 के विजेता राहुल, शैलेन्द्र कोकास्ते तथा 2016 का 57वां कला अकादमी पुरस्कार विजेता धीरज यादव शामिल हैं। 

राष्ट्रपति ने आवासीय कार्यक्रम का उद्घाटन 11 दिसंबर, 2013 को किया था। इसका उद्देश्य लोगों की सृजनात्मक और नवाचारी क्षमता को प्रोस्साहित करना तथा गतिविधियों में नागरिकों की अधिक भागीदारी के लिए राष्ट्रपति भवन खोलना है।

समाज संगठनों के साथ भागीदारी करेगा नीति आयोग

              सरकार की नीतियों और योजनाओं को लागू करने में नागरिक समाज संगठनों की भूमिका के आलोक में नीति आयोग ने बुधवार, 10 मार्च 2017 को राष्ट्रीय राजधानी में प्रमुख सामाजिक संगठनों और कई मंत्रालयों के बीच भागीदारी को लेकर एक कार्यक्रम का आयोजन किया। 

             सरकार की सामाजिक क्षेत्र की पहल को आगे बढ़ाने के लिए विचार-विमर्श के इस कार्यक्रम में 17 से ज्यादा अग्रणी स्वयंसेवी संगठनों के सदस्यों और 15 केंद्रीय मंत्रालय के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। स्वयंसेवी संगठनों के सदस्यों ने ग्रामीण विकास मंत्रालय, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, एफएसएसएआई, अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय और अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ चर्चा की। शिक्षा, स्वास्थ्य, बुजुर्गों की देखभाल, महिला सशक्तिकरण, हथकरघा के क्षेत्र में ग्रामीण विकास से संबंधित देशभर में काम करने वाले सामाजिक सेवाओं से जुड़े स्वयंसेवी संगठन इसमें शामिल हुए। 

             समावेशी विकास को सुनिश्चित करने में सामाजिक संगठनों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालते नीति आयोग के अध्यक्ष डॉ. अरविंद पनगढ़िया ने कहा, ‘सरकार और सामाजिक संगठनों के बीच प्रभावी साझेदारी से खासकर सामाजिक क्षेत्र में सरकारी संसाधनों का भरपूर व प्रभावी उपयोग किया जा सकता है।’ सभी नागरिकों के जीवन पर एक स्थायी प्रभाव बनाने के लिए एक सहयोगी दृष्टिकोण की क्षमता पर जोर देते हुए नीति आयोग के कार्यकारी अधिकारी(सीईओ) अमिताभ कांत ने कहा कि सरकार और सामाजिक संगठनों के बीच समन्वय से गरीबी उन्मूलन, भूखमरी खत्म करने और अभाव के अन्य सभी रूपों को मिटाने के लिए नवोन्मेषी समाधान की तलाश की जा सकती है।

             बैठक में राष्ट्रीय, राज्य, जिला और जमीनी स्तर पर सरकारी सेवाओं में प्रभावी सुधारने लाने में सरकार और सामाजिक संगठनों की साझेदारी को मजबूत बनाने के रास्ते की तलाश पर चर्चा की गई। निगरानी और मूल्यांकन प्रक्रियाओं के लिए धन का आवंटन के जरिये सामाजिक क्षेत्र में सेवा मुहैया कराने से संबंधित मुद्दों जिसमें सामाजिक संगठनों की स्वनियमन का मुद्दा भी शामिल है, पर विस्तृत चर्चा की गई। अपने काम की प्रकृति और उसके प्रभाव प्रकाश डालते हुए प्रत्येक नागरिक समाज संगठन ने क्षेत्रवार सरकारी मंत्रालयों एवं विभागों के साथ समन्वय की सिफारिशें कीं। 

              इसमें स्वैच्छिक संगठनों और सरकार के बीच एक स्थायी भागीदारी के विकास के लिए सिफारिशें की गईं।  इन संगठनों में प्रथम, हेल्प एज इंडिया, सुलभ इंटरनेशनल, प्रधान, अक्ष्य पात्र और प्रयास जैसे स्वैच्छिक संगठन शामिल हैं। साझेदारी की भावना को आगे बढ़ाते हुए फैसला किया गया कि प्रभावी शासन के लिए निश्चित समय अंतराल पर इस तरह की चर्चाएं आयोजित की जाती रहेंगी।

बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा क्षमता के प्रदर्शन पर वैज्ञानिकों को बधाई



             प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा क्षमता के सफल प्रदर्शन पर रक्षा वैज्ञानिकों को बधाई दी है। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा क्षमता के सफल प्रदर्शन के लिए हमारे रक्षा वैज्ञानिकों को हार्दिक बधाई। 

        इसके साथ ही, भारत इस क्षमता वाले पांच राष्ट्रों के चुनिंदा समूह में शामिल हो गया है। पूरे देश के लिए यह गर्व का क्षण है।‘

भारतीय वायुसेना के यांत्रिकी प्रशिक्षण संस्‍थान को ‘कलर्स’

                   राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने (03 मार्च, 2017) वायु सेना स्‍टेशन ताम्‍बरम, तमिलनाडु में भारतीय वायुसेना के 125 हैलिकॉप्‍टर स्‍क्‍वाड्रन को ‘स्‍टेंडर्ड’ और यांत्रिकी प्रशिक्षण संस्‍थान को ‘कलर्स’ प्रदान किए।

         इस अवसर पर राष्‍ट्रपति ने भारतीय वायुसेना के 125 हैलिकॉप्‍टर स्‍क्‍वाड्रन और यांत्रिकी प्रशिक्षण संस्‍थान को बधाई दी। कहा कि इन इकाइयों का समृद्ध विरासत और राष्‍ट्र के लिए निस्‍वार्थ सेवा का गौरवशाली अतीत है। इन इकाइयों की समर्पण भावना, व्‍यावसायिकता, नैतिकता और साहस के लिए राष्‍ट्र पूरी कृतज्ञता से उनका सम्‍मान करता है। राष्‍ट्रपति ने कहा कि भारत बहुध्रुवीय और बहुपक्षीय विश्‍व में जिम्‍मेदार तथा उभरती शक्ति है। हमारे क्षेत्र में सामाजिक, आर्थिक तथा भू-राजनीतिक परिदृश्‍य में लगातार हो रहे बदलाव के कारण हमारे देश की प्रगति, समृद्धि और सुरक्षा को प्रभावित करने वाले नापाक इरादों को मजबूती से रोकने की जरूरत हमेशा रही है।

                    बाहरी और आंतरिक दोनों ही तरह के खतरों से निपटने के अलावा हमारे सैन्‍य बल प्राकृतिक आपदाओं के समय हमारे नागरिकों को राहत प्रदान करने में भी आगे हैं। अथक और निस्‍वार्थ संचालन हमारे वीर यौद्धाओं के धैर्य और प्रतिबद्धताओं को दर्शाता है। राष्‍ट्रपति ने कहा कि भारतीय वायुसेना ने हमारे राष्‍ट्र की संप्रभुता की रक्षा करने में तकनीकी रूप से उन्‍न्‍त इकाई के रूप में विकास किया है। हमारे देश के युवाओं के लिए हमारे वीरों द्वारा प्रदर्शित की गई दृढ़ता और प्रतिबद्धता अनुकरणीय हैं।

भारत व नेपाल के बीच व्‍यापार व निवेश के व्‍यापक संबंध     

                    केन्‍द्रीय वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने काठमांडु में आयोजित नेपाल निवेश सम्‍मेलन 2017 में अर्थव्‍यवस्‍था में सुधार और प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आकर्षित करने में भारत के अनुभव साझा किये।

              उन्‍होंने कहा कि भारत और नेपाल के बीच ऐतिहासिक, सांस्‍कृतिक और धार्मिक संबंध हैं, जिसके कारण दोनों देशों के बीच व्‍यापार और आर्थिक क्षेत्रों में और सहयोग बढ़ाने में मदद मिलती है। नेपाल निवेश सम्‍मेलन 2017 में संबोधित करते हुए वित्‍त मंत्री ने कहा कि भारत और नेपाल के बीच व्‍यापार और निवेश के क्षेत्र में व्‍यापक संबंध हैं। नेपाल अनुकूल कानूनी और नियामक ढांचा तैयार कर भारत से और एफडीआई आकर्षित करने के लिए तैयार है। भारत, नेपाल के व्‍यापार और निवेश में सबसे बड़ा साझेदार है। नेपाल का दो-तिहाई से अधिक व्‍यापार भारत के साथ होता है।

                   भारत के कुल एफडीआई का लगभग 40 प्रतिशत नेपाल में निवेश किया गया है। दोनों देशों के बीच खुली सीमा है। दोनों देश एक-दूसरे के नागरिकों के साथ राष्‍ट्रीयता का व्‍यवहार करते हैं। लाखों नेपाली नागरिक भारत में रहते और काम करते हैं। नेपाल में पनबिजली, ट्रांसमिशन लाइन,सड़क और रेल नेटवर्क, स्‍वास्‍थ्‍य, शिक्षा, पर्यटन, सिंचाई जैसे कई महत्‍वपूर्ण क्षेत्र हैं। जिनमें भारतीय निवेश आकर्षित किया जा सकता है। भारत, काठमांडु-निजगढ़ त्‍वरित सड़क, निजगढ़ में दूसरा अंतर्राष्‍ट्रीय हवाई अड्डा, कोसी उच्‍च बांध जैसी परियोजनाओं में निवेश करने के लिए तैयार है। 

                     अपनी आधिकारिक यात्रा के दौरान केंद्रीय वित्‍त मंत्री ने नेपाल की राष्‍ट्रपति श्रीमती बिद्या देवी भंडारी और प्रधानमंत्री पुष्‍पकमल दहल ‘प्रचंड’ से मुलाकात की। उन्‍होंने नेपाल के उप-प्रधानमंत्री और वित्‍त मंत्री कृष्‍ण बहादुर महरा और उद्योग मंत्री नबिन्‍द्र राज जोशी के साथ भी बैठके कीं। केन्‍द्रीय वित्‍त मंत्री ने पशुपति मंदिर में पूजा-अर्चना भी की। द्विपक्षीय बैठकों में केंद्रीय वित्‍त मंत्री ने सामाजिक-आर्थिक वृद्धि की आकांक्षाओं को पूरा करने में नेपाल के साथ भागीदारी की भारत की प्रतिबद्धता व्‍यक्‍त की। 

               भारतीय सहायता से कई एकीकृत चैक पोस्‍ट, रेल लिंक, हुलाकी सड़क, स्‍कूल और स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्रों के निर्माण को याद करते हुए अरुण जेटली ने कहा कि भारत नई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए अधिक सॉफ्ट लोन उपलब्‍ध कराने के लिए तैयार है, जिससे नेपाल को तेजी से वृद्धि करने में मदद मिलेगी। उच्‍च व्‍यापार घाटे के मुद्दे पर अरुण जेटली ने सुझाव दिया कि निर्यातोन्‍मुखी उद्योगों में अधिक भारतीय निवेश आकर्षित कर नेपाल अपने निर्यात बास्‍केट को बढ़ा सकता है। अपर करनाली और अरुण-क्ष्क्ष्क्ष् जैसी बिजली परियोजनाओं को जल्‍दी पूरा कर नेपाल भारत को बिजली निर्यात कर सकता है। 

                   उन्‍होंने इन परियोजनाओं में देरी के लिए जिम्‍मेदार वन भूमि और भूमि अधिग्रहण के मामलों को जल्‍द से जल्‍द सुलझाने का आग्रह किया। नेपाल के नेताओं ने भारत की विकास सहायता के लिए अरुण जेटली को धन्‍यवाद दिया। नेपाल में आए भूकंप के बाद पुनर्निर्माण में भारत की ओर से मिली अत्‍याधिक सहायता की सराहना की। नेपाल के उप-प्रधानमंत्री महरा ने पूरी सर्दियों में लगभग 380 मेगावाट की बिजली की निर्यात सुविधा के लिए विशेष रूप से भारत सरकार का आभार व्‍यक्‍त किया, जिससे नेपाल के कई क्षेत्र बिजली कटौती से मुक्‍त रहे।

              दोनों देशों के बीच अब लगभग 500 मेगावाट बिजली व्‍यापार के लिए ट्रांसमिशन लाइन है। 2017 के मध्‍य तक यह बढ़कर 750 मेगावाट से अधिक हो जाएगी। केंद्रीय वित्‍त मंत्री की नेपाल यात्रा से यह रेखांकित होता है कि भारत, नेपाल के साथ अपने संबंधों को कितना महत्‍व देता है। बैठकें गर्मजोशी भरी और मैत्रीपूर्ण वातावरण में हुईं, जो भारत और नेपाल के बीच के पारंपरिक संबंधों का प्रतीक है।