Sunday, 8 January 2017

भारत में  दलित, आदिवासी, पिछड़े व महिलाओं को मुद्रा योजना में प्राथमिकता

          भारत में  दलित, आदिवासी, पिछड़े व महिलाओं को मुद्रा योजना में प्राथमिकता मिलेगी । इसकी हलचल भारत सरकार के मंत्रालयों में दिख रही। 

            शासकीय योजनाओं के तहत अब किसानों को सस्ता ऋण उपलब्ध करने के लिए नाबार्ड के कोष में 20,000 करोड़ रूपये दिये गये हैं। इसी तरह रबी की फसल के लिए 60 दिन का बिना ब्याज का ऋण, 3 करोड़ किसान क्रेडिट कार्डों को रूपे डेबिट कार्ड, प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत ग्रामीण आवासों में 33 प्रतिशत की वृद्धि, दलित आदिवासी, पिछड़े और महिलाओं को मुद्रा योजना में प्राथमिकता, वरिष्ठ नागरिकों के लिए 10 साल की सावधि जमा पर 8 प्रतिशत ब्याज, 12 लाख के गृह निर्माण ऋण पर ब्याज में छूट, संस्थागत प्रसव पर 6000 रूपये की सहायता राशि सीधे प्रसूता के खाते में, छोटे और मंझोले उद्योगों के ऋणों की गारंटी 20 प्रतिशत से बढ़कर 25 प्रतिशत की होगी। 

        मध्यम छोटे एवं लघु व्यापारियों के लिए ऋण प्रवाह में वृद्धि होगी क्‍योंकि इतनी अधिक मात्रा में नकद जमा होने के बाद बैंक आसानी से उधार दे सकेंगे। इससे आर्थिक कार्यकलापों रोजगार सृजन में तेजी आएगी। पिछले कुछ वर्षों से पूंजी के अधिक प्रवाह के कारण रियल स्टेट के मूल्यों में अप्रत्याशित वृद्धि हो रही थी। अधिक मात्रा में नगद जमा होने के कारण बैकों को ब्याज दर घटाने का अवसर मिलेगा, जिससे सामान्यत: ऋण की मांग और विशेष रूप से आवास ऋण में वृद्धि होगी। इससे आवास की मांगों में भी वृद्धि होगी तथा रियल स्टेट के मूल्यों में कमी होगी। 

            विमुद्रीकरण से बैंकों के पास उपलब्‍ध जमा राशि में वृद्धि होगी। देश में 100 करोड़ से ज्यादा फोन हैं जिसमें से 30-40 करोड़ स्मार्टफोन हैं एवं करीब 50 करोड़ इंटरनेट के उपभोक्ता हैं। अगर इनका सही से इस्तेमाल किया जाए तो क्रेडिट कार्ड की जरूरत नहीं है। 147 करोड़ बैंक अकाउंट में से 117 करोड़ सेविंग अकाउंट एवं 25 करोड़ जनधन अकाउंट हैं। कुल आधार कार्ड 107 करोड़, 40 करोड़ बैंक अकाउंट आधार कार्ड से जुड़े हैं, 75 करोड़ से ज्यादा डेबिट कार्ड भारत की डिजिटल कारोबारी व्यवस्था के विकास हेतु एक सक्षम प्लेटफार्म है। देश भर में 20 करोड़ लोगों के पास रूपे कार्ड है जिसका इस्तेमाल वर्तमान में 40 प्रतिशत बढ़ा है।

भारत की आबादी सवा अरब, आयकर रिटर्न सिर्फ 3.7 करोड़ ! 

            केन्द्रीय वित्त् मंत्री अरुण जेटली ने इस आशय के संकेत दिये हैं कि वर्ष 2015-16 में कुल जनसंख्या 125 करोड़ में केवल 3.7 करोड़ लोगों ने आयकर रिटर्न दाखिल किया। इनमें 99 लाख लोगों ने 2.5 लाख रुपये से अपनी आय कम दिखाई। 

        इन्होंने कोई कर का भुगतान नहीं किया, 1.95 करोड़ लोगों ने अपनी आय पांच लाख रुपये से कम दिखाई, 52 लाख लोगों ने अपनी आय पांच से दस लाख रुपये के बीच दिखाई। केवल 24 लाख लोगों ने अपनी आय दस लाख रुपये से अधिक दिखाई। इसके लिए कोई ठोस प्रमाण की जरूरत नहीं कि प्रत्यक्ष और अप्रत्यकक्ष कर दोनों के मामले में भारत अभी भी कर अदा करने के मामले में बड़ा गैर- अनुपालना वाला समाज बना हुआ है। गरीबी उन्मूलन, राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक विकास के लिए जरूरी व्यय के मामले पर कर अदा न करने के कारण समझौता करना पड़ा है।

              सात दशक तक एक सामान्य भारतीय नकदी और चेक द्वारा लेन-देन करता रहा है। ‘पक्का ’ और ‘कच्चा ’ खाता व्यापार की भाषा है। कर चोरी न तो गलत माना जाता है और न ही अनैतिक। यह जीने का एक रास्ता था। कई सरकारों ने सार्वजनिक हितों से समझौते के बाद भी इसे ‘सामान्य’ रूप से चलने दिया। प्रधानमंत्री के निर्णय का इरादा एक नया ‘सामान्य’ बनाने का है। यह भारत और भारतीयों के खर्च करने की रुपरेखा में परिवर्तन चाहता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उच्चतर मूल्य वर्ग के करेंसी नोटों के लीगल टेंडर होने की समाप्ति के निर्णय को दो महीने बीत चुके हैं। परिणामस्वरूप उन नोटों का विमुद्रीकरण हो गया है। जब किसी देश की 86 प्रतिशत करेंसी जो कि उसके सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 12.2 प्रतिशत है, को बाजार से निचोड़कर बाहर फेंका जाएगा। इसके स्थान पर नई मुद्रा लाई जाएगी तो स्पष्ट तौर पर इस निर्णय के महत्वपूर्ण परिणाम होंगे।

          नरेंद्र मोदी सरकार का पहले दिन से ही यह एकदम स्पष्ट था कि वह छाया अर्थ व्यवस्था और काले धन के खिलाफ कदम उठाएगी। इस दिशा में सरकार का सर्वोच्‍च न्यायलय के आदेश पर एसआइटी का गठन करना पहला कदम था। प्रधानमंत्री ने ब्रिसबेन में जी-20 देशों के सम्मेलन में इसका प्रस्ताव दिया था कि आधार के अपक्षरण और लाभ के हस्तांरतरण की दिशा में सूचना साझेदारी के अंतरराष्ट्रीय सहयोग की गति तेज की जानी चाहिए। इस उद्देश्य को अमेरिका के साथ की गई व्यवस्था ने आगे बढ़ाया। राजग सरकार ने स्विटजरलैंड के साथ 2019 से लागू होने वाली व्यववस्था को भी पूरा किया। इसके तहत स्विटजरलैंड में रखे गए भारतीय नागरिकों के धन का विस्तृत विवरण और इसी तरह भारत में स्विस नगरिकों के धन के बारे में एक-दूसरे को सूचना देने का प्रावधान है। 

           वर्ष 1996 से मॉरिशस के साथ चली आ रही दोहरा कर बचाव संधि पर फिर बातचीत की जा रही है। संधि प्रभावी ढंग से वापसी (राउंड ट्रिपिंग) को बढ़ावा देने वाली है। इसी तरह की संधियों पर साइप्रस और सिंगापुर के साथ भी फिर से बातचीत हुई। भारत के बाहर अवैध संपत्ति से संबंधित काले धन कानून ने एक खिड़की खोली है जिसके तहत ऐसे खुलासों के लिए 60 प्रतिशत कर के साथ दस साल की कैद का प्रावधान है। 45 प्रतिशत कर वाली आयकर खुलासा घोषणा स्कीम (आईडीएस)-2016 सफल रही। काले धन के जरिये खर्च करने पर दो लाख से अधिक के खर्च पर पैन कार्ड अनिवार्य करने से बाधा पैदा हुई है। सन् 1988 में बना बेनामी कानून कभी भी लागू नहीं किया गया। अब इसमें संशोधन किया गया है। इसे क्रियान्वित किया गया है।

भारत में 12 अरब अमेरिकी डॉलर की ऊर्जा दक्षता      


          भारत में 12 अरब अमेरिकी डॉलर की ऊर्जा दक्षता है। इस आशय के संकेेत भारत सरकार के केन्‍द्रीय बिजली,कोयला, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा और खान मंत्रालय से मिले।  राष्‍ट्रीय स्‍ट्रीट लाइट  सिस्टम दक्षिणी दिल्‍ली में चल रहा है।

         यह दुनिया का सबसे बड़ा स्‍ट्रीट लाइट सिस्टम है। इसका क्रियान्‍वयन ऊर्जा दक्षता सेवा लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है।  ईईएसएल भारत सरकार का बिजली मंत्रालय के तहत काम करने वाला एक संयुक्‍त उपक्रम है। इस समय एसएलएनपी कार्यक्रम पंजाब, हिमाचल प्रदेश, असम, त्रिपुरा, झारखंड, छत्‍तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, केरल,गोवा महाराष्‍ट्र ,गुजरात और राज्‍स्‍थान में चल रहा है। अब तक पूरे देश में 15.36 लाख स्‍ट्रीट लाइटस एलईडी बल्‍बों द्वारा लगाये जा चुके हैं।

              परिणाम स्‍वरूप 20.35 करोड़ मेगावाट बिजली की बचत हुई है। इस कारण 50.71 मेगावाट क्षमता को टाले जाने से प्रति वर्ष 1.68 लाख टन ग्रीन हाउस गैस के उत्‍सर्जन में कमी आई है। भारत में 12 अरब अमेरिकी डॉलर के ऊर्जा दक्षता बाजार के होने का अनुमान है। इससे वर्तमान उपभोग में अभिनव व्‍यापार और क्रियान्‍वयन के माध्‍यम से 20 प्रतिशत ऊर्जा की बचत होने की संभावना है। एसएलएनपी के तहत दक्षिणी दिल्‍ली नगर निगम क्षेत्र में अकेले दो लाख से अधिक स्‍ट्रीट लाइट प्रतिस्‍थापित किए गए हैं। इस कार्यक्रम के माध्‍यम से दक्षिणी दिल्‍ली नगर निगम क्षेत्र में प्रतिवर्ष 2.65 करोड़ मेगावाट बिजली की बचत होती है। 

          इससे 6.6 मेगावाट क्षमता को टालने में मदद मिली है जिस कारण प्रति दिन 22,000 टन ग्रीन हाउस गैस को कम करने में मदद मिली है। इसके साथ ही दिल्‍ली में इस र्काक्रम के अगले चरण-क्ष्क्ष् में पार्कों को ध्‍यान में ध्‍यान में रखते हुए 75,000 और स्‍ट्रीट लाइट लगाने के लिए ईईएसएल ने बीएसईएस और दक्षिणी दिल्‍ली नगर निगम के साथ एक त्रिपक्षीय समझौते पर हस्‍ताक्षर किए हैं।

           दक्षिणी  दिल्‍ली नगर निगम क्षेत्र की इस परियोजना में ईईएसएल विभिन्‍न स्रोतों से शिकायतों को दूर कर रहा है। उदाहरण के लिए बीएसईएस हेल्‍पलाइन से पंजीकृत, ईईएसएल के रात्रि गश्‍त दल, मोबाइल वैन, सोशल मीडिया और पार्षदों सहित अन्‍य स्रोतों से प्राप्‍त शिकायतों के जरिये। ईईएसएल के पास दूर- दराज के स्‍ट्रीट लाइटस के  संचालन और निगरानी के लिए ईईएसएल सख्‍त शिकायत निवारण प्रणाली और केन्‍द्रीकृत नियंत्रण एंव निगरानी प्रणाली(सीसीएमएस) भी है।