भारत में दलित, आदिवासी, पिछड़े व महिलाओं को मुद्रा योजना में प्राथमिकता
भारत में दलित, आदिवासी, पिछड़े व महिलाओं को मुद्रा योजना में प्राथमिकता मिलेगी । इसकी हलचल भारत सरकार के मंत्रालयों में दिख रही।
शासकीय योजनाओं के तहत अब किसानों को सस्ता ऋण उपलब्ध करने के लिए नाबार्ड के कोष में 20,000 करोड़ रूपये दिये गये हैं। इसी तरह रबी की फसल के लिए 60 दिन का बिना ब्याज का ऋण, 3 करोड़ किसान क्रेडिट कार्डों को रूपे डेबिट कार्ड, प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत ग्रामीण आवासों में 33 प्रतिशत की वृद्धि, दलित आदिवासी, पिछड़े और महिलाओं को मुद्रा योजना में प्राथमिकता, वरिष्ठ नागरिकों के लिए 10 साल की सावधि जमा पर 8 प्रतिशत ब्याज, 12 लाख के गृह निर्माण ऋण पर ब्याज में छूट, संस्थागत प्रसव पर 6000 रूपये की सहायता राशि सीधे प्रसूता के खाते में, छोटे और मंझोले उद्योगों के ऋणों की गारंटी 20 प्रतिशत से बढ़कर 25 प्रतिशत की होगी।
मध्यम छोटे एवं लघु व्यापारियों के लिए ऋण प्रवाह में वृद्धि होगी क्योंकि इतनी अधिक मात्रा में नकद जमा होने के बाद बैंक आसानी से उधार दे सकेंगे। इससे आर्थिक कार्यकलापों रोजगार सृजन में तेजी आएगी। पिछले कुछ वर्षों से पूंजी के अधिक प्रवाह के कारण रियल स्टेट के मूल्यों में अप्रत्याशित वृद्धि हो रही थी। अधिक मात्रा में नगद जमा होने के कारण बैकों को ब्याज दर घटाने का अवसर मिलेगा, जिससे सामान्यत: ऋण की मांग और विशेष रूप से आवास ऋण में वृद्धि होगी। इससे आवास की मांगों में भी वृद्धि होगी तथा रियल स्टेट के मूल्यों में कमी होगी।
विमुद्रीकरण से बैंकों के पास उपलब्ध जमा राशि में वृद्धि होगी। देश में 100 करोड़ से ज्यादा फोन हैं जिसमें से 30-40 करोड़ स्मार्टफोन हैं एवं करीब 50 करोड़ इंटरनेट के उपभोक्ता हैं। अगर इनका सही से इस्तेमाल किया जाए तो क्रेडिट कार्ड की जरूरत नहीं है। 147 करोड़ बैंक अकाउंट में से 117 करोड़ सेविंग अकाउंट एवं 25 करोड़ जनधन अकाउंट हैं। कुल आधार कार्ड 107 करोड़, 40 करोड़ बैंक अकाउंट आधार कार्ड से जुड़े हैं, 75 करोड़ से ज्यादा डेबिट कार्ड भारत की डिजिटल कारोबारी व्यवस्था के विकास हेतु एक सक्षम प्लेटफार्म है। देश भर में 20 करोड़ लोगों के पास रूपे कार्ड है जिसका इस्तेमाल वर्तमान में 40 प्रतिशत बढ़ा है।


