Wednesday, 18 October 2017

भारत और जापान के बीच तकनीकी इंटर्न प्रशिक्षण कार्यक्रम समझौता

   जापान। पेट्रोलियम तथा प्राकृतिक गैस तथा कौशल विकास और उद्यमिता मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान की जापान यात्रा में भारत और जापान ने 17 अक्टूबर, 2017 को तकनीकी इंटर्न प्रशिक्षण कार्यक्रम (टीआईटीपी) पर सहयोग ज्ञापन समझौते को पूरा किया। 

   इस सहयोग ज्ञापन पर भारत सरकार के कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालाय की ओर से धर्मेन्द्र प्रधान और जापान की ओर से जापान के स्वास्थ्य, श्रम और कल्याण मंत्री कात्सू नोबो कातो ने हस्ताक्षर किया। सहयोग ज्ञापन पर हस्ताक्षर समारोह टोक्यो में स्वास्थ्य, श्रम और कल्याण मंत्रालय में हुआ। 
   इस सहयोग ज्ञापन से कौशल विकास के क्षेत्र में भारत और जापान के बीच द्विपक्षीय सहयोग का विस्तार होगा। भारत तीसरा देश है जिसके साथ जापान ने तकनीकी इंटर्न प्रशिक्षण अधिनियम की आवश्यकता के अनुसार सहयोग ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया है। 
   जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे की सितंबर, 2017 की भारत यात्रा के दौरान द्विपक्षीय संयुक्त वक्तव्य में जापान और भारत के प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया था कि जापान की अग्रणी टेक्नोलॉजी और भारत का समृद्ध मानव संसाधन मिलकर दोनों देशों को वैश्विक औद्योगिक नेटवर्क में उत्पादन के नए केन्द्रों में बदल सकते हैं। इस संबंध में दोनों प्रधानमंत्रियों ने जापान के तकनीकी इंटर्न प्रशिक्षण कार्यक्रम के ढांचे का उपयोग कर मानव संसाधन विकास और आदान-प्रदान की संभावनाओं पर बल दिया था।
       इस सहयोग ज्ञापन से तीन से पांच वर्षों के लिए भारत के तकनीकी इंटर्नों को रोजगार प्रशिक्षण के लिए जापान भेजने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। 2016 के अंत तक जापान सरकार के डाटा के अनुसार विभिन्न देशों के लगभग 230,000 तकनीकी इंटर्न प्रशिक्षु जापान में प्रशिक्षण ले रहे हैं। 2016 में लगभग 1,08,709 तकनीकी इंटर्न वियतनाम, चीन तथा इंडोनेशिया जैसे सहयोगी देशों से जापान पहुंचे।
     जापान में भारत के राजदूत सुजन आर. चिनॉय के अनुसार भारत द्वारा जापान के तकनीकी इंटर्न प्रशिक्षण कार्यक्रम में भागीदारी बढ़ाने की गुंजाइश है। इस प्रशिक्षण से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इस विजन में योगदान मिलेगा की भारत विश्व के लिए सबसे बड़ा कुशल कार्यबल प्रदान करने वाला देश है।
    तकनीकी इंटर्न प्रशिक्षण कार्यक्रम एक आदर्श मंच है जिसके माध्यम से भारत और जापान पारस्परिक लाभ के लिए एक-दूसरे की मजबूतियों का लाभ उठा सकते है।  

जवानों को दिवाली का तोहफा

   नई दिल्‍ली। विभिन्न सैन्य बलों और सीआरपीएफ, बीएसएफ, बीआरओ, आईटीबीपी जैसी विभिन्न अर्द्धसैनिक इकाइयों के जवान और अधिकारी देश की सीमाओं की सुरक्षा करने के लिए दूर-दराज तथा दुर्गम स्थानों पर तैनात हैं।

   ये जवान और अधिकारी कठिन मौसमी परिस्थितियों की परवाह किए बिना दिन-रात देश की सुरक्षा में लगे हैं। ये सभी अपने घरों और मुख्यालयों से दूर सेवा कर रहे हैं। अपने घरवालों और अपने मुख्यालयों के साथ बातचीत करने की उन्हें हमेशा आवश्यकता होती है। ये सभी बीएसएनएल द्वारा प्रदत्त डीएसपीटी सेवा के जरिए ही संपर्क करते हैं, क्योंकि इन इलाकों में संचार का कोई अन्य माध्यम उपलब्ध नहीं है। 
  संचार मंत्री मनोज सिंहा ने यहां मीडिया से बात करते हुए कहा कि डीएसपीटी सुविधा का इस्तेमाल करने के लिए जवानों और अधिकारियों को इस समय हर माह 500 रुपये का शुल्क देना पड़ता है। इस तरह उन्हें प्रति मिनट की बातचीत के लिए 5 रुपये देने पड़ते हैं। जवानों और अधिकारियों की आवश्यकताओं को देखते हुए और संचार में होने वाले भारी खर्च के मद्देनजर सरकार ने एक महत्वपूर्ण फैसला किया है ताकि परिवार वालों से बातचीत करने में जवानों और अधिकारियों को सुविधा हो। यह अहम फैसला दीपावली के शुभ अवसर पर लिया गया है। 
   सिन्हा ने कहा कि दीपावली के दिन यानी 19 अक्टूबर, 2017 से डीएसपीटी सुविधा के लिए कोई भी मासिक शुल्क नहीं लिया जाएगा। यानी कल से मौजूदा 500 रुपये का मासिक शुल्क ‘शून्य’ हो जाएगा। इसके अलावा मौजूदा 5 रुपये प्रति मिनट के लिए लिया जाने वाला टेलीफोन शुल्क भी एक रुपया प्रति मिनट हो जाएगा। सरकार के इस विशेष दीपावली उपहार के आधार पर सुरक्षाकर्मी अब अपने घरों और मुख्यालय के साथ बिना किसी चिंता तथा अतिरिक्त खर्च किए बिना बात कर सकेंगे।
       मंत्री ने जवानों और अधिकारियों तथा उनके परिवार वालों को दीपावली की शुभकामनाएं भी दीं।

चालकों का सुरक्षित ड्राईविंग का संकल्‍प

   नई दिल्‍ली। स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय के स्‍वास्‍थ्‍य सेवा महानिदेशालय के अभिघात देखभाल प्रभाग ने सड़क ट्रैफिक नियमों का अनुपालन करने एवं भारत में दुर्घटनाओं के कारण लोगों की बेशकीमती जानों की सुरक्षा की जरूरत एवं महत्‍व पर बल देने के लिए विश्‍व अभिघात दिवस मनाया। 

   विशेष जागरूकता मुहिम के एक हिस्‍से के रूप में सभी प्रतिभागियों ने सुरक्षित ड्राईविंग एवं सुरक्षित सड़क संस्‍कृति को बढ़ावा देने के लिए संकल्‍प लिया। प्रतिभागियों को सड़क सुरक्षा एवं जिम्‍मेदार व दयालु नागरिक पर वीडियो दिखाया गया। 
   इस समारोह का समापन सभी प्रतिभागियों को सूचनापरक पुस्‍तिकाओं के वितरण के साथ सम्‍पन्‍न हुआ। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय तथा स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय से संबंधित इस विषय के विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों के साथ परस्‍पर बातचीत की तथा उन्‍हें सड़क सुरक्षा से संबंधित क्‍या करें और क्‍या न करें, के बारे में और जिम्‍मेदार व दयालु नागरिक (गुड समरिटन) दिशा निर्देशों को लेकर संवेदनशील बनाया।
  इस अवसर डीजीएचएस डॉक्‍टर जगदीश प्रसाद ने कहा कि यह दुर्भाग्‍यपूर्ण है कि मलेरिया, तपेदिक एवं एचआईवी तीनों को मिलाकर होने वाली मौतों की तुलना में सड़क ट्रैफिक दुर्घटनाओं में अधिक लोगों की मृत्‍यु होती है, लेकिन हम इस खामोश महामारी को नजरअंदाज करना पसंद करते हैं। 
    उन्‍होंने यह भी कहा कि सड़क ट्रैफिक दुर्घटनाएं पूरी तरह रोकी जा सकती हैं। उन्‍होंने सभी प्रतिभागियों से ट्रैफिक नियमों का अनुपालन करने, गाड़ी चलाते समय मोबाइल फोन के इस्‍तेमाल से बचने तथा स्‍वस्‍थ सड़क बर्ताव को बढ़ावा देने की भी अपील की।