Friday, 12 May 2017

सशस्त्र पुलिस बल के जवानों के शिकायत निवारण के लिए मोबाइल ऐप्लीकेशन लांच

            एप जवानों के लिए उनकी शिकायत दर्ज कराने के लिए एक डिजिटल विकल्प है। 

           केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने यहां केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) के जवानों के शिकायत निवारण के लिए गृह मामले मंत्रालय (एमएचए) मोबाइल ऐप्लीकेशन लांच किया। इस अवसर पर केन्द्रीय गृह मंत्री ने बीएसएफमाई ऐप भी लांच किया। इस अवसर पर राजनाथ सिंह ने कहा कि उन्होंने हैदराबाद में पिछले वर्ष आयोजित डीजीपी सम्मेलन में इस ऐप का प्रस्ताव रखा था। उन्होंने कहा कि उनकी इच्छा राष्ट्र के लिए काम करने वाले प्रत्येक जवान से जुड़ने की है। उन्होंने बीएसएफ को इतने कम समय में इस ऐप को डेवलप करने के लिए सराहना की। उन्होंने कहा कि सीएपीएफ सबसे अनुशासित बलों में से एक है।
 

          राजनाथ सिंह ने कहा कि इस ऐप की जरूरत तब होती है जब जवान महसूस करते हैं कि उनकी समस्याओं पर गृह मामले मंत्रालय को ध्यान देना चाहिए। इसने जवानों को उनकी शिकायतों को दर्ज कराने के लिए एक डिजिटल विकल्प दे दिया है। इस अवसर पर सीएपीएफ के डीजी एवं गृह मामले मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

आपराधिक बच्चों का पुनर्वास

          महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने किशोर न्याय प्रणाली के तहत आपराधिक बच्चों के पुनर्वास के लिए एक मानक संचालनकारी प्रक्रिया (एसओपी) का विकास किया है।

       इस एसओपी का उद्देश्य ऐसे बच्चों के लिए संस्थागत देखभाल, देखभाल के बाद की सेवाओं, प्रोत्साहन देखभाल एवं प्रायोजन के प्रकारों को उपलब्ध कराने के द्वारा पुनर्वास एवं सामाजिक पुन:समेकन के प्रयोजन पर जोर देना है। यह एसओपी आनुमानिक मासूमियत एवं बच्चे के सर्वश्रेष्ठ हित के सिद्धांतों पर आधारित है। एसओपी का उद्देश्य जेल में कैद करने के मामलों में कमी लाना तथा हिंसा, उत्पीडन एवं शोषण से बच्चों की सुरक्षा करना है।

             एसओपी ऐसे पुनर्वास को बढ़ावा देता है जो दंडात्मक कदमों के बजाये एक सुरक्षित, अधिक उपयुक्त दृष्टिकोण के रूप में परिवारों एवं समुदायों को शामिल करता है। एसओपी की रूपरेखा शिशु देखभाल संस्थानों, किशोर न्याय बोर्डो/बाल न्यायालयों, बाल अधिकारों की सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय एवं बाल आयोग, राज्य/केन्द्र शासित प्रदेश की सरकारों तथा पुलिस आदि के पदाधिकारियों द्वारा आपराधिक बच्चों के साथ बर्ताव के दौरान हितधारकों के लिए एक उपयुक्त मार्ग निदेशक के रूप में तैयार की गयी है।

        मंत्रालय ने बाल अधिकारों के मुद्दों पर विशेषज्ञों एवं अधिवक्ताओं तथा राष्ट्रीय बाल अधिकार सुरक्षा आयोग (एनसीपीसीआर) को शामिल करने के द्वारा एसओपी के विकास में एक परामर्शी प्रक्रिया का अनुपालन किया है। इसे विभिन्न हितधारकों द्वारा टिप्पणियां आमंत्रित करने के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की वेबसाइट पर भी डाला गया था। एसओपी आपराधिक प्रकृति के बच्चों को समाज में फिर से संघटित करने के लिए संभावनाओं एवं अवसरों को उपलब्ध कराने में सहायता करेगा।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सफलता का उत्सव

           भारत अब विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी उद्यमशीलता के लिए विश्व के सबसे तेजी से बढ़ने वाले केन्द्रों में से एक है। 

             केन्द्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने कहा है कि भारत अब विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी उद्यमशीलता के लिए विश्व के सबसे तेजी से बढ़ने वाले केन्द्रों में से एक है। डॉ हर्षवर्धन नई दिल्ली में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के अवसर पर प्रौद्योगिकी पुरस्कार समारोह को संबोधित कर रहे थे।
 

           प्रौद्योगिकी दिवस पर देश के सामने आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के उपयोग में भारत की सफलता का उत्सव मनाया जाता है। 11 मई 1998 को पोखरण परीक्षण किया गया था। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने ऑपरेशन शक्ति के बाद भारत को एक पूर्णकालिक नाभिकीय देश घोषित किया था और इसने भारत को नाभिकीय क्लब में शामिल होने वाले छठे देश का दर्जा दे दिया था। भारत अब विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी उद्यमशीलता के लिए विश्व के सबसे तेजी से बढ़ने वाले केन्द्रों में से एक बन चुका है। स्टा्र्टअप एवं उद्यमशीलता देश की आर्थिक प्रगति एवं रोजगार की कुंजी है।

देश के प्रमुख जलाशयों के जलस्तर में कमी

           देश के 91 प्रमुख जलाशयों में 37.718 बीसीएम (अरब घन मीटर) जल का संग्रहण आंका गया। यह इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 24 प्रतिशत है। यह प्रतिशतता 04 मई 2017 को समाप्‍त सप्‍ताह में 26 थी। 11 मई, 2017 का यह स्‍तर पिछले वर्ष की इसी अवधि का 125 प्रतिशत और पिछले दस वर्षों के औसत जल संग्रहण का 103 प्रतिशत है। 

           इन 91 जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता 157.799 बीसीएम है, जो समग्र रूप से देश की अनुमानित कुल जल संग्रहण क्षमता 253.388 बीसीएम का लगभग 62 प्रतिशत है। इन 91 जलाशयों में से 37 जलाशय ऐसे हैं जो 60 मेगावाट से अधिक की स्थापित क्षमता के साथ पनबिजली संबंधी लाभ देते हैं। उत्तरी क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश, पंजाब तथा राजस्थान आते हैं। इस क्षेत्र में 18.01 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले छह जलाशय हैं, जो केन्द्रीय जल आयोग (सीडब्यूसी) की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 4.34 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 24 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 20 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 29 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण बेहतर है लेकिन यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से कमतर है। 

               पूर्वी क्षेत्र में झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल एवं त्रिपुरा आते हैं। इस क्षेत्र में 18.83 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 15 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 6.92 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 37 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 27 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 23 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण बेहतर है। यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी बेहतर है। 

                पश्चिमी क्षेत्र में गुजरात तथा महाराष्ट्र आते हैं। इस क्षेत्र में 27.07 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 27 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 7.78 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 29 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 16 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 29 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण बेहतर है। यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण बराबर है।
 

             मध्य क्षेत्र में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश तथा छत्तीसगढ़ आते हैं। इस क्षेत्र में 42.30 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 12 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 14.36 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 34 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 25 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 22 प्रतिशत था 23 इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण बेहतर है। यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी बेहतर है। 

           दक्षिणी क्षेत्र में आंध्र प्रदेश (एपी), तेलंगाना (टीजी), एपी एवं टीजी (दोनों राज्यों में दो संयुक्त परियोजनाएं), कर्नाटक, केरल एवं तमिलनाडु आते हैं। इस क्षेत्र में 51.59 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 31 जलाशय हैं, जोसीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 4.32 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 8 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 12 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 19 प्रतिशत था। इस तरह चालू वर्ष में संग्रहण पिछले वर्ष की इसी अवधि में हुए संग्रहण से कमतर है। यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी कमतर है। 

           पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में जिन राज्यों में जल संग्रहण बेहतर है उनमें पंजाब, राजस्थान, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ एवं तेलंगाना (दोनों राज्यों में दो संयुक्त परियोजनाएं), शामिल हैं। जिन राज्यों में इसी अवधि की तुलना में जल संग्रहण बराबर रहा है, वे हैं एपी एंड टीजी (दोनों राज्यों में दो संयुक्त परियोजनाएं). पिछले वर्ष इसी अवधि की तुलना में कम भंडारण वाले राज्य हैं, हिमाचल प्रदेश, त्रिपुरा, उत्‍तराखंड, आंध्र प्रदेश, केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु।

लंदन स्टॉक एक्सचेंज में एनएचएआई मसाला बॉन्ड का शुभारंभ

               केंद्रीय सड़क परिवहन, राजमार्ग एवं नौवहन मंत्री नितिन गडकरी ने लंदन स्टॉक एक्सचेंज में एनएचएआई मसाला बॉन्ड का शुभारंभ किया।

         अलग-अलग क्षेत्रों से भारी संख्या में पहुंचे निवेशकों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। इनमें से कुछ मसाला बॉन्ड बाजार में पहली बार शामिल हुए। यह दिलचस्प है कि एनएचएआई मसाला बॉन्ड इश्यू ने विश्व भर से निवेशकों को आकर्षित किया है। कुल सब्सक्रिप्शन का 60 फीसदी एशियाई निवेशकों का रहा जबकि शेष 40 फीसदी यूरोपियन निवेशकों का रहा। इसके बाद राशि का 61 प्रतिशत फंड मैनेजरों या इंशयोरेंस से आया है, 18 प्रतिशत बैंकों से आया है, 21 प्रतिशत प्राइवेट बैंकों से आया है। इस अवसर पर लंदन स्टॉक एक्सचेंज ने नितिन गडकरी को एक स्मृति चिन्ह भी भेंट किया।

           गडकरी ने इसकी शुरुआत करते हुए लंदन स्टॉक एक्सचेंज में कारोबार शुरू होने की घंटी बजाई। इसके बाद उन्होंने लंदन स्थित इंडिया हाउस में मीडिया को भी संबोधित किया। गडकरी ने अंबेडकर हाउस का भी दौरा किया, जहां डॉ. बी आर अंबेडकर लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में अपनी पढ़ाई के दौरान रहा करते थे।