लखनऊ मेट्रो के लिए मिले 250 करोड़
शहरी विकास मंत्रालय ने लखनऊ मेट्रो रेल परियोजना के लिए 250 करोड़ रुपये जारी किये। यह केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार की एक संयुक्त उद्यम परियोजना है।
मंत्रालय ने इससे पहले इसी वर्ष 300 करोड़ रुपये जारी किये थे। लखनऊ मेट्रो को कुल मिलाकर 550 करोड़ रुपये मिले है। गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने शहरी विकास मंत्री एम. वेंकैया नायडू के साथ लखनऊ मेट्रो की प्रगति पर चर्चा की और इसके त्वरित क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया। करीब 23 किलोमीटर लंबी लखनऊ मेट्रो पर 6,928 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है।
इसमें से 1,003 करोड़ रुपये केंद्र सरकार ने इक्विटी में अपने हिस्से के रूप में मुहैया कराये हैं, जबकि 297 करोड़ और 3,500 करोड़ रुपये ऋण सहायता के रूप में हैं। उत्तर प्रदेश को इक्विटी में अपने हिस्से के रूप में शेष 2,128 करोड़ रुपये के साथ-साथ अन्य साधन भी जुटाने हैं। केंद्र सरकार ने इस वर्ष मार्च महीने में यूरोपीय निवेश बैंक के साथ एक ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किये थे, ताकि लखनऊ मेट्रो परियोजना के लिए 3,500 करोड़ रुपये का ऋण मुहैया कराया जा सके। 01.01.2017
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उत्तर प्रदेश में रेल की 58,850 करोड़ की परियोजना
रेल मंत्रालय ने उत्तर प्रदेश में अनेक परियोजनाएं शुरू की हैं। उत्तर प्रदेश में रेल की 58,850 करोड़ की परियोजना हैं। 58,850 करोड़ रुपये की लागत से नई लाइन, गेज परिवर्तन और दोहरीकरण जैसी 62 मौजूदा इंजीनियरिंग परियोजनाएं चल रही हैं।
इन परियोजनाओं की पूरी लम्बाई 6500 किलोमीटर है। पिछले तीन वर्षों में उत्तर प्रदेश में परियोजनाओं के परिव्यय में भारी बढ़ोतरी हुई है। 2009 में उत्तर प्रदेश में परियोजनाओं का औसत वार्षित परिव्यय 2014 में बढ़कर 1100 करोड़ रुपये हो गया। पिछले तीन बजटों में औसत परिव्यय बढ़कर 3400 करोड़ रूपये हो गया। वर्ष 2016 में ही उत्तर प्रदेश में पूरी तरह या आंशिक रूप से बढ़ने वाली परियोजनाओं के लिए 5369 करोड़ रुपये आवंटित किये गए हैं।
परियोजनाओं में बरेली स्टेशन, वाराणसी स्टेशन , अलीगढ़ स्टेशन , मथुरा स्टेशन पर वाई-फाई, अलीगढ़ स्टेशन पर तीन प्लेटफार्मों और यार्डों का उद्घाटन, अकबरपुर स्टेशन पर यात्री सुविधाओं के उन्नयन के लिए शिलान्यास, जौनपुर स्टेशन पर यात्री सुविधाओं के उन्नयन के लिए शिलान्यास ,शाहगंज स्टेशन पर यात्री सुविधाओं के उन्नयन के लिए शिलान्यास, प्रतापगढ़ स्टेशन पर यात्री सुविधाओं के उन्नयन के लिए शिलान्यास, झांगई स्टेशन पर यात्री सुविधाओं के उन्नयन के लिए शिलान्यास, मिर्जापुर स्टेशन पर एस्केलेटर और एफओबी का शिलान्यास, विंध्याचल स्टेशन पर एस्केलेटर और एफओबी का शिलान्यास, रोबर्ट्स स्टेशन पर उन्नत स्टेशन और एफओबी का शिलान्यास, जाफराबाद-अकबरपुर-टांडा सेक्सन के विद्युतीकरण का शिलान्यास, चुनार-चोपन लाइन के विद्युतीकरण का शिलान्यास, उतरेतिया-रायबरेली-अमेठी- झांगई लाइन के विद्युतीकरण की आधारशिला, लखनऊ में उतरेतिया-आलम नगर बाईपास के दोहरीकरण और विद्युतीकरण के काम की शुरूआत, रोजा-सीतापुर रेल मार्ग के नवीन विद्युतीकृत मार्ग का राष्ट्र को समर्पण, सीतापुर-बुरहावल रेल मार्ग के नवीन विद्युतीकृत मार्ग का राष्ट्र को समर्पण, अलीगढ़ में इलेक्ट्रॉनिक इंटरलाकिंग का राष्ट्र को समर्पण, रोजा-सीतापुर के दोहरीकरण का शिलान्यास, फाउंडेशन पत्थर सीतापुर-बुरहावल के दोहरीकरण का शिलान्यास, मथुरा-झांसी तीसरी लाइन की आधारशिल, रायबरेली और अमेठी स्टेशनों के बीच लाइन के दोहरीकरण के काम की शुरूआत, मौजूदा आगरा कैंट-इटावा डेमू ट्रेन की अभी हाल में निर्मित इटावा-करहल-मैनपुरी ब्रॉड गेज सेक्सन होकर मैनपुरी तक विस्तार हैं।
29.12.2016.
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उत्तर प्रदेश की सत्तरह 'पिछड़ी जातियां" अब 'दलित" कहलायेंगी
उत्तर प्रदेश की सत्तरह 'पिछड़ी जातियों" को अब 'दलित" का दर्जा मिलेगा। इस आशय का प्रस्ताव उत्तर प्रदेश सरकार की कैबिनेट ने पारित किया है।
अब यह प्रस्ताव केंद्र के पास भेजा जाएगा। इन जातियों में कहार, कश्यप, केवट, निषाद, बिंद, भर, प्रजापति, राजभर, बाथम, गौर, तुरा, मांझी, मल्लाह, कुम्हार, धीमर, गोडिया और मछुआ शामिल हैं।
देश में शिक्षण संस्थानों और नौकरियों में 22.5ऽ अनुसूचित जाति यानि दलित और अनुसूचित जनजाति यानि आदिवासियों को आरक्षण मिलता है। इस 22.5ऽ को और तोड़े तो अनुसूचित जातियों का 15ऽ और अनुसूचित जनजातियों का 7.5ऽ कोटा है. इसके अलावा ओबीसी यानि पिछड़ी जातियों के लिए अतिरिक्त 27ऽ आरक्षण हैं. यानि केंद्र के हिसाब से कुल आरक्षण 49.5 ऽ है। अनूसूचित जाति में आने से इन जातियों को क्या फायदा मिलेगा।
ओबीसी की जगह अनुसूचित जाति में आने से बड़ा फायदा ये है कि इसमें प्रतिस्पर्धा कम है। अनुसूचित जाति में आने से अनुसूचित जाति एक्ट के तहत विशेष सुरक्षा मिलती है। यूपी में फिलहाल अनुसूचित जातियों की संख्या 66 हैं। केंद्र की सूची के मुताबिक उत्तर प्रदेश में फिलहाल अनुसूचित जाति लिस्ट में 75 जातियां हैं। यूपी में इन 17 जातियां को वोटरों के हिसाब से देखा जाए तो ये करीब 5 फीसदी होंगे। ऐसा माना जा रहा है कि 2014 के लोकसभा चुनावों में इन जातियों ने बीजेपी के पक्ष में वोट दिया था।
समाजवादी पार्टी इन जातियों के वोट पाना चाहती है ताकि विधानसभा चुनाव में फायदा मिले। अखिलेश की राजनीति ये है कि मायावती इसका विरोध खुलकर नही कर पाएंगी क्योंकि अगर विरोध करेंगी तो इससे ये 17 जातियां नाराज हो सकती हैं। बीजेपी की केंद्र में सरकार है। बीजेपी ने अगर इस पर रोक लगाने की कोशिश की तो ये 17 जातियां नाराज हो सकती हैं। ऐसे में अगर यादव और मुस्लिम के अलावा दलित वोट समाजवादी पार्टी के पास आ जाएं तो उन्हें विधानसभा चुनाव में बड़ा फायदा हो सकता है। हालांकि अखिलेश के लिए मुश्किल ये है कि 17 नई जातियों के शामिल होने से अनुसूचित जाति के तहत मिलने वाला कोटा अब ज्यादा जातियों में बंट जाएगा। 22.12.2016
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गरीबों के लिए 72781 करोड़ खर्च होंगे, बनेंगे 13.43 लाख आवास
भारत सरकार शहरी गरीबों को आवास उपलब्ध कराने के लिए 72781 करोड़ खर्च करेगी जिससे 13.43 लाख आशियाने बनेंगे। उत्तर प्रदेश के 34 शहरों में 11286 आवास बनाये जायेंगे।
उत्तर प्रदेश ने पीएमएवाई (शहरी) के तहत शहरी गरीबों के लिए आवास निर्माण हेतु पहला प्रस्ताव भेजा है। पीएमएवाई (शहरी) के तहत शहरी गरीबों के लिए अब तक 72,781 करोड़ रुपये के निवेश के साथ 13.43 लाख मकानों को मंजूरी दी गई है। उत्तर प्रदेश शहरी गरीबों के लिए किफायती मकानों के निर्माण हेतु आवास एवं शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्रालय को प्रस्ताव भेजने वाला 29वां राज्य बन गया है। उत्तर प्रदेश के 34 शहरों में शहरी गरीबों के लिए 11,286 मकानों के निर्माण हेतु इस तरह के पहले प्रस्ताव को आवास एवं शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्रालय द्वारा मंजूरी दी गई। इन मकानों के निर्माण में कुल मिलाकर 384 करोड़ रुपये का निवेश निहित है। मंत्रालय ने इस संबंध में 160 करोड़ रुपये की केन्द्रीय सहायता को मंजूरी दी है। उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) (शहरी) के लाभार्थी की अगुवाई वाले निर्माण घटक के तहत इन मकानों के निर्माण का प्रस्ताव रखा। इस घटक के तहत पात्र लाभार्थियों को उनकी भूमि पर नए मकानों के निर्माण अथवा मौजूदा मकानों की बेहतरी के लिए डेढ़-डेढ़ लाख रुपये की केन्द्रीय सहायता दी जाती है।
पीएमएवाई (शहरी) का शुभारंभ पिछले साल जून महीने में किया गया था। उत्तर प्रदेश के जिन-जिन शहरों/कस्बों में नये मकानों के निर्माण को मंजूरी दी गई है उनमें ये शामिल है। बरवार-925 मकान, इल्तिफातगंज-910, महोली-602, रानीपुर-574, सुरियावन-506, चुघुली-501, सिकंदरा-447, कथेरा-415, कोरा जहानाबाद-413, महरोनी-411, रानीपुर मारीहरन-367, चुर्क घुरमा-357, सरसावन-343 और बहुआ-316 मकान। जिन तीन शहरों/कस्बों के मौजूदा मकानों की बेहतरी को मंजूरी दी गई है, उनमें ये शामिल हैं: माघर-489 मकान, घुगुहुली-299 और शोहरतगढ़-73 मकान। इसके साथ ही आवास एवं शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्रालय ने पीएमएवाई (शहरी) के तहत शहरी गरीबों के लिए अब तक कुल मिलाकर 13,43,805 मकानों के निर्माण को मंजूरी दी है, जिनमें 72,781 करोड़ रुपये का निवेश और 19,633 करोड़ रुपये की केन्द्रीय सहायता निहित है।




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