Tuesday, 2 January 2018

फास्ट फूड पर अब चेतावनी लेबल अनिवार्य

     नई दिल्ली। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने सूचित किया है कि खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 और उसके अधीन बनाए गए नियमों और विनियमों में फास्‍ट फूड को अलग से परिभाषित नहीं किया गया है।

 तथापि, खाद्य में उच्‍च वसा, शर्करा और नमक (एचएफएसएस) तथा संबद्ध स्‍वास्‍थ्‍य जोखिमों से निपटने के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण ने एक विशेषज्ञ ग्रुप का गठन किया है। विशेषज्ञ ग्रुप की रिपोर्ट और इसका सार सर्वसाधारण की सूचना के लिए एफएसएसएआई की वेबसाइट पर अपलोड किया गया है।
   इसके अलावा, एफएसएसएआई ने पैक लेबल के आमुख पर अनुशंसित ड्रायट्री अलांऊस (आरडीए) के प्रति इसके अंश दान सहित,प्रत्‍येक सर्विंग में कुल वसा, संयोजित शर्करा, नमक,ट्रांस फैट और ऊर्जा की अनिवार्य घोषणा शामिल करने के लिए लेबलिंग विनियमों को संशोधित करने का निर्णय लिया है।
   एफएसएसएआई के पास ऐसी कोई सूचना उपलब्‍ध नहीं है। तथापि, विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन (डब्‍ल्‍यूएचओ) ने ‘वयस्‍कों और बच्‍चों के लिए शर्करा इनटेक’ और खाद्य में उच्‍च शर्करा के दुष्‍प्रभाव विषयक दिशा-निर्देश विकसित किए हैं। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्‍य मंत्री अश्‍विनी कुमार चौबे के द्वारा राज्य सभा में लिखित में उत्तर दिया गया।

90 स्मार्ट शहरों में 1,91,155 करोड़ रुपए के निवेश का प्रस्ताव

     नई दिल्ली। आवास एवं शहरी मामलों के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि स्मार्ट शहर परियोजना के तहत 90 शहरों ने कुल 1,91,155 करोड़ रुपए के निवेश का प्रस्ताव दिया है।

     विशेष क्षेत्र की परियोजनाओं में तेजी लाने की अनुमानित लागत 1,52,500 करोड़ रुपए होगी। 36,655 करोड़ के शेष निवेश को प्राप्त करने के लिए सभी शहरों में विशेष पहल की जा रही हैं। क्षेत्रवार परियोजनाएं और शहरी परियोजनाओं के अन्य व्यय के लिए अलग से 1998.49 करोड़ का कोष तैयार किया गया है।
    यह धन मिशन से जुड़े अन्य खर्चों में प्रयोग होगा। स्मार्ट शहर मिशन का कार्यान्वयन कंपनी अधिनियम 2013 के तहत एक लिमिटेड कंपनी के रूप में शहरी स्तर पर स्थापित विशेष उद्देश्य वाहक (एसपीवी) द्वारा किया जाता है और इसमें राज्य/केंद्र शासित प्रदेश और शहरी स्थानीय निकाय (यूएलबी) की संयुक्त रूप से बराबर हिस्सेदारी होती है।
     श्री पुरी ने यह जानकारी आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय से संबद्ध परामर्शदात्री समिति की एक बैठक को संबोधित करते हुए दी। इस बैठक में संसद सदस्‍य राघव लखनपाल, संतोख सिंह चौधरी, डॉ. श्रीकांत एकनाथ शिंदे और डॉ. सत्‍यनारायण जाटिया, दुर्गा शंकर मिश्रा, सचिव आवास और शहरी मामले मंत्रालय और मंत्रालय के अन्‍य वरिष्‍ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
    श्री पुरी ने बताया कि 1,35,459 करोड़ रुपये की लागत वाली 2,855 परियोजनाओं पर काम चल रहा है। 1,872 करोड़ रुपये की 147 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं। 14,672 करोड़ रुपये की 396 परियोजनाएं जारी हैं। 16,539 करोड़ रुपये की 283 परियोजनाओं के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। 1,02,366 करोड़ रुपये की 2029 परियोजनाओं की विस्‍तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जा रही हैं।
     स्‍मार्ट शहरी मिशन के तहत 1,35,958 करोड़ रुपये की 2,864 परियोजनाएं लागू होने के विभिन्‍न चरणों में हैं। 1872 करोड़ रुपये की 148 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि 15,600 करोड़ रुपये की 407 परियोजनाओं पर काम चल रहा है।
     13,514 करोड़ रुपये की 237 परियोजनाओं के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। 1,02,260 करोड़ रुपये की 2,025 परियोजनाओं के लिए विस्‍तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जा रही हैं। परियोजनाओं को लागू करने के तहत स्‍मार्ट समाधान, स्‍मार्ट सड़कें, स्‍मार्ट जलापूर्ति, छतों पर सौर प्रणाली जैसे क्षेत्रों पर भी काम चल रहा है।

सीमा बल को मजबूत बनाने के लिए हरसंभव सहायता

    उत्तराखंड। नव वर्ष के अवसर पर केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने आज उत्तराखंड जिले में हिमालय सीमा के अग्रिम क्षेत्रों की यात्रा की।

  उन्होंने नीलोंग सीमा आउट-पोस्ट में तैनात आईटीबीपी के जवानों से मुलाकात की। यह आउट-पोस्ट 11,636 फीट एमएसएल की ऊंचाई पर स्थित है।
    राजनाथ सिंह ने घाटी की बर्फीली ऊंचाई पर तैनात जवानों से व्यक्तिगत बातचीत की। केंद्रीय गृहमंत्री ने शून्य से कम तापमान में हिमालय की बेहद ऊंची व कठिन परिस्थितियों में समर्पित सेवा के लिए आईटीबीपी जवानों की प्रशंसा की। 
      उन्होंने कहा कि हिमवीर बड़े हौसले के साथ कार्य कर रहे हैं और मंत्रालय राष्ट्र के प्रति आईटीबीपी कर्मियों की अमूल्य सेवाओं से वाकिफ है। उन्होंने सीमा बल को मजबूत बनाने के लिए हरसंभव सहायता देने का आश्वासन दिया। 
    इस यात्रा में आईटीबीपी के डीजी आर.के. पचनंदा भी उनके साथ थे। कल केंद्रीय गृहमंत्री आईटीबीपी जवानों के परिवारों से मिले, जो उत्तरकाशी के माटली स्थित यूनिट परिसर के आवासों में रह रहे हैं। नए वर्ष के अवसर पर उन्होंने जवानों के परिजनों को बधाई दी। 
    राजनाथ सिंह की यह पहली नीलोंग यात्रा है। पिछले वर्ष सितम्बर-अक्टूबर में राजनाथ सिंह ने माना, लपथल और रिमखिम स्थित आउट-पोस्ट तथा जोशीमठ के निकट ऑउली स्थित आईटीबीपी पर्वतारोहण संस्थान का दौरा किया था। उन्होंने आईटीबीपी जवानों के साथ दशहरा पर्व मनाया था।

राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के नए लक्ष्य

   नई दिल्ली। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने दिनांक 01.01.2018 को नई दिल्ली में आयोजित अपनी 100वीं बैठक में कई महत्वपूर्ण विषयों पर निर्णय लिए हैं ।

   जैसे,  कर्नाटक सरकार के कर्मचारियों को आरक्षण के आधार पर पदोन्नत परिणामी वरिष्ठता का विस्तार (राज्य में नागरिक सेवाओं में पदों के लिए) विधेयक, 2017 का समर्थन करना जिससे अनुसूचित जनजाति के अधिकारियों और कर्मचारियों को वरिष्ठता और आरक्षित श्रेणी के आधार पर पदोन्नति की पात्रता हो जाएगी। 
   मंत्रिमण्डल के लिए ड्राफ्ट टिप्पणी संविधान की पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत राजस्थान में अनुसूचित क्षेत्रों की घोषणा करने का समर्थन करना, जिससे राज्य में अनुसूचित क्षेत्र संस्पर्शी (एक दूसरे से मिले हुए) हो जाएंगे जिससे प्रशासनिक सुविधा होगी। आयोग द्वारा केंद्र तथा राज्य सरकार के अधीन तदर्थ एवं अनुबंध के आधार पर की गई भर्तियों सहित सभी अस्थाई भर्तियों में (आपातकालीन नियुक्तियों को छोड़कर) अनुसूचित जनजातियों हेतु निर्धारित आरक्षण प्रतिशत लागू करने की अनुशंसा की गई है।
    आयोग द्वारा सभी सामाजिक, सांस्कृतिक तथा अकादमिक संस्थाओं से अनुरोध किया गया है कि वे अपनी गोष्ठियों/सम्मेलनों आदि में कम से कम एक दिन अनुसूचित जनजातियों के कल्याण, विकास एवं संरक्षण से संबंधित विषयों पर चर्चा हेतु रखें। आयोग ने विभिन्न राज्यों में कार्यरत अनुसूचित जनजाति आयोगों के अध्यक्षों के साथ बैठक करने का निर्णय भी लिया है ताकि अनुसूचित जनजातियों से प्राप्त होने वाली शिकायतों और उनके विकास से जुड़े मुद्दों पर तालमेल से बेहतर काम किया जा सके।
     बैठक में आयोग द्वारा विभिन्न सरकारी मंत्रालयों, विभागों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों आदि में कार्यरत अनुसूचित जनजाति के संपर्क अधिकारियों तथा जनजातीय विकास से संबंधित प्रमुख अधिकारियों की कॉन्फ्रेंस आयोजित करने का भी निर्णय लिया गया है ताकि उन्हें इस महत्वपूर्ण दायित्व के प्रति संवेदनशील एवं जागरूक बनाया जा सके और वे अपने इस कार्य को भली-भांति कर सकें।
   आयोग के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष तथा सदस्यों ने अपने क्षेत्राधिकार में आने वाले राज्यों के क्षेत्रों के दौरे करने के अतिरिक्त अनुसूचित जनजातियों पर  अत्याचार के प्रकरणों तथा विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित मामलों के संदर्भ में अनेक स्थलीय जांच की है और संबंधित राज्य सरकारों को मामले का निराकरण करने के लिए अपनी जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की है।
    अनुसूचित जनजाति क्षेत्रों में भ्रमणों के दौरान आयोग का प्रचार-प्रसार करने हेतु आयोग की पम्फलेट की आवश्यकता महसूस की गई जिसका विमोचन आज किया गया है। आयोग के वर्ष 2018 के लक्ष्य : आदिवासी उप-योजना, विशेष केंद्रीय सहायता तथा संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत आवंटन एवं उसके प्रभावी उपयोग की विस्तृत समीक्षा करना।
      राष्ट्रीय बाघ संरक्षण योजना सहित अन्य विकास कार्यों से विस्थापित अनुसूचित जनजातियों के पुनर्वास कार्यां की प्रगति पर नजर रखना। आयोग के बजट को बढ़ाकर अनुसूचित जनजातियों की समस्याओं का निराकरण करने में तेजी लाना तथा अनुसंधान गतिविधियों को प्रारम्भ करना। अधिक से अधिक प्रकरणों की सुनवाई एवं समीक्षा कर अनुसूचित जनजातियों के हितों की रक्षा करना।
     संविधान के अनुच्छेद 338क के तहत गठित राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष तथा सदस्यों के रूप में मनोनीत सभी सदस्यों ने पिछले वर्ष 2017 के प्रारम्भिक महीनों में पदभार ग्रहण किया था। आयोग में पदभार ग्रहण करने के उपरांत आयोग की कुल 08 मीटिंग सम्पन्न हुईं।
     आयोग द्वारा कई महत्वपूर्ण नीतियों/विधेयकों पर राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की टिप्पणियां संबंधित मंत्रालयों को भेजी गईं जिनमें से प्रमुख हैं-(क) सामाजिक बहिष्कार से महाराष्ट्र के लोगों की सुरक्षा (रोकथाम, प्रतिबंधन एवं समाधान) विधेयक, 2016, (ख) सिक्किम विधान सभा (एसएलए) में सीटों को 32 से बढ़ा कर 40 करने एवं लिम्बू और तमांग अनुसूचित जनजाति समुदायों के लिए विधान सभा में सीटों की आरक्षण के लिए ड्राफ्ट कैबिनेट नोट, (ग) हिमाचल प्रदेश भूमि अंतरण (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2016, (घ) सामान्यत: एक स्थान या एक क्षेत्र से उम्मीदवारों को आकर्षित करते हुए समूह ’ग’ और ’घ’ पदों में अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों से उम्मीदवारों की भर्ती पर आरक्षण नीति पर अनुदेशों की समीक्षा करना, (ड.) ’’लोकक्षेत्र बैंकों (पीएसबी), निजी क्षेत्र बैंकों, सहकारी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को पुनः वित्तपोषण के लिए नाबार्ड को ब्याज रियायत तथा रियायती दल किसानों को लघु अवधि फसल ऋण पर सहकारी बैंकों’’ पर ड्राफ्ट कैबिनेट नोट, (च) जानवरों के प्रति अत्याचार रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2017 मसौदा। 
    आयोग ने फर्जी जाति प्रमाण पत्रों की जांच के लिए माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा कुमारी माधुरी पाटिल मामले में दिए गए निर्णय के अनुसार गठित उच्च स्तरीय छानबीन समिति के समक्ष लंबित मामलों का शीघ्र निपटान करने  के लिए सभी राज्यों/संघ शासित क्षेत्रों को निर्देश दिया है। 
    आयोग ने सुदूर अगम्य जनजातीय/पिछड़े हुए क्षेत्रों, विशेष रूप से छत्तीसगढ़, ओड़िशा, झारखण्ड और पश्चिम बंगाल आदि राज्यों से अनुसूचित जनजाति की महिलाओं और किशोरियों को बिना किसी औपचारिक अनुबंध के निजी प्लेसमेंट एजेंसियों द्वारा देश के कस्बों में घरेलू सहायकों के रूप में रख कर उनका शारीरिक, मानसिक एवं आर्थिक शोषण किए जाने को  गंभीरता से लेते हुए उनके नियोजन की सूचना के स्वैच्छिक प्रकटीकरण के लिए दिशा निर्देश निर्धारित किए हैं और उन्हें सभी राज्यों/संघ शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को भेजा है और उन्हें पुलिस विभाग एवं श्रम विभाग को उचित पंजीकरण कराने की सलाह देने के लिए कहा है। आयोग के वर्तमान में 06 क्षेत्रीय कार्यालय कार्यरत हैं। 
    इनके अतिरिक्त 04 कार्यालयों की स्थापाना क्रमशः हैदराबाद, नागपुर, अहमदाबाद और शिमला में करने के लिए आयोग प्रयासरत है। आयोग ने विगत दिनों महाराष्ट्र एवं मध्य प्रदेश राज्यों में स्थलीय दौरे किए हैं और राज्य स्तरीय समीक्षा बैठकें भी आयोजित की हैं। इन बैठकों में राज्य सरकारों द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की गई है और अनुसूचित जनजातियों के कल्याण के लिए विभिन्न उपाए सुझाए गए हैं।

गरीब मधुमेह रोगियों पर अब आर्थिक बोझ कम

     नई दिल्ली। लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज (एलएचएमसी) द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल (जीएनसीटी, दिल्ली के अंतर्गत) के सहयोग से कल्याणपुरी शहरी स्वास्थ्य केंद्र (एलएचएमसी के अंतर्गत) के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग में एम डी थीसिस 2014-17 के भाग के रूप में एक अध्ययन किया गया है। 

    इस अध्ययन के अनुसार मधुमेह परिचर्या पर प्रति व्यक्ति औसत वार्षिक व्यय 8958.00 रु. है। जन स्वास्थ्य तथा अस्पताल राज्य का विषय होने के कारण, वहनीय, किफायती तथा गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य परिचर्या प्रदान करवाने की प्राथमिक जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकारों की है।
      राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत, स्वास्थ्य परिचर्या में जेब से होने वाले व्यय को कम करने के लिए, राज्य सरकार/ संघ शासित सरकारों को उनके द्वारा प्रस्तावित कार्यक्रम कार्यान्वयन योजना के तहत आवश्यकताओं के आधार पर सहयोग प्रदान किया जाता है। भारत सरकार राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत राष्ट्रीय कैंसर, मधुमेह, हृदवाहिका रोग व आघात रोकथाम एवं नियंत्रण कार्यक्रम (एनपीसीडीसीएस) का कार्यान्वयन कर रही है। 
    इस कार्यक्रमों के उद्देश्यों में जागरूकता पैदा करना, जिला अस्पतालों व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) में एनसीडी क्लिनिकों की स्थापना द्वारा स्वास्थ्य परिचर्या के भिन्न-भिन्न स्तरों के माध्यम से निदान व उपचार की सुविधाएं प्रदान करना शामिल है। वर्ष 2017-18 में देश के सौ से ज्यादा जिलों में आम एनसीडी (मधुमेह, हाइपरटेंशन और कैंसर अर्थात् मुंह, स्तन और गर्भशय का कैंसर) के शीघ्र निदान, रोकथाम, नियंत्रण तथा जांच की जनसंख्या स्तरीय पहल शुरू की गई है। 
    इससे शीघ्र नैदानिक जांच/उपचार में मदद मिलेगी जिससे मधुमेह के कारण होने वाली जटिलताओं में तथा मधुमेह को रोगियों पर पड़ने वाले वित्तीय भार में कमी आएगी। केंद्र सरकार अपने अस्पतालों के माध्यम से देश में स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए राज्य सरकारों के प्रयासों को सहयोग देती है।
     प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (पीएमएसएसवाई) के तहत, 6 नए एम्स की स्थापना की गयी है तथा अभिज्ञात मेडिकल कॉलेजों का उन्नयन किया गया है जो कि मधुमेह सहित एनसीडी हेतु तृतीयक परिचर्या सुविधा केंद्रों को बेहतर बनाएगा। राज्य सरकारों के सहयोग से ‘जन औषधि स्कीम’ के तहत सभी के लिए वहनीय दरों पर गुणवत्तापूर्ण जेनरिक औषधियाँ उपलब्ध कराई जाती हैं।
    राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन नि:शुल्क औषधियाँ व नि:शुल्क नैदानिक पहल के तहत सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधा केंद्रों में नि:शुल्क अनिवार्य औषधियाँ व निदान मुहैया कराया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने अमृत (उपचार हेतु वहनीय औषधियाँ व विश्वसनीय प्रत्यारोपण) स्टोर्स की शुरूआत भी की है जहां अधिकतम खुदरा मूल्य की तुलना में पर्याप्त छूट दर अनिवार्य जीवन-रक्षक औषधियाँ मुहैया कराई जाती हैं। 
    स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्‍य मंत्री, श्रीमती अनुप्रिया पटेल के द्वारा राज्य सभा में लिखित में उत्तर दिया गया।