Friday, 3 November 2017

भारत विश्‍व में तीसरा सबसे बड़ा विमानन बाजार बनने को तैयार

   नई दिल्ली। उप राष्‍ट्रपति एम वेंकैया नायडु ने कहा कि देश का विमानन क्षेत्र प्रगति की ओर अग्रसर है और 2026 तक यात्रियों के मामले में भारत विश्‍व में तीसरा सबसे बड़ा विमानन बाजार बनने को तैयार है। वे आज यहां दूसरे एयर एक्‍सपो इंडिया 2017 का उद्घाटन करने के बाद संबोधित कर रहे थे।

  इस अवसर पर केंद्रीय नागर विमानन मंत्री अशोक गजपति राजू पुसापति, नागर विमानन राज्‍य मंत्री जयंत सिन्‍हा और अन्‍य गणमान्‍य भी उपस्थित थे। 
   उप राष्‍ट्रपति ने कहा कि विमानन क्षेत्र न केवल संपर्क बढ़ाने और रोजगार पैदा करने में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाता है बल्कि अर्थव्‍यवस्‍था की प्र‍गति के लिए भी महत्‍वपूर्ण है।
    उन्‍होंने कहा कि विमानन वैश्विक परिवहन व्‍यवस्था की रीढ़ है। उन्‍होंने कहा कि व्‍यापार को आपस में जोड़ने, लोगों को एक दूसरे के संपर्क में लाने तथा विश्‍वभर में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए यह सबसे महत्‍वपूर्ण क्षेत्र के रूप में आवश्‍यक है। 
    उप राष्‍ट्रप‍ति ने कहा कि आईएटीए के अनुसार भारत जनवरी 2017 में साल दर साल 26.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज कर 22वीं बार घरेलू यात्रा बाजार में विश्‍व का सबसे अधिक प्रगति करने वाला देश बन गया है। उन्‍होंने कहा कि हालांकि दुर्घटनाओं में कमी आई है, लेकिन इससे आत्‍म संतुष्टि नहीं होनी चाहिए और विमानन प्राधिकारियों तथा विशेषज्ञों की सर्वोच्‍च प्राथमिकता सुरक्षा होनी चाहिए। 
   उपराष्‍ट्रपति ने उड़ान योजना पर प्रसन्‍नता व्‍यक्‍त की जिसके जरिए गैर सेवित और अपर्याप्‍त सेवित हवाई अड्डों के द्वारा क्षेत्रीय संपर्क को बढ़ावा दिया जाता है। उन्‍होंने कहा कि पर्यटन और व्‍यवसायिक यात्राओं को बढ़ावा देने के लिए टायर-क्ष्क्ष् शहरों, धार्मिक कस्‍बों, ऐतिहासिक स्‍थलों को व्‍यापक हवाई मार्ग से जोड़ना महत्‍वपूर्ण है।

युवा वर्ग में मानसिक रोग का जोखिम सबसे ज्यादा

   नई दिल्ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने नई दिल्ली में 21वें विश्व मानसिक स्वास्थ्य सम्मेलन का उद्घाटन किया। यह सम्मेलन केयरिंग फाउंडेशन व अन्य संगठनों के सहयोग से वर्ल्ड फेडरेशन फॉर मेंटल हेल्थ द्वारा आयोजित किया गया है।

    इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि भारत में पहली बार विश्व मानसिक स्वास्थ्य सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। हमारे देश में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मामलों की संख्या बढ़ती जा रही है। 
  राष्ट्रीय मानिसक स्वास्थ्य सर्वे 2016 के अनुसार भारत की कुल जनसंख्या का 14 प्रतिशत मानसिक स्वास्थ्य की समस्या से पीड़ित है। 
 राष्ट्रपति ने कहा कि महानगरों में रहने वालों लोगों तथा युवा वर्ग में मानसिक रोग का जोखिम सबसे ज्यादा है। भारत की 65 प्रतिशत आबादी की औसत उम्र 35 वर्ष से कम है। हमारे समाज का तेजी से शहरीकरण हो रहा है, ऐसे में मानसिक स्वास्थ्य की संभावित महामारी का खतरा और भी बढ़ गया है। 
   राष्ट्रपति ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य के मरीजों के लिए सबसे बड़ा अवरोध बीमारी का कलंक व बीमारी को अस्वीकार करना है। इसके कारण न तो इन मुद्दों पर ध्यान दिया जाता है और न ही इनकी चर्चा की जाती है। हमें मानसिक स्वास्थ्य के मरीजों से सहानुभूति पूर्वक बात करना चाहिए। 
    हमें उन्हें बताना चाहिए कि अवसाद तथा मानिसक तनाव जैसी बीमारियों का इलाज हो सकता है। ऐसी बीमारियों को छिपाने की जरूरत नहीं है। मानसिक स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने में एक बड़ी समस्या है मानव संसाधन की कमी। 125 करोड़ लोगों के देश में सिर्फ 7 लाख डॉक्टर हैं।
    मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में यह कमी और भी गंभीर है। हमारे देश में लगभग 5,000 मनोचिकित्सक और 2,000 से भी कम मनोवैज्ञानिक क्लिनिक हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम देश में 22 उत्कृष्टता केंद्रों का निर्माण कर रहा है।
    जिला स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत भारत के कुल 650 जिलों में से 517 को कवर किया गया है। मानसिक स्वास्थ्य को जमीनी स्तर पर ले जाने की कोशिश की जा रही है।
     राष्ट्रपति ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह सम्मेलन योग, ध्यान और मानसिक स्वास्थ्य के लिए पारंपरिक दृष्टिकोण के सत्र आयोजित कर रहा है। जब लोग योग के बारे में बातचीत करते हैं तो वे आम तौर पर इसके मनोवैज्ञानिक लाभ का उल्लेख करते हैं।
     योग के मानसिक, मनोवैज्ञानिक और संज्ञानात्मक लाभ हमारे अध्ययन के विषय हैं।उन्होंने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि चिंता और अवसाद से लड़ने में योग की भूमिका पर विशेष सत्र की चर्चा के महत्वपूर्ण बिदुओं से लोगों को अवगत कराया जाएगा और इससे मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं की रोकथाम में मदद मिलेगी।