Friday, 29 September 2017

चार वर्षों में लगभग 50 करोड़ श्रम दिवसों के रोजगार का सृजन होगा

  नई दिल्ली। भारतीय राष्‍ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की वर्तमान एवं लक्षित परियोजनाओं से सीजनल आधार पर अगले चार वर्षों के दौरान लगभग 50 करोड़ श्रम दिवसों के अनुमानित रोजगार का सृजन होगा। 

   यह साल 2018 से लेकर साल 2022 तक की अवधि के दौरान औसतन लगभग 12.5 करोड़ श्रम दिवस प्रति वर्ष होगा। इनमें से लगभग एक करोड़ प्रोफेशनल, 3.5 करोड़ कुशल श्रम दिवस और 8 करोड़ अर्द्ध-कुशल तथा अकुशल श्रम दिवस होंगे। वर्तमान में, देशभर में एनएचएआई की 282 परियोजनाएं क्रियान्‍वयनाधीन हैं जिनकी कुल लम्‍बाई लगभग 20,000 किलोमीटर है। इनमें से 10,000 किलोमीटर लम्‍बे राजमार्गों का निर्माण अगले एक-दो वर्षों में पूरा करने का लक्ष्‍य रखा गया है। 
   एनएचडीपी और भारत माला योजनाओं के तहत देश के सभी राज्‍यों में अगले तीन-चार वर्षों में लगभग 31,000 किलोमीटर की लम्‍बाई वाली तकरीबन 220 परियोजनाओं के ठेके देने एवं इन्‍हें पूरा करने का लक्ष्‍य रखा गया है। 
    अत: एनएचएआई ने अगले चार वर्षों में लगभग 50,000 किलोमीटर लम्‍बे राजमार्गों का निर्माण करने की योजना बनाई है। इससे सीजनल रोजगार अवसर सृजित होंगे, क्‍योंकि परियोजनाओं का सफलतापूर्वक एवं दक्ष क्रियान्‍वयन सुनिश्चित करने के लिए योग्‍य प्रोफेशनलों, कुशल एवं अर्द्ध-कुशल श्रम बल की आवश्यकता पड़ेगी। प्रोफेशनलों, कुशल एवं अर्द्ध-कुशल श्रम बल की आवश्यकता पूरी करने के लिए एनएचएआई ने कौशल विकास के लिए एक व्‍यापक कार्यक्रम शुरू किया है। 
      प्रोफेशनलों, कुशल एवं अर्द्ध-कुशल श्रम बल का कौशल बढ़ाने का खाका तैयार करने के लिए एनएचएआई के अध्‍यक्ष दीपक कुमार ने कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के अधिकारियों के साथ एक बैठक आयोजित की। बैठक के दौरान कौशल विकास से जुड़े विभिन्‍न मुद्दों पर चर्चा हुई। 
   एनएचएआई के अध्‍यक्ष्‍ा ने कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के अधिकारियों से एनएचएआई की परियोजनाओं की आवश्‍यकता के अनुरूप कौशल विकास की विस्‍तृत योजना पेश करने को कहा है। संबंधित हितधारकों के साथ विचार-विमर्श के बाद इस योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा।

भारत में शिशु मृत्‍यु दर में कमी

   नई दिल्ली। भारत में शिशु मृत्‍यु दर (आईएमआर) में कमी दर्ज की गई है। हाल ही में जारी एसआरएस बुलेटिन के मुताबिक वर्ष 2016 में भारत के आईएमआर में तीन अंकों (8 प्रतिशत) की गिरावट दर्ज की गई है।

  वर्ष 2015 में जन्‍मे 1000 बच्‍चों में से 37 बच्‍चों की मृत्‍यु हो गई थी। यह आंकड़ा वर्ष 2016 में घटकर 34 के स्‍तर पर आ गया है। इससे पिछले वर्ष भारत के आईएमआर में दो अंकों की गिरावट दर्ज की गई थी। इतना ही नहीं, भारत में जन्‍मे कुल बच्‍चों की संख्‍या में भी उल्‍लेखनीय कमी देखने को मिली है, जो पहली बार घटकर 25 मिलियन के स्‍तर से नीचे आई है।
   वर्ष 2015 की तुलना में वर्ष 2016 के दौरान भारत में 90,000 कम नवजात शिशुओं की मृत्‍यु हुई। वर्ष 2015 में 9.3 लाख नवजात शिशुओं की मृत्‍यु होने का अनुमान है, जबकि वर्ष 2016 में 8.4 लाख नवजात शिशुओं की मृत्‍यु हुई थी। एसआरएस बुलेटिन के मुताबिक नवजात बच्‍चे एवं बच्चियों की संख्‍या में अंतर निरंतर घटता जा रहा है। 
    नवजात बच्चियों एवं बच्‍चों की मृत्‍यु दर में अंतर घटकर अब 10 फीसदी से भी कम रह गया है। इससे सरकार की ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ योजना को काफी बढ़ावा मिला है। 
     आंकड़ों से यह पता चलता है कि मंत्रालय की रणनीतिक अवधारणा के सकारात्‍मक नतीजे अब आने शुरू हो गए हैं और इसके साथ ही इस मामले में खराब प्रदर्शन करने वाले राज्‍यों पर ध्‍यान केंद्रित करने के प्रयास भी अब सार्थक साबित हो रहे हैं। जहां तक सशक्‍त क्रियाशील समूह (ईएजी) वाले राज्‍यों का सवाल है, उत्‍तराखंड को छोड़ सभी राज्‍यों के आईएमआर में वर्ष 2015 की तुलना में कमी दर्ज की गई है।
       यह कमी बिहार में 4 अंकों, असम, मध्‍य प्रदेश, उत्‍तर प्रदेश एवं झारखंड में 3-3 अंकों और छत्‍तीसगढ़, ओडिशा एवं राजस्‍थान में 2-2 अंकों की रही है। 
     सरकार की विभिन्‍न पहलों के जरिये स्‍वास्‍थ्‍य सेवा कवरेज बढ़ाने के देशव्‍यापी प्रयासों के परिणामस्‍वरूप भी सिर्फ एक साल में ही ये उल्‍लेखनीय उपलब्धियां हासिल हुई हैं। सेवा प्रदान करने की व्‍यवस्‍था को मजबूत करना, गुणवत्‍ता का आश्‍वासन, आरएमएनसीएचअए, मानव संसाधन एवं समुदाय संबंधी प्रक्रियाएं, सूचना एवं ज्ञान, दवाओं एवं निदान और आपूर्त‍ि श्रृंखला प्रबंधन इत्‍यादि भी इनमें शामिल हैं।

आईएएस न्यू इंडिया के स्वपन को साकार करने में योगदान दें

     उत्तराखंड। केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने युवा आईएएस प्रशिक्षुओं का आह्वान किया है कि वे प्रधानमंत्री के न्यू इंडिया के सपने को साकार करने के लिए अपना योगदान दें। वे उत्तराखंड के मसूरी में लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में 92वें स्थापना पाठ्यक्रम के अधिकारी प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित कर रहे थे।

    उऩ्होंने कहा कि आपको लोगों की सहायता के लिए कठिन कार्य करना है। आपको अपने कठिन परिश्रम के जरिए लोगों के बीच विश्वास की भावना पैदा करनी है। केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि अधिकारियों को लोगों के साथ सहानुभूति से पेश आना चाहिए, जो उनके पास अपनी समस्याओं को लेकर आते हैं। उन्होंने कहा कि ईश्वर ने उन्हें मानवता और देश के सामान्य नागरिकों की सेवा का सुअवसर दिया है। उन्होंने कहा कि आपको लोगों की समस्याओं को टालना नहीं चाहिए। 
      उन्होंने यह भी कहा कि आपका दृष्टिकोण व्यक्तिगत नहीं होना चाहिए, बल्कि हमेशा प्रणाली आधारित होना चाहिए। युवा आईएएस अधिकारियों को सतर्क करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि उऩ्हें अपने अहम को टालना चाहिए, क्योंकि अहम दशमलव अंक के समान है, जिसे यदि अंक से पूर्व लगा दिया जाए तो अंक का मूल्य घट जाता है।
     उन्होंने युवा अधिकारियों को प्रेरित करते हुए कहा कि आपको उच्च नैतिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहना चाहिए। आदर्श बनना चाहिए, लोग आपका अनुकरण कर सकें। उन्होंने कहा कि आप दूसरों के लिए तभी अनुकरणीय बन पाएंगे, जब आप उच्च नैतिक मूल्यों के प्रति दृढ़ रहेंगे। आपको सार्वजनिक जीवन में हमेशा सतर्क रहना चाहिए। 
    उन्होंने प्रशिक्षुओं को उज्जवल भविष्य और सफल कैरियर की शुभकामनाएं दी। केंद्रीय गृह मंत्री बाद में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) की माना बॉर्डर आउट पोस्ट जाएंगे। अपनी चार दिन की यात्रा के दौरान राजनाथ सिंह भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के लापथाल और रिमखिम सीमा आउट पोस्ट का दौरा भी करेंगे। वे ऑली में आईटीबीपी के पर्वतीय और कौशल संस्थान में पर्वतारोहन और कमांडो कार्रवाई को भी देखेंगे। वे जोशी मठ में नागरिक कार्य कार्यक्रम और रक्तदान शिविर का उद्घाटन भी करेंगे।

Thursday, 28 September 2017

मनरेगा के बजट में 20,000 करोड़ रुपये की वृद्धि

     नई दिल्ली। ग्रामीण विकास मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि मंत्रालय के बजट में उल्‍लेखनीय वृद्धि हुई है। इसके साथ ही इसकी सभी प्रमुख योजनाओं के आवंटन में अच्‍छी-खासी वृद्धि हुई है।

     मंत्री ने यहां यह जानकारी दी कि वर्ष 2012-13 में मंत्रालय का बजट 50,161 करोड़ रुपये (जीडीपी का 0.50 प्रतिशत) था, लेकिन वर्ष 2016-17 में बजट बढ़ाकर 95,096 करोड़ रुपये कर दिया गया है जो सकल घरेलू उत्‍पाद (जीडीपी) का 0.63 प्रतिशत है। प्रमुख योजना ‘मनरेगा’ का उल्‍लेख करते हुए उन्‍होंने कहा कि इस ग्रामीण रोजगार योजना का बजट वर्ष 2011-12 के लगभग 37,000 करोड़ रुपये से बढ़ाकर वर्ष 2016-17 में लगभग 58,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
       उन्‍होंने कहा कि वर्तमान सरकार के तहत मनरेगा का पुनर्गठन किए जाने के परिणाम स्‍वरूप चालू वित्‍त वर्ष में 235 करोड़ श्रम दिवस सृजित हुए हैं, जो पिछले पांच वर्षों में सर्वाधिक है। इसके अलावा इस योजना के तहत लगभग 2 करोड़ परिसंपत्तियां सृजित हुई हैं, जो सार्वजनिक तौर पर सुलभ हैं। एक प्रश्‍न के जवाब में मंत्री ने कहा कि 85 फीसदी भुगतान 15 दिनों के अंदर किए जा रहे हैं और 96 फीसदी कामगारों को प्रत्‍यक्ष लाभ हस्‍तांतरण (डीबीटी) के जरिये पारिश्रमिक का भुगतान किया जा रहा है। 
     तोमर ने यह भी जानकारी दी कि पिछले तीन वर्षों में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत कवरेज 64 फीसदी से बढ़कर 81 फीसदी हो गई है। उन्‍होंने उम्‍मीद जताई कि यह योजना वर्ष 2019 तक 100 फीसदी ग्रामीण सड़क कनेक्टिविटी के साथ पूरी हो जाएगी। उन्‍होंने यह भी बताया कि मंत्रालय मार्च 2018 तक प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 51 लाख मकानों का निर्माण कार्य पूरा कर लेगा।
        तोमर ने कहा कि ग्रामीण विकास मंत्रालय राज्‍यों केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों और भारत सरकार के सभी संबंधित मंत्रालयों के साथ साझेदारी में 1 अक्‍टूबर से लेकर 15 अक्‍टूबर 2017 तक देश की प्रत्‍येक ग्राम पंचायत में ग्राम समृद्धि एवं स्‍वच्‍छता पखवाड़ा आयोजित कर रहा है।
      तोमर ने कहा कि इस पहल का उद्देश्‍य व्‍यापक सार्वजनिक सूचना अभियान के जरिये पारदर्शिता को और आगे ले जाना है। मंत्री ने कहा कि गांवों में स्‍वच्‍छता को बढ़ावा देने के अलावा आर्थिक गतिविधियों और विकास के मसलों पर सामुदायिक वार्तालाप सुनिश्चित करना है। 
   यह अभी तक इस दिशा में हुई प्रगति का क्षेत्र आधारित सत्यापन प्रदान करता है और महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों के जरिये सामाजिक अंकेक्षण को मजबूत करने के लिए आवश्‍यक प्रणालियां प्रदान करता है। 
        पखवाड़े भर चलने वाले इस कार्यक्रम के दौरान सभी वयस्‍कों विशेषकर महिलाओं एवं युवाओं की सक्रिय भागीदारी के साथ देश की सभी ग्राम पंचायतों में 2 अक्‍टूबर,2017 को गांधी जयंती पर ग्राम सभाएं आयोजित की जाएंगी। समुदाय के स्‍तर पर विशेष गतिविधियां सुनिश्चित करने और सार्वजनिक सूचना के लिए ठोस प्रयास किए गए हैं।

अब गंगा जल गुणवत्‍ता निगरानी ऐप का निर्माण

    नई दिल्ली। केन्‍द्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण राज्‍य मंत्री सत्‍यपाल सिंह ने राष्‍ट्रीय स्‍वच्‍छ गंगा मिशन (एनएमसीजी), राष्‍ट्रीय सुदूर संवेदी केन्‍द्र (एनआरएससी) एवं भारतीय सर्वेक्षण विभाग के अधिकारियों से आग्रह किया कि वे गंगा नदी के जीर्णोद्धार के लिए एकीकृत तरीके से कार्य करें तथा नवीनतम भू-स्‍थानिक प्रौद्योगिकियों का अधिकतम उपयोग करें।

  मंत्री ने कहा कि गंगा को स्‍वच्‍छ बनाने से संबंधित सभी कदम अनिवार्य रूप से उठाए जाएंगे और समयबद्ध तरीके से कार्य को पूरा किया जाएगा। एनएमसीजी के निदेशक द्वारा एक संक्षिप्‍त भूमिका के बाद इन एनआरएससी, डॉ. वाई.वी.एन. कृष्‍णमूर्ति ने ‘राष्‍ट्रीय स्‍वच्‍छ गंगा मिशन के लिए भू-स्‍थानिक प्रौद्योगिकी समर्थन’ पर एक विस्‍तृत प्रस्‍तुतीकरण दिया, इस दौरान गंगा संरक्षण से संबंधित कई मुद्दों पर विचार- विमर्श किया गया। एनएमसीजी के महानिदेशक श्री यू.पी. सिंह भी इस अवसर पर उपस्थित थे। भारतीय सर्वेक्षण विभाग के निदेशक डी.एन. पाठक ने भी लघु प्रस्‍तुतीकरण दिया। 
     सत्‍यपाल सिंह ने अधिकारियों को एक जल गुणवत्‍ता निगरानी ऐप का निर्माण करने तथा एक ऐसे जल जांच किट विकसित करने की दिशा में कार्य करने को कहा, जिसे लोगों में वितरित किया जा सकता है। उन्‍होंने इसकी पुष्टि की कि भू-स्‍थानिक एवं भुवन गंगा ऐप जैसी क्राउड सोर्सिंग प्रौद्योगिकियों का अनिवार्य रूप से उपयोग किया जाना चाहिए, जिससे कि इसे लेकर एक जन आंदोलन तैयार किया जा सके। 
      उन्‍होंने कहा कि स्‍वच्‍छ गंगा आंदोलन में अधिक से अधिक लोगों को हिस्‍सा लेना चाहिए। उन्‍होंने ऐसी प्रौद्योगिकियों के उपयोग के द्वारा नमामि गंगे कार्यक्रम को लोकप्रिय बनाने की आवश्‍यकता पर जोर दिया। मंत्री ने कहा, ‘हमें ऐसे लोगों को प्रोत्‍साहित करना चाहिए, जो स्‍वच्‍छ गंगा आंदोलन का हिस्‍सा बनने के लिए तैयार हैं तथा ऐसे लोगों को प्रेरणा देनी चाहिए, जो इस क्षेत्र में अनुकरणीय कार्य कर रहे हैं।’
     उन्‍होंने कहा कि गंगा नदी की भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) मानचित्र निर्माण से संबंधित सभी कार्यों में तेजी लाई जानी चाहिए। गंगा की सफाई में भू-स्‍थानिक प्रौद्योगिकियों के उपयोग से संबंधित कार्यों की गति पर चिंता व्‍यक्‍त करते हुए मंत्री ने विभिन्‍न विभागों के अधिकारियों से एक साथ बैठने तथा उन परियोजनाओं के लिए समय सीमा तैयार करने का आग्रह किया, जो वर्तमान में जारी हैं और जिनकी परिकल्‍पना की जा रही है।
     उन्‍होंने जोर देकर कहा कि ‘समय सीमाओं का निर्धारण किया जाना चाहिए तथा उनका सख्‍ती से अनुपालन होना चाहिए।’ राष्‍ट्रीय सुदूर संवेदी केंद्र (एनआरएससी) जोकि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का एक हिस्‍सा है, जल गुणवत्‍ता निगरानी, जल विज्ञान संबंधी निगरानी तथा मूल्‍यांकन, भू-आकृति विज्ञान संबंधी निगरानी एवं मूल्‍यांकन, जैव संसाधन निगरानी एवं मूल्‍यांकन, व्‍यापक भू-स्‍थानिक डाटा बेस के लिए भू-स्‍थानिक प्रौद्योगिकी का उपयोग करने एवं सामुदायिक भागीदारी में सक्षम बनाने और अन्‍य एजेंसियों के साथ आवश्‍यक संपर्क समन्वित करने के लिए मोबाइल एप्लिकेशन विकसित करने में एनएमसीजी की सहायता कर रहा है।
      इस समर्थन का उद्देश्‍य गंगा नदी में प्रदूषण की निगरानी करने का लक्ष्‍य हासिल करना है। एनएमसीजी की कोशिश कारगर कार्यान्‍वयन तथा निर्णय निर्माण के लिए समस्‍त गंगा नदी बेसिन की जीआईएस मैपिंग को अर्जित करना भी है। 
      एनएमसीजी को सहायता देने के एक हिस्‍से के रूप में एनआरएससी द्वारा सूचीबद्ध कुछ दायित्‍वों में व्‍यापक जीआईएस डाटा बेस का निर्माण, कन्‍नौज से वाराणसी तक मुख्‍य गंगा के उपग्रह डाटा का उपयोग करते हुए जल गुणवत्‍ता आकलन, वास्‍तविक जल गुणवत्‍ता डाटा, मानस दर्शन, उच्‍च गुणवत्‍ता बहुछाया संबंधी उपग्रह छवि, वायु स्‍थलाकृतिक सर्वेक्षण, शहरी अव्‍यवस्थित विस्‍तार परिवर्तन मानचित्रण आदि शामिल हैं। 
     एनएमसीजी एक व्‍यापक योजना पद्धति के लिए निकटतम मुख्‍य सड़क से नदी के तट/बाढ़ क्षेत्र तक के पांच किलोमीटर की दूरी की पहचान करने के द्वारा गंगा नदी को स्‍वच्‍छ रखने के लिए एक समग्र दृष्टिकोण का अनुपालन कर रहा है।

भारतीय रेलवे में व्‍यापक बदलाव, महत्‍वपूर्ण घोषणा

      नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने रेलवे को एक ऐसा इंजन बनाने का लक्ष्‍य रखा है जो नये भारत की दिशा में हमारी विकास यात्रा को नई गति प्रदान करेगी। 


  इसी लक्ष्‍य से प्रेरित होकर रेल मंत्री पीयूष गोयल ने भारतीय रेलवे में व्‍यापक बदलाव के लिए रेल मंत्रालय द्वारा लिए गए विभिन्‍न निर्णयों की घोषणा आज अर्थात 28 सितंबर, 2017 को रेल भवन में की। इस अवसर पर संचार राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) एवं रेल राज्‍य मंत्री मनोज सिन्‍हा भी उपस्थित थे। 
      रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, ‘रेलवे भारतीय यात्रियों के लिए सुरक्षा, गति एवं सेवा के उच्‍च मानक सुनिश्चित करने के साथ-साथ राष्‍ट्र के विकास में अहम योगदान देने के लिए भी प्रतिबद्ध है। पिछले एक माह के दौरान भारतीय रेलवे ने ये लक्ष्‍य सुनिश्चित करने के लिए महत्‍वपूर्ण परिवर्तनकारी कदम उठाए हैं।’ 
      रेल मंत्री पीयूष गोयल द्वारा घोषित किए गए अनेक निर्णयों का उल्‍लेख किया गया है। यात्री सुरक्षा को सर्वोच्‍च प्राथमिकता, सुरक्षा को उच्‍च एवं स्‍पष्‍ट प्राथमिकता, नई लाइनों/आमान परिवर्तन/पटरियों के आवंटन के मुकाबले पटरी नवीकरण को प्राथमिकता, अधिकारियों द्वारा क्षेत्रीय निरीक्षण पर विशेष जोर, रखरखाव ब्‍लॉकों को मंजूरी दिए जाने को उच्‍च प्राथमिकता, शेष 5,000 मानव रहित लेवल क्रॉंसिंग को समयबद्ध ढंग से हटाना। 
      अगले साल से आईसीएफ कोच के बजाय एलएचबी कोचों को इस्‍तेमाल में लाया जाएगा, सुरक्षा व्‍यवस्‍था बेहतर करने के लिए रेल के डिब्‍बों और स्‍टेशनों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने का प्रावधान है, जिससे विशेषकर महिलाएं एवं वरिष्‍ठ नागरिक लाभान्वित होंगे, मैनुअल इंटरलॉकिंग के स्‍थान पर इलेक्‍ट्रॉनिक सिग्‍नल इंटरलॉकिंग की संख्‍या बढ़ाई जाएगी, वर्तमान सिग्‍नल प्रणाली को बेहतर किया जाएगा, टीपीडब्‍ल्‍यूएस (रेल सुरक्षा एवं चेतावनी प्रणाली और एमटीआरसी (मोबाइल ट्रेन रेडियो संचार) का उपयोग किया जाएगा। 
      उपनगरीय और लम्‍बी दूरी की रेलगा‍डि़यों में अत्‍या‍धुनिक सिग्‍नल प्रणाली लगाने पर विचार, खामियों इत्‍यादि का पता लगाने के लिए कैमरा, अल्‍ट्रासोनिक फ्रीक्‍वेंसी डिटेक्‍शन जैसी प्रौद्योगिकी का उपयोग, ड्यूटी के दौरान सभी आरपीएफ कर्मचारियों और टीटीई को उचित वर्दी में रहना होगा, ताकि पारदर्शिता लाई जा सके, आरपीएफ कर्मचारी टिकट चेकिंग नहीं करेंगे क्‍योंकि यह टीटीई का काम है। हालांकि वे टिकट चेकिंग दल की सहायता करेंगे।
     प्रौद्योगिकी के जरिये बदलाव, निगरानी एवं या‍त्री सेवाओं के लिए मोबाइल एप के विस्‍तृत उपयोग पर विशेष जोर सभी स्‍टेशनों एवं रेलगाडि़यों में हाई स्‍पीड वाई-फाई कनेक्टिविटी होगी। 1 नवंबर, 2017 से लगभग 700 रेलगाडि़यों की गति बढ़ाने का प्रस्‍ताव। 48 ट्रेनों को मेल एक्‍सप्रेस के बजाय सुपरफास्‍ट एक्‍सप्रेस में तब्‍दील किया जा रहा है। ट्रेनों के आवागमन की जीपीएस आधारित रियल टाइम निगरानी से जुड़ी परियोजना में तेजी लाई जाएगी। 
      इसरो के जरिये सभी रेल परिसंपत्तियों के उपग्रह आधारित मानचित्रण में तेजी लाई जाएगी। ऊर्जा दक्षता, अगले 4-5 वर्षों में विद्युतीकरण का कार्य पूरा किया जाएगा। इससे ऊर्जा लागत में 10,000 करोड़ रुपये से भी ज्‍यादा की राशि की बचत होगी। इसके साथ ही प्रदूषण घटेगा और आयातित डीजल पर निर्भरता भी कम होगी। रेलगाडि़यों, स्‍टेशनों, कार्यालय भवनों और आवासीय परिसरों में समयबद्ध ढंग से 100 फीसदी एलईडी लाइटिंग और कम ऊर्जा खपत वाले उपकरण जैसे कि पंखे, एसी इत्‍यादि लगाए जाएंगे। 
       स्‍टेशनों का तेजी से पुनर्विकास, दिसंबर 2018 तक लगभग 20 स्‍टेशनों का आधुनिकी‍करण काफी तेजी से पूरा हो जाएगा जहां बेहतर बुनियादी ढांचागत एवं यात्री सुविधाएं होंगी। इनमें होटल, भोजनालय, शॉपिंग, विकलांग यात्रियों के अनुकूल सुविधाएं, मल्टीमोडल ट्रांसपोर्ट हब, सुरक्षा इत्‍यादि की व्‍यवस्‍था होगी। अतिरिक्‍त स्‍टेशनों की पहचान की जाएगी और स्‍व-वित्‍तपोषण वाला बिजनेस मॉडल सृजित करने के प्रयास किए जाएंगे, जैसे कि अनुबंध की अवधि का पुन:आकलन किया जाएगा, पहुंच नियंत्रण सनिश्चित किया जाएगा, उप-ठेका की आजादी होगी,इत्‍यादि। 
     बहुपयोगी केंद्रों के रूप में रेलवे स्‍टेशन, ऐसे अनेक स्‍टेशनों का इस्‍तेमाल योग सेंटर, कौशल प्रशिक्षण उद्देश्‍य, शैक्षणिक उद्देश्‍यों जैसी गतिविधियों के लिए बहुपयोगी केंद्रों के रूप में करने का प्रस्‍ताव है जहां दिनभर में कुछ ही ट्रेनें आती हैं। स्‍वास्‍थ्‍य एवं शैक्षणिक सुविधाओं का उन्‍नयन, इसके अलावा, भारतीय रेलवे द्वारा संचालित विद्यालयों और अस्‍पतालों में बेहतर बुनियादी ढांचागत सुविधाएं उपलब्‍ध कराई जाएंगी जिससे न केवल रेल कर्मचारीगण, बल्कि अन्‍य लोग भी लाभन्वित होंगे।
      मानव संसाधन, मानव संसाधन के कल्‍याण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। शिकायत निवारण शिविर नियमित रूप से लगाए जा रहे हैं। कर्मचारियों की शिकायतें सुनने के लिए प्रत्‍येक क्षेत्रीय/प्रभागीय मुख्‍यालय में शिकायत निवारण प्रकोष्‍ठ स्‍थापित किए जा रहे हैं। बड़े पैमाने पर अधिकारों का विकेंद्रीकरण किया जा रहा है। प्रणाली की दक्षता बेहतर करने के लिए आक्रामक ढंग से प्रक्रियागत सुधार लागू किए जा रहे हैं। 
       संगठनात्‍मक स्‍तरों की संख्‍या में कमी का विश्‍लेषण किया जा रहा है। परिचालन में गतिशीलता सुनिश्चित करने के लिए ‘ए1’ श्रेणी के 75 स्‍टेशनों पर प्रतिभाशाली और उत्साही अधिकारियों को ‍स्टेशन डायरेक्टर के रूप में तैनात किया जाएगा। मुख्‍यालय से पुन: आवंटन के जरिये प्रभागीय कार्यकलाप मजबूत करने के लिए अतिरिक्‍त एडीआरएम की तैनाती की जाएगी। क्षेत्रीय कर्मचारियों के कल्‍याण पर ध्‍यान केंद्रित करना।
     ग्रुप डी श्रेणी के कर्मचारियों के कामकाज की स्थितियों को बेहतर करना। उदाहरण के लिए, गैंग-मैन को आरामदेह वर्दी और बेहतर गुणवत्‍ता वाले जूते दिए जाएंगे क्‍योंकि पटरियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्‍मेदारी इन्‍हीं पर होती है और उन्‍हें किसी विशेष दिन औसतन लगभग 15-16 किलोमीटर चलना पड़ जाता है। उनके आवासीय क्‍वार्टरों (गैंग हट) को भी बेहतर किया जाएगा। 
     लोको चालकों के रनिंग रूम को वातानुकूलित किया जा रहा है। परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण के जरिए रेलवे के राजस्व में वृद्धि, रेल परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण से वित्‍तीय स्थिति और परिचालन अनुपात बेहतर होगा। इसके अलावा, महत्‍वपूर्ण रेल परियोजनाओं के लिए संसाधन उपलब्‍ध होंगे। भूमि के मुद्रीकरण को आकर्षक बनाकर यह काम पूरा किया जाएगा, जिसके लिए विभिन्‍न नियमों में परिवर्तन किए जाएंगे।
      इन सुधारों से हमारे राष्‍ट्र की जीवन रेखा को पनपने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, ये सुधार हमारे आर्थिक-सामाजिक विकास में भी अपेक्षाकृत अधिक योगदान करेंगे। भारतीय रेलवे में व्‍यापक परिवर्तन की प्रक्रिया जारी है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह सिर्फ लोगों की मजबूरी नहीं, बल्कि लोगों की पसंद है।

भारतीय रेल मुंबई क्षेत्र में 100 नई उपनगरीय रेल सेवाएं आरंभ करेगी

    मुंबई। मुंबई उपनगरीय रेल सेवाओं को एक बड़े प्रोत्‍साहन के रूप में भारतीय रेल पश्चिमी रेलवे और मध्‍य रेलवे जोन के अपने मुंबई उपनगरीय नेटवर्क पर 100 अतिरिक्‍त स्‍थानीय रेल सेवाएं आरंभ कर रही है।

    इन अतिरिक्त सेवाओं के साथ पश्चिमी रेलवे और मध्य रेलवे के मुंबई में कुल उपनगरीय स्थानीय रेल सेवाएं वर्तमान 2983 सेवाओं से बढ़कर 3083 उपनगरीय सेवाओं तक पहुंच जाएगी। ये सेवाएं कल अर्थात 29 सितंबर 2017 को मुंबई में आयोजित एक भव्‍य कार्यक्रम में आरंभ की जाएंगी।
    इस अवसर पर केन्‍द्रीय रेल एवं कोयला मंत्री पीयूष गोयल तथा अन्‍य गणमान्‍य व्‍यक्ति भी उपस्थित रहेंगे। इन 100 सेवाओं में से 32 नई सेवाएं पश्चिमी रेल में और 68 सेवाएं मध्‍य रेलवे में आरंभ की जाएंगी। पश्चिमी रेलवे में 17 सेवाएं 1 अक्‍तूबर 2017 से अप दिशा में आरंभ की जाएंगी, जबकि 15 सेवाएं 1 अक्‍तूबर 2017 से डाउन दिशा में आरंभ की जाएंगी। कुल मिलाकर पश्चिमी रेलवे में 32 नई सेवाएं आरंभ की जाएंगी।
         पश्चिमी रेलवे वर्तमान में 1323 उपनगरीय सेवाएं संचालित करती है। इन सेवाओं के जुड़ने के बाद पश्चिमी रेलवे में कुल उपनगरीय सेवाएं 1355 तक पहुंच जाएंगी। मध्‍य रेलव में 14 उपनगरीय सेवाएं 2 अक्‍तूबर, 2017 से ‘हार्बर लाइन’ पर आरंभ की जाएंगी। 2 अक्‍टूबर, 2017 से ‘ट्रांस-हार्बर लाइन’ पर 14 उपनगरीय सेवाएं आरंभ की जाएंगी।
    ‘मेन लाइन’ पर 16 उपनगरीय सेवाएं 1 नवम्‍बर, 2017 से आरंभ की जाएंगी तथा ‘हार्बर’ एवं ‘ट्रांस-हार्बर लाइन’ पर 24 उपनगरीय सेवाएं 31 जनवरी, 2018 से आरंभ की जाएंगी। कुल मिलाकर मध्‍य रेलवे में 68 सेवाएं आंरभ की जाएंगी। मध्‍य रेलवे वर्तमान में 1660 उपनगरीय सेवाओं का संचालन करती है। 
     इन सेवाओं के जुड़ने के बाद मध्‍य रेलवे में कुल उपनगरीय सेवाएं 1728 तक पहुंच जाएंगी।इन नई उपनगरीय सेवाओं के लागू होने से मुंबई उपनगरीय नेटवर्क में भीड़भाड़ में कमी आएगी तथा परिवहन में तेजी आएगी। इससे मुंबई उपनगरीय नेटवर्क में रोजाना यात्रा करने वाले 77 लाख यात्रियों को लाभ पहुंचेगा।

गरीब नवाज कौशल विकास केंद्रों में सेनेटरी सुपरवाइजर का कोर्स

    नई दिल्ली। केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने यहाँ कहा कि देश भर में स्थापित किये जा रहे गरीब नवाज कौशल विकास केंद्रों में सेनेटरी सुपरवाइजर का कोर्स कराया जायेगा। 

    नकवी ने आज यहाँ अल्पसंख्यक मंत्रालय के मौलाना आजाद एजुकेशन फाउंडेशन के कैंपस में स्वच्छता ही सेवा के तहत श्रमदान किया। नकवी ने कहा कि गरीब नवाज कौशल विकास केंद्रों पर सेनेटरी सुपरवाइजर का लगभग 3 से 6 महीनों का कोर्स कराया जायेगा। 
     इससे जहाँ एक ओर अल्पसंख्यक समुदायों के गरीब तबकों के लोगों के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे वहीँ दूसरी तरफ स्वच्छ भारत अभियान को मजबूती मिलेगी। नकवी ने कहा कि आधुनिक मशीनों और तकनीक से साफ-सफाई एवं कूड़े-कचड़े आदि से खाद बनाने की ट्रेनिंग भी इस कोर्स का हिस्सा होगी। 
    नकवी ने कहा कि गरीब नवाज़ कौशल विकास योजना के तहत देश भर में 100 गरीब नवाज़ कौशल विकास केंद्र स्थापित किये जा रहे हैं जहाँ अल्पसंख्यक समुदायों के गरीब तबकों के युवाओं को विभिन्न रोजगारपूरक कौशल विकास की ट्रेनिंग दी जाएगी। नकवी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्वच्छ भारत अभियान सफल साबित हो रहा है, आजादी के बाद पहली बार सफाई, एक जज़्बा ही नहीं बल्कि जुनून बन गया है। 2 अक्टूबर 2014 को शुरू हुआ स्वच्छ भारत अभियान, आज आम लोगों के सहयोग से एक मजबूत मिशन बन गया है। 
        केंद्र सरकार स्वच्छ, स्वस्थ, और सशक्त भारत बनाने के संकल्प के साथ काम कर रही है। नकवी ने कहा कि आज आम लोग और विशेषकर युवा स्वच्छता को लेकर काफी सजग हुए हैं। साफ-सफाई एक कार्य ना रह कर एक जन आंदोलन बन गया है। साफ-सफाई के प्रति सोच बदल गई है। देश भर में स्वच्छ भारत अभियान पर आधारित स्वच्छता ही सेवा कार्यक्रम 15 सितंबर, 2017 से गांधी जयंती यानी 2 अक्टूबर, 2017 तक आयोजित किया जा रहा है।
      नकवी ने कहा कि स्वच्छ भारत अभियान के तहत केंद्र सरकार ने पिछले 3 वर्षों में 3 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण किया है। अल्पसंख्यक मंत्रालय द्वारा भी बड़ी संख्या में मदरसों एवं अन्य अल्पसंख्यक समुदाय के संस्थानों में शौचालय निर्माण कर इन संस्थानों को स्वच्छता अभियान से जोड़ा जा रहा है। इन शौचालयों की साफ-सफाई एवं रख रखाव में यह सेनेटरी सुपरवाइजर बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। 
       नकवी ने कहा कि अल्पसंख्यक मंत्रालय भी 15 सितम्बर से 2 अक्टूबर, 2017 तक स्वच्छता ही सेवा अभियान का आयोजन कर रहा है। अल्पसंख्यक मंत्रालय के मुख्यालय अंत्योदय भवन, दिल्ली के विभिन्न स्थानों में स्थित अल्पसंख्यक मंत्रालय के विभिन्न विभागों जैसे एनएमडीएफसी, केंद्रीय वक्फ कौंसिल, मौलाना आजाद एजुकेशन फाउंडेशन के कार्यालयों के साथ-साथ देश भर में विभिन्न राज्य वक्फ बोर्डों में इस अभियान का आयोजन किया जा रहा है।
      इन कार्यक्रमों का आयोजन अल्पसंख्यक समुदायों के स्कूलों एवं अन्य शैक्षिक संस्थानों, सामाजिक संस्थानों, मदरसों, दरगाहों इत्यादि में किया जा रहा है।

Wednesday, 27 September 2017

भारत व इथोपिया के बीच सूचना, संचार व मीडिया के क्षेत्र में सहयोग पर करार

      नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में मंत्रिमंडल ने भारत और इथोपिया के बीच सूचना, संचार और मीडिया के क्षेत्र में सहयोग पर करार पर हस्‍ताक्षर को अपनी मंजूरी प्रदान कर दी है। 

     इसका उद्देश्‍य दोनों देशों के बीच सूचना, संचार और मीडिया के बढ़ते प्रभाव के दृष्‍टिगत सूचना के प्रकटीकरण और समावेशी विकास के लिए इसका इस्‍तेमाल करना है। इससे आदान-प्रदान कार्यक्रमों के माध्‍यम से व्‍यक्ति से व्‍यक्ति संपर्क को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे सूचना, संचार और मीडिया के क्षेत्र में सर्वोत्‍तम पद्धतियों को दोनों देशों के बीच साझा करने का भी अवसर मिलेगा।
     इस करार से रेडियो, प्रिंट मीडिया, टेलीविजन, सोशल मीडिया जैसे जन संचार माध्‍यमों आदि में सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। दोनों देशों के बीच जनता के प्रति जवाबदेही के अवसर भी मुहैया होंगे। यह करार संस्‍थागत फ्रेमवर्क के माध्‍यम से दोनों देशों के बीच प्रतिनिधिमंडलों के आदान-प्रदान, उन्‍हें एक-दूसरे की सर्वोत्‍तम पद्धतियों से सीख हासिल करने, साम्‍यता और सम्‍पूर्णत के अवसर मुहैया कराएगा।

देश की अर्थव्यवस्था में कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका

     नई दिल्ली। केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा है कि कृषि लोगों के जीवन और देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जंहा 50 प्रतिशत से अघिक लोग अपनी आजिविका के लिए कृषि पर निभर हैं। 

  देश को विकसित करने के लिए कृषि और किसान, दोनों को विकसित करने की जरूरत है। कृषि मंत्रालय अपने विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से न केवल कृषि के विकास के लिए बल्कि किसानों के कल्य़ाण के लिए भी काम करता है। सिंह ने यह बात आज कृषि भवन, नई दिल्ली में स्टार्ट अप कंपनियों के सीईओ के साथ हुई बैठक में कही।
      राधा मोहन सिंह ने कहा कि देश में कृषि विकास का लक्ष्य है; 2012 तक किसानों की आमदनी दोगुनी करना। सीमित संसाधनों और जमीन के निश्चित क्षेत्र की उपलब्धता के साथ, यह प्रोदोयोगिकी की सहायता के बिना हासिल नहीं किया जा सकता है। साथ ही इसे कम लागत, किसान के अनुकूल एवं मापनीय होने की जरूरत है। कृषि मंत्रालय किसानों के हित कई योजनाएं चला रहा है, जैसे कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, राष्ट्रीय कृषि बाजार-(ई – नेम), परंपरागत कृषि विकास योजना, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना आदि।
      यह सभी योजनाएं किसानों को विभिन्न तरह की सहायता प्रदान कर रही है। जैसे मृदा स्वास्थ्य कार्ड। इससे मिटटी के स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने में मदद मिलेगी और उर्वरकों की लागत भी कम हो जाएगी। इस कार्यक्रम के लिए लाखों मिट्टी के नमूनो का विशलेषण करना होगा जिसमें अत्यधिक समय और परिश्रम की आवश्यकता है।
      मिट्टी के नमूने की जांच के लिए ऐसे तकनीकी की जरूरत है। जिसमें कम लागत वाले हाथ से धारित (हैंड डिवाइस) से काम हो जाए, अथार्त इसके लिए मृदा संवेदक या मिट्टी की उर्वरता मूल्यांकन के किसी भी गैर विनाशकारी विधि की जरूरत है। जो कि तकनीक का उपयोग करके मिट्टी के स्वास्थ्य का दूरस्थ रूप से मूल्याकंन कर सकें।
      प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना जिसके अंर्तगत फसल की क्षति का आकलन समय पर और सही रूप में करने की जरूरत है ताकि किसानों को जल्द से जल्द और सटीक बीमा दावा समाघान के जरिए उन्हें लाभ पहुचाया जा सके। इसके लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना ने विभिन्न प्रोद्योगिकियों जैसे कि स्मार्ट फोन आधारित एंड्राइड एप्लिकेशन द्वारा फसल कटौती प्रयोगों का डेटा संग्रह, फसल क्षति, मध्य मौसम में प्रतिकूलता, क्षेत्र विसंगति एवं फसल कटाई के बाद नुकसान के आकलन के लिए उपग्रह एवं ड्रोन का प्रयोग।
      बीमाधारक किसानों की संख्या बढ़ाने के लिए सूचना एवं तकनीकी आधारित आधारित समाधान को प्रोत्साहित किया है। सिंह ने कहा कि इसके लिए तकनीकी समाधान विकसित करने की आवश्यक्ता है। राधा मोहन सिंह ने कहा कि किसानों के अनुकूल मंत्रालय के विभिन्न कार्यक्रमों के लिए आवश्यक विभिन्न प्रोदयोगिकी जैसे सेंसर प्रदयोगिकी, बिग डेटा एनालिटिक्स, क्लाउड कंप्यूटिंग, एप डेवलपमेंट, जीआईएस आधारित पोर्टल का विकास, विभिन्न कृषि आकलन के लिए कम लागत वाले उपकरण शामिल हैं।
     यह मंत्रालय इन विभिन्न प्रकार की प्रोदयोगिकयों और उनके विकास को बढ़ावा देगा जो किसानों के कल्याण के लिए अंतत: इस्तेमाल किया जा सकता है। केन्द्रीय कृषि मंत्री द्वारा इस संबंध में विभाग में एक और ग्रुप गठन करने के लिए कहा जिससे इन सभी स्टार्ट अप के साथ आगे कार्य कर सकें।

दूरसंचार उद्योग भारत में 4 मिलियन रोजगार देगा

   नई दिल्ली। संचार मंत्री मनोज सिन्हा ने कहा है कि अभी भारत 1.2 अरब से अधिक ग्राहक आधार और लगभग 450 मिलियन इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के साथ दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा दूरसंचार बाजार है। 

    मनोज सिन्हा भारत मोबाइल कांग्रेस -2017 का उद्घाटन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि स्मार्टफोन को अपनाने और डेटा उपभोग में घातांकीय वृद्धि से दूरसंचार उद्योग 2017 तक लगभग 38.25 मिलियन डॉलर के राजस्व वाला उद्योग हो जाएगा। वर्ष 2014 से 2017 की अवधि में 5.2ऽ की सीएजीआर वृद्धि दर्ज की गई। 
    उन्होंने कहा कि पिछले चार वर्षों में इस क्षेत्र में निवेश लगभग 220 प्रतिशत बढ़ा है। मोबाइल कवरेज को बढ़ाने के लिए ऑपरेटरों ने पिछले 15 महीनों में 0.2 मिलियन से अधिक साइटें शुरू की हैं। प्रत्येक 3 मिनट में एक नई साइट शुरू की जा रही है। सिन्हा ने कहा कि ग्रामीण बाजार में सरकार और दूरसंचार कंपनियों के निरंतर ध्यान देने से करीब 4 मिलियन प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होगे। 
      मोबाइल फोन और डेटा उपयोग की बिक्री में निरंतर बढ़ोतरी दर्ज की। मोबाइल उपकरणों से ट्रैफ़िक कुल ई-कॉमर्स ट्रैफ़िक का 70ऽ योगदान देता है। भारतीय ई-कॉमर्स बाजार 2021 से 125 मिलियन डॉलर तक 2.8 गुना बढ़ने की संभावना है। मोबाइल डिवाइस इस वृद्धि को तेजी देंगे। 
        उन्होंने कहा कि डिजिटल भारत के लक्ष्यों का मौलिक आधार देश का संचार उद्योग है, जो केवल लोगों से जुड़ा ही नहीं है, बल्कि नौकरियों का भी सृजन किया है। ज्ञान के लिए एक उपकरण बन गया है। खजाने में योगदान दिया है। आर्थिक विकास और वित्तीय समावेशन का विस्तार किया है। सरकार की डिजिटल इंडिया योजना के तीन प्रमुख उदाहरण हैं। प्रत्येक नागरिक को उपयोगिता के रूप में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, मांग पर शासन और सेवाएं तथा नागरिकों का डिजिटल सशक्तिकरण। 
       संचार मंत्री ने कहा कि पिछले कुछ सालों में सरकार ने प्रौद्योगिकी, स्मार्ट शहरों, आपस में जुड़े सुपर हाईवे पर ध्यान दिया है। नागरिकों के लिए ई-गवर्नेंस सेवाओं की डिलीवरी में तेजी आई है। यह सभी दूरसंचार क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भर हैं। उन्होंने कहा कि इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) के आने से लोग न केवल इंटरनेट से आपस में जुड़ेगे बल्कि अरबों मशीनें और उपकरण जैसे पहनने योग्य वस्त्र, कार, घर, औद्योगिक उपकरण, घरेलू एपलांस आदि शामिल होंगे। 
     'डिजिटल इंडिया' पर ध्यान केंद्रित करने के साथ-साथ कम लागत का स्मार्टफोन, नवीनतम तकनीकों को अपनाने और घातांकीय इंटरनेट वृद्धि अरबों को इंटरनेट से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। संचार मंत्री ने कहा कि दूरसंचार और आईटी वर्तमान में सकल घरेलू उत्पाद में 16.5 प्रतिशत योगदान देते हैं। इसमें वृद्धि की बहुत सारी संभावनाएं हैं।
     उम्मीद है कि एनटीपी 2018 के साथ, भारतीय दूरसंचार बाजार 2020 तक 6.6 लाख रुपये का राजस्व स्तर से आगे निकला जाएगा। सरकार कारोबारी सहजता के लिए और नवाचार और निवेश के अनुकूल वातावरण बनाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठा रही है।
      इस अवसर पर दूरसंचार सचिव सुश्री अरुणा सुंदरराजन ने कहा कि भारत मोबाइल कांग्रेस प्रधानमंत्री की दृष्टि से पूरी तरह से जुड़ने और डिजिटल रूप से सशक्त भारत के लिए मंच का वादा करता है।
     उन्होंने कहा कि वर्ष के अंत तक एक लाख ग्राम पंचायतों को ब्रॉडबैंड के साथ जोड़ने के लिए भारत-नेट प्रोजेक्ट को लागू करने में सात गुनी तेजी से काम किया गया। उन्होंने बताया कि 2019 तक 1 लाख वाई-फाई हॉटस्पॉट्स का लक्ष्य और 2022 तक भारत में 700 मिलियन इंटरनेट उपयोगकर्ता का लक्ष्य हासिल करना है।

भारत में विदेशी पर्यटकों का आगमन बढ़ा

    नई दिल्ली। राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने यहां विश्‍व पर्यटन दिवस के अवसर पर संस्‍कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित एक समारोह में यात्रा, पर्यटन और आतिथ्‍य उद्योग की विभिन्‍न श्रेणियों में राष्‍ट्रीय पर्यटन पुरस्‍कार 2015-16 प्रदान किये। 

    पर्यटन राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) अल्‍फोंस कन्‍ननथनम ने समारोह की अध्‍यक्षता की। समारोह में राज्‍यों के पर्यटन मंत्री, केन्‍द्र और राज्‍य सरकारों के अधिकारी, प्रमुख होटलों के मालिक, ट्रेवल एजेंट और टूर ऑपरेटर सहित यात्रा और आतिथ्‍य उद्योग के सदस्‍य, पर्यटन और आतिथ्‍य संस्‍थानों के छात्र, ट्रेवल मीडिया तथा पत्रकार उपस्थित थे। 
     इस अवसर पर राष्‍ट्रपति ने अतुल्‍य भारत 2.0 अभियान: एक विरासत अपनाएं परियोजना और नए अतुल्‍य भारत वेबसाइट का शुभारंभ भी किया। अतुल्‍य भारत 2.0 अभियान डिजिटल और सोशल मीडिया पर अधिक ध्‍यान केंद्रित कर बाजार आधारित प्रचार योजनाओं और उत्‍पाद विशिष्‍टता के आधार पर रचनात्‍मकता के लिए विश्‍वभर में किये जा रहे मौजूदा वर्गीकृत प्रचार में हो रहे परिवर्तन को दर्शाता है। 
      एक विरासत अपनाएं परियोजना का उद्देश्‍य पर्यटक सुविधाएं विकसित करने के लिए सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की कंपनियों को विरासत स्‍थल सौंपना है। इन स्‍थलों को अपनाकर वे स्‍मारक मित्र बन जायेंगे। नया अतुल्‍य भारत वेबसाइट मौजूदा वेबसाइट का उन्‍नत संस्‍करण हैं जिसमें कई उपयोगी सुविधाएं हैं। इस अवसर पर राष्‍ट्रपति ने कहा कि पर्यटन विश्‍व के सबसे बड़े उद्योग में से एक है।
      इसके विकास का अनुमान इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि दुनिया भर में पर्यटकों की संख्या 1950 में 2.2 करोड़ थी जो 2016 में बढ़कर 123 करोड़ हो गई। विश्व के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में पर्यटन उद्योग का 10.2 प्रतिशत का योगदान है। अनुमान है कि दुनिया में प्रत्‍येक दसवां व्यक्ति पर्यटन उद्योग में कार्य करता है। भारत में भी बड़ी संख्या में लोगों की आजीविका पर्यटन उद्योग से जुड़ी हुई है। 
      वर्ष 2016 में सकल घरेलू उत्पाद में पर्यटन का 9.6 प्रतिशत और कुल रोजगार में 9.3 प्रतिशत योगदान था। पर्यटन उद्योग स्थायी रोजगार के अवसर पैदा करने और गरीबी दूर करने में महत्‍वपूर्ण योगदान दे सकता है। एक आकंलन के अनुसार, पर्यटन उद्योग में 10 लाख रुपये का निवेश कर लगभग 90 लोगों को रोजगार प्रदान किया जा सकता है, जबकि कृषि क्षेत्र में लगभग 45 लोगों और विनिर्माण क्षेत्र में लगभग 13 लोगों के लिये रोजगार उपलब्‍ध होता है।
      राष्ट्रपति ने कहा कि समावेशी पर्यटन विकास से समेकित आर्थिक विकास को सुदृढ़ किया जा सकता है। प्रत्येक नागरिक को अपने स्तर पर पर्यटकों को अच्छा अनुभव प्रदान करने का प्रयास करना चाहिए। पर्यटन के प्रति जागरूक समाज में सरकार की भूमिका केवल दिशा और सुविधाजनक वातावरण प्रदान करने की है। 
     राष्ट्रपति ने कहा कि पर्यटन मंत्रालय के सहयोग से संस्कृति मंत्रालय और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा आज शुरू की गयी एक विरासत परियोजना अपनाएं से हमारे समृद्ध और विविध विरासत स्मारकों को पर्यटक-अनुकूल बनाने की भरपूर संभावनाएं हैं। 
     उन्होंने आशा व्यक्त की कि सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों की भागीदारी से यह परियोजना हमारी विरासत के रखरखाव में मददगार साबित होगी। पर्यटन राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) अल्‍फोंस कन्‍ननथनम ने अपने संबोधन में राष्‍ट्रीय पर्यटन पुरस्‍कार 2015-16 के विजेताओं को बधाई दी और आग्रह किया कि विश्‍वभर के यात्रियों के लिए भारत को सबसे पसंदीदा गंतव्‍य स्‍थान बनाने के लिए सभी प्रतिबद्ध हों।
      उन्‍होंने कहा कि भारत में विदेशी पर्यटकों का आगमन बढ़ा है और घरेलू पर्यटक यात्राओं में वृद्धि हुई है। विश्‍व आर्थिक फोरम के यात्रा और पर्यटन प्रतिस्‍पर्धी सूचकांक 2017 में भारत की रैंकिंग वर्ष 2015 में 65वें स्‍थान से बढ़कर 52वें स्‍थान पर पहुंच गई थी और अब भारत का स्‍थान 12 पॉइंट और बढ़कर 40वां है। 
    उन्‍होंने कहा कि भारत एक ऐसा गंतव्‍य स्‍थल है जहां सभी यात्रियों की जरूरतें पूरी होती हैं। हमारा सामूहिक लक्ष्‍य भारत में पर्यटन क्षेत्र को स्‍थायी और जिम्‍मेदार तरीके से विकसित करना है। बडे पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करने, गरीबी उन्‍मूलन, स्‍थानीय समुदायों के आर्थिक और सामाजिक लाभ तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता पैदा करने के लिए अपनी अंतरनीहित क्षमताओं के कारण पर्यटन का वांछनीय स्‍थान है। 
        उन्‍होंने यात्रा और पर्यटन उद्योग के नेताओं से पर्यटन पर अपने अभिनव विचार साझा करने का आग्रह किया ताकि इसे प्रधानमंत्री के महान विचार बदलते भारत के पर्यटन क्षेत्र में साकार किया जा सके। पर्यटन मंत्रालय में सचिव श्रीमती रश्मि वर्मा ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से भारत का पर्यटन क्षेत्र बढि़या प्रदर्शन कर रहा है और इसकी वृद्धि दर विश्‍व पर्यटन की औसतन वृद्धि दर से अधिक है। 2016 में भारत में 8.80 मीलियन विदेशी पर्यटकों का स्‍वागत किया था जो 2015 की तुलना में 9.7 प्रतिशत अधिक था। जनवरी से जुलाई 2017 की अवधि के दौरान विदेशी पर्यटकों के आगमन में 15.7 प्रतिशत की दो अंकीय वृद्धिदर रही, जिसके कारण वर्तमान वर्ष में भी पर्यटन के क्षेत्र में काफी संभावनाएं हैं।
       यह पर्यटन क्षेत्र के हमारे साझेदारों की समर्थन और सहयोग के बिना संभव नहीं था। भारत सरकार का पर्यटन मंत्रालय प्रतिवर्ष यात्रा, पर्यटन और आतिथ्‍य उद्योग की विभिन्‍न श्रेणियों में राष्‍ट्रीय पर्यटन पुरस्‍कार प्रदान करता है। यह पुरस्‍कार राज्‍य सरकारों केन्‍द्र शासित प्रदेशों, वर्गीकृत होटलों, विरासत होटलों, मान्‍यता प्राप्‍त ट्रेवल एजेंटों, टूर ऑपरेटरों, पर्यटक परिवहन संचालकों, व्‍यक्तियों और अन्‍य निजी संगठनों को अपने-अपने क्षेत्र में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए प्रदान किये जाते हैं। 
     राष्‍ट्रीय पर्यटन पुरस्‍कार पिछले कुछ वर्षों से यात्रा, पर्यटन और आतिथ्‍य क्षेत्रों में उपलब्धियों के लिए प्रतिष्ठित सम्‍मान माने जाते हैं। पुरस्‍कार समारोह की तिथि का चयन विश्‍व पर्यटन दिवस के उपलक्ष्‍य में किया गया जो प्रतिवर्ष 27 सितम्‍बर को मनाया जाता है। विश्‍व पर्यटन दिवस मनाने का उद्देश्‍य पर्यटन के महत्‍व और इसकी सामाजिक सांस्‍कृतिक राजनीतिक तथा आर्थिक मूल्‍यों के प्रति अंतरराष्‍ट्रीय समुदाय में जागरूकता बढ़ाना है।

सौभाग्य : बिजली हर घर योजना

   नई दिल्ली। प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना सौभाग्य नामक नई स्कीम का शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 25 सितंबर सन् 2017 को किया गया।

 इसका उद्देश्य ग्रामीण के साथ-साथ शहरी क्षेत्रों में भी देश में सभी घरों का विद्युतीकरण सुनिश्चत करना है। इस योजना के उद्देश्यों, विशेताओं, अपेक्षित परिणामों और क्रियान्वयन रणनीति की विस्तृत जानकारी देते हैं।
इस नई योजना का उद्देश्य क्या है ?
सौभाग्य का उद्देश्य अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी सुनिश्चत करते हुए सभी घरों में बिजली पहुंचाना और ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के सभी शेष गैर विद्युतिकृत घरों में बिजली कनेक्शन सुलभ कराना है, ताकि देश में सभी घरों में बिजली पहुंचाने का लक्ष्य हासिल किया जा सके। 
     अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी और घरों में बिजली कनेक्शन मुहैया कराने में क्या-क्या शामिल हैं ?
घरों में बिजली कनेक्शन देने के कार्य में संबंधित घर से निकटतम विद्युत खंबे से सर्विस केबल घर तक लाना, बिजली मीटर लगाना, एलईडी बल्ब और एक मोबाईल चार्जिंग प्वाइंट के साथ एकल विद्युत प्वाइंट के लिए तार डालना शामिल है। यदि सर्विस केबल लाने के लिए संबंधित घर के निकट विद्युत खंबा उपलब्ध नहीं है तो कंडेक्टर एवं संबंधित उपकरणों के साथ अतिरिक्त खंबा लगाया जाना भी इस योजना में शामिल है।
     
क्या हर गैर विद्युतीकृत घर को पूरी तरह से मुफ्त में बिजली कनेक्शन दिया जाएगा ?
हाँ। गरीब परिवारों को मुफ्त बिजली कनेक्शन दिए जाएंगे। इस योजना के तहत सिर्फ 500 रूपये के भुगतान पर अन्य घरों को भी विद्युत कनेक्शन मुहैया कराए जाएंगे। इस राशि की वसूली बिजली बिलों के साथ 10 किस्तों में डिस्कॉम विद्युत विभागों द्वारा की जाएगी।
   
क्या मुफ्त बिजली कनेक्शन में उपभोग या खपत के लिए मुफ्त बिजली भी शामिल है ?
इस योजना में किसी भी श्रेणी के उपभोक्ताओं को मुफ्त बिजली मुहैया कराने का कोई प्रावधान नहीं है। संबंधित उपभोक्ताओं को खपत की गई बिजली की कीमत का भुगतान डिस्कॉम विद्युत विभाग की तात्कालिक शुल्क दरों के अनुसार करना होगा।
   
भारत सरकार के पूर्ववर्ती कार्यक्रम सभी के लिए 24ग7 बिजली का भी समान उद्देश्य है। अतः यह इस कार्यक्रम से किस तरह भिन्न है ?
सभी के लिए 24न्7 बिजली राज्यो के साथ एक संयुक्त पहल है जिसमें विशिष्ट राज्य/केन्द्र शासित प्रदेश के रोड़ मैप एवं कार्य योजना को अंतिम रूप देने के लिए विद्युत क्षेत्र के सभी सेग्मेंटों अर्थात विद्युत उत्पादन, पारेषण एवं वितरण, उर्जा दक्षता, डिस्कॉम की माली हालत इत्यादि को शामिल किया गया है, ताकि राज्यों केन्द्र शासित प्रदेशों के साथ विचार-विमर्श कर सभी को 24 घंटे बिजली सुलभ कराई जा सके। सभी के लिए बिजली से संबंधित दस्तावेजों में विद्युत क्षेत्र की समस्त वैल्यु चेन के लिए आवश्यक विभिन्न कदमों का विवरण शामिल है। सभी घरों को कनेक्टिविटी मुहैया कराना 24न्7 विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक है। सौभाग्य बिजली मुहैया कराने के मसले का समाधान करने की दिशा में एक आवश्यक संरचनात्मक सहायता है।
    
वितरण क्षेत्र में दो प्रमुख योजनांए यथा ग्रामीण क्षेत्रों के लिए डीडीयूजीजेवाई और शहरी क्षेत्रों के लिए आईपीडीएस पर पहले से ही अमल किया जा रहा है, अतः एक नई योजना की आवश्यकता क्यों है ?
दीन दयाल उपाध्यायाय ग्राम ज्योति योजना ( डीडीयूजीजेवाई) के तहत गांवों/ घरों में बुनियादी विद्युत ढांचे का सृजन, मौजूदा बुनियादी ढांचे को मज़बूत एवं विस्तार करना,मौजूदा फीडरों/ वितरण ट्रांसफॉर्मरों उपभोक्ताओं के यहां मीटर लगाना शामिल है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति की गुणवत्ता और विश्वसनियता बेहतर की जा सके। इसके अलावा अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी के साथ-साथ केवल उन बीपीएल परिवारों को मुफ्त बिजली कनेक्शन मुहैया कराए जाते हैं, जिसकी पहचान राज्यो द्वारा अपनी सूची के मुताबिक की जाती है। हालांकि ऐसे कई गांव हैं जहां काफी पहले ही विद्युतीकरण हो चुका है लेकिन कई कारणों से अनेक घरों में बिजली कनेक्शन अब तक सुलभ नहीं हो पाए हैं। 
      कई ऐसे गरीब परिवार है जिनके पास बीपीएल कार्ड नहीं है, लेकिन ये परिवार आरंभिक कनेक्शन चार्ज अदा करने में समर्थ नहीं है। अनप़ढ़ लोगों को इस बात की जानकारी नहीं है कि विद्युत कनेक्शन कैसे लिया जाता है? दूसरे शब्दों में, अनपढ़ लोगों के लिए बिजली कनेक्शन लेने के मार्ग में बाधाएं आती है। कई जगहों पर आस-पास बिजली के खंबे नहीं है। विद्युत कनेक्शन लेने के लिए संबंधित घरों से अतिरिक्त खंबे एवं कंडक्टर लगाने का प्रभार लिया जाता है।
   इसी तरह शहरी क्षेत्रों में एकीकृत विद्युत विकास योजना (आईपीडीएस) के तहत बिजली सुविधा मुहैया कराने के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा स्थापित किया जाता है, लेकिन कुछ परिवारों को मुख्यतः उनकी आर्थिक स्थिति के कारण अब तक विद्युत कनेक्शन नहीं मिल पाए हैं क्योंकि वे आरंभिक कनेक्शन चार्ज अदा करने में समर्थ नहीं है। इन सभी कमियों को दूर करने और ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के सभी गैर विद्युतिकृत परिवारों को बिजली कनेक्शन मुहैया कराने से संबंधित प्रवेश बाधा दूर करने और अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी मुहैया कराने के मुद्दे को सुलझाने के लिए ही सौभाग्य का शुभारंभ किया गया है।
   
क्या सौभाग्य योजना की लागत डीडीयुजीजेवाई के तहत उपलब्ध परिव्यय से अलग है ?
हां, सौभाग्य योजना पर आने वाली 16,320 करोड़ रूपये की लागत डीडीयुजीजेवाई के तहत किए जा रहे निवेश के अलावा है।
   
राज्यों को धनराशि के आबंटन का पैमाना क्या है ?
योजना के तहत परियोजनाओं को मंजूरी राज्यों द्वारा पेश की जाने वाली विस्तृत परियोजना रिपोर्टों (डीपीआर) के आधार पर दी जाएगी। इस योजना के तहत धनराशि का कुछ भी अग्रिम आवंटन नहीं किया जाता है।
    
योजना को पूरे देश में कैसे लागू किया जाएगा ?
परियोजना से संबंधित प्रस्ताव राज्यों की डिस्कॉम विद्युत विभाग द्वारा तैयार किए जाएंगे और भारत सरकार के सचिव (विद्युत) की अध्यक्षता वाली अंतर-मंत्रालय निगरानी समीति द्वारा स्वीकृत किए जाएंगे। मंजूर परियोजनाओं के तहत विद्युतिकरण कार्य संबंधित डिस्कॉम/विद्युत विभाग द्वारा पूरे किए जाएंगे। ये कार्य टर्नकी ठेकेदारों अथवा विभाग अथवा उन उपयुक्त ऐजेंसियों के ज़रिए पूरे किए जाएंगे जो मानकों के मुताबिक इस कार्य को पूरा करने में समर्थ है।
 
समयबद्ध ढंग से लक्ष्य प्राप्ति के लिए रणनीति क्या है ?
घरों को बिजली कनेक्शन तेज़ी से मुहैया कराने के लिए गांवों/ग्रामीण कलस्टरों में लाभार्थियों की पहचान के लिए शिविर लगाए जाएंगे। इसके तहत मोबाइल एप/ वेब पोर्टल के साथ अत्याधुनिक सूचना प्रोद्योगिकी का इस्तेमाल किया जाएगा। बिजली कनेक्शन से संबंधित आवेदनों को इलेक्ट्रॉनिक ढंग से भी पंजीकृत किया जाएगा और आवेदक की फोटो, पहचान कार्ड की प्रति और/अथवा विभिन्न विवरण जैसे की मोबाइल नंबर/आधार नंबर/बैंक खाता संख्या इत्यादि सहित समस्त दस्तावेजीकरण कार्य संबंधित शिविरों में ही मौके पर पूरे किए जाएंगे, ताकि जल्द से जल्द कनेक्शन दिए जा सके।
    ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम पंचायत/सार्वजनिक संस्थानों को भी आवेदन पत्र इकट्ठा करने एवं प्रलेखन कार्य पूरा करने के साथ-साथ बिजली बिलों के वितरण, राजस्व संग्रह और अन्य मान्य गतिविधियों के लिए भी अधिकृत किया जाएगा।
    
विद्युत नेटवर्क में 4 करोड़ घरों को शामिल करने पर बिजली की मांग में अनुमानित वृद्धि कितनी होगी ?
प्रतिघर 1 किलोवाट के औसत लोड और प्रतिदिन 8 घंटे तक लोड के औसत उपयोग को ध्यान में रखते हुए प्रतिवर्ष लगभग 28000 मेगावाट अतिरिक्त बिजली और लगभग 80000 मिलियन युनिट अतिरिक्त उर्जा की आवश्यकता होगी। यह एक परिवर्तनीय आंकड़ा है। आय के साथ-साथ बिजली उपयोग की आदत बढ़ने पर बिजली की मांग में परिवर्तन होना तय है। इन अनुमानों के परिवर्तित होने पर भी इस आंकड़े में तब्दीली होगी।
    
उन घरों के लिए क्या प्रावधान है जहां ग्रिड लाइने उपलब्ध कराना संभव नहीं है ?
सुदुर एवं दूर-दराज के इलाको में अवस्थित घरों को 200 से लेकर 300 वाट के सोलर पावर पैक और 5 एलईडी लाइट, 1 डीसी पंखा, 1 डीसी पावर प्लग के साथ बैटरी बैकिंग सुलभ कराई जाएगी। इसके साथ ही 5 वर्षों के लिए मरम्मत एवं रखरखाव सुविधा भी मुहैया कराई जाएगी।
    
सौभाग्य के तहत कितने गैर विद्युतिकृत घरों को कवर किया जाएगा ?
देश में लगभग 4 करोड़ गैर विद्युतिकृत घर होने का अनुमान लगाया गया है, जिनमें से लगभग 1 करोड़ बीपीएल ग्रामीण परिवारों को डीडीयुजीजेवाई की मंज़ूर परियोजनाओं के तहत पहले भी कवर किया जा चुका है। अतः कुल 300 लाख घरों को इस योजना के तहत कवर किए जाने की आशा है जिनमें से 250 लाख घर ग्रामीण क्षेत्रों में और 50 लाख घर शहरी क्षेत्रों में है।
  
क्या इस योजना में अवैध उपभोक्ताओं को माफ करते हुए इसमें उन्हें पंजीकृत कराने की सुविधा दी जाएगी? क्या स्कीम में कुछ इस तरह का भी लक्षित किया गया है ?
अवैध कनेक्शनों की समस्या से संबंधित डिस्कॉम विद्युत विभाग अपने-अपने नियमों नियमनों के अनुसार निपटेगा। हांलाकि इस योजना में स्पष्ट शब्दों में यह उल्लेख किया गया है कि ऐसे डिफॉल्टरों को इस योजना का लाभ नहीं दिया जाएगा जिनके कनेक्शन काटे जा चुके हैं।
   
यह योजना लोगों के लिए उनके दैनिक जीवन मे किस तरह उपयोगी साबित होगी ?
बिजली सुविधा मुहैया कराई जाने से निश्चित तौर पर लोगों के जीवन की गुणवत्ता और मानव विकास पर हर पहलु से सकारात्मक असर पड़ेगा। पहला, बिजली सुलभ होने से घर को रोशन करने के लिए केरोसिन का विकल्प मिल जाएगा और घर के अंदर केरोसिन से होने वाला प्रदूषण समाप्त हो जाएगा और इस तरह लोगों की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से मुक्ति मिलेगी। इसके अतिरिक्त बिजली सुविधा से देश के सभी हिस्सों में दक्ष एवं अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने में मदद मिलेगी। 
    सुर्यास्त के बाद घरों के रोशन होने से वहां रहने वाले लोगों विशेषकर महिलाओं को अधिक व्यक्गित सुरक्षा महसूस होगी। इसी तरह सूर्यास्त के बाद सामाजिक एवं आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ेगी। बिजली सुलभ होने से सभी क्षेत्रों में शिक्षा सेवाओं को भी बढ़ावा मिलेगा और सुर्यास्त के बाद घरों में बेहतर रोशनी मिलने से बच्चे अपनी पढ़ाई पर और ज़्यादा समय दे सकेंगे और इस तरह भविष्य में अपने करियर में ज़्यादा आगे बढ़ सकेंगे। घरों के रोशन होने से इस बात की भी संभावना बढ़ गई है कि महिलांए पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा अध्ययन कर सकेंगी और आर्थिक रूप से भी अधिक आमदनी अर्जित कर सकेगी।
     
इस योजना से आर्थिक विकास और रोज़गार सृजन को कैसे बढ़ावा मिलेगा ?
घरों को रोशन करने के लिए केरोसिन के बजाए बिजली का उपयोग होने पर केरोसिन पर वार्षिक सब्सिडी घट जाएगी। इसके साथ ही पेट्रोलियम उत्पादो का आयात घटाने में भी मदद मिलेगी। हर घर में बिजली सुलभ होने से संचार के सभी साधनों यथा रेड़ियो, टेलीविजन, इंटरनेट, मोबाइल इत्यादि का कहीं अधिक उपयोग संभव हो पाएगा जिससे लोग इन संचार साधनों के ज़रिए सभी तरह की आवश्यक सूचनांए प्राप्त कर सकेंगे।
     किसानों को नई एवं बेहतर कृषि तकनीकों, कृषि मशीनरी, गुणवत्ता पूर्ण बीजों इत्यादि के बारे में जानकारी मिल पाएगी जिससे कृषि उत्पादन के साथ-साथ किसानों की आमदनी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी संभव हो पाएगी। इसके अतिरिक्त किसान एवं युवा कृषि आधारित लघु उद्योग लगाने की संभावनाएं भी तलाश सकेंगे।
        
विश्वसनीय विद्युत सेवांए उपलब्ध होने से दैनिक उपयोग की वस्तुओं वाली नई दुकाने, विनिर्माण कार्यशालाएं, आटा मिलें, कुटीर उद्योग इत्यादि खोलने मे भी आसानी होगी। इस तरह की आर्थिक गतिविधियों से प्रत्यक्ष के साथ-साथ अप्रत्यक्ष रोज़गार भी सृजित होंगे। स्वयं इस योजना के क्रियान्वयन से भी रोज़गार सृजित होंगे क्योकि घरों में विद्युतिकरण कार्य के लिए अर्द्धकुशल कुशल कामगारों की आवश्यकता पड़ेगी। इस योजना के क्रियान्वयन के दौरान लगभग 1,000 लाख दैनिक श्रम दिवस सृजित होंगे। 16,000 करोड़ रूपये से भी अधिक की राशि व्यय होने से कुछ सकारात्मक बाह्य असर पड़ेंगे जिससे और अधिक रोज़गार सृजन में मदद मिलेगी जिससे अर्थिक विकास की गति बढ़ेगी।
 
क्या इस योजना के बारे में आम जनता के बीच जागरूकता बढ़ाने की कोई योजना है ताकि अधिक से अधिक लोग इससे लाभान्वित हो सके ?
भारत सरकार रेड़ियो, प्रिंट मीडिया, टेलीविजन, श्राइन बोर्डों इत्यादि के ज़रिए प्रचार-प्रसार अभियान चलाएगी। विभिन्न शोध अध्ययनों से पता चला है कि बिजली कनेक्शन की लागत, बिजली के उपयोग, केरोसिन के मुकाबले बिजली उपयोग की लागत, बिजली उपयोग के फायदों (प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष) इत्यादि सहित बिजली कनेक्शन की प्रक्रिया के बारे में जागरूकता न होने के कारण भी घरेलु विद्युतिकरण की प्रक्रिया धीमी है। अतः इस योजना के सभी पहलुओं से लोगों को अवगत कराने के लिए मल्टीमीडिया अभियान शुरू किया जाएगा। 

डिस्कॉम के अधिकारी बिजली के साथ-साथ सौभाग्य के बारे में भी जागरूकता बढ़ाने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में भी शिविर लगाएंगे। विद्यालय के शिक्षकों, ग्राम पंचायत के सदस्यों और स्थानीय साक्षर/शिक्षित युवाओं को भी इस जागरूकता अभियान से जोड़ा जाएगा।

Tuesday, 26 September 2017

स्‍वच्‍छ भारत की दिशा में खुद ही पहल करने की जरूरत

     हुबली। उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने आज कर्नाटक में स्‍वच्‍छता ही सेवा और शौचालय के लिए समर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। वे हुबली में आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्‍य अतिथि थे।

     इसके बाद उपराष्‍ट्रपति वेंकैया नायडू गडग जिले के नरगुण्‍ड तालुका में कोन्‍नुर गांव गए जहां उन्‍होंने कचरा प्रसंस्‍करण की शुरुआत की। उन्‍होंने परिष्‍कृत पेयजल संयंत्र का भी उद्घाटन किया और गांव की जनता कॉलोनी स्थित उच्‍च विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम शौचालय के लिए समर के दौरान एक जन सभा को संबोधित किया। इस मौके पर उप-राष्‍ट्रपति ने स्‍वच्‍छता को जन आंदोलन बनाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्‍होंने तालुका, जिला और राज्‍य की इस संदर्भ में किए गए अच्‍छे काम की सराहना की।
     उन्‍होंने मौजूद सभी लोगों से स्‍वच्‍छता से जुड़ी गतिविधियों में हिस्‍सा लेने का आग्रह किया और कहा कि स्‍वच्‍छ भारत मिशन एक राष्‍ट्रीय कार्यक्रम है न कि किसी खास राजनीतिक दल का। उन्‍होंने असाधारण योगदान कर रहे साधारण लोगों के कई उदाहरण दिए जिसमें कर्नाटक की सुश्री लावण्‍या का भी जिक्र किया जिसने शौचालय बनाने के लिए अपने अनिच्‍छुक परिवार को राज़ी कराया और उसके बाद पूरे गांव को शौचालय बनाने के लिए प्रेरित किया।
       उपराष्‍ट्रपति ने इस बात की भी प्रशंसा की कि कई युवा महिलाएं अब शादी से पहले अपने ससुराल में शौचालय की मांग करने लगी हैं। इस मौके पर उपराष्‍ट्रपति ने 13 ग्रामीण पंचायत अध्‍यक्षों और शौचालय के लिए समर का लक्ष्‍य हासिल करने वाले नरगुण्‍ड तालुका पंचायत अध्‍यक्ष को भी सम्‍मानित किया। उन्‍होंने नरगुण्‍ड तालुका के ग्रामीण इलाके को खुले में शौच से मुक्‍त क्षेत्र घोषित किया।
     कर्नाटक के राज्‍पाल वज्‍जुभाई रुडाभाई वाला ने कर्नाटक से स्‍वच्‍छता ही सेवा अभियान शुरू करने के लिए उपराष्‍ट्रपति का धन्‍यवाद देते हुए अपना संबोधन शुरू किया। उन्होंने भारत सरकार का नारा ‘सबका साथ, सबका विकास’ की लय में एक-दूसरे की देखभाल करने पर जोर दिया।
     उन्‍होंने कहा कि दूसरे की देखभाल के लिए हमें स्‍वच्‍छ भारत की दिशा में खुद ही पहल करने की जरूरत है। पेयजल और सफाई राज्‍यमंत्री रमेश जिगाजिनागी ने इस मौके पर राज्‍य सरकार को बधाई दी और स्‍वच्‍छता ही सेवा अभियान के महत्‍व पर जोर दिया।
        उन्‍होंने जोर देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश के हाल ही के अपने दौरे में प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने शौचालय का नाम ‘इज्‍जत घर’ रखने की अनुशंसा की है। कर्नाटक के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज्‍य मंत्री एच के पाटिल ने स्‍वच्‍छ भारत मिशन के तहत राज्‍य सरकार द्वारा किए गए कामों के बारे में बताया और कहा कि राज्‍य और राष्‍ट्र दोनों स्‍वच्‍छ एवं खुले में शौच से मुक्‍त होने की दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं।
      पेयजल एवं सफाई मंत्रालय में सचिव परमेश्‍वरन अय्यर ने जन सभा का स्‍वागत करते हुए स्‍वच्‍छ भारत मिशन की राष्‍ट्रीय स्‍तर पर प्रगति के बारे में बताया और मिशन के लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में कर्नाटक सरकार द्वारा किए जा रहे बेहतरीन काम की प्रशंसा की। इस मौके पर सांसद पीसी गड्डीगौदर और नरगुण्‍ड के विधायक बी आर यवगल भी मौजूद थे।

बाल मजदूरी निषेध पोर्टल के कारगर कार्यान्वयन के लिए मंच पेंसिल

        नई दिल्ली। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने यहां भारत सरकार के श्रम और रोजगार मंत्रालय द्वारा आयोजित राष्ट्रीय बाल श्रमिक सम्मेलन में बाल मजदूरी निषेध पोर्टल के कारगर कार्यान्वयन के लिए मंच (पेंसिल) का शुभारंभ किया। 

   पेंसिल एक इलेक्ट्रॉनिक मंच है जिसका लक्ष्य केंद्र और राज्य सरकारों, जिला स्‍तरीय प्रशासन, सिविल सोसायटी और आम लोगों को शामिल करते हुए बाल श्रमिक मुक्त समाज का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में काम करना है।
          राजनाथ सिंह ने बाल मजदूरी के खिलाफ कानूनी फ्रेमवर्क लागू करने के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएं (एसओपी) भी जारी कीं। एसओपी का उद्देश्य प्रशिक्षकों, अधिवक्‍ताओं और निगरानी एजेंसियों के लिए एक मार्गदर्शक तैयार करना है ताकि बाल मजदूरी को पूरी तरह समाप्त किया जा सके और जोखिमपूर्ण श्रम से किशोरों की संरक्षा सुनिश्चित की जा सके। इसका अंतिम उद्देश्य भारत को बाल मजदूरी से मुक्त करना है।
        पोर्टल का उद्घाटन करने के बाद राजनाथ सिंह ने कहा कि कोई भी सभ्य समाज बाल मजदूरी की अनुमति नहीं दे सकता। उन्होंने कहा बाल मजदूरी एक अभिशाप है। उन्होंने कहा कि भारत को पूरे देश से बाल मजदूरी के उन्मूलन का संकल्प लेने की आवश्यकता है। 
     उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि संकल्प से ही इस बुराई को समाप्त किया जा सकता है। राजनाथ सिंह ने कहा कि अगर भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी के करो या मरो के संकल्प के पांच वर्ष बाद देश आजादी प्राप्त कर सका तो कोई कारण नहीं है कि यदि भारत एकजुट होकर बाल मजदूरी को समाप्त करने का संकल्प ले ले तो अगले पांच वर्षों में बाल मजदूरी मुक्त समाज का निर्माण न किया जा सके। 
        राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत द्वारा बाल मजदूरी संबंधी संधियों की पुष्टि करना इस बात का प्रमाण है कि हम समयबद्ध तरीके से बाल मजदूरी खत्म करने के प्रति संकल्पबद्ध है। उन्होंने कहा कि इस बारे में सामाजिक जागरूकता जरूरी है। उन्होंने ऑपरेशन स्माइल का उदाहरण दिया जिसके अंतर्गत 70,000 से 75,000 हजार बच्चों को बाल मजदूरी से मुक्त कराया गया था। 
       उन्होंने कहा कि पेंसिल पोर्टल की सफलता के लिए भी देश में एक महीने का विशेष अभियान चलाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यह अभियान ब्लॉक स्तर पर भी चलाया जाना चाहिए ताकि प्रत्येक व्यक्ति जागरूक बने और बाल मजदूरी समाप्त करने की दिशा में काम करे। उन्होंने कहा कि बाल मजदूरी के सामाजिक दुष्प्रभावों के साथ-साथ आर्थिक दुष्प्रभाव भी है।
      प्रवर्तन एजेंसियों के लिए एसओपी जारी करने के श्रम और रोजगार मंत्रालय के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि इससे कार्यक्रमों को बेहतर ढंग से लागू करने में मदद मिलेगी। श्रम और रोजगार मंत्री (प्रभारी) संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि बच्‍चे देश की अमूल्‍य संपत्ति हैं और देश का भविष्‍य हैं। उन्‍होंने कहा कि अल्‍पावधि आर्थिक और सामाजिक बाधाओं के कारण बाल श्रमिकों से होने वाली आमदनी अच्‍छी लग सकती है मगर दीर्घावधि में ऐसा नहीं होता। 
      उन्‍होंने कहा कि बच्‍चों के समग्र विकास को ध्‍यान में रखते हुए कानून में 14 साल से कम उम्र के बच्‍चों को किसी भी प्रकार के रोजगार पर लगाने की इजाजत नहीं है। 14 से 18 साल के बच्‍चों को भी ऐसे कामों में नहीं लगाया जा सकता जो उनके शारीरिक और मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य के लिए हानिकारक हों। उन्होंने कहा कि कानूनों को लागू करने में सबसे बड़ी बाधा जागरूकता की कमी की है और आज जो दिशानिर्देश तथा स्‍टैंडर्ड आपरेटिंग प्रोसीजर्स (एसओपीज) जारी किये गये हैं वे प्रवर्तन एजेंसियों के लिए उपयोगी सिद्ध होंगे। 
      उन्‍होंने कहा कि बाल श्रम एक सामाजिक समस्‍या है और सकारात्‍मक दृष्टिकोण की इसके उन्‍मूलन में महत्‍वपूर्ण भूमिका है। उन्‍होंने आशा व्‍यक्‍त की कि भारत के सभी लोग बाल श्रममुक्‍त समाज के निर्माण के स्‍वप्‍न को साकार करने के लिए एकजुट होंगे। नोबेल पुरस्‍कार से सम्‍मानित और बाल अधिकार कार्यकर्ता कैलाश सत्‍यार्थी इस अवसर पर सम्‍म‍ानित अतिथि के रूप में उपस्थित थे।
      ‘पेंसिल’ पोर्टल की शुरुआत करने पर प्रसन्‍न्‍ता व्‍यक्‍त करते हुए उन्‍होंने कहा कि आज का दिन भारत के लिए ऐतिहासिक अवसर है। भारत विश्‍व को यह बता रहा है कि वह बच्‍चों के हाथों में पेंसिल थमाएगा न कि काम करने के औजार। उन्‍होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इन अभियानों में देश के शीर्षस्‍थ नेताओं को शामिल किया जाना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि पेंसिल और एसओपीज न सिर्फ भारत के लिए बल्कि समूची दुनिया के लिए महत्‍वपूर्ण हैं क्‍योंकि ये एक नयी दिशा दिखाते हैं। 
      उन्होंने कहा कि इससे यह बात साबित हो जाती है कि टेक्‍नोलाजी सामाजिक उत्‍थान और शक्ति का माध्‍यम बन सकती है। सत्‍यार्थी ने कहा कि इस समय वह भारत यात्रा पर हैं और देश भर में बच्‍चों के साथ यौन दुर्व्‍यवहार और बच्‍चों को बेचे जाने के बारे में चेतना जगाने के कार्य में लगे हैं। उन्‍होंने बच्‍चों के साथ यौन दुष्‍कर्म के मामलों की सुनवाई के लिए संस्‍थागत प्रणाली और विशेष अदालतें बनाए जाने का भी सुझाव दिया। 
      इससे पहले अपने स्‍वागत भाषण में श्रम और रोजगार मंत्रालय की सचिव श्रीमती एम. सत्‍यवती ने कहा कि सरकार ने कई पहल की हैं और 2025 तक बाल श्रम के उन्‍मूलन के क्षेत्र में टिकाऊ विकास के लक्ष्‍य को प्राप्‍त करने के लिए कानूनी ढांचा खड़ा किया है। उन्‍होंने कहा कि भारत में 2001 की जनगणना के आंकड़ों की अगर 2011 की जनगणना के आंकड़ों से तुलना की जाए तो बाल श्रम में कमी आयी है। 2 जून 2017 को अधिसूचित केंद्रीय नियमों में संशोधन को अंतिम रूप देने से पहले सभी संबद्ध पक्षों के साथ व्‍यापक विचार-विमर्श किया गया है। 
        सम्‍मेलन के दौरान एक वीडियो संदेश में अंतर्राष्‍ट्रीय श्रमसंगठन के महानिदेशक गाइ रायडर ने भारत को उसकी दूरदृष्टि के लिए बधाई दी और आशा व्‍यक्‍त की कि भारत दुनिया भर में अंतर्राष्‍ट्रीय श्रम संगठन के प्रयासों को समर्थन देने में अपनी महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस अवसर पर बाल श्रम पर एक लघु फिल्‍म भी दिखाई गयी और ‘पेंसिल’ पोर्टल पर एनीमेशन के जरिए विस्‍तृत प्रजेंटेशन प्रस्‍तुत किया गया। 
         इस पोर्टल के कई घटक हैं जैसे खोए हुए बच्‍चों का पता लगाने के लिए चाइल्‍ड ट्रैकिंग प्रणाली; शिकायत के लिए कोना; राज्‍य सरकार और राष्‍ट्रीय बाल श्रम परियोजना, तथा कनवर्जेंस, जिलों में जिला नोडल अधिकारी (डीएनओज) मनोनीत किये जाएंगे जो शिकायतें प्राप्‍त कर 48 घंटे के भीतर उनकी प्रामाणिकता की जांच करेंगे और शिकायत के सही पाये जाने पर पुलिस के साथ मिलकर बचाव अभियान शुरू करेंगे। 
       अब तक 7 राज्‍यों/केन्‍द्र शासित प्रदेशों ने डीएनओज की नियुक्ति कर ली है। उत्‍तर प्रदेश, असम, दिल्‍ली, तेलंगाना, तमिलनाडु, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, छत्‍तीसगढ़, बिहार और राजस्‍थान के श्रम मंत्रियों ने सम्‍मेलन में हिस्‍सा लिया। सम्‍मेलन में राज्‍यों के श्रम सचिवों, केन्‍द्रीय मंत्रालयों के सचिवों, जिला नोडल अधिकारियों और राष्‍ट्रीय बाल श्रम परियोजना (एनसीएलपी) के परियोजना निदेशकों ने भी हिस्‍सा लिया।

मोबाइल एप्लीकेशन दिव्‍यांग सारथी का शुभारंभ

      नई दिल्ली। सामाजिक न्‍याय और आधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत ने आज दिव्‍यांग सारथी मोबाइल एप के बीटा संस्‍करण का उद्घाटन किया। इसके माध्‍यम से दिव्‍यांगजनों को आसानी से जानकारी मिल सकेगी। 

    इस अवसर पर सामाजिक न्‍याय और आधिकारिता राज्‍य मंत्री कृष्‍ण पाल गुजर, सामाजिक और न्‍याय आधि‍कारिता मंत्रालय की सचिव श्रीमती लता कृष्‍णाराव तथा मंत्रालय के अन्‍य वरिष्‍ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। इस अवसर पर गहलोत ने कहा कि यह मोबाइल एप्लीकेशन दिव्‍यांगजनों को सशक्‍त बनाने के लिए प्रेरित करेगा ताकि उन्‍हें आसान और सुविधाजनक सूचना मिल सके। इससे उन्‍हें एक बटन दबाकर योजनाओं, छात्रवृत्तियों, प्रणाली से संबंधित संस्‍थागत सहायता और अन्‍य महत्वपूर्ण प्रासंगिक जानकारियां प्राप्‍त हो सकेंगी। 
      इस मोबाइल एप्लीकेशन का उद्देश्‍य, सामाजिक न्‍याय और आधिकारिता मंत्रालय के दिव्‍यांगजन सशक्तिकरण विभाग से संबंधित विभिन्‍न उपयोगी जानकारियों जैसे विभि‍न्‍न नियमों, दिशा-निर्देशों, योजनाओं, रोजगार संबंधी अवसरों के बारे में दिव्‍यांगजनों को सरल प्रारूप में जानकारी उपलब्‍ध कराना है। 
     इस एप्लीकेशन को दिव्‍यांगजन सशक्तिकरण विभाग के दो सहायक सचिवों ( अनुनय झा और श्रीमती बी सुशीला) द्वारा तैयार गया है। 2011 की जनसंख्‍या के अनुसार भारत में 2.68 करोड़ से अधिक दिव्‍यांगजन हैं, जो कुल जनसंख्‍या के 2.2 प्रतिशत से अधिक हैं। मोबाइल एप्लीकेशन दिव्‍यांगसारथी को यूनिवर्सल एक्‍सेस के यूएनसीआरपीडी के सिद्धांतों और दिव्‍यांगजनों के अधिकार अधिनियम 2016 के प्रावधानों के अनुरूप तैयार किया गया है। 
      इस अधिनियम में यह प्रावधान है कि सभी जानकारियों को एक सरल प्रारूप में उपलब्‍ध कराई जानी चाहिए। यह एप्लीकेशन प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा 3 दिसम्बर 2015 का शुरू किए गए सुगम्‍य भारत अभियान के आईसीटी घटक का एक अभिन्‍न हिस्‍सा है। दिव्‍यांग सारथी मोबाइल एप की मुख्‍य विशेषताएं इसके ओडियो नोट्स हैं, जो लिखित जानकारी को ओडियो फाइल में परिवर्तित करते हैं और साथ ही उपयोगकर्ता की आवश्‍यता के अनुसार फॉंट का आकार भी बदल सकते हैं। 
        इस मोबाइल एप्लीकेशन को दोनों भाषाओं हिन्‍दी तथा अंग्रेजी के अनुरूप तैयार किया गया है। इस एप्लीकेशन को किसी भी एंड्रॉयड स्‍मार्ट फोन के जरिये डाउनलोड किया जा सकता है। इसे वह व्‍यक्ति भी इस्‍तेमाल कर सकता है, जिसके पास इंटरनेट की सुविधा नहीं है। यह मोबाइल एप डाउनलोड के लिए गूगल प्‍ले स्‍टोर में उपलब्‍ध रहेगा।

कांडला पोर्ट का नाम बदलकर दीन दयाल पोर्ट हुआ

     नई दिल्ली। जहाजरानी मंत्रालय ने कांडला पोर्ट ट्रस्ट का नाम बदलकर दीन दयाल पोर्ट ट्रस्ट करने से संबंधित आदेश जारी किया है।

   कच्छ के रण में स्थित कांडला पोर्ट ट्रस्ट देश के 12 सबसे बड़े बंदरगाहों में से एक है। मंत्रालय के आदेशानुसार, केंद्रीय सरकार ने भारतीय पोर्ट अधिनियम, 1908 के अंतर्गत प्राप्त शक्तियों के आधार पर कांडला का नाम संशोधित कर दीन दयाल किया है। 
     कांडला बंदरगाह पर विभिन्न परियोजनाओं का शुभारंभ करते हुए मई महीने में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यह सुझाव दिया था कि कांडला पोर्ट का नाम बदलकर पंडित दीन दयाल उपाध्याय पोर्ट कर देना चाहिए। 
     पंडित दीन दयाल उपाध्याय समाज के गरीब और कमजोर तबकों के विकास के लिए समर्पित रहे। सालभर तक चलने वाले पंडित दीन दयाल उपाध्याय के जन्मशती समारोह के समापन के अवसर पर जहाजरानी मंत्रालय ने यह आदेश जारी किया।

जम्मू कश्मीर को शहरी विकास का आश्वासन, हरसंभव सहायता

   नई दिल्ली। केंद्रीय आवास व शहरी कार्य मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने जम्मू कश्मीर की सरकार और वहां के लोगों को शहरी विकास के सभी मामलों में हरसंभव सहायता देने का आश्वासन दिया। 

  जम्मू कश्मीर के उप-मुख्यमंत्री डॉ. निर्मल सिंह ने हरदीप सिंह पुरी से भेंट की और राज्य से संबंधित विभिन्न परियोजनाओं पर चर्चा की। उन्होंने राज्य के शहरी क्षेत्र की परियोजनाओँ की प्रगति और कार्यान्वयन पर विचार-विमर्श किया। डॉ. निर्मल सिंह ने तावी नदी के 4.5 किलोमीटर लंबे तट को साबरमती नदी तट विकास के तर्ज पर विकसित करने, जेएनएनयूआरएम योजना के तहत ग्रेटर जम्मू के सीवर परियोजना को पूरा करने, कटरा और उधमपुर को अटल मिशन में शामिल करने तथा एएमआरयूटी (अमृत) योजना के तहत मूलभूत संरचना विकास करने का अनुरोध किया।
    उप-मुख्यमंत्री ने पुरी को जेएनएनयूआरएम योजना के तहत स्वीकृत श्रीनगर सीवेज परियोजना की प्रगति की जानकारी दी। पुरी ने स्मार्ट सिटी योजना के तहत जम्मू के नदी तट विकास के लिए अधिकारियों को प्रस्ताव बनाने का आदेश दिया।
     पुरी ने एनबीसीसी को जम्मू में सीवर परियोजना के कार्य को पुनः प्रारंभ करने का आदेश दिया। अमृत योजना में 500 शहरों का शामिल किया गया है। उन्होंने आश्वासन देते हुए कहा कि यदि संभव होगा तो राज्य के दो अन्य शहरों को भी इस योजना में भी शामिल किया जाएगा। पुरी ने जम्मू कश्मीर के लिए स्वीकृत परियोजनाओं को तेज गति से पूरा करने के लिए सुझाव दिया। 
       उन्होंने राज्य में अटल मिशन के तहत 1.08 लाख घरों को जल आपूर्ति की योजना की जानकारी दी। जम्मू कश्मीर के उप-मुख्यमंत्री डॉ. निर्मल सिंह ने केंद्रीय आवास व शहरी कार्य मंत्री हरदीप सिंह पुरी से नई दिल्ली में भेंट की।

आर्थिक सलाहकार परिषद का गठन

     नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने प्रधानमंत्री से संबद्ध आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) का गठन किया है।

    पांच सदस्‍यीय परिषद ने प्रतिष्ठित और विख्‍यात अर्थशास्त्रियों को शामिल किया गया है। ईएसी-पीएम की संरचना इस प्रकार है। डॉ. बिवेक देबरॉय, सदस्‍य नीति आयोग-अध्‍यक्ष, डॉ. सुरजीत भल्‍ला- अंशकालिक सदस्‍य, डॉ. रथिन रॉय-अंशकालिक सदस्‍य, डॉ. अशीम गोयल-अंशकालिक सदस्‍य, रतन वटल-प्रधान सलाहकार, नीति आयोग-सदस्‍य सचिव, आर्थिक सलाहकार। 
     परिषद के विचारणीय विषय इस प्रकार होंगे। प्रधानमंत्री द्वारा परिषद को सौंपे गये आर्थिक या अन्‍य मुद्दे का विश्लेषण करना और इस बारे में सलाह देना। बृहत आर्थिक महत्‍व के मुद्दों का समाधान करना और उनके बारे में प्रधानमंत्री को सलाह देना। यह सलाह स्‍वयं अपनी ओर से अथवा प्रधानमंत्री द्वारा सौंपे गये किसी विषय पर दी जा सकती है।
     प्रधानमंत्री द्वारा समय-समय पर वांछित किसी अन्‍य कार्य को अंजाम देना। ईएसी–पीएम एक स्‍वतंत्र निकाय है, जो आर्थिक मुद्दों और भारत सरकार, विशेष रूप से प्रधानमंत्री से संबंधित मुद्दों पर सलाह देती है।

Monday, 25 September 2017

मोदी ने लॉन्च की 'सौभाग्य योजना', डेढ़ साल में देश का हर घर होगा रौशन

     नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सौभाग्य योजना लॉन्च की। इस योजना के तहत हर घर तक बिजली पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। जिससे बड़ी संख्या में गरीबों को फायदा मिलेगा। 

   योजना को 31 मार्च 2019 तक पूरा करने का टारगेट है। पीएम मोदी ने दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर देश को इस अहम योजना की सौगात दी है। जिसका पूरा नाम 'प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना' है। इस मौके पर पीएम मोदी ने योजना की शुरुआत पर खुशी जताई। 
       पीएम मोदी ने कहा कि गरीब महिलाओं से जुड़ी एक आवश्यक योजना की आज शुरुआत हुई। उन्होंने कहा कि 4 करोड़ से ज्यादा ऐसे घर हैं, जहां बिजली नहीं है। आज भी करोड़ों गरीब परिवारों के यहां मोमबत्ती जलाई जाती हैं। पीएम ने ये भी कहा कि बिजली के अभाव में महिलाओं को अंधेरे में खाना पकाना पड़ता है। 
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि किसी गरीब से बिजली कनेक्शन के लिए पैसा नहीं लिया जाएगा। गरीब के घर जाकर सरकार बिजली कनेक्शन देगी। इस योजना पर 16 हजार करोड़ से ज्यादा खर्च आएगा। 1000 दिनों में 18 हजार गांव तक बिजली पहुंचाने का लक्ष्य रखा था। उनमें से अब तीन हजार से भी कम गांव बिना बिजली के रह गए हैं।
     प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मैंने भी बचपन में मिट्टी के तेल का दिया जलाकर पढ़ाई की। हम 'बिजली संकट' से 'बिजली सरप्लस' की तरफ जा रहे हैं। न्यू इंडिया में हर गांव तक नहीं, हर घर तक बिजली पहुंचेगी।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पिछले तीन सालों में बिजली क्षमता लक्ष्य से 12ऽ बढ़ी। इस दौरान पीएम ने ये भी कहा कि जनधन योजना से लेकर स्वच्छ भारत अभियान और उज्जवला से लेकर मुद्रा तक हर योजना गरीब कल्याण के लिए है।

आंध्र प्रदेश को 4468 करोड की परियोजनाओं की सौगात

         नई दिल्ली। सड़क परिवहन और राजमार्ग, शिपिंग तथा जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री नितिन गडकरी 3 अक्‍तूबर, 2017 को आंध्र प्रदेश में 1928.46 करोड़ रुपये लागत की राष्‍ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का उद्धाटन और 2539.08 करोड़ रुपये लागत की परियोजनाओं का शिलान्‍यास करेंगे।

    इसके अतिरिक्‍त वे कृष्‍णा नदी के मुक्‍त्‍याला से विजयवाड़ा खंड (राष्‍ट्रीय जलमार्ग-4) को विकसित करने की परियोजना की आधारशिला भी रखेंगे। गडकरी 3 अक्‍तूबर, 2017 को विजयवाड़ा का दौरा करेंगे। गडकरी लगभग 415 किलोमीटर के राष्‍ट्रीय राजमार्ग का उद्घाटन और अन्‍य 250 किलोमीटर राजमार्ग का शिलान्‍यास करेंगे।
     इन परियोजनाओं में राष्‍ट्रीय राजमार्ग-43 (नया राष्‍ट्रीय राजमार्ग-26) पर विजयनगरम कस्‍बे तक 4 लेन के बाईपास सड़क के निर्माण के अलावा मौजूदा राष्‍ट्रीय राजमार्गों में सुधार और उनका उन्‍नयन करना शामिल है। 14 अप्रैल, 2016 को आंध्र प्रदेश सरकार के साथ किये गये समझौता ज्ञापन (एमओयू) के अनुरूप आंध्र प्रदेश में राष्‍ट्रीय जलमार्ग-4 (एनडब्‍ल्‍यू-4) को तीन चरणों में विकसित करने का प्रस्‍ताव है। पहला चरण, मुक्‍त्‍याला से विजयवाड़ा (कृष्‍णा नदी) (82 किलोमीटर), दूसरा चरण, विजयवाड़ा से काकीनाड़ा (एलुरू नहर और काकीनाड़ा नहर) और गोदावरी के राजामुंद्री से पोलावरम खंड (233 किलोमीटर), तीसरा चरण, कोम्‍मामुर नहर, बकिंघम नहर और कृष्‍णा तथा गोदावरी नदी का शेष खंड (573 किलोमीटर)। 
    गडकरी 3 अक्‍तूबर, 2017 को पहले चरण का शिलान्‍यास करेंगे। इस चरण यानी मुक्‍त्‍याला से विजयवाड़ा तक 82 किलोमीटर का खंड विकसित करने का कार्य पहले से ही शुरू हो चुका है। इस वर्ष मई में उथले क्षेत्रों से गाद निकालने का काम शुरू हो चुका है। इसके जून, 2019 तक पूरा होने की उम्‍मीद है। इस वर्ष अगस्‍त में अस्‍थायी टर्मिनल सुविधाओं के लिए कार्य सौंप दिया गया है। जिसके जून, 2018 तक पूरा होने की आशा है। स्‍थायी टर्मिनल सुविधा के लिए मार्च, 2018 में कार्य सौंपे जाने की उम्‍मीद है और यह कार्य जून, 2019 तक पूरा हो जाएगा। 
     2018 में रात्रि दिशा सूचक सहायता सुविधा भी शुरू हो जाएगी। इस परियोजना से इस क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने की माल व्‍यवस्‍था का सक्षम समाधान उपलब्‍ध होगा और राजधानी अमरावती के शुरूआती विकास के चरण में सुविधा होगी, क्‍योंकि महत्‍वपूर्ण निर्माण सामग्री का परिवहन एनडब्‍ल्‍यू-4 के इसी खंड से किये जाने की संभावना है। पीआईबी/कैबिनेट के आईडब्‍ल्‍यूएआई बोर्ड द्वारा दूसरे चरण के प्रस्‍ताव की सिफारिश की गई है। 
     मंत्रिमंडल की सहमति के लिए परियोजना के कार्यान्‍वयन के वास्ते स्‍पेशल परपज विहिकल (एसपीवी) के गठन के प्रस्‍ताव पर विचार किया जा रहा है। नवम्‍बर, 2017 तक एसपीवी के गठन की उम्‍मीद है। नवम्‍बर, 2018 में कुल 1,078 किलोमीटर की लंबाई के राष्‍ट्रीय जलमार्ग संख्‍या-4 की घोषणा की गई थी। राष्‍ट्रीय जलमार्ग अधिनियम-2016 के अंतर्गत इसकी लंबाई 2890 किलोमीटर तक बढ़ायी गई थी।
    इसमें खंड शामिल किये गये है। दावरी नदी (भद्राचलम को राजामुंद्री) - 171 किलोमीटर, कृष्णा नदी (वजीराबाद से विजयवाड़ा) - 157 किलोमीटर, काकीनाडा नहर (काकीनाडा से राजामुंद्री) - 50 किलोमीटर, एलुरु नहर (राजामुंद्री से विजयवाड़ा) - 139 किलोमीटर, कोम्‍मामुर नहर (विजयवाड़ा से पेडागंजम) - 113 किलोमीटर, उत्तर बकिंघम नहर (पेडागंजम से चेन्नई) - 316 किलोमीटर, दक्षिण बकिंघम नहर (चेन्नई से मर्केंनाम) - 110 किलोमीटर, कलुवेली टैंक (मार्कानाम से पुद्दुचेरी) उ 22 किलोमीटर, विस्तारित खंड- वाजिराबाद से गलागली (628 किलोमीटर) तक कृष्णा नदी, भद्राचलम से नासिक (1184 किलोमीटर) तक गोदावरी नदी।

देश में पांच करोड़ शौचालयों का निर्माण

      नई दिल्ली। आवास एवं शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस बात जोर देते हुए कि दिल्ली में कचरे की समस्या, जो आनुपातिक रूप से अपने चरम पर पहुंच गई, है, का समुचित हल निकाले बिना देश को साफ-सुथरा नहीं रखा जा सकता।

     उन्होंने लोगों में राष्ट्रीय राजधानी के बाशिंदे होने का गर्व-भाव जगाते हुए उन्हें कचरा निष्पादन के प्रभावी व ठोस प्रबंधन में सामूहिक स्तर पर जुटने का आह्वान किया। पुरी ने दक्षिणी एमसीडी द्वारा कूड़ा चुनने छांटने वाली आयातित आधुनिक मशीन का भी उद्घाटन किया। पुरी ने दक्षिण दिल्ली के भीकाजी कामा प्लेस में आयोजित स्वच्छता ही सेवा अभियान में भाग लिया। बाद में वहां उपस्थित लोगों, स्वच्छता में लगे कार्यकर्ताओं, मंत्रालय और एसडीएमसी के अधिकारियों को संबोधित किया, जिन्होंने उनके साथ-साथ श्रमदान में हिस्सा लिया।
       मंत्री ने यह रेखांकित किया कि दिल्ली के नागरिक और इसके बाशिंदा होना गौरव की बात है और यह एक अनोखा विशेषाधिकार है, जो बेहतर सेवाओं और सुविधाओं के रूप में अनेक तरह के लाभ देता है, जो देश के अन्य शहरों में सुलभ नहीं हैं। उन्होंने दिल्ली मेट्रो का उदाहरण दिया कि जिसमें केंद्र और राज्य सरकारों ने भारी व्यय किया हुआ है और वे भविष्य में भी इसमें धन लगा रहे हैं। पुरी ने कहा कि अगर दिल्ली साफ-सुथरी नहीं की गई और कचरे के निस्तारण का समुचित इंतजाम नहीं किया गया तो दिल्लीवासी होने का यह गौरव छीन जाएगा।
       पुरी ने कहा, राष्ट्रीय राजधानी में रहने के गर्व को जगाएं और सुस्ती छोड़ें और कचरा प्रबंधन के लिए प्रभावी ठोस इंतजाम करने में अपना योगदान दें तभी हम कचरे की समस्या से निजात पा सकते हैं, जो हम सभी के जीवन पर बुरा असर डाल रहा है। पुरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जिस इरादे, जुनून और ऊर्जा के साथ स्वच्छ भारत अभियान का संचालन करते रहे हैं, उसका अभूतपूर्व परिणाम पूरे देश में स्वच्छता के साथ लोगों के ‘व्यक्तिगत जुड़ाव’ के रूप में सामने आया है। 
     इसके चलते तीन वर्षो की कम अवधि में ही पूरे देश में पांच करोड़ शौचालयों का निर्माण संभव हुआ है। इनमें शहरी इलाकों में बनाये गए 38 लाख शौचालय भी शामिल हैं। अगले दो वर्षो में देश के शहरों में कचरा निष्पादन के ठोस प्रबंधन को एक बड़ी चुनौती करार देते हुए पुरी ने कचरे के ठोस प्रबंधन की श्रृंखला की सफलता के लिए स्वच्छता के साथ पहले के ‘व्यक्तिगत जुड़ाव’ को ‘सामाजिक जुड़ाव’ में बदलने पर बल दिया। लोगों के अपने निकटस्थ पड़ोसियों के साथ सहज जुड़ाव को देखते हुए मंत्री ने ‘घर भी साफ और पड़ोसी भी साफ अभियान का प्रारंभ किया। 
     इस अभियान के छह मुख्य कारक हैं, कचरा निष्कासन की जगह ही उनके स्वरूप के हिसाब से अलग करना। उसी आहाता पड़ोस इलाके में गीले कचरे से कम्पोस्ट बनाना। सूखे कचरे की रिसाइकलिंग (पुनर्चक्रण) करना। पड़ोस को खुले में मल-मूत्र त्याग से मुक्त रखना। पड़ोसियों को खुले में कूड़ा-कर्कट न फेंकने के लिए प्रेरित करना। कचरा जमा करने या उसके पृथक्कीकरण के लिए रिहाइश के पास के पार्क या खुली जगह का जिम्मा लेना, पुरी ने कहा कि इस नेबरहुड एक्शन प्लान से लैंडफिल को भेजे जाने वाले ठोस कचरे का परिमाण घटेगा।
      इसके अलावा, कचरे से कम्पोस्ट और कचरे से ऊर्जा बनाने में सुविधा होगी। नेबरहुड का मायने आवासीय सोसाइटी, कालोनी, मुहल्ला और बाजार आदि है। मंत्री ने कहा कि स्वच्छ भारत अभियान के तीन साल पूरे होने के अवसर पर दो अक्टूबर से नेबरहुड एक्शन प्लान को देश के सभी नगरों और शहरों में शुरू किया जाएगा। उन्होंने दिल्लीवासियों से इसको प्लान को सफल बनाने की अपील की।
      पुरी ने इस अवसर पर मालवीय नगर एसडीएमसी स्कूल के बच्चे द्वारा खेले गए नुक्कड़ नाटक को भी देखा। नाटक में लोगों के खराब स्वास्थ्य के कारण और दुष्परिणाम के बारे में आगाह करते हुए स्वच्छ भारत के लिए नागरिकों की भागीदारी की जरूरत पर बल दिया गया था। पुरी ने नाटक की सराहना करते हुए इसके प्रतिभागियों को 1000 रुपये बतौर पुरस्कार भी दिये। 
     पुरी ने भीकाजी कामा प्लेस इलाके का भी निरीक्षण किया और वहां की इमारतों के खराब रख-रखाव पर चिंता जाहिर करते हुए एसडीएमसी के नगरपालिका आयुक्त को जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिये। दक्षिण दिल्ली नगरपालिका कॉरपोरेशन की मेयर सुश्री कमलजीत शेहरावत, एसडीएमसी के आयुक्त डॉ. पुनीत गोयल के साथ मंत्रालय व एसडीएमसी, एवं लोगों ने भी श्रमदान में भाग लिया।

स्‍वच्‍छता : गरीबों के स्‍वास्‍थ्‍य की रक्षा करने की दिशा में मदद

     वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने वाराणसी में शहंशाहपुर गांव में दोहरे गड्ढे वाले शौचालय में निर्माण के लिए श्रमदान किया।

      उन्‍होने गांव को खुले में शौच से मुक्‍त करने वाले लोगों के साथ बातचीत की। उन्‍होंने शौचालय को इज्‍जत घर नाम दिये जाने की उनकी पहल की सराहना की। प्रधानमंत्री ने इस गांव में आयोजित पशुधन आरोग्‍य मेले का दौरा किया। उन्‍हें इस परिसर में संचालित विभिन्‍न स्‍वास्‍थ्‍य और चिकित्‍सा सुविधाओं की जानकारी दी गई, इनमें पशु शल्‍य चिकित्‍सा, अल्‍ट्रा सोनोग्राफी आदि शामिल हैं। इस अवसर पर एकत्रित विशाल जनसमूह को सम्‍बोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने पशुधन मेले के सफल आयोजन के लिए उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍य नाथ और राज्‍य सरकार को धन्‍यवाद दिया।
    उन्‍होंने कहा कि यह एक नया प्रयास है, जिससे राज्‍य में पशुपालन क्षेत्र को लाभ प्राप्‍त होगा। उन्‍होने कहा कि दूध उत्‍पादन में वृद्धि के फलस्‍वरूप लोगों को आर्थिक लाभ पहुंचेगा। उन्‍होंने कहा कि देश के अन्‍य भागों की भांति डेयरी क्षेत्र को सहकारी संघ के रूप में गठित करने से लाभ होगा। लोगों की बेहतरी को सरकार की प्रा‍थमिकता बताते हुए प्रधानमंत्री ने वर्ष 2022 तक किसानों की आमदनी को दोगुना करने के संकल्‍प को दोहराया। उन्‍होंने उल्‍लेख किया कि मृदा स्‍वास्‍थ्‍य कार्ड से किसानों को काफी लाभ हो रहा है।
       उन्‍होंने कहा कि हमसे प्रत्‍येक व्‍यक्ति को हमारे स्‍वतंत्रता सैनानियों के सपनों को पूरा करने के लिए 2022 तक सकारात्‍मक योगदान देने का संकल्‍प देना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि स्‍वच्‍छता हमारी जिम्‍मेदारी है इस भावना को हम सभी को स्‍वयं में विकसित करने की आवश्‍यकता है। उन्‍होंने कहा कि इससे स्‍वच्‍छता और गरीबों के स्‍वास्‍थ्‍य की रक्षा करने की दिशा में काफी मदद मिलेगी। उन्‍होंने कहा कि उनके लिए स्‍वच्‍छता एक प्रार्थना की भांति है और गरीबों की सेवा करने का माध्‍यम भी।