Thursday, 28 September 2017

मनरेगा के बजट में 20,000 करोड़ रुपये की वृद्धि

     नई दिल्ली। ग्रामीण विकास मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि मंत्रालय के बजट में उल्‍लेखनीय वृद्धि हुई है। इसके साथ ही इसकी सभी प्रमुख योजनाओं के आवंटन में अच्‍छी-खासी वृद्धि हुई है।

     मंत्री ने यहां यह जानकारी दी कि वर्ष 2012-13 में मंत्रालय का बजट 50,161 करोड़ रुपये (जीडीपी का 0.50 प्रतिशत) था, लेकिन वर्ष 2016-17 में बजट बढ़ाकर 95,096 करोड़ रुपये कर दिया गया है जो सकल घरेलू उत्‍पाद (जीडीपी) का 0.63 प्रतिशत है। प्रमुख योजना ‘मनरेगा’ का उल्‍लेख करते हुए उन्‍होंने कहा कि इस ग्रामीण रोजगार योजना का बजट वर्ष 2011-12 के लगभग 37,000 करोड़ रुपये से बढ़ाकर वर्ष 2016-17 में लगभग 58,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
       उन्‍होंने कहा कि वर्तमान सरकार के तहत मनरेगा का पुनर्गठन किए जाने के परिणाम स्‍वरूप चालू वित्‍त वर्ष में 235 करोड़ श्रम दिवस सृजित हुए हैं, जो पिछले पांच वर्षों में सर्वाधिक है। इसके अलावा इस योजना के तहत लगभग 2 करोड़ परिसंपत्तियां सृजित हुई हैं, जो सार्वजनिक तौर पर सुलभ हैं। एक प्रश्‍न के जवाब में मंत्री ने कहा कि 85 फीसदी भुगतान 15 दिनों के अंदर किए जा रहे हैं और 96 फीसदी कामगारों को प्रत्‍यक्ष लाभ हस्‍तांतरण (डीबीटी) के जरिये पारिश्रमिक का भुगतान किया जा रहा है। 
     तोमर ने यह भी जानकारी दी कि पिछले तीन वर्षों में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत कवरेज 64 फीसदी से बढ़कर 81 फीसदी हो गई है। उन्‍होंने उम्‍मीद जताई कि यह योजना वर्ष 2019 तक 100 फीसदी ग्रामीण सड़क कनेक्टिविटी के साथ पूरी हो जाएगी। उन्‍होंने यह भी बताया कि मंत्रालय मार्च 2018 तक प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 51 लाख मकानों का निर्माण कार्य पूरा कर लेगा।
        तोमर ने कहा कि ग्रामीण विकास मंत्रालय राज्‍यों केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों और भारत सरकार के सभी संबंधित मंत्रालयों के साथ साझेदारी में 1 अक्‍टूबर से लेकर 15 अक्‍टूबर 2017 तक देश की प्रत्‍येक ग्राम पंचायत में ग्राम समृद्धि एवं स्‍वच्‍छता पखवाड़ा आयोजित कर रहा है।
      तोमर ने कहा कि इस पहल का उद्देश्‍य व्‍यापक सार्वजनिक सूचना अभियान के जरिये पारदर्शिता को और आगे ले जाना है। मंत्री ने कहा कि गांवों में स्‍वच्‍छता को बढ़ावा देने के अलावा आर्थिक गतिविधियों और विकास के मसलों पर सामुदायिक वार्तालाप सुनिश्चित करना है। 
   यह अभी तक इस दिशा में हुई प्रगति का क्षेत्र आधारित सत्यापन प्रदान करता है और महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों के जरिये सामाजिक अंकेक्षण को मजबूत करने के लिए आवश्‍यक प्रणालियां प्रदान करता है। 
        पखवाड़े भर चलने वाले इस कार्यक्रम के दौरान सभी वयस्‍कों विशेषकर महिलाओं एवं युवाओं की सक्रिय भागीदारी के साथ देश की सभी ग्राम पंचायतों में 2 अक्‍टूबर,2017 को गांधी जयंती पर ग्राम सभाएं आयोजित की जाएंगी। समुदाय के स्‍तर पर विशेष गतिविधियां सुनिश्चित करने और सार्वजनिक सूचना के लिए ठोस प्रयास किए गए हैं।

अब गंगा जल गुणवत्‍ता निगरानी ऐप का निर्माण

    नई दिल्ली। केन्‍द्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण राज्‍य मंत्री सत्‍यपाल सिंह ने राष्‍ट्रीय स्‍वच्‍छ गंगा मिशन (एनएमसीजी), राष्‍ट्रीय सुदूर संवेदी केन्‍द्र (एनआरएससी) एवं भारतीय सर्वेक्षण विभाग के अधिकारियों से आग्रह किया कि वे गंगा नदी के जीर्णोद्धार के लिए एकीकृत तरीके से कार्य करें तथा नवीनतम भू-स्‍थानिक प्रौद्योगिकियों का अधिकतम उपयोग करें।

  मंत्री ने कहा कि गंगा को स्‍वच्‍छ बनाने से संबंधित सभी कदम अनिवार्य रूप से उठाए जाएंगे और समयबद्ध तरीके से कार्य को पूरा किया जाएगा। एनएमसीजी के निदेशक द्वारा एक संक्षिप्‍त भूमिका के बाद इन एनआरएससी, डॉ. वाई.वी.एन. कृष्‍णमूर्ति ने ‘राष्‍ट्रीय स्‍वच्‍छ गंगा मिशन के लिए भू-स्‍थानिक प्रौद्योगिकी समर्थन’ पर एक विस्‍तृत प्रस्‍तुतीकरण दिया, इस दौरान गंगा संरक्षण से संबंधित कई मुद्दों पर विचार- विमर्श किया गया। एनएमसीजी के महानिदेशक श्री यू.पी. सिंह भी इस अवसर पर उपस्थित थे। भारतीय सर्वेक्षण विभाग के निदेशक डी.एन. पाठक ने भी लघु प्रस्‍तुतीकरण दिया। 
     सत्‍यपाल सिंह ने अधिकारियों को एक जल गुणवत्‍ता निगरानी ऐप का निर्माण करने तथा एक ऐसे जल जांच किट विकसित करने की दिशा में कार्य करने को कहा, जिसे लोगों में वितरित किया जा सकता है। उन्‍होंने इसकी पुष्टि की कि भू-स्‍थानिक एवं भुवन गंगा ऐप जैसी क्राउड सोर्सिंग प्रौद्योगिकियों का अनिवार्य रूप से उपयोग किया जाना चाहिए, जिससे कि इसे लेकर एक जन आंदोलन तैयार किया जा सके। 
      उन्‍होंने कहा कि स्‍वच्‍छ गंगा आंदोलन में अधिक से अधिक लोगों को हिस्‍सा लेना चाहिए। उन्‍होंने ऐसी प्रौद्योगिकियों के उपयोग के द्वारा नमामि गंगे कार्यक्रम को लोकप्रिय बनाने की आवश्‍यकता पर जोर दिया। मंत्री ने कहा, ‘हमें ऐसे लोगों को प्रोत्‍साहित करना चाहिए, जो स्‍वच्‍छ गंगा आंदोलन का हिस्‍सा बनने के लिए तैयार हैं तथा ऐसे लोगों को प्रेरणा देनी चाहिए, जो इस क्षेत्र में अनुकरणीय कार्य कर रहे हैं।’
     उन्‍होंने कहा कि गंगा नदी की भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) मानचित्र निर्माण से संबंधित सभी कार्यों में तेजी लाई जानी चाहिए। गंगा की सफाई में भू-स्‍थानिक प्रौद्योगिकियों के उपयोग से संबंधित कार्यों की गति पर चिंता व्‍यक्‍त करते हुए मंत्री ने विभिन्‍न विभागों के अधिकारियों से एक साथ बैठने तथा उन परियोजनाओं के लिए समय सीमा तैयार करने का आग्रह किया, जो वर्तमान में जारी हैं और जिनकी परिकल्‍पना की जा रही है।
     उन्‍होंने जोर देकर कहा कि ‘समय सीमाओं का निर्धारण किया जाना चाहिए तथा उनका सख्‍ती से अनुपालन होना चाहिए।’ राष्‍ट्रीय सुदूर संवेदी केंद्र (एनआरएससी) जोकि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का एक हिस्‍सा है, जल गुणवत्‍ता निगरानी, जल विज्ञान संबंधी निगरानी तथा मूल्‍यांकन, भू-आकृति विज्ञान संबंधी निगरानी एवं मूल्‍यांकन, जैव संसाधन निगरानी एवं मूल्‍यांकन, व्‍यापक भू-स्‍थानिक डाटा बेस के लिए भू-स्‍थानिक प्रौद्योगिकी का उपयोग करने एवं सामुदायिक भागीदारी में सक्षम बनाने और अन्‍य एजेंसियों के साथ आवश्‍यक संपर्क समन्वित करने के लिए मोबाइल एप्लिकेशन विकसित करने में एनएमसीजी की सहायता कर रहा है।
      इस समर्थन का उद्देश्‍य गंगा नदी में प्रदूषण की निगरानी करने का लक्ष्‍य हासिल करना है। एनएमसीजी की कोशिश कारगर कार्यान्‍वयन तथा निर्णय निर्माण के लिए समस्‍त गंगा नदी बेसिन की जीआईएस मैपिंग को अर्जित करना भी है। 
      एनएमसीजी को सहायता देने के एक हिस्‍से के रूप में एनआरएससी द्वारा सूचीबद्ध कुछ दायित्‍वों में व्‍यापक जीआईएस डाटा बेस का निर्माण, कन्‍नौज से वाराणसी तक मुख्‍य गंगा के उपग्रह डाटा का उपयोग करते हुए जल गुणवत्‍ता आकलन, वास्‍तविक जल गुणवत्‍ता डाटा, मानस दर्शन, उच्‍च गुणवत्‍ता बहुछाया संबंधी उपग्रह छवि, वायु स्‍थलाकृतिक सर्वेक्षण, शहरी अव्‍यवस्थित विस्‍तार परिवर्तन मानचित्रण आदि शामिल हैं। 
     एनएमसीजी एक व्‍यापक योजना पद्धति के लिए निकटतम मुख्‍य सड़क से नदी के तट/बाढ़ क्षेत्र तक के पांच किलोमीटर की दूरी की पहचान करने के द्वारा गंगा नदी को स्‍वच्‍छ रखने के लिए एक समग्र दृष्टिकोण का अनुपालन कर रहा है।

भारतीय रेलवे में व्‍यापक बदलाव, महत्‍वपूर्ण घोषणा

      नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने रेलवे को एक ऐसा इंजन बनाने का लक्ष्‍य रखा है जो नये भारत की दिशा में हमारी विकास यात्रा को नई गति प्रदान करेगी। 


  इसी लक्ष्‍य से प्रेरित होकर रेल मंत्री पीयूष गोयल ने भारतीय रेलवे में व्‍यापक बदलाव के लिए रेल मंत्रालय द्वारा लिए गए विभिन्‍न निर्णयों की घोषणा आज अर्थात 28 सितंबर, 2017 को रेल भवन में की। इस अवसर पर संचार राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) एवं रेल राज्‍य मंत्री मनोज सिन्‍हा भी उपस्थित थे। 
      रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, ‘रेलवे भारतीय यात्रियों के लिए सुरक्षा, गति एवं सेवा के उच्‍च मानक सुनिश्चित करने के साथ-साथ राष्‍ट्र के विकास में अहम योगदान देने के लिए भी प्रतिबद्ध है। पिछले एक माह के दौरान भारतीय रेलवे ने ये लक्ष्‍य सुनिश्चित करने के लिए महत्‍वपूर्ण परिवर्तनकारी कदम उठाए हैं।’ 
      रेल मंत्री पीयूष गोयल द्वारा घोषित किए गए अनेक निर्णयों का उल्‍लेख किया गया है। यात्री सुरक्षा को सर्वोच्‍च प्राथमिकता, सुरक्षा को उच्‍च एवं स्‍पष्‍ट प्राथमिकता, नई लाइनों/आमान परिवर्तन/पटरियों के आवंटन के मुकाबले पटरी नवीकरण को प्राथमिकता, अधिकारियों द्वारा क्षेत्रीय निरीक्षण पर विशेष जोर, रखरखाव ब्‍लॉकों को मंजूरी दिए जाने को उच्‍च प्राथमिकता, शेष 5,000 मानव रहित लेवल क्रॉंसिंग को समयबद्ध ढंग से हटाना। 
      अगले साल से आईसीएफ कोच के बजाय एलएचबी कोचों को इस्‍तेमाल में लाया जाएगा, सुरक्षा व्‍यवस्‍था बेहतर करने के लिए रेल के डिब्‍बों और स्‍टेशनों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने का प्रावधान है, जिससे विशेषकर महिलाएं एवं वरिष्‍ठ नागरिक लाभान्वित होंगे, मैनुअल इंटरलॉकिंग के स्‍थान पर इलेक्‍ट्रॉनिक सिग्‍नल इंटरलॉकिंग की संख्‍या बढ़ाई जाएगी, वर्तमान सिग्‍नल प्रणाली को बेहतर किया जाएगा, टीपीडब्‍ल्‍यूएस (रेल सुरक्षा एवं चेतावनी प्रणाली और एमटीआरसी (मोबाइल ट्रेन रेडियो संचार) का उपयोग किया जाएगा। 
      उपनगरीय और लम्‍बी दूरी की रेलगा‍डि़यों में अत्‍या‍धुनिक सिग्‍नल प्रणाली लगाने पर विचार, खामियों इत्‍यादि का पता लगाने के लिए कैमरा, अल्‍ट्रासोनिक फ्रीक्‍वेंसी डिटेक्‍शन जैसी प्रौद्योगिकी का उपयोग, ड्यूटी के दौरान सभी आरपीएफ कर्मचारियों और टीटीई को उचित वर्दी में रहना होगा, ताकि पारदर्शिता लाई जा सके, आरपीएफ कर्मचारी टिकट चेकिंग नहीं करेंगे क्‍योंकि यह टीटीई का काम है। हालांकि वे टिकट चेकिंग दल की सहायता करेंगे।
     प्रौद्योगिकी के जरिये बदलाव, निगरानी एवं या‍त्री सेवाओं के लिए मोबाइल एप के विस्‍तृत उपयोग पर विशेष जोर सभी स्‍टेशनों एवं रेलगाडि़यों में हाई स्‍पीड वाई-फाई कनेक्टिविटी होगी। 1 नवंबर, 2017 से लगभग 700 रेलगाडि़यों की गति बढ़ाने का प्रस्‍ताव। 48 ट्रेनों को मेल एक्‍सप्रेस के बजाय सुपरफास्‍ट एक्‍सप्रेस में तब्‍दील किया जा रहा है। ट्रेनों के आवागमन की जीपीएस आधारित रियल टाइम निगरानी से जुड़ी परियोजना में तेजी लाई जाएगी। 
      इसरो के जरिये सभी रेल परिसंपत्तियों के उपग्रह आधारित मानचित्रण में तेजी लाई जाएगी। ऊर्जा दक्षता, अगले 4-5 वर्षों में विद्युतीकरण का कार्य पूरा किया जाएगा। इससे ऊर्जा लागत में 10,000 करोड़ रुपये से भी ज्‍यादा की राशि की बचत होगी। इसके साथ ही प्रदूषण घटेगा और आयातित डीजल पर निर्भरता भी कम होगी। रेलगाडि़यों, स्‍टेशनों, कार्यालय भवनों और आवासीय परिसरों में समयबद्ध ढंग से 100 फीसदी एलईडी लाइटिंग और कम ऊर्जा खपत वाले उपकरण जैसे कि पंखे, एसी इत्‍यादि लगाए जाएंगे। 
       स्‍टेशनों का तेजी से पुनर्विकास, दिसंबर 2018 तक लगभग 20 स्‍टेशनों का आधुनिकी‍करण काफी तेजी से पूरा हो जाएगा जहां बेहतर बुनियादी ढांचागत एवं यात्री सुविधाएं होंगी। इनमें होटल, भोजनालय, शॉपिंग, विकलांग यात्रियों के अनुकूल सुविधाएं, मल्टीमोडल ट्रांसपोर्ट हब, सुरक्षा इत्‍यादि की व्‍यवस्‍था होगी। अतिरिक्‍त स्‍टेशनों की पहचान की जाएगी और स्‍व-वित्‍तपोषण वाला बिजनेस मॉडल सृजित करने के प्रयास किए जाएंगे, जैसे कि अनुबंध की अवधि का पुन:आकलन किया जाएगा, पहुंच नियंत्रण सनिश्चित किया जाएगा, उप-ठेका की आजादी होगी,इत्‍यादि। 
     बहुपयोगी केंद्रों के रूप में रेलवे स्‍टेशन, ऐसे अनेक स्‍टेशनों का इस्‍तेमाल योग सेंटर, कौशल प्रशिक्षण उद्देश्‍य, शैक्षणिक उद्देश्‍यों जैसी गतिविधियों के लिए बहुपयोगी केंद्रों के रूप में करने का प्रस्‍ताव है जहां दिनभर में कुछ ही ट्रेनें आती हैं। स्‍वास्‍थ्‍य एवं शैक्षणिक सुविधाओं का उन्‍नयन, इसके अलावा, भारतीय रेलवे द्वारा संचालित विद्यालयों और अस्‍पतालों में बेहतर बुनियादी ढांचागत सुविधाएं उपलब्‍ध कराई जाएंगी जिससे न केवल रेल कर्मचारीगण, बल्कि अन्‍य लोग भी लाभन्वित होंगे।
      मानव संसाधन, मानव संसाधन के कल्‍याण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। शिकायत निवारण शिविर नियमित रूप से लगाए जा रहे हैं। कर्मचारियों की शिकायतें सुनने के लिए प्रत्‍येक क्षेत्रीय/प्रभागीय मुख्‍यालय में शिकायत निवारण प्रकोष्‍ठ स्‍थापित किए जा रहे हैं। बड़े पैमाने पर अधिकारों का विकेंद्रीकरण किया जा रहा है। प्रणाली की दक्षता बेहतर करने के लिए आक्रामक ढंग से प्रक्रियागत सुधार लागू किए जा रहे हैं। 
       संगठनात्‍मक स्‍तरों की संख्‍या में कमी का विश्‍लेषण किया जा रहा है। परिचालन में गतिशीलता सुनिश्चित करने के लिए ‘ए1’ श्रेणी के 75 स्‍टेशनों पर प्रतिभाशाली और उत्साही अधिकारियों को ‍स्टेशन डायरेक्टर के रूप में तैनात किया जाएगा। मुख्‍यालय से पुन: आवंटन के जरिये प्रभागीय कार्यकलाप मजबूत करने के लिए अतिरिक्‍त एडीआरएम की तैनाती की जाएगी। क्षेत्रीय कर्मचारियों के कल्‍याण पर ध्‍यान केंद्रित करना।
     ग्रुप डी श्रेणी के कर्मचारियों के कामकाज की स्थितियों को बेहतर करना। उदाहरण के लिए, गैंग-मैन को आरामदेह वर्दी और बेहतर गुणवत्‍ता वाले जूते दिए जाएंगे क्‍योंकि पटरियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्‍मेदारी इन्‍हीं पर होती है और उन्‍हें किसी विशेष दिन औसतन लगभग 15-16 किलोमीटर चलना पड़ जाता है। उनके आवासीय क्‍वार्टरों (गैंग हट) को भी बेहतर किया जाएगा। 
     लोको चालकों के रनिंग रूम को वातानुकूलित किया जा रहा है। परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण के जरिए रेलवे के राजस्व में वृद्धि, रेल परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण से वित्‍तीय स्थिति और परिचालन अनुपात बेहतर होगा। इसके अलावा, महत्‍वपूर्ण रेल परियोजनाओं के लिए संसाधन उपलब्‍ध होंगे। भूमि के मुद्रीकरण को आकर्षक बनाकर यह काम पूरा किया जाएगा, जिसके लिए विभिन्‍न नियमों में परिवर्तन किए जाएंगे।
      इन सुधारों से हमारे राष्‍ट्र की जीवन रेखा को पनपने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, ये सुधार हमारे आर्थिक-सामाजिक विकास में भी अपेक्षाकृत अधिक योगदान करेंगे। भारतीय रेलवे में व्‍यापक परिवर्तन की प्रक्रिया जारी है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह सिर्फ लोगों की मजबूरी नहीं, बल्कि लोगों की पसंद है।

भारतीय रेल मुंबई क्षेत्र में 100 नई उपनगरीय रेल सेवाएं आरंभ करेगी

    मुंबई। मुंबई उपनगरीय रेल सेवाओं को एक बड़े प्रोत्‍साहन के रूप में भारतीय रेल पश्चिमी रेलवे और मध्‍य रेलवे जोन के अपने मुंबई उपनगरीय नेटवर्क पर 100 अतिरिक्‍त स्‍थानीय रेल सेवाएं आरंभ कर रही है।

    इन अतिरिक्त सेवाओं के साथ पश्चिमी रेलवे और मध्य रेलवे के मुंबई में कुल उपनगरीय स्थानीय रेल सेवाएं वर्तमान 2983 सेवाओं से बढ़कर 3083 उपनगरीय सेवाओं तक पहुंच जाएगी। ये सेवाएं कल अर्थात 29 सितंबर 2017 को मुंबई में आयोजित एक भव्‍य कार्यक्रम में आरंभ की जाएंगी।
    इस अवसर पर केन्‍द्रीय रेल एवं कोयला मंत्री पीयूष गोयल तथा अन्‍य गणमान्‍य व्‍यक्ति भी उपस्थित रहेंगे। इन 100 सेवाओं में से 32 नई सेवाएं पश्चिमी रेल में और 68 सेवाएं मध्‍य रेलवे में आरंभ की जाएंगी। पश्चिमी रेलवे में 17 सेवाएं 1 अक्‍तूबर 2017 से अप दिशा में आरंभ की जाएंगी, जबकि 15 सेवाएं 1 अक्‍तूबर 2017 से डाउन दिशा में आरंभ की जाएंगी। कुल मिलाकर पश्चिमी रेलवे में 32 नई सेवाएं आरंभ की जाएंगी।
         पश्चिमी रेलवे वर्तमान में 1323 उपनगरीय सेवाएं संचालित करती है। इन सेवाओं के जुड़ने के बाद पश्चिमी रेलवे में कुल उपनगरीय सेवाएं 1355 तक पहुंच जाएंगी। मध्‍य रेलव में 14 उपनगरीय सेवाएं 2 अक्‍तूबर, 2017 से ‘हार्बर लाइन’ पर आरंभ की जाएंगी। 2 अक्‍टूबर, 2017 से ‘ट्रांस-हार्बर लाइन’ पर 14 उपनगरीय सेवाएं आरंभ की जाएंगी।
    ‘मेन लाइन’ पर 16 उपनगरीय सेवाएं 1 नवम्‍बर, 2017 से आरंभ की जाएंगी तथा ‘हार्बर’ एवं ‘ट्रांस-हार्बर लाइन’ पर 24 उपनगरीय सेवाएं 31 जनवरी, 2018 से आरंभ की जाएंगी। कुल मिलाकर मध्‍य रेलवे में 68 सेवाएं आंरभ की जाएंगी। मध्‍य रेलवे वर्तमान में 1660 उपनगरीय सेवाओं का संचालन करती है। 
     इन सेवाओं के जुड़ने के बाद मध्‍य रेलवे में कुल उपनगरीय सेवाएं 1728 तक पहुंच जाएंगी।इन नई उपनगरीय सेवाओं के लागू होने से मुंबई उपनगरीय नेटवर्क में भीड़भाड़ में कमी आएगी तथा परिवहन में तेजी आएगी। इससे मुंबई उपनगरीय नेटवर्क में रोजाना यात्रा करने वाले 77 लाख यात्रियों को लाभ पहुंचेगा।

गरीब नवाज कौशल विकास केंद्रों में सेनेटरी सुपरवाइजर का कोर्स

    नई दिल्ली। केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने यहाँ कहा कि देश भर में स्थापित किये जा रहे गरीब नवाज कौशल विकास केंद्रों में सेनेटरी सुपरवाइजर का कोर्स कराया जायेगा। 

    नकवी ने आज यहाँ अल्पसंख्यक मंत्रालय के मौलाना आजाद एजुकेशन फाउंडेशन के कैंपस में स्वच्छता ही सेवा के तहत श्रमदान किया। नकवी ने कहा कि गरीब नवाज कौशल विकास केंद्रों पर सेनेटरी सुपरवाइजर का लगभग 3 से 6 महीनों का कोर्स कराया जायेगा। 
     इससे जहाँ एक ओर अल्पसंख्यक समुदायों के गरीब तबकों के लोगों के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे वहीँ दूसरी तरफ स्वच्छ भारत अभियान को मजबूती मिलेगी। नकवी ने कहा कि आधुनिक मशीनों और तकनीक से साफ-सफाई एवं कूड़े-कचड़े आदि से खाद बनाने की ट्रेनिंग भी इस कोर्स का हिस्सा होगी। 
    नकवी ने कहा कि गरीब नवाज़ कौशल विकास योजना के तहत देश भर में 100 गरीब नवाज़ कौशल विकास केंद्र स्थापित किये जा रहे हैं जहाँ अल्पसंख्यक समुदायों के गरीब तबकों के युवाओं को विभिन्न रोजगारपूरक कौशल विकास की ट्रेनिंग दी जाएगी। नकवी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्वच्छ भारत अभियान सफल साबित हो रहा है, आजादी के बाद पहली बार सफाई, एक जज़्बा ही नहीं बल्कि जुनून बन गया है। 2 अक्टूबर 2014 को शुरू हुआ स्वच्छ भारत अभियान, आज आम लोगों के सहयोग से एक मजबूत मिशन बन गया है। 
        केंद्र सरकार स्वच्छ, स्वस्थ, और सशक्त भारत बनाने के संकल्प के साथ काम कर रही है। नकवी ने कहा कि आज आम लोग और विशेषकर युवा स्वच्छता को लेकर काफी सजग हुए हैं। साफ-सफाई एक कार्य ना रह कर एक जन आंदोलन बन गया है। साफ-सफाई के प्रति सोच बदल गई है। देश भर में स्वच्छ भारत अभियान पर आधारित स्वच्छता ही सेवा कार्यक्रम 15 सितंबर, 2017 से गांधी जयंती यानी 2 अक्टूबर, 2017 तक आयोजित किया जा रहा है।
      नकवी ने कहा कि स्वच्छ भारत अभियान के तहत केंद्र सरकार ने पिछले 3 वर्षों में 3 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण किया है। अल्पसंख्यक मंत्रालय द्वारा भी बड़ी संख्या में मदरसों एवं अन्य अल्पसंख्यक समुदाय के संस्थानों में शौचालय निर्माण कर इन संस्थानों को स्वच्छता अभियान से जोड़ा जा रहा है। इन शौचालयों की साफ-सफाई एवं रख रखाव में यह सेनेटरी सुपरवाइजर बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। 
       नकवी ने कहा कि अल्पसंख्यक मंत्रालय भी 15 सितम्बर से 2 अक्टूबर, 2017 तक स्वच्छता ही सेवा अभियान का आयोजन कर रहा है। अल्पसंख्यक मंत्रालय के मुख्यालय अंत्योदय भवन, दिल्ली के विभिन्न स्थानों में स्थित अल्पसंख्यक मंत्रालय के विभिन्न विभागों जैसे एनएमडीएफसी, केंद्रीय वक्फ कौंसिल, मौलाना आजाद एजुकेशन फाउंडेशन के कार्यालयों के साथ-साथ देश भर में विभिन्न राज्य वक्फ बोर्डों में इस अभियान का आयोजन किया जा रहा है।
      इन कार्यक्रमों का आयोजन अल्पसंख्यक समुदायों के स्कूलों एवं अन्य शैक्षिक संस्थानों, सामाजिक संस्थानों, मदरसों, दरगाहों इत्यादि में किया जा रहा है।