Sunday, 27 January 2019

सावधान ईरान भी अब धंसने लगा

   खबर तो यही है कि ईरान की राजधानी तेहरान धीरे धीरे धंस रही है। अधिकारी चेतावनी दे रहे हैं कि देश खतरे में हैं। तेल रिफाइनरियों से लेकर एयरपोर्ट तक दांव पर हैं। 

  ईरानी राजधानी के आस पास की जमीन धंसती जा रही है। खबर है कि वैज्ञानिक भूजल के अंधाधुंध दोहन को इसका कारण मान रहे हैं। राजधानी तेहरान समुद्र तल से 1,200 मीटर की ऊंचाई पर है।
   खबर है कि बीते 100 साल में यह शहर लगातार बढ़ता गया। आज तेहरान की आबादी 1.3 करोड़ है। खबर है कि इस जनसंख्या ने पानी की आपूर्ति पर बहुत ज्यादा दबाव डाला है। 2018 में पूरे साल भर ईरान में सिर्फ 171 मिलीमीटर बारिश हुई। 
   खबर है कि पानी की कमी पूरी करने के लिए जमीन से खूब भूजल निकाला गया। कहा गया, "सतह के नीचे की जमीन में पानी और हवा मौजूद होते हैं, जब आप जमीन से पानी निकाल लेते हैं तो मिट्टी के बीच खाली जगह बच जाती है। धीरे धीरे ऊपरी दबाव के चलते जमीन धंसने लगती है और दरारें पड़ने लगती हैं.।" बारिश और बर्फबारी से भूजल रिचार्ज होता है, लेकिन ईरान बीते तीन दशकों से भीषण सूखे का सामना कर रहा है। 
   खबर है कि ईरान के मौसम विभाग के मुताबिक देश का 97 फीसदी हिस्सा सूखे का शिकार है। खबर है कि जर्मन सेंटर फॉर जियोसाइंसेस, पोट्सडाम के वैज्ञानिकों ने सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर दावा किया है कि 2003 से 2017 के बीच पश्चिमी तेहरान का सपाट इलाका 25 सेंटीमीटर प्रतिवर्ष की दर से धंस रहा है। 
   खबर है कि ईरान के पर्यावरण कार्यकर्ता कहते हैं, "यूरोपीय देशों में चार मिलीमीटर प्रतिवर्ष के धंसाव को संकट माना जाता है।" खबर है कि जर्मन वैज्ञानिकों के मुताबिक तेहरान के इमाम खमेनई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के नीचे की जमीन हर साल पांच सेंटीमीटर धंस रही है।

Friday, 25 January 2019

अब टाइटैनिक टूरिज्म

  खबर है कि दुनिया का सबसे मशहूर जहाज टाइटैनिक 14 अप्रैल 1912 की रात एक हिमखंड से टकराकर अटलांटिक में समा गया था। उस हादसे पर एक फिल्म भी बनी। 

   खबर तो यही है कि अब एक अमेरिकी कंपनी पनडुब्बी के सहारे टूरिस्टों को टाइटैनिक के मलबे तक ले जाने वाली है।
   करीब चार किलोमीटर की गहराई : टाइटैनिक के मलबे का पता पहली बार 1985 में चला। उत्तरी अटलांटिक में 3,800 मीटर की गहराई पर टाइटैनिक के टुकड़े हैं। पानी के भारी दबाव के चलते इतनी गहराई पर खास पनडुब्बियां ही जा सकती हैं।
  टूरिज्म की शुरुआत: अब एक अमेरिकी कंपनी ओशियनगेट वैज्ञानिकों और पेईंग गेस्ट्स को वहां ले जाने की तैयारी कर रही है। एक छोटी पनडुब्बी के सहारे रिसर्चरों और मेहमानों को टाइटैनिक के मलबे तक ले जाया जाएगा।
  कैसी है पनडुब्बी: टाइटन नाम की पनडुब्बी टाइटैनियम नाम की धातु और बेहद हल्के और अत्यंत मजबूत मैटीरियल कार्बन फाइबर से बनाई गई है। पनडुब्बी में एक पालयट होगा, तीन टूरिस्ट होंगे और एक एक्सपर्ट होगा। पनडुब्बी गोता लगाने के बाद 10 से 12 घंटे समंदर के भीतर गुजारेगी।
   महंगी ट्रिप: खबर है कि ओशियनगेट के सीईओ स्टॉकटन रश के मुताबिक 2019 की गर्मियों से टाइटैनिक टूरिज्म की शुरुआत होगी। टाइटैनिक का मलबा देखने के लिए एक सैलानी को 1.05 लाख डॉलर चुकाने होंगे।
   लोहा खाने वाला बैक्टीरिया: आखिरी बार कनाडा की डलहौजी यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक टाइटैनिक के मलबे तक पहुंचे थे। खबर है कि वहां वैज्ञानिकों को एक नए किस्म का बैक्टीरिया मिला। उसे हैलोमोनस टाइटैनिके नाम दिया गया। जिन परिस्थितियों में ज्यादातर जीव जिंदा नहीं रह सकते हैं, उन परिस्थितियों में यह बैक्टीरिया आराम से फलता फूलता है।
  बस 20 साल और: हैलोमोनस टाइटैनिके नाम के बैक्टीरिया को लोहा खाना बहुत पसंद है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बैक्टीरिया अगले 20 साल में टाइटैनिक के मलबे को पूरी तरह से चट कर देगा।

Thursday, 24 January 2019

फ्रांस में अब बाज की फौज, ड्रोन का करेंगे मुकाबला

   खबर है कि फ्रांस की सेना ने ड्रोन से लड़ने के लिए बाजों की फौज बनाई है। इसके लिए बाजों को बकायदा ट्रेनिंग दी जा रही है। 

  आतंकवादी ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे हैं, उन्हीं को रोकने के लिए सेना ने यह कदम उठाया है।
   खबर है कि बाज के चार अंडों को ड्रोन पर रख कर ही उनमें से बच्चों के निकलने की प्रक्रिया पूरी कराई गई। पैदा होने के बाद भी बाजों को इन्हीं ड्रोन पर रख कर खिलाया जाता था। नतीजा यह हुआ कि वे ड्रोन से अच्छी तरह परिचित हो गए।
  बाजों की ट्रेनिंग : पिछले साल जन्मे चार गोल्डेन ईगल यानी सुनहरे बाजों को सेना की निगरानी में ड्रोन से लड़ने के लिए ट्रेनिंग दी जा रही है। इनके नाम हैं अथोस, पोर्थोस, अरामिस और डे आर्टांगनान।
   ड्रोन का पीछा : इन बाजों ने हरे घास के मैदानों में पिछले दिनों ड्रोन का पीछा किया और फिर चोंच के वार से उन्हें गिरा दिया। इस कामयाबी पर उन्हें पुरस्कार में मांस मिला जिसे उन्होंने उन्हीं ड्रोन के ऊपर बैठ कर खाया।
   तेज रफ्तार : बाजों ने ड्रोन का पीछा करते हुए 20 सेकेंड में 200 मीटर तक की दूरी तय कर ली। फिर गोता लगा कर उसके साथ साथ ही घास के मैदान पर नीचे आ गए।
   फ्रांस का डर : फ्रांस को पहले ड्रोन से डर नहीं लगता था। शहरों में और दूसरी जगहों पर भी वे अकसर उड़ान भरते थे लेकिन 2015 में ड्रोन को सैन्य ठिकानों और राष्ट्रपति के आवास के आसपास उड़ते देख सेना सजग हो गई। 
   आतंकवादी हमले : 2016 में हुए आतंकवादी हमलों के बाद से फ्रांस खासतौर से चिंतित हुआ है। उसे डर है कि ड्रोन का इस्तेमाल आतंकवादी अपने मंसूबों के लिए कर सकते हैं और उसी से बचने के लिए बाजों को तैयार किया जा रहा है।
   शिकारी बाज: तेज रफ्तार, तीखी नजर और चोंच के वार से हड्डियों को चूर कर देने की ताकत बाज को बेहतरीन शिकारी बनाते हैं। शिकार के लिए इनका इस्तेमाल सदियों से हो रहा है जो इस इंटरनेट दौर में भी जारी है।
   शिकारी बाजों का अगला बैच: बहुत जल्द ही अगले बैच के लिए बाज के अंडों से बाज पैदा करने के लिए उसी प्रक्रिया को दोहराया जाएगा। बाज के नाखूनों और चोंच की रक्षा के लिए खास तरह के चमड़े के दस्ताने भी बनवाए गए हैं।

Sunday, 20 January 2019

बहरीन खोलेगा दुनिया का सबसे बड़ा अंडरवाटर पार्क

   खबर है कि बहरीन राज्य एक इको-फ्रेंडली अंडरवाटर थीम पार्क खोलेगा, जो दुनिया में सबसे बड़ा होगा। 

  करीब 100,000 वर्ग मीटर से अधिक के क्षेत्र में फैले, इको-फ्रेंडली डेस्टिनेशन 70 मीटर के डिमोशन बोइंग 747 विमान के लिए विश्राम स्थल होगा, जो अब तक का सबसे बड़ा विमान है।
   खबर है कि बहरीन डूबे हुए बोइंग 747 जंबो जेट के साथ दुनिया का सबसे बड़ा अंडरवाटर थीम पार्क खोलेगा। यह एक पारंपरिक बहरीन मोती व्यापारी के घर, कृत्रिम प्रवाल भित्तियों और पर्यावरण के अनुकूल सामग्रियों से बनी अन्य मूर्तियों की प्रतिकृति का घर भी होगा, जो गोताखोर के खेल के मैदान के लिए एक आदर्श पृष्ठभूमि प्रदान करता है। 
   खबर है कि प्रोजेक्ट की जानकारी महामहिम राजा हमद के निजी प्रतिनिधि, पर्यावरण के लिए सर्वोच्च परिषद के अध्यक्ष, महामहिम शेख अब्दुल्ला बिन हमद अल खलीफा द्वारा घोषित की गई।
   खबर है कि अद्वितीय थीम पार्क 2019 की गर्मियों से पहले डाइविंग के प्रति उत्साही और आगंतुकों के लिए खुलने वाला है। इको-फ्रेंडली बोइंग 747 प्लेन को सेंटरपीस के रूप में दिखाया जाएगा।