Thursday, 12 January 2017

विमुद्रीकरण से आतंक, हवाला कारोबार, मानव तस्‍करी में कमी


            केंद्रीय विधि, न्‍याय और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा है कि सरकार के विमुद्रीकरण के फैसले से आतंक, धन पोषण, हवाला कारोबार, सुपारी हत्‍या और मानव तस्‍करी विशेषकर नेपाल तथा पूर्वोत्‍तर की युवतियों की योण शोषण के लिए जैसी तस्‍करी की घटनाओं में कमी आई है। 

केंद्रीय विधि, न्‍याय और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद नेकहा कि सरकार टैक्‍स आधार को व्‍यापक बनाने के लिए कदम उठाने से नहीं हिचकिचाएगी। टैक्‍स आधार बढ़ाए बिना विकास संभव नहीं है। अरुण जेटली के पास विकास कार्यों के लिए सिर्फ पांच लाख करोड़ रुपए हैं। यह बढ़ना चाहिए। 

           नई दिल्‍ली में प्रेस क्‍लब ऑफ इंडिया, इंडियन वोमेन प्रेस कोर और सुप्रीम कोर्ट लायर्स कॉंफ्रेंस द्वारा आयोजित सेमिनार को संबोधित करते हुए प्रसाद ने कहा कि एकता और अखंडता की दृष्‍टि से पहले से अधिक मजबूत नया भारत उभर रहा है। यह भारत जाति, पंथ और धर्म की सीमा को पार करते हुए उभर रहा है।  रविशंकर प्रसाद ने कहा है कि सरकारें आती-जाती रहती हैं। हमारी सरकार परिवर्तनकारी सरकार है। टैक्‍नोलॉजी उपकरण सुशासन में सक्रिय रूप में भूमिका निभा रहे हैं। आज 110 करोड़ आधार कार्ड और 104 करोड़ मोबाइल कनेक्‍शन हैं। डिजिटल गवर्नर का अर्थ तेजी से कार्य संपादित करना है। आज ग्रमीण क्षेत्रों में गरीब और अशिक्षित लोग भी नए विश्‍वास के साथ टैक्‍नोलॉजी अपना रहे हैं।

          उन्‍होंने राजस्‍थान में अलवर के स्‍कूल में गणित शिक्षक इमरान खान का उदाहरण दिया। इमरान खान के मोबाइल एप से 40 लाख बच्‍चों को फायदा हुआ। प्रसाद ने तेलंगना की बीड़ी कर्मी सतामा देवी द्वारा दुबई में अपने पोते से बातचीत करने के लिए स्‍काइप के उपयोग के बारे में सीखने का भी उदाहरण दिया। प्रसाद ने कहा कि वर्तमान सरकार में ऐसे नेता हैं जो आपातकाल के दिनों में छात्र गतिविधियों में शामिल रहे हैं। 

कहा कि सरकार न्‍यायापालिका की स्‍वतंत्रता को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्‍होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में 1999 के बाद उच्‍च न्‍यायापालिका में सबसे अधिक 126 नियुक्‍तियां हुई हैं। उच्‍च न्‍यायालय के 131 न्‍यायाधीशों की पुष्‍टि की गई है।

बिहार में नारियल खेती के लिए 50000 हेक्टेयर भूमि


            बिहार में नारियल से जुड़ी योजनाओं को लागू करने के लिए 2014 से लेकर कुल 409.06 लाख रुपए नारियल विकास बोर्ड द्वारा मंजूर किए गए हैं। 

            केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह  ने कहा कि किसान प्रशिक्षण केन्‍द्र राज्‍य में नारियल की खेती और उद्योग को मज़बूत बनाने में मदद करेगा। केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा कि केन्द्र सरकार बिहार में नारियल की खेती और इससे जुड़ी गतिविधियों को आगे बढ़ाने लिए कटिबद्ध है। बिहार में नारियल से जुड़ी योजनाओं को लागू करने के लिए 2014 से लेकर कुल 409.06 लाख रुपए नारियल विकास बोर्ड द्वारा मंजूर किए गए हैं। 

           केन्द्रीय कृषि मंत्री ने यह बात  नारियल विकास बोर्ड के 37 वें स्थापना दिवस के अवसर पर पटना के वेटरेनरी कॉलेज में नारियल विकास बोर्ड के ‘किसान प्रशिक्षण केन्‍द्र एवं क्षेत्रीय कार्यालय भवन’ के शिलान्यास के मौके पर कही। नारियल विकास बोर्ड की स्थापना 12 जनवरी 1981 को हुई थी। राधा मोहन सिंह ने कहा कि वर्ष 2009 में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की अध्यक्षता में गठित समिति की सिफारिश के आधार पर नारियल विकास बोर्ड का क्षेत्रीय कार्यालय पटना, बिहार से गुवाहटी, असम में अंतरित कर दिया गया। 

           केन्द्रीय सरकार बनने के बाद बिहार की नारियल उत्पादन क्षमता को ध्यान में रखते हुए केन्द्रीय टीम गठित की गयी। इस टीम ने पटना में बोर्ड का नया एवं चौथा क्षेत्रीय कार्यालय स्थापित करने की संस्तुति की, जिस पर नारियल विकास बोर्ड ने 119 वीं बोर्ड बैठक में सहमति व्यक्त की । सिंह ने कहा कि भारत नारियल के उत्पादन और उत्पादकता में विश्व में अग्रणी देश हैं। देश में 16 राज्यों और तीन संघ शासित क्षेत्रों में 21.4 लाख हेक्टर क्षेत्र में नारियल की खेती की जाती है। नारियल की खेती, प्रसंस्करण, विपणन और व्यापार संबंधी गतिविधियों से एक करोड से अधिक परिवार अपनी आजीविका चलाते हैं। 

           केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि बिहार में 14,900 हेक्टर में नारियल की खेती होती है। नारियल का उत्पादन 14.138 करोड है। केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि उत्तर बिहार का कोसी क्षेत्र जिसमें कोसी नदी के दोनों तरफ के इलाके आते हैं, नारियल की खेती के लिए उपयुक्त है। अनुमान है कि बिहार में विशेषकर उत्तर बिहार में तकरीबन 50000 हेक्टर क्षेत्र में सिंचित स्थिति में नारियल की खेती की जा सकती है। राधा मोहन सिंह कहा कि नारियल विकास बोर्ड का लक्ष्य है कि नारियल किसानों को नारियल के उत्पादन, प्रसंकरण, विपणन और नारियल एवं मूल्यवर्धित  उत्पादों के निर्यात में सहायता देकर भारत को नारियल के उत्पादन, उत्पादकता, प्रसंस्करण एवं निर्यात में अग्रणी बनाना। बिहार नारियल की खेती के गैर पारंपरिक क्षेत्रों में आता है। राज्य में नारियल क्षेत्र के विकास को बोर्ड विशेष ध्यान देता है।

      केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि पटना में क्षेत्रीय कार्यालय भवन के निर्माण के साथ ही किसान प्रशिक्षण केन्‍द्र की स्‍थापना की भी पहल की जा रही है। उन्होंने कहा कि किसान प्रशिक्षण केन्‍द्र किसानों को कौशल विकास दिलाने के लिए है। यह केन्‍द्र राज्‍य में नारियल की खेती और उद्योग को मज़बूत बनाने में मदद करेगा।

पनडुब्बी ‘खंदेरी’ बनेगी भारतीय नौसेना की शान


            रक्षा राज्यमंत्री डॉ सुभाष भामरे ने भारतीय नौसेना की स्कार्पीन क्लास स्टेल्थ पनडुब्बी श्रृंखला की दूसरी पनडुब्बी खंदेरी का उद्घाटन किया। इससे इसके समुद्री परीक्षणों का मार्ग प्रशस्त हो गया है। 

         मझगांव गोदी शिपयार्ड लिमिटेड में नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लाम्बा और अन्य गणमान्य व्यक्ति इस अवसर पर उपस्थित थे। यह पनडुब्बी इस वर्ष के अंत तक नौसेना को सौंपे जाने की संभावना है। मझगांव डाक शिपयार्ड लिमिटेड (एमडीएल) में वर्तमान में प्रोजेक्ट 75 के अंतर्गत 6 स्कार्पीन पनडुब्बियों का निर्माण प्रगति पर है। इसके लिए फ्रांस की सहयोगी कम्पनी मैसर्स डीसीएनएस ने प्रौद्योगिकी हस्तांतरित की है। स्कार्पीन वर्ग की प्रथम कलवरी के वर्तमान में समुद्री परीक्षण चल रहे हैं। 2017 के मध्य में इसे नौसेना में शामिल कर लिए जाने की संभावना है। 

        ये पनडुब्बियां नौसेना में शामिल होने के बाद उसके परम्परागत पनडुब्बी विभाग का महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाएंगी। डॉ सुभाष भामरे ने कहा कि प्रोजेक्ट 75 कलवरी देश के लिए आत्मनिर्भरता और स्वदेशीकरण की दिशा में मील का पत्थर है। नौसेना अध्यक्ष एडमिरल सुनील लाम्बा ने कहा कि यह एक तथ्य है कि ‘‘खंदेरी’’ की तुलना दुनिया की श्रेष्ठतम पनडुब्बियों से की जा सकती है। 

           हमारे जहाज निर्माताओं ने पिछले वर्षों में इसके निर्माण में उच्च अनुभव और विशेषज्ञता अर्जित की है। कहा कि 2017 में नौसेना का पनडुब्बी विभाग अपनी स्वर्ण जयंती मना रहा है। ऐसे में प्रोजेक्ट 75 की पनडुब्बियां नौसेना के बेड़े में शामिल होने से देश की पनडुब्बी क्षमताओं में एक नए अध्याय की शुरुआत हुई है।