Wednesday, 21 February 2018

उत्तराखंड में जल एवं स्‍वच्‍छता को बढ़ावा, गंगा ग्राम का शुभारंभ

  नई दिल्ली। केन्‍द्रीय पेयजल एवं स्‍वच्‍छता मंत्री सुश्री उमा भारती ने आज एक विशेष पहल के रूप में बागोरी गंगा ग्राम परियोजना, बागोरी में नई स्‍वजल परियोजना और उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के डूंडा गांव में गंगोत्री स्‍वच्‍छ प्रतीक स्‍थल का शुभारंभ किया।

  इन परियोजनाओं से स्‍वच्‍छता सुनिश्चित होने के साथ-साथ गंगा किनारे स्थित गांवों में रहने वाले लोगों को बुनियादी सुविधाएं भी मिलेंगी। इसके अलावा, रोजगार भी सृजित होंगे। ओडीएफ (खुले में शौच मुक्‍त) गांव बागोरी भी उन 24 पायलट गंगा गांवों में शामिल है जिनका चयन इस वर्ष ‘गंगा ग्राम’ में तब्‍दील करने के लिए किया गया है।
   इस दिशा में पहले कदम के रूप में मंत्री ने बागोरी में 11.88 लाख रुपये की लागत वाली ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन योजना का उद्घाटन किया। उन्‍होंने लोगों से गंगा ग्राम को संपूर्ण अर्थ में एक वास्‍तविकता में तब्‍दील करने के मिशन में शामिल होने का आग्रह किया।
    गंगा जलग्रहण क्षेत्र में वृक्षारोपण को काफी बढ़ावा देने के लिए सुश्री उमा भारती के साथ-साथ उत्तराखंड के पेयजल एवं स्‍वच्‍छता मंत्री प्रकाश पंत, पेयजल एवं स्‍वच्‍छता मंत्रालय में सचिव परमेश्‍वरन अय्यर, स्‍थानीय विधायक और केन्‍द्र एवं राज्‍य सरकार के अन्‍य अधिकारियों ने भी धरासू एनएमसीजी नर्सरी में आयोजित वृक्षारोपण कार्यक्रम में भाग लिया। इस वर्ष उत्तरकाशी के गंगा जलग्रहण क्षेत्र में 1.5 लाख से भी ज्‍यादा पौधे लगाए जाएंगे।
   मंत्री ने लोगों से अनुरोध करते हुए कहा कि नदी किनारे वृक्षारोपण करना आम जनता का भी उत्तरदायित्व है। उन्‍होंने यह भी कहा कि समुदायों की भागीदारी के जरिए एकीकृत विकास सुनिश्चित करना गंगा ग्राम अवधारणा के केंद्र में है। सुश्री उमा भारती ने बागोरी में नई स्‍वजल परियोजना का भी उद्घाटन किया जिसके लिए 32 लाख रुपये से भी ज्‍यादा का बजट रखा गया है।
    ‘स्‍वजल’ दरअसल समुदाय के स्‍वामित्‍व वाला पेयजल कार्यक्रम है जिसका उद्देश्‍य पेयजल की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करना है। प्रकाश पंत ने कहा कि राज्‍य सरकार उत्तराखंड के सैकड़ों गांवों को जलापूर्ति करने की योजना बना रही है।
   उन्‍होंने लोगों से आगे आने और नई स्‍वजल परियोजना को ठीक उसी तरह से अपनाने का अनुरोध किया जिस प्रकार पुरानी स्वजल योजना को अपनाया गया था। बाद में सुश्री उमा भारती ने सडग गांव का भी दौरा किया जहां वर्ष 1996 से ही स्‍वजल योजना सफलतापूर्वक चलाई जा रही है। केन्‍द्रीय मंत्री ने स्‍वच्‍छ प्रतीक स्‍थल के रूप में गंगोत्री का भी शुभारंभ किया। 
    ओएनजीसी अपने सीएसआर कोष के जरिए गंगोत्री को स्‍वच्‍छता के उच्‍च स्‍तर पर ले जाने में मदद करेगी। इसके लिए जिला प्रशासन द्वारा विस्‍तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर ली गई है। 
    केन्‍द्रीय आवास एवं शहरी मामले, पर्यटन एवं संस्‍कृति मंत्रालयों, राज्‍य सरकारों, नगरपालिका और स्‍थानीय एजेंसियों के सहयोग से पेयजल एवं स्‍वच्‍छता मंत्रालय (एमडीडब्‍ल्‍यूएस) द्वारा एसआईपी परियोजना का समन्वयन किया जा रहा है। 
   पेयजल एवं स्‍वच्‍छता सचिव, जो स्‍वजल के प्रथम परियोजना निदेशक भी थे, ने अपने संबोधन में गंगा ग्राम, स्‍वजल और एसआईपी परियोजनाओं से संबंधित मंत्रालय की योजनाओं के बारे में संक्षिप्‍त ब्‍योरा पेश किया।

चारधाम परियोजना: उत्‍तराखंड में सिल्‍कयारा बेंद बारकोट टनल को मंजूरी

    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने उत्तराखंड में 4.531 किलोमीटर लंबी दो लेन वाली दो तरफा सिल्कयारा बेंद बारकोट टनल के निर्माण को मंजूरी दे दी है।

   इस टनल से निकलने काएक सुरक्षित मार्ग भी होगा। इसमें उत्तराखंड में चैनेज के बीच धारसू-यमनोत्री सेक्शन पर 25.400 किलोमीटर और 51.000 किलोमीटर का दो प्रवेश मार्ग होगा। ये परियोजना उत्तराखंड राज्य में राजमार्ग संख्या 134 (पुराने राजमार्ग संख्या 94) के बीच में पड़ेगी।
   इसका काम इंजीनियरिंग, अधिप्राप्ति और निर्माण मोड के तहत किया जाएगा। इसका वित्त पोषण सड़क परिवहन और राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय द्वारा एनएच(ओ) स्कीम के तहत किया गया है। 
  यह महत्वाकांक्षी चार धाम परियोजना का हिस्सा है। परियोजना निर्माण की अवधि 4 वर्ष है। इसके निर्माण पर 1119.69 करोड़ रूपये की अनुमानित लागत आएगी। परियोजना का कुल खर्च 1383.78 करोड़ रूपये होगा।
    इसमें भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास,निर्माण पूर्व की अन्य गतिविधियां तथा 4 वर्षों तक टनल की मरम्मत और परिचालन के खर्च भी शामिल होंगे। टनल के निर्माण से चारधाम यात्रा के एक धाम यमुनोत्री तक जाने के लिए हर तरह के मौसम में संपर्क मार्ग उपलब्ध होगा।
    इससे क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास के साथ ही व्यापार और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे धारसू से यमुनोत्री के बीच सड़क मार्ग की दूरी करीब 20 किलोमीटर कम हो जाएगी और यात्रा समय भी करीब एक घंटा कम हो जाएगा।
    प्रस्तावित टनल के निर्माण के दौरान बड़ी संख्या में उन पेड़ों को हटाने से बचाया जा सकेगा, जिन्हें 25.600 किलोमीटर लंबे सड़क मार्ग के उन्नयन के दौरान मूल नक्शे के तहत काटा जाना था। यह परियोजना राष्ट्रीय राजमार्ग और अवसंरचना विकास लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) के जरिए सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा क्रियान्वित की जाएगी।
   एनएचआईडीसीएल सरकार की पूर्ण स्‍वामित्‍व वाली कंपनी है, जिसकी स्थापना 2014 में राज्यों से लगी अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं पर सड़कों के विकास के लिए की गई थी।
      परियोजना का उद्देश्य उत्तराखंड में 4.531 किलोमीटर लंबी दो लेन वाली दो तरफा टनल का निर्माण करना है, इसके साथ ही इसमें 328 मीटर लंबे संपर्क सड़क तथा धारसू-यमनोत्री के बीच निकलने केसुरक्षित मार्ग का निर्माण भी शामिल है।

60,000 करोड़ रुपए का राष्‍ट्रीय शहरी आवास कोष

     नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने 60,000 करोड़ रुपए के राष्‍ट्रीय शहरी आवास कोष (एनयूएचएफ) के गठन को मंजूरी दे दी है।

   यह कोष निर्माण सामग्री एवं प्रौद्योगिकी संवर्धन परिषद (बीएमटीपीसी) में होगा। बीएमपीटीसी आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय का एक स्‍वायत्‍ताशासी निकाय है, जो संस्था पंजीकरण अधिनियम 1860 के तहत पंजीकृत है।
  मंत्रालय ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत अब तक 39.4 लाख मकानों के निर्माण की मंजूरी दी है। राज्‍यों और संघ शासित प्रदेशों की ओर से योजना को अच्‍छी प्रतिक्रिया मिली है।
    योजना के तहत करीब दो-तीन लाख मकान हर महीने मंजूर किए जा रहे हैं। अब तक 17 लाख से ज्‍यादा मकानों का निर्माण शुरू हो चुका है और पांच लाख मकान बनकर तैयार हो चुके हैं।
  प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत ऋण आधारित ब्‍याज सब्सिडी योजना (सीएलएसएस) के तहत जहां आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्‍ल्‍यूएस), निम्‍न आय वर्ग (एलआईजी) और मध्‍य आय वर्ग (एमआईजी) के लाभार्थियों के लिए कर्ज की व्‍यवस्‍था बैंकों और एचएफसी की ओर से की गई है, वहां से लगातार अच्‍छी प्रतिक्रिया मिल रही है।
   योजना के तहत पिछले आठ महीनों में करीब 87 हजार आवास ऋण मंजूर किए जा चुके हैं और 40,000 आवेदन विचारार्थ हैं। देश की आजादी के 75 साल पूरे होने के मौके पर 2022 तक 1.2 करोड़ मकानों की कमी को पूरा करते हुए देश में सबके लिए आवास सुनिश्चित करने का लक्ष्‍य रखा गया है।
     अगले चार वर्षों में एनयूएचएफ जरूरी धन जुटाने का काम करेगा, ताकि लाभार्थी आधारित व्‍यक्तिगत आवास (बीएलसी), भागीदारी में किफायती आवास (एएचएफ), स्‍व-स्‍थाने स्‍लम पुनर्वास (आईएसएसआर) और सीएलएसएस जैसी विभिन्‍न योजनाएं टिकी रह सकें, इनके लिए केन्‍द्रीय मदद का रास्‍ता आसान बनें और शहरी क्षेत्रों में मकानों की कमी को आसानी से पूरा किया जा सके।