Thursday, 11 January 2018

हज के लिए 2018 में भारत से रिकार्ड संख्या में जाएंगे श्रद्धालु

    नई दिल्‍ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में लगातार दूसरे वर्ष भारत का हज कोटा बढ़ाने में सफलता मिली है। स्वतंत्रता के बाद पहली बार हज 2018 के लिए एक लाख 75 हजार और 25 श्रद्धालु भारत से जाएंगे।

   अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी और सऊदी अरब मक्का सम्राज्य के हज और उमरा मंत्री द्वारा भारत और सऊदी अरब के बीच द्विपक्षीय वार्षिक हज 2018 समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद सऊदी अरब सरकार द्वारा 2018 के लिए भारत का हज कोटा बढ़ाने का निर्णय लिया गया। 
    अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि 3 वर्ष पहले भारत का हज कोटा 1,36,020 था। यह पिछले दो वर्षों में बढ़कर रिकार्ड 1 लाख 75 हजार और 25 हो गया है। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की बढ़ती लोकप्रियता के कारण और श्री मोदी के नेतृत्व में सऊदी अरब तथा अन्य अरब देशों के साथ भारत के मित्रतापूर्ण और मजबूत संबंधों के कारण हुआ है।
     श्री नकवी ने बताया कि पिछले वर्ष भी सऊदी अरब ने भारत का हज कोटा 35 हजार बढ़ाया था। भारत सरकार और भारत के लोगों की ओर से श्री नकवी ने दो पवित्र मस्जिदों के कस्टोडियन महामहिम शाह सलमान बिन अब्दुल अजीज अल सउद तथा सऊदी अरब सरकार को भारत के हज कोटे में वृद्धि के लिए धन्यवाद दिया। 
    उन्होंने कहा कि इसके अतिरिक्त सऊदी अरब ने समुद्री मार्ग से हज श्रद्धालुओं को भेजने के विकल्प को जीवित करने के भारत के निर्णय को हरी झंडी दी है। दोनों देशों के अधिकारी आवश्यक औपचारिकताओं और तकनीकों पर बातचीत करेंगे ताकि आने वाले वर्षों में समुद्री मार्ग से श्रद्धालु हज के लिए जा सकें।
  अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री ने बताया कि हज 2018 के लिए 3 लाख 55 हजार आवेदन प्राप्त किए गए। श्री नकवी ने कहा कि पहली बार भारत से कोई मुस्लिम महिला मेहरम (पुरूष साथी) के बिना हज यात्रा पर जाएगी। 1300 से अधिक महिलाओं ने मेहरम के बिना हज यात्रा का आवेदन किया है और इन सभी महिलाओं को लॉटरी प्रणाली से छूट दी जाएगी तथा हज यात्रा पर जाने की अनुमति दी जाएगी। 
     नई भारतीय हज नीति के अनुसार 45 वर्ष से अधिक आयु की हज यात्रा करने की इच्छुक वैसी महिलाओं को जिनका कोई पुरूष साथी नहीं है उन्हें चार या उससे अधिक महिलाओं के समूह में हज यात्रा पर जाने की अनुमति होगी।

भारत के बारे में विश्व की छवि बदली

    नई दिल्‍ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नई दिल्ली में प्रवासी-सांसद सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया। प्रधानमंत्री ने प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए। कहा कि सैकड़ों वर्षों में अनेक लोगों ने भारत छोड़ा होगा लेकिन भारत उनके दिमाग और हृदय में अपना स्थान बनाए हुए है।

   उन्होंने कहा कि इसमें आश्चर्य नहीं कि भारतीय मूल के लोगों ने अपनाई गई जमीन से अपने-आप को एकीकृत कर लिया है। उन्होंने कहा कि लोगों ने अपनी भारतीयता बनाए रखा है और विदेशों में बसे लोगों ने वहां की भाषा, खान-पान तथा वेशभूषा को अपनाया है।
    प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसा लगता है आज नई दिल्ली में भारतीय मूल के लोगों की मिनी विश्व संसद यहां एकत्रित हुई है। उन्होंने कहा कि भारतीय मूल के लोग आज मॉरीशस, पुर्तगाल और आयरलैंड में प्रधानमंत्री हैं। 
    उन्होंने कहा कि भारतीय मूल के लोग अनेक देशों में राष्ट्राध्यक्ष और शासनाध्यक्ष रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले तीन से चार वर्षों में भारत के बारे में विश्व की छवि बदली है। उन्होंने कहा कि इसका कारण यह है कि भारत स्वयं को बदल रहा है।
    उन्होंने कहा कि अभी भारत की आकांक्षाएं और आशाएं शीर्ष पर हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक क्षेत्र में बदलाव देखे जा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय मूल के लोग जहां कहीं भी हैं भारत के स्थायी राजदूत की तरह हैं।
     प्रधानमंत्री ने कहा कि वह विदेश यात्रा के दौरान भारतीय मूल के लोगों से मिलने की कोशिश हमेशा करते हैं। प्रधानमंत्री ने विदेशों में रहने वाले भारतीय नागरिकों की समस्याओं पर निरंतर रूप से नजर रखने के लिए विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज की सराहना की। इस संदर्भ में उन्होंने ‘मदद’ पोर्टल का जिक्र किया है, जो कंसुलर शिकायतों की निगरानी करता है। 
    प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार यह मानती है कि अप्रवासी भारतीय भारत के विकास के लिए सहयोगी हैं। उन्होंने कहा कि नीति आयोग द्वारा तैयार 2020 तक के कार्य एजेंडा में प्रवासी भारतीयों का महत्वपूर्ण स्थान है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय सभ्यता और संस्कृति के मूल्य अस्थिरता के युग में पूरे विश्व को दिशा दे सकते हैं। 
    प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का आसियान देशों के साथ घनिष्ठ संबंध है। यह घनिष्ठता गणतंत्र दिवस के दौरान देखने को मिलेगी।प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय मूल के लोग भारत के स्थायी राजदूतों की तरह हैं और भारत की विकास में सहयोगी हैं।
    नीति अयोग द्वारा तैयार 2020 तक के लिए कार्य एजेंडा में उनका महत्वपूर्ण स्थान है।‘उभरता भारत-प्रवासी सांसदों की भूमिका’ पर दूसरे पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय रसायन और उर्वरक तथा संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने कहा कि उन्हें प्रथम प्रवासी सांसद सम्मेलन में भाग लेने का सम्मान मिला है। उन्होंने सभी सांसदों का स्वागत किया।
   अनंत कुमार ने प्रारंभ में इस महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक सम्मेलन की मेजबानी के लिए विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज को बधाई दी। विश्व के 20 से अधिक लोकतंत्रों के भारतीय मूल के सांसदों का यह सम्मेलन श्रेष्ठ संसदीय व्यवहारों को साझा करने तथा अपने अनुभवों से एक-दूसरे को समृद्ध बनाने के लिए है।
   अनंत कुमार ने कहा कि श्री नरेन्द्र मोदी के गतिशील नेतृत्व में भारत और भारतीय डायसपोरा को देशों के समुदाय में अधिक मान्यता और लोकप्रियता मिली है। यह प्रधानमंत्री के प्रत्येक देश की यात्रा में उमड़ने वाले विशाल जनसमूह से प्रकट होता है। इस तरह के सम्मेलन डायसपोरा में अपने संबंधों को मजबूत और विविध बनाने का अवसर प्रदान करता है। विश्व के विभिन्न देशों में भारतीय मूल के लोगों के योगदान की चर्चा करते हुए अनंत कुमार ने कहा कि भारतीय मूल के लोग जिस देश में रह रहे हैं उस देश की अर्थव्यवस्था और सामाजिक उत्थान में महत्वपूर्ण योगदान करते रहे हैं।
      संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि इन देशों में हिन्दी, भोजपुरी जैसी भाषाएं , रामायण जैसी लोक कथा, भारतीय साहित्य और परंपरागत खान-पान न केवल जीवित हैं, बल्कि फल-फूल रहे हैं। यह इसलिए संभव हो पाया क्योंकि इन देशों के प्रवासी भारतीय अपनी परंपराओं, मान्यताओं और रीति-रिवाज को संरक्षित रखने के लिए संकल्पबद्ध हैं।
    अनंत कुमार ने कहा कि सभी प्रतिनिधि विस्तारित परिवार के सदस्य हैं तथा इतिहास, संवेदी लगाव, सांस्कृतिक संबंध और रिश्तों से बंधे हुए हैं।अनंत कुमार ने सम्मेलन को भारतीय मूल के लोगों की मिनी विश्व संसद बताया।
  उन्होंने मजबूत मंच की आधारशिला रखने के लिए विदेश मंत्री को बधाई दी।अनंत कुमार ने कहा कि भारतीय मूल के लोगों ने अनेक देशों में ऊंचे राजनीतिक और शासन के पदों को प्राप्त किया है और राष्ट्राध्यक्ष भी बने हैं। यह 1.25 बिलियन भारतीयों के लिए गर्व और खुशी की बात है।संसदीय कार्य मंत्री ने भारतीय मूल के लोगों को मातृभूमि भारत के विकास में सहयोग करने के लिए आमंत्रित किया।
      उन्होंने कहा कि स्कील इंडिया, स्टार्ट-अप इंडिया, स्टैंड-अप इंडिया, मेक इन इंडिया जैसी भारत सरकार की अग्रणी योजनाएं प्रवासी भारतीयों के लिए बड़ा अवसर प्रदान करती है। इस सत्र में प्रतिष्ठित प्रवासी सांसदों ने अपने अनुभवों को साझा किया और बताया कि कैसे अभी तक शांति और सौहार्द के जरिए भारत में अपनी जड़ों से जुड़े हुए हैं और पुरखों की मान्यताओं को अपनाए हुए हैं। सत्र को संबोधित करने वाले अन्य गणमान्य व्यक्तियों में लोकसभा के उपाध्यक्ष श्री एम. थम्बीदुरई तथा विदेश मंत्रालय के सचिव डी.के मुले शामिल हैं।

शारीरिक खेलों को प्रोत्साहित करने की आवश्‍यकता

    नई दिल्‍ली। उपराष्‍ट्रपति एम.वेंकैया नायडू ने कहा है कि दिमागी खेलों को भी शारीरिक खेलों की तरह सहयोग की आवश्‍यकता है।

  उन्‍होंने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि शारीरिक क्षमताओं की अपनी सीमाएं है, लेकिन दिमाग की क्षमता असीमित है और इसकी क्षमताओं का दोहन करना होगा।
    वह आज वर्ल्‍ड मेमोरी स्‍पोर्ट्स काउंसिल फॉर इंडिया के दल को संबोधित कर रहे थे। यह दल पिछले माह चीन के शेन्झेनशहर में आयोजित विश्व मेमोरी चैंपियनशिप में चौथे स्थान पर रहा था। 
    उपराष्ट्रपति ने कहा कि दिमागी खेल युवाओं और छात्रों की एकाग्रता और रचनात्मकता को बढ़ाकर जीवन मे सफलता प्राप्त करने में योगदान देते हैं। उन्होंने कहा कि हमें रटने की बजाय विश्लेषणात्मक और तार्किक चिंतन की तरफ अग्रसर होना चाहिए। श्री नायडू ने कहा कि अवधारणा का निर्माण और समझ बेहद महत्वपूर्ण पहलू हैं।
     उपराष्ट्रपति ने कहा कि हमें एक समग्र शिक्षा प्रणाली की जरूरत है। उन्होंने कहा कि रटने वाली पढ़ाई, माता-पिता की ज्यादा उम्मीदें, बढ़ती प्रतिस्पर्धा और शैक्षणिक संस्थानों की उच्च रैंक प्राप्त करने की लालसा छात्रों के बीच तनाव और बैचेनी के कारण हैं। श्री नायडू ने कहा कि तनाव के कारण छात्रों द्वारा आत्माहत्या की ख़बरें दुख:द हैं।
    उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि संस्थान, सरकारों और समाज को एकजुट होकर तनावग्रस्त छात्रों का सहयोग कर ऐसे मामलों को रोकना होगा। उन्होंने कहा कि रटंत प्रणाली के तहत छात्र विषय की बुनियाद को समझे बिना सिर्फ परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिए लिखते हैं। उपराष्ट्रपति ने कहा कि स्वस्थ्य मस्तिष्क के लिए प्रत्येक भारतीय को याददाश्त के इन तरीको को सीखने की जरूरत है और इन दिमागी खेलों को नियमित रूप से खेलने की आवश्यकता है। 
    उन्होंने कहा कि यदि छात्र याददाश्त के तरीकों में निपुण होते हैं तो वे बेहतर तरीकें से काम कर सकते हैं और उन्हें पढ़ाई से इतर अन्य गतिविधियों के लिए भी समय मिलेगा जिससे उनका समग्र विकास होगा।

भारत में आर्थिक बदलाव के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर सुझाव

    नई दिल्‍ली। वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु ने भारत में आर्थिक बदलाव के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर गठित कार्यदल की बैठक की अध्‍यक्षता नई दिल्‍ली स्थित उद्योग भवन में की।

    इस कार्यदल में उद्योग एवं शिक्षा जगत एवं सरकार के सदस्‍य शामिल हैं। इस कार्यदल का गठन कृत्रि‍म बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के उपयोग के बारे में नीतिगत कदम सुझाने और औद्योगिक नीति के लिए आवश्‍यक जानकारी (इनपुट) देने के उद्देश्‍य से किया गया है। इस कार्यदल का गठन 24 अगस्‍त, 2017 को किया गया। 
  इस कार्यदल ने विभिन्‍न हितधारकों के साथ विस्‍तृत विचार-विमर्श के बाद अपनी प्रारंभिक सिफारिशों का मसौदा तैयार किया है। उपर्युक्‍त बैठक में इन सिफारिशों पर विचार-विमर्श किया गया। 
    मंत्री ने कार्यदल के विचारार्थ अपने सुझाव पेश किए। प्रमुख कंसल्टिंग फर्म एसेंचर ने भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर अपने हालिया अध्‍ययन के निष्‍कर्ष पेश किए जिसका शीर्षक ‘विकास के लिए रीमिक्स' था।