Friday, 14 July 2017

राजमार्गों का उपयोग ऑप्टिक फाइबर, तेल व गैस लाइन के लिए

          सड़क परिवहन और राजमार्ग एवं जहाजरानी मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि देश में पारदर्शी और कुशल शासन मुहैया कराने की कुंजी सूचना और प्रौद्योगिकी के पास है। गडकरी ने एबीपी समूह और फैडरेशन ऑफ इंडियन माइक्रो एंड स्माल एंड मीडियम इंटरप्राइजेज द्वारा नई दिल्ली में आयोजित इंफोकॉम 2017 को संबोधित करते हुए यह बात कही। 

      भारतीय इंजीनियरों और सॉफ्टवेयर विशेषज्ञों द्वारा दुनियाभर में निभाई जा रही भूमिका की सराहना करते हुए गडकरी ने कहा कि अगर हम दुनिया भर में प्रतिस्पर्धात्मक रूप से बेहतर स्थान बनाना और उसे बरकरार रखना चाहते हैं, तो हमें अपनी परिसंपत्तियों से बेहतर लाभ प्राप्त करने के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने की जरूरत होगी।
       उन्होंने कहा कि सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के पास लगभग 2 लाख किलोमीटर राजमार्ग हैं और उन्होंने समस्त राजमार्गों का उपयोग ऑप्टिक फाइबर, तेल और गैस पाइप लाइन बिछाने में करने की पेशकश की। उन्होंने कहा कि इससे मंत्रालय को कुछ राजस्व मिल सकता है जिसका इस्तेमाल सड़कों के निर्माण और रखरखाव में किया जा सकता है। 
       सड़क परिवहन क्षेत्र का उल्लेख करते हुए गडकरी ने कहा कि बहुत जल्द ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने के काम का पूरी तरह से कम्प्यूटरीकरण कर दिया जाएगा। ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने के लिए किसी व्यक्ति की फिटनेस कम्प्यूटर कार्यक्रम के द्वारा तय की जाएगी और इसमें मानव हस्तक्षेप नहीं होगा। इससे लाइसेंस केवल योग्य चालकों को ही मिलेंगे जिससे सड़कों पर सुरक्षा में पर्याप्त वृद्धि होगी। 
        गडकरी ने कहा कि मंत्रालय ने पिछले साल ई-टोलिंग की व्यवस्था शुरू की थी जिससे राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल प्लाजा में यातायात की भीड़भाड़ में कमी लाने में मदद मिली है। फास्टैग वाले ट्रकों और अन्य वाहनों को टोलगेट्स पर रुकने की जरूरत नहीं पड़ती।
       गडकरी ने कहा कि ज्यादा से ज्यादा वाहनों द्वारा इन फास्टैग का इस्तेमाल किए जाने के प्रयास किये जा रहे हैं। जल्द ही ये टैग वाहनों के डीलरों को उपलब्ध करा दिये जायेंगे और सभी नए वाहनों पर ये टैग पहले से लगे होंगे। इस अवसर पर दूरसंचार सचिव सुश्री अरूणा सुंदरराजन ने भी अपने विचार प्रकट किए।

विशाखापत्तनम में 150 करोड़ की लागत से सीमेन्ट प्लांट

          राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड, विशाखापत्तनम स्टील प्लांट के निगमित निकाय और सीमेंट कारपोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआई), भारी उद्योग और सार्वजनिक उपक्रम के अधीन सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम ने संयुक्त उद्यम में दो चरणों में प्रत्येक एक मिलियन क्षमता के 2 एमटीपीए ऐश और विस्फोट से निकलने वाले लावा आधारित सीमेंट प्लांट के लिए आज विशाखापत्तनम में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। 

    राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड सीमेंट प्लांट के लिए बड़ी मात्रा में विस्फोट से निकलने वाले लावा और फ्लाई ऐश का उत्पादन करेगा। सीसीआई का प्रतिनिधित्व करते हए मनोज मिश्रा अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक और राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड का प्रतिनिधित्व करते पी.सी. महोपात्रा, निदेशक (परियोजना) ने राष्ट्रीय इस्पात लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक पी. मधुसूदन की उपस्थिति हस्ताक्षर किए। 
       संयुक्त उद्यम परियोजना की लागत लगभग 150 करोड़ रु है, राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड इस प्रस्तावित प्लांट के लिए अपने परिसर में लगभग 35 एकड़ जमीन दे रहा है। परियोजना का आदेश देने की तिथि से 15 महीनों के अन्दर पूरा करना प्रस्तावित है।
         इस अवसर पर पी. मधुसूदन अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड ने विश्वास व्यक्त किया कि सीमेंट कारपोरेशन ऑफ इंडिया प्रदूषण रहित वातावरण में अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी से, व्यवसायिक तरीके से, नियत अवधि के भीतर प्लांट की स्थापना करेगा।
       उन्होंने कहा कि सीमेंट कारपोरेशन ऑफ इंडिया इस सपने को वास्तविकता में बदलने के लिए अपने विशेषज्ञों के साथ अपनी प्रतिबद्धता दिखाएगा और इसके साथ ही उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए अपना आवश्यक सहयोग देगा। मनोज मिश्रा, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक ने कहा कि सीमेंट कारपोरेशन ऑफ इंडिया देश में सबसे कम लागत का सीमेंट उत्पादक है और राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड के साथ हाथ मिलाना दोनों कम्पनियों के लिए फायदेमंद स्थिति में रहेगा और दोनों पीएसयू मिलकर अपने ग्राहकों को अधिक एकीकृत उत्पाद समाधान उपलब्ध करा सकेंगे।
       इस अवसर पर राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड डी. एन. राव निदेशक (प्रचालन), रायचौधरी, निदेशक (वाणिज्य), किशोर चन्द्र दास, निदेशक (कार्मिक), वी. वी. वेणुगोपाला राव, निदेशक (वित्त) और सीमेंट कारपोरेशन ऑफ इंडिया बी. वी. एन. प्रसाद, निदेशक (मानव संसाधन) और एस. शक्तिमणि निदेशक (वित्त) भी उपस्थित रहे।
       इस अवसर पर राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड के कार्यपालक निदेशक और महाप्रबंधक भी उपस्थित रहे। प्रस्तावित प्लांट का स्थान विस्फोट से निकलने वाले लावा और फ्लाई ऐश की उपलब्धतता के परिणामस्वरूप विशाल रसद लागत की दृष्टि से लाभदारी रहेगा। 
      यदि आवश्यक हो तो नजीदीकी बन्दरगाह सीमेंट के निर्यात के साथ-साथ किंलकर के आयात के अवसर भी प्रदान करेगा। सीमेंट कारपोरेशन ऑफ इंडिया के पास उपलब्ध मशीनरी से भी परियोजना की लागत कम होने की संभावना है। सीमेंट कारपोरेशन ऑफ इंडिया द्वारा बताए गए लागत आंकड़े स्पष्टतया भारत में सबसे कम लागत वाले किलंकर उत्पादक लागत वाला बना देंगे।

कमजोर वर्ग की लड़कियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा

         भारत के राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने जिला-मुर्शीदाबाद के कानीदीधी में सत्य भारती फाउंडेशन के नए स्कूल का उद्घाटन किया।

       इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि सत्य भारती स्कूल कमजोर वर्ग की लड़कियों का मुख्य रूप से ध्यान रखकर छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर रहा है। उन्होंने इस बात की प्रशंसा की कि सत्य भारती फाउंडेशन ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूलों की स्थापना करके स्थानीय बच्चों की शिक्षा संबंधी जरूरतों को पूरा कर रहा है। 
        उन्होंने कहा कि छात्र गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने के लिए इन स्कूलों में प्रवेश के लिए उत्सुक रहते हैं। उन्होंने आशा व्यक्त कि कि स्थानीय विद्यार्थियों के साथ-साथ यह स्कूल आस-पास के विद्यार्थियों की आवश्यकताएं भी पूरी करेगा।
        इस अवसर पर राष्ट्रपति ने छात्रों द्वारा व्यक्त आदर्श स्कूली अनुभवों, स्वप्नों और आकांक्षाओं पर आधारित एक सार-संग्रह (कंपेडियम) का शुभारम्भ किया। ये सार-संग्रह (कंपेडियम) भारतीय फाउंडेशन द्वारा देश भर में चलाए जा रहे विभिन्न शैक्षणिक कार्यक्रमों के छात्रों के अनुभवों पर आधारित है। 
        इस अवसर पर अभिजीत मुखर्जी संसद सदस्य (लोकसभा), सुब्रत साहा, विधायक सागरदिधि, राकेश भारती मित्तल, सह-अध्यक्ष भारती फाउंडेशन और विजय चड्ढा, सीईओ भारती फाउंडेशन भी उपस्थित रहे।

समाज के अंतिम व्‍यक्ति की भलाई में गांधी के सत्‍याग्रह के शाश्‍वत दर्शन

         संस्‍कृति और पर्यटन राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) डॉ. महेश शर्मा ने कहा है कि महात्‍मा गांधी के सत्‍याग्रह के शाश्‍वत दर्शन तभी हो सकते हैं जब समाज के सबसे निचले तबके की भलाई के लिए खड़ा हुआ जाए। यही कारण है कि महात्‍मा गांधी ने अन्‍यायपूर्ण नमक कर को खत्‍म करने का आह्वान किया था। 

      डॉ. शर्मा यहां डॉ. वाई.पी आनंद की पुस्‍तक ‘हिस्‍टोरिकल बैकग्राउंड टू द इम्‍पोजिशन ऑफ सोल्‍ट टैक्‍स अंडर द ब्रिटिश रूल इन इंडिया (1757-1947) एंड महात्‍मा गांधीज़ सॉल्‍ट सत्‍याग्रह (1930-31) अगेन्‍स्‍ट द ब्रिटिश रूल’ का विमोचन करने के बाद संबोधित कर रहे थे। समारोह का आयोजन संस्‍कृति मंत्रालय, गांधी स्‍मृति और दर्शन समिति और गांधी आश्रम, साबरमती ने किया था। 
        डॉ. शर्मा ने चंपारण सत्‍याग्रह के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर 10 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के आह्वान को दोहराया, जब उन्‍होंने राष्‍ट्र से अपील की थी कि गांधीजी को सच्‍ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम अपने दैनिक जीवन में स्‍वच्‍छाग्रह को अपनाएं।
         उन्‍होंने विस्‍तार से बताया कि किस प्रकार महात्‍मा गांधी ने देश के जन साधारण को समझाने के लिए नमक को एक माध्‍यम के रूप में चुना और आजादी के जन आंदोलन का नेतृत्‍व किया। उन्‍होंने कहा कि चुटकी भर नमक आजादी का प्रतीक बन गया। 
        अपनी पुस्‍तक के बारे में बताते हुए उच्‍चस्‍तरीय डांडी स्‍मारक समिति के सदस्‍य और राष्‍ट्रीय गांधी संग्रहालय के पूर्व निदेशक डॉ. वाई.पी. आनंद ने पुस्‍तक के अनुसंधान कार्य और उसके संकलन में विभिन्‍न व्‍यक्तियों के योगदान की सराहना की। 
       ऐतिहासिक नमक सत्‍याग्रह के बारे में उन्‍होंने गांधीजी के सूक्ष्‍म दृष्टिकोण की चर्चा की, जिसने ऐसी जागरूकता पैदा की, जिसकी तरफ दुनिया का ध्‍यान आकर्षित हुआ। 
          संस्‍कृति मंत्रालय की सचिव श्रीमती रश्मि वर्मा ने कहा कि महात्‍मा गांधी की सत्‍याग्रह की अवधारणा किसी भी प्रकार के अन्‍याय को रोकने का एक असाधारण और अनूठा तरीका था। यही समूचे गांधीवादी सिद्धांत और दर्शन का हृदय और आत्‍मा तथा आधुनिक भारतीय राजनीति को उनका असाधारण योगदान है।

भारतीय रेलवे : माल ढुलाई वाले ग्राहकों के साथ साझेदारी की कोशिश

        रेल मंत्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने भारतीय रेल गोल मेज सम्मेलन वैगन डिजाइन के नए विकल्प:ग्राहकों तक पहुंच का उद्घाटन किया। इस अवसर पर रेल राज्य मंत्री और संचार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मनोज सिन्हा और रेल राज्य मंत्री राजेन गोहिन भी विशेष रूप से उपस्थित थे। रेलवे बोर्ड के सदस्य रविन्द्र गुप्ता (रोलिंग स्टॉक) और रेलवे बोर्ड के अन्य सदस्य तथा वरिष्ठ अधिकारी भी इस मौके पर मौजूद थे। 

     इस अवसर पर रेल मंत्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने कहा कि भारतीय रेलवे माल ढुलाई खंड में अपना औसत प्राप्त करने की कोशिश कर रहा है। भारतीय रेलवे की नई माल भाड़ा नीति में तर्कसंगत शुल्क हैं। 
     भारतीय रेलवे माल ढुलाई वाले ग्राहकों के साथ साझेदारी करने की कोशिश कर रहा है। वैगनों के नए वैकल्पिक  डिजाइन इस दिशा में एक अन्य कदम है। ग्राहकों की आवश्यकता के अनुरूप नए वैगन डिजाइन करना ग्राहकों और रेलवे दोनों के लिए फायदेमंद हैं। 
       ग्राहक अपनी आवश्यकता के अनुसार वैगनों को परिवर्तित-बदल सकते हैं और इससे रेलवे के माल ढुलाई के अंश में पर्याप्त वृद्धि हो सकती है। भारतीय रेलवे की जिंस बॉस्केट हमेशा से वैविध्यपूर्ण रही है। माल ढुलाई यातायात में वृद्धि करने के लिए हम कृषि और मत्स्य के अनछुए क्षेत्रों में प्रयास कर रहे हैं। 
        इस अवसर पर रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने कहा, अर्थव्यवस्था की वृद्धि के साथ ही गैर पारंपरिक क्षेत्र में बहुत अधिक वृद्धि होने की संभावना है। भारतीय रेलवे द्वारा शुरू की गई बहुत सी योजनाओं में समर्पित वैगनों की खरीद में उद्योग जगत द्वारा पहले ही निवेश किया जा चुका है। 
          गैर पारंपरिक क्षेत्र में वृद्धि की दृष्टि से सबसे ज्यादा संभावनों से भरपूर क्षेत्रों में स्टील, ऑटोमोबाइल, फ्लाई-ऐश-सीमेंट और कंटेनर शामिल हैं। हम उद्योग जगत का आह्वान करते हैं कि वह रेल के माध्यम से परिष्कृत इस्पात की ढुलाई में वृद्धि करने की दिशा में अपने सामने आने वाली कठिऩाइयों के बारे में बताएं तथा नए प्रकार के वैगनों के डिजाइन और मौजूदा वैगनों के डिजाइन के लिए आवश्यक परिवर्तन-नवोन्मेष के बारे में अपनी अपेक्षाओं से हमें अवगत कराएं। हम उद्योग जगत को सामूहिक रूप से विचार-विमर्श करने और ढुलाई में त्वरित वृद्धि के लिए प्रभावी समाधान प्रस्तुत करने के लिए भी आमंत्रित करते हैं। 
          इस अवसर पर रेल राज्य मंत्री राजेन गोहिन ने कहा कि सभी हितधारकों को एक मंच पर लाना एक अच्छी पहल है, ताकि नए वैगन डिजाइन परिवहन मॉडलों की आवश्यकता के अनुसार तलाशने के लिए सभी अपने अनुभव साझा कर सकें। इस सम्मेलन की बदौलत उपभोक्ता उद्योग जगत और रेलवे के बीच सक्रिय विचार-विमर्श हो सकेगा। 
            भारतीय रेलवे लम्बे अरसे तक ज्यादातर माल ढुलाई परंपरागत खुले और ढके वैगनों के माध्यम से करता रहा है। पिछले दो दशकों से जिंसों के आधार पर वैगनों को डिजाइन और संचालित करने के प्रयास किए जाते रहे हैं। इससे अन्य क्षेत्रों के यातायात को रेलवे की ओर आकर्षित करने में मदद मिली। ज्यादातर ग्राहक अपनी परिवहन संबंधी जरूरतों के सर्वोत्तम समाधान के लिए भारतीय रेलवे का रुख कर रहे हैं।
           ऑटोमोबाइल-कैरियर, कंटेनर, स्टील के लिए विशेष वैगन, सीमेंट, फ्लाई ऐश, धातु की तलछट की ढुलाई के लिए वैगन आदि इसके कुछ उदाहरण हैं। मौजूदा समय में इन सभी क्षेत्रों में, भारतीय रेलवे की सीमित मौजूदगी है। इनमें से प्रत्येक श्रेणी में वैगनों के कुछ डिजाइन उपलब्ध हैं और उनका इस्तेमाल कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में किया जा रहा है। 
          जिंस के मुताबिक वैगनों का उपयोग करते हुए उद्योग जगत को पर्याप्त अनुभव प्राप्त हुआ है। वैगन डिजाइन में बदलाव और सुधार के लिए समय-समय पर सुझाव मिलते रहे हैं। सभी हितधारकों को एक मंच पर लाना उचित समझा गया ताकि वैगन के मौजूदा डिजाइन और उससे संबंधित परिवहन मॉडलों में सुधार लाने के लिए उनके समृद्ध अनुभवों का लाभ उठाया जा सके। 
           इस सम्मेलन का लक्ष्य ग्राहकों, वैगन मालिकों, डिजाइनरों, वैगन निर्माताओं और माल ढुलाई से संबंधित रेलवे के अधिकारियों को एक मंच पर लाना है। उम्मीद है कि इस सम्मेलन के दौरान नए और नवोन्मेषी विचार सामने आएंगे, उन पर विचार-विमर्श होगा तथा वे विचार वैगन के डिजाइन में सुधार के रूप में परिणत होंगे। इसके अलावा यह उपभोक्ताओं को लाभ पहुंचाने के लिए वैगन डिजाइनरों और विनिर्माताओं के लिए रोड मैप भी तैयार करेगा।

मध्यप्रदेश,राजस्थान,उत्तरप्रदेश व गुजरात में नदियो के जल स्तर में वृद्धि पूर्वानुमान

      मौसम विभाग द्वारा अगले तीन दिनों के लिए जारी बारिश के पूर्वानुमान के अनुसार पूर्वी और पश्चिमी मध्यप्रदेश में भारी से बहुत भारी वर्षा और एक दो स्थानों पर बहुत अधिक वर्षा होगी। 

     इसके कारण मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, राजस्थान, और गुजरात में नर्मदा, केन, बेतवा, चंबल और इसकी सहायक नदियों माही और साबरमती में जल स्तर बढ़ने की संभावना है। वर्तमान में जल स्तर खतरे के निशान से नीचे है, लेकिन भारी बारिश के पूर्वानुमान के चलते नदियों के क्षेत्रों में जल स्तर में तेजी से वृद्धि होने की संभावना है। नर्मदा बेसिन-मध्य प्रदेश मे होशंगाबाद, बेतुल,रायसेन, सीहोर,खंडवा,खारगौन के कुछ भाग, देवास, इंदौर और धार पश्चिमी नीमर और झबुआ तथा गुजरात में धूलिया, नर्मदा, भडूच और वडोदरा जिले के कुछ भाग।
      केन बेसिन-मध्य प्रदेश के जबलपुर,सागर,दमोह,पन्ना,सतना, छतरपुर और रायसेन जिले तथा उत्तरप्रदेश के हमीरपुर और बांदा जिले। बेतवा बेसिन- मध्यप्रदेश के टीकमगढ़, सागर, विदिशा, रायसेन,भोपाल,शिवपुरी और छतरपुर जिले तथा उत्तरप्रदेश के हमीरपुर, जालौन, झांसी और बांदा जिले। 
       चंबल बेसिन-मध्य प्रदेश के इंदौर,उज्जैन, रतलाम, मंदसौर और नीमच तथा राजस्थान के कोटा और झालावार जिले। माही बेसिन-मध्य प्रदेश के झबुवा, धार और रतलाम जिले तथा मध्यप्रदेश के उदयपुर, डुगरपुर और बांसवाडा जिले तथा गुजरात के पंचमहल माही सागर और खेड़ा जिले।
       साबरमती बेसिन-राजस्थान के उदयपुर सिरोही, पाली और डुंगरपुर जिले तथा गुजरात के साबरकांठा, मेहसाना, अहमदाबाद,गांधीनगर और खेडा जिले।
      चंबल, बेतवा, माही और साबरमती बेसिन के बांधो में जल स्तर में तेजी से वृद्धि हो सकती है, लेकिन इन बांधो मे पर्याप्त भंडारण उपलब्ध होने के कारण निचले इलाकों में वर्षा और नदियों के स्तर के आधार पर जल स्तर सावधानी पूर्वक छोड़ा जा सकता है।

  

राष्‍ट्रपति ने प्रेजीडेन्‍ट्स लेडी की पहली प्रति प्राप्‍त की

       राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अपनी स्‍वर्गीय पत्‍नी श्रीमती सुबरा मुखर्जी पर लिखी गई पुस्‍तक प्रेजीडेन्‍ट्स लेडी (प्राणाबर प्रेयसी) की पहली प्रति उपराष्‍ट्रपति मोहम्‍मद हामिद अंसारी से प्राप्‍त की।

      अंसारी ने राष्‍ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में इस पुस्‍तक का विमोचन किया। इस अवसर पर राष्‍ट्रपति ने कहा कि वे पुस्‍तक की लेखिका सुश्री संगीता घोष और उन सभी लोगों के आभारी हैं, जिन्‍होंने इसे प्रकाशित करने में सहयोग दिया। 
      उन्‍होंने कहा कि स्‍वर्गीय श्रीमती सुबरा मुखर्जी एक ऐसा व्‍यक्तित्‍व थीं, जिन्‍हें संगीत (विशेषकर रवीन्‍द्र संगीत) और चित्रकारी में काफी दिलचस्‍पी थी। 
       उन्‍होंने कहा कि स्‍वर्गीय मुखर्जी राजनीति में नहीं रहीं, लेकिन अनेक राजनीतिक हस्तियों से परिचित थीं। फिर भी उन्‍होंने खुद को संगीत, चित्रकारी और लेखन तक सीमित रखा।
        उन्‍होंने रवीन्‍द्र संगीत को गैर बांग्‍ला दर्शकों तक पहुंचाने का प्रयास किया। राष्‍ट्रपति ने उन सभी लोगों को शुभकामनाएं दीं, जिनकी मदद से पुस्‍तक प्रकाशित हो सकी। उप राष्ट्रपति एम. हामिद अंसारी ने कहा कि श्रीमती सुरवा मुखर्जी ने देश की पहली महिला होने के नाते इस स्थान की गरिमा को बढ़ाया है।
     उन्होंने यह बात सुश्री संगीता घोष द्वारा लिखित पुस्तक प्रेसिडेंट्स लेडी के विमोचन के बाद इस अवसर पर मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए कही। इस अवसर पर उन्होंने पुस्तक की पहली प्रति राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को सौंपी।
       उप राष्ट्रपति ने कहा कि श्रीमती मुखर्जी एक संगीत कलाकार, एक चित्रकार, एक लेखक, एक मां और देश के सर्वोच्च पद को ग्रहण करने वाले भारत के राष्ट्रपति की जीवन संगिनी थी।
           उन्होंने कहा कि पुस्तक का यह अंक श्रीमती मुखर्जी के उल्लेखनीय व्यक्तित्व और मानवीय दृष्टिकोण को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक अद्भुत और प्रतिभाशाली व्यक्ति के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।