Sunday, 23 April 2017

अरुणाचल में भारतीय फिल्‍म एवं टेलीविजन संस्‍थान की स्थापना

              सूचना एवं प्रसारण मंत्री एम वेंकैया नायडू ने कहा है कि पूर्वोत्तर क्षेत्र में समग्र संचार दृष्टिकोण हेतु सूचना और प्रसारण मंत्रालय के लिए कौशल विकास पहली प्राथमिकता वाला क्षेत्र होगा। यह पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई सरकारी एक्ट ईस्ट पॉलिसी का पूरक होगा। इससे मीडिया और मनोरंजन के क्षेत्र में प्रतिभाओं को आगे आने का मौका मिलेगा।


          अरुणाचल प्रदेश में प्रस्तावित भारतीय फिल्‍म और टेलीविजन संस्‍थान और आइजोल में भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) के स्थायी कैंपस स्थापित होने से युवा आबादी को उनकी जरूरतों और आकांक्षाओं अनुरूप गुणवत्ता परक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। यह बात मंत्री ने गुवाहाटी में मंत्रालय के अधिकारियों के साथ पूर्वोत्तर के लिए शुरू किये गए कार्यक्रमों और नीतियों की समीक्षा के लिए आयोजित बैठक के दौरान कही। 

               इस अवसर पर असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवल, पूर्वोत्तर क्षेत्र के अधिकारियों के साथ मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। नायडू ने आगे कहा कि, कोलकाता स्थित सत्यजीत रे फिल्म और टेलीविजन संस्थान के विस्तारित परिसर के रूप में, अरुणाचल प्रदेश में भारतीय फिल्‍म और टेलीविजन संस्‍थान की स्थापना की जाएगी। इसका परिसर 50 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैला होगा और इसकी लागत 200 करोड़ रूपए होगी। यह इस क्षेत्र में फिल्म निर्माण के विभिन्न पहलुओं में प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के लिए एक उत्प्रेरक के रूप में कार्य करेगा। मंत्री ने आइजोल में भारतीय फिल्‍म और टेलीविजन संस्‍थान(आईआईएमसी) के स्थायी परिसर की स्थापना का भी उल्लेख किया। 

              आईआईएमसी को पूर्वोत्तर क्षेत्र और दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के मीडिया प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। संस्थान को 25 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से विकसित किया जाएगा। सार्वजनिक प्रसारणकर्ता की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों का उल्लेख करते हुए नायडू ने कहा सरकार के विकास कार्यक्रमों, विशेषकर पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए बनाए गए कार्यक्रमों और नीतियों का प्रचार- प्रसार करना महत्वपूर्ण है। मंत्री ने कहा कि शांति ही इस क्षेत्र में विकास का एकमात्र रास्ता है और आतंकवाद तथा उग्रवाद विकास विरोधी है। उन्होंने कहा कि समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचने के लिए स्थानीय बोलियों और भाषाओं में कार्यक्रमों को विकसित करना आवश्यक है।

              उन्होंने बताया कि वर्तमान में लोगों के साथ बेहतर संबंध बनाने के लिए आकाशवाणी पूर्वोत्तर क्षेत्र से संबंधित 28 बोलियों में प्रसारण करता है। सामुदायिक रेडियो के बारे में बात करते हुए मंत्री ने कहा कि हाल ही में मंत्रालय ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में सामुदायिक रेडियो स्टेशन स्थापित करने के लिए सब्सिडी स्तर को 90ऽ तक बढ़ा दिया है। सामुदायिक रेडियो स्टेशन उन मुद्दों पर कार्यक्रमों को प्रसारित कर रहे हैं जो समुदायों के लिए तत्काल प्रासंगिक हैं। इन कार्यक्रमों में शिक्षा, ग्रामीण विकास, कृषि, स्वास्थ्य, पोषण पर्यावरण, समाज कल्याण, पंचायती राज के मुद्दों और सांस्कृतिक आवश्यकताओं से संबंधित जानकारी प्रसारित की जाती है। 

            मंत्रालय द्वारा पूर्वोत्तर क्षेत्र में आयोजित किए गए विभिन्न फिल्म समारोहों पर प्रकाश डालते हुए नायडू ने कहा कि इस क्षेत्र में शांति और विकास के संदेश को भेजने के लिए सिनेमा एक शक्तिशाली माध्यम रहा है। हाल ही में गुवाहाटी में संपन्न हुए राष्ट्रीय बाल फिल्म महोत्सव (एनसीएफएफ), में चिल्ड्रंस फिल्म सोसाइटी ऑफ इंडिया की सूची से मूल्य आधारित पुरस्कार जीतने वाली फिल्मों को प्रदर्शित किया गया था।

वैश्विक आपूर्ति प्रणाली का एक अहम हिस्सा रेलवे

         रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने नयी दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में रेलवेज सिग्नल और दूरसंचार में आधुनिक तकनीक अपनाये जाने तथा उसके स्थायित्व पर एक दिवसीय कार्यशाला का उद्घाटन किया।

       इस अवसर पर सुरेश प्रभाकर प्रभु ने कहा, "सिग्नल और टेलीकॉम क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति हुयी और डिजिटल तकनीक के आने से सिग्नल तथा टेलीकॉम क्षेत्र में नये आयाम आये हैं। मेक इन इंडिया भारत सरकार का एक अहम कार्यक्रम है। रेलवे की इस कार्यक्रम में बड़ी भूमिका है। बिहार में लोको उत्पादन की मेक इन इंडिया कार्यक्रम के तहत वैश्विक आपूर्ति में बड़ी हिस्सेदारी है। इस कार्यक्रम के तहत आपूर्ति प्रणाली और रोजगार के अवसरों का सृजन हुआ है। गुणवत्ता का सृजन और आपूर्ति प्रणाली का विकास उसी तरह से दो अलग चीजे हैं जैसे कि मेक इन इंडिया और डेवलप इन इंडिया।

            भारत में तकनीक के विकास से गुणवत्ता के सृजन में सहायता मिलती है। इसलिये यह हमारी प्राथमिकता होनी चाहिये। शोध और विकास को बढ़ावा देने से भारत में तकनीक के विकास में मदद मिलेगी। शोध और विकास बढ़ाने का सीधा मतलब गुणवत्ता बढ़ाना है। दूरसंचार के क्षेत्र में अत्याधुनिक तकनीक का विकास हमारी प्राथमिकता होना चाहिये। हमें रेलवे को वैश्विक आपूर्ति प्रणाली का एक अहम हिस्सा बनाना है। हमारा ध्यान इस बात पर होना चाहिये कि 2022 का भारत कैसा होगा? । उद्घाटन सत्र के बाद दो तकनीकी सत्र आयोजित किये गये जिनमें प्रत्येक में 5 तकनीकी पेपर प्रस्तुत किये गये। 

           पहले सत्र में कौशल विकास और दूसरे सत्र में आत्म निर्भरता पर पेपर प्रस्तुत किये गये। पहले तकनीकी सत्र में भारतीय रेलवे, मेसर्स केनेस, मेसर्स टीसीएस, मेसर्स हिटाची और आईआईटी खड़गपुर के विशेषज्ञों ने पेपर प्रस्तुत किये। दूसरे तकनीकी सत्र में मेसर्स फ्रॉश्चर, मेसर्स टीएसटीएस, मेसर्स अन्साल्डो, मेसर्स थेल्स और मेसर्स हिमा, जर्मनी ने पेपर प्रस्तुत किये जिसके बाद प्रश्नोत्तर का सत्र हुआ। जिसमें कौशल विकास और मेक इन इंडिया चर्चा के मुख्य बिंदु थे। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष ए.के. मित्तल, बोर्ड के अन्य सदस्य, वरिष्ठ रेल अधिकारी, क्षेत्रीय रेलवेज के प्रतिनिधि और दूरसंचार उद्योग के प्रतिनिधियों ने कार्यशाला में भाग लिया।

          कार्यशाला का आरंभ रेलवे बोर्ड चेयरमैन ए.के. मित्तल और अखिल अग्रवाल डीजी (एस एवं टी) के संबोधन से हुआ। कार्यशाला का आयोजन आईआरएसटीई और रेलटेल ने भारतीय रेलवे की तरफ से संयुक्त रूप से किया था।