Sunday, 5 March 2017

भारत व ग्रीस के बीच हवाई सेवा समझौता

             प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत और ग्रीस के बीच एयर सर्विसेज एग्रीमेंट (एएसए) पर हस्‍ताक्षर करने को मंजूरी दी है। 

         इस समझौते में दोनों देशों के बीच अधिक से अधिक व्‍यापार, निवेश, पर्यटन और सांस्‍कृतिक आदान-प्रदान को प्रोत्‍साहित करने की क्षमता है ताकि उन्‍हें नागरिक विमानन क्षेत्र में हुए विकास से जोड़ा जा सके। यह दोनों पक्षों की विमानन कंपनियों को वाणिज्यिक अवसर मुहैया कराते समय जबरदस्‍त सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए बेहतर एवं निर्बाध कनेक्टिविटी के अनुकूल वातावरण मुहैया कराएगा।  समझौता, दोनों देश एक या अधिक विमानन कंपनी को नामित करने के हकदार होंगे। हरेक देश की नामित विमानन कंपनी को दूसरे देश के परिक्षेत्र में अपना कार्यालय खोलने का अधिकार होगा ताकि वह अपनी हवाई सेवाओं की बिक्री को बढ़ावा दे सके। दोनों देशों की नामित विमानन कंपनियों को विनिर्दिष्‍ट मार्गों पर सहमति के साथ सेवाओं के संचालन के लिए उचित एवं समान अवसर उप्‍लब्‍ध होंगे। प्रत्‍येक पक्ष की नामित विमानन कंपनी को समान पक्ष, अन्‍य पक्ष एवं तीसरे देश की नामित विमानन कंपनियों के साथ सहायक विपणन व्‍यवस्‍था करने का अधिकार होगा।

             रूट शिड्यूल के अनुसार, भारतीय विमानन कंपनियां एथेंस, थेसालोनिकी, हेराक्‍लॉयन और बाद में निर्धारित किए जाने वाले ग्रीस के किसी तीन शहरों के लिए भारत से उड़ान भर सकेंगी। जबकि यूनानी गणराज्‍य की विमानन कंपनियां नई दिल्‍ली, मुंबई, बेंगलूरु, कोलकाता, हैदराबाद और चेन्‍नई के लिए अपनी सीधी उड़ान सेवा शुरू कर सकती हैं। 

               भारत और ग्रीस के नामित विमानन कंपनियों के लिए मध्‍यवर्ती के तौर पर कोई भी शहर उपलब्‍ध रहेगा। वर्तमान में भारत और ग्रीस के बीच कोई एयर सर्विसेज एग्रीमेंट (एएसए) नहीं है। दोनों पक्षों के प्रतिनिधिमंडलों की बैठक 6-7 सितंबर 2016 को नई दिल्‍ली में हुई थी जिसमें एएसए की सामग्रियों को अंतिम रूप दिया गया था। यह समझौता इंटरनैशनल सिविल एविएशन ऑर्गेनाइजेशन (आईसीएओ) के ताजा दिशानिर्देश के तहत है। इसमें नागरिक विमानन क्षेत्र की ताजा घटनाक्रमों को ध्‍यान में रखा गया है। इसे दोनों देशों के बीच हवाई संपर्क में सुधार लाने के उद्देश्‍य से तैयार किया गया है।

फल-फूल रहा भारतीय पर्यटन, 15.5 प्रतिशत वृद्धि

              पर्यटन मंत्रालय आप्रवासन ब्‍यूरो तथा राज्‍यों/केंद्रशासित प्रदेशों से प्राप्‍त आंकड़ों के आधार पर राज्‍यों/केंद्रशासित प्रदेशों में पर्यटकों के आगमन और यात्रा की अनुमानों का संकलन करता है। 

           विदेशी पर्यटक आगमन (एफटीए) में जनवरी, 2015 की तुलना में जनवरी, 2016 की में 6.8 प्रतिशत की वृद्धि दर को लांघते हुए एफटीए जनवरी, 2016 की तुलना में जनवरी, 2017 के महीने में 16.5 प्रतिशत की वृद्धि मिली है। इसी तरह घरेलू पर्यटक यात्रा (डीटीवी) में 2016 में 2015 की तुलना में 15.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। डीटीवी के लिए प्रत्‍येक वर्ष पर्यटन मंत्रालय सभी राज्‍यों/केंद्रशासित प्रदेशों से प्राप्‍त इनपुट के आधार पर डाटा संकलन करता है। 

               पर्यटन मंत्रालय सभी राज्‍यों/केंद्रशासित प्रदेशों से प्रत्‍येक कैलेंडर वर्ष के लिए संपूर्ण आंकड़ा उत्‍तरवर्ती वर्ष के अप्रैल-मई महीने में प्राप्‍त होता है। अब पर्यटन मंत्रालय ने संबंधित राज्‍यों/केंद्रशासित प्रदेशों से अब तक उपलब्‍ध सूचना/डाटा के आधार पर और पर्यटन मंत्रालय के अनुमानों के आधार पर अस्‍थायी आंकड़ा पेश किया है। वर्ष 2016 के दौरान राज्‍यों/केंद्रशासित प्रदेशों में घरेलू पर्यटकों की संख्‍या 1653 मिलियन (अस्‍थायी) रही, जबकि यह संख्‍या 2015 में 1432 मिलियन थी। इस तरह इसमें 15.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्जकी गई।

               2016 में दस शीर्ष राज्‍यों/ केंद्रशासित प्रदेशों का योगदान कुल घरेलू पर्यटकों में 84.2 प्रतिशत रहा, जबकि यह 2015 में 83.62 प्रतिशत था। घरेलू पर्यटक आगमन संख्‍या तमिलनाडु (344.3), उत्तर प्रदेश (229.6), मध्य प्रदेश (184.7), आंध्र प्रदेश (158.5), कर्नाटक (129.8), महाराष्ट्र ( 115.4), पश्चिम बंगाल (74.5), तेलंगाना (71.5), गुजरात (42.8) और राजस्थान (41.5)। 2016 में घरेलू पर्यटक भ्रमण के मामले में क्रमश: तमिलनाडु और उत्‍तर प्रदेश ने प्रथम और दूसरा स्‍थान बनाए रखा है।

              मध्‍य प्रदेश तीसरे स्‍थान पर और आंध्र प्रदेश चौथे, कर्नाटक पांचवें तथा महाराष्‍ट्र छठे स्‍थान पर रहा। पश्‍चिम बंगाल ने तेलंगना को पछाड़ते हुए सातवां स्‍थान प्राप्‍त किया और तेलंगना 8वें स्‍थान पर रहा। उसके बाद गुजरात और राजस्‍थान रहे।

यूआईडीएआई नागरिक फ्रेंडली

                 भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के अनुसार पिछले पांच वर्षों के दौरान पहचान की चोरी और वित्‍तीय हानि की किसी भी घटना में आधार बायोमेट्रिक के दुरुपयोग किए जाने की जानकारी नहीं मिली है। इस दौरान आधार आधारित कोई 400 करोड़ लेन-देन का प्रमाणीकरण किया गया।

            पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और प्रिंट मीडिया में आधार डाटा के उल्‍लंघन, बायोमेट्रिक के दुरुपयोग , निजता का उल्‍लंघन और समानांतर बनाने आदि की गलत सूचनाएं और समाचार प्रकाशित किए जाने के संबंध में व्‍यापक स्‍पष्‍टीकरण देते हुए यूआईडीएआई ने कहा है कि इन सूचनाओं को सावधानीपूर्वक देखा गया है। हम बल पूर्वक कहते हैं कि यूआईडीएआई डाटा बेस का किसी भी प्रकार से कोई उल्‍लंघन नहीं हुआ है। यूआईडीएआई के पास जमा व्‍यक्तिगत डाटा पूरी तरह सुरक्षित है। यूआईडीएआई द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि किसी भी दूसरी समकक्ष प्रणाली की तुलना में आधार आधारित प्रमाणीकरण सुदृढ़ और सुरक्षित है। 

                 आधार प्रणाली किसी भी तरह के बायोमेट्रिक के दुरुपयोग की घटना की जांच और चोरी की पहचान कर कार्रवाई करने में सक्षम है। बयान के अनुसार यूआईडीएआई डाटा के पारेषण , भंडारण में दुनिया की सबसे उन्‍नत एन्क्रिप्शन प्रौद्योगिकी का प्रयोग करती है। इसी का परिणाम है कि पिछले सात सालों के दौरान यूआईडीएआई से किसी भी तरह का उल्‍लंघन या निवासियों के डाटा बाहर जाने की कोई घटना घटी है। बयान में यह भी बताया गया है कि साइबर स्‍पेस में खतरे को देखते हुए यूआईडीएआई अपनी सुरक्षा मापदंडों को लगातार अद्यतन करती है। यह अपनी सुरक्षा का परीक्षण करती है। 

             सुरक्षा विशेषताओं को बढ़ाने के लिए आवश्‍यक कदम उठाती है। यूआईडीएआई ने संग्रह प्‍वांइट पर बायोमेट्रिक और डाटा संग्रह करने वाले उपकरणों का पंजीकरण करने का फैसला लिया है। इससे आधा इको सिस्‍टम की सुरक्षा संबंधी गुण और मजबूत होगा।

अंतरआत्‍मा में मानवीय बुनियादी मूल्‍यों के प्रति गहरी प्रतिबद्धता

           राष्‍ट्रपति‍ प्रणब मुखर्जी ने अड्यार, चेन्‍नई में विमेंस इंडियन एसोसिएशन शताब्‍दी समारोह का उद्घाटन किया।

            इस मौके पर राष्‍ट्रपति ने कहा कि कोई भी समाज अपने आपको सभ्‍य नहीं कह सकते जो महिलाओं, बच्‍चों का सम्‍मान नहीं करते और उनकी सुरक्षा और बचाव के गारंटी नहीं लेते। सरकार द्वारा चलाए गए लैंगिक न्‍याय को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रम तब तक सफल नहीं हो सकते जब तक कि हमारी अंतरआत्‍मा में मानवीय बुनियादी मूल्‍यों के प्रति गहरी प्रतिबद्धता न हो। महिलाओं के प्रति हिंसा उनके खिलाफ, ऐसा कुकृत्‍य करने वालों के दिल और मस्‍तिष्‍क में व्‍याप्‍त हिंसा को परिलक्षित करता है। 

               इस मौके पर राष्‍ट्रपति ने विमेंस इंडियन एसोसिएशन की स्‍थापना में डॉ. एनी बेसेंट और श्रीमती सरोजनी नायडू को उनकी अग्रणी भूमिका के लिए याद किया। उन्‍होंने कहा कि विमेंस इंडियन एसोसिएशन की भूमिका लड़कियों की शादी की उम्र बढ़ाने, शारदा विधेयक- बाल विवाह निषेध अधिनियम को लागू कराने और देवदासी प्रथा को समाप्‍त कराने में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाई है। 

            उन्‍होंने कहा कि विमेंस इंडियन एसोसिएशन की और अधिक शाखाएं अपने अनुसार, समाज में परिवर्तन लाने के लिए अन्‍य सामाजिक कारणों को प्रतिबद्धता और उत्‍साह के साथ कर रही हैं। उन्‍होंने विश्‍वास जताया कि विमेंस इंडियन एसोसिएशन देश की महिलाओं की सामूहिक आकांक्षाओं को साकार करने में अपनी अग्रणी भूमिका जारी रखेगा।

गांधीवादी मॉडल ही सबसे अच्‍छा

              राष्‍ट्रप‍ति प्रणब मुखर्जी ने राष्‍ट्रपति भवन में नवाचार महोत्सव’ के पहले दिन 9वें राष्‍ट्रीय द्विवार्षिक जमीनी स्‍तर पर नवाचार और उत्‍कृष्‍ट परंपरावादी ज्ञान पुरस्‍कार का वितरण किया। ‘ नवाचार महोत्सव’ सप्‍ताह भर चलेगा। 

             इस मौके पर राष्‍ट्रपति ने कहा कि वैश्विक आर्थिक व्‍यवस्‍था अभी कमजोर है और उभरती हुई आर्थिक व्‍यवस्‍था में भी औद्योगिक वृद्धि की प्रकृति बेरोजगारी पैदा करने वाली है। इस परिदृश्‍य में विकेंद्रीकृत, वितरित और विविध नवाचार पर आधारित उद्यम ही आने वाले दिनों की समस्‍याओं को हल करने का सर्वश्रेष्‍ठ रास्‍ता है। गांधी जी हमेशा आधुनिक विज्ञान और तकनीक के साथ सामुदायिक ज्ञान और संस्‍थाओं के तालमेल बैठाने के पक्षधर थे। आज के संदर्भ में उनका संदेश बहुत ही प्रासंगिक हो गया है। उन्‍होंने कहा कि समावेशी नवाचार के साथ पारिस्थितिकी को समृद्ध बनाने के लिए निजी और सार्वजनिक प्रणाली को जमीनी नवाचार का प्रबल समर्थक बनाने की जरूरत है। 

            इसे हमें न सिर्फ अपने देश के लिए करने की जरूरत है, बल्कि पूरे विश्‍व के लिए। देश में अनूपम नवाचार पारिस्थितिकी का उभार भारत के लिए उपयुक्‍त साबित हो रहा है। इस दिशा में सरकार और सिविल सोसायटी द्वारा कई कदम उठाए गए हैं। अभी अनेक कदम उठाए जाने की जरूरत है। देश में जमीनी स्‍तर और समावेशी नवाचार की दिशा में समारोह की भावना पैदा करने के लिए राष्‍ट्रपति भवन में आयोजित सप्‍ताह भर चलने वाला नवाचार प्रदर्शनी नवाचार महोत्‍सव बन गया है। 

               उन्‍होंने कहा‍ कि बच्‍चों में वैज्ञानिक उत्‍सुकता की भावना को पैदा करना बहुत ही महत्‍वपूर्ण है। हमें उनकी जिज्ञासा और रचनात्‍मकता को बढ़ावा देना चाहिए। हम सब को उन्‍हें कुछ नया करने में मदद करनी चाहिए। देश स्‍टार्ट अप इंडिया, डिजिटल इंडिया और स्‍वच्‍छ भारत जैसे पहलों का लाभ लेने के लिए तैयार है। नवाचार कर्मियों के विचार तभी वास्‍तविक बदलाव ला सकते हैं जब हम और सभी संस्‍थाएं अपनी –अपनी भूमिका देश में संवेदनशीलता और सृजनशीलता के लिए मिल कर काम करेंगे।

डिजिटल भुगतान : लघु एवं मंझोले व्‍यापारियों के प्रशिक्षण

                 केन्‍द्रीय इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स एवं सूचना प्रद्यौगिकी और विधि एवं न्‍याय मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने समाज के सभी वर्गो का अह्वान कि वे डिजिटल लेन-देन को अपने जीवन में अपनाएं। वे स्‍व संगठित लघु एवं मंझोले बिजनेस को इसमें शामिल करने / डिजिटल भुगतान पहल पर लघु एवं मंझोले व्‍यापारियों के प्रशिक्षण के उद्घाटन के मौके पर बोल रहे थे। 

            यह परियोजना केन्‍द्रीय इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स एवं सूचना प्रद्यौगिकी मंत्रालय द्वारा राष्‍ट्रीय इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स एवं सूचना प्रद्यौगिकी संस्‍थान ( एनआईईएलआईटी) को सौंपी गई है। उन्‍होंने कहा कि ‍सिस्‍टम में पारद‍र्शिता को शामिल करने का उद्देश्‍य सिस्‍टम में पारदर्शिता लाना और भ्रष्‍टाचार की लहर को समाज के सभी वर्गों के बीच भागीदारी का विकास कर कम करना है। इसके अलावा मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत को डिजिटलीकरण के क्षेत्र में एक अग्रणी देश बनने का संकल्‍प लिया है जो विकासशील देशों के लिए एक रोल मॉडल के रूप में काम करेगा। 

             उन्‍होंने कहा कि इस उद्देश्‍य को पूरा करने का काम मंत्रालय का है। इस तरह के प्रशिक्षण का उद्देश्‍य यूपीआई ,यूएसएसडी, बीबीपीएस, एईपीएस आदि को समझना, अपनाना और इन्‍हें सरल बनाना है ताकि सुविधाजनक तरीके से डिजिटल आर्थिक व्‍यवस्‍था कायम हो सके तथा क्षमता निर्माण के माध्‍यम से व्‍यापारियों तक डिजिटल बिजनेस के लाभ पहुंच सके।

             करीब 13500 लघु और मंझोले  असंगठित / स्‍व संगठित बिजनेस/  व्‍यापारियों को इस तरह का प्रशिक्षण देने का लक्ष्‍य तय किया गया है। एनआईईएलआईटी पांच क्षेत्रीय कार्यशालाओं का दिल्‍ली, जयपुर, कोलकाता, मुंबई, चेन्‍नई और 30 राज्‍य स्‍तरीय कार्याशालाओं तथा 100 दिग्‍ग्‍ीधन कैम्‍पों का आयोजन करेगा।                   

पंजाब व जम्‍मू एवं कश्‍मीर के बीच समझौता

          सिंधु बेसिन की पूर्वी नदियों पर भारतीय अधिकारों के उपयोग करने की दिशा में जल संसाधन मंत्रालय के मध्‍यस्‍थता प्रयासों को एक बड़ी सफलता हासिल हुई है। 

          मंत्रालय के आरडी एवं जीआर ने पंजाब और जम्‍मू एवं कश्‍मीर दोनों राज्‍यों को इस बात के लिए राजी कर लिया है कि पंजाब व जम्‍मू एवं कश्‍मीर के शाहपुर कंडी बांध पर काम जल्‍दी ही फिर से शुरू हो। इस आशय के एक समझौते पर पंजाब के सिंचाई सचिव के.एस. पन्‍नू और जम्‍मू एवं कश्‍मीर के सिंचाई सचिव सौरभ भगत के बीच जल संसाधन सचिव डॉ. अमरजित सिंह की उपस्थिति कल शाम हस्‍ताक्षर किए गए। इस परियोजना की लागत 2285.81 करोड़ रुपए (अप्रैल,2008 के कीमत स्‍तर पर ) थी। राष्‍ट्रीय परियोजना में भारत सरकार द्वारा शामिल कर लिया गया था। 

          सिंचाई और जलापूर्ति घटक के कार्यों के लिए बची लागत के लिए जल संसाधन मंत्रालय, आरडी एवं जीआर 90 प्रतिशत केन्‍द्रीय सहायता प्रदान करता है। शाहपुर कंडी परियोजना को निर्माण मई,1999 में शुरू हो गया लेकिन दोनों राज्‍यों के बीच कुछ विवाद पैदा हो जाने के कारण इसका काम वर्ष 2014 में रोक दिया गया। जल संसाधन मंत्रालय, आरडी एवं जीआर द्वारा दोनों राज्‍यों के बीच विवाद सुलझाने का हर संभव प्रयास किया गया। इसका सुखद परिणाम कल पंजाब और जम्‍मू कश्‍मीर के बीच समझौते के रूप में निकला। 

              परियोजना के स्‍वरूप पर दोनों राज्‍यों के बीच पहले से ही सहमति लगती है जबकि जम्‍मू एवं कश्‍मीर के 1150 क्‍यूसेक पानी की आवश्‍यक हिस्‍सेदारी के लिए समवर्ती मॉडल का अध्‍ययन किया जाएगा जो दोनों रज्‍यों के लिए बाध्‍यकारी होगा। परियोजना का क्रियान्‍वयन पंजाब सरकार द्वारा जारी रखा जाएगा लेकिन परियोजना की निगरानी के लिए सीडब्‍ल्‍यूसी की अध्‍यक्षता में एक त्रिपक्षीय समिति की व्‍यवस्‍था होगी जो जरूरी होने पर तथा कम से कम महीने में एक बार बैठक करेगी। इस त्रिपक्षीय समिति में अन्‍य दो सदस्‍य पंजाब और जम्‍मू एवं कश्‍मर के दोनों मुख्‍य इंजीनियर होंगे।

           इस समझौते के अनुसार थेइन बांध के लिए भूमि अधिग्रहण के एवज में बकाये मुआवजे की राशि का भगुतान पंजाब सरकार तत्‍परता से करेगी। साथ ही दोनों राज्‍यों के पी एंव आर समझौते के अनुसार पलायन के शिकार लोगों को भी पंजाब सरकार रोजगार मुहैया कराएगी।

जल क्रांति अभियान पर राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन

            जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय द्वारा राजधानी में 07 मार्च, 2017 को जल क्रांति अभियान पर एक राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन का आयोजन किया जाएगा।

           इस सम्‍मेलन का उद्घाटन जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री सुश्री उमा भारती करेंगी। जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण राज्‍य मंत्री डॉ. संजीव कुमार बालियान और विजय गोयल भी सम्‍मेलन में भाग लेंगे। देशभर के विभिन्‍न हितधारक समूहों जैसे किसान, पंचायत सदस्‍य, अधिकारी, गैर सरकारी संगठन के प्रतिनिधियों और छात्रों सहित 700 प्रतिभागी इस एक दिवसीय सम्‍मेलन में भाग लेंगे। 

             जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री सुश्री उमा भारती ने देशभर में एक समग्र एकीकृत दृष्टिकोण के माध्‍यम से सभी हितधाकरों को शामिल कर जन आंदोलन द्वारा जल संरक्षण और प्रबंधन को संघटित करने के लिए 05 जून, 2015 को जल क्रांति अभियान का शुभारंभ किया था। जल क्रांति अभियान का मुख्‍य  उद्देश्‍य ‘ सहभागी सिंचाई प्रबंधन के लिए पंचायती राज संस्‍थाओं और स्‍थानीय इकाइयों सहित जमीनी स्‍तर पर सभी हितधारकों की भागीदारी को सुदृढ़ करना है। 

            जल क्रांति के चार घटक हैं। इनमें जल ग्राम योजना, मॉडल कमांड क्षेत्र का विकास , प्रदूषण को रोकना  और जन जागरूकता पैदा करना शामिल है। 

ग्राम जल योजना के तहत देश भर के प्रत्‍येक जिले के जल संकट से प्रभावित दो गांवों का चयन कर उनके लिए समग्र जल सुरक्षा योजना को सूत्रबद्ध करना है। 828 ऐसे गांवों की पहचान करने का लक्ष्‍य है। अब तक 726 गांवों की पहचान कर ली गई है,  साथ ही 180 गांवों के लिए समेकित जल सुरक्षा योजना तैयार कर ली गई है। इनमें से 61 योजनाओं को मंजूरी दे दी गई है।

हरियाणा के गोरखपुर में परमाणु संयंत्र की स्‍थापना                                       

                केंद्रीय पूर्वोत्‍तर क्षेत्र विकास राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) ,प्रधानमंत्री कार्यालय , कार्मिक , लोक शिकायत , पेंशन और परमाणु ऊर्जा एवं  अंतरिक्ष राज्‍य मंत्री डॉ: जितेंद्र सिंह ने कहा कि हाल के वर्षों में केंद्र सरकार ने परमाणु कायर्क्रम को उत्‍तर भारत में लाया है ।

            इससे पहले परमाणु कार्यक्रम दक्षिणी और पश्चिमी राज्‍यों या फिर देश के मध्‍य भाग में ही सीमित थे। परमाणु खनिज अनुसंधान एवं अन्‍वेषण निदेशालय के केंद्रीय क्षेत्रीय मुख्‍यालय, नगापुर के अपने दौरे के दौरान डॉ. सिंह ने कहा कि पिछले दो सालों से हरियाणा के गोरखपुर में परमाणु संयंत्र की स्‍थापना की जा रही है। इसके दो – तीन साल में चालू हो जाने के बाद इससे कम कीमत,  प्रति यूनिट 6 रुपये की दर से बिजली पैदा करने में हम सक्षम हो जाएंगे। साथ ही उन्‍होंने यह भी कहा कि राजधानी के प्रगति मैदान में एक न्‍यूक्लियर हॉल बनाने की पहल की गई है। उन्‍होंने बताया कि परमाणु ऊर्जा विभाग का मुख्‍यालय मुंबई में है। 

               परमाणु ऊर्जा संबंधी अधिकतर कार्यक्रम दक्षिणी एवं पश्चिमी राज्‍यों में ही सीमित हैं। इसलिए सरकार द्वारा परमाणु काय्रक्रमों में किए जा रहे विस्‍तार और अन्‍य पहलों के बारे में आम लोगों को बताने के लिए प्रगति मैदान में इस तरह के हॉल बनाने की पहल की गई है। डॉ. सिंह ने कहा कि परमाणु कार्यक्रमों की शुरुआत इसके जनक डॉ. होमी जहंगीर भाभा द्वारा शांतिपूर्ण उद्देश्‍यों के लिए किया गया था। आज वर्तमान सरकार के शासन काल में उनके उद्देश्‍य का सही प्रतिपालन हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विचार –विमर्श को अपने एजेंडे में प्राथमिकता दी है। वे अपने हर विदेशी दौरे में कई समझौते किए हैं। सरकार और प्रधानमंत्री के इन प्रयासों से परमाणु कार्यक्रम बढ़े हैं।

                भारतीय परमाणु वैज्ञानिकों का हौसला ऊंचा हुआ है। उन्‍होंने कहा न सिर्फ इतना बल्कि केंद्र सरकार ने लीक से हटकर पीयूएस के लिए भारतीय परमाणु ऊर्जा कॉरपोरेशन लिमिटेड(एनपीसीआइएल) के साथ भागीदारी कर संयुक्‍त उपक्रम स्‍थापित करने का भी निर्णय लिया है। इस मौके पर एएमडी के निदेशक डॉ. एल .के. नंदा ने पावर प्‍वाइंट प्रस्‍तुति के माध्‍यम से विभिन्‍न क्षेत्रों और राज्‍यों में यूरेनियम के नए भंडार की खोज के लिए चल रही गतिविधियों के बारे में बताया। इन राज्‍यों एवं क्षेत्रों में चंडीगढ़, ओडिशा  और मेघालय शामिल हैं।

             अपने दौरे में डॉ. जितेंद्र सिंह ने एएमडी में काम करने वाले वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को बधाई दी। कहा कि आज हमारे पास यूरेनियम का पर्याप्‍त भंडार उपलब्‍ध है। जिसमें आने वाले दिनों में कई गुना वृद्धि होगी। उन्‍होंने यह भी कहा कि सरकार देश के वैसे भागों में भी यूरेनियम की खोज करने की इच्‍छुक है। जिन क्षेत्रों में अब तक इस तरह की कोई गतिविधियां शुरू नहीं की गई हैं।

भारत-कनाडा व्‍यापार व निवेश संबंध

           भारत की यात्रा पर आए कनाडा के अंतर्राष्‍ट्रीय व्‍यापार मंत्री फ्रैंकोइस-फिलिप चैंपाग्‍ने व वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण के बीच नई दिल्‍ली में एक द्विपक्षीय बैठक हुई। दोनों मंत्रियों ने जनवरी, 2017 में डावोस में विश्‍वआर्थिक मंच की बैठक के अवसर पर दोनों देशों के बीच हुए विचार-विमर्श को आगे बढ़ाया। 

            बातचीत में दोनों देशों के बीच आपसी व्‍यापार और निवेश का विस्‍तार करने पर ध्‍यान केंद्रित किया गया। दोनों मंत्रियों ने इस बात पर सहमति व्‍यक्‍त की कि द्विपक्षीय निवेश प्रोत्‍साहन और संरक्षण समझौता (बीआईपीपीए) और व्‍यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (सीईपीए) को मुकाम तक पहुंचाने के काम में तेजी लाई जाए। कनाडा के व्‍यापार मंत्री ने बैठक में बताया कि कनाडा के पेंशन फंड भारतीय बाजार में निवेश के इच्‍छुक हैं। उन्‍होंने एफआईपीएकी आवश्‍यकता पर बल दिया, जिससे निवेश को भरोसा और संरक्षण प्राप्‍त हो सकेगा। 

            सर्वाधिक वरीयता वाले देश का दर्जा यानी एमएफएन, रैचिट, आईएसडीएस जैसे मुद्दों के बारे में वाणिज्‍य मंत्री श्रीमती सीतारमण ने स्‍पष्‍ट किया कि बातचीत परिधीय मुद्दों में नहीं अटकनी चाहिए। इसमें प्रोत्‍साहन और संरक्षण जैसे मुद्दों पर ध्‍यान केंद्रित किया जाना चाहिए। इससे दोनों देशों के बीच निवेश को स्थिरता और विश्‍वसनीयता प्राप्‍त होगी। उन्‍होंने कहा कि भारत ने नमूने के रूप में मॉडल टेक्‍स्‍ट का अनुमोदन कर दिया है। एफआईपीए संबंधित बातचीत मॉडल टेक्‍सट के अनुसार आगे बढ़नी चाहिए। परंतु दोनों देशों को समझौते के लिए बातचीत करते समय निवेश संरक्षण के अनिवार्य तत्‍वों को शामिल करने पर लचीला रूख अपनाना चाहिए। 

                   वाणिज्‍य-उद्योग मंत्री श्रीमती सीतारामण ने स्‍थायी विदेशी श्रमिक कार्यक्रम में सुधारों का मुद्दा भी उठाया जिसे कनाडा ने अधिक सख्‍त बना दिया है और उसका भारत से सेवा व्‍यापार पर दुष्‍प्रभाव पड़ा है। उन्‍होंने ढांचागत कंपनी हस्तांतरितियों के लिए अल्‍पवावधि वीजा पर आवागमन आसान बनाने के महत्‍व पर विचार किया। उन्‍होंने कुछ भारतीय कंपनियों के उदाहरण दिए जिन्‍होंने कनाडा में निवेश किया है लेकिन उनके लिए इंट्रा–कंपनी हस्तांतरितियों के रूप में भारत से कर्मचारी जुटाना कठिन है। कनाडा के व्‍यापार मंत्री ने कहा कि कनाडा में व्‍यवसाइयों के आवागमन को आसान बनाने के लिए अनेक उपाय किए गए हैं। 

            उन्‍होंने ग्‍लोबल स्किल स्‍ट्रैटेजी प्रोग्राम के अंतर्गत हाल में किए गए उपायों की चर्चा की जिनमें उच्‍च प्रशिक्षित तकनीशियनों प्रोफ्रेसरों, अनुसंधानकर्ताओं आदि को दो हफ्ते के भीतर वीजा देने का प्रावधान है। उन्‍होंने कहा कि एक वर्ष से कम समय के लिए कनाडा की यात्रा करने वाले व्‍यवसाइयों को वीजा जारी करने के लिए एक फास्‍ट ट्रैक प्रक्रिया जारी की गई है,जो कंसीयज सर्विस के समान है। यह सेवा प्राथमिकता के आधार पर कनाडा में निवेश करने वाली कंपनियों पर लागू होगी। कनाडा के व्‍यापार मंत्री ने भारत में आयात की जा रही दालों के लिए सुगंधीकरण की आवश्‍यकता का मुद्दा उठाया। 

              इसके समाधान की आवश्‍यकता पर बल दिया। वाणिज्‍य और उद्योग मंत्री ने इस मुद्दे पर कृषि मंत्रालय के साथ सलाह-‍मश्विरा करने का आश्‍वासन दिया। श्रीमती सीतारामण ने भारत के राष्‍ट्रीय कार्बनिक उत्‍पादन कार्यक्रम के प्रति कार्बनिक समानता का मुद्दा भी उठाया। कनाडा के व्‍यापार मंत्री ने इस मुद्दे को कनाडा के कृषि मंत्रालय के साथ बातचीत से हल करने पर सहमति जताई। दोनों मंत्रियों ने दोनों देशों के व्‍यापारियों के बीच परस्‍पर संपर्क की संभावनाओं पर भी विचार किया। इस संदर्भ में सीईओ फोरम के महत्‍व पर विचार किया गया ताकि द्विपक्षीय व्‍यापार और निवेश में सुधार के लिए अपेक्षित परिप्रे‍क्ष्‍य उपलब्‍ध कराता है। 

                सीईओ फोरम के भारतीय पक्ष का पुनर्गठन किया गया है, जबकि कनाडा को अभी इस फोरम का पुनर्गठन करना है। कनाडा के व्‍यापार मंत्री ने मार्च के अंत तक सीईओ फोरम का पुनर्गठन करने पर सहमति जताई। दोनों मंत्रियों ने इस बात पर भी सहमति व्‍यक्‍त की कि दोनों देशों के व्‍यापार प्रतिनिधियों को शीघ्र बैठक करनी चाहिए। आपसी संबंधों को बढ़ाने के लिए महत्‍वपूर्ण  जानकारी प्रात करनी चाहिए। दोनों देशों ने अंतरराष्‍ट्रीय मंच पर समान हित के मुद्दों पर बेहतर आपसी सहयोग करने पर भी सहमति जताई। दोनों मंत्रियों ने संकल्‍प व्‍यक्‍त किया कि वे द्विपक्षीय व्‍यापार बढ़ाने के लिए काम करेंगे।