Thursday, 2 March 2017

राष्‍ट्रपति भवन में ‘नवाचार उत्‍सव’

           राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी 4 मार्च, 2017 को राष्‍ट्रपति भवन में होने वाले एक सप्‍ताह के नवाचार उत्‍सव का उद्घाटन करेंगे। 

            श्री मुखर्जी स्‍थानीय नवाचारों और उत्‍कृष्‍ट पारंपरिक ज्ञान के लिए 9वां द्विवार्षिक पुरस्‍कार भी देंगे। राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी नवाचार विद्वानों, कलाकारों तथा लेखकों से मिलेंगे। इस अवसर पर आवसीय कार्यक्रम के हिस्‍से के रूप में विद्वान कलाकार और लेखक राष्‍ट्रपति भवन में ठहरेंगे। नवाचार उत्‍सव का आयोजन राष्‍ट्रपति भवन द्वारा राष्‍ट्रीय नवाचार फाउंडेशन डंडिया के सहयोग से किया जाएगा। उत्‍सव में प्रदर्शनी लगाई जाएगी। 

          नवाचार (इन्‍क्‍यूबेशन तथा नवाचारी स्‍टार्ट-अप टीमों के लिए मॉडलों में तेजी, व्‍यापक सामाजिक परिवर्तन के लिए सामाजिक नवाचार तथा नवाचारों, स्‍टार्ट—अप और प्रारंभिक चरण के उद्यमों के वित्‍त पोषण) विषयों पर राष्‍ट्रीय और अंतर्राष्‍ट्रीय भागीदारों की गोलमेज चर्चा होगी।

             उत्‍सव में गांधीवादी युवा प्रौद्योगिकी नवाचार के लिए पुरस्‍कार तथा श्रेष्‍ठ विश्‍वविद्यालय की श्रेणियों में केंद्रीय विश्‍वविद्यालयों को विजिटर का पुरस्‍कार दिया जाएगा। नवाचार प्रदर्शनी साधारण जन के लिए 4 से 10 मार्च, 2017 को सुबह 10:00 बजे से शाम 5:00 तक खुली रहेगी।  मुगल गार्डन के आगंतुक इस प्रदर्शनी को देख सकेंगे।

अमेरिका के दौरे पर पेट्रोलियम मंत्री

                पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) धर्मेन्‍द्र प्रधान एक प्रतिनिधिमंडल के साथ 3 मार्च से लेकर 7 मार्च, 2017 तक अमेरिका के बोस्‍टन एवं ह्यूस्‍टन के दौरे पर रहेंगे।

            इस प्रतिनिधिमंडल में सार्वजनिक क्षेत्र की तेल एवं गैस कंपनियों के सीईओ शामिल हैं। 3 से 4 मार्च तक बोस्‍टन की यात्रा के दौरान प्रधान मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) ऊर्जा सम्मेलन में भाषण देंगे। वह ‘भारत की पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस नीति’ विषय  पर हार्वर्ड केनेडी स्कूल के विद्यार्थियों को संबोधित करेंगे। वह बोस्‍टन शहर के मेयर से भी भेंट करेंगे। इसके साथ ही वह भारतीय समुदाय से बातचीत करेंगे। 

                 मंत्री 5 से 7 मार्च तक वार्षिक सीईआरए सप्‍ताह-तेल एवं गैस पर अंतर्राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन में भी शिरकत करेंगे। प्रधान विभिन्‍न देशों से वहां आने वाले पेट्रोलियम मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। इनमें कनाडा, यूएई, इजरायल, अमेरिका, नाइजीरिया, सऊदी अरब और रूस के पेट्रोलियम मंत्री शामिल हैं। मंत्री अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) के महासचिव के साथ भी बैठक करेंगे। 

           पेट्रोलियम मंत्री सीईआरए सप्ताह यानी विश्‍व के सबसे बड़े हाइड्रोकार्बन सम्‍मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्‍व में हाल ही में घोषित किये गये नीतिगत सुधारों के साथ-साथ भारत के हाइड्रोकार्बन क्षेत्र के बारे में भी विस्‍तृत जानकारी देंगे।

‘भारत में इस्‍पात की खपत’

               इस्‍पात मंत्री चौधरी बीरेन्‍द्र सिंह ने सिक्किम के गंगटोक में इस्‍पात मंत्रालय द्वारा ‘भारत में इस्‍पात की खपत बढ़ाना’ विषय पर आयोजित क्षेत्रीय सम्‍मेलन को संबोधित किया ।

              ‘भारत में इस्‍पात की खपत बढ़ाना’ विषय पर आयोजित पूर्वी राज्‍यों के प्रथम क्षेत्रीय सम्‍मेलन का उद्घाटन केन्‍द्रीय इस्‍पात मंत्री चौधरी बीरेन्‍द्र सिंह द्वारा सिक्किम के गंगटोक में किया गया। 208 किलोग्राम के वैश्विक औसत की तुलना में भारत में केवल 61 किलोग्राम की निम्‍न प्रति व्‍यक्ति इस्‍पात खपत को ध्‍यान में रखते हुए घरेलू स्‍तर पर इस्‍पात की खपत बढ़ाने की काफी गुंजाइश है। इस सम्‍मेलन में इस्‍पात के उपयोग को बढ़ावा देने के समस्‍त अवसरों की तलाश की जायेगी। 

                     इस अवसर पर इस्‍पात मंत्री ने इस्‍पात के अनगिनत फायदों और निर्माण के दौरान दीर्घकालिक टिकाऊपन, सुरक्षा एवं लागत में कमी सुनिश्चित करने के लिए इस्पात के प्रचुर उपयोग वाली संरचनाओं पर विशेष जोर दिया। उन्‍होंने यह भी कहा कि इस्‍पात उद्योग को ऐसे अभिनव तरीके ढूंढ़ने चाहिए जिससे कि आम आदमी इस्‍पात के अनगिनत फायदों से अवगत हो सके। 

                मंत्री ने कहा कि एक मजबूत इस्‍पात उद्योग राष्‍ट्र के त्‍वरित औद्योगिक विकास की नींव होता है। भारत विश्‍व का तीसरा सबसे बड़ा इस्‍पात उत्‍पादक बन गया है। उन्‍होंने कहा कि भारत द्वारा वर्ष 2030-31 तक 300 एमटी कच्‍चे इस्‍पात की अधिष्‍ठ‍ापित क्षमता हासिल कर लेने की आशा है।

भारत की तुलना सिंगापुर एवं चीन जैसे देशों के साथ नहीं

            वाणि‍ज्‍य एवं उद्योग राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्रीमती निर्मला सीतारमण ने कहा, ‘देश में आर्थिक विकास की मौजूदा स्थिति और अर्थव्‍यवस्‍था की विविधता को देखते हुए भारतीय प्रतिस्‍पर्धा आयोग (सीसीआई) को आगे भी एक गतिशील नियामक संस्‍थान के तौर पर कार्यरत रहना चाहिए’।

          भारत सरकार की वाणिज्‍य एवं उद्योग राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्रीमती निर्मला सीतारमण ने नई दिल्‍ली स्थित इंडिया हैबिटेट सेंटर में भारतीय प्रतिस्‍पर्धा आयोग (सीसीआई) द्वारा ‘प्रतिस्‍पर्धा कानून का अर्थशास्‍त्र’ विषय पर आयोजित द्वितीय राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन का उद्घाटन किया। भारत सरकार के मुख्‍य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्‍यन ने उद्घाटन सत्र में मुख्य भाषण दिया। 

                इस अवसर पर श्रीमती निर्मला सीतारमण ने कहा कि देश में आर्थिक विकास की मौजूदा स्थिति और अर्थव्‍यवस्‍था की विविधता को देखते हुए भारतीय प्रतिस्‍पर्धा आयोग (सीसीआई) को आगे भी एक गतिशील नियामक संस्‍थान के तौर पर कार्यरत रहना चाहिए। उन्‍होंने सीसीआई से इस उद्देश्‍य के लिए क्षेत्रवार समझ विकसित करने और क्षेत्र विशेष के विशेषज्ञों की सेवाएं लेने का आग्रह किया। 

            श्रीमती निर्मला सीतारमण ने यह भी कहा कि भारत की तुलना सिंगापुर एवं चीन जैसे देशों के साथ नहीं की जानी चाहिए क्‍योंकि इन देशों ने अतीत में हमारे देश से भिन्‍न विकास रणनीतियों को अपनाया है। उन्‍होंने अंतर्राष्‍ट्रीय प्रतिस्‍पर्धा के लिए अर्थव्‍यवस्‍था को खोलने की जरूरतों और राष्‍ट्र की सामाजिक-आर्थिक आवश्‍यकताओं के बीच संतुलन बैठाने की अहमियत पर विशेष जोर दि‍या।  

अंतर्राष्‍ट्रीय महिला दिवस : सोशल मीडिया अभियान

           महिला और बाल विकास मंत्रालय ने 8 मार्च को मनाए जाने वाले अंतराष्‍ट्रीय महिला दिवस के पहले लैंगिक भेदभाव के बारे में जागरूकता फैलाने के उद्देश्‍य से सोशल मीडिया अभियान शुरू किया है। 

     यह अभियान अंतर्राष्‍ट्रीय महिला दिवस के दिन समाप्‍त होगा। उस दिन राष्‍ट्रपति महिला सशक्‍तिकरण में विशिष्‍ट योगदान के लिए व्‍यक्‍तियों और संस्‍थानों को प्रतिष्‍ठित नारी शक्‍ति पुरस्‍कार समारोह में सम्‍मानित करेंगे। यह अभियान सार्थिक अभियान है। इसमें समाज के सभी वर्गों के पुरूष और महिलाओं की भागीदारी हो रही है, यह समतामूलक समाज बनाने में यह उनके व्‍यकतिगत प्रयासों को दिखाता है। 

            सोशल मीडिया के उपयोगकर्ताओं द्वारा मंत्रालय के फेसबुक तथा ट्विटर हैंडलों में बड़ी संख्‍या में पोस्‍ट डाले गए हैं। पिछले महीने शुरू होने के बाद से इस पर 2.6 करोड़ लोग पहुंचे हैं। विभिन्‍न पोस्‍ट दिखाते हैं कि रोजमर्रा के उदारणों में किस तरह पुरूष और महिलाएं दायित्‍व साझा कर रहीं हैं। 

             समान अधिकारों और अवसरों के लिए खड़ा हो रही हैं। अभियान में फिल्‍म अभिनेता अमिताभ बच्‍चन तथा सुश्री दिया मिर्जा, खेल व्‍यक्‍तित्‍व सुश्री मैरी कॉम तथा संग्राम सिंह और इसरो के वैज्ञानिक सुश्री के थेनमोजी सेल्‍वी, सुश्री सुभा वरिय तथा सुश्री मिनाल रोहित के शामिल होने से गति आई है। मंत्रालय ने लैंगिक भेदभाव तथा समानता की आवश्‍यकता पर लघु वीडिया तैयार किया है, जिसमें आम जन की राय व्‍यक्‍त की गई है।

भारतीय रेलवे के प्रमुख माल ढुलाई कदमों का आगाज

                 रेल मंत्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने कहा कि विगत वर्षों के दौरान देश के कुल यातायात में रेलवे की हि‍स्‍सेदारी काफी घट गई है। 

           रेलवे अपना दो-तिहाई राजस्‍व केवल माल ढुलाई और मुख्‍यत: आठ जिंसों की ढुलाई से अर्जित करती है। वैश्विक स्‍तर पर छाई सुस्‍ती से परिवहन क्षेत्र ही सबसे ज्‍यादा प्रभावित हुआ है। इससे रेलवे की माल ढुलाई आमदनी प्रभावित हुई है। हालांकि, इन चुनौतियों के बावजूद भारतीय रेलवे ने अपनी कुल माल ढुलाई में बढ़ोतरी करने की दिशा में अच्‍छा प्रदर्शन किया है। रेल मंत्री समस्‍त हितधारकों के साथ सलाह-मशविरा कर अपनी माल ढुलाई नीतियों में निरंतर परिवर्तन करने के साथ-साथ उन्‍हें तर्कसंगत भी बनाते रहे हैं, ताकि और ज्‍यादा माल ढुलाई को रेलवे की ओर आकर्षित किया जा सके। 

               इन बदलावों के लिए भारतीय रेलवे ने यातायात संबंधी नीतियां बनाने हेतु बाजार उन्‍मुख अवधारणा अपनाई है। माल ढुलाई नीति में किये गये ये उल्‍लेखनीय सुधार बजट में की गई घोषणाओं के अनुरूप ही हैं। प्रभु ने इन बदलावों के प्रति सकारात्‍मक नजरिया अपनाने के साथ-साथ अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए हितधारकों का आह्वान किया। उन्‍होंने कहा कि माल ढुलाई में बेहतरी होने पर सभी विजेता साबित होंगे, चाहे वह रेलवे हो अथवा उपभोक्‍ता या समस्‍त परितंत्र। उन्‍होंने कहा कि प्रधानमंत्री के व्‍यापक विकास एजेंडे को ध्‍यान में रखते हुए ही रेलवे अपने कदम उठा रही है। 

                उन्‍होंने यह भी कहा कि डबल स्टैक ड्वार्फ कंटेनर ट्रेन की अवधारणा एक अच्‍छा आइडिया है, क्‍योंकि इससे समय की बचत होगी और इसके साथ ही यह किफायती भी होगी। इसी तरह प्रदूषण, जन स्‍वास्‍थ्‍य और त्‍वरित परिवहन के दृष्टिकोण से रो-रो सेवाओं की अवधारणा भी अत्‍यंत उपयोगी है। उन्‍होंने कहा कि हाल ही में रेल मंत्रालय ने गैर-किराया राजस्‍व के साथ-साथ ईंधन की लागत बचाने की दिशा में भी विभिन्‍न कदम उठाये हैं। सुरेश प्रभु ने कहा कि हमने ऊर्जा के मोर्चे पर अगले 10 वर्षों में 41,000 करोड़ रुपये की बचत करने का लक्ष्‍य रखा है। इसके साथ ही रेलवे ने विस्‍तारीकरण और क्षमता वृद्धि की व्‍यापक योजना शुरू की है। 

             रेलवे बोर्ड के चेयरमैन ए. के. मित्तल ने कहा कि माल ढुलाई के और ज्‍यादा हिस्‍से को रेलवे की तरफ आकर्षित करना एक बड़ चुनौती है। इस उद्देश्‍य की पूर्ति के लिए सभी हितधारकों को आपस में मि‍लकर काम करने की जरूरत है। सदस्‍य (यातायात) मोहम्‍मद जमशेद ने भारतीय रेलवे की व्‍यवसाय योजना 2017-18 की संक्षिप्‍त रूपरेखा पेश की। 2016-17 के रेल बजट में रेल मंत्री ने यह घोषणा की है कि या तो कन्टेनरीकरण अथवा नये वितरण मॉडलों के जरिये माल ढुलाई के बास्‍केट को बढ़ाने के लिए एक कार्य योजना विकसित एवं क्रियान्वित की जायेगी। ‘रोल-ऑन रोल-ऑफ’ इसी तरह का एक नया वितरण मॉडल है जो मल्‍टी मोडल परिवहन सेवाएं उपलब्‍ध करा सकता है।

                   रो-रो सेवाओं का शुभारंभ कोंकण रेलवे पर हुआ था। बाद में ईसीआर एवं एनएफआर में भी इसे पिछले वर्ष सफलतापूर्वक शुरू किया गया था। राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र में हरित परिवहन के लिए पॉयलट परियोजना इसी तरह की अगली ऐसी सेवा है जिसका शुभारंभ आज भारतीय रेलवे में किया जा रहा है। एनसीआर में 127 प्रवेश/निकासी स्‍थल हैं। इस क्षेत्र में अवस्थित 9 प्रमुख प्रवेश/निकासी स्‍थलों से 75 प्रतिशत हल्‍के वाणिज्यिक वाहन और भारी ट्रक गुजरते हैं। प्रतिदिन लगभग 66,000 ट्रक दिल्‍ली में प्रवेश करते हैं। इनमें से लगभग 38 प्रतिशत अथवा 25,000 ट्रकों की गिनती भारी ट्रकों में होती है। इनमें से लगभग 60 प्रतिशत अर्थात 15,000 ट्रक दिल्‍ली आगमन के लिए निर्दिष्‍ट नहीं होते हैं। इस मॉडल के तहत ट्रकों की आवाजाही दिन के समय भी हो सकती है, जिन पर पहले प्रात: 7 बजे से लेकर रात्रि 11 बजे तक पाबंदी लगी हुई थी। 

                प्रवेश स्‍थलों पर लगने वाली लंबी-लंबी लाइनें छोटी हो जायेंगी जिससे समय की बचत होगी और इसके साथ ही रो-रो सेवा के परिचालन के दौरान ट्रक ड्राइवरों को पर्याप्त आराम भी मिल सकेगा। इस मॉडल से पूरे एनसीआर में स्‍वास्थ्‍य के लिए हानिकारक वायु प्रदूषण में काफी कमी आयेगी। रो-रो सेवाओं से इन भारी और हल्‍के वाणिज्यिक वाहनों को दिल्‍ली की सीमा में प्रवेश करने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। रो-रो सेवाओं के तहत इन वाणिज्यिक वाहनों को दिल्‍ली के बाहर स्थित रेलवे टर्मिनलों/पीएफटी पर रेलवे के फ्लैट वैगनों में लादा जायेगा। फिर उसके बाद शहर से होते हुए उन्‍हें दिल्‍ली की सीमा से बाहर वैगनों से नीचे उतार दिया जायेगा। इसका उद्देश्‍य दिल्‍ली में भीड़–भाड़ कम करना है।

                   पारगमन समय में 8-10 घंटे की बचत होने की आशा है क्‍योंकि दिन के समय किसी भी वाणिज्यिक वाहन को एनसीआर के अंदर प्रवेश करने की इजाजत नहीं है। पर्यावरण मुआवजा शुल्‍क (ईसीसी) की बचत - लगभग 1400-2600 रुपये। दिल्‍ली में प्रवेश करने के लिए टोल टेक्‍स की बचत – लगभग 500-900 रुपये। ईंधन की बचत होगी और इसके साथ ही आने-जाने में कम समय लगेगा। वायु एवं ध्‍वनि प्रदूषण में कमी, दिल्‍ली की सड़कों पर भीड़-भाड़ में कमी, सड़क दुर्घटनाओं में कमी, परिवहन से निकलने वाले कार्बन उत्‍सर्जन में कमी – इस लिहाज से परिवहन के समस्‍त साधनों में रेलवे का प्रदर्शन सबसे अच्‍छा है। 

           एक नया मॉडल, जिसमें सड़कों पर आवाजाही के साथ अनुकूलता की परिकल्‍पना की गई है। इसके साथ ही हरित परिवहन के जरिये प्रमुख महानगरों में प्रदूषण घटाने के राष्‍ट्रीय प्रयासों में भारतीय रेलवे की भागीदारी सुनिश्चित होगी। भारतीय रेलवे अपने हर परिचालन के दौरान प्रमाणित कार्बन क्रेडिट भी अर्जित करेगी।

‘देश में मेडिकल शिक्षा को बड़ा प्रोत्‍साहन’

                केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य और परिवार कल्‍याण मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि भारत सरकार ने शैक्षिक सत्र 2017-18 के लिए विभिन्‍न मेडिकल कॉलेजों तथा अस्‍पतालों में 4,000 पीजी मेडिकल सीटें बढ़ाने की मंजूरी दी है। 

            सीटों की संख्‍या की दृष्‍टि से यह अब तक की सबसे बड़ी मंजूरी है। अब कुल 35117 पीजी मेडिकल सीटें उपलब्‍ध हैं। नड्डा ने प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्‍व और निंरतर निर्देशन के लिए धन्‍यवाद देते हुए कहा कि इससे तृतीयक स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल का हमारा संकल्‍प सुदृढ़ होगा। देश में चिकित्‍सा शिक्षा में सुधार होगा। स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ने बताया कि कुल वृद्धि में 2046 सीटें मेडिकल कॉलेजों में हैं। क्‍लिनिकल विषयों में पीजी की सीटें बढ़ाने की आवश्‍यकता को देखते हुए सरकार ने सरकारी मेडिकल कॉलेजों में क्‍लिनिकल विषयों में शिक्षक विद्यार्थी अनुपात में संशोधन का फैसला किया था। 

             केवल इसी कदम से 71 कॉलेजों में 1,137 अतिरिक्‍त सीटों का सृजन हुआ। कुल 212 सरकारी कॉलेजों में से अनेक कॉलेज अपने प्रस्‍ताव भेज रहे हैं, और आशा की जाती है कि मार्च, 2017 के दौरान कम से कम 1,000 और सीटें जोड़ी जाएगी। इसमें एमडी/एमएस की समकक्ष डीएनबी की सीटें शामिल हैं।

               पिछले एक वर्ष में डीएनबी की सीटें 2,147 बढ़ी हैं। नड्डा ने कहा कि अब तक देश में पीजी मेडिकल  की कुल 4,143 सीटें जोड़ी गई हैं। मार्च, 2017 के दौरान 1000 से अधिक और सीटे जोड़ी जाएंगी। स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ने कहा कि इस तरह बजट घोषणा में देश में 5000 पीजी मेडिकल सीटें बढ़ाने का लक्ष्‍य शीघ्र पूरा कर लिया जाएगा।

नमामि गंगे के लिए रोटरी इंडिया से समझौता

           अधिक से अधिक स्‍वयंसेवी संगठनों को शामिल करते हुए नमामि गंगे कार्यक्रम को जन आंदोलन बनाने के प्रयास में जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय के अंतर्गत स्‍वच्‍छ गंगा के लिए राष्‍ट्रीय मिशन ने नई दिल्‍ली में रोटरी इंडिया के साथ सहमति ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर किया। 

                रोटरी इंडिया विभिन्‍न विद्यालयों में ‘स्‍कूलों में धुलाई’ कार्यक्रम के माध्‍यम से स्‍वच्‍छ गंगा मिशन का समर्थन करेगा। कार्यक्रम में लक्षित सरकारी विद्यालयों में जल, स्‍वच्‍छता और साफ-सफाई सेवाओं को लागू करना और स्‍कूली बच्‍चों, शिक्षकों, स्‍कूल प्रबंधन समुदाय का समितियों तथा सभी हितधारकों को स्‍वच्‍छता पर जागरूकता में सुधार के लिए सार्थक स्‍वास्‍थ्य व्‍यवहारों को अपनाने में संवेदी बनाना है। यह लक्ष्‍य सीखने के एकीकृत माहौल तथा बच्‍चों को परिवर्तन के एजेंट के रूप में सक्षम बनाने से प्राप्‍त किया जा सकता है। 

             रोटरी इंडिया की योजना 20,000 सरकारी स्‍कूलों में सफाई कार्यक्रम चलाने की है। गौरतलब है कि केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास तथा गंगा संरक्षण मंत्री सुश्री उमा भारती नमामि गंगा कार्यक्रम को जन आंदोलन बनाने के लिए स्‍वयंसेवी संगठनों की भागीदारी पर बल देती रही हैं। इस सहमति ज्ञापन से गंगा संरक्षण विषय को रोटरी के ‘स्‍कूलों में धुलाई’ कार्यक्रम से जोड़ने का मार्ग प्रशस्‍त होगा। रोटरी का यह कार्यक्रम बिहार, झारखंड तथा पश्‍चिम बंगाल के नाडियाड जिले में गंगा नदी से लगे स्‍थानों के सरकारी स्‍कूलों में चलाया जाएगा। 

            यह कार्यक्रम अन्‍य राज्‍यों में भी चलाया जाएगा जहां रोटरी इंडिया की मजबूत उपस्‍थिति है। रोटरी इंडिया गंगा संरक्षण के बारे में स्‍कूलों और समुदायों में जागरूकता गतिविधियां और अभियान चलाएगा और इससे नदी में बहते प्रदूषण में कमी आएगी। अधिक से अधिक लोगों तथा समुदाय तक पहुंचने पर बल दिया जाएगा। यह सहमति ज्ञापन दो वर्षों के लिए है। 

            एनएमसीजी तथा रोटरी के बीच यह सहयोग गंगा संरक्षण में हितधारकों और समुदायों को शामिल करने की दिशा में महत्‍वपूर्ण कदम है। इस सहयोग से रोटरी इंटरनेशनल की शक्‍ति बढ़ेगी और एनएमसीजी की ओर से कोई अतिरिक्‍त वित्‍तीय वचनबद्धता नहीं निभानी होगी। सहमति ज्ञापन पत्र स्‍वच्‍छ गंगा के लिए राष्‍ट्रीय मिशन के महानिदेशक यू.पी. सिंह और रोटरी इंडिया के उपाध्‍यक्ष पी.टी. प्रभाकर ने हस्‍ताक्षर किए।  

भारत व यूक्रेन सिनेमा को मजबूत बनाने के लिए सहमत

           भारत व यूक्रेन सिनेमा के माध्यम से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत बनाने के लिए सहमत हो गए हैं।

            इस सहयोग को फिल्म महोत्सव के माध्यम से फिल्में दिखाने के लिए नीति और संस्थागत ढांचे के द्वारा और भारत द्वारा स्थापित फिल्म सुविधा कार्यालय मंच का उपयोग करके बढ़ाया जाएगा। उपशीर्षकों के साथ फिल्में दिखाने के बारे में भी विचार-विमर्श किया गया ताकि फिल्मों की जनता तक पहुंच  हो सके। इन मुद्दों के बारे में सूचना और प्रसारण मंत्री एम वेंकैया नायडू व यूक्रेन के सांसद तथा यूक्रेन की राष्ट्रीय टेलीविजन और रेडियो प्रसारण परिषद के अध्यक्ष इयूरी आर्टिमेंको के नेतृत्व वाले यूक्रेन के प्रतिनिधिमंडल के मध्य नई दिल्ली में विचार-विमर्श किया गया।

                सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौर और सूचना एवं प्रसारण सचिव भी इस चर्चा के दौरान उपस्थित थे। चर्चा के दौरान नायडू ने कहा कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय दोनों देशों के मध्य सार्वजनिक प्रसारकों, विषय वस्तु सृजन, फिल्मों की स्क्रीनिंग और वितरण के लिए आदान-प्रदान कार्यक्रमों को बढ़ावा देने के लिए हर संभव सहायता प्रदान करेगा। दोनों देशों के सार्वजनिक प्रसारकों के संबंध में अनुवाद करने के कार्यक्रम, दोनों देशों की संबंधित भाषाओं में विषयवस्तु और उपशीर्षक प्रदान करने की संभावना के बारे में भी विचार-विमर्श किया गया। 

            नायडू ने अभी हाल में मंत्रालय में स्थापति फिल्म सुविधा केन्द्र के बारे में भी प्रतिनिधिमंडल को अवगत कराया। जिसे फिल्म निर्माताओं के लिए सिंगल विंडो क्लीयरेंस की सुविधा के लिए स्थापित किया गया है। यह केंद्र फिल्म निर्माताओं के लिए एक सहायता केन्द्र के रूप में कार्य करता है। यह केंद्र फिल्म निर्माताओं को एक सहायता प्रदान करने और अपेक्षित अनुमतियों को प्राप्त करने, शूटिंग स्थलों के बारे जानकारी उपलब्ध कराने के साथ-साथ फिल्म निर्माण और फिल्म निर्माण के बाद भारतीय फिल्म उद्योग में उपलब्ध सुविधाओं के बारे में भी जानकारी उपलब्ध कराता है। 

                 इयूरी आर्टिमेंको ने कहा कि यूक्रेन सरकार सिनेमा के माध्यम से दोनों देशों में सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए यूक्रेन में एक भारतीय फिल्म महोत्सव का आयोजन करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने निकट भविष्य में आयोजित किए जाने वाले फिल्म महोत्सव के लिए व्यक्तिगत निमंत्रण दिया। उन्होंने भारतीय विवाह, राजस्थान जैसे पर्यटक स्थलों और विभिन्न भारतीय व्यंजनों पर आधारित कार्यक्रमों को यूक्रेन में दिखाए जाने में रुचि दिखाई। अपने –अपने देश में एक दूसरे की फिल्मों को दिखाने के लिए फिल्म महोत्सव आयोजित करने और भागीदार देशों के रूप में इन फिल्म महोत्सव में भाग लेने की संभावनाओं के बारे में भी विचार-विमर्श किया गया।

पशुचारा उत्‍पादन की गुणवत्‍ता

                कृषि एवं किसान कल्‍याण राज्‍य मंत्री परषोत्‍तम रूपाला ने कहा है कि कृषि देश की ग्रामीण अर्थव्‍यवथा की रीढ़ है, जिसमें डेरी की अहम भूमिका है। 

            भारत दुनिया में सबसे बड़ा दुग्‍ध उत्‍पादन देश है, लेकिन इसके बावजूद प्रति पशु उत्‍पादकता में सुधार की अपार क्षमताएं मौजूद हैं। पशुचारा उत्‍पादन की गुणवत्‍ता सुधार एवं पशुचारा गुणवत्‍ता नियंत्रण के संबंध में राष्‍ट्रीय डेरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) द्वारा आणंद में आयोजित आज एक राष्‍ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए उन्‍होंने यह कहा। कार्यशाला में सांसद दिलीप पटेल, एनडीडीबी के अध्‍यक्ष दिलीप रथ और डॉ. एचपीएस मक्‍कड़, एफएओ, रोम सहित देश भर के लगभग 200 पशुचारा विशेषज्ञ उपस्‍थित थे। रूपाला ने कहा कि दुग्‍ध की मांग बढ़ने के साथ डेरी पशुओं की उत्‍पादकता में भी इजाफा होना चाहिए। अब समय आ गया है कि हम बेहतर गुणवत्‍ता वाले पशुचारा की उत्‍पादन के प्रयास करें।

                 इस संबंध में विभिन्‍न श्रेणियों के पशुओं के लिए उनके अनुकूल चारा उत्‍पादन को प्रोत्‍साहन दें। पशुचारा उत्‍पादन की गुणवत्‍ता सुनिश्‍चित करने के लिए योग्‍य और पशु क्षेत्र लोगों की जरूरत है। इसके अलावा कुशल इकाइयों और मशीनों तथा तकनीकी विशेषज्ञता भी जरूरी है। रूपाला ने इस कार्यशाल के आयोजन के लिए एनडीडीबी को धन्यवाद दिया, जिसमें तमाम विषयों पर चर्चा करने के लिए देश भर की डेरी सहकारी संस्‍थानों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। 

                 मंत्री ने आशा व्‍यक्‍त की कि कार्यशाला में विश्‍व मानकों के अनुरूप चारा उत्‍पादन के तरीकों पर विचार किया जाएगा। उन्‍होंने एनडीडीबी से आग्रह किया कि डेरी प्रौद्योगिकी की आधुनिकीकरण के लिए भारत सरकार द्वारा बजट आवंटन का भरपूर लाभ उठाएं। परषोत्‍तम रूपाला ने एनडीडीबी के पशुचारा ज्ञान पोर्टल का भी उद्घाटन किया। इस पोर्टल पर पशुचारा उत्‍पादन से संबंधित विभिन्‍न विषयों की जानकारी दी गई है। इसके अलावा सस्‍ते पशुचारा बनाने, चारा आपूर्ति, कच्‍चे माल इत्‍यादि के बारे में भी सूचना उपलब्‍ध है। दिलीप पटेल ने ‘अंडरस्‍टेंडिंग युअर बोवाइन’ नामक पुस्‍तिका जारी की। इस पुस्‍तिका में पशुओं के बारे में आसान जानकारी दी गई है, ताकि उनके रखरखाव, चारे, स्‍वास्‍थ्‍य, स्‍वच्‍छता इत्‍यादि का उचित बंदोबस्‍त किया जा सके।

                 पशु पालकों को समस्‍त जानकारी मिल सकें, जिससे उन्‍हें नुकसान न हो। एनडीडीबी के अध्‍यक्ष दिलीप रथ ने कहा कि भारत में दूध देने वाले पशुओं को फसल के अवशेष खिलाने की परंपरा है। इसके अलावा अन्‍य सहायक फसलें भी उन्‍हें दी जाती हैं, जिन्‍हें घरेलू स्‍तर पर पैदा किया जाता है। इस संबंध में जरूरी है कि पशुओं को पोषक तत्‍व दिए जाएं ताकि दुग्‍ध उत्‍पादन में बढ़ोत्‍तरी हो सके। अध्‍यक्ष ने कहा कि दूध देने वाले पशुओं को संतुलित मात्रा में खाद्य सामग्री देने से उनकी क्षमता बढ़ेगी और लागत कम आएगी। इसके अलावा पशुओं की रोग-प्रतिरोधक क्षमता, प्रजनन क्षमता में इजाफा होगा। मीथेन उत्‍सर्जन में कमी आएगी। हरे चारे की पर्याप्‍त मात्रा और गुणवत्‍ता के अभाव में सांद्र चारा डेरी पशुओं को आवश्‍यक तत्‍व प्रदान कर सकता है। 

              एनडीडीबी के अध्‍यक्ष ने बताया कि डेरी सहकारी तंत्र हर साल लगभग 3.6 मिलियन टन चारे का उत्‍पादन करता है। 70 पशुचारा संयंत्रों में लगभग 5 मिलियन टन उसकी स्‍थापित क्षमता है। इसके अलावा निजी क्षेत्र में 4.5 मिलियन टन का उत्‍पादन होता है। कार्यशाला के दौरान पशुचारा उत्‍पादन, चारा संयंत्रों में गुणवत्‍ता नियंत्रण, चारा उत्‍पादन क्षमता में सुधार, चारा उत्‍पादन संबंधी नए तरीकों, सस्‍ता चारा उत्‍पादन और गुणवत्‍ता नियंत्रण प्रयोगशालाओं के आधुनिकीकरण जैसे विषयों पर भी चर्चा की गई।

अब ‘आधार’ अनिवार्य

          ईपीएफओ ने यह स्‍पष्‍ट किया है कि फिलहाल निकासी के मामलों को छोड़ केवल पेंशन दावों के अन्तिम निपटान के लिए ही ‘आधार’ की प्राप्ति को अनिवार्य किया जाना चाहिए। 

           ईपीएफओ ने कर्मचारी पेंशन योजना 1995 के सदस्‍यों द्वारा आधार नंबर संबंधी सत्‍यापन को पेश करने की तिथि बढ़ाकर 31 मार्च, 2017 कर दी थी।  तद्नुसार, ईपीएफओ ने यह बात दोहराई है कि कर्मचारी पेंशन योजना 1995 के तहत फिलहाल केवल निकासी लाभ से जुड़े मामलों में ही ‘आधार’ को पेश करने की आवश्‍यकता पर विशेष जोर नहीं दिया जा रहा है। पेंशन दावों के अन्तिम निपटान और योजना से जुड़े प्रमाण पत्र के मामलों में ‘आधार’ उपलब्‍ध कराना अब भी अनिवार्य है।  

कलाकार सुबोध व भारती राष्ट्रपति भवन में आर्टिस्ट इन रेजिडेंस


            कलाकार सुबोध गुप्ता व श्रीमती भारती खेर (02.02.2017) राष्ट्रपति भवन में आर्टिस्ट इन रेजिडेंस के रूप में अपना प्रवास आरंभ करेंगे। वे 10 मार्च 2017 तक राष्ट्रपति भवन में ही प्रवास करेंगे।

         1964 में खागौल, बिहार में जन्मे सुबोध गुप्ता ने कॉलेज ऑफ आर्ट, पटना (1983-88) से शिक्षा प्राप्त की। वह रसोईघर के स्टेनलेस स्टील के बर्तनों जैसी रोजमर्रा के उपयोग में आने वाली वस्तुओं के साथ रचना करने के लिए विख्यात हैं। स्टेनलेस स्टील जहां उनका विशिष्ट माध्यम है, वहीं उन्होंने कांस्य, संगमरमर, पीतल और लकड़ी में भी बहुत कुशलतापूर्वक कार्य किया है। उनकी कलात्मक रचनाओं को दुनिया भर के प्रतिष्ठित संग्रहालयों, कला दीर्घाओं, कला मेलों और बाइनियल्स में प्रदर्शित किया गया है। 

            उनकी रचनाओं की एकल प्रदर्शनियां अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कुछ बहुत ही विख्यात संग्रहालयों और कला दीर्घाओं में लगाई जा चुकी हैं, जिनमें नेशनल गैलरी ऑफ मॉर्डन आर्ट (नई दिल्ली), म्यूजियम फॉर मॉर्डनेन कुन्स्ट (फ्रेंकफर्ट), विक्टोरिया एंड अल्बर्ट म्यूजियम (लंदन), हाउसर एंड वर्थ (लंदन, ज्यूरिख, न्यूयॉर्क और सॉमरसेट), अरारियो (सोल एवं बीजिंग), पिनचक आर्ट सेंटर (कीव) और ग्लेरिया कॉन्टीनुआ (सेन गिमिगनानो, इटली) शामिल हैं। समकालीन कला को दिए योगदान के लिए उन्हें फ्रांस सरकार के सर्वोच्च सम्मानों में से शुमार शेविलियर डेन्स आई ओर्डर डि आर्ट्स एट दि लैटर्स से सम्मानित किया गया है।

                   वर्ष 1969 में लंदन में जन्मी श्रीमती भारती खेर विख्यात भारतीय समकालीन कलाकार हैं। उन्होंने लंदन के मिडिलसेक्स पोलिटैक्नीक और उसके बाद नॉर्थन इंग्लैंड के न्यूकॉसल पोलिटैक्नीक से पेंटिंग एंड डिजाइन का अघ्ययन किया है। वह अपनी कला के माध्यम से सांस्कृतिक गलत अर्थ निरुपणों और सामाजिक संहिताओं का अन्वेषण करने के प्रति समर्पित हैं। वह अपने कार्य में परम्परा और आधुनिकता, पूर्व और पश्चिम को जोड़ने के लिए में बिंदी का उपयोग केंद्रीय प्रधान विचार के रूप में करती हैं। उनकी प्रसिद्ध रचना ‘‘द स्किन स्पीक्स अ लेंगुएज नॉट इट्स ओन (2006), में फाइबर ग्लास से बने और अनेक सफेद बिंदियों से ढके विशाल आकार के हाथी को मरण और जीवन की अस्पष्ट अवस्था में जमीन पर झुकते हुए दर्शाया गया था।

             श्रीमती खेर ने अपनी मूर्तियों और कोलाजों में हाइब्रिड प्राणियों को निरूपित किया है, जो जेंडर, प्रजातियों, नस्लों और सामाजिक भूमिका के विरोधाभासों को एकीकृत करते हैं। एरिओन (2004) और एरिओन्स सिस्टर (2006) आधी मानुषी और आधी पशु हैं। उनके शरीर पर वीर्य के आकार की बिंदियां हैं, जो भविष्यवादी नारीत्व के विज़न को परिपूर्ण करती है। वह दो दशक से ज्यादा अर्से से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी कला का प्रदर्शन करती आई हैं। उनके हाल के प्रदर्शनों में वेंकूवर आर्ट म्यूजियम (वेंकूवर), फ्रॉयड म्यूजियम (लंदन), रॉकलैंड आर्ट म्यूजियम (शंघाई), टवेन्टीयथ सिडनी बाइनियल (सिडनी), गुग्गनहेम अबु धाबी (अबु धाबी), सेंटर पॉम्पीडो (पेरिस) शामिल हैं।

                वह खोज इंटरनेशनल आर्टिस्ट एसोसिएशन की अध्यक्ष एवं संस्थापक सदस्य हैं। वह कोच्चि-मुजिरिस बाइनियल 2016 की कलात्मक सलाहकार और जवाहर कला केंद्र संग्रहालय, जयपुर की कार्यकारिणी समिति की सदस्य भी थीं। उन्हें 2015 में शेविलियर डेन्स आई ओर्डर डि आर्ट्स एट दि लैटर्स से सम्मानित किया गया। वह खोज इंटरनेशनल आर्टिस्ट एसोसिएशन की अध्यक्ष एवं संस्थापक सदस्य हैं। वह कोच्चि-मुजिरिस बाइनियल 2016 की कलात्मक सलाहकार और जवाहर कला केंद्र संग्रहालय, जयपुर की कार्यकारिणी समिति की सदस्य भी थीं।

              उन्हें 2015 में शेविलियर डेन्स आई ओर्डर डि आर्ट्स एट दि लैटर्स से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति भवन के ‘इन-रेजिडेंस‘ कार्यक्रम का शुभारंभ महामहिम राष्ट्रपति द्वारा 11 दिसम्बर, 2015 को लेखकों और कलाकारों को राष्ट्रपति भवन में प्रवास का अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से किया गया था। इसके अंतर्गत राष्ट्रपति भवन में प्रवास करने वाले प्रमुख कलाकारों में से जोगेन चैधरी, सांसद (राज्य सभा), परेश मैती, श्रीमती जयश्री बर्मन और बांग्लादेश के शहाबुद्दीन अहमद शामिल हैं।

हवाला कारोबार में 50 प्रतिशत की गिरावट

               पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष विभाग में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने महाराष्ट्र से आए छात्रों के एक समूह से मुलाकात की। ये छात्र एमईएस आबासाहेब गरवारे कॉलेज पुणे से हैं।

            जनसंचार तथा पत्रकारिता में स्नातक की पढ़ाई कर रहे हैं। ये छात्र स्टडी टूर पर दिल्ली आए हुए हैं। दिल्ली आने से पहले छात्रों ने पंजाब के फिरोजपुर और अमृतसर जिलों का भी भ्रमण किया। छात्रों के साथ बातचीत के दौरान डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि उन्हें समाज के लिए एक राय निर्माता के रूप में कार्य करना चाहिए। एक सकारात्मक रवैये के साथ विकास के अधिकतर मुद्दों को उजागर करना चाहिए। 

                 उन्होंने छात्रों से जम्मू -कश्मीर, विमुद्रीकरण, जीएसटी और पूर्वोत्तर सहित अन्य उभरते मुद्दों पर बातचीत की। कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) द्वारा उठाए गए कदमों पर प्रकाश डालते हुए उऩ्होंने कहा कि 2015 में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा गैर राजपत्रित पदों पर भर्ती के लिए साक्षात्कार की प्रक्रिया को समाप्त करने की घोषणा की गई। जिसे 01 जनवरी, 2016 से लागू किया गया। उन्होंने छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि आप उस महाराष्ट्र से ताल्लुक रखते हैं जो इस निर्णय को लागू करने वाला पहला राज्य है। 

             उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र द्वारा प्रदान किए गए आंकड़ों से यह खुलासा हुआ है कि इस निर्णय से राज्य के पैसों की बचत हुई है। उन्होंने बताया कि अभी भी कुछ ऐसे राज्य हैं जिन्हें यह निर्णय लागू करना है। मंत्री ने इन राज्यों को इन निर्णय को लागू करने के लिए पत्र लिखा है। छात्रों के साथ संवाद करते हुए जितेन्द्र सिंह ने कहा कि दर्शकों/ पाठकों और मीडिया की प्राथमिकताओं में धीरे-धीरे बदलाव हो रहा है। मीडिया का ध्यान अब मेट्रो शहरों से हट कर दूरदराज के क्षेत्रों, जैसे पूर्वोत्तर की ओर जा रहा है। 

              उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा हाल में लिए गए विमुद्रीकरण के निर्णय से सकारात्मक परिणाम मिले हैं। इसके परिणामस्वरूप आतंकवाद से संबंधित गतिविधियों में 60 फीसदी की गिरावट तथा हवाला के कारोबार में 50 प्रतिशत की गिरावट आई है। डॉ. जितेन्द्र सिंह ने छात्रों को अपने पेशे के प्रति एक सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने को कहा और उन्हें भविष्य के लिए अपनी शुभकामनाएं दी।

डिजिटल ऑनलाइन लाइब्रेरी का उपयोग करना चाहिए

             सूचना एवं प्रसारण मंत्री एम. वेंकैया नायडू ने सूचना भवन में मीडिया इकाइयों एवं उनकी विभिन्‍न सुविधाओं का मुआयना किया, ताकि उनके कामकाज का प्रत्‍यक्ष अनुभव हो सके।

             प्रकाशन प्रभाग द्वारा हाल ही में खोली गई नई बुक गैलरी पर टिप्‍पणी करते हुए नायडू ने लोगों से इस गैलरी में अपना आगमन सुनिश्चित करने और प्रकाशन प्रभाग द्वारा पेश किये गये पुस्‍तकों के बहुमूल्‍य संग्रह का समुचित उपयोग करने का अनुरोध किया। उन्‍होंने यह भी कहा कि युवाओं को डिजिटल ऑनलाइन लाइब्रेरी का उपयोग करना चाहिए जहां चुनिंदा अभिलेखीय पुस्‍तकें उपलब्‍ध हैं। जिनसे बुक गैलरी के जरिये नि:शुल्‍क लाभ उठाया जा सकता है। त्‍वरित संचार के इस युग में सभी आयु वर्गों के लोगों में पढ़ने की आदत डालना अत्‍यंत आवश्‍यक है। 

               प्रकाशन प्रभाग की यह पहल इस दिशा में एक महत्‍वपूर्ण कदम है। एम. वेंकैया नायडू के साथ सूचना एवं प्रसारण राज्‍य मंत्री कर्नल राज्‍यवर्धन राठौर, सूचना एवं प्रसारण सचिव अजय मित्तल और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के वरिष्‍ठ अधिकारीगण भी इस अवसर पर उपस्थित थे। सूचना भवन में एक अत्‍याधुनिक एवं आकर्षक बुक गैलरी बनाई गई है, जो जनवरी 2017 से ही परिचालन में आ गई है। बच्‍चों की पुस्‍तकों के लिए एक अलग खण्‍ड बनाया गया है, ताकि रोचक शीर्षकों को पढ़ने के लिए बच्‍चों को प्रोत्‍साहित किया जा सके। गैलरी में एक पठन कक्ष भी बनाया गया है जहां आगंतुक आराम से बैठ सकते हैं और वहां पर प्रदर्शित किसी भी पुस्‍तक को खरीदने से पहले उसका अवलोकन भी कर सकते हैं।

                 नायडू ने सूचना भवन में बनाये गये डीएवीपी स्‍टूडियो का भी मुआयना किया जहां उन्‍हें संगठन द्वारा डिजाइन किये गये रचनात्‍मक एवं अन्‍य संचार उत्‍पादों की रूपरेखा से अवगत कराया गया। डीएवीपी द्वारा विभिन्‍न ग्राहकों के लिए तैयार किये जाने वाले रचनात्‍मक उत्‍पादों हेतु उपयोग किये जाने वाले सॉफ्टवेयर के बारे में भी मंत्री को विशेष रूप से जानकारी दी गई। उन्‍होंने रंग अंशांकन (कैलीब्रेशन) तकनीकों के साथ-साथ मीडिया नियोजन एवं विज्ञापनों को ऑनलाइन ढंग से जारी किये जाने से जुड़ी बातों में भी गहरी रुचि दिखाई। इससे पहले नायडू ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स मीडिया मॉनीटरिंग सेंटर का मुआयना किया। वहां कार्यरत लोगों से बातचीत की, ताकि उनके कामकाज को समझा जा सके। 

              इसके साथ ही उन्‍होंने प्रसारण क्षेत्र से जुड़ी बुनियादी ढांचागत सुविधाओं की समीक्षा की। मंत्री को मीडिया इकाई में कामकाज के तरीके से भी अवगत कराया गया। मंत्री ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सोशल मीडिया प्रकोष्‍ठ का भी मुआयना किया। इसके साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों की विभिन्‍न प्रक्रियाओं की समीक्षा की।



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