Tuesday, 14 November 2017

जीवनशैली में बदलाव, सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए

   नई दिल्‍ली। उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने कहा है कि जीवन शैली में बदलाव और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। 

   वे आज यहां पब्लिक हेल्‍थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया और इंस्टिट्यूट फॉर हेल्‍थ मैट्रिक्स एंड इवैल्यूऐशन (वाशिंगटन विश्वविद्यालय, सिएटल) के सहयोग से भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद की पहल 'भारत राज्य स्तरीय रोग बोझ रिपोर्ट और तकनीकी पत्र' जारी करने के बाद एकत्रित लोगों को संबोधित कर रहे थे।
     इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे। 
    उपराष्ट्रपति ने कहा कि सामाजिक और आर्थिक विकास के आधार के रूप में देश की पूरी आबादी के लिए बेहतर स्वास्थ्य हासिल करना भारत सरकार का महत्वपूर्ण लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि किसी भी भारतीय राज्य में अधिकतम आयु संभाव्‍यता और न्‍यूनतम आयु संभाव्‍यता के बीच का अंतर वर्तमान में 11 वर्ष है और उच्चतम शिशु मृत्यु दर और सबसे कम शिशु मृत्यु दर के राज्यों के बीच अंतर 4 गुना है। 
   उपराष्ट्रपति ने कहा कि विकास के संदर्भ में समान स्तर के अन्‍य देशों की तुलना में भारत में कई स्वास्थ्य सूचकांक की स्थिति दयनीय है। उन्होंने कहा कि इसका मतलब है कि भारत में महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सुधार हुआ है, लेकिन हम इस क्षेत्र में और बेहतर कार्य कर सकते हैं। 
     उन्होंने कहा कि भारत के पास अन्य स्रोतों से उपलब्‍ध महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सर्वेक्षण और आंकड़े हैं, जो देश के विभिन्न हिस्सों के बीच कुछ बीमारियों के बोझ में महत्वपूर्ण अंतर दर्शाते हैं। उपराष्ट्रपति ने कहा कि आज जारी भारत राज्य स्तरीय रोग बोझ पहल की रिपोर्ट में पहली बार 1990 से 2016 तक देश के प्रत्येक राज्य के व्यापक अनुमान उपलब्‍ध कराए गए हैं। 
    उन्होंने कहा कि तकनीकी वैज्ञानिक पत्र के साथ आज जारी की गई रिपोर्ट में प्रत्‍येक राज्‍य की स्‍वास्‍थ्‍य स्थिति और विभिन्‍न राज्यों के बीच स्वास्थ्य असमानताओं पर व्यवस्थित अंतर्दृष्टि डाली गई है। उन्‍होंने कहा कि भारतीयों की अगली पीढ़ी को सक्षम बनाने के लिए कुपोषण के कारण होने वाले उच्‍च रोग बोझ से जल्‍द ही निपटना होगा, ताकि पूरी सक्षमता से भारतीयों के व्यक्तिगत विकास के साथ ही राष्‍ट्र का विकास किया जा सके।

विदेशी निवेश 36 बिलियन डॉलर से बढ़कर 60 बिलियन डॉलर

    नई दिल्‍ली। राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद ने नई दिल्‍ली में 37वें भारतीय अंतर्राष्‍ट्रीय व्‍यापार मेला–2017 का उद्घाटन किया। 

     इस अवसर पर राष्‍ट्रपति ने कहा कि आईआईटीएफ एक व्‍यापार मेला या प्रदर्शनी से अधिक महत्‍वपूर्ण है। प्रतिवर्ष 14 नवंबर को शुरू होने वाला यह मेला वैश्विक मंच पर भारत को प्रदर्शित करता है।
    यह अंतर्राष्‍ट्रीय व्‍यापार के प्रति भारत की प्राचीन और चिरस्‍थाई प्रतिबद्धता का भी प्रतीक है।
    राष्‍ट्रपति ने कहा कि हमारा समाज सहज रूप खुला है, जिसके द्वार मुक्‍त व्‍यापारिक प्रवाह और सांस्‍कृतिक आदान-प्रदान के लिए हमेशा खुले हैं। हमने हमेशा ही उदारवादी नियम आधारित अंतर्राष्‍ट्रीय व्‍यापार को महत्‍व दिया है। यह हमारे डीएनए का हिस्सा है और यह एक विरासत है जिस पर आधुनिक भारत तथा आईआईटीएफ का निर्माण हो रहा है।
    राष्‍ट्रपति ने कहा कि इस वर्ष आईआईटीएफ ऐसे समय आयोजित किया जा रहा है जब वैश्विक अर्थव्‍यवस्‍था में भारत को उभरती हुई अर्थव्‍यवस्‍था के रूप में मान्‍यता दी गई है। विश्‍व ने भारत में कारोबार के वातावरण में परिवर्तन तथा व्‍यापार करने में सुगमता को स्‍वीकार किया है। वस्‍तु और सेवा कर शुरू करना एक असाधारण कदम है। इससे राज्‍यों के बीच की बाधाएं दूर हुई है। 
     इससे आम बाजार और अधिक औपचारिक अर्थव्‍यवस्‍था तैयार करने के साथ ही विनिर्माण क्षेत्र के सुदृढ़ीकरण को बढ़ावा मिला है। इन प्रयासों के परिणाम से पिछले तीन वर्ष में प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में काफी बढ़ोतरी हुई है, जो 2013-14 में 36 बिलियन डॉलर से बढ़कर 2016-17 में 60 बिलियन डॉलर हो गया। 
       राष्‍ट्रपति ने कहा कि 222 विदेशी कंपनियों सहित 3,000 प्रदर्शक आईआईटीएफ-2017 में शामिल हो रहे हैं। इसमें भारत के 32 राज्‍य और केंद्रशासित प्रदेश प्रतिनिधित्‍व कर रहे हैं। स्‍वयं सहायता समूह से लेकर बड़े व्‍यापारिक घरानों और लघु तथा मध्‍यम विनिर्माण उद्यमों से लेकर डिजीटल स्‍टार्ट-अप्‍स संस्‍थान इसमें भाग ले रहे हैं।
   आईआईटीएफ एक छोटा भारत है। यह विविधता का चित्र और उपमहाद्वीप की संपूर्ण ऊर्जा है। राष्‍ट्रपति ने कहा कि भारत के आर्थिक सुधारों और नीतियों का केंद्र बिंदु गरीबी हटाना तथा लाखों सामान्‍य परिवारों को समृद्ध करना है।
     व्‍यापार से आम आदमी की मदद होनी ही चाहिए। वे ही अंतिम हितधारक हैं। भारत सरकार की मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, स्टार्ट-अप इंडिया, स्टैंड-अप इंडिया, स्किल इंडिया, स्मार्ट सिटीज और किसानों की आमदनी दोगुनी करने के संकल्प जैसी प्रमुख पहलें जमीनी स्तर के लोगों के लिए अधिक सार्थक आर्थिक सुधार करने का प्रयास हैं।