Tuesday, 20 June 2017

चेन्नई में स्वदेश निर्मित फ्लोटिंग डॉक का जलावतरण

            वाइस एडमिरल डीएम देशपांडे, एवीएसएम, वीएसएम, युद्धपोत उत्पादन और अधिग्रहण के नियंत्रक, की पत्नी श्रीमती अंजली देशपांडे ने चेन्नई के नजदीक काट्पल्ली में लार्सन एंड टुब्रो लिमिटेड (एलएंडटी) के शिपयार्ड पर आयोजित समारोह में भारतीय नौसेना का पहला स्वदेशी निर्मित फ्लोटिंग डॉक (एफडीएन -2) का शुभारंभ किया।

        वाइस एडमिरल बी कन्नन (सेवानिवृत्त), पीवीएसएम, एवीएसएम, वीएसएम, एल एंड टी के पोत निर्माण विभाग के प्रमुख, के औपचारिक स्वागत के बाद समारोह में मुख्य अतिथि वाइस एडमिरल डीएम देशपांडे, एवीएसएम, वीएसएम, युद्धपोत उत्पादन और अधिग्रहण नियंत्रक ने अपने विचार रखे। इसके बाद परंपराओं के अनुसार, श्रीमती अंजली देशपांडे ने फ्लोटिंग डॉक पर 'कुमकुम' लगाया। 
           उन्होंने डॉक को शुभकामना दिया तथा युद्धपोत का जलावतरण भी किया। इस अवसर पर वाइस एडमिरल डी एम देशपांडे ने एफडीएन -2 के डिजाइन और निर्माण में एल एंड टी के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने यह बताया कि स्वदेश में बना हुआ इस फ्लोटिंग डॉक से 'मेक इन इंडिया' दृष्टि को साकार कर भारत में उपलब्ध क्षमताओं का प्रमाण को और बल मिलता है।
              उन्होंने इस उपलब्धि के लिए एल एंड टी की पूरी टीम का स्वागत करते हुए बधाई भी दिया। फ़्लोटिंग डॉक एक स्वदेशी डिजाइन और निर्मित प्लेटफार्म है, जिसमें कला मशीनरी और नियंत्रण प्रणाली लगा है जिसके द्वारा 8000 टोंस विस्थापन के युद्धपोतों को डॉक करने की क्षमता है। इसमें उन्नत ऑटोमेटेड ब्लास्ट कंट्रोल सिस्टम के साथ उच्च क्षमता वाला ब्वास्ट पंप भी है।
             इस डॉक में एफडीएन -2 के साथ नई प्रौद्योगिकी है जो खराब मौसम की स्थिति में मरम्मत और अन्य गतिविधियों को सुविधाजनक बनाता है। फ्लोटिंग डॉक (एफडीएन -2), यार्ड 55000, भारत में डिजाइन और एल एंड टी शिपयार्ड, काट्पल्ली में निर्मित है जो पोत निर्माण में भारत की आत्मनिर्भरता में एक मील का पत्थर है।

मध्‍य प्रदेश के 64 छोटे शहरों के लिए 275 मिलियन डॉलर का ऋण

         एशियाई विकास बैंक व भारत सरकार ने मध्‍य प्रदेश के 64 छोटे शहरों में शहरी सेवाओं के उन्‍नयन के लिए 275 मिलियन डॉलर के ऋण पत्र पर हस्‍ताक्षर किए। 

       भारत सरकार की ओर से वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामले विभाग में बहुपक्षीय संस्‍थानों के संयुक्‍त सचिव राजकुमार तथा एशियाई विकास बैंक की ओर से भारतीय मिशन के उप-निदेशक एल. बी. सोंजाजा ने ऋण पत्र पर हस्‍ताक्षर किए। इस धनराशि का उपयोग मध्‍य प्रदेश के शहरी सेवा सुधार परियोजना में किया जाएगा। 
         मध्‍य प्रदेश सरकार की ओर से शहरी विकास और आवास विभाग के सचिव विवेक अग्रवाल ने परियोजना समझौता पत्र पर हस्‍ताक्षर किए। राजकुमार ने बताया, मध्‍य प्रदेश में तेजी से हो रहे शहरीकरण के लिए बड़े निवेश की आवश्‍यकता है। शहरी अवसंरचना में सुधार के लिए पाइपों के माध्‍यम से पेयजल की निर्बाध आपूर्ति बहुत आवश्‍यक है और इससे परियोजना-क्षेत्र के निवासियों को सुरक्षित पेयजल उपलब्‍ध होगा। 
            सोंजाजा ने कहा, एडीबी के निरंतर सहयोग से राज्‍य के शहरी विकास की गुणवत्ता, कार्यकुशलता और सतत विकास में बढ़ावा मिलेगा और इससे शहरी सेवाओं की उपलब्‍धता और संस्‍थागत क्षमता में वृद्धि के साथ-साथ पेयजल प्रबंधन में भी सुधार होगा। इस परियोजना का मुख्‍य तत्‍व डिजाइन-निर्माण-संचालन है। 
          इसमें 10 वर्षों के लिए संचालन और रख-रखाव शामिल है। इससे पेयजल सेवा के संचालन में निरंतरता और वित्तीय स्थिरता आएगी। यह परियोजना राज्‍य के 64 छोटे और मध्‍यम शहरों में पेयजल आपूर्ति को समावेशी और निरंतरता प्रदान करेगी तथा जलवायु की विषमता से सामना करने में सहायता करेगी। 
           खजुराहो और राजनगर जैसे विरासत वाले शहरों में स्‍टॉर्म वॉटर तथा सीवेज अवसंरचना का विकास किया जाएगा। यह परियोजना राज्‍य सरकार की शहरी अवसंरचना के विकास की प्रतिबद्धता का एक उदाहरण है। 

      एडीबी द्वारा पहले दिये गए ऋण से 4 बड़े शहरों के 50 लाख निवासियों तक सुरक्षित पेयजल आपूर्ति करने में सहायता मिली थी। एडीबी द्वारा दिये गये ऋण के अतिरिक्‍त मध्‍य प्रदेश सरकार ने 124 मिलियन डॉलर की धनराशि इस योजना के लिए आवंटित की है। यह परियोजना पांच वर्षों तक चलेगी और जून, 2022 तक इसके पूरे होने की उम्‍मीद है।

राउरकेला इस्‍पात संयंत्र के आदिवासियों की समस्‍याओं का अविलम्‍ब समाधान हो

     राष्‍ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने ओडिशा के मुख्‍य सचिव को निर्देश दिए कि ओडिशा सरकार सकारात्‍मक पहल कर राउरकेला इस्‍पात संयंत्र के लिए अधिग्रहित भूमि के विस्‍तापित आदिवासियों की विभिन्‍न समस्‍याओं का अविलम्‍ब समाधान करे। 

     आयोग के अध्‍यक्ष नंद कुमार साय की अध्‍यक्षता में नई दिल्ली में आयोजित हुई बैठक में ओडिशा के मुख्‍य सचिव आदित्‍य प्रसाद, प्रमुख राजस्‍व सचिव सी एस कुमार, सुंदरगढ के जिला कलेक्‍टर विनीत भारद्वाज एवं आउरकेला स्‍टील प्‍लांट के मुख्‍य कार्यकारी अधिकारी अश्विनी कुमार समेत ओडिशा सरकार, केंद्रीय इस्‍पात मंत्रालय तथा राउरकेला स्‍टील संयंत्र के वरिष्‍ठ अधिकारी उपस्थित हुए।
     आयोग ने केंद्रीय इस्‍पात मंत्रालय को निर्देश दिया कि वे संयुक्‍त सचिव स्‍तर के अधिकारी से जांच करवायें कि राउरकेला इस्‍पात संयंत्र के लिए अधिग्रहित भूमि किसी सहकारी समिति अथवा किसी निजी संस्‍था को उपयोग के लिए नहीं दी गई। साथ ही यह भी जांच की जाए कि संयंत्र को भविष्‍य में होने वाले विस्‍तार के लिए वास्‍तव में कितनी भूमि की जरूरत है तथा संयंत्र के पास अनुपयोगी भूमि कितनी है। 
      आयोग ने ओडिशा के मुख्‍य सचिव को निर्देश दिए कि वे विस्‍तापित आदिवासियों के रोजगार एवं कल्‍याण समेत विभिन्‍न मुददों पर कार्यवाही कर स्‍थायी समाधान निकालने का प्रयास करे। आयोग ने मुख्‍य सचिव को यह भी निर्देश दिए कि सरकार विस्‍थापितों के लिए आवंटित की गई आवा‍सीय एवं कृषि योग्‍य भूमि के स्‍थायी पट्टे करे। 
      आयोग ने सुंदरगढ के जिला कलेक्‍टर को निर्देश दिए कि वे आदिवासियों के हितों की रक्षा के लिए तथा उन्‍हें संरक्षण प्रदान करने के लिए जरूरी कदम उठाए। आयोग ने जिला कलेक्‍टर एवं संयंत्र के अधिकारियों को निर्देश दिए कि 1993 में रोजगार देने के लिए जिन 1098 लोगों को चिहिन्‍त किया गया था उनमें से शेष रहे लोगों को अविलम्‍ब संयंत्र में रोजगार दिया जाये। साथ ही जिन लोगों को रोजगार दिया गया उनका सत्‍यापन किया जाये कि क्‍या वास्‍तवित विस्‍तापितों को ही रोजगार दिया गया है।