Friday, 24 March 2017

गृह मंत्री से रूस के संघीय सुरक्षा सेवा के निदेशक ने मुलाकात की

            रूसी संघ के संघीय सुरक्षा सेवा (एफएसबी) के निदेशक एलेक्सजेंडर बोर्तनीकोव ने यहां गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की। 

           राजनाथ सिंह ने रूसी प्रतिनिधिमंडल से कहा कि भारत और रूस गहरे मित्र हैं। दोनों के बीच परिवार जैसे संबंध हैं। उन्होंने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन विभिन्न अवसरों पर एक-दूसरे से मिलते रहते हैं। इस तरह द्विपक्षीय सहयोग को मजबूती मिलती है। उन्होंने कहा कि रूसी राष्ट्रपति को सभी भारतीय प्रेम करते हैं। उनका सम्मान करते हैं। 

                प्रतिनिधिमंडल स्तरीय बैठक लगभग 45 मिनट चली, जिसके दौरान गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने पड़ोसी देश द्वारा आयोजित किये जाने वाले आतंकवाद का मुद्दा उठाया जो न सिर्फ भारत के लिए बल्कि पूरे अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के लिये खतरा है। दोनों पक्षों ने इस बात पर गौर किया कि ऐसी कुछ ताकतें हैं, जो दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में बाधा उत्पन्न करने की कोशिश करती हैं, लेकिन वे अपने इस प्रयास में सफल नहीं हैं।
 

          रूसी प्रतिनिधिमंडल ने रूस में इस वर्ष होने वाली सुरक्षा एजेंसियों तथा कानून लागू करने वाले संगठनों के प्रमुखों की अंतर्राष्ट्रीय बैठक में हिस्सा लेने के लिए राजनाथ सिंह को आमंत्रित किया, जिसे उन्होंने स्वीकार किया।

             इस अवसर पर रूस की संघीय सुरक्षा सेवा, आतंकवाद विरोधी विभागों और संगठनों, गुप्तचर एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने बैठक में हिस्सा लिया। भारत की तरफ से गृह सचिव राजीव महर्षि और गृह मंत्रालय तथा विदेश मंत्रालय के आला अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

नई दिल्‍ली में इंडिया कारपेट एक्सपो

            कारपेट निर्यात संवर्धन परिषद नई दिल्‍ली स्थित प्रगति मैदान के हॉल नम्‍बर 11, 12 और 12ए में 27 मार्च से लेकर 30 मार्च, 2017 तक 33वें इंडिया कारपेट एक्‍सपो का आयोजन करेगी, जो हस्‍तनिर्मित कालीनों और अन्‍य फ्लोर कवरिंग्‍स की प्राप्ति का एक अहम प्‍लेटफॉर्म है।

           एशिया के सबसे बड़े हस्‍तनिर्मित कालीन मेलों में शुमार किए जाने वाले इंडिया कारपेट एक्‍सपो का उद्घाटन 27 मार्च, 2017 को केन्‍द्रीय कपड़ा मंत्री श्रीमती स्‍मृति जुबिन इरानी द्वारा किया जाएगा। इस अवसर पर कपड़ा राज्‍य मंत्री अजय टम्‍टा, वस्‍त्र सचिव श्रीमती रश्मि वर्मा और व्‍यापार एवं मीडिया जगत के अन्‍य वरिष्‍ठ अधिकारीगण एवं प्रतिनिधि भी उपस्थित रहेंगे। इस एक्‍सपो के आयोजन का उद्देश्‍य भारतीय हस्‍तनिर्मित कालीनों और अन्‍य फ्लोर कवरिंग्‍स की सांस्‍कृतिक विरासत के साथ-साथ उनके निर्माताओं के बुनाई कौशल को भी इसमें आने वाले विदेशी कालीन खरीदारों के बीच बढ़ावा देना है। 

            यह एक्‍सपो अंतरराष्‍ट्रीय कालीन खरीदारों, खरीदारी करने वाले घरानों, क्रय एजेंटों एवं वास्तुकारों के लिए आदर्श प्‍लेटफॉर्म है। दरअसल, इस मेले में उन्‍हें भारतीय कालीन निर्माताओं एवं निर्यातकों से मिलने एवं दीर्घकालिक कारोबारी संबंध स्‍थापित करने में मदद मिलेगी। यह सर्वोत्‍तम हस्‍तनिर्मित कालीनों, गलीचों एवं अन्‍य फ्लोर कवरिंग्‍स को एक ही छत के नीचे हासिल करने के लिहाज से खरीदारों के लिए एक अनूठा प्‍लेटफॉर्म है। इस एक्‍सपो ने दुनिया भर के कालीन खरीदारों के लिए खुद को एक लोकप्रिय सोर्सिंग प्‍लेटफॉर्म के रूप में स्‍थापित कर लिया है। 

               33वें एक्‍सपो के लिए सदस्‍य निर्यातकों की ओर से उत्‍साहजनक प्रतिक्रिया मिली है। 305 प्रदर्शक इस एक्‍सपो के दौरान अपने उत्‍पादों को प्रदर्शित करेंगे। 55 देशों के लगभग 410 कालीन आयातकों ने इस एक्‍सपो के लिए पंजीकरण कराया है। ये कालीन आयातक मुख्‍यत: ऑस्‍ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, चिली, जर्मनी, मेक्सिको, रूस, सिंगापुर, दक्षिण अफ्रीका, तुर्की, ब्रिटेन एवं अमेरिका के हैं। एक खास बात यह भी है कि इस मेगा एक्‍सपो में बुल्‍गारिया, इजरायल, मलेशिया, मॉरीशस, ताइवान, जिम्‍बाब्‍वे, वियतनाम, सर्बिया और हंगरी का पहली बार प्रतिनिधित्‍व होने जा रहा है। 

              सीईपीसी के अध्‍यक्ष महावीर प्रताप शर्मा ने कहा कि यह प्रदर्शनी एवं क्रेता-विक्रेता बैठक हस्‍तनिर्मित कालीनों के भारतीय निर्यात को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने की दिशा में पहला कदम है। सीईपीसी को इस एक्‍सपो में अच्‍छा-खासा व्‍यवसाय होने का पक्‍का भरोसा है। सीईपीसी ने इस एक्‍सपो के प्रचार-प्रसार में योगदान के लिए मीडिया से पूर्ण सहायता करने का अनुरोध किया है, ताकि इसके प्रतिभागी अच्‍छा व्‍यवसाय करने में कामयाब हो सकें। 

दस वर्ष देश के लिए सुनहरा युग

            विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन ने कहा है कि देश को आगे ले जाने में युवाओं की भूमिका पर प्रधानमंत्री को पूरा विश्वास है। 

            राष्ट्रीय अनुसंधान विकास निगम (एनआरडीसी) के प्रतिभाशाली अन्वेषण पुरस्कार प्रदान करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री 2022 तक एक नए भारत की अभिकल्पना करते हैं। मंत्री ने कहा कि देश की मानव संपदा को देखते हुए अगले पांच से दस वर्ष देश के लिए सुनहरा युग होगा। उन्होंने सबसे आग्रह किया कि वे भारत के गौरव को स्थापित करने में पूरा आत्मविश्वास के साथ काम करें। उन्होंने एनआरडीसी जैसे संस्थानों का आह्वान किया कि वे नवाचार के लिए जमकर प्रयास करें। 

             डीएसआईआर के सचिव और सीएसआईआर के महानिदेशक डॉ. गिरीश साहनी ने कहा कि एनआरडीसी ने अब तक शानदार काम किया है। उसका यह दायित्व है कि वह प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अग्रिणी भूमिका निभाए। उन्होंने कहा कि एनआरडीसी उन व्यक्तियों तक प्रौद्योगिकी पहुंचाए, जिनके पास पर्याप्त वित्तीय संसाधन नहीं हैं। उपरोक्त आयोजन का उद्देश्य देश में अन्वेषण की भावना को प्रोत्साहन देना है।

            इसके लिए विभिन्न क्षेत्रों में प्रतिभाशाली गतिविधियों के लिए पुरस्कार प्रदान किये जाते हैं। इस अवसर पर सरकार और वैज्ञानिक तथा अकादमिक समुदायों सहित विभिन्न हितधारक भी उपस्थित थे।

लड़कियों के लिए आधुनिक शिक्षण संस्थानों में 40 प्रतिशत आरक्षण

                 केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं संसदीय कार्य राज्यमंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा है कि अल्पसंख्यक समाज के दस्तकारों-शिल्पकारों की कला-कौशल की विरासत को मार्किट-मौका मुहैया कराने के लिए सभी राज्यों में "हुनर हब" बनाये जायेंगे।

          नकवी ने कहा कि देश भर के अल्पसंख्यक समाज के दस्तकारों, शिल्पकारों का "डेटा बैंक" तैयार किया जा रहा है। नई दिल्ली में आयोजित बहु-क्षेत्रीय विकास कार्यक्रम (एमएसडीपी), छात्रवृत्ति और अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं के कार्यान्वयन की प्रगति की समीक्षा करने के लिए राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के प्रधान सचिवों/अल्पसंख्यक कल्याण प्रभारी सचिवों के सम्मेलन में नकवी ने यह बात कही।

             नकवी ने कहा कि अल्पसंख्यक समाज की पुश्तैनी शिल्पकारी-दस्तकारी को आधुनिक युग की जरुरत के हिसाब से कौशल विकास के जरिये तराशने हेतु बड़े पैमाने पर अभियान चलाया जा रहा है। जिनमे राजगीर, बढ़ई, जरदोजी, टेलरिंग, हाउस कीपिंग, आधुनिक-आर्गेनिक कृषि, कुम्हार, ज्वेलरी, यूनानी-आयुर्वेद अनुसन्धान, ब्रास, कांच, मिटटी से निर्मित सामग्री का निर्माण शामिल है। नकवी ने कहा कि "हुनर हब" के सम्बन्ध में राज्य अपने प्रस्ताव भेजे ताकि अगले वित्तीय वर्ष में कम से कम दो दर्जन राज्यों में ऐसे "हुनर हब" का निर्माण हो सके, जहाँ "हुनर हाट" एवं अन्य सामाजिक-शैक्षिक, कौशल विकास की गतिविधियां की जा सके। 

               नकवी ने कहा कि अल्पसंख्यक मंत्रालय द्वारा आयोजित दो "हुनर हाट" बहुत ही लोकप्रिय साबित हुए हैं। "हुनर हाट" के माध्यम से अल्पसंख्यक समाज के दस्तकारों/शिल्पकारों को अपनी कला को देश ही नहीं विदेश के दर्शकों के सामने प्रदर्शित करने का मौका मिला है। नकवी ने जानकारी देते हुए कहा कि पिछले 6 महीनों में लगभग 262 करोड़ की लागत से 200 से ज्यादा “सद्भाव मंडप” और लगभग 24 “गुरुकुल” प्रकार के आवासीय स्कूलों को स्वीकृति दी गई है। "सद्भाव मंडप" विभिन्न प्रकार के सामाजिक-शैक्षिक-सांस्कृतिक एवं कौशल विकास की गतिविधियों का संपूर्ण केंद्र होंगे साथ ही यह किसी आपदा के समय राहत केंद्र के रूप में भी इस्तेमाल किये जा सकेंगे। नकवी ने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन को मजबूती देने के लिए अल्पसंख्यक मंत्रालय ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। 

                  केंद्र सरकार देश भर के एक लाख मदरसों/शिक्षण संस्थानों में शौचालय का निर्माण करेगी। नकवी ने कहा कि इन शैक्षिक केंद्रों में सरकार की योजना मध्याह्न भोजना योजना और शिक्षकों के लिए अपग्रेड कौशल योजना शुरू करने की भी है जो कि "3-टी" सूत्र - टीचर, टिफिन और टॉयलेट का हिस्सा है। नकवी ने कहा कि इस योजना की सफलता में राज्यों की बड़ी ही महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। नकवी ने कहा कि कई वर्षों के बाद अल्पसंख्यक मंत्रालय के बजट में बड़ी वृद्धि की है। 2017-18 के लिए अल्पसंख्यक मंत्रालय का बजट बढ़ा कर 4195.48 करोड़ रूपए कर दिया गया है। यह पिछले बजट के 3827.25 करोड़ रूपए के मुकाबले 368.23 करोड़ रूपए (9.6 प्रतिशत की वृद्धि) अधिक है।

                 नकवी ने कहा कि बजट में बढ़ोतरी से अल्पसंख्यकों के सामाजिक-आर्थिक-शैक्षिक सशक्तिकरण में मदद मिलेगी। नकवी ने कहा कि इस बार बजट का 70 प्रतिशत से ज्यादा धन अल्पसंख्यकों के शैक्षिक सशक्तिकरण एवं कौशल विकास, रोजगारपरक ट्रेनिंग पर खर्च किया जायेगा। बजट का बड़ा भाग विभिन्न स्कालरशिप, फ़ेलोशिप और कौशल विकास की योजनाओं जैसे "सीखो और कमाओ", "नई मंजिल","नई रौशनी", "उस्ताद", "गरीब नवाज़ कौशल विकास केंद्र", "बेगम हजरत महल स्कॉलरशिप" पर खर्च किये जाने का प्रावधान है। इसके अलावा बहु-क्षेत्रीय विकास कार्यक्रम (एमएसडीपी) के तहत भी शैक्षिक विकास की गतिविधियों के इंफ्रास्ट्रक्चर पर धन खर्च किया जायेगा। 

               नकवी ने कहा कि अल्पसंख्यक मंत्रालय, अल्पसंख्यकों को बेहतर पारंपरिक एवं आधुनिक शिक्षा मुहैय्या कराने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर के 5 शिक्षण संस्थानों की स्थापना कर रहा है। तकनीकी, मेडिकल, आयुर्वेद, यूनानी सहित विश्वस्तरीय कौशल विकास की शिक्षा देने वाले संस्थान देश भर में स्थापित किये जायेंगे। एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया गया है, जो शिक्षण संस्थानों की रुपरेखा-स्थानों आदि के बारे में चर्चा कर रही है। जल्द ही अपनी विस्तृत रिपोर्ट देगी। मंत्रालय की कोशिश होगी कि यह शिक्षण संस्थान 2018 से काम करना शुरू कर दें। इन शिक्षण संस्थानों में 40 प्रतिशत आरक्षण लड़कियों के लिए किये जाने का प्रस्ताव है।

                 अल्पसंख्यकों के शैक्षिक सशक्तिकरण के लिए किये जा रहे हमारे प्रयासों में "गरीब नवाज़ स्किल डेवलपमेंट सेंटर शुरू करना, छात्राओं के लिए "बेगम हजरत महल स्कालरशिप", करना एवं 500 से ज्यादा उच्च शैक्षिक मानकों से भरपूर आवासीय विद्यालय एवं रोजगार परक कौशल विकास केंद्र शामिल हैं। 

                इस सम्मेलन का उद्देश्य 12वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान कार्यान्वित अल्पसंख्यक मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं की कार्यक्षमता की समीक्षा करने के साथ-साथ 14वें वित्त आयोग (2017-18 से 2019-20 तक) की शेष अवधि के दौरान कार्यान्वयन के लिए राज्यों के सुझाव प्राप्त करना है।

मनरेगा : ग्रामीण परिवारों की जीवनरेखा

           महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) ने अपनी स्थापना के बाद से अब तक एक लंबा सफर तय कर लिया है। यह लाखों लोगों के लिए एक जीवनरेखा बन गया है।

            इस अधिनियम को 7 सितंबर 2005 को अधिसूचित किया गया था ताकि प्रत्येक ग्रामीण परिवार को एक वर्ष में कम से कम 100 दिन का रोजगार प्रदान किया जा सके, जिनके वयस्क सदस्य अकुशल दस्‍ती काम कर सकते थे। सामाजिक समावेश, लिंग समानता, सामाजिक सुरक्षा और न्यायसंगत विकास महात्मा गांधी नरेगा के संस्थापक स्तंभ हैं। वर्ष 2015-16 के दौरान, 235 करोड़ दिवस पैदा किए गए, जोकि पिछले पांच वर्षों की तुलना में सबसे ज्‍यादा था। वर्ष 2016-17 के दौरान 4.8 करोड़ परिवारों को 142.64 लाख कार्य-क्षेत्रों में रोजगार दिए गए।

             इस प्रक्रिया में रोजगार के 200 करोड़ दिवस पैदा किए गए। कुल रोजगार का 56 प्रतिशत हिस्‍सा महिलाओं के लिए पैदा किया गया। इस कार्यक्रम की शुरुआत के बाद से अब तक महिलाओं की यह भागीदारी सबसे ज्‍यादा है। इस कार्यक्रम के लिए अब तक 3,76,546 करोड़ रुपए दिए गए हैं। वित्‍त वर्ष 2017-18 के लिए 48,000 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं, जोकि मनरेगा के लिए अभी तक आवंटित राशियों में सबसे अधिक है। वर्ष 2016-17 में 51,902 करोड़ रुपए खर्च किए गए जोकि इसकी शुरुआत के बाद से अब तक का सबसे अधिक खर्च है। औसतन हर साल (वित्‍त वर्ष 2013-14 तक) 25 से 30 लाख कार्य पूरे किए गए थे, वहीं मौजूदा वित्‍त वर्ष 2016-17 में 51.3 लाख काम पूरे किए गए।

             इस कार्यक्रम की शुरुआत के बाद पहली बार, जल संरक्षण के लिए समेकित दिशानिर्देश तैयार किए गए। मिशन जल संरक्षण - प्रधान मंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) और इंटीग्रेटेड वाटरशेड मैनेजमेंट प्रोग्राम (आईडब्ल्यूएमपी) के साथ मिलकर मनरेगा के तहत प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन (एनआरएम) संबंधित कार्यों के लिए योजना और निगरानी फ्रेमवर्क तैयार किया गया है। इनके लिए वैज्ञानिक नियोजन और नवीनतम प्रौद्योगिकी का उपयोग करके जल प्रबंधन का निष्पादन ही मंत्रालय का मुख्‍य ध्‍येय है। वित्‍त वर्ष 2016-17 में कुल खर्च का 63 प्रतिशत हिस्‍सा एनआरएम (प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन) कार्यों पर खर्च किए गए। वित्‍त वर्ष 2016-17 में कृषि और संबंधित क्षेत्रों के कार्यों पर लगभग 70 प्रतिशत खर्च किया गया, जोकि वित्‍त वर्ष 2013-14 में सिर्फ लगभग 48 प्रतिशत था। भू-मनरेगा तो एक पथप्रदर्शक पहल है, जो बेहतर नियोजन, प्रभावी निगरानी, बढ़ी हुई दृश्यता और अधिक पारदर्शिता के लिए मनरेगा के तहत बनाई गई सभी संपत्तियों को भू-टैगिंग के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का उपयोग करती है। 

              इस पहल की शुरुआत वित्‍त वर्ष 2016-17 में की गई। लगभग 65 लाख संपत्तियों को भू-टैग किया गया। इसे पब्लिक डोमेन में लाया गया। निधि प्रवाह तंत्र के बेरोकटोक चलने और मजदूरी के भुगतान में देरी को कम करने के लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 21 राज्यों और 1 केंद्र शासित प्रदेश में राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक फंड मैनेजमेंट सिस्टम (एनईएफएमएस) लागू किया है। इलेक्ट्रॉनिक फंड मैनेजमेंट सिस्टम (ईएफएमएस) के द्वारा एमजीएनआरईजीए के कर्मचारियों के बैंक/डाकघर खातों में मजदूरी का लगभग 96 प्रतिशत हिस्‍सा इलेक्ट्रॉनिक रूप से भुगतान किया जा रहा है। 

              वित्त वर्ष 2013-14 में मजदूरी का सिर्फ 37 प्रतिशत भुगतान इलेक्ट्रॉनिक रूप से किया गया था। अभी 8.9 करोड़ सक्रिय मजदूरों के एनआरईजीएसोफ्ट-एमआईएस में आधार संख्या दर्ज है, जबकि जनवरी 2014 में यह संख्या मात्र 76 लाख थी। अब तक 4.25 करोड़ मजदूरों को आधार आधारित भुगतान प्रणाली (एबीपीएस) के लिए सक्षम किया गया है। वित्‍त वर्ष 2016-17 के दौरान जॉब कार्ड सत्‍यापन और अद्यतन प्रक्रिया शुरू की गई थी। अभियान के रूप में चलाकर 75 प्रतिशत सक्रिय जॉब कार्डों का सत्‍यापन किया गया। वर्ष 2016-17 के लिए पहले जारी किए गए 1039 परिपत्रों/परामर्शों और वार्षिक मास्टर परिपत्र (एएमसी) जारी करके मनरेगा को सरल बनाने के लिए पहल की गई। वित्‍त वर्ष 2017-18 के लिए एएमसी जारी किया जाएगा। 

                 ग्राम पंचायत स्तर पर रजिस्टरों की संख्या में कमी करने के लिए औसतन 22 रजिस्टरों की तुलना में 7 सरल रजिस्टरों की प्रक्रिया लागू की गई है। अब तक, 2.05 लाख ग्राम पंचायतों ने इसे अपना लिया है। यह कार्यक्रम सामाजिक ऑडिट और आंतरिक लेखा परीक्षा की एक अधिक स्वतंत्र और सशक्त प्रणाली की दिशा में आगे बढ़ रहा है, ताकि महिला एसएचजी से लिए गए सामाजिक लेखा परीक्षकों के एक प्रशिक्षित सामुदायिक काडरों के द्वारा जवाबदेही के साथ-सा‍थ विकास भी सुनिश्चित किया जा सके। मंत्रालय ने अंतरराज्‍यीय आदान-प्रदान कार्यक्रम की शुरुआत की है, जिससे विचारों और पद्धतियों को साझा किया जा सके। 2016-17 के दौरान अब तक, तमिलनाडु, राजस्थान, मेघालय, झारखंड, आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्यों ने इस पहल को लागू किया है। 

           पहली बार, बुनियादी स्‍तर पर पीएमजीएसवाई दिशानिर्देशों के आधार पर गैर-पीएमजीएसवाई सड़कों के लिए दिशानिर्देश बनाए गए हैं। इन संपत्तियों के भविष्‍य में पीएमजीएसवाई मानकों के स्‍तर तक की गुणवत्‍ता की संभावना होगी।

कृषि योगदान लगभग 17 फीसदी

           भारतीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग आम तौर पर ‘तेजी से बढ़ने वाले उद्योग’ के रूप में जाना जाता है क्योंकि इसमें कृषि अर्थव्यवस्था के विकास की असीम संभावनाएं हैं। 

        इस क्षेत्र की अहमियत इस तथ्य से और भी ज्यादा बढ़ जाती है कि 60 फीसदी से भी ज्यादा आबादी आजीविका के लिए कृषि से जुड़ी गतिविधियों पर निर्भर है, जबकि सकल मूल्य वर्द्धित (जीवीए) में कृषि क्षेत्र का योगदान लगभग 17 फीसदी है। वित्त मंत्री ने संसद में बजट भाषण में भारत में निर्मित अथवा उत्पादित किये जाने वाले खाद्य उत्पादों के विपणन के लिए एफआईपीबी रूट के तहत 100 फीसदी एफडीआई (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) की अनुमति देने की घोषणा की थी, जिसमें खाद्य उत्पादों का ई-कॉमर्स भी शामिल है।

             स्वत: रूट के तहत 100 फीसदी एफडीआई की अनुमति खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की निर्माण संबंधित गतिविधि में दी गयी है। इसी तरह सकल/कैश एंड कैरी व्यवसाय में भी स्वत: रूट के तहत 100 फीसदी एफडीआई की इजाजत दी गयी है, जिसमें खाद्य उत्पाद भी शामिल हैं। भारत में एफडीआई और निवेश को बढ़ावा देने के लिए खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री श्रीमती हरसिमरत कौर बादल के नेतृत्व में आधिकारिक मंत्रिस्तरीय प्रतिनिधिमंडल विश्व भर का दौरा कर रहे हैं।

            इसके लिए मिली शुरुआती प्रतिक्रिया बड़ी ही उत्साहवर्धक रही है। बड़ी संख्या में विदेशी कंपनियों ने भारत आकर विश्वसनीय स्थानीय भागीदार से हाथ मिलाने में रुचि दिखाई है। इसे ध्यान में रखते हुए खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ने मंत्रालय के अंतर्गत ही एक निवेश लक्ष्य निर्धारण एवं सुविधा डेस्क बनायी है जो उनकी मदद गठबंधन करने, नेटवर्क बनाने एवं भारत से वस्तुओं की प्राप्ति में करेगी। संबंधित प्रकोष्ठ भारतीय कंपनियों की एक सूची भी उनके विदेशी भागीदारों के लिए तैयार करेगा।

ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर चादर अर्पण

                प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नई दिल्ली में अल्पसंख्यक और संसदीय मामले राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी और प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री डा. जीतेंद्र सिंह को अजमेर शरीफ में ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर चादर अर्पण करने के लिए दी। 
 
            इस अवसर पर अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा, ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती के वार्षिक उर्स के अवसर पर, विश्व-भर में उनके अनुयायियों को शुभकामनाएं और बधाई | ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती, भारत की महान आध्यात्मिक परम्परा के प्रतीक हैं प्र् गरीब नवाज़ ने मानवता की सेवा का जो परिचय दिया है, वह निश्चय ही आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देता रहेगा | आने वाले उर्स के सफल आयोजन के लिए मेरी शुभकामनाएं |

राष्ट्रपति का ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय को पत्र

          राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय को पत्र लिखकर लंदन में हुए आंतकी हमले में निर्दोष नागरिको की मृत्यु पर शोक व्यक्त किया है।

           संदेश में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा कि “ लंदन में निर्दोष नागरिको के विरूद्ध हिंसा का समाचार प्राप्त होने पर भारत में दुख और शोक की लहर है। इस हमले में मृतको के परिवारो के प्रति मैं अपनी श्रद्धाजंलि व्यक्त करता हूं। भारत का ये दृढ़ विश्वास है कि आंतकवाद को किसी भी परिस्थिति में न्यायोचित नहीं कहा जा सकता है। मानवता पर इस अभिशाप को प्रभावी रूप से समाप्त करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को तत्काल प्रभाव से एकजुट होना होगा। 

            भारत के नागरिक संकट की इस घड़ी में ब्रिटेन के नागरिको के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। हमे विश्वास है कि ब्रिटेन के नागरिक लोकतंत्र और स्वतंत्र,उदार और बहुवादी समाज के महत्व को दुर्बल करने के इस प्रयास से अपनी जीवन शैली को प्रभावित नहीं होने देगें।

              मैं इस घटना में मारे गये लोगों के परिवारजनों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदना व्यक्त करता हूं। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं।
 

 

राष्‍ट्रपति से कॉमनवेल्थ ऑडिटर जनरल कांफ्रेंस ने भेंट की

           कॉमनवेल्थ ऑडिटर जनरल कांफ्रेंस में भाग ले रहे प्रतिनिधियों ने राष्‍ट्रपति भवन में राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी से भेंट की। 

        इस अवसर पर राष्‍ट्रपति ने इस बात पर खुशी जताई कि राष्‍ट्रमंडल देशों के महालेखा परीक्षकों के बहुपक्षीय फोरम की बैठक इस साल भारत में आयोजित की गई है, ताकि सदस्‍य सुप्रीम ऑडिट संस्‍थानों (एसएआई) के लिए प्रासंगिकता से जुड़े समकालीन मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जा सके। 

                     उन्‍होंने कहा कि ऑडिट एक ज्ञान आधारित गतिविधि है, अत: इस तरह के आपसी संवाद के साथ-साथ ज्ञान, अनुभवों एवं सर्वोत्‍तम प्रथाओं को साझा करने से एसएआई के सभी सदस्‍य लाभान्वित होंगे। राष्‍ट्रपति ने कहा कि भारत में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) के कार्यालय को भारतीय संविधान के तहत स्‍थापित किया गया है। उन्‍होंने कहा कि सरकारी ऑडिट संसदीय वित्‍तीय नियंत्रण की योजना में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाता है। 

         राष्‍ट्रपति ने उम्‍मीद जताई कि उपर्युक्‍त सम्‍मेलन में विचारों के आदान-प्रदान और अनुभवों को साझा करने से भविष्‍य में न केवल राष्‍ट्रमंडल देशों, बल्कि दुनिया के कई अन्‍य राष्‍ट्रों का भी मार्गदर्शन करने में मदद मिलेगी।



 

समाज में पुलिस का महत्वपूर्ण स्थान

            पुदुचेरी की उपराज्यपाल डॉ. किरण बेदी ने पुलिस प्रशिक्षण संस्थानों के प्रमुखों की 35वीं राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित किया। 

            इस दो दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन गृह मंत्रालय के अंतर्गत, पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो द्वारा किया जा रहा है। इस अवसर पर डॉ. किरण बेदी ने कहा कि इस वर्ष संगोष्ठी का विषय ‘ई-लर्निंग’ लागत, समय और दूरी को कम करता है। उन्होंने कहा कि ई-लर्निंग केन्द्र सरकार के डिजिटल भारत पहल का अभिन्न अंग है। उन्होंने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि, प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षित करने के लिए प्रशिक्षकों को पूरा प्रयास करना चाहिए, क्योंकि किसी भी प्रशिक्षण का परिणाम प्रशिक्षकों के सिखाने के तरीके पर निर्भर करता है। डॉ. किरण बेदी ने कहा कि बात चाहे जीवन की हो अथवा पेशे की, मगर इंसान के लिए प्रत्येक दिन ही प्रशिक्षण अथवा सीखने का दिन होता है।

               उन्होंने कहा कि पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो एवं सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी, पुलिस अधिकारियों के प्रशिक्षण के लिए मुख्य केन्द्र हैं। इन केन्द्रों को प्रशिक्षण के क्षेत्र में सर्वोत्तम तरीकों को साझा करने के लिए नियमित रूप से मिलते रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि इन केन्द्रों को ई-लर्निंग के लिए सामग्री स्रोत की भूमिका निभानी चाहिए। डॉ. किरण बेदी ने यह भी कहा कि आईआईटी, आईआईएम एवं अन्य प्रबंधन संस्थानों का सहयोग भी पुलिस प्रशिक्षण संस्थानों को लेना चाहिए, क्योंकि ये संस्थान बेहतर अनुसंधान कर सकते हैं।

            प्रशिक्षण अभ्यासों के संबंध में कारगर सुझाव दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि समाज में पुलिस का महत्वपूर्ण स्थान है। पुलिस विभाग भारत को रहने एवं जीवन यापन करने के लिए बेहतर स्थान बना सकता है।