Wednesday, 15 February 2017

स्‍वच्‍छता-सफाई के लिए कायाकल्‍प

                  हम सार्वजनिक स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाओं की छवि बदलना चाहते हैं। कायाकल्‍प का जोर इन सुविधाओं में समुदाय के विश्‍वास और आत्‍मविश्‍वास को बढ़ाना देने के लिए स्‍वच्‍छता की संस्‍कृति वि‍कसित करने पर है।

         केन्‍द्रीय स्‍वास्‍थ्‍य और परिवार कल्‍याण मंत्री जे. पी. नड्डा ने यह बात सार्वजनिक स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाओं में स्‍वच्‍छता और साफ-सफाई के उच्‍च मानकों को बनाये रखने के लिए कायाकल्‍प पुरस्‍कार 2016-17 प्रदान करने के अवसर पर आयोजित समारोह में कही। उन्‍होंने पुरस्‍कार विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि अच्‍छी साफ-सफाई की प्रथा, कीट नियंत्रण, संक्रमण नियंत्रण जैसी प्रक्रियाएं शुरू की गई हैं। इसके अलावा स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल सेवाओं में स्‍वस्‍थ प्रतियोगिता और उत्‍कृष्‍टता की खोज इन्‍हें और अधिक प्रतिबद्ध बनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। 

           उन्‍होंने कहा कि अस्‍पतालों द्वारा दिखाये गये उत्‍साह और जोश तथा उनके सामूहिक प्रयास से स्‍वच्‍छता और साफ-सफाई तथा संक्रमण नियंत्रण की प्रक्रियाएं बेरोक-टोक जारी रहनी चाहिए। उन्‍होंने आईसीटी आधारित मेरा अस्‍पताल एप्‍लीकेशन का भी उल्‍लेख किया। इसके अलावा उन्‍होंने पेयजल और स्‍वच्‍छता मंत्रालय के लिए संयुक्‍त रूप से शुरू किये गये स्‍वच्‍छस्‍वस्‍थसर्वत्र नामक संयुक्‍त पहल के लिये किये गये प्रयास और उपलब्धियों के बारे में जिक्र किया।

         कायाकल्‍प योजना 2015 में शुरू की गई थी और पहले वर्ष में 10 केन्‍द्रीय सरकार संस्‍थानों और जिला अस्‍पतालों को इसमें शामिल किया गया था। इस साल इस योजना में 16 केन्‍द्रीय सरकार संस्‍थान शामिल हैं। इस समारोह में स्‍वास्‍थ्‍य सचिव सी. के. मिश्रा, महानिदेशक स्‍वास्‍थ्‍य सेवाएं डॉ. जगदीश प्रसाद, एएस एंड एमडी (एनएचएम) डॉ. अरुण कुमार पांडा, एएस (स्‍वास्‍थ्‍य) संजीव कुमार, संयुक्‍त सचिव (नीति) मनोज झालानी तथा राज्‍यों और केन्‍द्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।

खनन परिचालनों के लिए पोर्टल व मोबाइल एप लांच

                केन्‍द्रीय विद्युत, कोयला, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा और खान राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) पीयूष गोयल ने यहां पारदर्शिता, नीलामी निगरानी एवं संसाधन संवर्धन (ताम्र, टीएएमआरए) पोर्टल और मोबाइल एप की लांचिंग के लिए आयोजित कार्यक्रम की अध्‍यक्षता की जिसे खान मंत्रालय द्वारा विकसित किया गया है। 

            इसे 12 खनिज समृद्ध राज्‍यों में एक साथ लांच किया गया। गोयल ने यह महत्‍वपूर्ण घोषणा भी की कि सरकार 100 चिन्‍हित अपतटीय खनिज ब्‍लॉकों के लिए खोज एवं खनन लाइसेंस जारी करने में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए खनन नियमों में जल्‍द ही संशोधन करने पर विचार कर रही है। ‘ताम्र’ की खूबियों के बारे में उपस्थित लोगों को जानकारी देते हुए गोयल ने कहा कि खनन क्षेत्र में कारोबार करने में आसानी सुनिश्चित करने के एक हिस्‍से के तहत पारदर्शिता एवं जवाबदेही बढ़ाने के उद्देश्‍य के साथ ‘ताम्र’ भारत में खनन गतिविधि‍यां बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम है। 

                  इससे समस्‍त हितधारकों को खनन ब्‍लॉकों से जुड़ी वैधानिक मंजूरियों की ताजा स्थिति को जानने में मदद मि‍लेगी। यह वैधानिक एवं अन्‍य मंजूरियों की समयसीमा को कम करने की दिशा में सभी हितधारकों के लिए एक परस्‍पर संवादात्‍मक प्‍लेटफॉर्म होगा, क्‍योंकि इससे उत्‍पादन शुरू होने से पहले लगने वाले समय को कम करने में मदद मिलेगी। ‘ताम्र’ की खासियतों का उल्‍लेख करते हुए गोयल ने कहा कि किसी मंजूरी की प्राप्ति में देरी होने की स्थिति में ‘ताम्र’ संबंधित प्राधिकरण को सक्रिय करने वाला संदेश (ट्रिगर) भेजेगा, ताकि इसके लिए जवाबदेह माने जाने वाले व्‍यक्ति या निकाय द्वारा तत्‍काल सुधारात्‍मक कदम उठाये जा सकें। 

            इससे पहले खान सचिव बलविंदर कुमार ने अपने संबोधन में यह जानकारी दी कि ‘ताम्र’ नीलाम की जाने वाली खदानों की ब्‍लॉक-वार, राज्‍य-वार एवं खनिज-वार सूचनाओं को कवर करता है, विभिन्‍न वैधानिक मंजूरियों पर नजर रखता है।

भारत का विदेश व्‍यापार 22115.03 मिलियन डॉलर

              निर्यात में सुधार का रुख जनवरी, 2017 के दौरान भी बरकरार रहा। जनवरी, 2017 के दौरान 22115.03 मिलियन अमेरिकी डॉलर (150559.98 करोड़ रुपये) मूल्‍य की वस्‍तुओं का निर्यात किया गया, जो जनवरी, 2016 में हुए निर्यात के मुकाबले डॉलर के लिहाज से 4.32 फीसदी ज्‍यादा है और रुपये के लिहाज से भी 5.61 फीसदी ज्‍यादा है। 

              अप्रैल-जनवरी 2016-17 के दौरान निर्यात कुल मिलाकर 220922.78 मिलियन अमेरिकी डॉलर (1484473.55 करोड़ रुपये) का हुआ, जो पिछले साल की समान अ‍वधि में हुए निर्यात के मुकाबले डॉलर के लिहाज से 1.09 फीसदी और रुपये के लिहाज से 4.50 फीसदी अधिक है। जनवरी, 2017 में गैर-पेट्रोलियम निर्यात 19422.86 मिलियन अमेरिकी डॉलर का हुआ, जबकि जनवरी, 2016 में इनका निर्यात 19111.38 मिलियन अमेरिकी डॉलर का हुआ था। इस तरह गैर-पेट्रोलियम निर्यात में इस दौरान 1.6 फीसदी की वृद्धि‍ दर्ज की गई। 

            अप्रैल-जनवरी 2016-17 के दौरान गैर पेट्रोलियम नि‍र्यात 196254.10 मिलियन अमेरिकी डॉलर का हुआ जो पिछले साल की समान अवधि में हुये निर्यात के मुकाबले 2.2 फीसदी अधिक है। विश्व व्यापार संगठन के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, नवंबर 2016 के दौरान निर्यात में वृद्धि पिछले साल के समान महीने के मुकाबले संयुक्त राज्य अमेरिका (2.63 फीसदी), यूरोपीय संघ (5.47 फीसदी) और जापान (13.43 फीसदी) में दर्ज की गई है। वहीं, नवंबर 2016 के दौरान निर्यात में कमी पिछले साल के समान महीने के मुकाबले चीन (-1.51 फीसदी) में दर्ज की गई है। 

               आयात, जनवरी, 2017 के दौरान 31955.94 मिलियन अमेरिकी डॉलर (217557.32 करोड़ रुपये) मूल्‍य की वस्‍तुओं का आयात किया गया, जो जनवरी, 2016 में हुए आयात के मुकाबले डॉलर के लिहाज से 10.70 फीसदी ज्‍यादा है और रुपये के लिहाज से 12.07 फीसदी ज्‍यादा है। अप्रैल-जनवरी, 2016-17 के दौरान आयात कुल मिलाकर 307311.86 मिलियन डॉलर (2065656.42 करोड़ रुपये) का हुआ, जो पिछले साल की समान अवधि में हुए आयात के मुकाबले डॉलर के लिहाज से 5.81 फीसदी और रुपये के लिहाज से 2.57 फीसदी की गिरावट दर्शाता है। 

            कच्‍चे तेल एवं गैर-तेल का आयात,  जनवरी, 2017 के दौरान 8140.83 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्‍य के तेल का आयात किया गया, जो पिछले साल के समान महीने में हुए आयात के मुकाबले 61.07 फीसदी ज्‍यादा है। इसी तरह जनवरी, 2017 के दौरान 23815.11 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्‍य का गैर-तेल आयात होने का अनुमान है, जो पिछले साल के समान महीने में हुए आयात के मुकाबले 0.01 फीसदी ज्‍यादा है। 

             समग्र व्‍यापार संतुलन, कुल मिलाकर व्‍यापार संतुलन में बेहतरी दर्ज की गई है। वाणिज्‍यि‍क वस्‍तुओं एवं सेवाओं को एक साथ ध्‍यान में रखते हुए समग्र व्‍यापार घाटा अप्रैल-जनवरी, 2016-17 के दौरान 38073.08 मिलियन अमेरिकी डॉलर का रहने का अनुमान है, जो अप्रैल-जनवरी 2015-16 में दर्ज किए गए 54187.74 मिलियन अमेरिकी डॉलर के व्‍यापार घाटे से 29.7 फीसदी कम है।

रेल परिचालन की सुरक्षा में बढ़ोतरी

            रेल परिचालन को सुरक्षित बनाने के कार्य को सुनिश्चित करने के लिए आधुनिकीकरण के उद्देश्‍य से भारतीय रेलवे ने विद्युत ओवर हैड उपकरणों की जांच तथा रेलवे नेटवर्क के निरीक्षण और मरम्‍मत के लिए 8 पहियों वाले डीजल इलेक्ट्रिक ओवर हैड उपकरण (ओएचई) को शामिल करने का निर्णय लिया है। 

         इन ओएचई रखरखाव और निरीक्षण कारों के शामिल होने से भारतीय रेलवे में ओएचई उपकरणों की विश्वसनीयता और सुरक्षा में बढ़ोतरी हो जाएगी। रेल मंत्रालय की मुख्‍य अनुसंधान इकाई, अनुसंधान डिजाइन मानक संगठन (आरडीएसओ) ने पहले से ही इन कारों के प्रोटोटाइप के लिए अपनी विशिष्टताओं को अंतिम रूप दे दिया है। पहले चरण में भारतीय रेल ऐसी 8 पहियेदार ओएचई निरीक्षण एवं रखरखाव वाली 45 कारें 25 किलोवॉट एसी पर ब्रॉडगेज विद्युतीकरण वाले मार्गों पर परिचालन के लिए खरीदारी करेंगी। रेल मंत्रालय ने दो फर्मों, मैसर्स भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड, बैंगलोर और मैसर्स फूलतास ट्रांसरेल लिमिटेड पटना, को डिजाइन जमा करने का ठेका दे दिया है। 

              यह निरीक्षण कार एक स्वचालित वाहन है। इसका न केवल आवधिक निरीक्षण, गश्त और ट्रेक्‍शन ओवरहैड उपकरण (ओएचई) के रखरखाव के लिए बल्कि ब्रेकडाउन स्‍थलों और क्षतिग्रस्त ओएचई के स्‍थलों तक पहुंचने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। इन वाहनों का विद्युत लोकोमोटिव के पेंटोग्राफ और ओएचई के सम्‍पर्क तार के बीच सुरक्षित संपर्क का पता लगाने के लिए विद्युत करंट क्‍लेक्‍शन परीक्षणों के लिए विशेष रूप से रात के दौरान उपयोग किया जाता है। 

            ये कारें संचालन के लिए ओएचई कार में उपलब्‍ध डीजल अल्‍टरनेटर सैट से तैयार की गई बिजली का उपयोग करती हैं। इन कारों की अधिकतम परिचालन गति 110 किलोमीटर प्रति घंटे है। डीजल इलेक्ट्रिक टाइप ओएचई कारें अनुसंधान डिजाइन मानक संगठन (आरडीएसओ) के नवीनतम विनिर्देश के अनुसार खरीदी जा रही हैं। इन कारों के डिजाइन फर्मों द्वारा तैयार किये जाएंगे। लेकिन अंतिम मंजूरी आरडीएसओ देगा। आरडीएसओ द्वारा इन वाहनों के डिजाइन को मार्च 2017 तक मंजूरी दिये जाने की संभावना है। 

           प्रोटोटाइप का अनुमोदन नवंबर 2017 तक कर दिया जाएगा। इसके बाद इन ओएचई कारों की आपूर्ति फरवरी 2018 से शुरू हो जाएगी। यह कार्य जून 2019 तक पूरा होने की संभावना है। दूसरे चरण में ऐसे 53 वाहनों की खरीद के लिए निविदा को अंतिम रूप देने का कार्य चल रहा है। इसके लिए अनुबंध जल्‍द ही दे दिये जाएंगे।

वैज्ञानिक अनुसंधान से जीवन में बदलाव

                केन्द्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा है कि सरकार द्वारा स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में की जा रही पहल स्पष्ट होनी चाहिए। 

           इनकी बदौलत आम लोगों के जीवन में ऐसे बदलाव सुनिश्चित किये जाने चाहिए जिन्हें मापना संभव हो। नई दिल्ली में खनन एवं ईंधन उद्योगों के लिए अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन (एनएक्सजीएनएमआईएफयू-2017) का उद्घाटन करते हुए डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि इस सम्मेलन में इस बात पर अवश्य ही गौर किया जाना चाहिए कि निर्धनतम लोगों/वंचितों/दलितों के कामकाज की स्थितियां कैसी हैं। वैज्ञानिक अनुसंधान से उनके जीवन में किस हद तक बदलाव एवं बेहतरी सुनिश्चित हो सकती है।

               सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी.के.सारस्वत ने भी सम्मानित अतिथि के तौर पर संबोधित किया। इसकी अध्यक्षता सीएसआईआर के डीजी एवं डीएसआईआर के सचिव डॉ. जी. साहनी ने की। खनन एवं ईंधन क्षेत्रों के आठ प्रतिष्ठित दिग्गजों अर्थात खान सुरक्षा महानिदेशक राहुल गुहा, सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड के सीएमडी गोपाल सिंह, हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड के सीओओ लक्ष्मण शेखावत, राष्ट्रीय खनिज विकास निगम के निदेशक डॉ. एन के नंदा, एनआईटी सूरतकल, कर्नाटक के प्रो. वी आर शास्त्री, आईआईएससी, बेंगलुरू के प्रो. एस.संपत, एनटीपीसी के निदेशक के.के. शर्मा और आईओसीएल के निदेशक संजीव सिंह का इस दौरान अभिनन्दन किया गया। विशेषकर अपने-अपने उद्योगों और समूचे राष्ट्र के विकास में उल्लेखनीय योगदान देने के मद्देनजर ही इन दिग्गजों का अभिनन्दन किया गया। 

             इस परिवेश को ध्यान में रखते हुए सीएसआईआर-केंद्रीय खनन एवं ईंधन अनुसंधान संस्थान, धनबाद ने सीएसआईआर–प्लेटिनम जुबली समारोह के अवसर पर नई दिल्ली में 15 से लेकर 17 फरवरी 2017 तक खनन एवं ईंधन उद्योगों के लिए अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन (एनएक्सजीएनएमआईएफयू-2017) का आयोजन किया है।

330 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जाएगा

             भारत सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग में सचिव सुश्री प्रीति सूडान की अध्यक्षता में राज्यों के खाद्य सचिवों का सम्मेलन यहां आयोजित किया गया।

           जिसमें गेहूं उत्पादन की संभावनाओं और रबी विपणन सीजन (आरएमएस) 2017-18 के दौरान गेहूं खरीद के अनुमान पर चर्चाएं की गईं। राज्यों के साथ सलाह-मशविरा करके आरएमएस 2017-18 के दौरान 330 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदने का निर्णय लिया गया, जो पिछले सीजन के दौरान की गई वास्तविक खरीद (229.61 लाख मीट्रिक टन) की तुलना में काफी अधिक है। सम्मेलन के दौरान विभिन्न राज्यों के लिए रबी/सर्दियों/खरीफ विपणन सीजन 2016-17 की गर्मियों वाली फसल के तहत उपजाए गये धान की खरीद का अनुमान भी चावल के संदर्भ में लगाया गया। 

               इसके तहत 50 लाख मीट्रिक टन की खरीद का अनुमान लगाया गया है। यह अनुमान केएमएस 2016-17 के लिए धान की खरीफ फसल हेतु निर्धारित किये गये 330 लाख मीट्रिक टन के अनुमान के अलावा है।

             केएमएस 2016-17 के लिए धान की खरीफ फसल हेतु खरीद संबंधी कार्य अभी जारी हैं। 15 फरवरी 2017 तक के लिए दी गई सूचना के मुताबिक, चावल के संदर्भ में केएमएस 2016-17 के दौरान धान की खरीद 292.31 लाख मीट्रिक टन के आंकड़े को छू चुकी है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि अर्थात केएमएस 2015-16 के दौरान खरीदे गये 264.53 लाख मीट्रिक टन धान की तुलना में लगभग 28 लाख मीट्रिक टन ज्यादा है।

पर्यटकों के लिए प्री-लोडेड सिम कार्ड

            पर्यटन एवं संस्‍कृति राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) डॉ. महेश शर्मा ने ई-वीजा पर भारत आने वाले विदेशी पर्यटकों को प्री-लोडेड सिम कार्ड उपलब्‍ध कराने के लिए पर्यटन मंत्रालय, भारत सरकार की पहल की शुरुआत की। 

           इस अवसर पर संबोधित करते हुए डॉ. शर्मा ने कहा कि इस विशिष्‍ट पहल से भारत में अपने आगमन के तुरंत बाद विदेशी पर्यटकों को अपने प्रियजनों के साथ बातचीत करने में सहायता मिलेगी। इससे पहले पर्यटन मंत्रालय ने 12 भारतीय भाषाओं में चौबीसों घंटे उपलब्ध होने वाली पर्यटक हेल्‍पलाइन 1800111363 की भी शुरुआत की थी ताकि विदेशी पर्यटकों को उनकी अपनी भाषा में आवश्‍यक जानकारी मिल सके।

                    डॉ. शर्मा ने इस सिम वाली पहली किट यात्रा और पर्यटन क्षेत्र के एक प्रतिनिधि को सौंपी। पर्यटन सचिव विनोद जुत्‍सी, संचार सचिव जे. एस. दीपक और वरिष्‍ठ अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे। इस पहल की शुरुआत भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) के सहयोग से की गई है जि‍समें बीएसएनएल ई-वीजा पर भारत आने वाले विदेशी यात्रियों को प्री-लोडेड सिम कार्ड बांटेगा। 

           यह सुविधा शुरुआत में इंदिरा गांधी अंतर्राष्‍ट्रीय हवाई अड्डा (टी-3 टर्मिनल) नई दिल्‍ली पर उपलब्‍ध होगी। इसे बाद में ई-वीजा सुविधा उपलब्‍ध होने वाले बकाया 15 अंतर्राष्‍ट्रीय हवाई अड्डों पर भी लागू कर दिया जायेगा। प्री-लोडेड सिम कार्ड सुविधा प्रदान करने के लिए बीएसएनएल हवाई अड्डे पहुंचने पर विदेशी पर्यटकों से उनके ई-वीजा और पासपोर्ट के पहले पृष्‍ठ की कॉपी प्राप्‍त करेगा। ये सिम कार्ड 50 रुपये के टॉक टाइम और 50 एमबी डेटा के मूल्‍य से प्री-लोडेड होंगे। जिन्‍हें तत्‍काल आधार पर एक्टिवेट कर दिया जायेगा ताकि पर्यटक इस सुविधा का तुरंत लाभ उठा सकें। 

            इस पहल का उद्देश्‍य विदेशी पर्यटकों को कनेक्टिविटी उपलब्‍ध कराना हैं ताकि वे अपने प्रियजनों के संपर्क में रहने में सक्षम हो सकें। इसके अलावा इससे विदेशी पर्यटकों को किसी परेशानी या चिकित्‍सीय आपातकालीन स्थिति के दौरान किसी सहायता या मार्गदर्शन के लिए मंत्रालय की चौबीसों घंटे कार्यरत बहुभाषीय टोल फ्री हेल्पलाइन से संपर्क करने में भी मदद मिलेगी।  

खाद्यान्‍न का रिकार्ड 271.98 मिलियन टन  उत्‍पादन

       कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्‍याण विभाग द्वारा 2016-17 के लिए मुख्‍य फसलों के उत्‍पादन के दूसरे अग्रिम अनुमानों को 15 फरवरी, 2017 को जारी किया गया है।

         विभिन्‍न फसलों के उत्‍पादन का मूल्‍यांकन राज्‍यों से प्राप्‍त प्रतिपुष्‍टियों तथा इसकी वैद्यता अन्‍य स्रोतों से उपलब्‍ध सूचना पर आधारित है। उत्‍पादन में खाद्यान्‍न – 98 मिलियन टन, चावल – 108.86 मिलियन टन, गेहूँ – 96.64 मिलियन टन, मोटे अनाज – 44.34 मिलियन टन,  मक्‍का – 26.15 मिलियन टन, दलहन – 22.14 मिलियन टन, चना – 9.12 मिलियन टन,  तूर – 4.23 मिलियन टन,  उड़द – 2.89 मिलियन टन, तिलहन – 60 मिलियन टन, सोयाबीन – 14.13 मिलियन टन,  मूंगफली – 8.47 मिलियन टन,  अरंडी बीज – 1.74 मिलियन टन, कपास – 51 मिलियन गांठे (प्रति 170 कि०ग्रा० की),  गन्‍ना – 98 मिलियन टन है।

                मानसून 2016 के दौरान अच्‍छी वर्षा एवं सरकार द्वारा की गई विभिन्‍न नीतिगत पहलों के परिणामस्‍वरूप, मौजूदा वर्ष में देश में रिकार्ड खाद्यान्‍न उत्‍पादन हुआ है। 2016-17 के लिए दूसरे अग्रिम अनुमानों के अनुसार, देश में कुल खाद्यान्‍न उत्‍पादन 271.98 मिलियन टन तक अनुमानित है जो 2013-14 के दौरान प्राप्‍त विगत 265.04 मिलियन टन रिकार्ड खाद्यान्‍न उत्‍पादन की तुलना में 6.94 मिलियन टन अधिक है। मौजूदा वर्ष का उत्‍पादन भी विगत पॉंच वर्षों (2011-12 से 2015-16) के औसत खाद्यान्‍न उत्‍पादन की तुलना में 14.97 मिलियन टन अधिक है। मौजूदा वर्ष का उत्‍पादन विगत वर्ष के खाद्यान्‍न उत्‍पादन की तुलना में उल्‍लेखनीय रूप से 20.41 मिलियन टन अधिक है। 

               चावल का कुल उत्‍पादन 108.86 मिलियन टन जो एक नया रिकार्ड भी है, अनुमानित है। इस वर्ष चावल का उत्‍पादन 2013-14 के दौरान प्राप्‍त विगत 106.65 मिलियन टन रिकार्ड उत्‍पादन की तुलना में 2.21 मिलियन टन अधिक है। यह पांच वर्षों के 105.42 मिलियन टन औसत उत्‍पादन की तुलना में भी 3.44 मिलियन टन अधिक है। चावल के उत्‍पादन में 2015-16 के दौरान 104.41 मिलियन टन उत्‍पादन की तुलना में उल्‍लेखनीय रूप से 4.45 मिलियन टन की वृद्धि हुई है। गेहूँ का उत्‍पादन जो 96.64 मिलियन टन जो एक रिकार्ड भी है, अनुमानित है। इस वर्ष गेहूँ का उत्‍पादन 2013-14 के दौरान प्राप्‍त 95.85 मिलियन टन विगत रिकार्ड उत्‍पादन की तुलना में अधिक है। 2016-17 के दौरान गेहूँ का उत्‍पादन भी औसत गेहूँ उत्‍पादन की तुलना में 4.03 मिलियन टन अधिक है। 

              मौजूदा वर्ष का उत्‍पादन 2015-16 के दौरान प्राप्‍त 92.29 मिलियन टन गेहूँ उत्‍पादन की तुलना में 4.36 मिलियन टन अधिक है। मोटे अनाजों का उत्‍पादन जो 44.34 मिलियन टन के एक नए रिकार्ड स्‍तर पर अनुमानित है, औसत उत्‍पादन की तुलना में 3.00 मिलियन टन अधिक है। यह 2010-11 के दौरान प्राप्‍त 43.40 मिलियन टन विगत रिकार्ड उत्‍पादन की तुलना में 0.94 मिलियन टन अधिक है। मौजूदा वर्ष का उत्‍पादन भी 2015-16 के दौरान प्राप्‍त 38.52 मिलियन टन उनके उत्‍पादन की तुलना में 5.82 मिलियन टन अधिक है। सभी मुख्‍य दलहनों के क्षेत्रीय कवरेज एवं उत्‍पादकता में उल्‍लेखनीय वृद्धि के परिणामस्‍वरूप, 2016-17 के दौरान दलहनों का कुल उत्‍पादन 22.14 मिलियन टन तक अनुमानित है जो 2013-14 के दौरान प्राप्‍त 19.25 मिलियन टन विगत रिकार्ड उत्‍पादन की तुलना में 2.89 मिलियन टन अधिक है। 2016-17 के दौरान दलहनों का उत्‍पादन भी पांच वर्षों के औसत उत्‍पादन की तुलना में 4.50 मिलियन टन अधिक है। 

              मौजूदा वर्ष का उत्‍पादन विगत वर्ष के 16.35 मिलियन टन उत्‍पादन की तुलना में 5.79 मिलियन टन अधिक है। विगत वर्ष की तुलना में 8.35 मिलियन टन की वृद्धि के साथ, देश में कुल तिलहन उत्‍पादन 33.60 मिलियन टन के रिकार्ड स्‍तर पर अनुमानित है। यह 2013-14 के दौरान प्राप्‍त 32.75 मिलियन टन विगत रिकार्ड उत्‍पादन की तुलना में 0.85 मिलियन टन अधिक है। 2016-17 के दौरान तिलहनों का उत्‍पादन भी पांच वर्षों के औसत तिलहन उत्‍पादन की तुलना में 4.34 मिलियन टन अधिक है। मौजूदा वर्ष का उत्‍पादन 2015-16 के दौरान 25.25 मिलियन टन उत्‍पादन की तुलना में बहुत अधिक है। गन्‍ने का उत्‍पादन 309.98 मिलियन टन तक अनुमानित है जो विगत वर्ष के 348.45 मिलियन टन उत्‍पादन की तुलना में 38.46 मिलियन टन कम है। 

             2016-17 के दौरान कम क्षेत्रीय कवरेज के बावजूद, कपास की उच्‍चतर उत्‍पादकता के परिणामस्‍वरूप, 2015-16 के दौरान 30.01 मिलियन गांठों की तुलना में 32.51 मिलियन गांठों (प्रति 170 कि०ग्रा०) का अधिक उत्‍पादन हुआ। 10.06 मिलियन गांठों (प्रति 180 कि.ग्रा. की) तक अनुमानित पटसन एवं मेस्‍टा का उत्‍पादन विगत वर्ष के दौरान 10.52 मिलियन गांठों के उत्‍पादन की तुलना में मामूली रूप से कम है।

स्‍कूलों में शारीरिक दंड का अब सामाजिक ऑडिट

           केन्‍द्रीय महिला और बाल विकास मंत्री श्रीमती मेनका संजय गांधी ने शारीरिक दंड समाप्त करने के लिए स्‍कूलों से महिला और बाल विकास मंत्रालय के राष्‍ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा जारी किये गये दिशा-निर्देशों का सख्‍ती से अनुपालन करने का अनुरोध किया है।

              महिला और बाल विकास मंत्रालय ने स्‍कूलों में शारीरिक दंड समाप्‍त करने के लिए दिये गये दिशा-निर्देशों के व्‍यापक प्रसार और कार्यान्‍वयन के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय से अनुरोध किया है। ऐसा अभी हाल में एक स्‍कूल में अपना होमवर्क पूरा न करने पर स्‍कूल की छात्राओं को पीड़ादायक शरीरिक दंड दिये जाने की चिंतित करने वाली घटना को ध्‍यान में रखते हुए किया गया है। इस घटना का मीडिया में व्‍यापक रूप से प्रचार हुआ जिससे स्‍कूलों में दिये जाने वाले शारीरिक दंड के मुद्दे पर लोगों का ध्‍यान आकर्षित हुआ। महिला और बाल विकास मंत्रालय के अधिकार वाले राष्‍ट्रीय बाल अधिकारी संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने स्‍कूलों में शारीरिक दंड को समाप्‍त करने के लिए दिशा-निर्देश तैयार करके जारी किये हैं। 

               मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को लिखे अपने पत्र में श्रीमती मेनका संजय गांधी ने उत्तर प्रदेश के एक स्‍कूल में चिंतित करने वाली शारीरिक दंड देने की घटना के बारे में चिंता व्‍यक्‍त की है। श्रीमती मेनका संजय गांधी ने कहा कि आरटीई एक्‍ट की धारा 17 के तहत शारीरिक दंड दिये जाने पर प्रतिबंध है। उन्‍होंने मानव संसाधन मंत्री से अनुरोध किया कि सरकारी तथा निजी स्‍कूलों को निर्देश दिये जायें कि वे दिये गये दिशा-निर्देशों का सख्‍ती से अनुपालन सुनिश्चित करें। दिशा-निर्देशों में बच्‍चों को शारीरिक दंड या उत्‍पीड़न करने के मामलों में तुरंत कार्रवाई करने के लिए विशेष निगरानी कक्ष का गठन करने के लिए भी कहा गया है। इनमें यह भी सुझाव दिया गया है कि शारीरिक दंड निगरानी कक्ष (सीपीएमसी) को शारीरिक दंड दिये जाने से संबंधित शिकायतों की सुनवाई 48 घंटों के अंदर करनी चाहिए। 

             दिशा-निर्देशों में यह भी सुझाव दिया है कि स्‍कूलों के शिक्षको को लिखित में यह वायदा करना होगा कि वे ऐसे किसी कार्य में शामिल नहीं होंगे जो शारीरिक दंड, मानसिक उत्‍पीड़न या भेदभाव करने के समान माना जाता हो। इनमें यह भी कहा गया है कि स्‍कूलों को शारीरिक दंड, उत्‍पीड़न और भेदभाव का वार्षिक रूप से सामाजिक ऑडिट कराया जाना चाहिए।

कर्मचारी नामांकन अभियान, ब्यौरा घोषित करने का अवसर

               ईपीएफओ ने कर्मचारी नामांकन अभियान 2017 का शुभारंभ किया है, जिसके तहत नियोक्ताओं को उन सभी कर्मचारियों का ब्यौरा स्वेच्छा से घोषित करने का अवसर दिया गया है जो अभी तक ईपीएफओ के तहत सामाजिक सुरक्षा लाभ पाने से वंचित रहे हैं। 

            यह घोषणा योजना 01 जनवरी 2017 से लेकर 31 मार्च 2017 तक मान्य रहेगी। इस योजना के तहत यदि अंशदान में कर्मचारियों का हिस्सा नहीं काटे जाने की घोषणा नियोक्ता करता है तो उसे माफ मान लिया जाएगा। इस अभियान के तहत जिन कर्मचारियों के बारे में घोषणा की जाएगी उनके संदर्भ में नियोक्ता द्वारा क्षतिपूर्ति का भुगतान प्रति वर्ष एक रुपये की दर से किया जाएगा। इस घोषणा के तहत किये गये अंशदान के संदर्भ में नियोक्ता से कोई भी प्रशासकीय शुल्क नहीं लिया जाएगा। इस अभियान के तहत उस अवधि के लिए घोषणा की जा सकती है जिस दौरान धारा 7 ए के तहत किसी तरह की जांच-पड़ताल शुरू नहीं की गई है।

               ईपीएफओ पोटल के प्रमुख नियोक्ता खंड के तहत ऑनलाइन घोषणा की सुविधा ईपीएफओ ने दी है। ईपीएफओ पोटल से कर्मचारी नामांकन अभियान के क्रियान्वयन में सुविधा होती है। घोषणा के बाद नामांकन की समूची पिछली अवधि के लिए माहवार ईसीआर के जरिये नियोक्ता द्वारा भुगतान को प्रेषित किया जाएगा। बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए कर्मचारी पेंशन योजना के पेंशनभोगियों और सदस्यों हेतु ‘आधार’ को मुहैया कराना अब अनिवार्य कर दिया गया है। जनवरी 2017 में ईपीएफओ ने 19,114 शिकायतों का निपटारा किया। हालांकि 2,556 शिकायतें अब भी लंबित हैं। इन लंबित शिकायतों में से 2,206 शिकायतें सात दिनों से भी कम समयावधि से लंबित हैं।

             कम्प्यूटरीकरण के अगले चरण के तहत ईपीएफओ एक केंद्रीकृत प्राप्ति और भुगतान प्रणाली को अपनाने की ओर अग्रसर हो गया है। ईपीएफओ ने अनेक बैंकों के साथ बैंकिंग संबंधी समझौतों पर हस्ताक्षर किये हैं।

एक ही उड़ान में 104 उपग्रहों का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण

                 भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पोलर उपग्रह प्रक्षेपण यान पीएसएलवी-सी 37 ने अपनी 39वीं उड़ान में प्रात: सतीशधवन अंतरिक्ष केंद्र शार, श्रीहरिकोटा से 103 सहयात्री उपग्रहों सहित 114 किलो कार्टोसेट-2 सीरीज के उपग्रह का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया।

             यह पीएसएलवी का लगातार 38वां सफल मिशन है। पीएसएलवी-सी 37 ऑनबोर्ड पर ले जाये गये सभी 114 उपग्रहों का कुल भार 1378 किलोग्राम था। पीएसएलवी ने प्रथम लांच पैड से योजना के अनुसार प्रात: 9:28 बजे (आईएसटी) उड़ान शुरू की। 16 मिनट और 48 सैकंड की उड़ान के बाद उपग्रहों ने ध्रुव की ओर 97.46 डिग्री के कोण पर झुके ध्रुवीय सूर्य समकालीन कक्षाओं को प्राप्‍त कर लिया। बाद के 12 मिनट के समय में सभी 104 उपग्रह सफलतापूर्वक पूर्व निर्धारित क्रम में पीएसएलवी चौथे चरण से सफलतापूर्वक अलग-अलग हो गये। 

                शुरुआत कार्टोसेट-2 सीरीज के उपग्रह से हुई उसके बाद आईएनएस-1 और आईएनएस-2 अलग हुये। पीएसएलवी द्वारा छोड़े गये भारतीय उपग्रहों की संख्‍या अब 46 हो गई है। बिलगन के बाद कार्टोसेट-2 सीरीज के 2 सौर सारणी स्‍वचालित रूप से तैनात हो गई। इसरो के बेंगलुरु स्थित टेलीमेट्री, ट्रैकिंग और कमांड नेटवर्क (आईएसटीआरएसी) ने उपग्रह का नियंत्रण संभाल लिया। आने वाले दिनों में  यह उपग्रह अंतिम परिचालन विन्यास में लाया जायेगा। 

          उसके बाद यह अपने पेन्क्रोमेटिक (ब्‍लैक एंड व्‍हाइट) और मल्‍टी स्‍पेक्‍ट्रल (रंगीन) कैमरों का उपयोग करके रिमोट सेंसिंग सेवाएं उपलब्‍ध कराना शुरू कर देगा। पीएसएलवी-सी 37 द्वारा ले जाये गये 103 सहयात्री उपग्रहों में 2-इसरो नैनो सैटेलाइट-1 (आईएनएस-1) वजन 8.4 किलो और (आईएनएस-2) वजन 9.7 किलोग्राम भारत के प्रौद्योगिकी प्रदर्शन उपग्रह हैं। 

            बकाया 101 सहयात्री सैटेलाइट उपग्रहों में से अमेरिका के 96 अंतर्राष्‍ट्रीय ग्राहक उपग्रह हैं। इसके अलावा नीदरलैंड, स्‍वि‍टजरलैंड, इजरायल, कजाखस्‍तान और संयुक्‍त अरब अमीरात के एक-एक उपग्रह शामिल हैं। आज के सफल प्रक्षेपण के साथ ही भारत के वर्कहॉर्स प्रक्षेपण यान पीएसएलवी द्वारा छोड़े गये विदेशी ग्राहक उपग्रहों की कुल संख्‍या बढ़कर 180 तक पहुंच गई है।     

    

इसरो को 104 उपग्रहों के सफल प्रक्षेपण पर बधाई


           राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) को पीएसएलवी-सी 37 और एक ही बार में 104 अन्य उपग्रहों के सफल प्रक्षेपण पर बधाई दी है।

         राष्ट्रपति ने अंतरिक्ष विभाग के सचिव तथा इसरो के अध्यक्ष ए एस किरण कुमार को भेजे संदेश में कहा है, “मैं अपनी ओर से आपको और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की पूरी टीम को पीएसएलवी-सी 37 और एक ही बार में 104 अन्य उपग्रहों के सफल प्रक्षेपण पर बधाई एवं शुभकामनाएं देता हूं। यह दिन हमारे अंतरिक्ष कार्यक्रम के इतिहास में एक बड़े दिन के रूप में जाना जाएगा। राष्ट्र को इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर गर्व है। इस प्रदर्शन ने एक बार फिर भारत की बढ़ती अंतरिक्ष क्षमताओं को दर्शाया है। मैं अपनी ओर से आपकी टीम के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, प्रौद्योगिकीविदों और अन्य सभी इस महान मिशन से जुड़े सहयोगियों को बधाई देता हूं। मैं इसरो से यह आग्रह करता हूं कि यह हमारे अंतरिक्ष क्षमताओं की प्रगति के लिए प्रयास जारी रखेंगे। मैं भविष्य के लिए भी महान सफलता की कामना करता हूं।" 

                 केन्द्रीय रसायन एवं उर्वरक तथा संसदीय मामलों के मंत्री अनंत कुमार ने पीएसएलवी-सी 37 और कार्टोसैट उपग्रह के साथ एक ही बार में 103 अन्य उपग्रहों के सफल प्रक्षेपण पर इसरो को बधाई दी है। अनंत कुमार ने कहा कि इसरो ने एक साथ 104 उपग्रहों के सफल प्रक्षेपण और एक ही बार में ठीक सही कक्षा में स्थापित कर इतिहास बनाया है। 

            यह इसरो की कम लागत में कार्य सफलतापूर्वक संपन्न करने की क्षमता को दर्शाता है। यह इसरो की जटिल अंतरिक्ष मिशन से निपटने और विभिन्न देशों और एजेंसियों के लिए विश्व स्तरीय उपग्रह शुभारंभ सेवाएं प्रदान करने की क्षमताओं को दर्शाता है। मैं इसरो की पूरी टीम को उनकी इस उपलब्धि के लिए मुबारकवाद देता हूं। मैं भारतीय ध्वज (झंडे) को दुनिया में ऊंचा रखने के लिए इसरो की टीम को सलाम करता हूं और उनकी भविष्य में सभी परियोजनाओं की महान सफलता की कामना करता हूं। 

भारत व क्रोएशिया के बीच आर्थिक सहयोग के लिए करार

                 भारत व क्रोएशिया के बीच आर्थिक सहयोग के समझौते लिए भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण और क्रोएशिया के उप-प्रधानमंत्री एवं अर्थव्यवस्था मंत्री मिस मार्टिना डेलिक के बीच क्रोएशिया के जगरेब में करार पर हस्ताक्षर किए गए। 

               द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक संबंधों को विकसित करने एवं बढ़ावा देने के उद्देश्य से भारत और क्रोएशिया ने सितंबर 1994 में ही व्यापार और आर्थिक सहयोग के एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। भारत और क्रोएशिया के बीच वर्तमान समझौते इसी निरंतरता को आगे बढ़ाने की दिशा में एक कदम है, जो नवंबर 2009 में समाप्त हो गया था। 

                   भारत और क्रोएशिया के बीच वित्त वर्ष 2013-14, 2014-15 तथा 2015-16 में द्विपक्षीय व्यापार क्रमश: 148.86 मिलियन डॉलर, 205.04 मिलियन डॉलर तथा 148.44 मिलियन डॉलर रहा था। पिछले तीन वर्षों के दौरान द्विपक्षीय व्यापार वैश्विक मंदी के बावजूद स्थिर बनी हुई है। 

लि‍थुआनिया के राष्ट्रीय दिवस पर राष्ट्रपति का संदेश


               राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने लिथुआनिया गणराज्‍य के राष्‍ट्रीय दिवस की पूर्व संध्‍या पर वहां की सरकार और जनता को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। 

            लिथुआनिया गणराज्‍य की राष्‍ट्रपति महामहिम सुश्री देलिया ग्रिबाउस्‍काएते को भेजे अपने संदेश में राष्‍ट्रपति ने कहा, “मैं आपके राष्‍ट्रीय दिवस के अवसर पर भारत सरकार, यहां की जनता और अपनी ओर से, आपको और लिथुआनिया की मित्रवत जनता को शुभकामनाएं और बधाई देता हूं।

           भारत और लिथुआनिया के बीच परंपरागत रूप से करीबी रिश्‍ते रहे हैं। मुझे यकीन है कि दोनों देशों की जनता के परस्‍पर लाभ के लिए हमारे आपसी संबंध आने वाले वर्षों में निरंतर महत्‍वपूर्ण और मजबूत बनते जाएंगे।

             महामहिम आपको मेरी ओर से तंदुरुस्‍ती और निरंतर सफलता के लिए तथा आपके देश और देशवासियों की प्रगति और खुशहाली के लिए मेरी शुभकामनाएं स्‍वीकार करें।

प्रधानमंत्री ने ब्रिटिश सांसदों से मुलाकात की


                प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने ब्रिटिश सांसदों के आठ-सदस्‍यीय प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देशों में भारत और ब्रिटेन के बीच संबंधों को  दोनों पक्षों  से मजबूत समर्थन हासिल है । 

            उन्‍होंने दोनों देशों के सांसदों के बीच विस्‍तृत बातचीत के लिए कहा। प्रधानमंत्री ने नवंबर, 2015 की अपनी ब्रिटेन यात्रा और प्रधानमंत्री थेरेसा मे की नवंबर 2016 की भारत यात्रा का स्‍मरण द‍िलाया । उन्‍होंने वर्ष 2017 को भारत-ब्रिटेन संस्‍कृति वर्ष के रूप में मनाने का स्‍वागत किया। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत और ब्रिटेन आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में वास्‍तविक सहभागी हैं । 

            उन्‍होंने आतंकवाद, अतिवाद और कट्टरता के खिलाफ सांसदों से सामूहिक आवाज़ को लगातार उठाने का आग्रह किया।