Sunday, 18 December 2016

भारत बनेगा कौशल विकास की वैश्विक राजधानी

प्रधानमंत्री कानपुर में भारत के पहले भारतीय कौशल संस्‍थान की आधारशिला रखेंगे। युवकों को अधिक रोजगार पाने योग्‍य एवं स्‍वनिर्भर बनने के लिए उन्‍हें अधिकार संपन्‍न बनाने के द्वारा भारत को विश्‍व की कौशल राजधानी बनाने के अपने विजन के अनुरूप प्रधानमंत्री उत्‍तर प्रदेश के कानपुर में देश के अब तक पहले ‘भारतीय कौशल संस्‍थान’ की आधारशिला रखेंगे। इस संस्‍थान की संकल्‍पना नरेन्‍द्र मोदी द्वारा सिंगापुर के इंस्‍टीट्यूट ऑफ टेक्‍निकल एजुकेशन की यात्रा के दौरान की गई थी। केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय ने सिंगापुर के इंस्‍टीट्यूट ऑफ टेक्‍निकल एजुकेशन की साझेदारी में देश में अपनी तरह के ऐसे पहले संस्‍थान की स्‍थापना करने का फैसला किया है। 


 यह संस्‍थान प्रशिक्षण के सिंगापुर मॉडल से प्रेरित है। यह देश के विभिन्‍न सर्वश्रेष्‍ठ प्रचलनों को अंगीकार करेगा। मंत्रालय ने ऐसे 6 संस्‍थान खोलने का निर्णय किया है। प्रधानमंत्री उत्‍तर प्रदेश के युवाओं के लिए कौशल प्रदर्शनी का भी उद्घाटन करेंगे। इस प्रदर्शनी में विभिन्‍न क्षेत्रों के अत्‍याधुनिक स्‍वरोजगार प्रशिक्षण प्रचलनों को प्रदर्शित किया जाएगा।  मोदी प्रधानमंत्री कौशल केंद्रों (पीएमकेके) एवं चालकों के प्रशिक्षण संस्‍थानों समेत देश के युवाओं के लिए कई प्रकार की कौशल विकास पहलों को लांच करेंगे।  ‘भारतीय कौशल संस्‍थान’ तीन वर्षों के दौरान लगभग 4 लाख युवाओं को प्रशिक्षित करेगा, उन्‍हें रोजगार देगा।
समारोह के दौरान राज्‍य में ‘राष्‍ट्रीय शिक्षु संवर्धन योजना ’ की भी घोषणा की जाएगी, जिसके सफल कार्यान्‍वयन में राज्‍य सरकार की एक बड़ी भूमिका है। ऐसी केवल 23000 नीजि कंपनियां हैं, जो देश भर में प्रशिक्षुता से जुड़ी हुई है। एमएसडीई की कोशिश राज्‍य सरकार के समर्थन को प्रोत्‍साहित करने तथा शिक्षु प्रशिक्षणों पर अधिक कंपनियों के साथ भागीदारी सुनिश्‍चित करने की है। यह संभावित कर्मचारियों एवं नियोक्‍ता के बीच की खाई को कम करने का एक प्रत्‍यक्ष तरीका है। प्रशिक्षुता प्रशिक्षण के तहत इसके मॉडल ने कई देशों की अर्थव्‍यवस्‍थाओं को लाभ पहुंचाया है। 2016-17 के लिए वित्‍तीय वर्ष लक्ष्‍य देश भर में कम से कम 5 लाख शिक्षुओं का नामांकन सुनिश्‍चित करने का है। 


केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्‍य मंत्री राजीव प्रताप रूडी ने बताया ‘हमारे लिए यह बहुत ही गर्व की बात है कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा कानपुर एवं अन्‍य नगरों के युवाओं के लिए इस प्रकार की कई पहलों की शुरूआत की जा रही है। उन्‍होंने बताया कि ‘उत्‍तर प्रदेश के 65 जिलों में अभी तक 400 सक्रिय कौशल विकास केंद्र हैं, जिनका संचालन साझीदारों द्वारा किया जाता है। लगभग 3 लाख युवकों को पहले ही प्रशिक्षित किया जा चुका है और उनमें से 50 प्रतिशत युवकों को उनकी पसंद का रोजगार प्राप्‍त भी हो चुका है। चाहे कृषि क्षेत्र हो, परिधान क्षेत्र, ऑटो कम्‍पोनेंट क्षेत्र हो, बैंकिंग और वित्‍तीय सेवा, हॉस्‍पीलिटी या चमड़ा क्षेत्र हो, हमने देखा है कि युवक सभी क्षेत्रों में दिलचस्‍पी प्रदर्शित करते हैं और अपनी पसंद का कौशल सीखते हैं।’

अब सीनियर सिटीजन सीखेंगे डिजीटल भुगतान के तौर-तरीके


सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत के निर्देश पर, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले सभी नागरिकों विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों के लिए नकदी रहित लेनदेन को बढ़ावा देने और जागरूकता पर ध्यान केंद्रित करते हुए गुवाहाटी में एक क्षेत्रीय बैठक का आयोजन किया। 

इस बैठक में अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और वरिष्ठ नागरिकों के कल्‍याण एवं नशीली दवाओं के दुरुपयोग की रोकथाम की दिशा में कार्यरत पूर्वोत्‍तर राज्यों और पश्चिम बंगाल के विभागों के सचिवों ने भाग लिया। बैठक में, उड़ीसा राज्य सहित इन क्षेत्रों के क्षेत्रीय संसाधन और प्रशिक्षण केंद्रों (आरआरटीसी) और गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।  नीति आयोग द्वारा नकदी रहित लेनदेन के विभिन्न प्रकारों पर बनाई गयी अनेक वीडियो फिल्मों को भी प्रदर्शित किया गया। प्रचार-प्रसार के लिए इनको व्यापक स्‍तर पर वितरित करने को किया गया। 

बेहतर समझ बनाने के लिए इन फिल्मों का अनुवाद क्षेत्रीय भाषाओं में करने का अनुरोध भी किया गया। कहा गया कि राज्यों/गैर सरकारी संगठनों को नकदी रहित लेनदेन के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए इसमें सक्रिय रूप से शामिल होना चाहिए। उन्होंने ने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों को अक्सर डिजिटल भुगतान तंत्र से संबंधित नवीनतम जानकारी नहीं है लेकिन उनकी भागीदारी अर्थव्यवस्था के समग्र विकास के लिए आवश्यक है। उन्‍होंने गैर सरकारी संगठनों और अन्य हितधारकों से नकदी रहित लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए सभी लोगों के बीच इसके संदेश को आगे ले जाने का अनुरोध किया।