Tuesday, 25 April 2017

गुणवत्तापरक शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए सुझाव

            केन्द्रीय मानव संसाधन और विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर ने नई दिल्ली में एक दिवसीय प्रत्ययन के लिए संशोधित रूपरेखा पर राष्ट्रीय विमर्श का उद्घाटन किया।

         गुणवत्ता परक शिक्षा के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी मान्यता प्राप्त प्रक्रिया या मूल्याकंन प्रक्रिया के दौरान अंतिम उत्पाद को ध्यान में रखा जाना चाहिए। विषय के बारे में ज्ञान होना एक बात है, एक छात्र को विषय के बारे में जानकारी, बुनियादी ढांचे और कौशल विकास के बारे जानकारी देना दूसरी बात है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य एक अच्छे नागरिक का निर्माण करना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल उसी प्रकार  की शिक्षा को रचनात्मक शिक्षा के रूप में वर्णित किया जा सकता है जिसमें लक्ष्य, नीति और योजना के मापदंड प्रतिबंबित होते हैं। जावडेकर ने इस संबंध में मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. महेन्द्र नाथ पांडे की सराहना की और शिक्षा के बारे में समग्रता से सोचने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि संस्थानो की रैंकिंग में शिक्षा प्रतिबिंबित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि  किसी भी संस्थान द्वारा दी जाने वाली शिक्षा गुणवत्ता परक होनी चाहिए। मंत्री ने एनएएसी की  रैंकिंग उसके प्रमाण पत्र और उसके मूल्याकंन पत्र का हवाला देते हुए कहा कि इसके आधार पर छात्र आगे की शिक्षा के लिए संस्थानों का चयन करते हैं। 

           उऩ्होंने कहा कि अब संस्थानों ने एनआईआरएफ रैंकिंग को भी अपने रैंकिंग कैप में शामिल किया है। मंत्री ने कहा कि अब छात्रों के साथ-साथ समाज को भी गुणवत्ता के मामले में गुमराह नहीं किया जा सकता। उऩ्होंने कहा कि गुणवत्ता का कोई विकल्प नहीं है और इसमें अधिक तेजी लानी चाहिए। जावडेकर ने कहा कि हमारी सरकार के पास न केवल बहुमत है बल्कि हम यहां सुधार और प्रदर्शन करने के लिए आए हुए हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा में बदलाव की सख्त जरूरत है। उन्होंने एनएएसी अधिकारियों को सलाह दी कि वह अपनी टीम का विस्तार करें और अधिक से अधिक संस्थानों तक अपनी पहुंच बनाएं।

              उन्होंने डाटा बेस की प्रमाणिता और सत्यता को सुनिश्चित करने के लिए इस बात पर जोर दिया कि एकत्रित आंकडों की जांच होनी चाहिए। मंत्री ने कहा कि इस उद्देश्य के लिए बनाई गयी व्यवस्था को स्पष्ट नियमों और कानूनों के साथ पारदर्शी होना चाहिए तथा घपलेबाजी की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। उऩ्होंने उम्मीद व्यक्त की कि आज की चर्चा से एक नई पारदर्शी मान्यता प्रणाली का मार्ग प्रशस्त होगा। जावडेकर ने आधार का प्रयोग करने पर जोर देते हुए कहा कि इससे एलपीजी वितरण, यूरिया वितरण में हो रही गड़बड़ी को रोकने में मदद मिली है।

             उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि झारखंड तथा आंध्र प्रदेश में मध्याह्न भोजन योजना के आधार योजना के जुड़ जाने के बाद 4.5 लाख फर्जी पंजीकरणों का पता चला। उन्होंने कहा कि अभी तक 112 करोड़ आधार कार्ड बनाये जा चुके हैं जो हमारे देश के बदलते और आगे बढ़ने का एक स्पष्ट प्रमाण है। मंत्री ने सुझाव दिया कि उच्च शिक्षण संस्थानों की रैंकिंग जारी करने के लिए 4-5 एजेंसियां होनी चाहिए इससे विश्वसनीयता में और बढ़ोतरी होगी। मंत्री ने कहा कि इस महीने 28 अप्रैल को होनी वाली आईआईटी काउंसिल की अगली बैठक में हम देखेंगे कि क्या आईआईटी भी अन्य संस्थानों को मान्यता दे सकता है। जावड़ेकर ने कहा, ‘यदि हम समयबद्ध तरीके से पहुंचना चाहते हैं तथा उनका सही मूल्यांकन करना चाहते हैं तो हमें इसके लिए और अधिक जिम्मेदार बनना होगा इसलिए हम कम से कम तीन चार और संस्थानों का निर्माण करना चाहते हैं। हमे इस संबंध में संस्थानों को एक संदेश देना चाहिए।’

                उन्होंने आगे कहा कि केंद्र की मोदी सरकार गुणवत्ता परक शिक्षा देने के लिए प्रतिबद्ध है क्योंकि इसी से देश आगे बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि आज रैंकिंग की नई मूल्यांकन प्रणाली बहुत महत्वपूर्ण है। मंत्री ने प्रतिभागियों से आग्रह किया कि इस प्रक्रिया को तीन महीनों के अंदर पूरी कर लें। इस बैठक को मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री महेन्द्र नाथ पांडे और उच्च शिक्षा सचिव के.के शर्मा द्वारा भी संबोधित किया गया। हाल ही में एनएएसी द्वारा विकसित किये गये संशोधित प्रत्यायन ढांचे पर चर्चा के लिए राष्ट्रीय विमर्श का आयोजन किया जा रहा है। संशोधित रूप रेखा में तकनीक के प्रयोग और प्रक्रिया की निष्पक्षता शामिल हैं। विशेषज्ञों के कार्य समूहों द्वारा विश्वविद्यालयो, स्वायत्त महाविद्यालयों तथा संबंधित महाविद्यालयों के लिए ढांचा तैयार एवं विकसित किया जा रहा है। 

        प्रख्यात शिक्षा विधेयक, वर्तमान और कुलपति/निदेशकों, वैधानिक निकायों, शिक्षाविदों विश्वविद्यालय के प्राचार्यों सहित लगभग सौ विशेषज्ञ राष्ट्रीय विमर्श में भाग लेंगे। राष्ट्रीय विमर्श से प्राप्त होने वाले विचारों का इस्तेमाल प्रत्ययन के लिए संशोधित रूपरेखा को तय करने में किया जाएगा, जिसे जुलाई 2017 में लांच किया जाना है।

24 मिलियन मीट्रिक टन दलहन उत्‍पादन के लिए रोडमेप

           केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने राष्‍ट्रीय कृषि सम्‍मेलन खरीफ अभियान-2017 में कहा, वर्ष 2022 तक किसानों की आय को दुगुना करने के लिए भारत सरकार की प्रतिबद्धता है। इस संबंध में केंद्र सरकार द्वारा की गई पहलों का उल्‍लेख किया।

             सिंह ने बताया कि वर्ष 2021 तक दालों के उत्‍पादन को 24 मिलियन मीट्रिक टन तक बढ़ाने के लिए एक रोडमेप तैयार किया  गया है। सिंह ने राज्‍यों की इस बात के लिए प्रशंसा की कि उन्‍होंने सभी किसानों को मृदा स्‍वास्‍थ्‍य कार्ड देने संबंधी लक्ष्‍य को प्राप्‍त कर लिया है तथा  अन्‍य संबंधितों को भी अगले 2-3 महीनों में पहले चरण को पूरा करने को प्रोत्‍साहित किया। उन्‍होंने यह भी उल्‍लेख किया कि मृदा स्‍वास्‍थ्‍य कार्ड स्‍कीम का दूसरा चरण 2017 में शुरू होगा। उन्‍होंने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की बढ़ती हुई लोकप्रियता का भी जिक्र किया और यह भी आशा की कि राज्‍य इस स्‍कीम के तहत और अधिक कवरेज बढ़ाएंगे। 

            केंद्रीय कृषि मंत्री ने राज्‍यों को विशेषरूप से वर्षा सिंचित और पर्वतीय क्षेत्रों में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए पंरपरागत कृषि योजना को मिशन मोड में कार्यान्‍वित करने के लिए प्रोत्‍साहित किया। सिंह ने कृषि क्षेत्र में विपणन सुधार शुरू किए जाने की जरूरत पर बल दिया ताकि किसानों को बेहतर मूल्‍य प्राप्‍त हो सकें।
      

            केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्‍याण राज्‍यमंत्री परषोत्‍तम रूपाला ने अपने संबोधन में विभाग की अग्रणी योजनाओं के तहत प्राप्‍त की गई उपलब्‍धियों का उल्‍लेख किया और विशेषकर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के बारे में जिक्र किया जिसे खरीफ 2016 से शुरू किया गया था। इस नई स्‍कीम के तहत बुआई पूर्व से लेकर फसल कटाई के पश्‍चात होने वाली हानियों तक का व्‍यापक जोखिम कवरेज मुहैया कराया गया है। रूपाला ने स्‍कीम के कार्यान्‍वयन में प्रौद्योगिकी अपनाने और साथ ही वर्ष 2017-18 एवं 2019-20 के दौरान कुल फसलगत क्षेत्र/किसानों के क्रमश: 40 प्रतिशत और 50 प्रतिशत की बीमा सुरक्षा के लक्ष्‍य प्राप्‍त करने को प्रोत्‍साहित किया। 

           इस अवसर पर केंद्रीय कृषि राज्‍य मंत्री सुदर्शन भगत ने बताया कि हमारे किसानों के जीवन में भौतिक सुधार लाने के लिए केंद्र सरकार की सभी अग्रणी योजनाओं को उच्‍च प्राथमिकता देना पूर्णत: अनिवार्य है। केंद्रीय कृषि सचिव, शोभना के. पट्नायक ने अपने संबोधन में वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने के लिए बहुआयामी रणनीति की आवश्‍यकता के बारे में उल्‍लेख किया। 

          उन्‍होंने उत्‍पादन लागत को कम करने, उत्‍पादकता में उपज अंतराल को कम करने और हमारे किसानों के लिए बेहतर मूल्‍य सुनिश्‍चित करने हेतु प्रयास करने पर विशेष बल दिया। उन्‍होंने इस संबंध में प्रौद्योगिकी को अपनाने की आवश्‍यकता पर विशेष बल दिया।

2017-18 का खाद्यान्न उत्पादन लक्ष्य 273 मिलियन टन

            केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा है कि केन्द्र सरकार किसानों के कल्याण के लिए कृषि में सबसे अधिक राशि का आवंटन कर कृषि क्षेत्र को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।

         केन्द्र सरकार का लक्ष्य है कि फसल उत्पादकता में और वृद्धि हो, किसान की उपज का उचित निर्धारण हो तथा डेरी/पशुपालन/मत्स्य पालन विकास आदि पर जोर देते हुए कृषि शिक्षा, अनुसंधान और विस्ता्र प्रणाली को ज्या‍दा से ज्यादा बढावा दिया जाए। सिंह ने  यह बात नई दिल्ली में आयोजित खरीफ अभियान 2017 से संबंधित दो दिवसीय राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन में कही। इस मौके पर मंत्री परषोत्तम रूपाला, सुदर्शन भगत और कृषि मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। सिंह ने इस मौके पर कहा कि वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लक्ष्य को हासिल करने के लिए कृषि मंत्रालय की तरफ से सभी राज्य सरकारों को पत्र लिखा गया है कि वे इस दिशा में एक सार्थक कार्यनीति पर कार्य करें। कार्यनीति बनाते समय उन्हें कृषि उत्पादन से लेकर इन उत्पादों से तैयार किए जाने वाले प्रसंस्कृत उत्पादों तक के कार्यकलापों पर पैनी नजर रखनी होगी।

              केन्द्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले किसानों के लिए केन्द्र सरकार ने कई योजनाएं और कार्यक्रम शुरू किए हैं। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, मृदा स्वास्थ्य योजना, परम्परागत कृषि विकास योजना, ई-राष्ट्रीय कृषि बाजार स्कीमें, राष्ट्रीय कृषि वानिकी (मेड़ पर पेड़), नीम लेपित यूरिया कुछ ऐसे ही विशेष कार्यक्रम हैं। दुग्ध उत्पादन एवं उत्पादकता बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय गोकुल मिशन की शुरूआत की गयी है। नीली क्रांति के तहत अन्तर्देशीय एवं डीप सी फिशिंग पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। इन कार्यक्रमों के जरिए कृषि उत्पादकता और किसानों की आमदनी में सुधार लाना है। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को पाने के लिए सबको पूरे समर्पण और ईमानदारी के साथ काम करना होगा।

               सिंह ने कहा कि यह खुशी की बात है कि इस वर्ष कृषि और उससे संबंधित क्षेत्रों की लक्षित वार्षिक वृद्धि दर लगभग 4 प्रतिशत रही है। कृषक समुदाय को हर संभव फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की विभिन्न स्कीमों को विशेष मिशनों, स्कीमों और कार्यक्रमों में बदल दिया गया है। सभी हितधारकों के संयुक्त  प्रयासों के फलस्वरूप 2016-17 के दौरान द्वितीय अग्रिम अनुमान के अनुसार देश में कुल खाद्यान्न का उत्पादन लगभग 271.98 मीलियन टन अनुमानित है जो वर्ष 2015-16 की तुलना में 8.11ऽ अधिक है। उन्होंने यह भी कहा कि खाद्यान्न  का यह उत्पादन पिछले 5 वर्षों के औसत उत्पादन से भी 5.82ऽ अधिक है। वर्ष 2013-14 में खाद्यान्नों का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ था। इस वर्ष का खाद्यान्न उत्पादन वर्ष 2013-14 के खाद्यान्न उत्पा्दन से 2.61ऽ अधिक है।

                  सिंह ने कहा कि कृषि सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा विभिन्न फसलों के उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने के लिए चलाई गई विभिन्न योजनाओं- राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (एनएफएसएम), राष्ट्रीय बागवानी मिशन (एनएचएम), राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई), राष्ट्रीय कृषि विस्ता्र एव प्रौद्योगिकी और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण योजना (डीबीटी) आदि का फायदा किसानों को मिलने लगा है। केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि कृषि मंत्रालय की एक प्रमुख योजना- राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (एनएफएसएम) में चावल, गेहूं, दलहन, मोटे अनाज और कई तरह की व्यापारिक फसलें शामिल हैं। वर्तमान सरकार के अस्तित्व में आने के पूर्व इस योजना का कार्यान्वयन 19 राज्यों के 482 जिलों में हो रहा था। एनडीए सरकार के आने के बाद वर्ष 2015-16 से एनएफएसएम का क्रियान्वयन 29 राज्यों के 638 जिलों में कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त  लगभग  2.70 लाख हैक्टेयर क्षेत्र में जैविक बागवानी हो रही है।

               राष्ट्रीय कृषि विकास योजना या आरकेवीवाई का लक्ष्य कृषि और समवर्गी क्षेत्रों का समग्र विकास सुनिश्चित करते हुए 12वीं योजना अवधि के दौरान वार्षिक विकास प्राप्त करना है तथा उसे बनाए रखना है। राधा मोहन सिंह ने बताया कि कृषि मंत्रालय तिलहनी फसलों के उत्पादन और उत्पादकता पर अधिक जोर दे रहा है। उन्होंने कहा कि फलों, सब्जियों और बागवानी फसलों पर भी सरकार समान रूप से जोर दे रही है। सरकार बीजों की गुणवत्ता और उपलब्धता दोनों पर पूरा ध्यान दे रही है। इसके अलावा बीज मिशन भी शुरू किया गया है जिसके अंतर्गत बीज प्रसंस्करण, बीज भण्डारण, बीजों की गुणवत्ता में सुधार, आपात स्थिति से निपटने के लिए बीजों का भण्डारण आदि कार्यों के लिए अनुदान प्रदान किया जा रहा है।

             सिंह ने कहा कि सरकार मुख्य कृषि जिंसों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा कर किसानों के हितों की रक्षा कर रही है। हमारी मूल्‍य  नीति में अर्थव्‍यवस्‍था की समग्र आवश्‍यकताओं के परिप्रेक्ष्‍य में संतुलित और एकीकृत मूल्‍य संरचना तैयार करने की व्‍यवस्‍था है। केंद्रीय नोडल एजेंसियां आदि इस उद्देश्‍य से खरीद कार्य शुरू करने के लिए मंडी में हस्‍तक्षेप करती है कि बाजार मूल्‍य सरकार द्वारा निर्धारित एमएसपी से नीचे न गिरे। यदि किसी कृषि जिंस जिसका समर्थन मूल्य घोषित नहीं हो यदि बाजार कारणों से जिंस का मूल्‍य ह्रास हो जाता है तो केंद्र सरकार बाजार हस्‍तक्षेप योजना (ग्क्ष्च्) के माध्‍यम से किसानों को लाभदायक मूल्‍य सुनिश्‍चित करती है। 

           वर्ष 2014-15 से वर्ष 2016-17 तक भारत सरकार द्वारा उत्‍तर प्रदेश, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना, तमिलनाडु, अरूणाचल प्रदेश, हिमाचल  प्रदेश, मिजोरम, नागालैण्‍ड राज्‍यों में मिर्च, सेब, अदरख, आलू, ऑयल पाम, अंगूर, प्‍याज, सुपारी इत्‍यादि की खरीद अभी तक किसान हित में की गई है। इसके अतिरिक्ति कृषि जिंसों के मूल्य में अत्यधिक तेजी या कमी होने के कारण न केवल उपभोक्ताओं को बल्कि किसानों को भी अत्यधिक नुकसान होता है। सरकार ने इस स्थिति से निपटने के लिए 500 करोड़ रूपये की राशि से मूल्य स्थिरीकरण फंड की शुरूआत की थी, जो अब बढ़कर 1500 करोड़ रूपये हो गया है। दालों के बढ़ते मूल्य को नियंत्रित करने के लिए 40,000 मिट्रिक टन दाल विभिन्न राज्यों  को उनके अनुरोध पर उपलब्ध कराई गई है एवं 20 लाख मिट्रिक टन दाल की खरीद बफर स्टॉक के रूप में की जा रही है। साथ ही, 20,000 मिट्रिक टन प्याज की खरीद बफर स्टॉटक के रूप में की जा चुकी है। 

            अब जल्द ही खरीफ मौसम आने वाला है। अत: यह आवश्यक है कि राज्य सरकारें समय रहते फसलों की वांछित किस्मों  के गुणवत्ताप्रद बीजों की पर्याप्त मात्रा में खरीद करने और किसानों के लिए उर्वरक की पर्याप्त  मात्रा का स्टाक करने के लिए योजना बनाएं। राज्य सरकार द्वारा यह भी सुनिश्चित किया जाए कि बुवाई मौसम के दौरान इनपुट  की कोई कमी न हो। किसानों को फसल बीमा का लाभ प्रदान करने के लिए पूर्व की बीमा योजनाओं की कमियों को दूर करते हुए सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना खरीफ, 2016 सीजन से शुरू की है। इसके तहत फसल की बुवाई के पूर्व से लेकर कटाई उपरांत तक हुए नुकसानों के लिए व्यापक बीमा सुरक्षा प्रदान की गई है। 

           सरकार ने  मिट्टी के स्वास्थ्य स्वॉयल हेल्थ कार्ड स्कीम की शुरूआत की है। जैविक खेती और सतत् कृषि को बढ़ावा देने के लिए परम्परागत कृषि विकास योजना नामक नई योजना प्रारम्भ की गई। किसानों की आय में वृद्धि के मद्देनजर सरकार द्वारा कृषि वानिकी एवं मधुमक्खीय पालन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आखिर में राधा मोहन सिंह ने सभी राज्य सरकारों से आग्रह किया कि वे निधियों के सुचारू और समय पर प्रवाह के लिए विशेष प्रयास करें ताकि समय पर प्रस्तावित कार्यों को शुरू करने के लिए बहुत पहले ही किसानों को निधियां मिल जाए। 

           सिंह ने  राज्य सरकारों से यह अनुरोध भी किया कि वे अपनी कार्य प्रणाली में पारदर्शिता लाएं।इस सम्मेलन में पिछले वर्ष के फसलों के उत्पादन, आगामी खरीफ की फसल के उत्पादन को बढ़ाने, विभिन्न राज्य सरकारों को परामर्श से फसलवार उत्पादन के लक्ष्यों का निर्धारण करने, बुआई शुरू होने से पहले आवश्यक इनपुट की उपलब्धता सुनिश्चित करने और कृषि क्षेत्र में नई प्रौद्योगिकियों तथा नवाचारों के उपयोग एवं कार्यान्वयन पर चर्चा होगी।

भारतीय युद्धपोतों की फ्रांस टाऊलॉन यात्रा

            भूमध्य सागर और अफ्रीका के पश्चिमी तट पर भारतीय नौसेना की विदेशी तैनाती के क्रम में, आईएनएस मुंबई, त्रिशूल और आदित्य नामक तीन भारतीय युद्धपोत आज तीन दिवसीय यात्रा के लिए टाऊलॉन पहुंचे। 

          टाऊलॉन नौसेना बेस पर टाऊलॉन प्रशासन और फ्रांस नौसेना ने भारतीय दूतावास के साथ समन्वय स्थापित कर, तीनों युद्धपोतों को गर्मजोशी से प्राप्त किया। यह जहाज़ भारतीय नौसेना की पश्चिमी कमांड का एक हिस्सा है और इस पर तैनात टास्क समूह का नेतृत्व पश्चिमी फ्लीट के फ्लैग कमांडिंग ऑफिसर रियर एडमिरल आर.बी. पंडित कर रहे हैं। वह फ्लैग को आईएनएस मुंबई पर स्थित विध्वंसक मिसाइल पर अपने झंडे को फहरा रहे हैं। टाऊलॉन की इस यात्रा के समापन के बाद भारत और फ्रांस की नौसेना के बीच 24 से 30 अप्रैल 2017 के बीच वरुण नामक द्विपक्षीय अभ्यास तय किया गया है। 

                 अभ्यास की वरुण श्रंखला, वर्ष 2000 में प्रारंभ हुई थी, और दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच एक संस्थागत रूप में विकसित हो चुकी है। अंतिम वरुण अभ्यास भारतीय तट पर आयोजित किया गया था। फ्रांस के लिए पश्चिमी नौसेना कमांड के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ वाइस एडमिरल गिरिश लूथरा की यात्रा संयोगवश तरीके से उसी समय हो रही है, जब फ्रांस में भारतीय युद्धपोत तीन दिवसीय यात्रा पर हैं और वरुण अभ्यास का समय भी तय किया जा चुका है। 

            उनकी यह यात्रा फ्रांस की नौसेना के साथ भारतीय नौसेना के मज़बूत संबंधों को प्रदर्शित करता है। पश्चिमी नौसेना कमांड के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ वाइस एडमिरल गिरिश लूथरा फ्रांस न्यूक्लियर पनडुब्बी इकाई फ्रांसीसी फ्रिगेट एफएनएस औवरन के साथ-साथ जल के भीतर प्रयोग में लाए जाने वाले हथियारों संबंधी विभिन्न सुविधाओं का दौरा करेंगे। भारत और फ्रांस के बीच पारंपरिक रूप से मज़बूत संबंध रहे हैं।

            पिछले कुछ सालों के दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग व्यापक स्तर पर तेज़ी से बढ़ा है और भारतीय नौसेना एवं फ्रांस की नौसेना के बीच बातचीत दोनों देशों के बीच संबंधों को मज़बूत करने में मील का पत्थर साबित हुई है।

तंजानिया के संघ दिवस पर राष्ट्रपति का संदेश

            राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने संयुक्‍त तंजानिया गणराज्‍य के संघ दिवस की पूर्व संध्या पर वहां की सरकार और नागरिकों को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। 

            संयुक्‍त तंजानिया गणराज्‍य के राष्ट्रपति डॉ. जॉन पोम्ब मागूफुली को भेजे अपने संदेश में राष्ट्रपति ने कहा, "तंजानिया के संघ दिवस के अवसर पर महामहिम और वहां के मैत्रीपूर्ण लोगों को भारत सरकार, यहां की जनता तथा मेरी ओर बधाई तथा शुभकामनाएं देते हुये मुझे अत्‍यन्‍त प्रसन्‍नता हो रही है। भारत और तंजानिया के बीच लम्‍बे समय से गर्मजोशी भरे और मैत्री संबंध रहे हैं। हमारे लोगों के आपसी लाभ के लिए दोनों देशों के बीच बहुआयामी सहयोग लगातार बढ़ रहा है। आगामी वर्षों में हम प्रगति कर रहे तंजानिया के साथ इन संबंधों को और सुदृढ़ करना चाहते हैं।

 महामहिम मैं तंजानिया के मैत्रीपूर्ण लोगों की प्रगति और समृद्धि के लिए आपके अच्छे स्वास्थ्य की कामना करता हूं।"

99 प्रतिशत शिकायतों का ट्विटर पर समाधान

               दूरसंचार मंत्री मनोज सिन्‍हा द्वारा शिकायतों के पंजीकरण और समाधान के लिए पिछले वर्ष शुरू की गई ट्विटर सेवा के बाद लगभग 99 प्रतिशत शिकायतों का सोशल मीडिया के माध्‍यम से समाधान किया गया है। 

            बीएसएनएल द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार 15 अप्रैल, 2017 तक कुल 27,988 शिकायतें प्राप्‍त हुई हैं, जिनमें से 27,965 शिकायतों का समाधान कर दिया गया है। इस प्रकार समाधान दर 99.91 प्रतिशत दर्ज की गई है। दूरसंचार मंत्री का ट्विटर अकाउंट प्‍लेटफार्म द्वारा दूरसंचार और डाक से संबंधित शिकायतों के समाधान के बारे में दैनिक स्थिति रिपोर्ट मंगा रहा है। इसी प्रकार भारतीय डाक ने 27,000 ट्वीट्स का रखरखाव किया और उनका तुरंत हल किया गया है। 

           दूरसंचार के मामले में उपभोक्‍ताओं की शिकायतें मुख्य रूप से टेलीफोन बिल, ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी, दोषपूर्ण कनेक्शन, लैंडलाइन फोन और वाई-फाई हॉटस्पॉट्स के स्थानांतरण से संबंधित हैं, जबकि डाक सेवाओं के मामले में शिकायतें मुख्य रूप से पैन कार्ड, रोल नंबर, पार्सल, मनी ऑर्डर और दवाइयों की डिलीवरी में होने वाली देरी होने से संबंधित हैं। डाकघरों के भवनों की मरम्मत, बचत बैंक खातों के तकनीकी मुद्दों से सं‍बंधित समस्याओं का भी तुरंत हल किया गया है।