Monday, 19 February 2018

22,000 ग्रामीण हाट एवं 585 मण्‍ड़ियों की आधारभूत संरचना का विकास

   नई दिल्ली। केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधामोहन सिंह ने कहा है कि सरकार अन्न एवं कृषि उत्पादों के भण्डारो के साथ किसान की जेब को भरा व् उनकी आय को बढ़ा देखना चाहती है।

  सरकार इस दिशा में तेजी से कदम उठा रही है। केंद्रीय कृषि मंत्री ने यह बात आज नई दिल्ली में ‘कृषि 2022 - डबलिंग फार्मर्स इनकम’ पर आयोजित की जारी रही दो दिवसीय कार्यशाला (19-20 फरवरी 2018) के उद्घाटन समारोह में कही।
    इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार, कृषि राज्य मंत्री परषोतम रुपाला, गजेन्द्र सिंह शेखावत, श्रीमती कृष्णा राज, कृषि सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव एस के पटनायक उपस्थित थे। 
  इनके अलावा केंद्र एवं राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारीगण, वैज्ञानिक, अर्थशास्त्री, व्यापार उद्योग के प्रतिनिधि, पेशवरों के संगठन, कॉर्पोरेट एवं निजी क्षेत्र कम्पनियो के प्रतिनिधि, किसान और किसान समितियों के प्रतिनिधि, शिक्षाविद और बैंकर्स ने भी इस कार्यशाला में हिस्सा लिया। केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा सरकार किसानों की आय बढ़ाने के हर संभव प्रयास कर रही है।
    यही वजह है कि वर्ष 2018-19 के लिए कृषि एवं किसान कल्याण के बजटीय आवंटन को पिछले वर्ष यानि 2017-18 के 51,576 करोड़ से बढा कर 2018-19 में 58,080 करोड़ करते हुए, सरकार ने किसानों की आय दोगुना करने के लिए निर्धारित ‘सात सूत्रीय’ रणनीति के प्रत्येक सूत्र के लिए प्रचुर धन राशि की उपलब्धता सुनिश्चित की है। यह बजट किसानों को उनकी उपज का सही दाम दिलवाने के उद्देश्‍य से कृषि मंडियों के लिए नए सुधारों की शुरूआत करता है।
     इस बजट में 2000 करोड़ रुपये की घोषणा की गई है जो कि कृषि विपणन में खुदरा बाजार के महत्व को दर्शाता है। इसके माध्‍यम से 22,000 ग्रामीण हाट एवं 585 मण्‍ड़ियों की आधारभूत संरचना का विकास हो सकेगा।
     श्री सिंह ने कहा कि प्रधानमत्री के वायदे के मुताबिक 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने की वृहद योजना को अमली जामा पहनाने का काम सरकार ने अप्रैल 2016 से ही एक समिति के गठन से शुरू कर दिया था, जिसमे वरिष्ठ अर्थशास्त्री, भारत सरकार के खाद्य प्रसंकरण, फसल, पशु पालन एवं डेरी तथा नीति प्रभागो के संयुक्त सचिव; नीति आयोग के कृषि सलाहकार एवं कई अन्य गैर सरकारी सदस्य को शामिल किया गया।
     सरकार चाहती है कि कृषि नीति एवं कार्यक्रमों को ‘उत्पादन केंद्रित’ के बजाय ‘आय केंद्रित’ बनाया जाए। इस महत्वाकांक्षी उद्देश्य की प्राप्ति के लिए सरकार द्वारा प्रधानमंत्री जी द्वारा सुझाए ‘बहु-आयामी सात सूत्रीय’ रणनीति को अपनाने पर बल दिया गया, जिसमे शामिल हैं, प्रति बूंद अधिक फसल के सिद्धांत पर पर्याप्त संसाधनों के साथ सिंचाई पर विशेष बल। प्रत्येक खेत की मिटटी गुणवत्ता के अनुसार गुणवान बीज एवं पोषक तत्वों का प्रावधान। कटाई के बाद फसल नुक्सान को रोकने के लिए गोदामों और कोल्डचेन में बड़ा निवेश। खाद्य प्रसंस्करण के माध्यम से मूल्य संवर्धन को प्रोत्साहन।
     राष्ट्रीय कृषि बाज़ार का क्रियान्वन एवं सभी 585 केन्द्रों पर कमियों को दूर करते हुए ई – प्लेटफार्म की शुरुआत। जोखिम को कम करने के लिए कम कीमत पर फसल बीमा योजना की शुरुआत। डेयरी-पशुपालन, मुर्गी-पालन, मधुमक्खी –पालन, मेढ़ पर पेड़, बागवानी व मछली पालन जैसी सहायक गतिविधियों को बढ़ावा देना।
   केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि भारत जैसे विशाल और आर्थिक विषमताओं वाले देश में दूर-दराज के दुर्गम इलाकों तक और समाज के सबसे कमजोर वर्ग तक अनाज की भौतिक और आर्थिक पहुँच सुनिश्चित करना एक कठिन चुनौती साबित हो रही थी। परन्तु 2014-15 के दौरान सरकार की अनुकूलनीतियों, कारगर योजनाओं और प्रभावी क्रियान्वयन ने इस कार्य को बखूबी अंजाम दिया।
     प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में ‘क्लाइमेट स्मार्ट एग्रीकल्चर’ विकसित करने की ठोस पहल की गई है। इसके लिये राष्ट्रीय-स्तर की परियोजना लागू की गई है, जिसके अंतर्गत किसानों को जलवायु अनुकूल कृषि तकनीकें अपनाने के लिये जागरूक एवं सक्षम बनाया जा रहा है।

मानव संसाधन को लाभ में परिवर्तित करना एक बड़ी चुनौती

   मुंबई। उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने कहा है कि शिक्षा का इस्‍तेमाल छात्रों में सशक्‍त चरित्र निर्माण और नैतिक मूल्‍यों के समावेश के लिए होना चाहिए।

   श्री नायडू मुंबई में आर ए पोद्दार कॉलेज ऑफ कॉमर्स एंड इकोनॉमिक्स के हीरक जंयती समारोह के उद्घाटन के बाद एक सभा को संबोधित कर रहे थे। महाराष्‍ट्र के आवास मंत्री प्रकाश मेहता और गणमान्‍य व्‍यक्ति इस अवसर पर उपस्थित थे।
    उपराष्ट्रपति ने इस मौके पर अभिभावकों, शिक्षकों, स्कूलों और कॉलेजों से छात्रों के लिए तनावमुक्‍त वातावरण सुनिश्चित करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि कई बार माता-पिता उन संकेतों या मानसिक तनाव के लक्षणों को समझने में विफल होते हैं, जिससे उनके बच्‍चे जूझ रहे होते हैं।
   श्री नायडू ने कहा कि‍ यह महत्वपूर्ण विषय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मन से करीब से जुड़ा रहा और इसी वजह से उन्‍होंने परीक्षाओं के कारण होने वाले तनाव से मुक्‍त होने के उपायों पर 'परीक्षा वारियर्स' नाम से एक पुस्‍तक भी लिखी है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि देश के विशाल मानव संसाधन को लाभ में परिवर्तित करना एक बड़ी चुनौती है।
    उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में दुनिया की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में से एक के रूप में भारत के विकास की गति को तेज करने के लिए हमें विशाल मानव संसाधन को लाभ के रूप में इस्‍तेमाल करना होगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा के जारिए लोगों के व्‍यक्तित्‍व का ऐसा समग्र विकास होना चाहिए जिससे वह अपने करियर के चुनाव तथा आगे अपने जीवन के हर पड़ाव पर जरुरी जानकारियां जुटाने में सक्षम हों सकें।
   उपराष्ट्रपति ने कहा कि‍ शिक्षा का इस्‍तेमाल युवाओं को सशक्‍त और बौद्धिक रूप से सजग बनाने, उनमें विश्‍लेषण कौशल वि‍कसित करने तथा नयी संभावनाएं तलाशने में सक्षम बनाने के लिए होना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि गुणवत्‍ता और समावेशी शिक्षा प्रदान किए बिना सिर्फ अधिक से अधिक इमारतें बनाने भर से ‘न्‍यू इंडिया’ का निर्माण संभव नहीं होगा। 
    उपराष्‍ट्रपति‍ ने कहा कि शिक्षा सिर्फ सुलभ ही नहीं बल्कि सस्‍ती भी होनी चाहिए और साथ ही लोगों को रोजगार उपलब्‍ध कराने के साथ ही बौद्धिक रूप से जागरुक बनाने का माध्‍यम भी बननी चाहिए।